रांची: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आजसू पार्टी ने भाजपा द्वारा आहूत झारखंड बंद का समर्थन किया है. बंद के दौरान आजसू सुप्रीमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठेंगे. पार्टी ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताने का निर्णय लिया है.
आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि छात्रों की आवाज को लाठी के बल पर दबाने की कोशिश लोकतंत्र का अपमान है. उन्होंने कहा कि राज्य के युवा लंबे समय से रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए.
सुदेश महतो ने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब लाठी, आंसू गैस और वाटर कैनन से नहीं दिया जा सकता. सरकार को आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत करनी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
आजसू पार्टी ने विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं है.
पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये और यदि पुलिस कार्रवाई में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये.
आजसू ने सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ तत्काल सकारात्मक और सम्मानजनक बातचीत शुरू करने की भी मांग की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि JPSC और JSSC से जुड़े विवाद ने राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है. ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में पहल करनी चाहिए.
सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी है. बापू वाटिका में धरने के माध्यम से पार्टी सरकार तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सदन में बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला. JPSC-JSSC विवाद को लेकर भाजपा विधायक विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने के बजाय मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंच गये. इसके चलते विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष का एक भी विधायक मौजूद नहीं रहा. सोमवार सुबह मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही छात्रों के विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं. भाजपा विधायक पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आवास पर जुटे. इसके बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल गये. मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान भाजपा नेता हिरासत में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने छात्रों के मुद्दे और JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया. इसके बाद कई भाजपा विधायकों और नेताओं को हिरासत में लेकर खेलगांव ले जाया गया. विधायकों के हिरासत में लिये जाने के कारण विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष की मौजूदगी नहीं रही. सदन में प्रश्नकाल से लेकर अनुपूरक बजट पर चर्चा तक केवल सत्ता पक्ष के विधायक ही नजर आये. राज्य गठन के बाद पहली बार विपक्षी विधायक सदन से रहे बाहर बताया गया कि राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है, जब विपक्षी विधायक हिरासत में लिये जाने के कारण सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके. हालांकि, इससे पहले भी विपक्ष के वॉकआउट के कारण विधानसभा की कार्यवाही बिना विपक्ष के चल चुकी है. इस बार स्थिति अलग रही, क्योंकि भाजपा विधायकों ने पहले मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम किया और प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया. स्पीकर ने जतायी नाराजगी विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपरा के लिहाज से उचित नहीं है. उनका कहना था कि विधायकों को सदन में रहकर सवाल उठाने चाहिए और सरकार से जवाब मांगना चाहिए. स्पीकर ने कहा कि सवाल पूछकर सदन में मौजूद नहीं रहना संसदीय व्यवस्था के लिए अच्छी परंपरा नहीं है. अरूप चटर्जी ने सदन में उठाया छात्रों का मुद्दा इधर, सदन में छात्रों के विधानसभा घेराव का मुद्दा भी उठा. विधायक अरूप चटर्जी ने JPSC-JSSC विवाद और छात्रों के आंदोलन का मामला सदन में रखा. उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को लेकर काफी हद तक कदम उठाये हैं, लेकिन JSSC CGL परीक्षा को लेकर कोर्ट का हवाला दिया जा रहा है. उन्होंने मांग की कि सरकार कोर्ट के माध्यम से मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराये. अरूप चटर्जी ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, हालांकि आंदोलन के बीच कुछ उपद्रवी तत्वों के शामिल होने की बात भी सामने आयी है. सदन के बाहर छात्र आंदोलन, अंदर सियासी टकराव एक तरफ रांची की सड़कों पर JPSC-JSSC अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा विधायकों ने भी मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की. भाजपा नेताओं की गैरमौजूदगी के बीच विधानसभा की कार्यवाही सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ चलती रही. इस पूरे घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में टकराव और बढ़ा दिया है.
रांची: JSSC CGL परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जांच के दौरान TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के बयान से नया मोड़ आ गया है. अभय तिवारी ने CID को दिए बयान में दावा किया है कि उसे परीक्षा से पहले ही JSSC CGL के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे. हालांकि, CID ने अभय तिवारी के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. अभय तिवारी के बयान के मुताबिक, कथित तौर पर पहले से प्रश्न-उत्तर उपलब्ध होने की वजह से उसका और कुछ अन्य अभ्यर्थियों का चयन हुआ. इस बयान के बाद जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, लोगों और अभ्यर्थियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है. परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर मिलने का दावा CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था. उसके अनुसार, कंपनी ने कम दर पर परीक्षा संचालन करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद TDPL को काम से हटा दिया गया और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल नामक एजेंसी को दी गयी. अभय ने आरोप लगाया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों के माध्यम से उसे JSSC CGL परीक्षा के प्रश्न और उत्तर पहले ही उपलब्ध कराये गये थे. 15 अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाने का आरोप अभय तिवारी ने अपने बयान में दावा किया कि वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने बोकारो स्थित एक आवास में करीब 15 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर तैयार कराये थे. उसने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को करीब 65 प्रश्नों के प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराये गये और इसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपये लिये गये. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और CID पूरे मामले में साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है. अपने, भाई और पत्नी के चयन का भी किया जिक्र अभय तिवारी ने कथित तौर पर CID को बताया कि इसी व्यवस्था के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ. जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी की नियुक्ति प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में हुई थी. वहीं उसके भाई और पत्नी के सरकारी विभागों में कार्यरत होने की बात सामने आयी है. CID अब इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह भी गिरफ्तार इसी मामले में TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह के खिलाफ भी CID ने कार्रवाई की है. उसे छह अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि TDPL में कर्मचारी रहते हुए उसने कथित तौर पर JPSC PT परीक्षा दी और उसमें सफल हुआ. CID ने रक्षक सिंह को रिमांड पर लेकर पूछताछ की. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. CID बोली- केवल बयान से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता अभय तिवारी के बयान के बाद जांच में कई नए सवाल सामने आये हैं, लेकिन CID ने फिलहाल उसके आरोपों को प्रमाणित नहीं माना है. जांच एजेंसी का कहना है कि सिर्फ किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. सभी आरोपों और दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है. अब जांच एजेंसी की नजर परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों, उनके कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और कथित वित्तीय लेन-देन पर है. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो JSSC CGL परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर मामला और गंभीर हो सकता है.
पलामू: मेदिनीनगर के छह मुहान चौक से सुदना गायत्री मंदिर रोड होते हुए बैरिया चौक तक जाने वाली करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क की बदहाली को लेकर पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने कड़ा रुख अपनाया है. सड़क की जर्जर स्थिति और लगातार हो रहे जलजमाव को देखते हुए सांसद ने झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है. सांसद ने सड़क के पुनर्निर्माण के साथ दोनों ओर पक्की नाली बनाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से सड़क की स्थिति खराब है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है. गहरे गड्ढों में तब्दील हुई सड़क मेदिनीनगर-बैरिया मार्ग पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बन गये हैं. बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की स्थिति और खतरनाक हो गयी है. वाहन चालकों को पानी के नीचे मौजूद गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं हो पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण पैदल चलने वाले लोगों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जल निकासी की व्यवस्था नहीं, घरों में घुस रहा बारिश का पानी सड़क के आसपास जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहता है. इसके बाद यही पानी आसपास के रिहायशी इलाकों और कई घरों में प्रवेश कर जाता है. जलजमाव के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गयी है और निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी रहती है. सांसद ने अपने पत्र में इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सड़क के साथ पक्की नाली निर्माण की जरूरत बतायी है. सड़क के गड्ढों में ग्रामीणों ने रोपी धान सड़क की बदहाली के खिलाफ बैरिया चौक के पास ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया. सड़क पर बने बड़े गड्ढों और जमा पानी के बीच ग्रामीणों ने धान की रोपाई कर दी. ग्रामीणों का यह प्रदर्शन सड़क की स्थिति को लेकर उनके आक्रोश को दिखाता है. सांसद विष्णु दयाल राम ने भी इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क के बीच धान की रोपाई किया जाना बदहाली की गंभीर स्थिति का प्रतीक है. हजारों लोगों के आवागमन का प्रमुख मार्ग मेदिनीनगर से बैरिया चौक तक जाने वाला यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क सड़क है. प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इस रास्ते से आवागमन करते हैं. ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो गयी है. सड़क पर कीचड़, जलजमाव और गड्ढों के कारण वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है. सांसद ने अधिकारियों से स्थल निरीक्षण की मांग की सांसद ने पथ निर्माण विभाग के सचिव से मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की टीम भेजकर सड़क का तत्काल स्थल निरीक्षण कराने का आग्रह किया है. उन्होंने करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क का पुनर्निर्माण या विशेष मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की. सांसद ने कहा कि सड़क की वर्तमान स्थिति को देखते हुए केवल अस्थायी मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी. जल निकासी की व्यवस्था के साथ सड़क का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि बारिश के दौरान दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो. फिलहाल स्थानीय लोगों की नजर अब पथ निर्माण विभाग की कार्रवाई पर है. यदि विभाग जल्द पहल करता है, तो जर्जर सड़क से परेशान हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है.