गढ़वा: रांची में विधानसभा घेराव के दौरान आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को बुलाये गये झारखंड बंद का असर गढ़वा में भी देखने को मिला. बंद के समर्थन में भाजपा नेता और कार्यकर्ता सुबह ही सड़कों पर उतर गये. कार्यकर्ताओं ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग की निंदा की. इस दौरान हेमंत सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच कराने की मांग उठायी गयी. सुबह आठ बजे रंका मोड़ पर जुटे भाजपा कार्यकर्ता मंगलवार सुबह करीब आठ बजे भाजपा जिलाध्यक्ष उदय कुशवाहा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शहर के प्रमुख रंका मोड़ स्थित घंटाघर के पास जुटे. यहां से कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में शहर के विभिन्न मार्गों पर निकले. भाजपा कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से बंद का समर्थन करने और दुकानों को बंद रखने की अपील की. इस दौरान कार्यकर्ता सरकार विरोधी नारे लगाते हुए छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते रहे. छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सरकार पर निशाना प्रदर्शन के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय चौबे ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी मांगों को सुनने के बजाय लाठीचार्ज करना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है. भाजपा नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्राओं पर हुए बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की. ‘धांधली के सबूत हैं तो CBI जांच से परहेज क्यों?’ भाजपा नेता विनय चौबे ने सरकार से सवाल किया कि यदि JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की जांच चल रही है और इसके संबंध में सबूत सामने आ रहे हैं, तो सरकार सीबीआई जांच कराने से पीछे क्यों हट रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं से राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है. भाजपा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. दर्जनों कार्यकर्ता रहे मौजूद विरोध प्रदर्शन और जुलूस में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए. इनमें वरिष्ठ भाजपा नेता विनय चौबे, उमेश कश्यप, विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी, रितेश चौबे समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे. भाजपा नेताओं ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर पार्टी उनके साथ खड़ी है. नेताओं ने रांची में हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और JPSC-JSSC विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग दोहरायी. बंद को लेकर प्रशासन भी रहा अलर्ट गढ़वा में बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से भी निगरानी रखी गयी. शहर के प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गयी. फिलहाल प्रदर्शन के दौरान किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता इमरान हाशमी ने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन की प्रस्तावित बायोपिक में दिग्गज अभिनेता और कॉमेडियन महमूद का किरदार निभाने की खबरों को खारिज कर दिया है। पिछले कुछ समय से खबरें चल रही थीं कि इमरान हाशमी इस फिल्म में महमूद की भूमिका निभा सकते हैं। अब अभिनेता ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि न तो उन्हें इस फिल्म के लिए अप्रोच किया गया है और न ही वह इसका हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर इमरान ने साफ की तस्वीर इमरान हाशमी ने 10 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इन खबरों पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बायोपिक में महमूद साहब का किरदार निभाने को लेकर सामने आ रही रिपोर्टें सही नहीं हैं। अभिनेता ने कहा कि उन्हें इस फिल्म के लिए संपर्क तक नहीं किया गया है और वह फिल्म में काम नहीं कर रहे हैं। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद महमूद की भूमिका को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। आर.डी. बर्मन और महमूद की थी खास दोस्ती आर.डी. बर्मन और महमूद का रिश्ता हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास माना जाता है। महमूद ने आर.डी. बर्मन को फिल्म ‘छोटे नवाब’ में संगीतकार के तौर पर बड़ा मौका दिया था। इसके बाद दोनों ने कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया। महमूद और आर.डी. बर्मन की दोस्ती सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध भी काफी मजबूत थे। यही वजह है कि प्रस्तावित बायोपिक में महमूद के किरदार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फरहान अख्तर निभा सकते हैं पंचम दा का किरदार आर.डी. बर्मन की जिंदगी पर बनने वाली इस बायोपिक को लेकर रिपोर्टों में फरहान अख्तर का नाम मुख्य भूमिका के लिए सामने आया है। फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे कर सकते हैं और इसे एक्सेल एंटरटेनमेंट से जुड़े प्रोडक्शन के तहत बनाए जाने की खबर है। हालांकि फिल्म की पूरी स्टारकास्ट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। रिपोर्टों में अक्षय कुमार के भी फिल्म से जुड़ने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि वह अपने दिवंगत ससुर और अभिनेता राजेश खन्ना की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इस संबंध में भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ‘आवारापन 2’ को लेकर चर्चा में हैं इमरान वहीं इमरान हाशमी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘आवारापन 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में इमरान के साथ शबाना आजमी और दिशा पाटनी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगी। ऐसे में आर.डी. बर्मन की बायोपिक में उनके शामिल होने की खबरें सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई थी। लेकिन अब अभिनेता की सफाई के बाद यह साफ हो गया है कि वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं।
रांची: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारी छात्रों पर देर शाम पुलिस ने एक बार फिर लाठीचार्ज किया. अचानक हुई कार्रवाई के बाद मौके पर भगदड़ मच गयी. छात्र जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आये. इस दौरान प्रदर्शन को कवर कर रहे कुछ मीडियाकर्मियों पर भी पुलिस के बल प्रयोग की बात सामने आयी है. लाठीचार्ज के बाद मची भगदड़ पिछले कई घंटों से विधानसभा के बाहर अपनी मांगों को लेकर डटे छात्रों के बीच अचानक पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी. लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. छात्र और अन्य लोग मौके से भागने लगे. प्रदर्शन के दौरान ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगा रही एक छात्रा के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आयी. साथी छात्रों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया. छात्रों ने सरकार पर लगाया तानाशाही का आरोप पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी छात्रों में आक्रोश बढ़ गया. छात्रों ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि वे लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय बल प्रयोग किया जा रहा है. छात्र नेताओं ने कहा कि अब वे सरकार के किसी प्रतिनिधि या मंत्री से बातचीत नहीं करेंगे. उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं आंदोलन स्थल पर आकर छात्रों से बात करें. ‘अब सीधे मुख्यमंत्री से बात होगी’ लाठीचार्ज के बाद छात्रों ने स्पष्ट किया कि अब बातचीत मुख्यमंत्री स्तर पर ही होनी चाहिए. आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेना होगा और परीक्षा विवाद की निष्पक्ष जांच करानी होगी. छात्र नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य और निष्पक्ष नियुक्ति व्यवस्था के लिए है. CBI जांच और पारदर्शी परीक्षा की मांग आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना शामिल है. छात्र पूरे मामले की CBI जांच की मांग भी कर रहे हैं. छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. उनका कहना है कि अब यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युवाओं के अधिकार और भविष्य से जुड़ा बड़ा आंदोलन बनेगा.
रांची: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आजसू पार्टी ने भाजपा द्वारा आहूत झारखंड बंद का समर्थन किया है. बंद के दौरान आजसू सुप्रीमो और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो रांची के मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठेंगे. पार्टी ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताने का निर्णय लिया है. ‘लाठी के बल पर छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र का अपमान’ आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि छात्रों की आवाज को लाठी के बल पर दबाने की कोशिश लोकतंत्र का अपमान है. उन्होंने कहा कि राज्य के युवा लंबे समय से रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए. सुदेश महतो ने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब लाठी, आंसू गैस और वाटर कैनन से नहीं दिया जा सकता. सरकार को आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत करनी चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. छात्रों पर लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच की मांग आजसू पार्टी ने विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं है. पार्टी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करायी जाये और यदि पुलिस कार्रवाई में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये. ‘सरकार छात्रों से तत्काल शुरू करे संवाद’ आजसू ने सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ तत्काल सकारात्मक और सम्मानजनक बातचीत शुरू करने की भी मांग की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि JPSC और JSSC से जुड़े विवाद ने राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है. ऐसे में सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में पहल करनी चाहिए. सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी है. बापू वाटिका में धरने के माध्यम से पार्टी सरकार तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।