हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पूरे जिले में वांछित अपराधियों, वारंटियों और फरार आरोपियों के खिलाफ एक साथ छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने 39 अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। 30 विशेष टीमों का गठन अभियान को सफल बनाने के लिए जिले के सभी पुलिस उपाधीक्षक और पुलिस निरीक्षकों की निगरानी में कुल 30 विशेष टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों में थाना प्रभारियों के साथ रिजर्व गार्ड के अनुभवी पुलिसकर्मी और अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जिलेभर में कार्रवाई की। 104 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी पुलिस टीमों ने रातभर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चिन्हित 104 ठिकानों पर छापेमारी की। अचानक हुई इस कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मच गया। अभियान के दौरान कई लंबित वारंटों का भी निष्पादन किया गया और फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का सख्त संदेश हजारीबाग पुलिस अधीक्षक ने अभियान को सफल बताते हुए कहा कि जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा और जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। लोगों से सहयोग की अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराध की सूचना तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों का कहना है कि जनता के सहयोग से अपराध पर और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है। अपराधियों में बढ़ी बेचैनी लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई से जिले के अपराधियों में डर का माहौल है। पुलिस का मानना है कि ऐसे विशेष अभियानों से अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
हजारीबाग। हजारीबाग में मंगलवार 28 अप्रैल को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक शर्मनाक घटना घटी है। यहां मंत्री इरफान अंसारी के सामने ही उनके समर्थकों ने एक पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने पर उसकी पिटाई कर दी। हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ बदसलूकी और मारपीट की गई है। आरोप है कि यह हंगामा स्वास्थ्य मंत्री के समर्थकों द्वारा किया गया, जब पत्रकारों ने मंत्री से जनहित से जुड़ा एक सवाल पूछा। यह है पूरा मामला मंगलवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। वे सोमवार को पौता जंगल से बरामद हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शवों के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने आए थे। मंत्री ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन जैसे ही वह अस्पताल से बाहर निकलने लगे, पत्रकारों ने उनसे चतरा विमान हादसे के पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सवाल किया। सवाल पूछना पड़ा भारी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चतरा हादसे पर सवाल सुनते ही मंत्री के समर्थक उग्र हो गए। जवाब देने के बजाय समर्थकों ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। यह पूरी घटना कैमरों में कैद हो गई है, जिसमें समर्थकों का आक्रामक रवैया साफ नजर आ रहा है। इस मारपीट में न्यूज 18 के पत्रकार आशीष कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनके सिर में चोट लगी है। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। घटना के बाद बड़ी संख्या में हजारीबाग प्रेस क्लब और श्रमजीवी जर्नलिस्ट यूनियन से जुड़े पत्रकार वहां पहुंचे और घटना का विरोध किया। इधर, पत्रकार की बेरहमी से की गई पिटाई की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा और कायराना प्रहार बताया जा रहा है। भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र गिरी एवं रांची जिला अध्यक्ष जावेद अख्तर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर सत्ता के संरक्षण में पत्रकारों की आवाज दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे पूरे पत्रकार समाज में भारी रोष है। संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी गुर्गों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर से कठोर सजा दी जाए। साथ ही पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पत्रकार संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। पत्रकारों की आवाज दबाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से जोरदार विरोध किया जाएगा।
चाईबासा। चाईबासा के मंझारी थाना क्षेत्र के कासिया गांव में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी 65 वर्षीय भाभी पार्वती भूमिज की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। शुरुआत में मृतका की मौत को सामान्य माना जा रहा था, लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान गर्दन और गाल पर गहरे चोट के निशान दिखने से परिजनों को शक हुआ। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और संदेह के आधार पर मृतका के देवर दुलाई भूमिज को हिरासत में लिया। सख्त पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच जारी है। पहले भी कर चुका है पत्नी की हत्या पुलिस के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास काफी गंभीर रहा है। वर्ष 2011 में उसने अपनी पत्नी इंद्रावती भूमिज की हत्या मसाला पीसने वाले पत्थर से वार कर की थी। इस मामले में उसे 13 साल की उम्रकैद की सजा हुई थी। हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद वह गांव लौटा था और अब उसने इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के कारणों की जांच जारी फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी ने अपनी भाभी की हत्या क्यों की। गांव में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। हजारीबाग में सड़क हादसे में वायुसेना जवान की मौत वहीं हजारीबाग में एक सड़क हादसे में वायुसेना के जवान दीपक कुमार (34) की मौत हो गई। बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में उनकी मौके पर ही जान चली गई। वह छुट्टी पर घर आए थे और एक शादी में जा रहे थे।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुट गई है।पुलिस को 26 अप्रैल की रात करीब 8 बजे गुप्त सूचना मिली थी कि सोलिया गांव का निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम ने तत्परता दिखाते हुए सोलिया गांव में छापा मारकर आरोपी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर उसके घर से तुर्की निर्मित जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने खुलासा किया कि यह हथियार उसे एक आपराधिक गिरोह के सदस्य ने फायरिंग की घटना के बाद छिपाकर रखने के लिए दिया था। इस खुलासे के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। पतरातू थाना में दर्ज़ हुआ केस इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और पहले भी उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।छापेमारी दल में पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता सहित कई पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बोकारो। बोकारो में हुए ट्रेजरी घोटाले मामले में Criminal Investigation Department (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। यह घोटाला सरकारी फंड में गड़बड़ी और फर्जी निकासी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी कड़ी में CID ने एक होम गार्ड जवान को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां पिछले कुछ समय से ट्रेजरी से हो रहे संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखे हुए थीं। इसी दौरान उन्हें कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई। आरोप है कि सरकारी खजाने से फर्जी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के जरिए पैसे निकाले गए थे। CID खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां CID की टीम अब इस घोटाले के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच का फोकस यह जानने पर है कि पैसे की निकासी किस स्तर पर हुई और किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। डिजिटल लेन-देन और सिस्टम की भी जांच सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में डिजिटल ट्रांजैक्शन और ट्रेजरी से जुड़े तकनीकी सिस्टम की भी बारीकी से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि फर्जीवाड़ा किस तरीके से किया गया और इसमें किस तरह की तकनीकी खामियों का फायदा उठाया गया। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी संभव अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई शुरुआती चरण में है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रशासन इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में बड़कागांव थाना क्षेत्र के 13 माइल पुल के पास हुए हाइवा अगजनी मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से इलाके में पुलिस की सक्रियता और सतर्कता साफ नजर आई है। एसआईटी गठन के बाद तेज हुई कार्रवाई घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। गुप्त सूचना के आधार पर चंदौल गांव स्थित हथिया पत्थर जंगल में छापेमारी की गई, जहां से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद एजाज, मोहम्मद अफताब, मोहम्मद सलामत अंसारी और तुसार सिन्हा शामिल हैं। हथियार और आपत्तिजनक सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन पिस्टल, 11 जिंदा गोलियां, मोबाइल फोन और धमकी भरे पर्चे बरामद किए हैं। इन पर्चों में घटना की जिम्मेदारी कथित तौर पर राहुल दुबे गैंग द्वारा ली गई थी, जिससे मामले की साजिश का खुलासा हुआ। कोल माइनिंग क्षेत्र में दहशत फैलाने की साजिश पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पेट्रोल छिड़ककर हाइवा में आग लगाई थी। उनका मकसद कोल माइनिंग क्षेत्र में दहशत फैलाना था। पुलिस के अनुसार, यह संगठित अपराध का हिस्सा हो सकता है। आरोपियों का आपराधिक इतिहास गिरफ्तार आरोपियों में से मोहम्मद सलामत अंसारी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि अन्य आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस अब पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच में जुट गई है। पुलिस की तत्परता से मिली सफलता पुलिस अधिकारियों ने बताया कि त्वरित कार्रवाई और सटीक सूचना के कारण यह सफलता संभव हो पाई। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
देवघर। देवघर जिले में अवैध हथियारों की संभावित सप्लाई को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी और झारखंड एटीएस ने गुरुवार को संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। गुप्त सूचना के आधार पर दोनों एजेंसियों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से शहर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि क्षेत्र में हथियार तस्करी से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसी सूचना के बाद रणनीति बनाकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। दो स्थानों से संदिग्धों को हिरासत में लिया गया छापेमारी के दौरान टीम ने सबसे पहले नंदन पहाड़ के पास स्थित नंदी नगर मोहल्ले में दबिश दी, जहां से एक युवक को हिरासत में लिया गया। बताया जा रहा है कि वह अपने ननिहाल में ठहरा हुआ था। इसके बाद टीम ने भुरभुरा मोड़ के पास दूसरी कार्रवाई करते हुए एक और संदिग्ध युवक को पकड़ा। दोनों को तत्काल नगर थाना लाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अब तक की कार्रवाई में किसी प्रकार का हथियार या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। बिहार के आरा से जुड़ रहे हैं तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नंदी नगर से पकड़ा गया युवक मूल रूप से बिहार के आरा जिले का रहने वाला है। उसके पिता देवघर के एक निजी स्कूल में वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं। परिवार कुंडा थाना क्षेत्र के चितोलोढ़िया इलाके में रहता है। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कुछ दिनों से अपने मामा के घर पर रह रहा था। एजेंसियां इस कड़ी को गंभीरता से लेते हुए बिहार कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। फिलहाल दोनों संदिग्धों से नगर थाना में एनआईए और एटीएस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ कर रहे हैं। अभी किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हजारीबाग। जिले में अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ा अभियान चलाते हुए एक ही दिन में 57 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नए एसपी अमन कुमार के नेतृत्व में यह विशेष कार्रवाई फरार अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ की गई, जिससे अपराध जगत में हड़कंप मच गया है। छापेमारी के लिए बनाई गईं कई टीमें पुलिस ने 20-21 अप्रैल को जिलेभर में व्यापक अभियान चलाया। इसके लिए 69 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिनमें 253 पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे। इन टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में करीब 200 संभावित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान फरार आरोपियों की धरपकड़ के साथ-साथ कई मामलों में वारंट का निष्पादन भी किया गया। मनचलों पर भी कड़ी कार्रवाई इसके अलावा 21-22 अप्रैल की रात अड्डेबाजी और मनचलों के खिलाफ भी अलग से अभियान चलाया गया। इस दौरान 50 टीमों ने 122 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें 69 लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें पीआर बांड पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। 118 मामलों का निष्पादन अभियान के दौरान पुलिस ने कुल 118 मामलों का निष्पादन किया, जिसमें वारंट, रिकॉल, जमानत और आत्मसमर्पण से जुड़े मामले शामिल हैं। साथ ही 11 इश्तिहार और कुर्की की कार्रवाई भी पूरी की गई। अभियान जारी रखने की चेतावनी एसपी अमन कुमार ने साफ कहा है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की है कि अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों या अपराधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को जिले में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे अपराधियों में डर का माहौल बना है।
पलामू। रांची कोतवाली डीएसपी पर फायरिंग करने के आरोपी जेपी शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, वह एक जमीन कारोबारी से 1.20 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में भी शामिल था। रंगदारी और हत्या की साजिश का खुलासा मामले में जमीन कारोबारी नंद यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा। जांच के दौरान पुलिस को रंगदारी मांगने से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने पहले भी एक जमीन कारोबारी की हत्या की साजिश रची थी। बताया जाता है कि 2017 में रांची में जेएससीए स्टेडियम के पास तत्कालीन डीएसपी भोला प्रसाद यादव के साथ आरोपी की मुठभेड़ हुई थी। उस दौरान जेपी शुक्ला ने सरेंडर कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा। कई मामलों में रहा है शामिल पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जेपी शुक्ला कई संगीन मामलों में आरोपी रह चुका है। उस पर गढ़वा में हत्या, पलामू में आर्म्स एक्ट के तहत मामले और रांची के सुखदेव नगर क्षेत्र में हत्या की वारदात को अंजाम देने के आरोप हैं। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई इस गिरफ्तारी में डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ मेदिनीनगर टाउन थाना की टीम शामिल रही। पुलिस का कहना है कि आरोपी के आपराधिक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
रांची। रांची के पंडरा ओपी क्षेत्र में 21 अप्रैल को हुए चर्चित भार्गव सिंह हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में दो मुख्य आरोपियों विजय टेटे और सत्यम पाठक को गिरफ्तार किया गया है। घटना उस समय हुई थी, जब 28 वर्षीय भार्गव सिंह मनोकामना मंदिर में पूजा कर बाहर निकल रहे थे। तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल भार्गव सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने आरोपियों के नाम पुलिस को बताए, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। जमीन विवाद बना हत्या की जड़ पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हत्या के पीछे जमीन से जुड़ा विवाद था। आरोपी विजय टेटे ने भार्गव सिंह से जमीन दिलाने के नाम पर बड़ी रकम ली थी, लेकिन न तो जमीन दी और न ही पैसे लौटाए। जब भार्गव सिंह लगातार पैसे वापस करने का दबाव बना रहे थे, तो आरोपियों ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच डाली। मुठभेड़ में घायल हुआ आरोपी तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने पहले विजय टेटे को गिरफ्तार किया। वहीं दूसरा आरोपी सत्यम पाठक भागने की फिराक में था, जिसे नेवरी विकास के पास से पकड़ लिया गया। बाद में हथियार बरामदगी के दौरान सत्यम ने पुलिस पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे गोली मारकर घायल कर दिया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, गोलियां, मोबाइल, नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। सत्यम पाठक का आपराधिक इतिहास भी रहा है और वह पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के पंडरा इलाके में मंगलवार सुबह एक सनसनीखेज वारदात में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। बिहार में ठगी के आरोप, बदलकर रखा था नाम जानकारी के अनुसार, मृतक भार्गव सिंह का असली नाम अंकित सिंह बताया जा रहा है। वह पहले पटना में रहता था और खुद को बिहार विधानसभा का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगता था। नौकरी और एडमिशन दिलाने के नाम पर उसने कई लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे। बताया जाता है कि पुलिस उसकी तलाश में थी, लेकिन प्रभाव और संपर्क के कारण वह गिरफ्त से बचता रहा। पटना से भागकर रांची में शुरू किया नया धंधा सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 में वह पटना से भागकर रांची आ गया और यहां जमीन कारोबार शुरू किया। इस दौरान उसने कई लोगों के साथ जमीन के नाम पर भी धोखाधड़ी की। धीरे-धीरे उसने राजनीतिक संपर्क भी बना लिए और एक विधायक के करीबी के रूप में जाना जाने लगा। जमीन विवाद बना हत्या की वजह? प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में हुरहुरी इलाके की जमीन को लेकर उसका विजय हेंड्रिक टेटे नामक व्यक्ति से विवाद चल रहा था। दोनों के बीच कुछ दिन पहले झगड़ा भी हुआ था, जिसमें जान से मारने की धमकी दी गई थी। हालांकि, पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है, जिसमें पारिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है। जांच में जुटी पुलिस, कारणों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
रांची। झारखंड के चाईबासा में पुलिस ने मोबाइल चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए एक सक्रिय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बुलेट बाइक का इस्तेमाल कर रात के समय गांवों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने की उम्मीद जगी है। स्पेशल टीम बनाकर की गई कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया था। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर) बहामन टुटी के नेतृत्व में टीम ने मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गितिलिपी मोड़ के पास छापेमारी कर बुलेट बाइक पर सवार तीन संदिग्ध युवकों को पकड़ लिया। आरोपियों के पास से मोबाइल बरामद गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन निषाद, सुरेंद्र सुंडी उर्फ साहिल सुंडी और हिमांशु पिंगुवा उर्फ डीमेन के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से सात एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जो चोरी के बताए जा रहे हैं। पूछताछ में कबूला अपराध पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कई चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि झींकपानी थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर और इचापुर गांवों में रात के समय घरों में घुसकर मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। मुख्य आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अमन निषाद का आपराधिक इतिहास रहा है और वह 25 मार्च 2026 को ही जेल से रिहा हुआ था। वहीं, हिमांशु पिंगुवा का भी पहले से आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिससे गिरोह की सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आगे की कार्रवाई जारी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है। इस कार्रवाई को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जमीन को लेकर एक बार फिर गोली चली है। अपराधियों ने पंडरा थाना क्षेत्र में जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी है। उसे अस्तपताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। इधर पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के अंदर इस गोलीबारी के मास्टर माइंड विजय टेटे को गिरफ्तार कर लिया है। मामला हुरहुरी जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। बाइक पर आये अपराधियों ने चलाई गोली मंगलवार की सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र के ओटीसी (OTC) मैदान के पास बाइक सवार अपराधियों ने जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को गोली मार दी। घटना सुबह करीब 8:00 बजे की है, जब भार्गव सिंह मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। रेकी कर अपराधियों ने बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, बैंक कॉलोनी निवासी भार्गव सिंह ‘गोल्डन सिटी इंडिया’ नाम से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते हैं। वह हर मंगलवार को बजरंगबली के मंदिर में पूजा करने जाते थे। अपराधियों ने पहले उनकी रेकी की और मंगलवार सुबह जैसे ही वह मंदिर के पास पहुंचे, एक बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन पर फायरिंग कर दी। अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भार्गव सिंह के दाएं तरफ सीने में गोली लगी है। उन्हें तुरंत पास के सिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पारस हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हुरहुरि में जमीन विवाद की बात आई सामने जानकारी के मुताबिक भार्गव सिंह हुरहुरि में नये प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान जमीन को लेकर उसका विवाद विजय हेंड्रिक टेटे से हुआ था। विजय और भार्गव में जमीन को लेकर कहासुनी भी हुई थी। हालांकि, भार्गव सिंह को यह अनुमान नहीं था कि विजय हेंड्रिक टेटे उस पर हमला करवा सकता है। लेकिन, मंगलवार की सुबह सुबह बाइक सवार अपराधी ने उस पर फायरिंग कर दी। फिलहाल उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
रांची। रांची के पोश इलाके हरिहर सिंह रोड पर एक आदिवासी परिवार ने अपनी 44 डिसमिल खतियानी जमीन पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिवार का आरोप है कि इस जमीन पर लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्जा किया गया था। इस मामले में जितेंद्र सिंह (जेके इंटरनेशनल) और उनकी विधायक पत्नी किरण देवी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जब परिवार और स्थानीय लोगों ने जमीन के गेट का ताला तोड़ा, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए। मौके से कथित तौर पर जाली नोट, शराब की बोतलें और अन्य संदिग्ध सामान बरामद हुए। लोगों का दावा है कि इस जगह का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। CNT एक्ट उल्लंघन का आरोप पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि यह कब्जा छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) का उल्लंघन करते हुए किया गया है। यह कानून आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण को नियंत्रित करता है, ताकि उनकी जमीन सुरक्षित रह सके। इस मामले ने एक बार फिर आदिवासी जमीन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीर-धनुष के साथ विरोध, बढ़ा तनाव घटना के दौरान आदिवासी परिवार और उनके समर्थक पारंपरिक हथियारों जैसे तीर-धनुष के साथ विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर जुट गए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। प्रशासन की एंट्री, जांच शुरू सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जे के मुद्दे को चर्चा में ले आई है।
रांची। रांची के कांके रोड स्थित नेहा ज्वेलर्स में चोरों ने बेहद शातिर तरीके से चोरी की वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने दुकान की छत और उसके नीचे लगी लोहे की जाली को काटकर अंदर प्रवेश किया और लाखों के गहने लेकर फरार हो गए। चोरी का यह तरीका पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है। सुबह दुकान खुलते ही खुला राज दुकान मालिक संजय प्रसाद जब रोज की तरह गुरुवार सुबह दुकान खोलने पहुंचे, तो शुरुआत में सब सामान्य लगा। लेकिन जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा, डिस्प्ले में रखे सोने-चांदी के गहने गायब मिले। जांच करने पर पता चला कि छत और जाली काटकर चोर अंदर घुसे थे। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। तिजोरी नहीं खोल सके चोर दुकानदार के अनुसार, अधिकतर कीमती सोने के गहने स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखे गए थे। चोरों ने तिजोरी खोलने की भी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। ऐसे में डिस्प्ले में रखे गहनों को ही निशाना बनाया गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 15 लाख रुपये से अधिक के गहनों की चोरी हुई है। पुलिस, एफएसएल और डॉग स्क्वायड जांच में जुटे घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे और साक्ष्य जुटाए। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब आसपास के इलाकों में भी जांच कर रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
धनबाद। धनबाद के सुदामडीह थाना क्षेत्र स्थित भौंरा ईजे जीएम ऑफिस गेट पर सोमवार को अचानक हुई फायरिंग और हमले की घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। नकाबपोश अपराधियों ने ऑफिस के बाहर पहुंचकर चार राउंड हवाई फायरिंग की और यूनियन नेता पर हमला कर फरार हो गए। बैठक के बाद घात लगाकर हमला जानकारी के अनुसार यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के सचिव Ghaffar Ansari अपने समर्थकों के साथ ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जीएम कार्यालय पहुंचे थे। अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जैसे ही वे बाहर निकले, पहले से घात लगाए हमलावरों ने अचानक लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि मौके पर मौजूद लोग संभल नहीं सके। फायरिंग से मची भगदड़, बाइक में तोड़फोड़ हमले के दौरान अपराधियों ने चार राउंड फायरिंग भी की, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान हमलावरों ने मौके पर खड़ी एक बाइक को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ देर के लिए पूरा इलाका रणक्षेत्र जैसा नजर आ रहा था। पुलिस पहुंची, आरोपी फरार घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक सभी हमलावर फरार हो चुके थे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। तनावपूर्ण माहौल, जांच जारी घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में इस हमले के पीछे आपसी रंजिश या यूनियन से जुड़ा विवाद होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार पिछले पांच दिनों से महिला के सड़ते हुए शव के साथ एक ही फ्लैट में रह रहा था। यह सनसनीखेज घटना गोविंदपुर थाना क्षेत्र के कौआबांध स्थित वास्तु विहार सोसाइटी की है। रविवार की रात जब घर से आने वाली दुर्गंध असहनीय हो गई, तब पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने सड़ा-गला शव बरामद किया। मृतका की पहचान 40 वर्षीय लिपिका कुमारी के रूप में हुई है। दुर्गंध ने खोला पांच दिनों से छिपा खौफनाक राज वास्तु विहार सोसाइटी के इस फ्लैट से पिछले कुछ दिनों से हल्की बदबू आ रही थी, जिसे शुरुआत में स्थानीय निवासियों ने नजरअंदाज कर दिया। हालांकि, रविवार शाम होते-होते यह गंध इतनी तेज हो गई कि आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया। अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत गोविंदपुर थाना पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब फ्लैट का दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का दृश्य देख उनके भी होश उड़ गए। कमरे में लिपिका कुमारी का शव अत्यंत क्षत-विक्षत स्थिति में पड़ा था और वह पूरी तरह सड़ चुका था। परिजनों की चुप्पी और बीमारी का दावा सवालों के घेरे में पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि लिपिका कुमारी की मौत संभवतः 8 अप्रैल को ही हो गई थी। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से बीमार थी। चौंकाने वाली बात यह है कि मौत के बाद परिजनों ने न तो किसी को जानकारी दी और न ही अंतिम संस्कार की कोई प्रक्रिया शुरू की। वे पांच दिनों तक उसी फ्लैट में शव के साथ सामान्य रूप से आते-जाते रहे। लिपिका अपने परिवार के साथ साल 2022 से इस फ्लैट में रह रही थी। इस लंबी खामोशी ने पुलिस के मन में कई गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया पूछताछ से सुलझेगी गुत्थी घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर तुरंत शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौत की सटीक वजह और समय का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। फिलहाल, घर के सदस्यों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी या क्या मंशा थी, जिसके कारण परिवार ने इतनी बड़ी घटना को पांच दिनों तक बाहरी दुनिया से छिपाए रखा। इलाके में दहशत का माहौल, जांच जारी इस घटना के बाद से पूरी वास्तु विहार सोसाइटी और आसपास के क्षेत्रों में दहशत के साथ-साथ चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे कोई परिवार एक सड़ते हुए शव की दुर्गंध के बीच इतने दिनों तक रह सकता है। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
रांची। रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित हरिहर सिंह रोड के प्रीति ज्वेलर्स में हुई लूटकांड का पुलिस ने महज कुछ ही घंटों में खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो पहले डिलीवरी बॉय के रूप में काम कर चुके थे। इसी दौरान उन्होंने इलाके और दुकान की गतिविधियों की रेकी की और फिर लूट की पूरी साजिश रची।यह घटना 7 अप्रैल 2026 की शाम करीब 6:45 बजे हुई थी। जैसे ही पुलिस को सूचना मिली, मामले की जानकारी तुरंत रांची एसएसपी राकेश रंजन को दी गई। इसके बाद सिटी एसपी पारस राणा के निर्देश पर एक विशेष छापामारी टीम का गठन किया गया और जांच तेज कर दी गई। तकनीकी जांच से आरोपी धराए सदर डीएसपी संजीव कुमार बेसरा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी शाखा की मदद से लगातार छापेमारी की। इसी दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों आशुतोष कुमार (गिरीडीह), महेश कुमार वर्मा (गिरीडीह) और मो. सिराज अंसारी उर्फ शेरू (जमुई, बिहार) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से लूट का पूरा सामान और वारदात में इस्तेमाल की गई सामग्री बरामद की है। बरामद सामान में TVS राइडर और पल्सर बाइक, पांच मोबाइल फोन, ज्वेलरी दुकान से लूटा गया सोना-चांदी, एक देशी पिस्टल, दो मैगजीन और चार जिंदा कारतूस शामिल हैं। पहले भी जेल जा चुके हैं आरोपी पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार तीनों आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं। आशुतोष कुमार के खिलाफ गिरीडीह में कई मामले दर्ज हैं। वहीं सिराज अंसारी वर्ष 2023 में जेल जा चुका है, जबकि महेश वर्मा 2021 में चोरी के मामले में छह महीने तक जेल में रह चुका है।
खूंटी। खूंटी जिले के मारंगहादा थाना क्षेत्र के लांदूप पंचायत स्थित कातुब गांव में अंधविश्वास की एक बेहद भयावह घटना सामने आई है। डायन-बिसाही के शक में एक दंपती पर टांगी से जानलेवा हमला कर दिया गया। इस हमले में गुईया पाहन और उनकी पत्नी सिनी पहनाईन गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद दोनों को पहले स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर हालत बिगड़ने पर बुधवार रात करीब 10 बजे बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि सिनी पहनाईन के सिर पर गहरा वार हुआ है और उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। करंज तोड़ने के विवाद से शुरू हुई कहासुनी घायल गुईया पाहन के अनुसार, घटना की शुरुआत मंगलवार शाम पेड़ से करंज तोड़ने को लेकर हुए विवाद से हुई थी। इस दौरान उनके भतीजों कुंवर पाहन और हंगीरा पाहन के साथ कहासुनी हुई, जो मारपीट तक पहुंच गई। हालांकि, गांव वालों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया और सभी अपने-अपने घर लौट गए। लेकिन देर रात करीब 9 बजे दोनों आरोपी फिर उनके घर पहुंचे और अचानक टांगी से हमला कर दिया। हमले की यह वारदात इतनी तेज और खौफनाक थी कि दंपती को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अंधविश्वास बना हमले की बड़ी वजह गुईया पाहन ने बताया कि उनके बड़े भाई की पत्नी सोमवारी देवी अक्सर बीमार रहती हैं, और इसी को लेकर परिवार के कुछ लोग उनकी पत्नी सिनी पहनाईन पर डायन होने का आरोप लगाते थे। पीड़ित परिवार का कहना है कि इसी अंधविश्वास ने इस हिंसक हमले को जन्म दिया। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं। घायलों के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अंधविश्वास आज भी समाज में कितनी खतरनाक हिंसा को जन्म दे रहा है।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो युवतियों के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िताओं में से एक युवती की पहचान एक आरोपी से पहले से थी। इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उसे गुमला घूमने के बहाने बुलाया। युवती अपनी एक सहेली के साथ वहां पहुंची। आरोपी भी अपने एक दोस्त के साथ आया और दोनों युवतियों को बाइक पर बैठाकर सिसई क्षेत्र की ओर ले गया। कब हुआ ये मामला? बताया जा रहा है कि शाम के समय आरोपियों ने बीयर खरीदी और फिर दोनों युवतियों को जबरन एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के दौरान एक युवती किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर भागने में सफल रही। उसने पास के पुआल में छिपकर अपने मोबाइल फोन से परिजनों को लोकेशन भेजी और मदद मांगी। वहीं दूसरी युवती आरोपियों के कब्जे में फंसी रही। आरोप है कि बाद में एक और युवक को मौके पर बुलाया गया और तीनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने पूरी घटना की जानकारी दी किसी तरह जान बचाकर दोनों युवतियां रविवार देर रात थाना पहुंचीं और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक आरोपी डुमरडीह पंचायत और दूसरा असनी नकटीटोली का बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और मामले की गंभीरता से जांच जारी है।
सस्पेंस और इमोशनल ड्रामा से भरपूर फिल्म Vadh 2 अब दर्शकों के लिए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। पहली फिल्म की सफलता के बाद आई यह सीक्वल कहानी को एक नए और ज्यादा गहरे मोड़ पर ले जाती है, जहां अपराध, न्याय और नैतिकता के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आती है। कब और कहां देखें? "Vadh 2" 3 अप्रैल 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। इससे पहले यह फिल्म 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। कहानी और प्लॉट फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी की एक जेल के इर्द-गिर्द घूमती है। यहां मंजू मिश्रा, जिस पर डबल मर्डर का आरोप है, अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ रही है। दूसरी तरफ, शंभुनाथ मिश्रा-एक ईमानदार लेकिन थका हुआ जेल गार्ड-अपनी रिटायरमेंट के करीब है और जेल के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता है। मंजू जेल के कठोर माहौल से निकलने की कोशिश में शंभुनाथ से मदद मांगती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब जांच अधिकारी अतीत सिंह मामले की गहराई से पड़ताल करता है और कई चौंकाने वाले सवाल उठाता है। फिल्म यह सवाल भी उठाती है-क्या ‘वध’ यानी हत्या ही न्याय का रास्ता बन सकता है? कास्ट और क्रू फिल्म का निर्देशन Jaspal Singh Sandhu ने किया है। मुख्य भूमिकाओं में Sanjay Mishra (शंभुनाथ मिश्रा) और Neena Gupta (मंजू मिश्रा) नजर आते हैं। इसके अलावा Kumud Mishra, Yogita Bihani और Akshay Dogra ने भी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म को Luv Ranjan और अंकुर गर्ग ने प्रोड्यूस किया है। दर्शकों की प्रतिक्रिया पहली फिल्म Vadh को दर्शकों और क्रिटिक्स से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी और IMDb पर 7.6 की मजबूत रेटिंग हासिल की थी। इसी उम्मीद के साथ ‘वध 2’ भी दर्शकों के बीच चर्चा में है और इसकी कहानी को और ज्यादा गहराई और थ्रिल के लिए सराहा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।