रांची/चतरा: झारखंड के चतरा जिले के अम्रपाली-मगध कोयला खनन क्षेत्र में लेवी वसूली और प्रतिबंधित टीपीसी के लिए फंड जुटाने के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 12 आरोपियों को 5 से 10 साल तक की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इनमें पांच दोषियों को 10 साल, छह को 8 साल और एक दोषी को 5 साल की सजा दी गई है. कोयला कारोबारियों से लेवी वसूली का था आरोप मामला चतरा के अम्रपाली-मगध कोयला क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप था कि कोयला कारोबारी, ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और अन्य व्यवसायियों से लेवी की वसूली की जाती थी. इस रकम का इस्तेमाल प्रतिबंधित तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) की गतिविधियों के लिए फंड जुटाने में किया जाता था. एनआईए की जांच में सामने आया कि संगठन से जुड़े सदस्य और कैडर स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोगों के साथ मिलकर कोयला खनन और परिवहन से जुड़े लोगों से रकम वसूलते थे. आरोपियों पर कोयला खदानों से खनन और उसके परिवहन को जारी रखने के बदले लेवी वसूलने की व्यवस्था में शामिल होने का आरोप था. 12 दोषियों को मिली सजा अदालत ने बिंदेश्वर गंझू उर्फ बिंदू गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, भीखन गंझू उर्फ दीपक गंझू, अनिश्चय गंझू और प्रदीप राम उर्फ प्रदीप वर्मा समेत 12 आरोपियों को दोषी ठहराया. इनके अलावा विनोद कुमार गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह और सुभान मियां भी दोषियों में शामिल हैं. अदालत ने दोषियों को मामले में उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई. टीपीसी और माओवादी कनेक्शन की भी हुई जांच जांच के दौरान एनआईए ने पाया कि प्रतिबंधित टीपीसी के सदस्य और कैडर कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. जांच एजेंसी के अनुसार, टीपीसी के कुछ सशस्त्र कैडर प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी संगठन से भी जुड़े हुए थे. एनआईए ने यह भी जांच की कि स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों के साथ कथित मिलीभगत के जरिए कोयला खनन और परिवहन की गतिविधियों को संचालित करने के बदले लेवी वसूली जाती थी. 21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट इस मामले में एनआईए ने कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दाखिल की गयी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ 10 जनवरी 2020 को पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 119 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 12 आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई.
देवघर: सावन में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए उत्तर प्रदेश से देवघर पहुंचे कांवरिया श्रद्धालुओं के साथ चोरी की घटना सामने आई है. कुंडा थाना क्षेत्र के किसनीडीह गांव के पास अज्ञात चोरों ने श्रद्धालुओं की चारपहिया गाड़ी से एक बैग चोरी कर लिया. बैग में 29 हजार रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन रखे हुए थे. घटना गुरुवार देर रात की बतायी जा रही है. शुक्रवार सुबह नींद खुलने पर श्रद्धालुओं को चोरी की जानकारी हुई. राशन दुकान के पास खड़ी थी श्रद्धालुओं की गाड़ी पीड़ित कांवरियों के अनुसार, गुरुवार देर शाम वे किसनीडीह गांव के पास एक राशन दुकान के समीप पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपनी चारपहिया गाड़ी खड़ी की और राशन दुकान से जरूरी सामान खरीदने के बाद खाना बनाया. भोजन करने के बाद कुछ श्रद्धालु गाड़ी के अंदर सो गये, जबकि कुछ लोग राशन दुकान के सामने जमीन पर सो गये. इसी दौरान अज्ञात चोरों ने मौका देखकर गाड़ी में रखा बैग चोरी कर लिया. श्रद्धालुओं को इसकी भनक तक नहीं लगी और वे सोते रहे. सुबह नींद खुली तो गायब मिला बैग शुक्रवार सुबह जब श्रद्धालुओं की नींद खुली तो उन्होंने गाड़ी की जांच की. इस दौरान वाहन से बैग गायब मिला. बैग में तीन मोबाइल फोन के साथ श्रद्धालुओं के पैसे रखे हुए थे. बाद में पता चला कि बैग में रखे 29 हजार रुपये नकद भी चोरी हो चुके हैं. चोरी की घटना सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया. उन्होंने आसपास के इलाके में बैग और मोबाइल की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. कुंडा थाना पहुंचकर दर्ज करायी शिकायत घटना के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अलावलपुर गांव निवासी उदयवीर सिंह कुशवाहा, ओमकार गुप्ता, अखिलेश सिंह कुशवाहा, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा, दीपक कुमार समेत अन्य श्रद्धालु कुंडा थाना पहुंचे. उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज करायी. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. आसपास के इलाके में छानबीन की जा रही है और चोरी की घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटाये जा रहे हैं. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के पीछे कौन लोग शामिल थे.
रांची: रांची के सदर अस्पताल में सोमवार को मरीज के परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. आरोप है कि एक महिला मरीज के साथ आये परिजनों ने सेंट्रल कंसोल रूम में कार्यरत एक्स-रे टेक्नीशियन माधव राज भंडारी के साथ मारपीट की. हमले में टेक्नीशियन के हाथ में फ्रैक्चर हो गया, जबकि चेहरे और आंख के आसपास भी चोटें आयी हैं. दाहिने हाथ की उंगलियों में चोट के बाद आर्थो विभाग में उनका प्लास्टर किया गया. घटना के बाद अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से लोअर बाजार थाना में लिखित शिकायत दी गयी है. स्वास्थ्य मंत्री के नाम पर धमकी देने का आरोप अस्पताल कर्मियों का आरोप है कि महिला मरीज के परिजनों ने पहले एक्स-रे टेक्नीशियन को स्वास्थ्य मंत्री के नाम पर धमकी दी. इसके बाद बाहर से करीब 10-15 युवकों को बुलाया गया, जिन्होंने कंसोल रूम में पहुंचकर स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी. मारपीट में एक्स-रे टेक्नीशियन माधव राज भंडारी गंभीर रूप से घायल हो गये. अस्पताल कर्मियों के अनुसार, हमलावरों ने एक्स-रे कैसेट और अन्य उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया. आठ अस्पताल कर्मियों ने थाने में दी शिकायत घटना के बाद एक्स-रे टेक्नीशियन जलेश्वर महतो, दिनेश पाठक, ज्योति कच्छप समेत आठ अस्पताल कर्मियों ने लोअर बाजार थाना में लिखित शिकायत दर्ज करायी है. स्टाफ का कहना है कि मरीज का एक्स-रे करने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन परिजनों ने कथित तौर पर जल्द एक्स-रे करने का दबाव बनाया. इसी दौरान विवाद बढ़ गया और बाद में बाहर से युवकों को बुलाकर हमला किया गया. अस्पताल कर्मियों ने घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता जतायी है. उनका कहना है कि अस्पताल में ड्यूटी के दौरान इस तरह की घटना से कर्मचारियों में डर का माहौल है. क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, लातेहार की रहने वाली एक महिला इलाज के लिए रांची सदर अस्पताल पहुंची थी. डॉक्टर ने उसे एक्स-रे कराने की सलाह दी थी. अस्पताल कर्मियों के मुताबिक, मरीज को खाली पेट एक्स-रे कराने के लिए कहा गया था. सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे महिला अस्पताल पहुंची. एक्स-रे सेंटर पर भीड़ होने के कारण उसे अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया. आरोप है कि महिला तत्काल एक्स-रे कराने की जिद करने लगी और कंसोल रूम में पहुंच गयी. सपोर्टिंग स्टाफ ने एक्स-रे के लिए कपड़े बदलने को कहा, लेकिन महिला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इसके बाद एक्स-रे फिल्म को लेकर महिला और उसके पति की कर्मचारियों से बहस हो गयी. समझाने के बाद दोनों वहां से चले गये. आधे घंटे बाद अचानक पहुंचे युवक अस्पताल कर्मियों का आरोप है कि विवाद के करीब आधे घंटे बाद 10-12 युवक अचानक कंसोल रूम में पहुंचे और स्टाफ के साथ मारपीट शुरू कर दी. हमले में एक्स-रे टेक्नीशियन घायल हो गये. हंगामा बढ़ने के बाद महिला के परिजन मरीज को लेकर अस्पताल से चले गये. घटना के बाद अस्पताल कर्मियों ने पुलिस को मामले की जानकारी दी. दूसरे पक्ष ने भी लगाया गंभीर आरोप इधर, मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी थाने में शिकायत दी गयी है. इसमें अस्पताल कर्मियों पर छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है. फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है. घटना के वास्तविक कारण और मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है.
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में प्रिंस खान गिरोह के संदिग्ध सदस्यों के खिलाफ पुलिस का अभियान तेज हो गया है। बड़कागांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरोह से जुड़े संदिग्ध आरोपी अंकित कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जवाबी फायरिंग में आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामला बड़कागांव के 13 माइल ट्रांसपोर्ट रोड पर दो हाइवा वाहनों पर हुई गोलीबारी से जुड़ा है। पुलिस ने आरोपी के पास से एक देसी पिस्तौल, 7.62 एमएम का एक खोखा, एक मिस फायर गोली, एक जिंदा गोली, एक देसी बम और चार धमकी भरे पर्चे बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया गैंग से कनेक्शन हजारीबाग पुलिस के अनुसार, एनटीपीसी कोल परिवहन में लगे वाहनों पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान पिपराडीह निवासी अंकित कुमार पांडेय संदिग्ध पाया गया। उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच की, जिसमें टेलीग्राम के जरिए गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गिरोह के सदस्यों से कथित बातचीत सामने आई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने 25 जुलाई की रात 13 माइल ट्रांसपोर्ट रोड पर अपने साथियों के साथ फायरिंग करने और प्रिंस खान गिरोह के नाम से धमकी भरे पर्चे छोड़ने की बात स्वीकार की। बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग का आरोप पुलिस के मुताबिक, आरोपी की निशानदेही पर हथियार और बम बरामद करने के लिए टीम गैस प्लांट के पास पहुंची थी। इसी दौरान अंकित ने एक जवान को धक्का देकर बरामद पिस्तौल से पुलिस टीम पर गोली चलाने और मौके से भागने की कोशिश की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी। घायल अंकित को पहले बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। एसपी ने की कार्रवाई की पुष्टि हजारीबाग एसपी अमन कुमार ने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग वाहनों पर फायरिंग करने वाले प्रिंस खान गिरोह से जुड़े संदिग्ध अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने मुठभेड़ में आरोपी के घायल होने और गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मामले में पुलिस जल्द ही विस्तृत जानकारी और प्रेस वार्ता के जरिए पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर सकती है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में अंधविश्वास ने एक परिवार को उजाड़ दिया। उंटारी रोड थाना क्षेत्र के लकड़ही टोला में एक व्यक्ति ने अंधविश्वास के चलते अपने ही भतीजे की टांगी से हमला कर हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बेटी की मौत के बाद अंधविश्वास में घिरा था आरोपी पुलिस के अनुसार, लकड़ही टोला निवासी प्रभु रजवार की बेटी लंबे समय से बीमार थी और कुछ दिन पहले उसकी मौत हो गई थी। प्रभु रजवार को शक था कि उसके छोटे भाई की पत्नी और भतीजे की पत्नी ने किसी तरह की तंत्र-मंत्र या जादू-टोना किया है, जिसकी वजह से उसकी बेटी की जान गई। इसी अंधविश्वास के कारण वह लगातार झाड़-फूंक का सहारा ले रहा था। बहस के बाद टांगी से किया हमला बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात किसी बात को लेकर प्रभु रजवार और उसके भतीजे चनका रजवार के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि प्रभु रजवार ने घर में रखी टांगी उठाकर भतीजे पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोट लगने से चनका रजवार की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस घटना की जानकारी मिलते ही उंटारी रोड थाना प्रभारी संतोष कुमार गिरि के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने आरोपी प्रभु रजवार को गिरफ्तार कर लिया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अंधविश्वास बना हत्या की वजह थाना प्रभारी संतोष कुमार गिरि ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला अंधविश्वास से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में एक गर्भवती सरकारी शिक्षिका को समय पर मातृत्व अवकाश नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छुट्टी नहीं मिलने के कारण स्कूल में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने पर गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और शिक्षा विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छुट्टी नहीं मिलने से बिगड़ी तबीयत जानकारी के अनुसार, शिक्षिका भारती पांडेय तरहसी स्थित प्लस-2 हाई स्कूल में पदस्थापित हैं और उनकी प्रतिनियुक्ति चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में थी। परिजनों का आरोप है कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में होने के बावजूद उन्हें मातृत्व अवकाश नहीं दिया गया। स्कूल में प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। रिश्वत मांगने का भी आरोप परिजनों का आरोप है कि अवकाश स्वीकृत करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों और दो क्लर्कों ने ₹50,000 रिश्वत की मांग की थी। उनका कहना है कि शिक्षिका ने कई बार अधिकारियों से छुट्टी की गुहार लगाई थी और शिक्षक संघ के साथ जिला प्रशासन से भी शिकायत की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। एफआईआर की मांग, पुलिस ने शुरू की जांच शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी ने मेदिनीनगर टाउन थाना में आवेदन देकर जिला शिक्षा अधीक्षक और दो क्लर्कों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी ने बताया कि आवेदन प्राप्त हो गया है और मामले की जांच की जा रही है। शिक्षा विभाग ने आरोपों से किया इनकार जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेताओं ने घटना की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र स्थित चंद्रगुप्त कोल परियोजना के बुकरू ट्रांसपोर्टिंग रोड पर शुक्रवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घायल अपराधी का इलाज शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा है। हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमन कुमार ने बताया कि दोनों आरोपी कुख्यात राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पगार ओपी क्षेत्र में संचालित चंद्रगुप्त कोल खनन परियोजना के ट्रांसपोर्टिंग मार्ग पर कुछ अपराधियों ने फायरिंग कर गैंग का पर्चा छोड़ा है और जंगल की ओर भाग गए हैं। सूचना के आधार पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। तड़के करीब 3:15 बजे बुकरू गांव के जंगल के पास एक बाइक पर सवार दो संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस वाहन को देखते ही दोनों जंगल की ओर भागने लगे। पुलिस के अनुसार, पीछा किए जाने पर बाइक असंतुलित होकर गिर गई और दोनों आरोपी पैदल जंगल की ओर भागने लगे। इसी दौरान उन्होंने पुलिस टीम पर लगातार तीन से चार राउंड फायरिंग की। पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन दोबारा गोलीबारी होने पर आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई। पुलिस की तीन राउंड फायरिंग में एक गोली एक आरोपी के पैर में लगी, जबकि दूसरे को मौके से पकड़ लिया गया। घायल आरोपी की पहचान बड़कागांव थाना क्षेत्र के चेप खुर्द निवासी मोहम्मद रागीब अफजल के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी केरेडारी थाना क्षेत्र के पगार ओपी इलाके का रहने वाला है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुद को राहुल दुबे गिरोह का सदस्य बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि चंद्रगुप्त कोल परियोजना से कथित तौर पर लेवी नहीं मिलने पर कंपनी को धमकाने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से ट्रांसपोर्टिंग रोड पर फायरिंग की और गैंग का पर्चा छोड़ा था। एसपी अमन कुमार ने बताया कि घायल मोहम्मद रागीब अफजल का आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी जेल जा चुका है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य मामले दर्ज हैं। वहीं गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र सोनी के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
रांची। राजधानी रांची के सदर थाना क्षेत्र स्थित कोकर के खोरहाटोली में बुधवार सुबह एक सनसनीखेज हत्या की घटना सामने आई। बदमाशों ने किराये के मकान में रह रहे रमेश ठाकुर की सिर पर लोहे के औजार से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी। वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। किराये के मकान में दोस्तों के साथ रहता था मृतक पुलिस के अनुसार, मृतक रमेश ठाकुर कोकर में किराये के मकान में अपने कुछ परिचितों के साथ रह रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह पहले जमीन के कारोबार से जुड़ा था और हाल के दिनों में झाड़-फूंक का काम करने की भी चर्चा थी। पुलिस फिलहाल मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। सिर पर कई वार कर उतारा मौत के घाट प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हमलावरों ने रमेश ठाकुर के सिर पर लोहे के औजार से कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। परिचितों पर हत्या का शक, छापेमारी जारी सदर थाना प्रभारी कुलदीप ने बताया कि शुरुआती जांच में हत्या में मृतक के परिचित लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। पुलिस संदिग्धों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। हत्या की वजह का इंतजार पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का खुलासा जांच पूरी होने और सभी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच जारी है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में अनैतिक गतिविधियों की सूचना पर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त छापेमारी कर चार लोगों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई के दौरान होटल के एक कमरे से दो पुरुष और दो महिलाएं संदिग्ध परिस्थितियों में मिलीं। वहीं होटल का संचालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। होटल के मैनेजर को भी पूछताछ के लिए थाना लाया गया है। गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, धनवार के बड़ा चौक स्थित होटल डिस्कवरी में लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायत मिल रही थी। इस सूचना के आधार पर गिरिडीह पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर खोरीमहुआ के एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने मंगलवार रात होटल में छापा मारकर विभिन्न कमरों की तलाशी ली। पहचान पत्र नहीं दिखा सके लोग तलाशी के दौरान एक कमरे में दो पुरुष और दो महिलाएं आपत्तिजनक स्थिति में मिलीं। पूछताछ के दौरान वे तत्काल कोई वैध पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सभी चारों को हिरासत में लेकर धनवार थाना लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। होटल के मैनेजर प्रदीप साहू से भी मामले में जानकारी ली जा रही है। होटल सील, संचालक की तलाश जारी छापेमारी के दौरान होटल संचालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। जांच के दौरान होटल का रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज भी जब्त कर उनकी जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि होटल में कब से और किस स्तर पर गतिविधियां संचालित हो रही थीं। जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई प्रशासन ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होटल को सील कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही होटल से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हंसडीहा थाना क्षेत्र से तीन युवकों को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 11 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने इस अवैध कारोबार से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं, जिसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है। गुप्त सूचना पर स्टेडियम में हुई छापेमारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हंसडीहा के प्लस-2 हाई स्कूल स्टेडियम परिसर में कुछ युवक ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री और सेवन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही जरमुंडी के एसडीपीओ नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो तीन युवक एक कमरे में मौजूद थे। पुलिस वाहन देखकर वे भागने लगे, लेकिन जवानों ने पीछा कर तीनों को पकड़ लिया। तलाशी में मिली ब्राउन शुगर गिरफ्तार युवकों की पहचान शहादत शेख, मोहम्मद बसीर और आर्यन शेख के रूप में हुई है। तीनों दुमका नगर थाना क्षेत्र के दुधानी इलाके के निवासी बताए गए हैं। तलाशी के दौरान उनके पास से छोटे-छोटे पैकेटों में ब्राउन शुगर बरामद हुई। मौके पर इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वजन करने पर इसकी मात्रा लगभग 11 ग्राम पाई गई। आरोपियों ने पूछताछ में नशे का सेवन करने की बात भी स्वीकार की। सरगना तक पहुंचने में जुटी पुलिस एसडीपीओ नवल किशोर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार युवकों ने ब्राउन शुगर के नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोगों और कथित सरगना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पुलिस अब इन सुरागों के आधार पर पूरे गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
रांची। झारखंड के रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 17 दिनों बाद खुलासा करने का दावा किया है। 19 जून को बुंडू थाना क्षेत्र के तेतरटांड़ जंगल से मिली सिरकटी और आंशिक रूप से जली लाश की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि प्रेमी से शादी करने की चाह में पत्नी ने अपने पति की हत्या की साजिश रची थी। पहचान मिटाने के लिए सिर काटकर जलाया शव पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान तमाड़ थाना क्षेत्र के मांझीडीह निवासी संजय लोहरा के रूप में हुई। हत्या के बाद आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने के लिए पहले सिर धड़ से अलग किया, फिर धड़ को जलाकर जंगल में फेंक दिया। सिर को अलग स्थान पर जमीन में दफना दिया गया, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। बिना सिर के शव मिलने के कारण यह मामला पुलिस के लिए ब्लाइंड मर्डर बन गया था। आरोपियों की निशानदेही पर मिला कटा हुआ सिर गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर तमाड़ थाना क्षेत्र के सुंदरडीह स्थित रानी वन में जमीन के भीतर दबाकर रखा गया मृतक का सिर बरामद किया गया। बरामदगी के दौरान एफएसएल टीम ने मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए। चार आरोपी शामिल, दो अब भी फरार डीएसपी ओमप्रकाश ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण, फॉरेंसिक जांच और लगातार छानबीन के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच में चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कार भी जब्त कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस ब्लाइंड मर्डर केस के खुलासे में अनुसंधान टीम, तकनीकी सेल और एफएसएल की संयुक्त भूमिका रही।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ 30 मीटर रिजॉल्यूशन पर बाढ़ के पानी की गहराई का भी अनुमान लगा सकता है। यह तकनीक दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में विकसित की गई है और भविष्य में देश के अन्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। 93% से ज्यादा सटीकता के साथ करता है बाढ़ का अनुमान शोधकर्ताओं के अनुसार, यह AI सिस्टम 93 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान करने में सक्षम है। यह मॉडल लगभग 55,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तदरी से लेकर तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस तकनीक का उद्देश्य भारी बारिश के कारण आने वाली अचानक बाढ़ (Flash Flood) से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते प्रशासन को सतर्क करना है। सिर्फ बारिश नहीं, कई कारकों का करता है विश्लेषण IIT बॉम्बे की रिसर्च टीम ने इस मॉडल में केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य कारकों को भी शामिल किया है। इनमें शामिल हैं: सतही जल प्रवाह (Surface Runoff) मिट्टी की नमी भूमि उपयोग (Land Use) जल अवशोषण क्षमता ड्रेनेज सिस्टम शोधकर्ताओं का कहना है कि सतही जल प्रवाह, केवल बारिश की मात्रा की तुलना में बाढ़ का अधिक विश्वसनीय संकेतक साबित हुआ। सैटेलाइट और AI का अनोखा संयोजन इस सिस्टम को तैयार करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Sentinel-1 Synthetic Aperture Radar (SAR) सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया। यह रडार तकनीक घने मानसूनी बादलों के बीच भी पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। AI मॉडल ने बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर पानी से भरे क्षेत्रों की पहचान करना सीखा और उसी आधार पर संभावित बाढ़ की गहराई का अनुमान लगाया। दो चरणों में करता है काम यह AI सिस्टम दो स्तरों पर कार्य करता है: पहले चरण में यह पहचानता है कि कौन-सा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखता है। दूसरे चरण में यह अनुमान लगाता है कि उस स्थान पर पानी कितनी गहराई तक भर सकता है। इससे प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है। अस्पताल, सड़क और स्कूलों की सुरक्षा में होगी मदद 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाले हाई-प्रिसिजन मैप्स की मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि बाढ़ के दौरान कौन-कौन से अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में मुंबई और पूर्वी तट तक होगा विस्तार फिलहाल यह मॉडल पश्चिमी घाट के कम ढलान (7% से कम) वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि आवश्यक बदलाव और अतिरिक्त डेटा जोड़कर इसे मुंबई और भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्रों जैसे जटिल इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के भुरकुंडा क्षेत्र में सोमवार तड़के पुलिस और कुख्यात अपराधी के बीच मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में प्रिंस खान गिरोह का शूटर शिवराज राम उर्फ शिवा घायल हो गया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके दाहिने पैर में गोली लगी। घायल अपराधी को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया है। संयुक्त अभियान में हुई कार्रवाई रांची, धनबाद और रामगढ़ पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर शिवराज राम को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने भुरकुंडा स्थित रिवर साइड सेंट्रल स्कूल के जर्जर भवन में हथियार छिपाने की बात स्वीकार की। जब पुलिस उसे हथियार बरामद कराने के लिए मौके पर लेकर पहुंची, तभी उसने पुलिस टीम पर पिस्टल से दो राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में घायल हुआ आरोपी पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें शिवराज राम के दाहिने पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लेकर अस्पताल पहुंचाया। चार पिस्टल और 80 जिंदा कारतूस बरामद शिवराज राम की निशानदेही पर पुलिस ने दो पिस्टल, 59 जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए। पूछताछ में उसने अपने सहयोगी आरिज आलम के पास भी हथियार होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर आरिज आलम को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से दो पिस्टल तथा 21 जिंदा कारतूस बरामद किए। इस तरह अभियान में कुल चार पिस्टल और 80 जिंदा कारतूस जब्त किए गए। कई संगीन मामलों में वांछित था शिवराज पुलिस के अनुसार शिवराज राम रामगढ़ और हजारीबाग में फायरिंग, रंगदारी और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मामलों में आरोपी है। वह 14 मई को जेल से रिहा हुआ था और हाल के दिनों में उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह किसी बड़ी वारदात की तैयारी में था। कई गैंगों से जुड़े रहे हैं आरोपी के तार रामगढ़ एसपी मुकेश कुमार लुनायत ने बताया कि शिवराज राम वर्तमान में प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा गिरोह के संपर्क में था। इससे पहले वह श्रीवास्तव गिरोह और राहुल दुबे गिरोह के लिए भी काम कर चुका है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
गिरिडीह। गिरिडीह के सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार महिलाओं सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अंतिम चरण में है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी। जमीन विवाद बना हत्या की वजह प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बालेश्वर पटेल की हत्या के पीछे जमीन विवाद मुख्य कारण था। जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह वह मांडू थाना क्षेत्र के बालसेग्रा गांव स्थित अपनी विवादित जमीन पर पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों से उनकी कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि हमलावरों ने पत्थरों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हूल दिवस की छुट्टी पर गांव आए थे बालेश्वर पटेल हूल दिवस की छुट्टी के अवसर पर अपने गांव आए हुए थे। छुट्टी के दौरान वह अपनी जमीन की स्थिति देखने पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर हमला कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के साथ जांच शुरू कर दी। आज होगा पूरे मामले का खुलासा पुलिस की विशेष टीम ने लगातार छापेमारी कर इस मामले में शामिल सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार लोगों में चार महिलाएं भी शामिल हैं। रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मुकेश लूनायत बुधवार को प्रेस वार्ता कर पूरे हत्याकांड का खुलासा करेंगे। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जल्द ही आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल है और पुलिस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
रांची। रांची की एक विशेष अदालत ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी मनीष कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और विश्वसनीय गवाह उपलब्ध नहीं थे। आरोपी करीब 16 महीने तक जेल में रहने के बाद रिहा हुआ। क्या है मामला ? मामले के अनुसार, यह विवाद 35,000 रुपये की कथित उधारी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोपी किराना दुकानदार था और आरोप है कि उसने अपने बकाया पैसे मांगने पर विवाद का सामना किया, जिसके बाद उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया गया। अदालत में यह भी सामने आया कि परिवारिक विवाद और आपसी रंजिश इस मामले की मुख्य वजह हो सकती है। सुनवाई में सामने आए कई विरोधाभास ट्रायल के दौरान अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। पीड़िता और उसके परिवार के बयानों में भी कई विरोधाभास सामने आए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में यह भी पाया गया कि मामला आपसी विवाद और वित्तीय लेनदेन से जुड़ा हो सकता है। अदालत ने कहा कि आरोप केवल धारणा और विवाद के आधार पर लगाए गए थे, जिनकी पुष्टि ठोस सबूतों से नहीं हुई। जेल में बिताने पड़े 16 महीने पुलिस ने 27 फरवरी 2025 को मामला दर्ज कर आरोपी को 28 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जेल में बंद रहा और वहीं से उसका ट्रायल चलता रहा। लंबे समय तक हिरासत में रहने के बाद अदालत ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पेश किए गए सबूत और रिकॉर्डिंग से भी आरोपों की पुष्टि नहीं होती, इसलिए आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है।
गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र में गुरुवार को दिनदहाड़े पंचायत मुखिया अनुपम भगत उर्फ लड्डू पर जानलेवा हमला किया गया। मुख्य बाजार स्थित पंडित टोला कांबली बगीचा के पास बाइक सवार बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी। घटना में मुखिया बाल-बाल बच गए, जबकि हमलावर वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घटनास्थल से एक खाली खोखा बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बैंक से लौटते समय हुआ हमला जानकारी के अनुसार, अनुपम भगत भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और करीब से दो राउंड फायरिंग की। गोली उन्हें नहीं लगी और वह सुरक्षित बच निकले। फायरिंग की आवाज से बाजार में अफरा-तफरी मच गई। मुखिया ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है। उन्होंने नयन यादव, अंकित यादव और विकास यादव समेत अन्य लोगों पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया है। हत्याकांड के गवाह होने से जुड़ा मामला प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अनुपम भगत वर्ष 2024 के चर्चित शैलेंद्र भगत हत्याकांड के मुख्य गवाह हैं और उन्होंने अदालत में आरोपियों के खिलाफ गवाही भी दी थी। इसी वजह से इस हमले को पुरानी रंजिश और गवाही से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। ग्रामीणों का प्रदर्शन, सुरक्षा पर उठे सवाल घटना के बाद हजारों ग्रामीण पोड़ैयाहाट थाना पहुंच गए और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाना का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुखिया को पहले से धमकियां मिल रही थीं, फिर भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। फिलहाल इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र के मुरकुंडा पंचायत अंतर्गत कोटेनगसेरा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस दौरान उनकी पत्नी सुगी देवी पर भी हमला किया गया, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहीं। पूरी रात उन्होंने गांव के आसपास छिपकर बिताई और सुबह घर लौटने पर पति को मृत पाया। जानकारी के अनुसार, पड़ोसी बहुरा उरांव के परिवार के कुछ सदस्य बीमार चल रहे थे। बीमारी का कारण जानने के लिए एक भगत को बुलाया गया, जिसने कथित तौर पर पालु खड़िया और उनकी पत्नी पर डायन-बिसाही का आरोप लगाया। इसके बाद मामला हिंसक हो गया और उन्हें घर बुलाकर मारपीट की गई। घर बुलाकर की गई बेरहमी से पिटाई ग्रामीणों के मुताबिक, बहुरा उरांव ने दंपति को अपने घर बुलाया और डायन होने का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पालु खड़िया को दीवार पर पटक दिया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वे बेहोश हो गए। सुगी देवी के साथ भी मारपीट की गई, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वह भाग निकलीं। रातभर लाश के पास रहा माहौल, आरोपी फरार महिला के भागने के बाद गंभीर रूप से घायल पालु खड़िया को घर लाकर छोड़ दिया गया। समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। सुबह जब सुगी देवी वापस लौटीं, तो उन्होंने अपने पति को मृत पाया। घटना के बाद मुख्य आरोपी बहुरा उरांव गांव से फरार हो गया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। गांव में दहशत, अंधविश्वास पर उठे सवाल इस घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें आज भी निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ती है।
जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के परसुडीह थाना क्षेत्र स्थित करनडीह लाइन टोला में अवैध संबंध के शक ने एक युवक की जान ले ली। मंगलवार देर रात हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में 35 वर्षीय मोहन हांसदा की मौत हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी जयराम मुर्मू को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अवैध संबंध के शक में बढ़ा विवाद पुलिस के अनुसार मृतक मोहन हांसदा मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला था और उसकी जयराम मुर्मू से अच्छी दोस्ती थी। इसी कारण वह अक्सर जयराम के घर आया-जाया करता था। इस दौरान जयराम को अपनी पत्नी और मोहन के बीच अवैध संबंध होने का संदेह होने लगा, जिससे घर में अक्सर तनाव और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। मंगलवार रात भी मोहन हांसदा जयराम के घर पहुंचा था। इसी दौरान तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते गंभीर झगड़े में बदल गई। गुस्से में जयराम ने पहले अपनी पत्नी के साथ मारपीट की और उसे घर से बाहर निकाल दिया। महिला अपने दोनों बच्चों को लेकर रात में ही दूसरे स्थान पर चली गई। गुस्से में किया जानलेवा हमला पत्नी के जाने के बाद जयराम और मोहन के बीच विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में आकर जयराम ने घर में रखी भारी स्टील की डेकची उठाकर मोहन पर हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोट लगने से मोहन की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलने पर परसुडीह पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन, खून से सनी स्टील की डेकची समेत कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं। परसुडीह थाना के सब-इंस्पेक्टर रितेश ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आसपास के लोगों और आरोपी की पत्नी से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही तीन मासूम बेटियों की बेरहमी से धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के तुरुकडीहा गांव की है, जहां सोमवार सुबह इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पूरे इलाके में सनसनी जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता नंदू यादव ने धारदार हथियार से अपनी तीनों बेटियों पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। हत्या के कारणों का खुलासा बाकी मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ जीतबाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता नंदू यादव को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीपीओ जीतबाहन उरांव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हत्या के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है
बोकारो। बोकारो जिले के राधानगर पंचायत के समीप लावाटांड़ क्षेत्र में रेलवे ट्रैक से तीन युवकों के शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। एक साथ तीन लोगों के शव मिलने से आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गयी। वहीं सूचना मिलने पर जीआरपी बोकारो की टीम मौके पर पहुंची और तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मृतकों की पहचान और मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है। मौत का कारण पता लगा रही पुलिस पुलिस को मौके से कई दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिसके आधार पर तीनों शव की पहचान को लेकर जांच की जा रही है। पुलिस हर एक एंगल से जांच में जुट गयी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इन तीनों की मौत ट्रेन के चपेट में आने से हुई है या फिर कोई और ही कारण है। मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही वजह का खुलासा हो पायेगा।
रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को रांची से चाईबासा जेल शिफ्ट किया जायेगा। कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी और फिलहाल रांची की होटवार (बिरसा मुंडा) केंद्रीय कारागार में बंद रिया सिन्हा को अब चाईबासा जेल में शिफ्ट किये जाने का आदेश जारी हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था और जेल के भीतर से आपराधिक गतिविधियों के संचालन की आशंकाओं को देखते हुए जेल प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है। जेल आईजी के आदेश के बाद कार्रवाई सुजीत सिन्हा गिरोह की कमान संभालने और रंगदारी व लेवी वसूलने के आरोपों में घिरी रिया सिन्हा को रांची जेल से हटाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक जेल आईजी के आदेश के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रिया सिन्हा को चाईबासा मंडल कारा भेजने का निर्णय लिया गया है। जेल से नेटवर्क ऑपरेट करने की आशंका जेल प्रशासन की कोशिश है कि राजधानी रांची की जेल में रहकर रिया सिन्हा अपने नेटवर्क को संचालित न कर सके। रिया सिन्हा पर अपने पति सुजीत सिन्हा के इशारे पर जेल के बाहर गिरोह को ऑपरेट करने, कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी (लेवी) वसूलने के गंभीर आरोप हैं। रंगदारी और लेवी वसूली के गंभीर आरोप पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि सुजीत सिन्हा जेल से ही प्रिंस खान गिरोह और अन्य अपराधियों के साथ मिलकर रंगदारी का नेटवर्क चला रहा था और रिया सिन्हा जेल के बाहर से उसकी मदद कर रही थी। इसके बाद रांची पुलिस ने रिया सिन्हा को गिरफ्तार किया था। हाई सिक्योरिटी निगरानी में रहेगी रिया सिन्हा गैंगस्टर सुजीत सिन्हा खुद राज्य की बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली दुमका या अन्य हाई-सिक्योरिटी जेलों में शिफ्ट किया जाता रहा है। अब उसकी पत्नी रिया सिन्हा पर भी प्रशासन की पैनी नजर है। रिया सिन्हा को चाईबासा जेल शिफ्ट करने से उसके स्थानीय नेटवर्क और गुर्गों से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। चाईबासा जेल शिफ्ट होने के बाद रिया सिन्हा पर चौबीसों घंटे सीसीटीवी (CCTV) और महिला कक्षपालों के जरिए कड़ी नजर रखी जाएगीताकि वह किसी भी बाहरी व्यक्ति या मोबाइल फोन के संपर्क में न आ सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।