हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में बड़कागांव थाना क्षेत्र के 13 माइल पुल के पास हुए हाइवा अगजनी मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से इलाके में पुलिस की सक्रियता और सतर्कता साफ नजर आई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। गुप्त सूचना के आधार पर चंदौल गांव स्थित हथिया पत्थर जंगल में छापेमारी की गई, जहां से चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद एजाज, मोहम्मद अफताब, मोहम्मद सलामत अंसारी और तुसार सिन्हा शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन पिस्टल, 11 जिंदा गोलियां, मोबाइल फोन और धमकी भरे पर्चे बरामद किए हैं। इन पर्चों में घटना की जिम्मेदारी कथित तौर पर राहुल दुबे गैंग द्वारा ली गई थी, जिससे मामले की साजिश का खुलासा हुआ।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पेट्रोल छिड़ककर हाइवा में आग लगाई थी। उनका मकसद कोल माइनिंग क्षेत्र में दहशत फैलाना था। पुलिस के अनुसार, यह संगठित अपराध का हिस्सा हो सकता है।
गिरफ्तार आरोपियों में से मोहम्मद सलामत अंसारी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि अन्य आरोपियों का भी आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस अब पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि त्वरित कार्रवाई और सटीक सूचना के कारण यह सफलता संभव हो पाई। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले के किस्को प्रखंड स्थित परहेपाठ पंचायत में जल संकट गंभीर रूप ले चुका है। ‘हर घर नल योजना’ के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे हजारों ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा। तीन साल से बंद पड़ा प्लांट किस्को आवासीय विद्यालय के पास बना यह प्लांट किस्को, गोसाई टोली और जनवल गांव के करीब एक हजार से अधिक परिवारों को पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। लेकिन खराब रखरखाव और लापरवाही के कारण यह पूरी तरह बेकार हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना में भ्रष्टाचार और घटिया काम के कारण यह स्थिति बनी है। महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर भीषण गर्मी में हालात और खराब हो गए हैं। महिलाओं को रोजाना लगभग 2 किलोमीटर दूर जोरी नदी तक पैदल जाकर पानी लाना पड़ रहा है। नहाने, कपड़े धोने और पीने के पानी के लिए भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार पंचायत स्तर पर शिकायत और विरोध के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। चुनाव के दौरान मिला अस्थायी समाधान ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव के समय प्लांट को अस्थायी रूप से चालू किया गया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही फिर से पानी आपूर्ति बंद हो गई। कई इलाकों में पाइपलाइन भी अधूरी पड़ी है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। प्रशासन के दावे, जमीन पर असर नहीं पीएचडी विभाग के अधिकारी ने बताया कि प्लांट को ठीक कराने के लिए ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं और जांच जारी है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ।
रांची। "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है झारखंड के एक उभरते सितारे प्रेम कुमार साहू ने। अभावों के बीच पलकर, फटे हाल जिंदगी को चुनौती देते हुए प्रेम ने वह मुकाम हासिल किया है, जो करोड़ों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गया है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित 10वीं की परीक्षा में प्रेम ने न केवल सफलता पाई, बल्कि पूरे राज्य में टॉप कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। संघर्ष से सफलता तक का सफर झारखंड मैट्रिक बोर्ड के नतीजे घोषित होते ही एक नाम पूरे राज्य की जुबान पर है—प्रेम कुमार साहू। प्रेम ने 500 में से 498 अंक हासिल कर 99.6% के साथ झारखंड का मान बढ़ाया है। साथ ही मान बढ़ाया है अपने स्कूल प्रेमचंद हाईस्कूल का। मान बढ़ाया है मेसरा स्थित अपने मोहल्ले का। तभी तो स्कूल प्रबंधन, स्कूल के प्राचार्य और गांव क लोगों के साथ पंचायत के मुखिया तक घर पहुंच कर प्रेम को बधाई दे रहे हैं। उनके घर पर मिलनेवालों और बधाई देनेवालों का तांता लगा है। लेकिन, यह सफलता सिर्फ अंकों की कहानी नहीं है, बल्कि उस कड़े संघर्ष की जीत है जो प्रेम और उनके परिवार ने हर रोज लड़ा है। पिता का अटूट संघर्ष प्रेम की इस सफलता के पीछे उनके पिता अर्जुन साहू का पसीना और त्याग छिपा है। अरुण जी एक मोटिया मजदूर हैं, जो दिन भर कड़ी धूप में मजदूरी करते हैं, ताकि घर का चूल्हा जल सके। लेकिन, परिवार की आर्थिक तंगी और बच्चों की पढ़ाई का बोझ इतना था कि वह दिन की मजदूरी से पूरा नहीं होता था। इसलिए, अरुण साहू ने एक पेट्रोल पंप पर वाहनों में इंधन भरने का भी काम शुरू कर दिया है। यानी पिता 24 घंटे में से अधिकांश समय सिर्फ इसलिए काम करते हैं, ताकि उनका बेटा किताबों के बीच अपना भविष्य तलाश सके। इतना ही नहीं, प्रेम की दीदी भी घर में उसका मार्गदर्शन करती है। प्रेम ने कभी कोई ट्यूशन नहीं लिया। बस स्कूल और घर की पढ़ाई। प्रेम की मेहनत और लगन प्रेम ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संघर्ष, दीदी के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। प्रेम बताते हैं कि घर की स्थिति देख कर कई बार मन विचलित होता था, लेकिन पिता की मेहनत को देखकर उन्होंने ठान लिया था कि वे पढ़ाई के जरिए ही इस गरीबी की बेड़ियों को काटेंगे। प्रेम ने बिना किसी महंगे कोचिंग या सुख-सुविधा के, अपनी एकाग्रता और लगन के दम पर यह असंभव सा दिखने वाला स्कोर हासिल किया। भविष्य के सपने प्रेम अब आगे इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। इसके लिए उसने आइआइटी की तैयारी करने की ठानी है। उनकी इस सफलता पर पूरे इलाके में जश्न का माहौल है। लोग उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। उन्हें बधाई देनेवालों में प्रेमचंद हाईस्कूल के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रेमचंद महतो, जिला परिषद सदस्य सह विद्यालय के सचिव संजय कुमार, पीसीएम इंटर कॉलेज के प्राचार्य उमेश यादव, प्रेमचंद हाईस्कूल के प्राचार्य उपेंद्र प्रसाद, शशि कला देवी, सरवर आलम, हरि मनी सूबेदी, सुरेश बड़ाईक और यशोदा कुमारी, संदीप राम, श्रीकांत महतो, नागेश्वर महतो, राजमोहन महतो, राजबाला प्रसाद, मृत्युंजय महतो के अलावा गांव के मुखिया और पंचायत के प्रतिनिध शामिल हैं। प्रेम कुमार साहू की यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा या अमीरी की मोहताज नहीं होती। अगर इरादे फौलादी हों और मेहनत सच्ची, तो पेट्रोल पंप की लाइट में बैठकर भी 'स्टेट टॉपर' बनने का सपना पूरा किया जा सकता है।
रांची। झारखंड में हवाई सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को बिरसा मुंडा हवाई अड्डा परिसर में निर्माणाधीन स्टेट हैंगर का निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, तकनीक और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया। सीएम ने दिए सख्त निर्देश निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और तय समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक आधारभूत संरचनाएं राज्य के विकास और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नई तकनीक और निगरानी पर जोर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्माण कार्यों में नवीनतम तकनीक, बेहतर संसाधनों और प्रभावी प्रबंधन के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समीक्षा इस मौके पर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी। पंचायती राज कार्यक्रम के लिए आमंत्रण इसी दौरान पंचायती राज विभाग की निदेशक बी. राजेश्वरी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें 24 अप्रैल 2026 को रांची में आयोजित होने वाले “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह मुखिया सम्मेलन 2026” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। झारखंड के विकास की दिशा में अहम कदम स्टेट हैंगर परियोजना के पूरा होने से राज्य की हवाई कनेक्टिविटी और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा। इसे झारखंड के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।