रांची । JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद छात्रों ने घेराव का कार्यक्रम जारी रखने का फैसला किया। सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विधानसभा की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और कई स्थानों पर बैरिकेड पर कंटीले तार लगाए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। छात्रों का दावा है कि झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से भी छात्र रांची पहुंचे हैं। कई छात्र रात में ही अलग-अलग रास्तों से विधानसभा के आसपास पहुंच गए और आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन की प्रमुख मांगें: भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच दोषियों पर कड़ी कार्रवाई भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता छात्रों की शिकायतों पर सरकार का ठोस निर्णय छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच अभिनेता और रंगकर्मी पियूष मिश्रा शनिवार को रांची पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की और उनके समर्थन में अपना चर्चित गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ गाया। उनके पहुंचने से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों में उत्साह बढ़ा। अभ्यर्थियों से मिले पियूष मिश्रा पियूष मिश्रा ने आंदोलन कर रहे युवाओं से बातचीत की और उनकी मांगों को समझने की कोशिश की। अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान पियूष मिश्रा ने युवाओं के बीच अपने गीत के जरिए उनका हौसला बढ़ाया। ‘आरंभ है प्रचंड’ उनके लोकप्रिय गीतों में शामिल है और आंदोलनों तथा सामाजिक कार्यक्रमों में भी इसे अक्सर सुना जाता है। JPSC-JSSC विवाद को लेकर आंदोलन झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की है। मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। युवाओं के बीच पियूष मिश्रा की मौजूदगी चर्चा में पियूष मिश्रा के आंदोलन स्थल पर पहुंचने और गीत गाने का वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उनके गीत ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बीच जोश पैदा किया। पियूष मिश्रा की मौजूदगी ने इस आंदोलन को मनोरंजन जगत से भी एक अलग तरह का समर्थन मिलने की चर्चा शुरू कर दी है। वहीं, अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार की ओर से उनकी मांगों पर लिए जाने वाले अगले फैसले पर है।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया। सिदो-कान्हू पार्क के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में झड़प हो गई। पुलिस ने करीब 8 से 10 ABVP कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे कार्यकर्ता ABVP कार्यकर्ता JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा समेत भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। संगठन का आरोप है कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से आयोजित वार्ता में ABVP को शामिल नहीं किया गया। इसी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। पुलिस से हुई झड़प, कई प्रदर्शनकारी घायल प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा ABVP कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है। पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की और करीब 8 से 10 लोगों को हिरासत में लिया। JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर आंदोलन तेज झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है। ABVP ने भी छात्रों की मांगों के समर्थन में आंदोलन तेज करने का रुख अपनाया है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी की भी खबरें सामने आई हैं।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। आंदोलन के बीच बिगड़ी तबीयत देवेंद्र नाथ महतो लंबे समय से छात्र और अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन में सक्रिय हैं। लगातार प्रदर्शन और आंदोलन के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर समर्थकों और आंदोलन में शामिल छात्रों के बीच चर्चा तेज है। सरकार और छात्रों के बीच वार्ता पर नजर इसी बीच JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर राज्य सरकार और छात्र संगठनों के बीच वार्ता का दौर भी जारी है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और अभ्यर्थियों के हित में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर ऐसे समय सामने आई है जब आंदोलन को लेकर सरकार पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन 16वें दिन भी जारी है। आंदोलन को समाप्त कराने और छात्रों की मांगों पर सहमति बनाने के लिए राज्य सरकार और छात्र संगठनों के बीच आज दोपहर 12 बजे नए दौर की वार्ता बुलाई गई है। 16वें दिन भी जारी है छात्रों का आंदोलन छात्र संगठन JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। लगातार आंदोलन के कारण राज्य में भर्ती परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ा है। दोपहर 12 बजे होगी वार्ता राज्य सरकार की ओर से छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का नया दौर दोपहर 12 बजे आयोजित किया गया है। इससे पहले भी सरकार और छात्रों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कई मांगों पर सहमति नहीं बन सकी थी। आज की बैठक में आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें छात्र संगठन कथित परीक्षा धांधली और अनियमितताओं की जांच के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है। वार्ता के नतीजे पर नजर 16 दिनों से जारी आंदोलन के बीच आज की वार्ता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है, तो आंदोलन खत्म होने का रास्ता खुल सकता है। अब सभी की नजरें दोपहर 12 बजे होने वाली वार्ता और उसके बाद सरकार तथा छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान शुक्रवार, 7 अगस्त को AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना सामने आई। यह घटना उस समय हुई जब छात्र और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग रांची के बिरसा चौक से विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने स्याही फेंकने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया है। बिरसा चौक के पास हुई घटना रिपोर्टों के मुताबिक, करीब एक हजार छात्रों और कार्यकर्ताओं का मार्च विधानसभा की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान भीड़ के बीच से एक व्यक्ति ने नेहा बोरा और कुछ महिला प्रदर्शनकारियों पर काली स्याही फेंक दी। घटना के बाद कुछ समय के लिए मौके पर हंगामा हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिस के अनुसार, अभी तक औपचारिक शिकायत नहीं मिलने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। आरोपी ने बताई अलग वजह हिरासत में लिए गए युवक की पहचान अमरनाथ पांडेय के रूप में हुई है। उसने मीडिया से कहा कि वह नेहा बोरा द्वारा उमर खालिद के समर्थन किए जाने से नाराज था और इसी वजह से उसने स्याही फेंकी। हालांकि, नेहा बोरा और AISA की ओर से घटना को राजनीतिक रूप से प्रेरित हमला बताया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच हुआ प्रदर्शन यह मार्च झारखंड में JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और JSSC-CGL समेत भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन का हिस्सा था। प्रदर्शनकारी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं और संबंधित परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा कराने तथा जांच की मांग कर रहे हैं। नेहा बोरा ने घटना के बाद कहा कि स्याही फेंकने से वह डरने वाली नहीं हैं और छात्र आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान महिला प्रतिभागियों को निशाना बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। राजनीतिक और छात्र संगठनों ने की निंदा घटना के बाद CPI(ML) और विभिन्न छात्र संगठनों ने स्याही फेंकने की घटना की निंदा की और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं, कुछ संगठनों की ओर से घटना को लेकर अलग दावे भी किए गए हैं। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए युवक से पूछताछ कर रही है। घटना के पीछे की पूरी वजह और किसी संगठन की कथित भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) नियुक्ति घोटाले की जांच अब और तेज हो गयी है. मामले में अब तक हुई पूछताछ, छापेमारी और गिरफ्तारियों के बाद सीआईडी की जांच का दायरा आयोग के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सदस्यों तक पहुंच गया है. इसी क्रम में JPSC के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है. सूत्रों के अनुसार, सीआईडी तीनों सदस्यों से सोमवार से अलग-अलग पूछताछ करेगी. जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश करेगी कि कथित नियुक्ति अनियमितताओं के दौरान आयोग के स्तर पर किस तरह की प्रक्रिया अपनायी गयी और संबंधित अधिकारियों एवं अन्य लोगों की क्या भूमिका थी. हालांकि, नोटिस जारी किया जाना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है. जांच में सामने आ रहे हैं कई बड़े नाम JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में सीआईडी अब कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्हें पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है. जांच के दौरान टीडीपीएल कंपनी से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आयी है. सूत्रों के मुताबिक, टीडीपीएल में कथित गड़बड़ी का मुख्य सूत्रधार कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी बताया जा रहा है. हालांकि जांच एजेंसी को ऐसी जानकारी भी मिली है कि वह खुद किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर काम कर रहा था. एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पूरे मामले में फैसले लेने वाले लोग कौन थे. पूर्व JPSC अध्यक्ष से पहले हो चुकी है कई बार पूछताछ सीआईडी इस मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से पहले ही कई दौर की पूछताछ कर चुकी है. जांच की शुरुआत में उनके आवास और कार्यालय पर भी छापेमारी की गयी थी. इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके अलावा टीडीपीएल कंपनी के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में भी जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की बात सामने आयी है. इसी जांच के आधार पर अब आयोग के तीन सदस्यों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया है. तीनों सदस्यों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी. अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी सीआईडी इस मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी कथित नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों की जांच कर रही है. एजेंसी की जांच केवल रांची तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ राज्य के बाहर भी जांच का दायरा बढ़ाया गया है. करीब 2 हजार OMR शीट CID को मिली चौदहवीं JPSC परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों ने सीआईडी को करीब 2,000 OMR शीट उपलब्ध करायी हैं. जांच अधिकारी इन शीटों की जांच कर रहे हैं. जिन OMR शीट पर संदेह है, उन्हें आगे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि OMR शीट और कंप्यूटर डेटा में कथित तौर पर किसी तरह की छेड़छाड़ हुई थी या नहीं. फॉरेंसिक रिपोर्ट इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. पूर्व अध्यक्ष के स्टाफ से भी मिली जानकारी जांच के दौरान सीआईडी ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष के यहां कंप्यूटर ऑपरेटर रहे धर्मेंद्र और टीडीपीएल के लेखापाल रक्षक सिंह को भी गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ के दौरान एजेंसी को कथित तौर पर आयोग से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिली हैं. जांच में यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि दोनों को कथित गड़बड़ियों की जानकारी थी और कंप्यूटर डेटा तथा OMR शीट से संबंधित गतिविधियों में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है. सीआईडी ने दोनों के मोबाइल फोन भी जब्त किये हैं और उनके डिजिटल डेटा की जांच जारी है. मुख्यमंत्री कर रहे मामले की मॉनिटरिंग JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर की जा रही है. मुख्यमंत्री समय-समय पर जांच की प्रगति की जानकारी लेते रहे हैं. जांच में बड़े नाम सामने आने के बाद भी एजेंसी की ओर से मुख्यमंत्री को जानकारी दिये जाने की बात कही गयी है. मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा. सरकार की ओर से जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की बात कही गयी है. अब तीन JPSC सदस्यों से होने वाली पूछताछ को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है. सीआईडी के सवालों और पूछताछ से सामने आने वाली जानकारियों के आधार पर आने वाले दिनों में मामले में और कार्रवाई होने की संभावना है.
रांची: जेपीएससी-जेडएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में पिछले 14 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन अब बातचीत के दौर में पहुंच गया है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल और राज्य सरकार के बीच शुक्रवार देर शाम करीब डेढ़ घंटे तक वार्ता हुई. हालांकि बैठक के बाद भी छात्रों की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है. ऐसे में 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव होगा या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में तीन गैर-छात्र हटे सरकार के साथ वार्ता के लिए छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया था. हालांकि सरकार की ओर से गैर-छात्र सदस्यों को लेकर आपत्ति जतायी गयी. इसके बाद समिति से तीन गैर-छात्र सदस्यों को हटा दिया गया और संशोधित प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत शुरू हुई. करीब शाम 7:50 बजे शुरू हुई वार्ता लगभग डेढ़ घंटे तक चली. बैठक में छात्रों ने जेपीएससी-जेडएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं से जुड़ी अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं. मंत्रियों ने कहा- मांगों पर गंभीरता से होगा विचार वार्ता के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि छात्रों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है. छात्रों ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखी हैं और सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है. छात्र प्रतिनिधि रविंद्र पासवान ने बताया कि सरकार को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंप दिया गया है. उनके अनुसार, मंत्रियों ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जायेगा. छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल वर्तमान अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है. ठोस फैसला नहीं हुआ तो 10 अगस्त को विधानसभा घेराव छात्र प्रतिनिधि ने कहा कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जायेगा. तब तक छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा. यानी वार्ता के बाद भी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी है. वार्ता के बाद CM आवास पहुंचे मंत्री छात्रों के साथ बैठक खत्म होने के बाद सरकार की ओर से वार्ता में शामिल मंत्री मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और उन्हें पूरी बातचीत की जानकारी दी. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि छात्रों के साथ बातचीत सकारात्मक रही. छात्रों ने जेपीएससी से जुड़े कुछ तकनीकी मुद्दे भी उठाये हैं, जिन्हें लिखित रूप में देने के लिए कहा गया है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि छात्रों के साथ दूसरे दौर की वार्ता भी हो सकती है. हेमंत सोरेन बोले- सरकार का दरवाजा खुला है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के आंदोलन को लेकर कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों की समस्याओं को समझना चाहती है. उन्होंने छात्रों से सरकार को अपने सुझाव देने की अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सभी जरूरी मंच उपलब्ध कराये गये हैं और सरकार का दरवाजा खुला है. सरकार युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने और उनकी चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम कर रही है. सीएम ने यह भी कहा कि केवल रांची के छात्रों ही नहीं, बल्कि राज्य के अलग-अलग जिलों में रहने वाले युवाओं और विद्यार्थियों के सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं. सरकार सभी जिलों के छात्र-छात्राओं की राय लेने की दिशा में काम करेगी. अब अगले कदम पर सबकी नजर 14 दिनों से जारी आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच हुई यह पहली बड़ी वार्ता मानी जा रही है. बातचीत का दौर शुरू होने से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन छात्रों की मांगों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार कब तक ठोस निर्णय लेती है और क्या 10 अगस्त का प्रस्तावित विधानसभा घेराव टलता है या छात्र अपने आंदोलन को और तेज करते हैं.
रांची: जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की सेहत अब बिगड़ने लगी है. आमरण अनशन पर बैठे पलामू निवासी छात्र राहुल क्रांति की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों की जांच में उन्हें वायरल फीवर होने की पुष्टि हुई है. इससे आंदोलनरत छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गयी है. शनिवार सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों की टीम ने अनशन स्थल पर राहुल क्रांति की स्वास्थ्य जांच की. तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है. सदर अस्पताल में राहुल क्रांति का चल रहा इलाज सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में राहुल क्रांति ही भर्ती हैं. डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है और उनकी स्थिति स्थिर बतायी गयी है. इससे पहले भी एक अन्य छात्र को अचानक बेहोश होने के बाद अस्पताल लाया गया था. चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के साथ उसे ड्रिप चढ़ायी, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गयी. स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद छात्र ने अस्पताल से छुट्टी देने का अनुरोध किया. जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज कर दिया. बारिश और उमस के बीच बढ़ा बीमारियों का खतरा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार धरना और अनशन कर रहे हैं. रांची में लगातार बारिश और उमस भरे मौसम के बीच खुले स्थान पर रहने के कारण छात्रों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है. धरना स्थल पर मौजूद कई छात्रों में सिरदर्द, गले में खराश या दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है. भीड़भाड़ और गीले-उमस वाले माहौल के कारण मौसमी और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. प्रशासन से मेडिकल कैंप लगाने की मांग आइसा के झारखंड सचिव त्रिलोकीनाथ ने दावा किया है कि आंदोलन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी और लगातार खुले में रहने के कारण कई प्रतियोगी छात्र वायरल फीवर, डिहाइड्रेशन और मौसमी बीमारियों से परेशान हैं. उन्होंने प्रशासन से आंदोलन स्थल पर तत्काल चिकित्सा व्यवस्था और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है, ताकि अनशन पर बैठे छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच हो सके.
रांची के अराजनैतिक छात्र आंदोलन में आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा की एंट्री से विवाद खड़ा हो गया है। नाराज छात्रों ने उनका विरोध करते हुए उन पर स्याही फेंक दी, जिससे छात्र आंदोलन के राजनीतिकरण पर नई बहस छिड़ गई है。 झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन अब एक नए मोड़ पर आ गया है। जो प्रदर्शन अब तक पूरी तरह से दलगत राजनीति और राजनीतिक बैनरों से दूर था, उसमें राष्ट्रीय स्तर के वामपंथी छात्र नेताओं की एंट्री से स्थानीय प्रतियोगी छात्र भड़क गए हैं। इसी वैचारिक टकराव और आक्रोश का नतीजा था कि जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा इस आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचीं, तो उन पर विरोध स्वरूप स्याही फेंक दी गई। घटना के वक्त आंदोलन स्थल पर छात्रों की भारी भीड़ मौजूद थी। चश्मदीदों के अनुसार, जैसे ही नेहा बोरा वहां पहुंचीं, कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके हस्तक्षेप का कड़ा विरोध शुरू कर दिया। स्थानीय छात्रों का मानना है कि रोजगार और परीक्षा सुधार से जुड़े उनके इस शुद्ध आंदोलन को बाहरी राजनीतिक संगठनों द्वारा 'हाईजैक' करने की कोशिश की जा रही है। इसी गहमागहमी के बीच कुछ लोगों ने बोरा पर स्याही फेंक दी, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत स्थिति को संभाला और सुरक्षा कड़ी कर दी गई। स्याही कांड पर नेहा बोरा का तीखा पलटवार स्याही फेंके जाने की इस घटना के बाद नेहा बोरा ने कड़े तेवर दिखाए और इसके पीछे सीधे तौर पर दक्षिणपंथी संगठनों की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने अपने संघर्ष का हवाला देते हुए कहा, "20 जुलाई को हम पर आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठियां चलाई गईं और पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ था। तब भी छात्र नहीं डरे थे, तो अब स्याही फेंकने से क्या डरेंगे?" उन्होंने हमलावरों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "बीजेपी और आरएसएस के लोग स्टेडियम में बैठकर कहते हैं कि वे छात्रों के साथ हैं, लेकिन वही लोग मेरे ऊपर स्याही फेंकते हैं। आखिर ये किस तरह के छात्र हितैषी हैं?" बोरा ने खुले तौर पर चुनौती देते हुए स्पष्ट किया कि अगर किसी को लगता है कि स्याही फेंकने से छात्रों का गुस्सा शांत हो जाएगा, तो वे गलतफहमी में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी नफरत की राजनीति से छात्र आंदोलन को नहीं दबाया जा सकता। कौन हैं नेहा बोरा और क्यों हो रहा है विरोध? जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स की पीएचडी रिसर्च स्कॉलर नेहा बोरा देश की एक प्रमुख वामपंथी छात्र नेता हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली, जब हाल ही में नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन्होंने लगातार 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उनकी संस्था AISA, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से संबद्ध है। रांची के छात्रों की नाराजगी इसी बात को लेकर है कि वे अपने भविष्य की लड़ाई को जेएनयू या जंतर-मंतर की वामपंथी राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देना चाहते। इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रोजगार की मांग कर रहे झारखंड के युवा अपने आंदोलन को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचा पाएंगे, या यह प्रदर्शन राष्ट्रीय दलों की सियासी बिसात का नया मोहरा बन जाएगा? फिलहाल, इस स्याही कांड ने रांची के छात्र आंदोलन का सियासी पारा जरूर बढ़ा दिया है।
रांची। 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा इस उद्देश्य से गठित समिति संवाद का माध्यम बनेगी। 'सरकार बातचीत के लिए तैयार' मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहती है। उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए बनाई गई समिति के माध्यम से सरकार छात्रों के सुझाव और शिकायतें जानने की इच्छुक है, ताकि उचित समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। 'मुद्दे को जयपाल सिंह स्टेडियम से बाहर तक ले जाना चाहते हैं' हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार चाहती है कि यह चर्चा केवल जयपाल सिंह स्टेडियम तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राज्य के छात्र-छात्राएं भी इस विषय पर अपनी राय रखें। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में व्यापक और मजबूत सुधार (रिफॉर्म) लाने की दिशा में काम करना चाहती है, ताकि युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जा सके। 14 दिनों से जारी है छात्र आंदोलन 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र पिछले 14 दिनों से रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं। आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। वार्ता पर अब भी बनी हुई है स्थिति सरकार की ओर से बातचीत की पहल के बावजूद अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच वार्ता की संभावना जताई जा रही है, हालांकि प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ नामों को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। सत्तापक्ष ने आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया है। क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें? छात्रों की मुख्य मांगें हैं कि TDPL कंपनी द्वारा आयोजित JPSC और JSSC की हालिया परीक्षाओं को रद्द किया जाए, पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए और दोनों आयोगों में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ठोस सुधारात्मक कदम उठाए।
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा। इसी दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। छह दिन से भूख हड़ताल पर थे छात्र रिपोर्ट के अनुसार राहुल क्रांति उन छह प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं, जो भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे हैं। लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने लगी। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल से सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी का विरोध छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का सरकार और संबंधित आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। आंदोलन के 14वें दिन छात्रों का विरोध और तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। विधानसभा मार्च की भी तैयारी भूख हड़ताल के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने शुक्रवार को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने की तैयारी की। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहते हैं। आंदोलन को लेकर राजनीतिक समर्थन भी सामने आया है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने के साथ ही छात्रों की मांगों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। छात्रों की मांगों पर टिकी नजर JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी आंदोलन अब स्वास्थ्य संकट तक पहुंच गया है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत की मांग भी तेज हो रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए क्या ठोस निर्णय लिया जाता है।
पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चुनाव परिणाम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य की पारंपरिक जातीय राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो रही है? खासकर यादव और कुर्मी वोटों के एक साथ आने की चर्चा ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को मिले समर्थन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कुर्मी समाज का एक वर्ग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू से दूरी बना रहा है, या फिर यह केवल उपचुनाव तक सीमित एक राजनीतिक संदेश था। बिहार की राजनीति में 'सोशल इंजीनियरिंग' का इतिहास मंडल राजनीति के बाद बिहार में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति की धुरी रहे हैं। एक समय लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण बेहद प्रभावी रहा। दूसरी ओर, वर्ष 1994 में नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के जरिए 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी/कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत किया। इसी सामाजिक समीकरण और भाजपा के सवर्ण एवं वैश्य समर्थन के साथ एनडीए ने बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक सत्ता में रहा। क्या यादव और कुर्मी वोट एक मंच पर आ रहे हैं? बांकीपुर उपचुनाव के बाद चर्चा इस बात की है कि जन सुराज के उम्मीदवार को यादव और कुर्मी दोनों वर्गों का समर्थन मिला। यदि यह आकलन सही है, तो यह बिहार की पारंपरिक जातीय राजनीति में एक नए समीकरण की संभावना का संकेत माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि एक उपचुनाव के आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का आकलन नहीं किया जा सकता। कुर्मी समाज की नाराजगी बनी चर्चा का विषय राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी कहा जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव ऐसे समय हुआ जब मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने को लेकर कुर्मी समाज के एक वर्ग में असंतोष था। इसके साथ ही जदयू के संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव और पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी कुछ वर्गों में नाराजगी की चर्चा रही। विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर उपचुनाव में देखने को मिला, जहां कुछ पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव के संकेत दिखाई दिए। क्या यह बदलाव स्थायी है? वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क का मानना है कि बांकीपुर में दिखाई दिया यह राजनीतिक समीकरण फिलहाल परिस्थितिजन्य हो सकता है। उनके अनुसार, कुर्मी समाज में नाराजगी जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह स्थायी रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ जाएगा। उनका कहना है कि यदि जदयू भविष्य में अपने पारंपरिक समर्थकों का भरोसा दोबारा जीतने में सफल नहीं होती, तो कुर्मी वोटों का एक हिस्सा जन सुराज की ओर जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है। राजनीतिक संकेतों पर सबकी नजर बांकीपुर उपचुनाव ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि यह बदलाव स्थायी होगा या सिर्फ उपचुनाव तक सीमित रहेगा, इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।
रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र दूसरे दिन भी JPSC-JSSC कथित धांधली मामले को लेकर गरमाया रहा. विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. बीजेपी विधायक सदन के बाहर से लेकर अंदर तक इस मुद्दे पर सरकार को घेरते नजर आए. वहीं, दूसरी ओर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे एक छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. 'JPSC रेट चार्ट' पहनकर विधानसभा पहुंचे BJP विधायक विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले बीजेपी विधायकों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. कई विधायक शरीर पर 'JPSC रेट चार्ट' लिखे चोले पहनकर विधानसभा पहुंचे. इन चोलों पर जेपीएससी की विभिन्न नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर आरोप लिखे गए थे. बीजेपी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई. सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए और वेल में पहुंचकर हंगामा किया. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश नहीं देती, तब तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है. अनशन कर रहे छात्र राहुल की बिगड़ी तबीयत इधर, जेपीएससी-जेडएसएससी मामले को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन अनशन जारी है. शुक्रवार को अनशन पर बैठे छात्र राहुल की अचानक तबीयत खराब हो गई. स्थिति बिगड़ने के बाद साथी छात्रों ने तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था की और उसे इलाज के लिए रांची सदर अस्पताल भेजा गया. फिलहाल छात्र का इलाज जारी है. घटना की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है. छात्रों की मांगों को लेकर जारी है आंदोलन अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं सरकार की ओर से मामले में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही जा रही है. JPSC-JSSC विवाद को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है. आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे पर विपक्ष के आक्रामक रुख जारी रहने के संकेत हैं.
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले चल रहे आंदोलन के 13वें दिन कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई तथा कांग्रेस की ओर से उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। छात्रों ने राहुल गांधी के सामने रखीं अपनी मांगें फोन पर हुई बातचीत में आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगों और चिंताओं से राहुल गांधी को अवगत कराया। छात्रों ने कहा कि कांग्रेस झारखंड सरकार का हिस्सा है, इसलिए उनसे अधिक उम्मीदें हैं। प्रतिनिधियों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो क्या कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार करेगी। राहुल गांधी बोले- संवाद के जरिए निकलेगा समाधान छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल बातचीत का रास्ता खुला हुआ है और वह भी अपने स्तर पर संवाद की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों की मांगों को लिखित रूप में पार्टी के प्रतिनिधियों के माध्यम से लिया जाएगा और उन्हें उचित स्तर पर रखा जाएगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस विद्यार्थियों के हित में शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में सुधार की पक्षधर है। कांग्रेस ने छात्रों को दिया पूरा समर्थन झारखंड कांग्रेस महानगर अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा कि राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया है कि पूरी कांग्रेस पार्टी उनकी जायज मांगों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए पार्टी हरसंभव प्रयास करेगी और सरकार के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा। सरकार से वार्ता का इंतजार, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी बातचीत के बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधि रविंद्र पासवान और पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि सरकार को वार्ता के लिए डेलीगेट्स की सूची पहले ही सौंप दी गई है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि जल्द वार्ता शुरू नहीं हुई तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम तय समय पर आयोजित किया जाएगा। देर रात तक नहीं मिला सरकार की ओर से कोई जवाब आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि एसडीओ के माध्यम से प्रशासन को प्रतिनिधिमंडल की सूची सौंप दी गई है और अब सरकार की ओर से वार्ता की तिथि और समय तय किया जाना बाकी है। हालांकि देर रात तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया या वार्ता का निमंत्रण नहीं मिला। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी धरना स्थल पर डटे रहे और आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया।
रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने विधानसभा के नए परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश 6 अगस्त की सुबह 8 बजे से 12 अगस्त की रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बीच प्रशासन के इस कदम को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने पर रोक प्रशासन के आदेश के अनुसार निषेधाज्ञा की अवधि में विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जमा होने पर रोक रहेगी। इसके साथ ही धरना, प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली और आमसभा आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी। ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा। हालांकि सरकारी ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रमों को इस आदेश से छूट दी गई है। हथियार और पारंपरिक हथियार ले जाने पर भी प्रतिबंध निषेधाज्ञा के दौरान किसी भी तरह के अस्त्र-शस्त्र लेकर चलने पर रोक रहेगी। प्रशासन ने लाठी-डंडा, तीर-धनुष, भाला और गड़ासा जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ चलने पर भी प्रतिबंध लगाया है। हालांकि यह आदेश झारखंड हाईकोर्ट परिसर पर लागू नहीं होगा। छात्र आंदोलन के बीच प्रशासन का फैसला झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान किया था। इसी बीच विधानसभा का मानसून सत्र भी 6 से 12 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। छात्रों की मांगों और आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश भी चल रही है। ताजा अपडेट के अनुसार छात्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, जबकि आंदोलन से जुड़े कुछ नेता अपनी मांगों को लेकर अब भी धरने पर हैं। विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा बढ़ी विधानसभा सत्र और छात्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। निषेधाज्ञा लागू करने का उद्देश्य विधानसभा परिसर के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी अप्रिय स्थिति को रोकना बताया गया है। अब विधानसभा सत्र के दौरान JPSC-JSSC विवाद और छात्रों की मांगों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।
पटना: राजधानी पटना में पिछले छह दिनों से जारी नगर निगम सफाईकर्मियों की हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना नगर निगम और सफाईकर्मी संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी। समझौते के बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और सफाईकर्मी प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। इस बैठक में पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा भी मौजूद रहे। हड़ताल खत्म होने से शहर की सफाई व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद है। पिछले कई दिनों से राजधानी के विभिन्न इलाकों में कूड़े के ढेर लगने से लोगों को बदबू, गंदगी और संक्रमण का खतरा झेलना पड़ रहा था। अब सीधे बैंक खाते में आएगा वेतन, पहली बार मिलेगा बोनस समझौते के तहत सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि आउटसोर्सिंग और ठेका एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले सफाईकर्मियों का वेतन अब सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सकेगा। इसके साथ ही पहली बार सफाईकर्मियों को बोनस देने का भी निर्णय लिया गया है। ठेका एजेंसियों को उनका निर्धारित कमीशन मिलता रहेगा, लेकिन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की देरी या कटौती नहीं होगी। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यदि काम के दौरान सफाई वाहन खराब हो जाता है तो उस अवधि के लिए चालकों के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। दैनिक कर्मियों को मिलेंगी स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं पटना नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि राज्य सरकार नगर निकायों में कार्यरत सफाईकर्मियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दैनिक कर्मियों को भविष्य में अवकाश, ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन तथा अन्य सेवा लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिल सकें। 3816 कर्मचारियों के स्थायीकरण से बढ़ेगा वित्तीय भार नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति ने 3816 दैनिक सफाईकर्मियों के स्थायीकरण की मांग को मंजूरी देकर विभाग को भेजने की अनुशंसा की है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो प्रत्येक कर्मचारी का प्रस्तावित मासिक वेतन 35,800 रुपये होगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों पर प्रतिमाह लगभग 6.04 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि स्थायीकरण के बाद यह खर्च बढ़कर 13.66 करोड़ रुपये प्रति माह हो जाएगा। इससे नगर निगम पर हर महीने लगभग 7.61 करोड़ रुपये और सालाना करीब 163.94 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। किस अंचल में कितने कर्मचारी कार्यरत पटना नगर निगम के आठ अंचलों और कार्यालयों में कुल 3816 दैनिक सफाईकर्मी कार्यरत हैं। नूतन राजधानी अंचल – 941 कर्मचारी पाटलिपुत्र अंचल – 700 अजीमाबाद – 585 बांकीपुर – 513 कंकड़बाग – 426 पटना सिटी – 405 जलापूर्ति अंचल – 199 मुख्यालय – 47 कर्मचारी अन्य मांगों पर बनेगी समिति नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि कई मांगों पर सहमति बन गई है, जबकि अन्य लंबित मांगों पर विचार के लिए एक समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि एसीपी और एमएससीपी योजना के लाभ पर लगी रोक हटाने के लिए विभाग स्तर पर पत्राचार किया जाएगा। जैसे ही यह रोक हटेगी, पात्र कर्मचारियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए कर्मचारियों का काम पर लौटना बेहद आवश्यक था और समझौते से राजधानी को बड़ी राहत मिलेगी। शहर को मिली राहत हड़ताल के दौरान पटना के कई इलाकों में कूड़े के ढेर जमा हो गए थे, जिससे आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही थी। नगर निगम पर सफाई व्यवस्था बहाल करने का दबाव भी बढ़ गया था। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद उम्मीद है कि शहर की सफाई व्यवस्था जल्द सामान्य हो जाएगी और लोगों को राहत मिलेगी।
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बढ़ा दबाव, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल आज CM हेमंत सोरेन से करेगा मुलाकात रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। इसी बीच कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर छात्रों की मांगों और परीक्षा विवाद का मुद्दा उठाएगा। कांग्रेस नेताओं की कोशिश है कि सरकार छात्रों की शिकायतों पर जल्द ठोस कार्रवाई करे। 12वें दिन भी जारी है छात्रों का आंदोलन JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार 12वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का भी ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव की योजना बनाई गई है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के सामने रखेगा मांगें कांग्रेस नेता बंधु तिर्की समेत पार्टी नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के सामने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े छात्रों के सवाल और उनकी प्रमुख मांगें रखेगा। इस मुलाकात को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में पार्टी के भीतर से छात्रों के मुद्दे पर सरकार पर बढ़ता दबाव राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। हेमंत सोरेन बोले- सरकार मामले को गंभीरता से ले रही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें न्याय दिलाने की कोशिश की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद अब कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ होने वाली बैठक पर नजर है। छात्रों को उम्मीद है कि बैठक के बाद सरकार परीक्षा विवाद को लेकर कोई ठोस कदम उठा सकती है।
देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद तोड़ा अनशन, छात्रों का आंदोलन जारी रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद अनशन तोड़ने का फैसला किया। हालांकि, परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन अभी जारी है। सोनम वांगचुक से हुई बातचीत अनशन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हुई। बातचीत में छात्र आंदोलन और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके बाद महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। अनशन खत्म होने के बावजूद छात्रों की प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है। परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों में नाराजगी JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि केवल अनशन समाप्त होने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाने तक विरोध जारी रहेगा। सरकार से समाधान की मांग छात्र संगठन सरकार से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की ओर से परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है। वहीं, सरकार की ओर से भी छात्रों की समस्याओं पर बातचीत और समाधान का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर देवेंद्र नाथ महतो के अनशन समाप्त करने के बाद अब छात्र आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर है। आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की तैयारी में हैं। फिलहाल अनशन खत्म होने के बावजूद JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सरकार तथा छात्रों के बीच आगे की बातचीत इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद के बीच छात्रों का तिरंगा मार्च, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन के 12वें दिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर तिरंगा मार्च निकालने और 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर नाराजगी प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में कई स्तरों पर खामियां और कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए और अभ्यर्थियों के हितों से जुड़े मामलों का निष्पक्ष समाधान किया जाए। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसी वजह से आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। तिरंगा मार्च से आंदोलन तेज करने की तैयारी आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांगों को ज्यादा मजबूती से उठाने के लिए तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की है। इसके जरिए छात्र सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आंदोलन में बड़ी संख्या में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के शामिल होने की बात कही जा रही है। प्रदर्शनकारियों का जोर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान छात्रों ने आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से छात्रों के जुटने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों की ओर से भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है। विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां किए जाने की संभावना है। छात्रों की मांगों पर सरकार के रुख पर नजर छात्रों का आंदोलन अब लगातार 12वें दिन तक पहुंच गया है। ऐसे में सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलने पर नजर बनी हुई है। फिलहाल छात्रों ने साफ किया है कि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में तिरंगा मार्च और 10 अगस्त के विधानसभा घेराव से आंदोलन की दिशा और तेज होने की संभावना है।
रांची में JPSC के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी, राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। तेज बारिश और उमस के बावजूद छात्र धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक आंदोलन है और किसी भी राजनीतिक दल या नेता को मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. छात्रों ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के समर्थन पर भी दोटूक जवाब देते हुए कहा कि वे किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि कोई समर्थन देना चाहता है तो केवल नैतिक समर्थन दे, लेकिन आंदोलन को राजनीतिक मंच नहीं बनाया जाएगा। क्या हैं छात्रों की मांगें? छात्र 14वीं JPSC पीटी परीक्षा और JSSC की अन्य विवादित परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि: 14वीं JPSC परीक्षा रद्द की जाए। सभी विवादित परीक्षाओं की जांच CBI से कराई जाए। परीक्षा संचालन से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को हटाया जाए। OMR शीट में पांचवां विकल्प जोड़ा जाए, ताकि छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो। कटऑफ और मेरिट सूची को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। CID जांच पर जताया अविश्वास प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच की जरूरत है। उनका आरोप है कि JPSC मामले की CID जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि पहले JSSC CGL मामले की जांच भी CID ने की थी, लेकिन उसका परिणाम सामने नहीं आया। कैसे चल रहा है आंदोलन? छात्रों के अनुसार आंदोलन का संचालन एक छात्र समिति कर रही है। भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में स्थानीय मंदिरों, सामाजिक संस्थाओं और अभिभावकों का सहयोग मिल रहा है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए समिति लगातार रणनीति बना रही है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव छात्रों ने घोषणा की है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उनका कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से जारी रहेगा। बारिश के बीच भी आंदोलन स्थल पर छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई छात्र लोकगीत और राष्ट्रगान गाकर प्रदर्शन को ऊर्जा देते रहे और अपनी मांगों को लेकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।