871 – ब्रिटेन और डेनमार्क के मध्य 25 वर्षों तक जारी रहने वाले युद्ध का क्रम आंरभ हुआ। 1290 – इंग्लैंड के किंग एडवर्ड ने यहूदियों के निष्कासन का आदेश दिया। 1630 – स्पेन की सेना ने मंटुआ प्रांत पर कब्जा किया। 1737 – बेंजा लुका में लड़ाई के दौरान तुर्की सेना ने आस्ट्रिया को पराजित किया। 1743 – साप्ताहिक अखबार न्यूयार्क में दुनिया में पहली बार आधे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया गया। 1781 – ब्रिटेन के विख्यात खगोलशास्त्री विलियम हरशल ने आकाश गंगा की वास्तविकता का पता लगाया। वे टेलेस्कोप द्वारा जो उन्होंने स्वयं ही बनाया था, ग्रह देख रहे थे जिसके दौरान उन्हें पता चला कि आकाशगंगा ऐसे ग्रहों का महान समूह है कि सौरमंडल उसका बहुत छोटा सा भाग है। हरशल ने इसी प्रकार कई अन्य ग्रहों की खोज की। 1857 – बम्बई विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। 1872 – ब्रिटेन में चुनाव में गुप्त मतदान अधिनियम आया। इससे पहले मतदान खुले तौर पर किए जाते थे। 1907 – फ्रांसीसी सैनिकों ने कैसाब्लांका पर कब्जा किया। 1931 – पहला एयर कंडीशंड जहाज ‘मरिपोसा’ लांच किया गया। 1943 – ब्रिटिश सेना ने इटली के कटानिया शहर पर हमला किया। 1944 – ब्रिटिश सैनिकों ने नाॅरमैंडी की बाेर्केबस पर्वतीय श्रृंखला पर कब्जा किया। 1947 – भारतीय स्वाधीनता अधिनियम को शाही स्वीकृति मिली। 1951 – उरुग्वे ने संविधान स्वीकार किया। 1951 – जर्सी जो वालकाॅट सबसे अधिक उम्र में हैवीवेट चैंपियन बने। 1955 – पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को व्यावसायिक रूप से बेचा गया। 1963 – सीरिया में सैन्य तख्तापलट विफल हुआ। 1968 – कैलिफोर्निया के सेंता क्लारा में इंटेल कॉरपोरेशन की स्थापना हुई। 1973 - अफ़ग़ानिस्तान में राजशाही की समाप्ति एवं गणराज्य की स्थापना। 1977 – वियतनाम संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बना। 1978 – मिस्र और इजरायल के बीच दो दिवसीय अधिकारिक वार्ता शुरू हुई। 1980 - भारत में निर्मित उपग्रह प्रक्षेपण वाहन एस.एल.वी.- 3 से रोहिणी उपग्रह को कक्षा में भेजा गया। 1980 - टेलीविजन से पहला रंगीन प्रसारण मद्रास से किया गया। 1985 – सोवियत रूस ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। 1994 - ब्राजील ने चौथी बार विश्व कप फ़ुटबाल चैंपियनशिप जीती। 1999 - फ़िलिस्तीन के ओसामा बरहाम को लगभग 6 वर्ष की क़ैद के बाद इस्रायल ने आज़ाद किया। 2000 - रातू जोसेफा इलोइलो द्वारा फिजी के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण। 2002 – तेल अवीव में बम विस्फोट में 6 मरे और 40 घायल हुए। 2002 - डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम देश के 12 वें राष्ट्रपति चुने गए। 2002 - सड़कों के सुधार पर विस्तार के लिए, एशियाई विकास बैंक ने छत्तीसगढ़ को 20 करोड़ डालर की सहायता मंजूर की। 2003 - वाई. वेणुगोपाल रेड्डी रिजर्व बैंक के नये गर्वनर बने। 2004 - अमेरिका ने 50 करोड़ डालर का पाक का कर्जा माफ किया। 2005 - मनमोहन-बुश वार्ता के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भारत को परमाणु ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी विषयक आपूर्ति पर लगाये गए प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया। 2007 - भारत, पाकिस्तान और मैक्सिको में हरित क्रान्ति के जनक कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध अमेरिकी कृषि वैज्ञानिक नार्मन बोरलॉग को क्रांग्रेसनल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। 2008 - भारतीय मूल के सलमान रुश्दी ने प्रमोशन टूर के दौरान 57 मिनट में एक हज़ार पुस्तकों पर हस्ताक्षर करने का रिकार्ड बनाया। 2012 – सीरिया में आत्मघाती बम विस्फोट में रक्षा मंत्री सहित सरकार के तीन उच्च अधिकारियों की मौत हुई। 2012 – किम जोंग उन को आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया और उन्हें कोरियाई पीपुल्स आर्मी में मार्शल का पद दिया गया। 2019 - हिमा दास ने 15 दिन के भीतर चौथा स्वर्ण पदक जीता। 2019 - पलाऊ अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का 76वां सदस्य बना। 2021 - मुंबई के चेंबूर और विखरोली में दीवार ढहने से 15 लोगों की मौत हुई 2021 - सऊदी अरब ने हज में शामिल होने वाली महिलाओं के लिए पुरुष अभिभावक की आवश्यकता को हटाया। 2021 - भारत के जयनगर से नेपाल के कुर्था के बीच रेलगाड़ी परिचालन का सफल परीक्षण किया गया। 2021 - नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने विश्वासमत हासिल किया। 2022 - मप्र के धार जिले में 55 यात्रियों से भरी इंदौर से पुणे जा रही बस के नर्मदा नदी में गिरने से 13 की मौत हुई व 15 लोग बचाए गए। 2022 - रतलाम रेल मंडल के अन्तर्गत मंगल मोडी व लीमखेड़ा के बीच एक मालगाड़ी के 16 डिब्बे पटरी से उतरे और कुछ एक दूसरे के उपर चढे। 2022 - भारत देश के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 99 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। 2022 - श्रीलंका में नए सिरे से आपातकाल प्रभावी हुआ। 2023 - प्रधानमंत्री ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। 2023 - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 95वें स्थापना दिवस समारोह का समापन हुआ। 2023 - तीसरी जी20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की बैठक गांधीनगर में सम्पन्न हुई। 2023 - ब्रिटिश कोलंबिया में जंगल की आग का मौसम अब तक का सबसे विनाशकारी मौसम बना , जिसमें 14,100 वर्ग किलोमीटर भूमि जल गई है व 390 स्थानों पर अभी भी आग लगी हुई है (जो 2018 के रिकॉर्ड से अधिक है)। 2023 - मध्य अमेरिका में पूर्वी अल साल्वाडोर के तट पर 6.5 तीव्रता का भूकंप आया। 2024 - यूपी में डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 4 की मौत:AC समेत 15 कोच पटरी से उतरे; 2 यात्रियों के पैर कटे; 20 से ज्यादा घायल हुए। 2024 - रेजिमेनल थेरेपी में नवाचार पर एक दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन श्रीनगर में किया गया। 2025 - यूरोपीय संघ (EU) ने रूस पर अपने 18वें प्रतिबंध पैकेज के तहत गुजरात के वाडिनार स्थित नयारा एनर्जी रिफाइनरी पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए। 18 जुलाई को जन्मे व्यक्ति 1861 - कादम्बिनी गांगुली - भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन। 1909 - विष्णु डे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित एक बांग्ला साहित्यकार। 1918 - नेल्सन मंडेला- नोबेल पुरस्कार सम्मानित दक्षिण अफ़्रीका के भूतपूर्व राष्ट्रपति। 1927 - मेहदी हसन, प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक । 1931 - भवानम वेंकटराम रेड्डी - आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। 1931 - मैरी डिसूजा सिकेरा एक भारतीय महिला ओलंपियन। 1935 - जयेन्द्र सरस्वती तमिलनाडु के काँचीपुरम नगर स्थित कांची कामकोटि पीठ के ६९वें शंकराचार्य थे। 1946 - राजेश जोशी - भारत के प्रसिद्ध साहित्यकारों। 1948 - हिन्दी के जाने-माने कथाकार अरुण प्रकाश का जन्म बेगूसराय (बिहार) के नितनिया गांव में हुआ था।। 1970 - अश्विनी वैष्णव एक भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी। 1971 - सुखविंदर सिंह जिन्हें बॉलीवुड में पार्श्वगायन के लिए जाना जाता है। 1972 - सौन्दर्या रघु भारतीय फिल्म अभिनेत्री और निर्माता थीं। 1982 - प्रियंका चोपड़ा - हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री। 1994 - छवि पांडे एक भारतीय टेलीविजन अभिनेत्री, फिल्म अभिनेत्री तथा गायिका है । 1996 - स्मृति मंधाना - भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी। 18 जुलाई को हुए निधन 1948 - पीरू सिंह - भारतीय सेना के वीर अमर शहीदों में एक। 1969 - तुकाराम भाऊराव साठे, जिन्हें अन्नभाऊ साठे के नाम से जाना जाता है, एक समाज सुधारक, कम्युनिस्ट लोक कवि और महाराष्ट्र, भारत के लेखक थे। 1998 - अब्दुल हमीद कैसर - भारत के प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक। 1999 - विश्व के विमानन इतिहास में सर्वाधिक घंटे तक विमान उड़ाने का रिकार्ड बनाने वाले एडलोग का निधन। 2011 - पण्डित जगदीश प्रसाद कलकत्ता आधारित पटियाला घराने के हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक थे। 2012- राजेश खन्ना, हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता। 2016 - मुबारक बेगम - हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका। 2017 - अजित शंकर चौधरी - सुप्रसिद्ध भारतीय कवि, संस्मरणकार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा सहृदय समीक्षक थे। 2020 - स्पेनिश उपन्यासकार, जुआन मार्से (Juan Marse) का निधन। 2022 - राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध चित्रकार अच्युतन कुदल्लूर (77) का चेन्नई में निधन हुआ। 2022 - हिन्दी फ़िल्मों के पार्श्वगायक एवं संगीतकार भूपिंदर सिंह (82) का दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ। 2023 - केरल के कांग्रेस नेता और 2 बार मुख्यमंत्री रहे ओमन चांडी (79) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी एथलेटिक निदेशक ल्यू पर्किन्स (78) का निधन हुआ। 2023 - इंग्लिश फुटबॉल खिलाड़ी माइक हेलावेल (85) का निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी ग्रैमी पुरस्कार विजेता हास्य अभिनेता और एमी पुरस्कार विजेता अभिनेता जॉर्ज रॉबर्ट न्यूहार्ट का 94 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2025 - तेलुगु फिल्मों के जाने-माने अभिनेता और हास्य कलाकार 'फिश वेंकट' (53) का निधन हैदराबाद में हुआ। 18 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनि दीक्षा (जैन)। आचार्य श्री निर्मलसागर जी मुनि दीक्षा (जैन)। साहित्यसम्राट लोकशाहीर श्री अण्णाभाऊ साठे स्मृतिदिवस। श्री नाथभुजंग महाराज पुण्यतिथि परंडा (धाराशिव)। श्री पीरू सिंह शेखावत शहीदी दिवस ( 'परमवीर चक्र' सम्मानित)। श्री राजेश खन्ना स्मृति दिवस। श्री भवानम वेंकटराम रेड्डी जयन्ती। श्री तुकाराम भाऊराव साठे (श्री अण्णाभाऊ साठे) स्मृति दिवस। नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।