झारखंड

पिस्का और मुरी स्टेशन का बदला स्वरूप, आधुनिक सुविधाओं से यात्रियों को मिली बड़ी राहत

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Muri & Piska
Muri & Piska Railway Station

रांची। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रांची रेल मंडल के पिस्का और मुरी रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया, जिनमें झारखंड के ये दोनों स्टेशन भी शामिल हैं। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इन स्टेशनों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और आधुनिक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।

 

पिस्का स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय संस्कृति की झलक


पुनर्विकसित पिस्का रेलवे स्टेशन को स्थानीय कला, संस्कृति और विरासत के अनुरूप नया स्वरूप दिया गया है। स्टेशन भवन का आकर्षक फसाड इसकी पहचान को दर्शाता है। यहां आधुनिक प्रतीक्षालय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, उन्नत प्लेटफॉर्म, नए प्लेटफॉर्म शेल्टर, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था की गई है। यात्रियों की सुविधा के लिए डिजिटल सूचना प्रणाली, इल्यूमिनेटेड साइनेज और आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए लिफ्ट, रैंप, टैक्टाइल पाथ, हैंडरेल, व्हीलचेयर और दिव्यांग-अनुकूल शौचालय जैसी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

 

मुरी स्टेशन पर भी यात्रियों को मिलेगा बेहतर सफर का अनुभव


मुरी रेलवे स्टेशन का भी आधुनिक तरीके से कायाकल्प किया गया है। यहां प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अलग-अलग प्रतीक्षालय, आधुनिक एग्जीक्यूटिव लाउंज, विकसित प्लेटफॉर्म, नए शेल्टर और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की सुविधा दी गई है। स्टेशन पर स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली और सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। स्टेशन परिसर में विकसित एप्रोच रोड, सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग की सुविधा यात्रियों की आवाजाही को और आसान बनाएगी।

 

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर


पिस्का स्टेशन के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि रहे, जबकि मुरी स्टेशन पर राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार वर्मा, सिल्ली विधायक अमित कुमार महतो और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दोनों स्टेशनों का पुनर्विकास यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखकर किया गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इन स्टेशनों के शुरू होने से रांची रेल मंडल के यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

झारखंड

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बोकारो में चोरी का अनोखा तरीका, सेल कर्मी के घर से 3.5 लाख की नकदी और जेवरात उड़ाए

बोकारो। बोकारो के सेक्टर-12 थाना क्षेत्र में चोरी की एक अनोखी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया है। चोरों ने बंद पड़े एक सेल कर्मी के आवास को निशाना बनाकर करीब 3.5 लाख रुपये की नकदी और जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि चोरी के बाद आरोपी घर के मुख्य दरवाजे पर अपना ताला लगाकर फरार हो गए, ताकि घटना का खुलासा देर से हो सके।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, सेल कर्मी वकील प्रसाद महली बुधवार को अपने परिवार के साथ घर में ताला लगाकर गांव गए थे। दो दिन बाद जब वे वापस लौटे तो अपने घर के दरवाजे पर दूसरा ताला लगा देखकर चौंक गए। उन्होंने ताला तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया तो पूरा सामान बिखरा पड़ा था। जांच करने पर पता चला कि नकदी और जेवरात सहित लगभग 3.5 लाख रुपये की संपत्ति चोरी हो चुकी है।   पीड़ित ने क्या बताया पीड़ित ने बताया कि उन्होंने 5 जुलाई को ही इस नए आवास में शिफ्ट किया था। चोरों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया और जाते समय अपना ताला लगाकर घर को बंद कर दिया, जिससे आसपास के लोगों को किसी तरह का संदेह न हो और चोरी का पता देर से चल सके।   सिटी डीएसपी राजीव रंजन ने बताया घटना की सूचना मिलते ही सेक्टर-12 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। सिटी डीएसपी राजीव रंजन ने बताया कि पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही तकनीकी साक्ष्यों और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।   पुलिस का मानना है कि चोरों ने पहले घर की गतिविधियों पर नजर रखी और परिवार के बाहर जाने के बाद वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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रांची में 3000 करोड़ से बनेंगे 10 नए फ्लाईओवर

रांची। राजधानी रांची की यातायात व्यवस्था अगले पांच वर्षों में पूरी तरह बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर पथ निर्माण विभाग ने शहर में 10 नए फ्लाईओवर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इन परियोजनाओं पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि भू-अर्जन, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य कार्यों के कारण कुल लागत इससे अधिक हो सकती है। विभाग ने अधिकांश परियोजनाओं का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया है और तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में कई परियोजनाएं धरातल पर उतर जाएंगी।   इन प्रमुख मार्गों पर बनेंगे फ्लाईओवर योजना के तहत बरियातू रोड, कांके रोड, स्वर्णरेखा और हरमू नदी के किनारे, कांटाटोली से नेवरी तक तथा मेकन-बिरसा चौक-डीपीएस कॉरिडोर में फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। बरियातू रोड पर करमटोली से सेवेन डे हॉस्पिटल तक 5.2 किलोमीटर लंबा फोरलेन फ्लाईओवर प्रस्तावित है, जबकि कांके रोड पर एपीएन शाहदेव चौक से रिनपास होते हुए रिंग रोड तक 8.5 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाया जाएगा।   स्वर्णरेखा नदी के किनारे हिनू ओवरब्रिज से जगन्नाथपुर मंदिर तक दो-दो लेन का फ्लाईओवर प्रस्तावित है। हरमू नदी किनारे मुक्तिधाम से रेडिशन ब्लू तक भी एलिवेटेड मार्ग बनाने की योजना है। वहीं कांटाटोली से कोकर चौक, बूटी मोड़ होते हुए नेवरी तक बहु-चरणीय फ्लाईओवर परियोजना पर जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुति दी जाएगी।   मेकन से डीपीएस तक पांच फ्लाइओवर का निर्माण मेकन चौक से बिरसा चौक और डीपीएस क्षेत्र तक दो चरणों में करीब 630 करोड़ रुपये की लागत से पांच फ्लाईओवर बनाए जाएंगे। इनमें मेकन चौक से बिरसा चौक तक फोरलेन फ्लाईओवर, हिनू चौक से एयरपोर्ट तक टू-लेन फ्लाईओवर, डीपीएस चौक से खूंटी रोड, विधानसभा और पुराना विधानसभा से बिरसा चौक तक अलग-अलग एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से एयरपोर्ट जाने वाले वाहनों को जाम से राहत मिलेगी और बिरसा चौक सहित आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।   17 फ्लाईओवर वाला शहर बनेगा रांची राज्य सरकार पहले ही सिरमटोली-मेकन चौक और कांटाटोली-बहुबाजार फ्लाईओवर का निर्माण करा चुकी है। रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर भी तैयार हो चुका है, जबकि बहुबाजार से सिरमटोली तक कनेक्टिंग फ्लाईओवर इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा चौक और हरमू चौक से रातू रोड तक नए फ्लाईओवरों का टेंडर भी जारी हो चुका है। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी में कुल 17 फ्लाईओवर होंगे।   पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर केवल रांची ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य जिलों में भी सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए फ्लाईओवर और फोरलेन सड़कों के निर्माण पर तेजी से काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजधानी में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी, अस्पतालों तक पहुंचने में समय बचेगा और लोगों का सफर अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनेगा।

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रांची। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में झारखंड के बांस और स्टील से बने नवाचारपूर्ण उत्पादों ने आगंतुकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी के तीसरे दिन झारखंड पैवेलियन में बड़ी संख्या में लोगों ने बांस और स्टेनलेस स्टील से निर्मित बोतल तथा मग की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और पर्यावरण-अनुकूल विशेषताओं की सराहना की। इन उत्पादों को टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने वाली उपयोगी पहल के रूप में देखा जा रहा है।   पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित अनजनेया बांस क्लस्टर द्वारा विकसित इन उत्पादों में पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है। बांस और स्टेनलेस स्टील से बनी बोतल गर्म या ठंडे पेय का तापमान लगभग 12 से 14 घंटे तक बनाए रखने में सक्षम है। वहीं, बांस, स्टेनलेस स्टील और फूड-ग्रेड प्लास्टिक से तैयार मग 3 से 4 घंटे तक पेय का तापमान सुरक्षित रखता है। इससे ये उत्पाद उपयोगिता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देते हैं।   ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान  भारत टेक्स 2026 झारखंड के ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान को नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। राज्य तसर सिल्क, जीआई टैग प्राप्त उत्पादों, हस्तकरघा, हस्तशिल्प और बांस आधारित नवाचारों के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अनजनेया बांस क्लस्टर स्थानीय कारीगरों को रोजगार और बाजार उपलब्ध कराने के साथ निर्यात की संभावनाओं को भी बढ़ा रहा है।   क्लस्टर में लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग, सीएनसी राउटिंग........ क्लस्टर में लेजर कटिंग, लेजर एनग्रेविंग, सीएनसी राउटिंग और कस्टमाइज्ड डिजाइन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के सजावटी, फर्नीचर और लाइफस्टाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि भारत टेक्स 2026 में 130 से अधिक देशों के 6,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार और लगभग 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुक भाग ले रहे हैं, जिससे झारखंड के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

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anjali kumari जुलाई 13, 2026 0

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