मुंबई, एजेंसियां। विवादों में घिरी फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' का आधिकारिक टीज़र रिलीज़ कर दिया गया है। करीब 1 मिनट 56 सेकंड के इस टीज़र में कोर्टरूम ड्रामा, काला हिरण शिकार मामले की जांच, गवाहों के बयान और अदालती बहस की झलक दिखाई गई है। टीज़र रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर इसकी जमकर चर्चा शुरू हो गई है।
टीज़र की शुरुआत जंगल में शिकार के दृश्य से होती है, जिसके बाद पुलिस जांच, कोर्ट में गवाहों के बयान और कानूनी लड़ाई को दिखाया गया है। अभिनेता गोविंद नामदेव इसमें बिश्नोई समाज के वकील की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
फिल्म की कहानी वर्ष 1998 में राजस्थान के कांकाणी गांव में हुए चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताई जा रही है। हालांकि मेकर्स का कहना है कि विवाद से बचने के लिए फिल्म में पात्रों के नाम और कुछ घटनाओं को काल्पनिक रूप दिया गया है।
टीज़र रिलीज़ होने के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों ने इसे लेकर उत्साह जताया। कई यूजर्स ने लिखा कि "ये सिर्फ टीज़र नहीं, बल्कि तूफान है।" वहीं कुछ लोगों ने फिल्म की रिलीज़ को लेकर जारी कानूनी विवाद का भी जिक्र किया।
फिल्म को लेकर कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। अभिनेता सलमान खान पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के प्रमोशन और रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। मेकर्स का कहना है कि फिल्म किसी व्यक्ति की जीवनी नहीं, बल्कि वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा एक बार फिर अपने स्टाइल और फिटनेस को लेकर सुर्खियों में हैं। 52 साल की मलाइका इन दिनों ग्रीस में छुट्टियां मना रही हैं, जहां से उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरत तस्वीरें साझा की हैं। नीले समंदर, मनमोहक सनसेट और सफेद रंग के पारंपरिक ग्रीक घरों के बीच मलाइका का ग्लैमरस अंदाज इंटरनेट पर छा गया है। ग्रीक वेकेशन की तस्वीरें हुईं वायरल मलाइका ने अपने इंस्टाग्राम पर वेकेशन की कई तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिनमें वह कभी समंदर किनारे सुकून के पल बिताती तो कभी ग्रीस की खूबसूरत गलियों में घूमती नजर आ रही हैं। उन्होंने तस्वीरों के साथ लिखा, "Greek summer memories", जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। मिस्ट्री मैन ने बढ़ाई फैंस की उत्सुकता मलाइका की तस्वीरों में एक फोटो ऐसी भी है, जिसमें उनके साथ एक अनजान शख्स (मिस्ट्री मैन) दिखाई दे रहा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके साथ मौजूद व्यक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि अभिनेत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 52 की उम्र में फिटनेस ने जीता दिल फैंस मलाइका के स्टाइल के साथ-साथ उनकी फिटनेस की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि उनकी फिटनेस और ग्लैमरस अंदाज आज भी नई अभिनेत्रियों को कड़ी टक्कर देता है। सोशल मीडिया पर छाई मलाइका मलाइका अरोड़ा की ग्रीस वेकेशन की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस उनके फैशन सेंस, ट्रैवल डायरी और लाइफस्टाइल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। वहीं मिस्ट्री मैन की मौजूदगी ने इन तस्वीरों को और ज्यादा चर्चा का विषय बना दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर के कई गीत आज भी लोगों की यादों में जिंदा हैं, लेकिन कुछ रचनाएं ऐसी हैं जो समय की सीमाओं को पार कर समाज का हिस्सा बन गई हैं। ऐसा ही एक गीत है 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम', जिसे आज देशभर के हजारों स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह गीत किसी स्कूल या धार्मिक आयोजन के लिए नहीं, बल्कि वर्ष 1957 में रिलीज हुई क्लासिक फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' के लिए लिखा गया था। इस अमर गीत के बोल राजस्थान के बीकानेर में जन्मे प्रसिद्ध गीतकार भरत व्यास ने लिखे थे। गीत को सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर और मशहूर गायक मन्ना डे ने अपनी मधुर आवाज दी, जबकि इसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार वसंत देसाई ने तैयार किया। समय के साथ यह गीत केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्कूलों की प्रार्थना सभाओं का अभिन्न हिस्सा बन गया। 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' के बोल मानवता, सत्य, करुणा, ईमानदारी और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह गीत नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों का संदेश देने का माध्यम बना हुआ है। आज भी देश के कई विद्यालयों में दिन की शुरुआत इसी प्रार्थना से होती है। फिल्मकार वी. शांताराम यह गीत दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम की चर्चित फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' का हिस्सा था। फिल्म में वी. शांताराम ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जबकि संध्या और वी.एन. व्यास भी अहम किरदारों में नजर आए थे। फिल्म की सफलता में इसकी संवेदनशील कहानी के साथ-साथ 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' का भी बड़ा योगदान माना जाता है। करीब सात दशक बाद भी यह गीत भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और बचपन की यादों का प्रतीक बना हुआ है और इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी होस्ट और 'बिग बॉस 13' की पूर्व कंटेस्टेंट शेफाली बग्गा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे रायपुर स्थित अपने जोनल कार्यालय में कई घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उनसे कथित प्रचार गतिविधियों और संभावित आर्थिक लेन-देन से जुड़े सवाल पूछे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें पहले भी पूछताछ के लिए समन भेजा गया था। पत्रकारिता से बनाई पहचान 1 जुलाई 1994 को नई दिल्ली में जन्मीं शेफाली बग्गा ने अपनी पढ़ाई दिल्ली में पूरी की और इसके बाद पत्रकारिता एवं एंकरिंग में करियर शुरू किया। वर्ष 2015 से उन्होंने विभिन्न न्यूज चैनलों में एंकर के रूप में काम किया और राजनीति, खेल तथा मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों की मेजबानी की। उनकी बेबाक प्रस्तुति ने उन्हें टीवी पत्रकारिता में पहचान दिलाई। बिग बॉस से मिली लोकप्रियता साल 2019 में शेफाली ने सलमान खान के लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस 13' में हिस्सा लिया। शो के दौरान उनके तीखे बयानों और अन्य प्रतिभागियों के साथ विवादों ने उन्हें चर्चा में रखा। हालांकि वह ज्यादा समय तक शो में नहीं टिक सकीं, लेकिन उनकी लोकप्रियता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। डिजिटल दुनिया और निजी जीवन बिग बॉस के बाद शेफाली ने न्यूज एंकरिंग से दूरी बनाकर डिजिटल कंटेंट, म्यूजिक वीडियो और रियलिटी शो होस्टिंग की ओर रुख किया। उन्होंने जियोहॉटस्टार के शो 'लववेंचर: प्यार का वनवास' की भी मेजबानी की। हाल के महीनों में उनका नाम क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ भी जोड़ा गया, हालांकि शेफाली ने इन खबरों को खारिज करते हुए दोनों को केवल अच्छा दोस्त बताया। फिलहाल, महादेव बेटिंग ऐप मामले में ED की पूछताछ के बाद शेफाली बग्गा फिर चर्चा के केंद्र में हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जांच जारी है और किसी भी आरोप पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।