1306 - अलाउद्दीन ख़िलजी ने सिवाणा पर जब 2 जुलाई, 1306 में आक्रमण किया, तब यह दुर्ग कान्हड़देव के भतीजे चौहान सरदार शीतलदेव के अधिकार में था। 1698 – थॉमस सावेरी ने भाप इंजन का पेटेंट कराया। 1757 – बंगाल के अंतिम नवाब सिराज उद्दौला की उनकी शरण में रह रहे एक व्यक्ति मोहम्मद बेग ने निर्ममतापूर्ण हत्या की। 1777 – अमेरिका के वोरमोंट शहर में दास प्रथा की समाप्ति हुई। 1781 – मैसूर के सुल्तान हैदर अली और अंग्रेज सेना में पोर्टो नोवो (अब परांगीपेट्टई) का युद्ध हुआ। 1862 – कलकत्ता उच्च न्यायालय का उद्घाटन हुआ। 1897 – इतालवी वैज्ञानिक गुगलेल्मो मारकोनी को लंदन में रेडियो का पेटेंट मिला। 1911 - संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोलंबिया के साथ अपने राजनयिक संबंधों को समाप्त करके वहां के वाणिज्य दूतावास को भी बंद कर दिया। 1916 – भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की स्थापना हुई। 1940 – क्रांतिकारी नेता सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर कलकत्ता भेजा गया। 1962 – पहला वॉलमार्ट स्टोर कारोबार के लिए रोजर, अर्कंसास में खोला गया। 1966 – फ्रांस ने मुरूरोआ, प्रशांत महासागर में परमाणु परीक्षण किया। 1972 – प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए। 1976 – वियतनाम गणराज्य का अंत हुआ। साम्यवादी उत्तरी वियतनाम ने समाजवादी वियतनाम गणराज्य के साथ जुड़ने की घोषणा की। 1983 – स्वदेश निर्मित परमाणु बिजली केंद्र की पहली इकाई ने मद्रास के निकट कलपक्कम में काम करना शुरू किया। 1985 - आंद्रेई ग्रोमिको सोवियत संघ के राष्ट्रपति निर्वाचित। 1990 – सऊदी अरब में मक्का-मदीना में भगदड़ से 1,426 हज यात्रियों की मौत हो गई। 2001 – फास्ट एंड फ्यूरियस सीरिज की पहली फिल्म रिलीज हुई। 2002 – स्टीव फोसेट गुब्बारे के जरिए दुनिया का भ्रमण करने वाले पहले व्यक्ति बने। 2004 - छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन को युनेस्को की विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। 2004 - भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने जकार्ता में आपसी बातचीत की। 2006 - इंग्लैंड फ़ुटबाल टीम के कप्तान डेविड बेखम ने अपना पद छोड़ा। 2010 – कांगो में टैंकर ट्रक विस्फोट में 230 लोगों की मौत हो गई। 2015 – फिलीपींस में 220 यात्रियों से भरी नौका डूबने से 62 लोगों की मौत हुई। 2019 - सिंगापुर हाईकोर्ट ने पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी और उसके पति मयंक मेहता के खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया। 2019 - रूस / पनडुब्बी में आग लगने से 14 नौसैनिक शहीद। 2020 - दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कोविड 19 के रोगियों के इलाज के लिए देश के पहले प्लाजमा बैंक का उद्घाटन किया। 2020 - बिहार में वज्रपात ने फिर मचाई तबाही , 22 की मौत हुई। 2020 - वियतनाम में दुनिया के पहले सोने के होटल की ओपनिंग हुई। 2020 - भारतीय रेलवे ने 2.8 किलोमीटर लंबी ट्रेन चलाई, जो भारतीय रेल के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी ट्रेन है। इस ट्रेन का नाम 'शेषनाग' दिया गया। 2020 - कानपुर मेंदेर रात विकास दुबे के गैंग के साथ हुई मुठभेड़ में एक पुलिस उपाधीक्षक समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गये। 2021 - अमेरिकाः फ्लोरिडा में इमारत ढहने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हुई। 2021 - जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक निजी यात्री वाहन फिसलकर एक गहरी खाई में गिरने से पांच लोगों की मौत व चार अन्य घायल हुए। 2021 - डीआरडीओ का शॉर्ट स्पैन ब्रिजिंग सिस्टम-10 एम भारतीय सेना में शामिल हुआ। 2022 - रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भानुर स्थित भारत डायनैमिक्स लिमिटेड के नए विनिर्माण सुविधा केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए। 2022 - भारतीय कप्तान जसप्रीत बुमराह ने स्टुअर्ट ब्राड पर 29 रन बनाकर टेस्ट क्रिकेट में एक ही ओवर में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2023 - अजित पवार 5वीं बार महाराष्ट्र के डिप्टी CM बने, 31 महीने में तीसरी बार शपथ ली; NCP के 8 विधायक भी मंत्री बने। 2023 - रक्षा मंत्रालय भारत का मिशन गगनयान- क्रू मॉड्यूल रिकवरी गोताखोरों के पहले बैच का प्रशिक्षण पूरा हुआ। 2023 - भारतीय तटरक्षक और नौसेना ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में गैलरी का निर्माण करने के लिए इंडियन पोर्ट रेल एंड रोपवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। 2023 - अमेरिकी स्कूनर कुयाहोगा पैकेट को प्रांतीय मरीन द्वारा डेट्रॉयट नदी पर कब्जे में लिया गया, जिसमें शीर्ष गुप्त युद्ध पत्राचार भी शामिल था। 2024 - उत्तर प्रदेश के हाथरस में भोले बाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ मचने से 50 से ज्यादा लोगों की मौत (बाद में संख्या 122 से ज्यादा पहुंची) हो गई व 150 से अधिक भक्त घायल हुए। 2025 - भारत के PM मोदी दो दिवसीय यात्रा पर घाना पहुंचे , घाना के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए। 2 जुलाई को जन्मे व्यक्ति 1893 - चंदूलाल मधवलाल त्रिवेदी - पंजाब के पूर्व राज्यपाल। 1901 - कालिंदी चरण पाणिग्रही - प्रसिद्ध उड़िया कवि, उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार और निबंधकार थे। 1921 - अशोक घोष एक भारतीय बंगाली राजनेता और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता थे। 1925 - स्वामी राम - भारतीय योगाचार्य थे। 1941 - आशालता वाबगांवकर - मराठी और हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्रियों में से एक। 1945 - विद्या विंदु सिंह - लोक साहित्य के क्षेत्र में जाना माना नाम। 1948 - आलोक धन्वा, प्रसिद्ध जनकवि। 1954 - मुहम्मद अज़ीज़ भारतीय सिनेमा में पार्श्व गायक थे जिन्होंने मुख्यतः बंगाली और ओडिआ फ़िल्मों में गाने गाये। 1956 - तूफ़ानी सरोज - तूफ़ानी सरोज तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गये। 1958 - पवन मल्होत्रा हिन्दी फ़िल्मों व टीवी के एक प्रसिद्ध अभिनेता। 1968 - गौतमी - हिन्दी फ़िल्मों की एक भारतीय अभिनेत्री । 1981 अनुपमा वर्मा - भारतीय अभिनेत्री। 1983 - सुहास लालिनाकेरे यतिराज - एक भारतीय पेशेवर पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी। जुलाई को हुए निधन 1843 – होमियोपैथी का अविष्कार करने वाले क्रिस्टियान फ्रीडरिष सामुएल हानेमान का फ्रांस के पैरिस में निधन हुआ। 1934 - असित भट्टाचार्य - भारत के महान क्रांतिकारियों में से एक थे। 1950 - यूसुफ़ मेहरअली, स्वतंत्रता सेनानी तथा समाज सुधारक थे। 1961 - अर्नेस्ट हेमिंग्वे अमेरिकन उपन्यासकार तथा कहानीकार थे। 2022 - मशहूर ब्रिटिश निर्देशक पीटर ब्रूक (97) का निधन हुआ। 2023 - डच फुटबॉल खिलाड़ी थियो पहलप्लात्ज़ (76) का निधन हुआ। 2024 - स्लोवाक सेलो वादक, संगीतकार और शिक्षाशास्त्री व्लादिमीर बोकेस (78) का निधन हुआ। 2025 - पूर्व रक्षा सचिव और छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त (79) का नई दिल्ली में निधन हुआ। 2 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव भगवान श्री आदिनाथ गर्भकल्याणक (जैन , आषाढ़ कृष्ण द्वितीया)। महान क्रान्तिकारी असित भट्टाचार्य बलिदान दिवस। यूसुफ़ जफर मेहरअली समृति दिवस। अन्तरराष्ट्रीय खेल पत्रकार दिवस। विश्व यूएफओ दिवस (World UFO Day, पहले 24 जून को यूएफओ डे मनाया जाता था)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।