मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री Karisma Kapoor और अभिनेता Abhishek Bachchan की टूटी सगाई को लेकर निर्देशक Suneel Darshan ने बड़ा बयान दिया है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि जब दोनों की सगाई टूटने का फैसला हुआ, तब वह करिश्मा कपूर के घर पर मौजूद थे। सुनील दर्शन के अनुसार, दोनों का रिश्ता बेहद "फायरी (उतार-चढ़ाव भरा)" था और उनके बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव होने के बावजूद परिस्थितियां उनके पक्ष में नहीं रहीं। 'रिश्ता अच्छा था, लेकिन हालात बदल गए' सुनील दर्शन ने कहा कि अभिषेक और करिश्मा के बीच अच्छी केमिस्ट्री थी, लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए। उन्होंने किसी एक व्यक्ति को सगाई टूटने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया और कहा कि रिश्तों में क्या होता है, इसे बाहर से पूरी तरह समझना आसान नहीं होता। सगाई टूटने की वजह पर परिवारों ने कभी नहीं दी आधिकारिक जानकारी अभिषेक बच्चन और करिश्मा कपूर की सगाई वर्ष 2002 में अमिताभ बच्चन के जन्मदिन समारोह के दौरान सार्वजनिक हुई थी, लेकिन कुछ ही महीनों बाद यह रिश्ता टूट गया। आज तक बच्चन और कपूर परिवारों ने सगाई टूटने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की है। हाल के दिनों में कई लोगों ने अलग-अलग दावे किए हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 23 साल बाद फिर चर्चा में आया पुराना रिश्ता सुनील दर्शन के इस बयान के बाद करिश्मा कपूर और अभिषेक बच्चन की टूटी सगाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हालांकि, दोनों कलाकार अब अपनी-अपनी निजी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं और इस मुद्दे पर किसी ने कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
करिश्मा कपूर एक बार फिर अपने खूबसूरत पारंपरिक परिधान से फैशन प्रेमियों का ध्यान खींच रही हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अभिनेत्री ने हैदराबाद की डिजाइनर मृणालिनी राव का बेहद खूबसूरत हल्के गुलाबी रंग का कुर्ता सेट पहना। इस परिधान में पारंपरिक भारतीय कारीगरी और आधुनिक खूबसूरती का शानदार मेल देखने को मिला। करिश्मा का यह अंदाज उन महिलाओं के लिए खास प्रेरणा है, जो पारंपरिक कपड़ों में सादगी, शालीनता और आकर्षण का संतुलन पसंद करती हैं। रंग-बिरंगे रेशमी धागों और जरी के काम ने बनाया खास करिश्मा कपूर का ढीले आकार वाला कलिदार रेशमी कुर्ता पूरे पहनावे का सबसे खास हिस्सा रहा। कुर्ते पर फूलों और बेल-बूटों की आकृतियों को रंग-बिरंगे रेशमी धागों और बारीक जरी के काम से सजाया गया था। कढ़ाई में गुलाबी, फिरोजी, लाल, बैंगनी और नारंगी जैसे खूबसूरत रंगों का इस्तेमाल किया गया, जिसने हल्के गुलाबी रंग के कपड़े को शानदार निखार दिया। कुर्ते के साथ हल्के गुलाबी रंग की रेशमी पैंट पहनी गई थी। इसके घेर पर ज्यामितीय फूलों की छोटी-छोटी आकृतियां बनाई गई थीं, जो पूरे पहनावे में पारंपरिक आकर्षण जोड़ रही थीं। फूलों वाली चुनरी ने पूरा किया पहनावा करिश्मा ने इस कढ़ाईदार रेशमी कुर्ता सेट के साथ हल्के गुलाबी रंग की पारदर्शी रेशमी चुनरी पहनी। इस चुनरी पर फूलों की छोटी आकृतियां, खूबसूरत कटवर्क किनारा और हाथ से बनाए गए लटकन लगे थे। हल्के रंग और बारीक कढ़ाई का यह मेल शादी और त्योहारों के मौसम के लिए बेहतरीन फैशन प्रेरणा बन सकता है। गहनों और जूतियों ने बढ़ाया पारंपरिक आकर्षण फैशन शैलीकार ईशा अमीन ने करिश्मा के पहनावे के साथ आकर्षक गहनों का चुनाव किया। उन्होंने मोतियों से सजे झूमर जैसे लंबे कानों के गहने और हीरों से जड़ी चूड़ियां पहनीं। पैरों में नई दिल्ली के जूता ब्रांड हाउस ऑफ वियन की पारंपरिक जूतियां पहनी गईं, जिन्होंने पूरे पहनावे को खूबसूरत पारंपरिक अंदाज दिया। हल्के मेकअप ने बढ़ाई खूबसूरती करिश्मा के सौंदर्य रूप को भी उनके कपड़ों के रंगों के साथ खूबसूरती से मिलाया गया। मेकअप कलाकार दिव्या शेट्टी ने चेहरे पर चमकदार आधार, हल्की चमक वाली पलकों, स्पष्ट पलकों, गुलाबी गालों और चमकदार गुलाबी होंठों के साथ सादगी भरा आकर्षक रूप तैयार किया। गुलाबी हीरे वाली बिंदी ने उनके पारंपरिक रूप को बेहद खूबसूरत अंतिम स्पर्श दिया। बालों को स्टाइलिस्ट राधिका पटेल ने एक तरफ से मांग निकालकर हल्की, खुली और घुंघराली लटों में सजाया। इससे उनका पूरा रूप बेहद सहज और शालीन नजर आया। मृणालिनी राव की पहचान है पारंपरिक कारीगरी करिश्मा कपूर का यह पहनावा डिजाइनर मृणालिनी राव की खास शैली को भी दर्शाता है। वर्ष 2014 में शुरू हुआ हैदराबाद का यह ब्रांड जरी और गोटा जैसी पारंपरिक भारतीय कढ़ाई तकनीकों को बारीक सजावटी काम के साथ जोड़ने के लिए जाना जाता है। उनके परिधानों में रानी गुलाबी, बैंगनी, फिरोजी, लाल और सरसों पीले जैसे गहरे भारतीय रंगों का खूबसूरत इस्तेमाल देखने को मिलता है। मृणालिनी राव के डिजाइन इससे पहले रश्मिका मंदाना, माधुरी दीक्षित नेने, भूमि पेडनेकर, श्रीलीला और तारा सुतारिया जैसी कई अभिनेत्रियां भी पहन चुकी हैं। करिश्मा कपूर का पारंपरिक रूप क्यों है खास? करिश्मा कपूर का यह पहनावा बताता है कि पारंपरिक फैशन को खूबसूरत बनाने के लिए हमेशा बहुत भारी सजावट जरूरी नहीं होती। हल्का गुलाबी रंग, बारीक कढ़ाई, आकर्षक गहने और सादा लेकिन चमकदार मेकअप इस पूरे रूप को बेहद शालीन बनाते हैं। अगर आप शादी, त्योहार या किसी पारंपरिक समारोह के लिए खूबसूरत और सलीकेदार पहनावा तलाश रही हैं, तो करिश्मा कपूर का यह गुलाबी रेशमी कुर्ता सेट आपके लिए शानदार फैशन प्रेरणा हो सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेत्री करिश्मा कपूर एक बार फिर दमदार अंदाज में वापसी करने जा रही हैं। उनकी आगामी वेब सीरीज Brown का पहला टीजर रिलीज कर दिया गया है, जिसे दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। लंबे समय तक रोमांटिक और पारिवारिक किरदारों के लिए पहचान बनाने वाली करिश्मा इस बार एक सख्त पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आएंगी। ‘ब्राउन’ में निभाएंगी रीटा ब्राउन का किरदार सीरीज में करिश्मा कपूर रीटा ब्राउन नाम की ईमानदार और तेजतर्रार पुलिस अफसर का किरदार निभा रही हैं। टीजर के अनुसार, रीटा एक गंभीर आपराधिक मामले की जांच कर रही है। वहीं निजी जिंदगी में वह कई मानसिक और व्यक्तिगत संघर्षों से भी जूझती दिखाई देती है। इसके बावजूद वह अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाती है। साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा पर आधारित कहानी वेब सीरीज ‘ब्राउन’ की कहानी लेखक Abheek Barua के 2016 में प्रकाशित उपन्यास ‘सिटी ऑफ डेथ’ पर आधारित है। कहानी एक ऐसे पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने आसपास की दुनिया से निराश हो चुकी है और शराब की लत से भी संघर्ष कर रही है। टीजर से साफ है कि यह सीरीज एक गहरे और रहस्यमयी साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा का अनुभव देने वाली है। कई कलाकार आएंगे नजर इस सीरीज के जरिए वरिष्ठ अभिनेत्री Helen भी अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। इसके अलावा Soni Razdan, Surya Sharma और K. K. Raina भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। हालांकि, मेकर्स ने अभी तक सीरीज की रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
Karisma Kapoor ने हाल ही में अपने एथनिक लुक से फैशन प्रेमियों का ध्यान खींचा। एक खास इवेंट में अभिनेत्री रस्ट रंग के बेहद खूबसूरत कुर्ता सेट में नजर आईं, जिसमें पारंपरिक भारतीय कढ़ाई और शिल्पकला की शानदार झलक देखने को मिली। उनका यह लुक डिजाइनर ब्रांड Lajjoo C का था, जिसे उनकी पसंदीदा स्टाइलिस्ट Esha Amin Pradhan ने स्टाइल किया। पारंपरिक शिल्प और आधुनिक एलीगेंस का मेल करिश्मा कपूर ने “Pranvi Kurta Set” पहना था, जिसे फाइन सिल्क फैब्रिक में तैयार किया गया था। इस कुर्ते की खासियत इसकी मरौड़ी (Marodi) कढ़ाई, गोटा वर्क और सीक्विन डिटेलिंग रही। स्ट्रेट सिल्हूट वाले इस कुर्ते की गोल नेकलाइन पर बेहद बारीक और घनी कढ़ाई की गई थी, जिसमें फ्लोरल और ज्योमेट्रिक मोटिफ्स देखने को मिले। पूरे कुर्ते पर बिखरे हुए पैस्ले और बूटी डिजाइन ने इसे और आकर्षक बनाया। वहीं, स्लीव्स पर गोलाकार एम्ब्रॉयडरी ने पारंपरिक कारीगरी को और उभारा। इसके साथ मैचिंग एंकल-लेंथ पैंट्स थीं, जिनके बॉर्डर और कफ्स पर भी समान डिटेलिंग की गई थी। ऑर्गेंजा दुपट्टे ने बढ़ाई शान इस सेट के साथ करिश्मा ने एक शीयर ऑर्गेंजा दुपट्टा कैरी किया, जिस पर मरौड़ी बूटी वर्क किया गया था। दुपट्टे के किनारों पर स्ट्राइप्ड ब्रोकेड बॉर्डर और एक तरफ वेव-पैटर्न एम्ब्रॉयडरी पैनल ने पूरे लुक को शाही स्पर्श दिया। क्या है मरौड़ी कढ़ाई की खासियत? मरौड़ी कढ़ाई भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित एम्ब्रॉयडरी परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका संबंध मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान से है और इसकी शुरुआत वैदिक काल में मानी जाती है। पहले यह कढ़ाई केवल शाही परिवारों और राजघरानों के वस्त्रों में इस्तेमाल की जाती थी। इस तकनीक में ज़री धागों और विशेष सुई की मदद से उभरी हुई 3D एम्ब्रॉयडरी बनाई जाती है। मुगल काल के दौरान इसमें इंडो-पर्शियन डिजाइनों जैसे मेहराब और पैस्ले मोटिफ्स का प्रभाव भी शामिल हो गया। करिश्मा कपूर के कुर्ते में यही पारंपरिक कला आधुनिक अंदाज में नजर आई। जूलरी और मेकअप रखा बेहद मिनिमल स्टाइलिस्ट ईशा अमीन प्रधान ने इस लुक को ज्यादा एक्सेसरीज़ से ओवरलोड नहीं किया। करिश्मा ने केवल गोल्डन टेम्पल-स्टाइल झुमके पहने, जिनमें रंगीन रत्न जड़े हुए थे। इसके साथ उन्होंने Fizzy Goblet की एम्ब्रॉयडर्ड गोल्ड जुत्तियां पहनीं, जो पूरे लुक के साथ खूबसूरती से मेल खा रही थीं। मेकअप की बात करें तो अभिनेत्री ने कोहल-लाइन आईज़ और न्यूड ग्लॉस के साथ मिनिमल ब्यूटी लुक चुना, जिसने उनके एथनिक आउटफिट को और उभार दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुई गिरफ्तारी Delhi Police ने मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर डॉ. नीलम सिंह उर्फ “The Skin Doctor” को गिरफ्तार किया है। उन पर कारोबारी Sunjay Kapur की मौत के बाद कपूर परिवार से जुड़े कथित सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार कपूर परिवार की शिकायत के बाद वसंत कुंज थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई। पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से आरोपों का पूरा विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों और पोस्ट की प्रकृति की जांच कर रही है। कौन हैं ‘The Skin Doctor’? डॉ. नीलम सिंह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @theskindoctor13 नाम से सक्रिय हैं। वे स्किन केयर, एंटी-एजिंग और ब्यूटी टिप्स से जुड़े कंटेंट के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा वे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी लगातार टिप्पणी करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स बताए जाते हैं। पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल 2026 में भी दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक अन्य हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद से जुड़े पोस्ट के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने संजय कपूर की मौत से जुड़ा पोस्ट किया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। पोस्ट में क्या कहा गया था? बताया जा रहा है कि डॉ. सिंह ने अपने पोस्ट में उस खबर का जिक्र किया था जिसमें कहा गया था कि पोलो खेलते समय संजय कपूर ने गलती से मधुमक्खी निगल ली थी। उन्होंने लिखा था कि ऐसी स्थिति में गंभीर एलर्जी, सांस रुकने या हार्ट संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। साथ ही उन्होंने ऐसी मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत इलाज कराने की सलाह भी दी थी। संजय कपूर की मौत और परिवार विवाद Sunjay Kapur ऑटो कंपोनेंट कंपनी Sona Comstar के प्रमुख थे और अभिनेत्री Karisma Kapoor के पूर्व पति थे। जून में लंदन में पोलो खेलते समय उनकी मौत हो गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण हृदय संबंधी बीमारी बताया गया था। हालांकि बाद में परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए और जांच की मांग की गई। सोशल मीडिया और राजनीति से भी जुड़ा नाम डॉ. नीलम सिंह को सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक टिप्पणियों के लिए भी जाना जाता है। वे अक्सर प्रधानमंत्री Narendra Modi और बीजेपी से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट करते रहे हैं। हाल ही में उनका नाम अभिनेत्री Samantha Ruth Prabhu से जुड़े सोशल मीडिया विवाद में भी सामने आया था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है और डिजिटल रिकॉर्ड तथा सोशल मीडिया पोस्ट की गहन जांच की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।