Kashmir

Protests continue in Pakistan-occupied Kashmir amid rising political tensions and government crackdown
PoK Protest: पाक रक्षामंत्री ने प्रदर्शनकारियों को बताया 'भारत जैसा दुश्मन', बातचीत से किया इनकार

PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को "भारत की तरह दुश्मन" बताते हुए कहा कि सरकार उनके साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगी। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का दावा है कि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 20 कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारियों से बातचीत से किया इनकार पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ कोई वार्ता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें भारत की ही श्रेणी में मानता हूं और उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन समझता हूं।" उनके इस बयान से PoK में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। वहीं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जबकि प्रदर्शनकारी संगठन इन आरोपों से इनकार कर रहा है। सलाहकार बोले- प्रदर्शनकारी कब्जे की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि JAAC ने पहले सरकार के साथ बैठक कर 38 मांगें रखी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। सनाउल्लाह ने दावा किया कि उनकी गतिविधियां भारत जैसी रणनीति से प्रेरित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में किसी की मौत नहीं हुई, जो JAAC के दावों से अलग है। JAAC का दावा- 20 कार्यकर्ताओं की मौत प्रतिबंधित संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि सोमवार से सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में उसके कम से कम 20 कार्यकर्ता मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। इस बीच, बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, मीरपुर में विरोध के चलते बाजार और दुकानें बंद रहीं और कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। चुनाव के बीच बढ़ा विवाद PoK की तथाकथित विधानसभा की 13 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान सोमवार को हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। शेष 32 सीटों के लिए दूसरे और तीसरे चरण का मतदान क्रमशः 2 अगस्त और 10 अगस्त को होना है। मुख्य मुकाबला PML-N और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच माना जा रहा है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चुनाव का बहिष्कार किया है। 12 सीटों को लेकर आंदोलन JAAC पिछले महीने से विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों के जरिए अपनी पसंद की सरकार बनवाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है। भारत ने चुनावों पर जताई आपत्ति भारत ने भी PoK में कराए जा रहे चुनावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए अपने अवैध कब्जे और क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि PoK पर उसका रुख पहले की तरह स्पष्ट और अपरिवर्तित है।  

kalpana जुलाई 30, 2026 0
Security personnel deployed amid clashes during protests ahead of elections in Pakistan-occupied Kashmir
PoK में चुनाव से पहले हिंसा, 14 प्रदर्शनकारियों की मौत का दावा; सुरक्षा बलों से झड़प के बाद बढ़ा तन

PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तथाकथित विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले हिंसा भड़क गई है। रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में उसके 14 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मौतों के दावों पर पुलिस ने उठाए सवाल पीटीआई के मुताबिक, PoK के पुलिस प्रमुख लियाकत अली मलिक ने 14 लोगों की मौत के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक शव बरामद नहीं होते और पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता, तब तक किसी भी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि झड़प के दौरान एक रेंजर्स जवान की मौत हुई है, जबकि दो रेंजर्स और दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। JAAC और पुलिस के दावे आमने-सामने JAAC का आरोप है कि उसका 'लॉन्ग मार्च' पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारी निहत्थे थे। संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की। वहीं, पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। 12 आरक्षित सीटों को लेकर कई हफ्तों से विरोध JAAC पिछले कई सप्ताह से विधानसभा की 12 शरणार्थी आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों के जरिए अपनी पसंद की सरकार बनवाने की कोशिश करता है। इसी मांग को लेकर रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' निकाला गया था, जो अब हिंसक झड़प में बदल गया। इंटरनेट बंद, मीडिया पर भी पाबंदियां हिंसा के बाद PoK के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं और मीडिया कवरेज पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की खबर है। पाक प्रशासन और JAAC के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा भारत पहले भी PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों को वहां के लोगों के कथित शोषण और प्रशासनिक दमन का परिणाम बता चुका है। चुनावी प्रक्रिया के बीच बढ़ते तनाव और हिंसा ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, मौतों और घायल होने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है, जबकि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Kashmiri activists protesting outside the Pakistani Consulate in Bradford over alleged violence in Pakistan-occupied Kashmir
PoK में हिंसा पर बढ़ा विवाद, मौतों के दावों के बीच ब्रिटेन तक गूंजी विरोध की आवाज

PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हुई हिंसक झड़पों का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। गोलीबारी और मौतों के दावों के बीच ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड शहर में कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की निंदा की। ब्रिटेन में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ब्रैडफोर्ड में प्रदर्शन कर रहे कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रावलाकोट और मीरपुर में अपने अधिकारों की मांग कर रहे लोगों पर सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए गोलीबारी की गई, जिसमें कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबरें हैं। चुनाव के बीच हिंसा, 14 मौतों का दावा PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया कि सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में उसके 14 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि, इन मौतों के दावों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। JAAC और प्रशासन के दावे आमने-सामने JAAC का कहना है कि उसका 'लॉन्ग मार्च' पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारी निहत्थे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की। वहीं, दूसरी ओर PoK पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं और घटनाक्रम को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी नजर PoK में हुई हिंसा और उसके बाद ब्रिटेन में हुए विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। फिलहाल, मौतों और हिंसा से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र में तनाव बरकरार है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Security forces deployed in Rawalakot after clashes with protesters in Pakistan-occupied Kashmir
PoK के रावलकोट में हिंसा, प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का दावा; 9 लोगों की मौत की खबर, वीडियो वायरल

Rawalakot (PoK): पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बातचीत विफल होने के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद हजारों प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद गोलीबारी की खबर सामने आई। 52 दिनों से जारी है आंदोलन बताया जा रहा है कि रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में पिछले 52 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी विभिन्न स्थानीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ताजा घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि गोलीबारी में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। हालांकि, इन वीडियो और मौतों के दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति रावलकोट के हालात बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मीडिया से हस्तक्षेप की अपील करता दिखाई दे रहा है। वह दावा करता है कि फायरिंग के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। फिलहाल पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से हताहतों की संख्या या कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Protesters gather in Muzaffarabad in Pakistan-administered Kashmir as the Joint Awami Action Committee calls for a long march against the administration.
PoK में आज JAAC का लॉन्ग मार्च, मुजफ्फराबाद में हाई अलर्ट; पाक सेना की भारी तैनाती

PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सरकार के खिलाफ जारी है आंदोलन JAAC लंबे समय से अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकने, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जिलों से मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे प्रदर्शनकारी सूत्रों के मुताबिक रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहने और कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की भी संभावना जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। प्रमुख मार्गों और सरकारी प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर है। JAAC की प्रमुख मांगें गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार आंदोलन और तेज होने की चेतावनी JAAC ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि मौजूदा आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक सुधारों की मांग भी प्रमुख मुद्दा बनेगी। राजनीतिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होता है, तो इससे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की सख्ती या बल प्रयोग की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी.  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Sonia Gandhi
संसद के मॉनसून सत्र को लेकर सियासी सरगर्मी तेज, कांग्रेस 16 जुलाई को बनाएगी रणनीति

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने 16 जुलाई को अपने शीर्ष नेताओं और सांसदों की अहम रणनीतिक बैठक बुलाई है, जिसमें सत्र के दौरान सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा, इस पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है।   सरकार और विपक्ष दोनों कर रहे तैयारी   कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य प्रमुख मुद्दों को संसद में उठाने की तैयारी कर रही है। वहीं सरकार भी मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की रणनीति बना रही है।   संविधान संशोधन विधेयक पर हो सकता है हंगामा   सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है।   20 जुलाई से शुरू होगा मॉनसून सत्र   संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इससे पहले होने वाली कांग्रेस की रणनीति बैठक और सर्वदलीय बैठक को सत्र की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Thousands of protesters gather at Eidgah Ground in Rawalakot, Pakistan-administered Kashmir, demanding rights and protesting against the Pakistan government amid a growing political movement.
PoK में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल, हजारों लोगों का प्रदर्शन; JAAC प्रमुख शौकत नवाज गिरफ्तार

  इस्लामाबाद/रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। मंगलवार को रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में हजारों लोग एकत्र हुए और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, JAAC के प्रमुख शौकत नवाज मीर को उनके दो सहयोगियों के साथ धीरकोट के सांगर फत्तारे इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा JAAC के 600 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है। शौकत नवाज पर था एक करोड़ रुपये का इनाम रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने शौकत नवाज मीर और अन्य JAAC नेताओं की सूचना देने वालों के लिए एक करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी। गिरफ्तारी के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 'हमें नहीं, पाकिस्तान को हमारी जरूरत' प्रदर्शन को संबोधित करते हुए JAAC नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए जानबूझकर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक रही है। उन्होंने कहा, "हमें आपके राशन की जरूरत नहीं है, बल्कि आपको हमारी जरूरत है। यदि जरूरी सामान की सप्लाई नहीं हुई तो लोग जिंदा रहने के लिए दूसरा रास्ता चुनने को मजबूर होंगे।" महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन, अब बना राजनीतिक विरोध बताया जा रहा है कि यह आंदोलन शुरुआत में महंगाई, खाद्य संकट, बढ़ती कीमतों और स्थानीय प्रशासन की नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ था। अब यह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक विरोध में बदल गया है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा रावलकोट और मीरपुर के लोगों को "असल कश्मीरी नहीं" बताए जाने के बाद लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। JAAC पर प्रतिबंध, आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद संगठन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इंटरनेट सेवाएं प्रभावित, 22 लोगों की मौत का दावा स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून की शुरुआत से PoK के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं सीमित कर दी गई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बाहर जाने से रोकने के लिए ऐसा किया गया। दावा किया जा रहा है कि पिछले दो सप्ताह के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 22 लोगों की मौत हुई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। 27 जुलाई को होंगे विधानसभा चुनाव पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनावहोंगे, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। चुनाव से पहले बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Pakistan raises remarks on Muslims, Urdu and Kashmir, sparking political row in India
भारत पर पाकिस्तान की टिप्पणी से सियासी तकरार तेज, मुस्लिम-उर्दू और कश्मीर पर उठाए सवाल

पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय, उर्दू भाषा और कश्मीर को लेकर कई आरोप लगाए। जामिया कार्यक्रम को लेकर आपत्ति अंद्राबी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई, जो जामिया मिलिया इस्लामिया में आयोजित होने वाला था। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी विचारधारा का “प्रचार” चिंता का विषय है और इससे संस्थानों की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। मुस्लिम पहचान पर चिंता जताई पाकिस्तानी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत में मुस्लिम समुदाय की पहचान और उनकी भाषा पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की और कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। ‘हेट स्पीच’ पर भी उठाए सवाल अंद्राबी ने भारतीय नेताओं के कथित बयानों को “हेट स्पीच” करार दिया और कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और इन पर रोक लगनी चाहिए। कश्मीर और उर्दू पर आरोप जम्मू और कश्मीर को लेकर भी पाकिस्तान ने आरोप दोहराए। अंद्राबी के मुताबिक, वहां “जनसांख्यिकीय बदलाव” किए जा रहे हैं और उर्दू भाषा तथा मुस्लिम संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर उठाने की बात कही। भारत के आंतरिक मामलों में दखल पर सवाल भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू और कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं। पाकिस्तान की स्थिति पर भी उठते सवाल विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यक समुदायों–जैसे हिंदू, ईसाई, शिया और अहमदिया–की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में भारत के आंतरिक मुद्दों पर उसकी टिप्पणी को लेकर भी बहस छिड़ जाती है।  

surbhi मई 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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