Ketan Agrawal

Lohagad Fort in Pune, where police are investigating the death of Ketan Agrawal as an alleged murder involving his fiancée and another accused.
Pune Murder Case: पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को बताया आरोपी, लेकिन अदालत में कैसे साबित होंगे हत्या के आरोप?

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की मौत का मामला अब हत्या की जांच में बदल चुका है। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में आरोप तय होने या दोष सिद्ध होने के लिए पुलिस को मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने होंगे। हादसे से हत्या तक कैसे बदला मामला? 18 जून को 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने जांच का रुख बदलते हुए इसे हत्या का मामला बताया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या की। पुलिस का दावा क्या है? पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार: सिया गोयल अपनी तयशुदा शादी से खुश नहीं थी। उसका चेतन चौधरी के साथ प्रेम संबंध था। दोनों ने कई बार मुलाकात कर हत्या की योजना बनाई। कथित तौर पर वारदात से पहले रिहर्सल भी की गई। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद दूसरी बार घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, ये सभी पुलिस के आरोप हैं और अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। अदालत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी प्रक्रिया में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता। पुलिस को अदालत के सामने यह साबित करना होगा कि: केतन की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी। उसे जानबूझकर चट्टान से धक्का दिया गया। दोनों आरोपियों की कथित साजिश और वारदात के बीच स्पष्ट संबंध है। इसके लिए पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) की एक मजबूत और बिना किसी टूट के कड़ी प्रस्तुत करनी होगी। किन सबूतों पर टिकी होगी जांच? जांच एजेंसियां निम्नलिखित साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं: मोबाइल फोन रिकॉर्ड लोकेशन डेटा सीसीटीवी फुटेज दोनों आरोपियों की कथित मुलाकातों के सबूत घटना के पहले और बाद का व्यवहार फोरेंसिक रिपोर्ट घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्य हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसके पास घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है, जो यह बता सके कि केतन को वास्तव में किसने धक्का दिया। कबूलनामा कितना अहम? रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अपने दावे में आरोपियों के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख कर रही है। लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर का कहना है कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामों की कानूनी वैधता सीमित होती है। उन्होंने कहा कि अदालत केवल ऐसे बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र और ठोस साक्ष्यों की भी आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ की राय इंडिया टुडे से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कहा कि किसी मामले को लेकर बनी सार्वजनिक धारणा और अदालत में होने वाली सुनवाई अलग-अलग होती है। उनके अनुसार, अदालत केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह स्थापित नहीं होती, तो केवल आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध करना आसान नहीं होगा। जांच अभी जारी फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी इस मामले में आरोपी हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
A viral video allegedly shows Siya Goyal talking on her phone inside a nightclub before the Pune murder case, as police continue investigating Ketan Agrawal's death.
पुणे मर्डर केस: सिया गोयल का पुराना वीडियो वायरल, फोन पर बोलीं- "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है"

पुणे: मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 15 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नाइटक्लब में फोन पर बातचीत का वीडियो बताया जा रहा है कि यह वीडियो दिसंबर 2025 का है। वीडियो में सिया गोयल एक नाइटक्लब में दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में बीयर की बोतल जैसी वस्तु नजर आती है और वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती दिख रही हैं। वीडियो की शुरुआत में सिया फोन उठाकर "कौन?" कहती हैं। तेज संगीत के कारण वह एक कान पर हाथ रखकर कॉल सुनने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर गुस्से में कहती सुनाई देती हैं, "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है।" जांच में नया एंगल वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सिया गोयल उस समय किससे बात कर रही थीं। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप लगाया, वह कौन था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है। अभी तक पुलिस ने इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। शराब पीने को लेकर भी चर्चा पिछले सप्ताह कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस हिरासत के दौरान सिया गोयल ने बीयर की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा ऐसी मांग नहीं की। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। परिवार ने आरोपों को बताया गलत सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने इन सभी दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के शराब पीने, पार्टी करने या बीयर मांगने संबंधी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच जारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
A symbolic image representing disciplinary action against a dental professional following a controversial social media post related to the Ketan Agrawal case.
केतन अग्रवाल की मौत पर विवादित पोस्ट: AIDSA ने डॉ. मुस्कान सोनी को 5 साल के लिए किया निलंबित

पुणे: केतन अग्रवाल की मौत पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मजाक उड़ाने वाली पोस्ट करना डॉ. मुस्कान सोनी को भारी पड़ गया। ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से पांच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. मुस्कान सोनी का आचरण संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। इसलिए उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है। विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह AIDSA के अनुसार, केतन अग्रवाल की दर्दनाक मौत के बाद डॉ. मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे मृतक का मजाक उड़ाने वाला और असंवेदनशील माना गया। संगठन का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संस्था की गरिमा और पेशेवर नैतिकता के भी खिलाफ हैं। पांच साल तक लागू रहेगा निलंबन जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में डॉ. मुस्कान सोनी संगठन की किसी भी गतिविधि, पद या सदस्यता से जुड़ी भूमिका नहीं निभा सकेंगी। सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में इस आदेश की समीक्षा या संशोधन कर सकता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी इस बीच पुणे पुलिस केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां केतन के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद केतन का मोबाइल कुछ समय तक उनकी मंगेतर सिया गोयल के पास था, जिसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। अब यह जांच की जा रही है कि फोन से कोई डिजिटल साक्ष्य मिटाया गया या उसके साथ छेड़छाड़ की गई। 18 जून को हुई थी घटना पुलिस के मुताबिक, 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को कथित रूप से खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। केतन और सिया की शादी इसी वर्ष नवंबर में प्रस्तावित थी। घटना के बाद पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों सहित मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन जांच के क्रम में पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग समय पर लोहागढ़ किले लेकर गई, जहां कथित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराया गया। पुलिस का कहना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को समझने में मदद मिल रही है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Police investigation underway in the Pune murder case as accused Siya Goyal's brother Sahil Goyal speaks to the media about her relationship with Ketan Agrawal.
पुणे मर्डर केस: 'सिया केतन से शादी करना चाहती थी, चेतन से रिश्ता खत्म करने की बात कही थी', भाई साहिल का दावा

पुणे: चर्चित पुणे मर्डर केस में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल ने मामले को लेकर कई नए दावे किए हैं। साहिल का कहना है कि सिया प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल से शादी कर उनके साथ अपना भविष्य बनाना चाहती थी और उसने खुद उनसे कहा था कि उसका चेतन चौधरी से कोई रिश्ता नहीं है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि सिया और चेतन एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। पुलिस के अनुसार, सिया की शादी पहले से केतन अग्रवाल से तय होने के कारण दोनों ने कथित तौर पर केतन की हत्या की साजिश रची। इस मामले में सिया और चेतन पर 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। 'सिया ने कहा था, पूरी जिंदगी केतन के साथ बिताना चाहती हूं' एक मीडिया इंटरव्यू में साहिल गोयल ने दावा किया कि सिया ने उनसे स्पष्ट कहा था कि वह केवल केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है। साहिल के मुताबिक, सिया ने उनसे कहा था कि चेतन के साथ उसका कोई संबंध नहीं है और उसने कसम खाकर भरोसा दिलाया था कि शादी के बाद वह कभी चेतन से संपर्क नहीं रखेगी। इसी वजह से उन्होंने सिया और चेतन के पुराने रिश्ते के बारे में परिवार में किसी को कुछ नहीं बताया। 'शादी को लेकर बेहद खुश थी सिया' साहिल ने दावा किया कि सिया अपनी शादी की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थी। उनके अनुसार, वह केतन के साथ प्री-वेडिंग फोटोशूट की योजना बना रही थी और घंटों वीडियो कॉल पर शादी और फोटोशूट से जुड़ी तैयारियों पर चर्चा करती थी। उन्होंने कहा कि सिया ने फोटोशूट के लिए पसंदीदा गाने और लोकेशन भी चुन ली थीं और नई जिंदगी को लेकर उत्साहित दिखाई देती थी। 'चेतन को लेकर असमंजस में थी' साहिल के अनुसार, सिया चेतन चौधरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। उन्होंने दावा किया कि सिया यह तय नहीं कर पा रही थी कि चेतन के साथ संबंध जारी रखे या पूरी तरह खत्म कर दे। साहिल का कहना है कि सिया ने उनसे कहा था कि वह और चेतन सिर्फ दोस्त हैं और उनके बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जो उसकी शादी में बाधा बने। पुलिस की जांच जारी दूसरी ओर, पुलिस की जांच का निष्कर्ष फिलहाल अलग है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न गवाहों के बयानों तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। फिलहाल, साहिल गोयल के बयान उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत द्वारा नहीं की गई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Pune Police investigate the Ketan Agrawal murder case after forensic analysis revealed a 34-minute call between the accused before the incident
Pune Murder Case: हत्या से 34 मिनट पहले किससे हुई थी सिया की सीक्रेट कॉल? फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा

  Pune Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक नया और अहम खुलासा सामने आया है। पुलिस की फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल ने कथित हत्या से महज 34 मिनट पहले अपने प्रेमी और सह-आरोपी चेतन चौधरी से एक लंबी फोन पर बातचीत की थी। जांच एजेंसियां इस कॉल को पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी मान रही हैं और इसे कथित साजिश का निर्णायक सबूत मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। हत्या से पहले हुई 34 मिनट की कॉल पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल फॉरेंसिक जांच से पता चला है कि 18 जून को लोहागढ़ किले में वारदात से कुछ समय पहले सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच बातचीत हुई थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस कॉल के दौरान दोनों ने कथित तौर पर अंतिम रणनीति पर चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत उस समय हुई जब सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ किले पर मौजूद थी। व्यू-पॉइंट की लोकेशन साझा करने का शक जांच में पुलिस को आशंका है कि कॉल के दौरान सिया ने चेतन को उस व्यू-पॉइंट की सटीक जानकारी दी, जहां वह केतन के साथ मौजूद थी। अधिकारियों का मानना है कि उसने आसपास मौजूद लोगों की स्थिति की जानकारी भी साझा की, ताकि कथित वारदात को अंजाम देने में कोई बाधा न आए। पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है। डिलीट किए गए चैट और वॉइस नोट्स रिकवर करने की कोशिश जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर पिछले तीन महीनों के व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम संदेश और वॉइस नोट्स डिलीट कर दिए थे। अब साइबर फॉरेंसिक टीम मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर करने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्य से दोनों के बीच हुई बातचीत और कथित साजिश की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। हर डिजिटल सबूत की हो रही जांच पुणे ग्रामीण पुलिस की तकनीकी टीम अब रिकवर किए गए डेटा, मोबाइल लोकेशन, इंटरनेट आईपी एड्रेस और कॉल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियां इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में मजबूत सबूत के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि यदि डिजिटल रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं तो इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि वारदात अचानक नहीं, बल्कि पहले से बनाई गई योजना के तहत अंजाम दी गई थी। शादी नहीं करना चाहती थी सिया: पुलिस पुलिस के अनुसार, सिया गोयल नवंबर में होने वाली अपनी शादी से खुश नहीं थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी वजह से उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश रची। आरोप है कि 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में सिया ने केतन को खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। जांच अभी जारी पुलिस लगातार डिजिटल फॉरेंसिक, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Pune Murder Case
पुणे मर्डर केस: रेस्क्यू टीम का बड़ा दावा, केतन का सिर बुरी तरह कुचला था,

शव देखकर भी नहीं रोई सिया पुणे, एजेंसियां। कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। लोहगढ़ किले से केतन का शव निकालने वाली रेस्क्यू टीम के सदस्य ने दावा किया है कि शव मिलने के समय जहां परिवार और अन्य लोग रो रहे थे, वहीं मंगेतर सिया गोयल पूरी तरह शांत नजर आई। इस बीच पुलिस ने सिया के माता-पिता से भी पूछताछ की है, जबकि एक दिन पहले उसके भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई थी।   रेस्क्यू टीम ने  क्या कहा ? रेस्क्यू टीम के सदस्य सुनील गायकवाड़ के अनुसार, केतन का शव गहरी खाई से बरामद किया गया था। उनके सिर पर गंभीर चोटें थीं, खोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी और शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान मिले थे। उन्होंने बताया कि पुलिस को घटना की सूचना सुबह करीब 10:30 बजे मिली थी। कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोपहर में शव को बाहर निकालकर एम्बुलेंस के हवाले किया गया।   जांच के दौरान पुलिस ने सिया के परिवार से भी कई महत्वपूर्ण सवाल किए हैं। साहिल गोयल ने कथित तौर पर बताया कि यदि सिया ने शादी से इनकार किया होता तो परिवार रिश्ता तोड़ देता। वहीं, पुलिस सिया और सह-आरोपी चेतन चौधरी के बीच संबंधों और कथित साजिश के पहलुओं की भी जांच कर रही है।   पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने घटना से पहले और बाद की मोबाइल चैट डिलीट कर दी थी। फॉरेंसिक जांच के लिए मोबाइल फोन भेजे गए हैं ताकि हटाए गए डेटा को रिकवर किया जा सके। कॉल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं। उधर, केतन के परिवार का कहना है कि घटना वाले दिन से ही उन्हें सिया के व्यवहार पर संदेह हो गया था। परिवार का दावा है कि सिया ने उनके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया और बाद में सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उनका शक और गहरा हो गया। फिलहाल पुलिस सभी तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Ketan Agrawal Murder Case
पुणे केतन हत्याकांड: प्रेम संबंध, जबरन तय शादी और 2,004 कॉल; पुलिस जांच में रोज हो रहे नए खुलासे

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे में प्रॉपर्टी डीलर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस वारदात के पीछे प्रेम संबंध, परिवार द्वारा तय की गई शादी और पूर्व नियोजित साजिश की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल सह-आरोपी चेतन चौधरी से प्रेम करती थी, लेकिन परिवार ने उसकी शादी आर्थिक रूप से संपन्न अग्रवाल परिवार में तय कर दी थी।   परिवार को पहले से थी रिश्ते की जानकारी पुलिस जांच में सामने आया है कि जनवरी में आयोजित एक कम्युनिटी क्रिकेट मैच के दौरान सिया और चेतन की नजदीकियों की जानकारी परिवार के कुछ सदस्यों को मिल गई थी। हालांकि, दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति में अंतर होने के कारण सिया की भावनाओं को नजरअंदाज कर उसकी सगाई केतन अग्रवाल से करा दी गई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सिया के भाई साहिल गोयल ने यह जानकारी परिवार के अन्य लोगों से साझा की थी या नहीं। इस संबंध में उससे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई।   चैट डिलीट, 2,004 कॉल और फोरेंसिक जांच जांच में यह भी पता चला है कि घटना से पहले और बाद में सिया और चेतन ने अपने मोबाइल फोन से चैट डिलीट कर दी थी। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले छह महीनों में दोनों के बीच 2,004 कॉल हुईं, जिनकी कुल अवधि लगभग 238 घंटे रही। वारदात वाले दिन दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया।   हत्या की साजिश का दावा, जांच जारी पुलिस का दावा है कि लोहागढ़ किले पर पहले से तय इशारे के बाद चेतन चौधरी ने पीछे से केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया। हालांकि, सिया की मां ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी बेटी ट्रेकिंग पर जाना ही नहीं चाहती थी और उसे केतन व उसके परिवार के कहने पर वहां जाना पड़ा। पुलिस फिलहाल सभी डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।

abhishek singh जून 27, 2026 0
Ketan Agrawal Murder
पुणे मर्डर केस: 'अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे भी सख्त सजा मिले', सिया गोयल के माता-पिता का बड़ा बयान

पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और यदि उनकी बेटी जांच में दोषी पाई जाती है, तो उसे भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। परिवार ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।   'दोषी हो तो बेटी को भी सजा मिले' सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने भावुक होते हुए कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हो, उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह उनकी बेटी ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि यदि सिया का अपराध साबित होता है तो उसे भी वही सजा मिलनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है। उनके इस बयान की व्यापक चर्चा हो रही है।   'पहले जानकारी होती तो रोकने की कोशिश करते' सिया के पिता प्रवीण गोयल, जो घटना के बाद से अस्वस्थ हैं और अस्पताल में उपचाराधीन हैं, ने भी न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले सिया और चेतन चौधरी के कथित संबंधों की जानकारी होती, तो वे समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने की कोशिश करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी चेतन चौधरी को देखा तक नहीं था और न ही उसके बारे में परिवार में कोई चर्चा हुई थी।   दोनों परिवारों के बीच थे पुराने संबंध प्रवीण गोयल ने बताया कि केतन अग्रवाल का परिवार उनके लंबे समय से परिचित था और दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सिर्फ एक रिश्ते को नहीं, बल्कि एक होनहार युवक की जिंदगी भी छीन ली है।   जांच जारी, जुटाए जा रहे सबूत पुलिस के अनुसार, 18 जून को केतन अग्रवाल की कथित रूप से हत्या कर उसका शव लोहागढ़ किले की गहरी खाई में फेंक दिया गया था। मामले में सिया गोयल और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Pune police investigate businessman Ketan Agrawal death case linked to alleged murder conspiracy by fiancée and her lover.
पुणे मर्डर मिस्ट्री: परिवार के एक शक ने खोली साजिश की परतें, मंगेतर और उसके प्रेमी पर हत्या का आरोप

  पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले में कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की मौत का मामला, जिसे शुरुआत में एक दुर्घटना माना जा रहा था, अब कथित हत्या की सनसनीखेज साजिश में बदल गया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब मृतक के परिवार ने हादसे की कहानी पर सवाल उठाए और गहन जांच की मांग की। जन्मदिन की आउटिंग बनी मौत का सफर पुलिस के अनुसार, 18 जून को केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोनावला स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले घूमने गए थे। यह यात्रा सिया के जन्मदिन से एक दिन पहले आयोजित की गई थी। घटना के बाद सिया ने पुलिस को बताया था कि फोटो खिंचवाने के दौरान केतन का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में गिर गया। प्रारंभिक जांच में इसे दुर्घटनावश मौत मानते हुए मामला दर्ज किया गया। परिवार को हादसे की कहानी पर हुआ संदेह केतन के परिजनों ने इस दावे पर भरोसा नहीं किया। उनका कहना था कि केतन एक अनुभवी ट्रेकर था और लोहागढ़ क्षेत्र से अच्छी तरह परिचित था। परिवार का मानना था कि इतनी जानकारी रखने वाला व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में इस तरह दुर्घटना का शिकार नहीं हो सकता। परिजनों के संदेह के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा विस्तृत जांच शुरू की। CCTV फुटेज बना जांच का टर्निंग पॉइंट जांच टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने सिर पर हुडी पहन रखी थी और कानों में हेडफोन लगाए हुए था। जांच अधिकारियों ने मौसम संबंधी रिकॉर्ड भी खंगाले। पता चला कि घटना वाले दिन तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस था। ऐसे मौसम में किसी व्यक्ति का हुडी पहनना पुलिस को असामान्य लगा, जिसके बाद उस व्यक्ति की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। हुडी पहनने वाले युवक की पहचान से खुला राज सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान चेतन चौधरी के रूप में की। जांच में सामने आया कि चेतन और सिया गोयल के बीच करीबी संबंध थे। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकता है। लोकेशन छिपाने के लिए घर पर छोड़ दिया था मोबाइल पुलिस जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक, चेतन चौधरी लोहागढ़ जाने से पहले अपना मोबाइल फोन कोंढवा स्थित घर पर छोड़ गया था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसने जानबूझकर ऐसा किया ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके।  सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की मदद से पुलिस ने उसकी गतिविधियों का पूरा क्रम जोड़ लिया। 2,000 से अधिक कॉल्स ने मजबूत किया शक जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सिया गोयल और चेतन चौधरी कई महीनों से लगातार संपर्क में थे। कॉल रिकॉर्ड की जांच में दोनों के बीच 2,000 से अधिक फोन कॉल्स का खुलासा हुआ। अधिकारियों के अनुसार, घटना से पहले दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर वारदात की योजना बनाई गई थी। पुलिस का दावा है कि बातचीत में मौत को हादसे का रूप देने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। पुलिस का दावा: सुनसान जगह ले जाकर दिया धक्का जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना वाले दिन चेतन चौधरी पहले ही लोहागढ़ किले पहुंच चुका था। कुछ देर बाद सिया और केतन वहां पहुंचे। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन को किले के एक सुनसान हिस्से की ओर ले जाया और वहां उसे खाई में धक्का दे दिया। खाई में गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। हत्या की साजिश का मामला, जांच जारी पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है और मामले में जुटाए गए डिजिटल एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में यह मामला एक पूर्व-नियोजित हत्या की साजिश की ओर इशारा करता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की जांच पर निर्भर करेगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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