राष्ट्रीय

AIDSA Suspends Dr. Muskan Soni for 5 Years

केतन अग्रवाल की मौत पर विवादित पोस्ट: AIDSA ने डॉ. मुस्कान सोनी को 5 साल के लिए किया निलंबित

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
A symbolic image representing disciplinary action against a dental professional following a controversial social media post related to the Ketan Agrawal case.
AIDSA Suspends Dr. Muskan Soni Over Controversial Social Media Post

पुणे: केतन अग्रवाल की मौत पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मजाक उड़ाने वाली पोस्ट करना डॉ. मुस्कान सोनी को भारी पड़ गया। ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से पांच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है।

एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. मुस्कान सोनी का आचरण संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। इसलिए उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है।

विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह

AIDSA के अनुसार, केतन अग्रवाल की दर्दनाक मौत के बाद डॉ. मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे मृतक का मजाक उड़ाने वाला और असंवेदनशील माना गया। संगठन का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संस्था की गरिमा और पेशेवर नैतिकता के भी खिलाफ हैं।

पांच साल तक लागू रहेगा निलंबन

जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में डॉ. मुस्कान सोनी संगठन की किसी भी गतिविधि, पद या सदस्यता से जुड़ी भूमिका नहीं निभा सकेंगी। सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में इस आदेश की समीक्षा या संशोधन कर सकता है।

केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी

इस बीच पुणे पुलिस केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां केतन के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद केतन का मोबाइल कुछ समय तक उनकी मंगेतर सिया गोयल के पास था, जिसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। अब यह जांच की जा रही है कि फोन से कोई डिजिटल साक्ष्य मिटाया गया या उसके साथ छेड़छाड़ की गई।

18 जून को हुई थी घटना

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को कथित रूप से खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। केतन और सिया की शादी इसी वर्ष नवंबर में प्रस्तावित थी।

घटना के बाद पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों सहित मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन

जांच के क्रम में पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग समय पर लोहागढ़ किले लेकर गई, जहां कथित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराया गया। पुलिस का कहना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को समझने में मदद मिल रही है।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Greater Noida cylinder blast
ग्रेटर नोएडा में सिलेंडर ब्लास्ट, लेबर कैंप में लगी भीषण आग

नई दिल्ली, एजेंसियां। ग्रेटर नोएडा के थाना बादलपुर क्षेत्र स्थित कचेड़ा गांव के एक लेबर कैंप में एलपीजी गैस सिलेंडर फटने से भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में टीनशेड की कई झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं। आग की लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं और गाजियाबाद से भी धुएं का गुबार नजर आया। घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।   सिलेंडर ब्लास्ट के बाद तेजी से फैली आग फायर विभाग के अनुसार, रात करीब 10:50 बजे एक निजी निर्माण कंपनी के लेबर कैंप में आग लगने की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक टीनशेड झोपड़ी में रखे छोटे घरेलू एलपीजी सिलेंडर में गैस रिसाव हुआ, जिसके बाद सिलेंडर फट गया। विस्फोट के बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते आसपास की अन्य झोपड़ियों तक फैल गई।   छह दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर सर्विस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। आग की गंभीरता को देखते हुए नोएडा और गाजियाबाद से कुल छह दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। दमकल कर्मियों ने करीब 45 मिनट की लगातार मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और आसपास के क्षेत्रों में आग फैलने से रोक दिया।   समय रहते टला बड़ा हादसा अधिकारियों के अनुसार, समय पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू होने से सभी मजदूर सुरक्षित बाहर निकल गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। आग लगने के कारण टीनशेड झोपड़ियों और उनमें रखे सामान को नुकसान पहुंचा है। फायर विभाग ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने लेबर कैंपों में गैस सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
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जे.पी. नड्डा ने 'टीबी मुक्त भारत अभियान' और डेंगू तैयारियों की समीक्षा की, राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश

A smartphone displaying the WhatsApp logo alongside a government notice symbolizing regulatory scrutiny over the platform's proposed username feature in India.

WhatsApp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस; तीन दिन में मांगा जवाब

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भारत ने पाकिस्तान से 188 मछुआरों और कैदियों की शीघ्र रिहाई व स्वदेश वापसी की मांग दोहराई

Dhiraj Seth
जनरल धीरज सेठ ने संभाला थल सेना प्रमुख का पद, सैन्य नेतृत्व में बड़े बदलाव लागू

नई दिल्ली, एजेंसियां। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) के रूप में पदभार संभाल लिया है। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। जनरल सेठ के कार्यभार संभालने के साथ ही सेना के शीर्ष नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं।   'VIJAY' विजन के साथ भविष्य की सेना पर फोकस   पदभार संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के लिए 'VIJAY' विजन पेश किया। इस रणनीति का उद्देश्य सेना को तकनीक आधारित, आधुनिक और बहु-आयामी चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि सेना को बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप और अधिक सक्षम तथा आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।   आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक पर रहेगा जोर   नए सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में स्वदेशी रक्षा तकनीक, आधुनिक हथियार प्रणालियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और संयुक्त सैन्य संचालन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने 'जय से विजय' के मंत्र के साथ सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की बात कही।   तीन दशक बाद आर्मर्ड कोर से बने सेना प्रमुख   जनरल धीरज सेठ लगभग तीन दशक बाद आर्मर्ड कोर से आने वाले पहले सेना प्रमुख बने हैं। अपने करीब 40 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने पश्चिमी सीमा, जम्मू-कश्मीर और कई रणनीतिक कमानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।   सैन्य सुधारों को मिलेगी नई दिशा   रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, संयुक्त सैन्य कमान, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और भविष्य की युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। ऐसे समय में उनका कार्यभार संभालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से उन्नत करने की दिशा में काम कर रहा है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
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Nirmala Sitaraman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना, निवेश और आर्थिक सहयोग पर होगी अहम चर्चा

Aam Aadmi Party MP Raghav Chadha outside the Delhi High Court after the court ordered the removal of allegedly defamatory social media content targeting him.

राघव चड्ढा को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत, सोशल मीडिया से कथित अपमानजनक कंटेंट हटाने का अंतरिम आदेश

An illustration of the proposed six-lane tunnel linking Dwarka Expressway with Nelson Mandela Road in South Delhi, aimed at easing traffic across Delhi-NCR.
दिल्ली-NCR को बड़ी सौगात: द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बनेगी 6-लेन टनल, कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली 6-लेन सुरंग परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 6,969.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148AE के तहत बनने वाली यह 8.1 किलोमीटर लंबी परियोजना दिल्ली के लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच सफर होगा आसान इस परियोजना के पूरा होने के बाद द्वारका, गुरुग्राम, पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बीच यात्रा अधिक तेज और जाम-मुक्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। सदर्न रिज के नीचे बनेगी आधुनिक ट्विन-ट्यूब टनल परियोजना की मुख्य सड़क लगभग 6.3 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 1.98 किलोमीटर हिस्सा Southern Ridge Forest के नीचे से गुजरेगा। यहां अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जाएगी, जिससे सतह पर पर्यावरण और यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के जंक्शन के पास समाप्त होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से नोएडा और गाजियाबाद की कनेक्टिविटी बेहतर परियोजना के तहत AIIMS New Delhi से महिपालपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है। यह कॉरिडोर बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली से पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद तक बिना रेड लाइट के यात्रा संभव हो सकेगी। इसके अलावा: महिपालपुर-छतरपुर जंक्शन पर 1.8 किमी लंबी एलिवेटेड सड़क बनेगी। छतरपुर-महिपालपुर मार्ग पर अतिरिक्त फ्लाईओवर तैयार होगा। छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एलिवेटेड यू-टर्न बनाया जाएगा। इन सभी हिस्सों को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे सरकार के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य से लगभग: 7.54 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार, 9.80 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होंगे। यानी कुल मिलाकर 17 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह परियोजना राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
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