पुणे: महाराष्ट्र के पुणे स्थित लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की मौत का मामला अब हत्या की जांच में बदल चुका है। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर हत्या का आरोप लगाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में आरोप तय होने या दोष सिद्ध होने के लिए पुलिस को मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने होंगे। हादसे से हत्या तक कैसे बदला मामला? 18 जून को 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे ट्रैकिंग के दौरान हुआ हादसा माना गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने जांच का रुख बदलते हुए इसे हत्या का मामला बताया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या की। पुलिस का दावा क्या है? पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार: सिया गोयल अपनी तयशुदा शादी से खुश नहीं थी। उसका चेतन चौधरी के साथ प्रेम संबंध था। दोनों ने कई बार मुलाकात कर हत्या की योजना बनाई। कथित तौर पर वारदात से पहले रिहर्सल भी की गई। पहली कोशिश नाकाम रहने के बाद दूसरी बार घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि, ये सभी पुलिस के आरोप हैं और अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। अदालत में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानूनी प्रक्रिया में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता। पुलिस को अदालत के सामने यह साबित करना होगा कि: केतन की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी। उसे जानबूझकर चट्टान से धक्का दिया गया। दोनों आरोपियों की कथित साजिश और वारदात के बीच स्पष्ट संबंध है। इसके लिए पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) की एक मजबूत और बिना किसी टूट के कड़ी प्रस्तुत करनी होगी। किन सबूतों पर टिकी होगी जांच? जांच एजेंसियां निम्नलिखित साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर सकती हैं: मोबाइल फोन रिकॉर्ड लोकेशन डेटा सीसीटीवी फुटेज दोनों आरोपियों की कथित मुलाकातों के सबूत घटना के पहले और बाद का व्यवहार फोरेंसिक रिपोर्ट घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्य हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने अदालत को बताया है कि उसके पास घटना का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं है, जो यह बता सके कि केतन को वास्तव में किसने धक्का दिया। कबूलनामा कितना अहम? रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अपने दावे में आरोपियों के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख कर रही है। लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर का कहना है कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामों की कानूनी वैधता सीमित होती है। उन्होंने कहा कि अदालत केवल ऐसे बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र और ठोस साक्ष्यों की भी आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ की राय इंडिया टुडे से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कहा कि किसी मामले को लेकर बनी सार्वजनिक धारणा और अदालत में होने वाली सुनवाई अलग-अलग होती है। उनके अनुसार, अदालत केवल कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह स्थापित नहीं होती, तो केवल आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध करना आसान नहीं होगा। जांच अभी जारी फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी इस मामले में आरोपी हैं। मामले की जांच जारी है और अंतिम निर्णय अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
पुणे: मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 15 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नाइटक्लब में फोन पर बातचीत का वीडियो बताया जा रहा है कि यह वीडियो दिसंबर 2025 का है। वीडियो में सिया गोयल एक नाइटक्लब में दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में बीयर की बोतल जैसी वस्तु नजर आती है और वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती दिख रही हैं। वीडियो की शुरुआत में सिया फोन उठाकर "कौन?" कहती हैं। तेज संगीत के कारण वह एक कान पर हाथ रखकर कॉल सुनने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर गुस्से में कहती सुनाई देती हैं, "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है।" जांच में नया एंगल वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सिया गोयल उस समय किससे बात कर रही थीं। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप लगाया, वह कौन था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है। अभी तक पुलिस ने इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। शराब पीने को लेकर भी चर्चा पिछले सप्ताह कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस हिरासत के दौरान सिया गोयल ने बीयर की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा ऐसी मांग नहीं की। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। परिवार ने आरोपों को बताया गलत सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने इन सभी दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के शराब पीने, पार्टी करने या बीयर मांगने संबंधी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच जारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में नया मोड़ आ गया है। लोनावला ग्रामीण पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) परीक्षण कराने की तैयारी में है। पुलिस का मानना है कि दोनों पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा रहे हैं। ऐसे में उनके बयानों की सत्यता परखने और जांच को आगे बढ़ाने के लिए अदालत से पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति मांगी जाएगी। घटनास्थल पर कराया गया क्राइम सीन का पुनर्निर्माण जांच के तहत पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग लोहागढ़ किले के उस स्थान पर ले गई, जहां केतन अग्रवाल की कथित तौर पर चट्टान से धक्का देकर हत्या की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया गया ताकि हत्या की परिस्थितियों और आरोपियों के बयानों का मिलान किया जा सके। पुलिस का दावा है कि हत्या से पहले अपराध की रिहर्सल किए जाने के भी संकेत मिले हैं। 3 जुलाई को खत्म होगी पुलिस रिमांड सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई को समाप्त हो रही है। इसके बाद जांच एजेंसी अदालत में पॉलीग्राफ परीक्षण की अनुमति के लिए आवेदन दाखिल कर सकती है। पुलिस का कहना है कि परीक्षण से हत्या से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। वीडियो और गेट एनालिसिस भी जांच का हिस्सा जांच के दौरान सिया गोयल का एक पुराना वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह एक पब में फोन पर बहस और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती नजर आ रही है। हालांकि पुलिस फिलहाल इसकी सत्यता और मामले से संबंध की जांच कर रही है। वहीं, चेतन चौधरी का गेट (चाल) एनालिसिस भी कराया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी में दिखाई देने वाला व्यक्ति वही था या नहीं। पुलिस के अनुसार, केतन अग्रवाल को शादी से पहले ही सिया और चेतन के कथित रिश्ते पर संदेह हो गया था। इसी पहलू सहित सभी संभावित कारणों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और फोरेंसिक जांच के आधार पर ही मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी।
पुणे: केतन अग्रवाल की मौत पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मजाक उड़ाने वाली पोस्ट करना डॉ. मुस्कान सोनी को भारी पड़ गया। ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से पांच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. मुस्कान सोनी का आचरण संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। इसलिए उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है। विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह AIDSA के अनुसार, केतन अग्रवाल की दर्दनाक मौत के बाद डॉ. मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे मृतक का मजाक उड़ाने वाला और असंवेदनशील माना गया। संगठन का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संस्था की गरिमा और पेशेवर नैतिकता के भी खिलाफ हैं। पांच साल तक लागू रहेगा निलंबन जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में डॉ. मुस्कान सोनी संगठन की किसी भी गतिविधि, पद या सदस्यता से जुड़ी भूमिका नहीं निभा सकेंगी। सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में इस आदेश की समीक्षा या संशोधन कर सकता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी इस बीच पुणे पुलिस केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां केतन के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद केतन का मोबाइल कुछ समय तक उनकी मंगेतर सिया गोयल के पास था, जिसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। अब यह जांच की जा रही है कि फोन से कोई डिजिटल साक्ष्य मिटाया गया या उसके साथ छेड़छाड़ की गई। 18 जून को हुई थी घटना पुलिस के मुताबिक, 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को कथित रूप से खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। केतन और सिया की शादी इसी वर्ष नवंबर में प्रस्तावित थी। घटना के बाद पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों सहित मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन जांच के क्रम में पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग समय पर लोहागढ़ किले लेकर गई, जहां कथित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराया गया। पुलिस का कहना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को समझने में मदद मिल रही है।
पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि केतन की मौत के बाद उसका मोबाइल फोन कुछ समय तक उसकी मंगेतर सिया गोयल के पास था। बाद में सिया ने यह फोन केतन के परिजनों को सौंप दिया। अब पुणे ग्रामीण पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फोन उसके पास रहने के दौरान कहीं कोई चैट, कॉल रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल सबूत तो नहीं हटाए गए। डिजिटल सबूतों की हो रही जांच जांच एजेंसियां मोबाइल फोन के डेटा की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या के बाद फोन से किसी तरह की छेड़छाड़ हुई या नहीं। यदि डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने या बदलने की पुष्टि होती है, तो यह मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकती है। मंगेतर और कथित प्रेमी पर हत्या का आरोप पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की शादी नवंबर में सिया गोयल से होने वाली थी। इसके लिए जयपुर में एक भव्य विवाह समारोह की तैयारियां भी चल रही थीं। आरोप है कि सिया और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर लोनावला स्थित लोहागढ़ किले की पहाड़ी से केतन को धक्का देकर उसकी हत्या कर दी। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। क्राइम सीन रीक्रिएट कर जुटाए जा रहे सबूत मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल पर क्राइम सीन को दोबारा तैयार (रीक्रिएट) किया। इस दौरान डमी का इस्तेमाल कर पूरी घटना को समझने की कोशिश की गई। साथ ही सह-आरोपी चेतन चौधरी को भी घटनास्थल ले जाकर घटनाक्रम की पुष्टि की गई। सीसीटीवी और वैज्ञानिक जांच पर फोकस पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की सत्यता की जांच के लिए 'गेट एनालिसिस' (चाल-ढाल के वैज्ञानिक परीक्षण) की तैयारी कर रही है। बचाव पक्ष का दावा है कि फुटेज में दिखाई देने वाला व्यक्ति चेतन नहीं है, जबकि पुलिस वैज्ञानिक परीक्षण के जरिए इस दावे की पुष्टि या खंडन करना चाहती है। जांच अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और वैज्ञानिक परीक्षण इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पुणे: चर्चित पुणे मर्डर केस में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल ने मामले को लेकर कई नए दावे किए हैं। साहिल का कहना है कि सिया प्रॉपर्टी कारोबारी केतन अग्रवाल से शादी कर उनके साथ अपना भविष्य बनाना चाहती थी और उसने खुद उनसे कहा था कि उसका चेतन चौधरी से कोई रिश्ता नहीं है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि सिया और चेतन एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। पुलिस के अनुसार, सिया की शादी पहले से केतन अग्रवाल से तय होने के कारण दोनों ने कथित तौर पर केतन की हत्या की साजिश रची। इस मामले में सिया और चेतन पर 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। 'सिया ने कहा था, पूरी जिंदगी केतन के साथ बिताना चाहती हूं' एक मीडिया इंटरव्यू में साहिल गोयल ने दावा किया कि सिया ने उनसे स्पष्ट कहा था कि वह केवल केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है। साहिल के मुताबिक, सिया ने उनसे कहा था कि चेतन के साथ उसका कोई संबंध नहीं है और उसने कसम खाकर भरोसा दिलाया था कि शादी के बाद वह कभी चेतन से संपर्क नहीं रखेगी। इसी वजह से उन्होंने सिया और चेतन के पुराने रिश्ते के बारे में परिवार में किसी को कुछ नहीं बताया। 'शादी को लेकर बेहद खुश थी सिया' साहिल ने दावा किया कि सिया अपनी शादी की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थी। उनके अनुसार, वह केतन के साथ प्री-वेडिंग फोटोशूट की योजना बना रही थी और घंटों वीडियो कॉल पर शादी और फोटोशूट से जुड़ी तैयारियों पर चर्चा करती थी। उन्होंने कहा कि सिया ने फोटोशूट के लिए पसंदीदा गाने और लोकेशन भी चुन ली थीं और नई जिंदगी को लेकर उत्साहित दिखाई देती थी। 'चेतन को लेकर असमंजस में थी' साहिल के अनुसार, सिया चेतन चौधरी के साथ अपने रिश्ते को लेकर असमंजस में थी। उन्होंने दावा किया कि सिया यह तय नहीं कर पा रही थी कि चेतन के साथ संबंध जारी रखे या पूरी तरह खत्म कर दे। साहिल का कहना है कि सिया ने उनसे कहा था कि वह और चेतन सिर्फ दोस्त हैं और उनके बीच ऐसा कोई रिश्ता नहीं है जो उसकी शादी में बाधा बने। पुलिस की जांच जारी दूसरी ओर, पुलिस की जांच का निष्कर्ष फिलहाल अलग है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। मामले की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न गवाहों के बयानों तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। फिलहाल, साहिल गोयल के बयान उनके व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी पुष्टि जांच एजेंसियों या अदालत द्वारा नहीं की गई है।
रांची। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पंजाब में संगठन विस्तार और चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी राज्य में अपनी रणनीति को धार देने में लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या पंजाब भी आने वाले समय में बंगाल की तरह भाजपा और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनेगा। बीजेपी पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, किसानों से जुड़े मुद्दों और विकास के एजेंडे को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी का प्रयास शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अपने संगठन को मजबूत करना है। इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए चेहरों को जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। राघव चड्ढा फैक्टर पर नजर पंजाब की राजनीति में राघव चड्ढा का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में रहे राघव चड्ढा को लेकर चल रही अटकलों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उनका नाम पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम माना जा रहा है। क्या पंजाब में दोहराएगा बंगाल वाला समीकरण? विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से काफी अलग हैं। यहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी चार प्रमुख ताकतों के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। फिर भी पार्टी संगठन का विस्तार, नए सामाजिक समीकरण और आक्रामक चुनावी रणनीति के जरिए खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।आप के दो पूर्व नेता रेस में हैं। पंजाब की सियासी ताकत की बात करे तो पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं। आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में इधर पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक पंजाब की सियासत किस ओर करवट बैठती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। और क्या बीजेपी राज्य में वैसी ही राजनीतिक बढ़त हासिल कर पाएगी जैसी उसने बंगाल या अन्य राज्यों में दर्ज की है?
पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का गेट (Gait) एनालिसिस कराने का फैसला लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस वैज्ञानिक परीक्षण से हत्या वाले दिन चेतन की गतिविधियों और घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसी कड़ी में पुलिस मंगलवार को चेतन को लेकर एक बार फिर लोहागढ़ किला पहुंची, जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) किया जाएगा। पुलिस हिरासत पांच दिन और बढ़ी सोमवार को महाराष्ट्र की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ा दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घटनास्थल पर साक्ष्यों की पुष्टि के लिए उनका पुलिस हिरासत में रहना जरूरी है। पासपोर्ट जलाने का भी आरोप पुलिस जांच के अनुसार, सिया गोयल ने कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट चोरी कर उसे फाड़कर जला दिया था। दावा है कि परिवार की प्रस्तावित बाली यात्रा को रोकने और केतन के साथ विदेश जाने से बचने के लिए उसने ऐसा किया। जांच में कार चालक के बयान को भी अहम माना जा रहा है, जिसने बताया कि यात्रा के दौरान सिया कुछ देर के लिए अकेले कार तक गई थी। हत्या की साजिश के मिले संकेत पुलिस का आरोप है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर हत्या की गई। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद की जांच में हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन के बीच पिछले छह महीनों में 2,000 से अधिक फोन कॉल और लगभग 238 घंटे की बातचीत हुई थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इन्हीं बातचीत के दौरान कथित साजिश रची गई। पुलिस यह भी दावा कर रही है कि घटना से पहले भी केतन को खाई में धक्का देने की एक असफल कोशिश की गई थी। अब गेट एनालिसिस, क्राइम सीन रीक्रिएशन और अन्य फॉरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच के बीच एक नया दावा सामने आया है। मुंबई एयरपोर्ट तक परिवार को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने दावा किया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल पुणे से निकलते समय कार में बैठना नहीं चाहती थीं और उनके भाई साहिल गोयल ने उन्हें कथित तौर पर हाथ पकड़कर जबरन गाड़ी में बैठाया था। कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पूरे सफर के दौरान सिया परेशान और तनाव में दिखाई दे रही थीं। पुलिस ने अभी तक ड्राइवर के इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रास्ते भर भाई-बहन के बीच होती रही बहस ड्राइवर के मुताबिक, पुणे से रवेट तक के सफर में सिया और उनके भाई साहिल के बीच किसी बात को लेकर बहस होती रही। उनका कहना है कि दोनों के बीच पूरे रास्ते तनाव का माहौल था। बाद में किवाले-लोढ़ा इलाके से केतन अग्रवाल और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी गाड़ी में सवार हुए, जिसके बाद सभी मुंबई एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। फूड कोर्ट पर हुई संदिग्ध हरकत का दावा वैभव जाधव के अनुसार, रास्ते में एक फूड कोर्ट पर सभी लोग चाय-नाश्ते के लिए रुके थे। इसी दौरान सिया किसी सामान का बहाना बनाकर वापस कार तक आईं। ड्राइवर का दावा है कि सिया ने कार से कुछ सामान निकाला और उसे अपनी जेब में रख लिया। इसके बाद वह वापस फूड कोर्ट चली गईं। ड्राइवर का कहना है कि उसने इस पूरी घटना को नोटिस किया था। एयरपोर्ट पहुंचने के बाद गायब मिला पासपोर्ट ड्राइवर के अनुसार, यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने के कुछ समय बाद उसे केतन अग्रवाल का फोन आया। केतन ने बताया कि उनका पासपोर्ट कार में छूट गया है। इसके बाद कार की तलाशी ली गई, लेकिन पासपोर्ट नहीं मिला। पासपोर्ट गायब होने के कारण केतन का बाली जाने का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। यह यात्रा दोनों के प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए तय की गई थी। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका केतन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल ने भी पासपोर्ट के गायब होने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य घटना नहीं लगती और इसके पीछे किसी सुनियोजित साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच जारी, पुलिस कर रही सभी पहलुओं की पड़ताल पुलिस पहले ही सिया गोयल और चेतन चौधरी को हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं। कैब ड्राइवर के ताजा दावों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, इन बयानों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
पुणे: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। दोनों आरोपियों को सोमवार (29 जून) को वडगांव मावल कोर्ट में पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद यह आदेश दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह हत्या किसी अचानक हुई घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि पहले से रची गई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। जांच में लगातार नए सबूत सामने आ रहे हैं, जिससे मामला और गंभीर होता जा रहा है। पहले से तय साजिश का आरोप पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोहागढ़ किले पर हुई घटना के दौरान सिया गोयल ने कथित तौर पर चेतन चौधरी को एक संकेत दिया था, जिसके बाद केतन अग्रवाल को चट्टान से धक्का दिया गया। पुलिस का कहना है कि सिया ने घटना के दौरान पानी पीने के बहाने खुद को पीड़ित से दूर कर लिया था, जिससे धक्का देने के समय केतन उसे पकड़ न सके। कैफे में रची गई थी हत्या की योजना जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले दोनों आरोपी पुणे के लुल्लानगर इलाके के एक कैफे में मिले थे। पुलिस के अनुसार, यहीं पर हत्या की पूरी योजना बनाई गई थी। सीसीटीवी फुटेज में दोनों की मुलाकात की पुष्टि होने का दावा किया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या अपराध से पहले किसी प्रकार का “रीहर्सल” भी किया गया था। क्राइम सीन रीक्रिएशन और सबूतों की जांच पुलिस ने रविवार (28 जून) को सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएशन भी कराया, ताकि घटना की पूरी कड़ी को दोबारा समझा जा सके। इसके अलावा पुलिस ने वह स्कूटर भी जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल चेतन चौधरी ने पुणे से लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए किया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रास्ते में पहचान और निगरानी से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। रिश्तों और साजिश का एंगल पुलिस जांच के अनुसार, केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई फरवरी में हुई थी और दोनों की शादी इस साल तय थी। सिया और चेतन के बीच कथित प्रेम संबंधों की बात भी सामने आई है। इसी कारण, पुलिस को शक है कि शादी से बचने और निजी संबंधों के चलते यह हत्या की साजिश रची गई। अदालत ने बढ़ाई हिरासत अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने गंभीरता को देखते हुए स्वीकार कर लिया। दोनों आरोपियों को अब 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में रखा जाएगा। जांच जारी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। डिजिटल सबूत, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
Pune Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक नया और अहम खुलासा सामने आया है। पुलिस की फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल ने कथित हत्या से महज 34 मिनट पहले अपने प्रेमी और सह-आरोपी चेतन चौधरी से एक लंबी फोन पर बातचीत की थी। जांच एजेंसियां इस कॉल को पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी मान रही हैं और इसे कथित साजिश का निर्णायक सबूत मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। हत्या से पहले हुई 34 मिनट की कॉल पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल फॉरेंसिक जांच से पता चला है कि 18 जून को लोहागढ़ किले में वारदात से कुछ समय पहले सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच बातचीत हुई थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस कॉल के दौरान दोनों ने कथित तौर पर अंतिम रणनीति पर चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत उस समय हुई जब सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ किले पर मौजूद थी। व्यू-पॉइंट की लोकेशन साझा करने का शक जांच में पुलिस को आशंका है कि कॉल के दौरान सिया ने चेतन को उस व्यू-पॉइंट की सटीक जानकारी दी, जहां वह केतन के साथ मौजूद थी। अधिकारियों का मानना है कि उसने आसपास मौजूद लोगों की स्थिति की जानकारी भी साझा की, ताकि कथित वारदात को अंजाम देने में कोई बाधा न आए। पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच जारी है। डिलीट किए गए चैट और वॉइस नोट्स रिकवर करने की कोशिश जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर पिछले तीन महीनों के व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम संदेश और वॉइस नोट्स डिलीट कर दिए थे। अब साइबर फॉरेंसिक टीम मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा रिकवर करने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्य से दोनों के बीच हुई बातचीत और कथित साजिश की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। हर डिजिटल सबूत की हो रही जांच पुणे ग्रामीण पुलिस की तकनीकी टीम अब रिकवर किए गए डेटा, मोबाइल लोकेशन, इंटरनेट आईपी एड्रेस और कॉल रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियां इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में मजबूत सबूत के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि यदि डिजिटल रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं तो इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि वारदात अचानक नहीं, बल्कि पहले से बनाई गई योजना के तहत अंजाम दी गई थी। शादी नहीं करना चाहती थी सिया: पुलिस पुलिस के अनुसार, सिया गोयल नवंबर में होने वाली अपनी शादी से खुश नहीं थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी वजह से उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश रची। आरोप है कि 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले में सिया ने केतन को खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। जांच अभी जारी पुलिस लगातार डिजिटल फॉरेंसिक, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे में प्रॉपर्टी डीलर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस वारदात के पीछे प्रेम संबंध, परिवार द्वारा तय की गई शादी और पूर्व नियोजित साजिश की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल सह-आरोपी चेतन चौधरी से प्रेम करती थी, लेकिन परिवार ने उसकी शादी आर्थिक रूप से संपन्न अग्रवाल परिवार में तय कर दी थी। परिवार को पहले से थी रिश्ते की जानकारी पुलिस जांच में सामने आया है कि जनवरी में आयोजित एक कम्युनिटी क्रिकेट मैच के दौरान सिया और चेतन की नजदीकियों की जानकारी परिवार के कुछ सदस्यों को मिल गई थी। हालांकि, दोनों परिवारों की आर्थिक स्थिति में अंतर होने के कारण सिया की भावनाओं को नजरअंदाज कर उसकी सगाई केतन अग्रवाल से करा दी गई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सिया के भाई साहिल गोयल ने यह जानकारी परिवार के अन्य लोगों से साझा की थी या नहीं। इस संबंध में उससे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई। चैट डिलीट, 2,004 कॉल और फोरेंसिक जांच जांच में यह भी पता चला है कि घटना से पहले और बाद में सिया और चेतन ने अपने मोबाइल फोन से चैट डिलीट कर दी थी। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, पिछले छह महीनों में दोनों के बीच 2,004 कॉल हुईं, जिनकी कुल अवधि लगभग 238 घंटे रही। वारदात वाले दिन दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया गया। हत्या की साजिश का दावा, जांच जारी पुलिस का दावा है कि लोहागढ़ किले पर पहले से तय इशारे के बाद चेतन चौधरी ने पीछे से केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया। हालांकि, सिया की मां ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी बेटी ट्रेकिंग पर जाना ही नहीं चाहती थी और उसे केतन व उसके परिवार के कहने पर वहां जाना पड़ा। पुलिस फिलहाल सभी डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।
पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में डिजिटल सबूत लगातार नए खुलासे कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने हत्या से पहले और घटना के बाद अपने मोबाइल फोन से कई चैट डिलीट कर दी थीं। अब इन डिलीट किए गए संदेशों को रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। डिलीट चैट रिकवर करने में जुटी फॉरेंसिक टीम जांच अधिकारियों के अनुसार, 18 जून को हुई घटना से पहले और उसके बाद दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण चैट डिलीट कर दी थीं। पुलिस का मानना है कि इन संदेशों से मामले की साजिश और घटनाक्रम से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं। इसी वजह से दोनों मोबाइल फोन को डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। 2,004 कॉल और 238 घंटे की बातचीत ने बढ़ाया शक पुलिस जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच कुल 2,004 फोन कॉल हुई थीं। दोनों ने करीब 238 घंटे तक एक-दूसरे से बातचीत की थी। जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। कैफे में बनी थी कथित हत्या की योजना पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन सिया और चेतन एक कैफे में मिले थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यहीं पर केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश बनाई गई। इसके बाद दोनों लोहागढ़ किले पहुंचे और पहले से ऐसी जगह की पहचान की, जहां से केतन को खाई में धक्का दिया जा सके। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस का दावा- चेतन ने पहले किया गुमराह जांच अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में चेतन चौधरी ने पुलिस को बताया था कि वह लोहागढ़ किले पर मौजूद था, लेकिन घटनास्थल तक नहीं गया। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के दौरान उसके इस दावे का समर्थन नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक, बाद की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित योजना के तहत सिया को तय स्थान पर बैठकर चेतन को संकेत देना था, जिसके बाद केतन को चट्टान से धक्का दिया गया। सिया के भाई और परिजनों से भी होगी पूछताछ पुणे (देहात) के पुलिस उपाधीक्षक गजानन टोंपे ने बताया कि सिया गोयल के भाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा उसके परिवार के अन्य सदस्यों और करीबी दोस्तों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि पूरे घटनाक्रम की सभी कड़ियां स्पष्ट हो सकें। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को केतन अग्रवाल के परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और यदि जांच में अन्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जाएगा। केतन के पिता बोले- आपत्ति थी तो शादी से इनकार कर सकती थी सिया के इस दावे पर कि वह केतन के विग पहनने के कारण शादी नहीं करना चाहती थी, केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सिया को रिश्ते पर कोई आपत्ति थी तो वह शादी से इनकार कर सकती थी, लेकिन किसी की जान लेने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि केतन विग का केवल एक छोटा पैच इस्तेमाल करता था और इसकी जानकारी सगाई से पहले ही सिया तथा उसके परिवार को दे दी गई थी। सिया की मां ने भी रखा अपना पक्ष सिया गोयल की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी 18 जून को लोहागढ़ किला जाने की इच्छुक नहीं थी। उनके अनुसार, 17 जून को हुई वीडियो कॉल के दौरान केतन अग्रवाल और उनकी मां ने सिया से साथ चलने का आग्रह किया था। शुरुआत में सिया ने पारिवारिक कार्यक्रम का हवाला देकर मना किया था, लेकिन बाद में वह उनके अनुरोध पर चली गई। शादी के खर्च को लेकर पिता ने किया दावा खारिज सिया के पिता ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी खंडन किया, जिनमें शादी पर भारी-भरकम खर्च और चार्टर्ड विमान की व्यवस्था का दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि शादी उदयपुर में तय हुई थी और करीब 70 कमरे बुक किए गए थे, लेकिन पूरे विवाह समारोह का अनुमानित खर्च तीन करोड़ रुपये से अधिक नहीं था। जांच जारी, अदालत में होगी अंतिम सच्चाई तय पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
पुणे: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल ने दावा किया है कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह विग पहनता था। पुलिस का कहना है कि सिया के बयान और उसके मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में सिया ने बताई शादी से इनकार की वजह मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को हुई पूछताछ में सिया गोयल ने पुलिस को बताया कि वह केतन अग्रवाल से विवाह नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसके सिर पर बाल नहीं थे और वह विग पहनता था। सिया ने यह भी कहा कि उसने परिवार की नाराजगी के डर से शादी से इनकार नहीं किया। पुलिस के अनुसार, दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी और नवंबर में शादी प्रस्तावित थी। विवाह समारोह के लिए राजस्थान के एक पैलेस की बुकिंग भी की जा चुकी थी, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च होने थे। मोबाइल चैट ने सिया के दावों पर खड़े किए सवाल लोनावला ग्रामीण पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सिया ने दावा किया कि उसने पहले ही केतन को शादी न करने की इच्छा बता दी थी। उसके अनुसार, केतन हर बार कहता था कि अब बहुत देर हो चुकी है और रिश्ता तोड़ना संभव नहीं है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए दोनों के मोबाइल फोन से मिली चैट इस दावे का समर्थन नहीं करती। शुरुआती जांच में दोनों के बीच सामान्य मंगेतर की तरह बातचीत और प्रेमपूर्ण संदेश मिले हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सिया के मौजूदा बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लग रहे हैं। सभी बयानों का इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से मिलान किया जा रहा है। हर एंगल से जांच कर रही है पुलिस पुलिस का कहना है कि जांच किसी एक पहलू तक सीमित नहीं है। डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, आरोपियों के बयान और तकनीकी सबूतों का विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके। 18 जून को हुई थी केतन अग्रवाल की मौत जानकारी के अनुसार, 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले से गिरने के बाद केतन अग्रवाल की मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा माना गया, लेकिन बाद में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सिया गोयल अपनी जिंदगी के इस दौर में शादी नहीं करना चाहती थी और परिवार के दबाव में उसने यह रिश्ता स्वीकार किया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। सिया गोयल और चेतन चौधरी पुलिस हिरासत में मामले में पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और उसके दोस्त चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल 29 जून तक पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच जारी है। जांच जारी, अभी आरोप साबित होना बाकी पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और यदि उनकी बेटी जांच में दोषी पाई जाती है, तो उसे भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। परिवार ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। 'दोषी हो तो बेटी को भी सजा मिले' सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने भावुक होते हुए कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हो, उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए, चाहे वह उनकी बेटी ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि यदि सिया का अपराध साबित होता है तो उसे भी वही सजा मिलनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है। उनके इस बयान की व्यापक चर्चा हो रही है। 'पहले जानकारी होती तो रोकने की कोशिश करते' सिया के पिता प्रवीण गोयल, जो घटना के बाद से अस्वस्थ हैं और अस्पताल में उपचाराधीन हैं, ने भी न्याय व्यवस्था पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पहले सिया और चेतन चौधरी के कथित संबंधों की जानकारी होती, तो वे समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने की कोशिश करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी चेतन चौधरी को देखा तक नहीं था और न ही उसके बारे में परिवार में कोई चर्चा हुई थी। दोनों परिवारों के बीच थे पुराने संबंध प्रवीण गोयल ने बताया कि केतन अग्रवाल का परिवार उनके लंबे समय से परिचित था और दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सिर्फ एक रिश्ते को नहीं, बल्कि एक होनहार युवक की जिंदगी भी छीन ली है। जांच जारी, जुटाए जा रहे सबूत पुलिस के अनुसार, 18 जून को केतन अग्रवाल की कथित रूप से हत्या कर उसका शव लोहागढ़ किले की गहरी खाई में फेंक दिया गया था। मामले में सिया गोयल और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी बेटी को लेकर भावुक लेकिन सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत में सिया के खिलाफ हत्या के आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे कानून के अनुसार सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक पिता होने के बावजूद वह न्यायिक प्रक्रिया में किसी तरह की रियायत नहीं चाहते। 'अब भी यकीन नहीं कि मेरी बेटी ऐसा कर सकती है' समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रवीण गोयल ने कहा कि उन्हें आज भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनकी बेटी ऐसा अपराध कर सकती है। उन्होंने बताया कि सिया की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा और उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने कहा, "मेरी बेटी ने कभी मुझसे झूठ नहीं बोला। वह हमेशा सही रास्ते पर चली। इसलिए उस पर लगे आरोपों पर यकीन करना मेरे लिए बेहद मुश्किल है।" 'दोषी साबित हुई तो सबसे कड़ी सजा मिले' प्रवीण गोयल ने कहा कि अगर अदालत में सिया के खिलाफ सभी आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसे बिना किसी रियायत के कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "एक पिता होने के बावजूद मैं न्याय के रास्ते में नहीं आऊंगा। अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे वही सजा मिलनी चाहिए जिसकी वह हकदार है।" भावुक होकर कही बड़ी बात बातचीत के दौरान प्रवीण गोयल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि सिया दोषी साबित होती है तो उसे उसी लोहागढ़ किले पर ले जाकर उसी जगह से धक्का दे देना चाहिए, जहां से पुलिस के अनुसार केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दिया गया था। यह उनके भावनात्मक बयान का हिस्सा था। अंतिम फैसला अदालत और भारतीय कानून के अनुसार ही होगा। क्या है पूरा मामला? पुलिस के अनुसार, 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि दोनों ने केतन को किले के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। फिलहाल सिया गोयल और चेतन चौधरी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि मामले की जांच जारी है।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच के दौरान एक नया मोड़ सामने निकलकर आया है। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। दोनों के बयानों में विरोधाभास आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पूछताछ में बदले दोनों आरोपियों के बयान पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सिया गोयल ने दावा किया कि पूरी योजना चेतन चौधरी ने बनाई थी, जबकि चेतन ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश सिया ने रची और उसने केवल उसके कहने पर उसका साथ दिया। दोनों के अलग-अलग दावों के कारण जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। SIT जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में इस केस की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि SIT पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और विस्तृत जांच करेगी। प्री-वेडिंग वीडियो आया सामने इस बीच सोशल मीडिया पर केतन अग्रवाल और सिया गोयल का एक प्री-वेडिंग वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दोनों शादी की तैयारियों के दौरान खुश नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। सिया की मां की भावुक प्रतिक्रिया सिया गोयल की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उनकी बेटी अदालत में दोषी साबित होती है तो उसे कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनका यह बयान पूरे मामले में नया भावनात्मक पहलू जोड़ रहा है। पुलिस जुटा रही सबूत पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि हत्या की साजिश किसने रची और वारदात में किसकी क्या भूमिका थी।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, कारोबारी केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल कथित तौर पर शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और उस पर पारिवारिक दबाव भी था। इसी एंगल से पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है। हादसा नहीं, साजिश की आशंका 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के दौरान केतन अग्रवाल की खाई में गिरने से मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे हादसा माना गया, लेकिन CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर मामला हत्या की साजिश में बदल गया। 2000 से ज्यादा कॉल्स ने बढ़ाया शक पुलिस जांच में पता चला है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के बीच छह महीनों में लगभग 2000 से अधिक फोन कॉल हुई थीं। दोनों ने करीब 238 घंटे बातचीत की थी, जिसने जांच एजेंसियों का शक और गहरा कर दिया। ऑनलाइन सर्च किए गए हत्या के तरीके पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने इंटरनेट पर हत्या के तरीकों से जुड़ी जानकारी भी खोजी थी। इससे जांच एजेंसियों को यह संदेह हुआ कि पूरी घटना पूर्व नियोजित हो सकती है। जांच जारी, कई पहलुओं की पड़ताल पुलिस फिलहाल डिजिटल सबूत, CCTV फुटेज और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अदालत ने दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है और जांच लगातार जारी है।
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले में कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल की मौत का मामला, जिसे शुरुआत में एक दुर्घटना माना जा रहा था, अब कथित हत्या की सनसनीखेज साजिश में बदल गया है। पुलिस का दावा है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब मृतक के परिवार ने हादसे की कहानी पर सवाल उठाए और गहन जांच की मांग की। जन्मदिन की आउटिंग बनी मौत का सफर पुलिस के अनुसार, 18 जून को केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोनावला स्थित ऐतिहासिक लोहागढ़ किले घूमने गए थे। यह यात्रा सिया के जन्मदिन से एक दिन पहले आयोजित की गई थी। घटना के बाद सिया ने पुलिस को बताया था कि फोटो खिंचवाने के दौरान केतन का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में गिर गया। प्रारंभिक जांच में इसे दुर्घटनावश मौत मानते हुए मामला दर्ज किया गया। परिवार को हादसे की कहानी पर हुआ संदेह केतन के परिजनों ने इस दावे पर भरोसा नहीं किया। उनका कहना था कि केतन एक अनुभवी ट्रेकर था और लोहागढ़ क्षेत्र से अच्छी तरह परिचित था। परिवार का मानना था कि इतनी जानकारी रखने वाला व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में इस तरह दुर्घटना का शिकार नहीं हो सकता। परिजनों के संदेह के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा विस्तृत जांच शुरू की। CCTV फुटेज बना जांच का टर्निंग पॉइंट जांच टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने सिर पर हुडी पहन रखी थी और कानों में हेडफोन लगाए हुए था। जांच अधिकारियों ने मौसम संबंधी रिकॉर्ड भी खंगाले। पता चला कि घटना वाले दिन तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस था। ऐसे मौसम में किसी व्यक्ति का हुडी पहनना पुलिस को असामान्य लगा, जिसके बाद उस व्यक्ति की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। हुडी पहनने वाले युवक की पहचान से खुला राज सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान चेतन चौधरी के रूप में की। जांच में सामने आया कि चेतन और सिया गोयल के बीच करीबी संबंध थे। यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकता है। लोकेशन छिपाने के लिए घर पर छोड़ दिया था मोबाइल पुलिस जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक, चेतन चौधरी लोहागढ़ जाने से पहले अपना मोबाइल फोन कोंढवा स्थित घर पर छोड़ गया था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसने जानबूझकर ऐसा किया ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की मदद से पुलिस ने उसकी गतिविधियों का पूरा क्रम जोड़ लिया। 2,000 से अधिक कॉल्स ने मजबूत किया शक जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सिया गोयल और चेतन चौधरी कई महीनों से लगातार संपर्क में थे। कॉल रिकॉर्ड की जांच में दोनों के बीच 2,000 से अधिक फोन कॉल्स का खुलासा हुआ। अधिकारियों के अनुसार, घटना से पहले दोनों एक कैफे में मिले थे, जहां कथित तौर पर वारदात की योजना बनाई गई थी। पुलिस का दावा है कि बातचीत में मौत को हादसे का रूप देने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। पुलिस का दावा: सुनसान जगह ले जाकर दिया धक्का जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना वाले दिन चेतन चौधरी पहले ही लोहागढ़ किले पहुंच चुका था। कुछ देर बाद सिया और केतन वहां पहुंचे। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन को किले के एक सुनसान हिस्से की ओर ले जाया और वहां उसे खाई में धक्का दे दिया। खाई में गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। हत्या की साजिश का मामला, जांच जारी पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है और मामले में जुटाए गए डिजिटल एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में यह मामला एक पूर्व-नियोजित हत्या की साजिश की ओर इशारा करता है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की जांच पर निर्भर करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।