WhatsApp Account Under Review: सोमवार रात करीब 8 बजे कई WhatsApp यूजर्स को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उनके अकाउंट अचानक काम करना बंद हो गए। ऐप खोलने पर स्क्रीन पर ‘Account Under Review’ यानी ‘अकाउंट रिव्यू में है’ का मैसेज दिखाई दिया। इसके बाद WhatsApp के कई फीचर्स अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गए और यूजर्स को बताया गया कि उनके अकाउंट की गतिविधियों और डिवाइस की जानकारी की जांच की जा रही है। अचानक आई इस समस्या के बाद कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट साझा करते हुए शिकायत की। भारत के भी कई यूजर्स इस परेशानी से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कुछ मामलों में अकाउंट कुछ ही समय बाद सामान्य रूप से काम करने लगा, जबकि कुछ यूजर्स को 24 घंटे तक रिव्यू प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ा। WhatsApp अकाउंट पर क्यों दिखा ‘Account Under Review’? WhatsApp की ओर से कुछ अकाउंट्स को जांच के दायरे में रखा गया। यूजर्स को ऐप पर दिए गए संदेश में बताया गया कि उनकी अकाउंट गतिविधि और डिवाइस की जानकारी की जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अकाउंट WhatsApp की सेवा शर्तों का पालन कर रहा है। कंपनी की ओर से यूजर्स को आमतौर पर 24 घंटे के भीतर समीक्षा के परिणाम के बारे में जानकारी देने की बात कही गई। इस दौरान अकाउंट से जुड़े कई फीचर्स का इस्तेमाल सीमित हो सकता है, जिससे मैसेजिंग और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। WhatsApp ने क्या कहा? समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, WhatsApp के एक प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी ऐसे लोगों से आगे रहने की कोशिश करती है जो प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करना चाहते हैं। यूजर्स की सुरक्षा बनाए रखने के लिए कंपनी ऐसे अकाउंट्स पर कार्रवाई करती है जो उसकी नीतियों का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी गलती से किसी अकाउंट पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में WhatsApp समस्या को जल्द ठीक करने की कोशिश करता है, ताकि यूजर्स दोबारा सामान्य रूप से चैटिंग कर सकें। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी अकाउंट रिव्यू की समस्या सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी परेशानी साझा की। कुछ लोगों ने बताया कि उनका अकाउंट बिना किसी स्पष्ट कारण के डिसेबल या रिव्यू में चला गया। कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि वे केवल WhatsApp के आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करते हैं और उनके कामकाज के लिए WhatsApp बेहद जरूरी है। ऐसे में अकाउंट अचानक बंद होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यूजर्स का अकाउंट कुछ सेकंड में हुआ ठीक इस समस्या का अनुभव कुछ WhatsApp यूजर्स ने किया, लेकिन हर मामले में स्थिति एक जैसी नहीं रही। कुछ लोगों के अनुसार ऐप दोबारा खोलने पर कुछ ही सेकंड बाद अकाउंट सामान्य रूप से चलने लगा। इससे संकेत मिलता है कि सभी यूजर्स के अकाउंट पर समस्या की अवधि एक जैसी नहीं थी। हालांकि, कितने अकाउंट प्रभावित हुए और यह समस्या किस तकनीकी वजह से सामने आई, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। WhatsApp यूजर्स को क्या करना चाहिए? अगर आपके WhatsApp अकाउंट पर भी ‘Account Under Review’ का संदेश दिखाई देता है, तो घबराने के बजाय ऐप में दिए गए निर्देशों और समीक्षा प्रक्रिया का पालन करना बेहतर है। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान व्यक्ति को निजी जानकारी देने या अनधिकृत WhatsApp ऐप का इस्तेमाल करने से बचें। अकाउंट से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में WhatsApp के आधिकारिक सहायता विकल्पों का इस्तेमाल करें। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह समस्या सीमित संख्या में यूजर्स तक थी या आने वाले समय में और लोगों को भी इसका सामना करना पड़ेगा। कंपनी की ओर से इस संबंध में और जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा सुधार कानून पर जारी नए वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए लिखा, "देश के भविष्य से ज्यादा आपकी स्किन चमक रही है।" दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है। परीक्षा सुधार कानून को लेकर जारी किया था वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (30 जुलाई) को सेल्फी स्टाइल में एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने हाल ही में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके। वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कराने वाले "पेपर माफिया" को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। CJP लगातार उठा रही है पेपर लीक का मुद्दा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले कई महीनों से परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। CJP की मांग है कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भर्ती परीक्षाओं में जवाबदेही तय की जाए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। संसद से मिला नए कानून को मंजूरी पेपर लीक की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 अब संसद से पारित हो चुका है। राज्यसभा ने गुरुवार को ध्वनिमत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले लोकसभा भी इसे पारित कर चुकी थी। नए कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई कर युवाओं का विश्वास बहाल करना है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो और उस पर अभिजीत दीपके की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर समर्थक परीक्षा सुधार कानून का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।
PM Modi AI Video Case: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के AI-जनरेटेड (मॉर्फ्ड) वीडियो मामले में Meta India की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में Meta India के प्रमुख अरुण श्रीनिवास समेत कई सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि Facebook और Instagram पर वायरल हुए AI से तैयार फर्जी वीडियो की गहन जांच की जा रही है। यह मामला किसी बड़ी टेक कंपनी के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ दर्ज किए गए महत्वपूर्ण मामलों में से एक माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि AI तकनीक का इस्तेमाल कर तैयार किए गए इन वीडियो के जरिए लोगों को गुमराह करने, गलत सूचना फैलाने या जनभावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई। मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के विभिन्न प्रावधानों के तहत की जा रही है। Facebook और Instagram पर वायरल हुए थे AI वीडियो प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित AI-जनरेटेड और मॉर्फ्ड वीडियो Facebook और Instagram सहित Meta के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हुए थे। इन वीडियो की सत्यता को लेकर सवाल उठने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और तकनीकी जांच शुरू की। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन वीडियो को सबसे पहले किसने तैयार किया, किन अकाउंट्स से इन्हें अपलोड किया गया और सोशल मीडिया पर इन्हें बड़े स्तर पर कैसे फैलाया गया। Meta से पहले भी मांगा गया था जवाब एफआईआर दर्ज होने से पहले हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने Meta के प्रतिनिधियों को पूछताछ के लिए तलब किया था। अधिकारियों ने कंपनी से पूछा था कि AI से बनाए गए फर्जी वीडियो, डीपफेक कंटेंट, ऑनलाइन स्कैम और फेक विज्ञापनों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए कंपनी के पास कौन-कौन से सुरक्षा तंत्र और मॉडरेशन सिस्टम मौजूद हैं। पुलिस ने यह भी जानकारी मांगी थी कि संदिग्ध कंटेंट की पहचान होने के बाद उसे हटाने की प्रक्रिया क्या है और ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ कंपनी किस तरह सहयोग करती है। किन पहलुओं की जांच कर रही है साइबर क्राइम पुलिस? हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस अब इस पूरे मामले की तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि AI से तैयार किए गए वीडियो का मूल स्रोत क्या है, उन्हें बनाने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया और उनके प्रसार के पीछे किन लोगों या समूहों की भूमिका रही। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि Meta के सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम ऐसे वीडियो को समय रहते पहचानने और रोकने में कितने प्रभावी रहे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यूजर्स की भूमिका भी जांच के दायरे में पुलिस केवल प्लेटफॉर्म की भूमिका ही नहीं, बल्कि वीडियो बनाने, अपलोड करने, शेयर करने और वायरल करने वाले सोशल मीडिया यूजर्स की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, सर्वर लॉग और सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जी वीडियो के प्रसार में किसकी क्या भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तकनीकी रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और डिजिटल कंटेंट मॉडरेशन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Russia Telegram News: मैसेजिंग ऐप Telegram के संस्थापक Pavel Durov की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) ने उन पर आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने का आरोप लगाते हुए इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कर दिया है। रूसी एजेंसी का दावा है कि टेलीग्राम ने ऐसे कई चैनल, चैट और बॉट नहीं हटाए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेनी खुफिया एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस के खिलाफ कर रहे थे। FSB ने क्या लगाए आरोप? रूस की सुरक्षा एजेंसी FSB के मुताबिक, टेलीग्राम पर मौजूद कुछ चैनल और बॉट का इस्तेमाल कथित तौर पर रूस में तोड़फोड़, आतंकवादी हमलों की साजिश, साइबर धोखाधड़ी और हिंसक गतिविधियों के समन्वय के लिए किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इन गतिविधियों में यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों और आतंकवादी संगठनों की भूमिका रही, लेकिन टेलीग्राम ने ऐसे अकाउंट्स और चैनलों को हटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, यदि रूस में इन आरोपों में ड्यूरोव दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें उम्रकैद तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। डेटिंग चैटबॉट को लेकर भी गंभीर दावा FSB ने यह भी दावा किया है कि टेलीग्राम पर मौजूद एक लोकप्रिय डेटिंग चैटबॉट का इस्तेमाल कथित तौर पर यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसियों ने रूस के युवाओं को तोड़फोड़ और आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती करने में किया। एजेंसी के अनुसार, जुलाई 2025 से अब तक इस मामले में 12 से 22 वर्ष की आयु के 46 लोगों को हिरासत में लिया गया है। Telegram पर रूस की बढ़ती सख्ती रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से मॉस्को ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना नियंत्रण लगातार बढ़ाया है। रूस में Facebook, Instagram और X पर पहले ही प्रतिबंध या कड़े प्रतिबंधात्मक कदम लागू किए जा चुके हैं। YouTube की स्पीड सीमित की गई है, जबकि Signal और Viber जैसे मैसेजिंग ऐप भी ब्लॉक किए जा चुके हैं। अब Telegram और WhatsApp पर भी निगरानी और सख्ती बढ़ाई जा रही है। कौन हैं Pavel Durov? Pavel Durov ने वर्ष 2013 में Telegram की स्थापना की थी। कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म के दुनिया भर में 1 अरब से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इससे पहले उन्होंने रूस के लोकप्रिय सोशल नेटवर्क VKontakte (VK) की भी स्थापना की थी। हालांकि 2014 में रूसी अधिकारियों के साथ विवाद के बाद उन्होंने कंपनी छोड़ दी और विदेश चले गए। वर्तमान में उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नागरिकता है। पहले भी कानूनी जांच का सामना कर चुके हैं यह पहला मौका नहीं है जब पावेल ड्यूरोव कानूनी विवादों में घिरे हैं। 2024 में फ्रांस में उन्हें उन आरोपों की जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, जिनमें टेलीग्राम के जरिए कथित आपराधिक गतिविधियों, ड्रग तस्करी, बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने में विफल रहने और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पर्याप्त सहयोग न करने के आरोप शामिल थे। रूस की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर वैश्विक बहस तेज कर दी है।
PM Modi Social Media Row: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अभद्र पोस्ट किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। CJP विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आए पोस्टों को लेकर शिकायत मिलने पर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को नोटिस भेजकर संबंधित यूजर्स की जानकारी मांगी है। दिल्ली पुलिस ने बुधवार (29 जुलाई) को X को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्ट और वीडियो हटाने का अनुरोध किया है। साथ ही इन पोस्ट से जुड़े अकाउंट्स की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है। X से मांगी गई कौन-कौन सी जानकारी? पुलिस ने X से उन अकाउंट्स की पूरी डिटेल साझा करने को कहा है, जिन पर विवादित पोस्ट किए गए हैं। इसमें यूजर्स के नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, लॉगिन-लॉगआउट रिकॉर्ड, पोस्ट किए जाने की तारीख और समय समेत अन्य तकनीकी जानकारियां शामिल हैं। शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कदम उन शिकायतों के आधार पर उठाया गया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि ये पोस्ट 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन और 'चलो संसद' मार्च के बाद सोशल मीडिया पर साझा किए गए थे। सोशल मीडिया पर बढ़ाई गई निगरानी दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसकी सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही है। यदि किसी पोस्ट में आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित सोशल मीडिया कंपनी को नोटिस भेजकर उसे हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, छात्र आंदोलनों से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों की भी लगातार निगरानी की जा रही है और सोशल मीडिया पर होने वाली हर प्रमुख गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले CJP (CJP) छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियों को लेकर दिल्ली पुलिस कार्रवाई की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट, वीडियो और टिप्पणियों की समीक्षा की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को विवादित कंटेंट हटाने के लिए नोटिस भेजे जा सकते हैं। पोस्ट, वीडियो और कमेंट्स की हो रही जांच सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर आंदोलन से जुड़े कंटेंट की लगातार निगरानी कर रही है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या किसी पोस्ट, वीडियो या टिप्पणी में कानून का उल्लंघन हुआ है या उससे सार्वजनिक व्यवस्था और शांति प्रभावित होने की आशंका है। पुलिस का कहना है कि जिन पोस्टों की प्रकृति अभद्र या आपत्तिजनक पाई जाएगी, उन्हें हटाने के लिए संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों को औपचारिक नोटिस जारी किए जाएंगे। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। डिजिटल आंदोलन की बनी नई पहचान 36 दिनों तक चला जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन केवल अपनी मांगों की वजह से ही चर्चा में नहीं रहा, बल्कि विरोध प्रदर्शन के नए तरीकों को लेकर भी सुर्खियों में रहा। आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। नेटवर्क संबंधी दिक्कतों के बावजूद छात्रों ने रील्स, लाइव स्ट्रीम, एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट, इंस्टाग्राम अपडेट और मीम्स के जरिए आंदोलन को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बनाए रखा। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आंदोलन से जुड़ी हर जानकारी तेजी से देशभर तक पहुंचती रही। सहयोग और अनुशासन की भी मिसाल आंदोलन के दौरान पारंपरिक चंदे की जगह ऑनलाइन सहयोग का नया मॉडल देखने को मिला। देश-विदेश से लोगों ने फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए प्रदर्शन स्थल पर भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान भेजा। इन सामग्रियों के वितरण के लिए स्वयंसेवकों ने हेल्प डेस्क भी संचालित किए। भीषण गर्मी के बीच छात्र एक-दूसरे को पानी पिलाते, हाथ से पंखा झलते और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराते नजर आए। बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी के बावजूद किसी छेड़छाड़ या महिला उत्पीड़न की शिकायत सामने नहीं आई, जिसे आंदोलन के सकारात्मक पहलुओं में गिना जा रहा है। आखिरी दिनों में उठे कुछ सवाल हालांकि आंदोलन के अंतिम चरण में कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आईं, जिन पर सवाल उठे। पुलिस और आयोजकों के अनुसार कुछ ऐसे लोग भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए, जिनका आंदोलन से सीधा संबंध नहीं था। फूड डिलीवरी पहुंचने पर खाने के पैकेटों को लेकर अव्यवस्था की घटनाएं भी सामने आईं। इसके अलावा, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा हुई। आंदोलन के समापन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कुछ स्थानों पर हुई हिंसक घटनाओं ने भी आंदोलन की अनुशासित छवि पर सवाल खड़े किए। भाजपा नेताओं के परिवारों से भी मिले अलग-अलग संदेश इस आंदोलन के दौरान कुछ भाजपा नेताओं के परिवारों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में रहीं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए परीक्षा सुधारों का समर्थन किया और हिंसा का विरोध किया। वहीं, असम के मंत्री केशव महंत की बेटी दिबिसा भी आंदोलन में शामिल हुईं। इस पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी नेता के परिवार के सदस्य का अलग राजनीतिक दृष्टिकोण होना लोकतंत्र का हिस्सा है। भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता ने भी छात्रों के समर्थन में सोशल मीडिया पर अपनी राय व्यक्त की थी। 36 दिन बाद समाप्त हुआ आंदोलन नीट पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर चला। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से परीक्षा सुधारों को लेकर कई घोषणाओं के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। इसी दौरान अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया। अब आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर साझा किए गए कंटेंट को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और संभावित नोटिसों पर सभी की नजर बनी हुई है।
टीवी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब, केरल और कर्नाटक के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की भी मांग की है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। देवोलीना की प्रतिक्रिया एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आई, जिसमें दावा किया गया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अन्य राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भी जवाबदेही तय करते हुए पद छोड़ना चाहिए। इस विषय पर संबंधित राज्य सरकारों या शिक्षा मंत्रियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पोस्ट पर दिया जवाब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने जवाबदेही की एक मिसाल पेश की है और अब पंजाब, केरल तथा कर्नाटक के शिक्षा मंत्रियों को भी इस्तीफा देना चाहिए। पोस्ट में कुछ प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भी टैग किया गया था। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए देवोलीना भट्टाचार्जी ने लिखा, "उल्टी गिनती शुरू हो गई है... शुभ काम में और देरी नहीं होनी चाहिए... इसे अपनाइए और इस्तीफा दीजिए।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर पक्ष-विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। श्वेता तिवारी ने भी दी थी प्रतिक्रिया देवोलीना से पहले अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर टिप्पणी की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर भी सवाल उठाए थे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और NEET-UG विवाद को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन हुए थे। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सार्वजनिक हस्तियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग राज्यों की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और संबंधित सरकारों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा देवोलीना भट्टाचार्जी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनकी राय का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण बताया। फिलहाल संबंधित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की ओर से देवोलीना की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है। सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग और हिरासत जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। पेपर लीक और परीक्षा सुधार का उठाया मुद्दा कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र लंबे समय से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। सरकार का पक्ष भी आया सामने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है। राजनीतिक बहस हुई तेज राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी और फिल्म अभिनेत्री आकांक्षा पुरी ने छात्र आंदोलन और राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर बड़ा दावा किया है। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें भी कुछ राजनीतिक दलों की ओर से संपर्क किया गया और कलाकारों को आंदोलनों में शामिल होने के लिए पैसे ऑफर किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने ऐसे किसी भी अभियान का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। "मैं इस तरह के प्रचार का हिस्सा नहीं बनना चाहती" आकांक्षा पुरी ने कहा कि कई बार कलाकारों की लोकप्रियता का इस्तेमाल राजनीतिक अभियानों के लिए किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने की बात कही, लेकिन उन्होंने इससे दूरी बनाए रखी। सोशल मीडिया पर बयान के बाद चर्चा तेज आकांक्षा पुरी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। उनके दावे ऐसे समय आए हैं जब दिल्ली समेत कई जगहों पर छात्र आंदोलन और राजनीतिक प्रदर्शन चर्चा में हैं। कुछ लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने उनके दावों पर सवाल भी उठाए हैं। आकांक्षा पुरी टीवी और फिल्मों में सक्रिय आकांक्षा पुरी टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। वह कई टीवी शोज और रियलिटी कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। हाल के दिनों में वह मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रमों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी चर्चा में रही हैं।
John Cusack on CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक (John Cusack) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन बताया, वहीं कई यूजर्स ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। जॉन कुसैक ने शेयर की छात्र आंदोलन से जुड़ी पोस्ट 'सेरेंडिपिटी', 'हाई फिडेलिटी', 'कॉन एयर' और '2012' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का एक लेख साझा किया। इस लेख में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की आलोचना की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए कुसैक ने लिखा कि उन्हें अपने "पसंदीदा साथी कॉकरोच" की ओर से अच्छी खबर मिली है और उन्होंने आंदोलन से जुड़ी रिपोर्ट को साझा किया। इसके बाद उनका पोस्ट तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया जॉन कुसैक की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। कुछ यूजर्स ने उनके समर्थन का स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा कि किसी विदेशी अभिनेता को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में लिखा गया कि भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों पर बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। पहले भी भारत के मुद्दों पर रख चुके हैं राय यह पहली बार नहीं है जब जॉन कुसैक ने भारत से जुड़े किसी मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों का समर्थन किया था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। क्या है CJP का आंदोलन? दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की है। हाल के दिनों में 'चलो संसद' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भी कार्रवाई की। प्रधानमंत्री मोदी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और विद्यार्थियों का एक वर्ष खराब न हो, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं कराई गईं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अग्निवीर की वर्दी पहने कुछ लोग छात्रों के समर्थन में बयान देते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्निवीर आंदोलन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। क्या है वायरल दावा? इंस्टाग्राम पर 'Breakingsatya' नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग अग्निवीर जैसी वर्दी पहने दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। वहीं दूसरा व्यक्ति कहता है कि अग्निवीरों की नई बैच आने के बाद स्थिति बदल जाएगी और दिल्ली पुलिस को जवाब मिलेगा। वीडियो में मौजूद लोगों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए हैं, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? वायरल वीडियो की जांच में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली। भारतीय सेना की ओर से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। किसी प्रमुख समाचार एजेंसी या विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा अप्रमाणित है और वीडियो भ्रामक या फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ वीडियो यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। हाल के दिनों में संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
Danish Kaneria on NEET Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया की टिप्पणी विवादों में आ गई है। कनेरिया ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर अपनी राय व्यक्त की, जिसके बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। क्या कहा दानिश कनेरिया ने? पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर दानिश कनेरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें भारत में होने वाले कई विरोध प्रदर्शन एक जैसे लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शनों में नारेबाजी और अपशब्द अधिक होते हैं, जबकि समाधान और सार्थक चर्चा कम दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मुद्दे पर तथ्य सामने आने से पहले विरोध शुरू हो जाता है और इस तरह का माहौल देश की प्रगति के लिए उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया कनेरिया के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर किसी विदेशी नागरिक को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जबकि कुछ ने उनके क्रिकेट करियर और विवादों का भी जिक्र किया। कौन हैं दानिश कनेरिया? दानिश कनेरिया पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर हैं। उन्होंने वर्ष 2000 से 2010 के बीच पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। करियर की प्रमुख बातें: 61 टेस्ट मैच 261 टेस्ट विकेट पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट स्पिनरों में शामिल हालांकि, वर्ष 2012 में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्हें आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। बाद में उन्होंने फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार भी की थी। शाहिद अफरीदी पर लगाए थे गंभीर आरोप दानिश कनेरिया पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान टीम के दौरान उनके साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव किया गया। कनेरिया ने पूर्व कप्तान Shahid Afridi पर यह आरोप भी लगाया था कि वे उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालते थे और उनके साथ भोजन नहीं करते थे। NEET प्रदर्शन क्यों हो रहा है? दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों और सरकार के बीच भी बयानबाजी जारी है।
TV Stars on Student Protest: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित लाठीचार्ज और झड़प की घटना पर अब टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। Karan Kundrra, Asha Negi, Arjun Bijlani और Kishwer Merchant समेत कई सितारों ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों की बात सुने जाने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कई कलाकारों ने हिंसा और टकराव पर चिंता भी जताई। आशा नेगी ने जताई चिंता अभिनेत्री आशा नेगी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि परीक्षा से जुड़े विवाद कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि छात्रों को अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करने के बाद उन्हें धमकियों और आपत्तिजनक संदेशों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपील की कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। करण कुंद्रा ने क्या कहा? अभिनेता करण कुंद्रा ने कहा कि किसी भी मुद्दे के कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्रों की मांग जवाबदेही और बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है, तो उस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने युवाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए गुमराह किया है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा हर युवा का अधिकार है और इसे राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। अर्जुन बिजलानी ने पारदर्शिता की मांग की अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें दुखद हैं। उनके मुताबिक ऐसे मामलों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से निकलना चाहिए। किश्वर मर्चेंट ने भी रखा पक्ष अभिनेत्री किश्वर मर्चेंट ने कहा कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के मुद्दे के लिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर छात्र और परिवार के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसमें जवाबदेही तथा पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने के बाद उन्हें भी आलोचना और धमकियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर जारी है बहस छात्र आंदोलन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस जारी है। जहां कई कलाकार छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं, वहीं अलग-अलग पक्षों की ओर से भी विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता और विरोध प्रदर्शन के तरीकों को लेकर चर्चा तेज बनी हुई है।
डिजिटल युग में राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब चुनावी मैदान सिर्फ जनसभाओं और संसद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया भी राजनीतिक लड़ाई का बड़ा मंच बन चुका है। तेलंगाना में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और भाजपा सांसद बंदी संजय कुमार से जुड़ा हालिया विवाद इसी बदलती राजनीति की एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया पर बनने वाली धारणा अब कानूनी प्रक्रिया से ज्यादा प्रभावशाली होती जा रही है? राजनीतिक सफर के साथ बढ़े डिजिटल हमले बंदी संजय कुमार ने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राजनीति शुरू की और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाई। उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के साथ सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आरोपों और अभियानों की संख्या भी बढ़ती गई। बेटे के मामले ने पकड़ा तूल कुछ समय पहले उनके बेटे के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, जो फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। उन्हें नियमित जमानत मिल चुकी है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही सोशल मीडिया और टीवी बहसों में इस मामले को लेकर तीखी चर्चाएं शुरू हो गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अंतिम फैसला अदालत को करना होता है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले ही लोगों की राय बन जाती है। भतीजे को लेकर वायरल हुआ दावा इसके बाद बंदी संजय के भतीजे को लेकर सोशल मीडिया पर एक दलित महिला से जुड़े गंभीर आरोप वायरल हुए। यह मामला तेजी से फैला, लेकिन बाद में संबंधित वीडियो पोस्ट करने वाले व्यक्ति ने खुद पोस्ट हटाते हुए कहा कि उसने गलत जानकारी के आधार पर इसे साझा किया था। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी तेजी से आरोप फैले, उतनी व्यापकता से उनका खंडन लोगों तक नहीं पहुंच पाया। सोशल मीडिया की रफ्तार बनाम कानूनी प्रक्रिया राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर किसी भी आरोप को लाखों लोगों तक पहुंचने में कुछ घंटे लगते हैं, जबकि पुलिस जांच, फॉरेंसिक जांच और अदालत की प्रक्रिया में कई महीने या साल लग सकते हैं। ऐसे में कानूनी फैसला आने से पहले ही सार्वजनिक धारणा बन जाती है, जिसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलता है। भाजपा ने लगाया साजिश का आरोप भाजपा का आरोप है कि बंदी संजय और उनके परिवार को निशाना बनाने के पीछे एक संगठित राजनीतिक अभियान चलाया गया। पार्टी के कई नेताओं ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आरएस प्रवीण कुमार पर इस अभियान को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक जांच निष्कर्ष या न्यायिक फैसला अभी तक सामने नहीं आया है। विपक्ष पर 'सेलेक्टिव आउटरेज' का आरोप भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि आरएस प्रवीण कुमार के बेटे का नाम भी हत्या के प्रयास से जुड़े एक एफआईआर में आया था, लेकिन उस मामले को सोशल मीडिया पर उतनी प्रमुखता नहीं मिली। पार्टी का दावा है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के मामलों में सोशल मीडिया का रवैया समान नहीं रहता। लोकतंत्र के सामने नई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि पहले मीडिया संस्थानों में किसी खबर के प्रकाशन से पहले तथ्य, स्रोत और कानूनी पहलुओं की जांच की जाती थी। लेकिन अब सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को सूचना प्रसारित करने का माध्यम बना दिया है। ऐसे में अपुष्ट जानकारी भी तेजी से फैलती है और लोगों की राय को प्रभावित करती है। बदलती राजनीति का संकेत तेलंगाना का यह मामला दिखाता है कि आज राजनीति केवल चुनावी भाषणों और जनसभाओं तक सीमित नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बनने वाला नैरेटिव भी राजनीतिक सफलता और छवि को प्रभावित करने लगा है। ऐसे समय में विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर चलने वाले दावों और अदालतों द्वारा तय किए जाने वाले कानूनी तथ्यों के बीच अंतर समझना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।
मुंबई: अभिनेता आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी के बाद लग रहे 'लव जिहाद' के आरोपों पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी वर्तमान पत्नी गौरी स्प्रैट हिंदू नहीं बल्कि ईसाई हैं और उनकी किसी भी पत्नी ने शादी के बाद अपना धर्म नहीं बदला। हाल के दिनों में आमिर खान की शादी को लेकर सोशल मीडिया और कुछ संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए थे। इसी बीच उनके खिलाफ धार्मिक आधार पर आपत्तियां भी दर्ज कराई गईं। अब अभिनेता ने पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा है। "हमारा परिवार सभी धर्मों का सम्मान करता है" आमिर खान ने कहा कि उनका परिवार हमेशा विभिन्न धर्मों का सम्मान करने और साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच विवाह हुए हैं। आमिर के अनुसार, उनकी दोनों बहनों की शादी हिंदू परिवारों में हुई है, उनकी बेटी ने भी एक हिंदू परिवार में विवाह किया है, जबकि उनके एक रिश्तेदार ने ईसाई महिला से शादी की है। उनका कहना है कि उनके परिवार में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। "मेरी किसी भी पत्नी ने धर्म परिवर्तन नहीं किया" आमिर खान ने कहा कि उनकी तीनों शादियां सिविल मैरिज के माध्यम से हुईं और उनकी किसी भी पत्नी ने विवाह के बाद धर्म परिवर्तन नहीं किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गौरी स्प्रैट हिंदू नहीं बल्कि ईसाई हैं। आमिर के मुताबिक, उनकी निजी जिंदगी में धर्म परिवर्तन का कभी कोई मुद्दा नहीं रहा। शादी के बाद बढ़ा था विवाद आमिर खान ने हाल ही में गौरी स्प्रैट के साथ विवाह किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी शादी को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ संगठनों ने इस विवाह पर आपत्ति जताते हुए अभिनेता पर 'लव जिहाद' से जुड़े आरोप लगाए, जबकि कई लोगों ने इसे दो वयस्कों का निजी निर्णय बताया। धार्मिक टिप्पणी और विवाद आमिर खान की शादी के बाद उत्तर प्रदेश में एक धार्मिक नेता द्वारा उनके विवाह को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी भी की गई, जिसमें धार्मिक नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई गई। हालांकि, आमिर खान ने अपने बयान में केवल अपने परिवार की धार्मिक विविधता, सिविल मैरिज और धर्म परिवर्तन से जुड़े दावों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी समय के साथ और अधिक दिलचस्प होती जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी है बहस आमिर खान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर उनके समर्थक उनके स्पष्टीकरण का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। फिलहाल अभिनेता की ओर से यही स्पष्ट किया गया है कि उनकी किसी भी शादी में धर्म परिवर्तन नहीं हुआ और उनका परिवार विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों में विश्वास रखता है।
सोशल मीडिया कंपनी Meta ने यूजर्स की कड़ी आलोचना के बाद Instagram से जुड़ा अपना विवादित AI इमेज जनरेशन फीचर हटा दिया है। यह फीचर किसी भी सार्वजनिक (Public) Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की अनुमति देता था, जिसे लेकर गोपनीयता (Privacy) और सहमति (Consent) को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। कंपनी ने स्वीकार किया कि इस फीचर को लॉन्च करने का फैसला सही नहीं था और यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद इसे बंद कर दिया गया है। क्या था विवादित AI फीचर? Meta ने हाल ही में Muse Image नाम का AI इमेज जनरेशन टूल लॉन्च किया था। इस फीचर की मदद से कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक Instagram अकाउंट को प्रॉम्प्ट में टैग करके उसकी AI-जनरेटेड तस्वीर बना सकता था। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, यह सुविधा केवल Public Accounts तक सीमित थी। निजी (Private) अकाउंट और 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स इस फीचर से बाहर रखे गए थे। क्यों हुआ विरोध? इस फीचर को लेकर सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि सभी सार्वजनिक Instagram अकाउंट डिफॉल्ट रूप से (Opt-in) इसमें शामिल थे। यदि कोई यूजर अपनी तस्वीरों का AI उपयोग नहीं चाहता था, तो उसे स्वयं जाकर सेटिंग्स बदलनी पड़ती थीं। इसके अलावा Meta यूजर्स को यह भी नहीं बताता था कि किसी ने उनकी प्रोफाइल का उपयोग कर AI इमेज बनाई है या नहीं। इस वजह से लोगों ने आशंका जताई कि उनकी तस्वीरों का बिना अनुमति दुरुपयोग हो सकता है। Meta ने क्या कहा? Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा कि कंपनी का उद्देश्य लोगों को एक उपयोगी रचनात्मक (Creative) टूल उपलब्ध कराना था और उन्हें अपने कंटेंट पर नियंत्रण देना था। हालांकि, कंपनी ने माना कि यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद उसे एहसास हुआ कि यह फीचर अपेक्षित मानकों पर खरा नहीं उतरा। Meta ने कहा कि इस सुविधा को अब पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि Muse Image का बाकी AI इमेज जनरेशन प्लेटफॉर्म पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। अब क्या बदला? फीचर हटाए जाने के बाद अब यदि कोई यूजर Meta AI में किसी Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की कोशिश करता है, तो AI ऐसा करने से इनकार कर देता है। इसके अलावा Meta ने Instagram सेटिंग्स से वह विकल्प भी हटा दिया है, जिसके जरिए Public Account यूजर अपने कंटेंट को AI फीचर्स में इस्तेमाल करने की अनुमति देते थे। हॉलीवुड से भी उठी थी आपत्ति इस फीचर का विरोध केवल आम यूजर्स तक सीमित नहीं रहा। हॉलीवुड की प्रमुख टैलेंट एजेंसी Creative Artists Agency (CAA), जो टॉम क्रूज़, ज़ेंडाया और मेरिल स्ट्रीप जैसे कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती है, ने भी Meta से डिफॉल्ट सुरक्षा लागू करने की मांग की थी। एजेंसी का कहना था कि AI उपयोग के लिए लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल Opt-in यानी स्पष्ट अनुमति के बाद ही होना चाहिए, न कि डिफॉल्ट रूप से। AI फीचर्स को लेकर बढ़ रही हैं चुनौतियां Meta पहली कंपनी नहीं है जिसे AI फीचर को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले OpenAI और xAI जैसी कंपनियां भी अपने AI इमेज और वीडियो जनरेशन टूल्स को लेकर गोपनीयता और दुरुपयोग से जुड़े विवादों में घिर चुकी हैं। AI तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ कंपनियों पर यूजर्स की निजता और सहमति की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया उनका एक वीडियो ब्लॉक कर दिया गया है। उनका कहना है कि वीडियो में उन्होंने केवल दिल्ली पुलिस से प्रदर्शनकारियों को बारिश से बचाने के लिए टेंट लगाने की अनुमति देने की अपील की थी। 20वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन लगातार 20वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान दिल्ली में हुई बारिश के बीच प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे डटे रहे। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि बारिश के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल या टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई। वीडियो ब्लॉक होने का किया दावा दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि उनका वीडियो भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने मूल पोस्ट और ब्लॉक होने का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा कि वीडियो में केवल बारिश से बचाव के लिए टेंट लगाने की अपील की गई थी। हालांकि, वीडियो ब्लॉक किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप अभिजीत दीपके का आरोप है कि भारी बारिश के दौरान प्रदर्शनकारी पूरी तरह भीग गए, जबकि पुलिसकर्मी सुरक्षित स्थान पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण कई छात्र बीमार पड़ गए और उनका सामान, गद्दे तथा चादरें भी भीग गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरी रात छात्रों को जागकर बितानी पड़ी क्योंकि बारिश से उनका सामान खराब हो गया था। छात्रों की स्थिति पर जताई चिंता दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल अधिकांश छात्र 19-20 वर्ष की आयु के हैं और लगातार बारिश के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से प्रदर्शनकारियों के लिए न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने का दावा इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर भी चिंता जताई गई है। पीटीआई के हवाले से जारी एक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद उनका वजन 7 किलोग्राम से अधिक कम हो गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनका वजन 59.40 किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि हृदय गति 74 बीट प्रति मिनट, ब्लड ग्लूकोज 75 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 98 प्रतिशत रहा। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उनके शरीर में पानी का स्तर सामान्य है। मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार वीडियो ब्लॉक होने और प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने संबंधी आरोपों पर फिलहाल सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी चिंता जताई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में Meta को विस्तृत जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दिया है। पहले कंपनी से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। सरकार का कहना है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम से पहचान होने की सुविधा का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधी कर सकते हैं। ऐसे में इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं और संभावित जोखिमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। क्या है WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फीचर ला रहा है, जिसके तहत यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार— हर यूजर के लिए एक यूनिक यूजरनेम होगा। डिस्प्ले नेम और यूजरनेम अलग-अलग होंगे। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम प्रत्येक अकाउंट के लिए अलग होगा। इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है। सरकार को क्यों है चिंता? MeitY का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा तो इससे कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए खतरे पैदा हो सकते हैं। सरकार की प्रमुख चिंताएं हैं— अपराधी फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। किसी की पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर अपराध को अंजाम देना आसान हो सकता है। फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों का दुरुपयोग बढ़ सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Meta से क्या जानकारी मांगी गई है? सरकार ने Meta से यूजरनेम फीचर के कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें शामिल हैं— फीचर का तकनीकी ढांचा। यूजर की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया। फर्जी अकाउंट और दुरुपयोग रोकने के उपाय। साइबर अपराध की स्थिति में जांच एजेंसियों को मिलने वाली सहायता। प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था। फिलहाल फीचर लागू न करने की सलाह सरकार ने Meta से कहा है कि जब तक इस फीचर पर समीक्षा और आवश्यक चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से बचा जाए। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया फीचर उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी प्रभावी समाधान उपलब्ध कराए। अब इस मामले में सभी की नजर Meta के जवाब पर है, जिसे कंपनी को 9 जुलाई तक केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
पुणे: मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 15 सेकेंड के इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच में एक नया पहलू जुड़ गया है। वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नाइटक्लब में फोन पर बातचीत का वीडियो बताया जा रहा है कि यह वीडियो दिसंबर 2025 का है। वीडियो में सिया गोयल एक नाइटक्लब में दिखाई दे रही हैं। उनके हाथ में बीयर की बोतल जैसी वस्तु नजर आती है और वह मोबाइल फोन पर किसी से बात करती दिख रही हैं। वीडियो की शुरुआत में सिया फोन उठाकर "कौन?" कहती हैं। तेज संगीत के कारण वह एक कान पर हाथ रखकर कॉल सुनने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह कथित तौर पर गुस्से में कहती सुनाई देती हैं, "पहले चीट करता है, फिर मुझे ही कॉल करता है।" जांच में नया एंगल वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि सिया गोयल उस समय किससे बात कर रही थीं। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि उन्होंने जिस व्यक्ति पर धोखा देने का आरोप लगाया, वह कौन था और क्या उसका इस मामले से कोई संबंध है। अभी तक पुलिस ने इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है। शराब पीने को लेकर भी चर्चा पिछले सप्ताह कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पुलिस हिरासत के दौरान सिया गोयल ने बीयर की मांग की थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस द्वारा मना किए जाने के बाद उन्होंने दोबारा ऐसी मांग नहीं की। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। परिवार ने आरोपों को बताया गलत सिया गोयल की मां पूजा गोयल ने इन सभी दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी बेटी के शराब पीने, पार्टी करने या बीयर मांगने संबंधी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी बेटी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच जारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
पुणे: केतन अग्रवाल की मौत पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर मजाक उड़ाने वाली पोस्ट करना डॉ. मुस्कान सोनी को भारी पड़ गया। ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन की सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से पांच वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है। एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. मुस्कान सोनी का आचरण संगठन की आचार संहिता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के विपरीत पाया गया। इसलिए उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई है। विवादित इंस्टाग्राम पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह AIDSA के अनुसार, केतन अग्रवाल की दर्दनाक मौत के बाद डॉ. मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसे मृतक का मजाक उड़ाने वाला और असंवेदनशील माना गया। संगठन का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न केवल पीड़ित परिवार की भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि संस्था की गरिमा और पेशेवर नैतिकता के भी खिलाफ हैं। पांच साल तक लागू रहेगा निलंबन जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में डॉ. मुस्कान सोनी संगठन की किसी भी गतिविधि, पद या सदस्यता से जुड़ी भूमिका नहीं निभा सकेंगी। सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के आधार पर भविष्य में इस आदेश की समीक्षा या संशोधन कर सकता है। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी इस बीच पुणे पुलिस केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां केतन के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद केतन का मोबाइल कुछ समय तक उनकी मंगेतर सिया गोयल के पास था, जिसके बाद फोन परिवार को सौंप दिया गया। अब यह जांच की जा रही है कि फोन से कोई डिजिटल साक्ष्य मिटाया गया या उसके साथ छेड़छाड़ की गई। 18 जून को हुई थी घटना पुलिस के मुताबिक, 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले पर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल को कथित रूप से खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। केतन और सिया की शादी इसी वर्ष नवंबर में प्रस्तावित थी। घटना के बाद पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों सहित मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। घटनास्थल पर कराया गया सीन रीक्रिएशन जांच के क्रम में पुलिस दोनों आरोपियों को अलग-अलग समय पर लोहागढ़ किले लेकर गई, जहां कथित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (सीन रीक्रिएशन) कराया गया। पुलिस का कहना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को समझने में मदद मिल रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।