La Guaira

A McDonald's restaurant in Venezuela's La Guaira province serves as a temporary field hospital after a devastating earthquake overwhelmed local healthcare facilities.
वेनेजुएला भूकंप: मैकडॉनल्ड्स बना अस्पताल, फूड काउंटर पर बंट रहीं दवाएं; तबाही के बीच जिंदगी बचाने की जंग

काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
International rescue teams pull security guard Hernán Alberto Gil Flores from the rubble of a collapsed shopping mall in La Guaira, Venezuela, eight days after a devastating earthquake.
वेनेजुएला भूकंप: 8 दिन तक मलबे में जिंदगी की जंग, सिक्योरिटी गार्ड को अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीम ने जिंदा निकाला

काराकास: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के आठ दिन बाद एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन सफल हुआ, जिसे राहतकर्मी किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। ला गुएरा स्थित एक शॉपिंग मॉल के मलबे में दबे सिक्योरिटी गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को करीब 70 घंटे तक चले जटिल अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में आठ देशों के बचावकर्मियों और विशेषज्ञों ने मिलकर हिस्सा लिया। 29 फीट मलबे के नीचे फंसे थे गार्ड सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस ला गुएरा के गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग मॉल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे। भूकंप के दौरान पार्किंग क्षेत्र का एक हिस्सा ढह गया, जिससे वह करीब 29 फीट गहरे मलबे के नीचे दब गए। रविवार को राहत एजेंसियों को सूचना मिली कि मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। रडार और साउंड डिटेक्शन से मिली जिंदगी की उम्मीद कोस्टा रिका रेड क्रॉस के अनुसार, रेस्क्यू टीमों ने रडार, सोनार और साउंड डिटेक्शन उपकरणों की मदद से मलबे के नीचे जीवन के संकेतों की पुष्टि की। इसके बाद विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी से मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता बनाया। बचाव अभियान के दौरान राहतकर्मी एक छोटे से छेद के जरिए गिल तक भोजन, पानी, दवाइयां और आवश्यक लाइफ सपोर्ट सामग्री पहुंचाते रहे। 70 घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चिली फायर ब्रिगेड सहित कई देशों की टीमों ने लगातार तीन दिनों तक अभियान चलाया। मलबा लगातार खिसकने का खतरा बना हुआ था, जिससे ऑपरेशन और भी कठिन हो गया। रेस्क्यू के दौरान जारी एक वीडियो में मलबे के बीच से गिल की उंगलियां हिलती हुई दिखाई दीं। बाद में उनका सिर और कंधा मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली और उन्हें सुरक्षित एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में स्थिर है हालत वेनेजुएला रेड क्रॉस के पैरामेडिक लुइस रोड्रिगेज के मुताबिक, जब गिल को अस्पताल ले जाया गया, तब वह पूरी तरह होश में थे और उनकी हालत स्थिर थी। फिलहाल उनका इलाज जारी है। पत्नी ने कहा- वह एक हीरो की तरह डटे रहे गिल की पत्नी गुसविमार गोंजालेस ने कहा कि उन्हें लगा था कि उनके पति अब जीवित नहीं होंगे। लेकिन उनके सुरक्षित बाहर आने की खबर ने पूरे परिवार को नई उम्मीद दी। उन्होंने कहा, "उन्होंने एक हीरो की तरह हार नहीं मानी और आखिरकार जिंदगी की इस लड़ाई को जीत लिया।" संयुक्त राष्ट्र ने बताया 'चमत्कार' संयुक्त राष्ट्र की आपदा मूल्यांकन एवं समन्वय टीम (UNDAC) के सदस्य सेबेस्टियन मोकोरक्वेर ने कहा कि आठ दिन तक मलबे में जीवित रहना असाधारण घटना है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी अवधि तक सीमित संसाधनों के बीच किसी व्यक्ति का जीवित बचना वास्तव में चमत्कार जैसा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिली सफलता इस रेस्क्यू अभियान में वेनेजुएला के अलावा चिली, कोस्टा रिका और अन्य देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। राहत एजेंसियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और लगातार प्रयासों की बदौलत यह अभियान सफल हो सका। वेनेजुएला में भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है और कई प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings in Venezuela after devastating earthquakes, while emergency workers and medical personnel continue relief operations in heavily affected areas.
वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही: 1,900 से अधिक मौतें, लगभग 59 हजार इमारतें क्षतिग्रस्त; भारत ने बढ़ाई राहत सहायता

काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0