Lionel Messi

Lionel Messi celebrating with Argentina as he targets historic FIFA World Cup 2026 records
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में लियोनेल मेसी के निशाने पर 5 ऐतिहासिक रिकॉर्ड, रच सकते हैं नया इतिहास

फुटबॉल जगत की नजरें एक बार फिर अर्जेंटीना के महान कप्तान Lionel Messi पर टिकी हैं। मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अपने खिताब की रक्षा करने उतरेगा और इस दौरान मेसी के पास कई ऐसे रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा जो उन्हें फुटबॉल इतिहास में और भी ऊंचा स्थान दिला सकते हैं। 2022 में अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने वाले मेसी इस बार सिर्फ ट्रॉफी ही नहीं, बल्कि कई बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं। 1. छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में होंगे शामिल मेसी 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 के बाद 2026 में अपना छठा विश्व कप खेलेंगे। इसके साथ ही वह Cristiano Ronaldo और Guillermo Ochoa के साथ छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो सकते हैं। यह उपलब्धि विश्व फुटबॉल में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। 2. मिरोस्लाव क्लोजे का गोल रिकॉर्ड तोड़ने का मौका मेसी अब तक विश्व कप में 26 मैचों में 13 गोल कर चुके हैं। विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड Miroslav Klose के नाम है, जिन्होंने 16 गोल किए थे। अगर मेसी इस टूर्नामेंट में चार या उससे अधिक गोल करते हैं तो वह क्लोजे को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन सकते हैं। 3. पांच अलग-अलग वर्ल्ड कप में गोल करने का रिकॉर्ड मेसी अब तक चार अलग-अलग विश्व कप संस्करणों में गोल कर चुके हैं। यदि वह वर्ल्ड कप 2026 में एक भी गोल करने में सफल रहते हैं तो वह पांच अलग-अलग फीफा विश्व कप में गोल करने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह उपलब्धि केवल क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम दर्ज है। इसके साथ ही मेसी दक्षिण अमेरिका के पहले खिलाड़ी बन जाएंगे जो यह कारनामा करेंगे। 4. असिस्ट के मामले में माराडोना को छोड़ सकते हैं पीछे मेसी ने विश्व कप में अब तक 8 असिस्ट किए हैं। इस मामले में वह अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी Diego Maradona की बराबरी पर हैं। एक और असिस्ट करते ही मेसी अर्जेंटीना के लिए विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा असिस्ट करने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। दो असिस्ट करने पर वह Fritz Walter के 9 असिस्ट के विश्व रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकते हैं। 5. कप्तान के रूप में बना सकते हैं सबसे बड़ा रिकॉर्ड मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना 2014 और 2022 के विश्व कप फाइनल में पहुंच चुकी है। अगर अर्जेंटीना 2026 में भी फाइनल में पहुंचती है तो मेसी विश्व फुटबॉल इतिहास के पहले कप्तान बन जाएंगे जो अपनी टीम को तीन बार विश्व कप फाइनल तक ले गए हों। वहीं यदि अर्जेंटीना खिताब जीतती है तो मेसी बतौर कप्तान दो फीफा विश्व कप जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन सकते हैं। क्या फिर इतिहास रच पाएंगे मेसी? 39 वर्ष की उम्र के करीब पहुंच चुके मेसी के लिए यह संभवतः आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों की नजरें सिर्फ अर्जेंटीना के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेंगी जिन्हें मेसी इस टूर्नामेंट में अपने नाम कर सकते हैं। अगर अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहती है और मेसी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी हासिल कर लेते हैं, तो उनका नाम फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में और मजबूती से दर्ज हो जाएगा।  

surbhi जून 4, 2026 0
FIFA World Cup
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बन सकता है इतिहास, मेसी-रोनाल्डो समेत ये 3 खिलाड़ी खेलेंगे छठा विश्व कप

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून 2026 से होने जा रही है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ मुकाबलों के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए भी चर्चा में है। फुटबॉल के तीन दिग्गज खिलाड़ी — Cristiano Ronaldo, Lionel Messi और Guillermo Ochoa — इतिहास में पहली बार छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन United States, Canada और Mexico में संयुक्त रूप से किया जाएगा। साथ ही पहली बार 48 टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप बनने जा रहा है। अब तक कोई खिलाड़ी नहीं खेल पाया 6 वर्ल्ड कप फुटबॉल इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी ने छह फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लिया है। सबसे ज्यादा पांच वर्ल्ड कप खेलने का रिकॉर्ड फिलहाल छह खिलाड़ियों के नाम दर्ज है। इस सूची में: Lionel Messi Cristiano Ronaldo Lothar Matthäus Antonio Carbajal Andrés Guardado Rafael Márquez शामिल हैं। अब 2026 में मेसी, रोनाल्डो और ओचोआ के पास इस रिकॉर्ड को नई ऊंचाई तक ले जाने का मौका होगा। 2006 से शुरू हुआ मेसी और रोनाल्डो का सफर Cristiano Ronaldo ने अपना पहला वर्ल्ड कप 2006 में जर्मनी में खेला था। इसके बाद वह 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में भी पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रोनाल्डो अब तक वर्ल्ड कप में 22 मुकाबले खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने 8 गोल और 2 असिस्ट दर्ज किए हैं। हालांकि वह अभी तक पुर्तगाल को विश्व कप ट्रॉफी नहीं दिला सके हैं। वहीं Lionel Messi ने भी 2006 में वर्ल्ड कप डेब्यू किया था। उन्होंने 2010, 2014, 2018 और 2022 में अर्जेंटीना के लिए खेला। मेसी ने 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताकर अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया। उन्होंने अब तक वर्ल्ड कप में 26 मैचों में 13 गोल और 8 असिस्ट दर्ज किए हैं। ओचोआ भी रच सकते हैं इतिहास Guillermo Ochoa भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। मैक्सिको के अनुभवी गोलकीपर ने 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2026 में वह छठा वर्ल्ड कप खेलकर फुटबॉल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। ओचोआ अब तक 152 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं और उन्हें मैक्सिको के सबसे भरोसेमंद गोलकीपर्स में गिना जाता है। क्यों खास होगा FIFA World Cup 2026? FIFA World Cup 2026 कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार: 48 टीमें हिस्सा लेंगी तीन देशों में टूर्नामेंट आयोजित होगा और संभवतः पहली बार खिलाड़ी छह वर्ल्ड कप खेलते नजर आएंगे ऐसे में दुनियाभर के फुटबॉल फैंस की नजरें इन दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी।  

surbhi मई 21, 2026 0
Miroslav Klose celebrating during FIFA World Cup as all-time highest goal scorer in tournament history
FIFA World Cup इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले 5 खिलाड़ी, टॉप पर हैं जर्मनी के दिग्गज क्लोज़

FIFA World Cup को फुटबॉल का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है, जहां दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। 1930 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में अब तक कई दिग्गजों ने अपने गोलों से इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि कुछ खिलाड़ियों ने लगातार कई संस्करणों में शानदार प्रदर्शन कर खुद को अमर बना लिया। फुटबॉल फैंस अब FIFA World Cup 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत आने वाले महीनों में होने वाली है। इसी बीच आइए जानते हैं अब तक के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ियों के बारे में। FIFA World Cup के टॉप-5 गोल स्कोरर खिलाड़ी 1. मिरोस्लाव क्लोज़ – जर्मनी (16 गोल) Miroslav Klose FIFA World Cup इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2002, 2006, 2010 और 2014 के चार विश्व कप में हिस्सा लिया और कुल 16 गोल किए। 2014 वर्ल्ड कप में ब्राजील के खिलाफ जर्मनी की 7–1 जीत के दौरान उन्होंने यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था। उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में प्रदर्शन उन्हें इस सूची में शीर्ष पर रखता है। 2. रोनाल्डो नाज़ारियो – ब्राजील (15 गोल) Ronaldo Nazário, जिन्हें ‘फेनोमेनों’ कहा जाता है, इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 1998, 2002 और 2006 के वर्ल्ड कप में कुल 15 गोल किए। 2002 में उन्होंने ब्राजील को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई और गोल्डन बूट भी अपने नाम किया। 3. गर्ड मुलर – पश्चिम जर्मनी (14 गोल) Gerd Müller, जिन्हें ‘डेर बॉम्बर’ के नाम से जाना जाता है, ने 1970 और 1974 के विश्व कप में 14 गोल किए। उनका गोल स्कोरिंग औसत बेहद प्रभावशाली रहा, और 1974 में उन्होंने जर्मनी को वर्ल्ड कप जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 4. जस्ट फॉन्टेन – फ्रांस (13 गोल) Just Fontaine ने केवल 1958 वर्ल्ड कप में खेलते हुए 13 गोल दागे। यह आज भी एक ही टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड है, जिसे तोड़ना बेहद कठिन माना जाता है। 5. लियोनेल मेसी – अर्जेंटीना (13 गोल) Lionel Messi ने 2006 से 2022 तक पांच वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया और 13 गोल किए। 2022 में उनकी कप्तानी में अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप खिताब जीता। मेसी ने अपने करियर में गोल्डन बॉल भी कई बार जीती और फुटबॉल इतिहास में सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। वर्ल्ड कप रिकॉर्ड्स और महत्व FIFA World Cup न केवल गोल और जीत का मंच है, बल्कि यह खिलाड़ियों की विरासत तय करने वाला टूर्नामेंट भी है। इन दिग्गजों ने साबित किया है कि बड़े मैचों में प्रदर्शन ही असली पहचान बनाता है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Ronaldo Messi LEGO World Cup 2026
FIFA World Cup 2026  से पहले बड़ा धमाका:  LEGO में दिखे फुटबॉल के दो महानायक

फुटबॉल की दुनिया के दो सबसे बड़े नाम Cristiano Ronaldo और Lionel Messi एक बार फिर साथ नजर आए हैं-लेकिन इस बार मैदान पर नहीं, बल्कि एक अनोखे अंदाज में। मशहूर खिलौना कंपनी LEGO ने इन दोनों दिग्गजों को अपने नए कैंपेन में मिनीफिगर के रूप में पेश किया है, जो FIFA World Cup 2026 से पहले लॉन्च किया गया है। लेगो में उतरी फुटबॉल की सुपरस्टार दुनिया LEGO ने इस खास कलेक्शन में सिर्फ रोनाल्डो और मेसी ही नहीं, बल्कि Kylian Mbappé और Vinícius Júnior को भी शामिल किया है। हर मिनीफिगर को खिलाड़ियों की खास पहचान, खेलने की शैली और उनके करियर के यादगार पलों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इन सेट्स में “Football Highlights” और “Football Legends” जैसे थीम शामिल हैं, जो फैंस को अपने पसंदीदा खिलाड़ियों के करियर को एक नए अंदाज में जीने का मौका देते हैं। खास डिजाइन और कलेक्टिबल एक्सपीरियंस हर सेट को एक खास लेटर-शेप बेस पर तैयार किया गया है, जिसमें खिलाड़ियों की नेशनल टीम के रंग, जर्सी नंबर और कलेक्टिबल प्लेट भी दी गई है। इसके साथ मिलने वाली मिनीफिगर इन सेट्स को और भी आकर्षक बनाती है। रोनाल्डो ने इस सहयोग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हर दिन ऐसा मौका नहीं मिलता जब आप खुद एक LEGO सेट बन जाएं।” 2022 के बाद फिर साथ दिखे रोनाल्डो-मेसी यह पहली बार नहीं है जब दोनों दिग्गज एक साथ किसी विज्ञापन में नजर आए हैं। इससे पहले 2022 वर्ल्ड कप के दौरान दोनों ने एक लग्जरी ब्रांड के साथ मिलकर यादगार कैंपेन किया था, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया था। वर्ल्ड कप में फिर हो सकता है महामुकाबला आने वाले वर्ल्ड कप में जहां मेसी अपनी टीम के साथ खिताब बचाने उतरेंगे, वहीं रोनाल्डो अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा करने की कोशिश करेंगे। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो क्वार्टरफाइनल में एक बार फिर “रोनाल्डो बनाम मेसी” का ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
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अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0