नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में हराकर खिताब अपने नाम किया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जश्न की जगह मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। अंतिम सीटी बजते ही दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ी आपस में भिड़ गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम पर FIFA ने आधिकारिक जांच शुरू करने का फैसला किया है। यदि अनुशासनहीनता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो खिलाड़ियों और संबंधित टीम अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। मैच खत्म होते ही बढ़ा विवाद फाइनल समाप्त होने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस और स्पेन के खिलाड़ी एरिक गार्सिया तथा रॉडरी के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और दोनों टीमों के कई खिलाड़ी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। स्थिति को बिगड़ता देख अर्जेंटीना के कोच और टीम स्टाफ ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद खिलाड़ियों को अलग किया गया और मामला शांत कराया गया। FIFA ने शुरू की अनुशासनात्मक जांच घटना के बाद FIFA ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि फाइनल मुकाबले की मैच रिपोर्ट की समीक्षा की जा रही है। संगठन ने FIFA Disciplinary Code (FDC) के अनुच्छेद 36 के तहत पूरे मामले की जांच के लिए एक डिसिप्लिनरी और एथिक्स प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है। FIFA के बयान के अनुसार: "स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेले गए विश्व कप फाइनल से जुड़ी मैच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद मैच के बाद हुई घटनाओं में संभावित अनुशासनात्मक उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डिसिप्लिनरी कमिटी आगे की कार्रवाई और निर्णय की जानकारी देगी।" यदि जांच में खिलाड़ियों या अधिकारियों की गलती साबित होती है, तो जुर्माना, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। एक्स्ट्रा टाइम में स्पेन ने जीता विश्व कप मैच की बात करें तो दोनों टीमों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट में फैसला नहीं हो सका, जिसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंचा। स्पेन के लिए फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में निर्णायक गोल दागा। उन्होंने निको विलियम्स के हेडर से मिले शानदार पास को नियंत्रित करते हुए बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाया, जिसे अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज नहीं रोक सके। इस गोल की बदौलत स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। हार के बाद भावुक हुए लियोनेल मेसी फाइनल में हार के बाद अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि यह हार बेहद दर्दनाक है और इस जख्म को भरने में समय लगेगा। मेसी ने अपने संदेश में कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार संघर्ष किया और देशवासियों के समर्थन की बदौलत एक बार फिर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में जगह बनाई। उन्होंने लिखा कि इस हार का दर्द जरूर रहेगा, लेकिन टीम द्वारा बनाई गई यादें और पूरे टूर्नामेंट में दिखाई गई मेहनत हमेशा उनके साथ रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फुटबॉल जगत के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी का विश्व कप सफर भावुक अंदाज में समाप्त हो गया। FIFA विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। स्पेन की ओर से निर्णायक गोल फेरान टोरेस ने किया, जिसने अर्जेंटीना की खिताब बचाने की उम्मीदों पर विराम लगा दिया। पूरे टूर्नामेंट में अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत बने 39 वर्षीय मेसी पूरे टूर्नामेंट में अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे। उन्होंने अपने अनुभव और नेतृत्व से टीम को लगातार प्रेरित किया, लेकिन फाइनल में स्पेन की सशक्त रणनीति के सामने उनका जादू नहीं चल सका। मुकाबले के बाद रनर-अप मेडल लेते समय मेसी भावुक हो गए और उनकी आंखों से छलके आंसुओं ने दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों को भावुक कर दिया। मिडफील्ड में पूरी तरह दबदबा कायम रखा फाइनल में स्पेन ने शुरुआत से ही गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और मिडफील्ड में पूरी तरह दबदबा कायम रखा। अर्जेंटीना लंबे समय तक कोई प्रभावी आक्रमण नहीं कर सका। अतिरिक्त समय में मिले मौके का फायदा उठाते हुए फेरान टोरेस ने विजयी गोल दागकर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। पूरे मुकाबले में स्पेन की सामरिक अनुशासन और मजबूत रक्षापंक्ति के कारण मेसी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। हालांकि खिताबी मुकाबले का अंत अर्जेंटीना के पक्ष में नहीं रहा, लेकिन मेसी का पूरे टूर्नामेंट का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने आठ गोल दागे और चार असिस्ट किए, जिनमें इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में दो अहम असिस्ट भी शामिल रहे। उनके प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि उम्र महज एक आंकड़ा है। यह विश्व कप संभवतः मेसी के करियर का अंतिम विश्व कप साबित होगा। अगले संस्करण तक उनकी उम्र 43 वर्ष हो जाएगी। ऐसे में फाइनल में मिली हार के बावजूद मेसी की विरासत, उनके योगदान और खेल के प्रति समर्पण को फुटबॉल इतिहास हमेशा याद रखेगा।
न्यू जर्सी, एजेंसियां। स्पेन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के रोमांचक फाइनल में गत चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। निर्धारित 90 मिनट तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी, लेकिन अतिरिक्त समय (106वें मिनट) में फेरान टोरेस ने निर्णायक गोल दागकर स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह स्पेन का 2010 के बाद दूसरा विश्व कप खिताब है। 106वें मिनट में टूटा गतिरोध पूरे मुकाबले में स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार हमले किए, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव किए। आखिरकार अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने गोल कर मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल दाग दिया। अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ खेली मुकाबले के अंतिम चरण में अर्जेंटीना को बड़ा झटका लगा, जब एंजो फर्नांडीज को दूसरा पीला कार्ड मिलने के बाद मैदान से बाहर भेज दिया गया। इसके बाद स्पेन ने अतिरिक्त समय में दबाव बढ़ाया और जीत दर्ज कर ली। लियोनेल मेसी का विश्व कप सफर खत्म यह मुकाबला लियोनेल मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी विश्व कप मैच माना जा रहा है। खिताब बचाने का सपना टूटने के बाद मेसी भावुक नजर आए, जबकि स्पेन के खिलाड़ियों ने दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का जश्न मनाया। स्पेन ने रचा नया इतिहास इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार और कुल दूसरी बार फीफा विश्व कप ट्रॉफी जीती। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया और चैंपियन बनने तक केवल एक गोल ही खाया, जो विश्व कप इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है।
न्यू जर्सी, एजेंसियां। मेटलाइफ स्टेडियम एक बार फिर अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के करियर के सबसे भावुक पलों का गवाह बना। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल में हार के बाद इसी मैदान पर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान करने वाले मेसी ने 10 साल बाद यहीं विश्व कप जीतकर यादगार विदाई का सपना देखा था, लेकिन स्पेन ने अतिरिक्त समय में 1-0 से हराकर उनका यह सपना भी तोड़ दिया। फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हुआ, लेकिन अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में स्पेन के फेर्रान टोरेस ने निर्णायक गोल दागकर टीम को दूसरी बार विश्व चैंपियन बना दिया। अंतिम सीटी बजते ही मेसी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मेटलाइफ स्टेडियम मेसी के करियर का खास हिस्सा रहा है। 26 जून 2016 को चिली के खिलाफ कोपा अमेरिका फाइनल हारने के बाद उन्होंने यहीं अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में उन्होंने फैसला बदला और वापसी करते हुए अर्जेंटीना को 2021 और 2024 का कोपा अमेरिका, 2022 की फाइनलिसिमा तथा 2022 का फीफा विश्व कप जिताया। मेसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ गोल किए विश्व कप 2026 में मेसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ गोल किए और विश्व कप में अपने कुल गोलों की संख्या 21 तक पहुंचाई। हालांकि वह फ्रांस के किलियन एमबाप्पे (22 गोल) का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सके। एमबाप्पे ने 10 गोल के साथ गोल्डन बूट जीता, जबकि स्पेन के कप्तान रोड्री को गोल्डन बॉल से सम्मानित किया गया। इस हार के साथ मेटलाइफ स्टेडियम मेसी के करियर की दो सबसे दर्दनाक यादों का प्रतीक बन गया एक बार संन्यास का फैसला और दूसरी बार विश्व कप के साथ सुनहरी विदाई का सपना टूटना।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 का फाइनल सिर्फ स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खिताबी मुकाबला नहीं होगा, बल्कि यह दो पीढ़ियों और दो रणनीतिक दिमागों की भी टक्कर बनेगा। मैदान पर जहां 39 वर्षीय दिग्गज लियोनेल मेसी और 19 वर्षीय युवा स्टार लामिन यामाल के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा, वहीं मैदान के बाहर स्पेन के मुख्य कोच लुइस दे ला फुएंते और अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी की रणनीतिक जंग भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस मुकाबले को खास बनाने वाली बात यह है कि स्कालोनी कभी दे ला फुएंते के छात्र रह चुके हैं। वर्ष 2017 में स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन के कोचिंग कोर्स के दौरान दे ला फुएंते उनके प्रशिक्षक थे। अब वही गुरु और शिष्य विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। लियोनेल स्कालोनी 48 वर्षीय लियोनेल स्कालोनी ने खिलाड़ी के रूप में स्पेनिश क्लबों के लिए खेला और 2015 में संन्यास लेने के बाद कोचिंग की राह पकड़ी। 2018 में अर्जेंटीना के मुख्य कोच बनने पर उनकी नियुक्ति की आलोचना हुई, लेकिन उन्होंने टीम को नई पहचान दी। उनके नेतृत्व में अर्जेंटीना ने 2021 और 2024 का कोपा अमेरिका तथा 2022 का फीफा विश्व कप जीता। स्कालोनी टीम संतुलन और खिलाड़ियों के बेहतर प्रबंधन के लिए जाने जाते हैं तथा मेसी को खुलकर खेलने की आजादी देते हैं। लुइस दे ला फुएंते दूसरी ओर, 65 वर्षीय लुइस दे ला फुएंते स्पेन की युवा टीमों को निखारने के बाद 2022 में सीनियर टीम के मुख्य कोच बने। उनकी अगुआई में स्पेन ने UEFA यूरो 2024 का खिताब जीता। उनकी रणनीति पजेशन आधारित आक्रामक फुटबॉल, अनुशासन और सामूहिक खेल पर आधारित है। फाइनल में दोनों कोच अपनी-अपनी रणनीतियों से बढ़त हासिल करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ खिलाड़ियों की प्रतिभा ही नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य के फुटबॉल दर्शन की भी सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लियोनेल मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार और कुल सातवीं बार विश्व कप फाइनल में जगह बना ली। मैच के अंतिम सात मिनट में शानदार वापसी करते हुए अर्जेंटीना ने हार के मुहाने से जीत छीन ली। अब खिताबी मुकाबले में उसका सामना स्पेन से होगा, जबकि इंग्लैंड तीसरे स्थान के लिए फ्रांस के खिलाफ खेलेगा। अंतिम मिनटों में बदली मैच की तस्वीर दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने एंथोनी गॉर्डन के गोल की बदौलत 1-0 की बढ़त बना ली थी और टीम जीत की ओर बढ़ती नजर आ रही थी। हालांकि अर्जेंटीना ने दबाव बनाए रखा और अंतिम सात मिनट में मुकाबले का रुख पलट दिया। पहले एंजो फर्नांडेज ने बराबरी का गोल दागा, फिर इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में लाउतारो मार्टिनेज ने विजयी गोल कर इंग्लैंड की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मेसी भले ही गोल नहीं कर सके, लेकिन दोनों गोल की शुरुआत में उनकी अहम भूमिका रही। पहले हाफ में बराबरी की टक्कर मैच की शुरुआत दोनों टीमों ने आक्रामक लेकिन सतर्क अंदाज में की। शुरुआती 20 मिनट तक अर्जेंटीना ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा, जबकि इंग्लैंड ने मजबूत रक्षापंक्ति के सहारे उसे मौके बनाने से रोके रखा। पहले हाफ में कई फाउल हुए, लेकिन कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं रही। दोनों टीमों में हुए बदलाव इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल ने शुरुआती एकादश में तीन बदलाव करते हुए रीस जेम्स, जेड स्पेंस और मोर्गन रोजर्स को मौका दिया। दूसरी ओर अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने रोड्रिगो डी पॉल की जगह जूलियानो सिमियोने को टीम में शामिल किया। मुकाबले के दौरान कई कड़े टैकल देखने को मिले और दोनों टीमों के खिलाड़ियों को येलो कार्ड भी मिले, लेकिन निर्णायक क्षणों में अर्जेंटीना ने बेहतर संयम और आक्रामकता दिखाते हुए यादगार जीत दर्ज की।
एक समय था जब पूरी दुनिया लियोनेल मेसी को विश्व कप जीतते देखना चाहती थी। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना के मैदान पर उतरते ही बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक उसकी हार की कामना करते नजर आते हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जेंटीना के खिलाफ बढ़ती आलोचना का सबसे बड़ा कारण उसकी लगातार मिल रही सफलता है। फुटबॉल में अक्सर अंडरडॉग टीमों को समर्थन मिलता है, लेकिन जब वही टीम लगातार खिताब जीतने लगती है तो उसके विरोधियों की संख्या भी बढ़ जाती है। मेसी की अधूरी कहानी से विश्व विजेता बनने तक कई वर्षों तक लियोनेल मेसी को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी माना गया, लेकिन उनके नाम विश्व कप नहीं होने की बात हमेशा चर्चा में रहती थी। 2014 विश्व कप फाइनल में जर्मनी से हार, फिर 2015 और 2016 कोपा अमेरिका फाइनल में लगातार हार ने मेसी और अर्जेंटीना के प्रति दुनिया की सहानुभूति और बढ़ा दी थी। यहां तक कि जब मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का फैसला किया था, तब विरोधी टीमों के प्रशंसकों ने भी उनकी वापसी की अपील की थी। लेकिन इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 2021 में कोपा अमेरिका 2022 में फाइनलिसिमा 2022 फीफा विश्व कप जैसे बड़े खिताब जीतकर अर्जेंटीना ने दुनिया की सबसे सफल टीमों में फिर से अपनी जगह बना ली। सफलता के साथ बढ़ी आलोचना विश्व कप जीतने के बाद अर्जेंटीना की हर बड़ी जीत पर सवाल उठने लगे। कतर विश्व कप के दौरान मिले पेनल्टी फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस होती रही। कई लोगों ने रेफरी के फैसलों पर सवाल उठाए और VAR से जुड़े निर्णयों को लेकर भी विवाद खड़े किए। हालांकि फुटबॉल इतिहास में लगभग हर विश्व चैंपियन टीम किसी न किसी विवाद का हिस्सा रही है, लेकिन अर्जेंटीना की जीतों पर अपेक्षाकृत अधिक चर्चा देखने को मिली। एमिलियानो मार्टिनेज भी बने विवादों का केंद्र अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज भी अक्सर अपने जश्न और व्यवहार को लेकर चर्चा में रहते हैं। उनका आत्मविश्वास और विरोधी खिलाड़ियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की शैली कई प्रशंसकों को पसंद आती है, जबकि कई लोग इसे खेल भावना के खिलाफ मानते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि फुटबॉल में पहले भी कई बड़े खिलाड़ियों और कोचों ने इसी तरह का आक्रामक रवैया अपनाया है, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को लेकर प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत अधिक तीखी दिखाई देती है। आलोचना और जिम्मेदारी दोनों जरूरी हालांकि अर्जेंटीना पूरी तरह आलोचना से परे नहीं है। 2024 कोपा अमेरिका के बाद कुछ खिलाड़ियों पर नस्लभेदी नारे लगाने के आरोप लगे थे, जिसकी दुनिया भर में आलोचना हुई थी। इस मामले में जांच भी शुरू की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी विशेष घटना में शामिल खिलाड़ियों की आलोचना होना उचित है, लेकिन पूरी टीम या उसके समर्थकों को उसी नजरिए से देखना सही नहीं माना जा सकता। अब अंडरडॉग नहीं, सबसे बड़ी चुनौती है अर्जेंटीना फुटबॉल में प्रशंसक अक्सर उन टीमों का समर्थन करते हैं जो लंबे समय से खिताब जीतने का इंतजार कर रही हों। लेकिन अर्जेंटीना अब उस श्रेणी में नहीं आता। मौजूदा विश्व चैंपियन होने के कारण वह हर टूर्नामेंट में सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल रहता है। इंग्लैंड, फ्रांस और स्पेन जैसी टीमें अपना सपना पूरा करना चाहती हैं, लेकिन उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक अर्जेंटीना है। यही वजह है कि अब कई फुटबॉल प्रेमी अर्जेंटीना को हराने वाली टीम का समर्थन करते दिखाई देते हैं। चैंपियन बनने की यही है कीमत खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी टीम के लिए लगातार सफलता अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आती है। जब कोई टीम संघर्ष कर रही होती है तो उसे सहानुभूति मिलती है, लेकिन जब वही टीम बार-बार ट्रॉफी जीतने लगती है तो उस पर सवाल भी बढ़ने लगते हैं। अर्जेंटीना की मौजूदा स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। कभी जिसे पूरी दुनिया मेसी के लिए विश्व कप जीतते देखना चाहती थी, आज उसी टीम को हराने की उम्मीद कई प्रशंसक कर रहे हैं। यही सफल चैंपियन बनने की सबसे बड़ी कीमत भी मानी जाती है।
कैनसस सिटी, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्विट्जरलैंड को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। निर्धारित 90 मिनट का खेल 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, लेकिन अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना ने दो गोल दागकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। मैच में क्या हुआ? अर्जेंटीना को शुरुआती बढ़त एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने दिलाई, जिन्होंने लियोनेल मेसी के कॉर्नर पर शानदार हेडर लगाया। दूसरे हाफ में स्विट्जरलैंड ने डैन एनडोये के गोल से बराबरी कर ली। मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब स्विस स्ट्राइकर ब्रील एम्बोलो को VAR समीक्षा के बाद रेड कार्ड दिखाया गया और टीम 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गई। अल्वारेज़ और लाउतारो बने जीत के हीरो अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना ने एक खिलाड़ी की बढ़त का पूरा फायदा उठाया। जूलियन अल्वारेज़ ने 112वें मिनट में शानदार लंबी दूरी का गोल कर टीम को फिर बढ़त दिलाई। इसके बाद लाउतारो मार्टिनेज़ ने 121वें मिनट में तीसरा गोल कर जीत पक्की कर दी। कप्तान लियोनेल मेसी गोल नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने पहले गोल में अहम असिस्ट दिया। अब इंग्लैंड से होगी सेमीफाइनल में भिड़ंत इस जीत के साथ अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप खिताब जीतने की उम्मीदें बरकरार रखते हुए सेमीफाइनल में पहुंच गया है। अब उसका सामना इंग्लैंड से होगा, जिसने क्वार्टर फाइनल में नॉर्वे को 2-1 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। फुटबॉल प्रेमियों को अब टूर्नामेंट के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक देखने को मिलेगा।
फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने इस मुकाबले में गोल कर विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे अब तक कोई भी खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराकर लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत में एम्बाप्पे ने गोल करने के साथ-साथ एक असिस्ट भी दर्ज किया। 30 साल की उम्र से पहले 20 वर्ल्ड कप गोल का रिकॉर्ड मोरक्को के खिलाफ किया गया गोल एम्बाप्पे का विश्व कप करियर का 20वां गोल था। इसके साथ ही वह 30 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले विश्व कप में 20 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उन्हें विश्व फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में और मजबूत स्थान दिलाती है। गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी की बराबरी एम्बाप्पे का यह गोल मौजूदा विश्व कप का उनका आठवां गोल भी था। इसके साथ उन्होंने लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली और दोनों खिलाड़ी अब गोल्डन बूट की दौड़ में संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं। पेनाल्टी चूकी, लेकिन बाद में किया शानदार गोल मैच के पहले हाफ में एम्बाप्पे के पास पेनाल्टी के जरिए गोल करने का मौका था, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बोनू ने उनका शॉट रोक दिया। हालांकि दूसरे हाफ में एम्बाप्पे ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई और बाद में उस्मान डेम्बेले के गोल में भी अहम असिस्ट किया। चोट की आशंका के बीच बदले गए बाहर मैच के 76वें मिनट में एम्बाप्पे को मैदान से बाहर बुला लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कुछ शारीरिक असहजता महसूस हुई थी, जिसके बाद कोच दिदिएर डेशां ने उन्हें आराम देने का फैसला किया। हालांकि उनकी चोट को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक गंभीर अपडेट सामने नहीं आया है। फ्रांस की नजर लगातार तीसरे फाइनल पर फ्रांस ने इस जीत के साथ लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। अब टीम का अगला मुकाबला स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा। फ्रांस 2018 में विश्व चैंपियन बना था, जबकि 2022 में उपविजेता रहा था। अब टीम लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचने की कोशिश करेगी। लगातार दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं एम्बाप्पे किलियन एम्बाप्पे पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में गिने जाते हैं। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है और वह हर टूर्नामेंट में नए रिकॉर्ड अपने नाम कर रहे हैं। मोरक्को के खिलाफ उनका प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि बड़े मुकाबलों में एम्बाप्पे फ्रांस के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अर्जेंटीना से 3-2 की नाटकीय हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसम हसन ने FIFA और मैच अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था चाहती थी कि लियोनेल मेसी और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट में आगे बढ़ें। हालांकि, इन आरोपों का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है और FIFA की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। 2-0 की बढ़त के बावजूद हार गया मिस्र मुकाबले में मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी और लंबे समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। लेकिन अंतिम चरण में अर्जेंटीना ने शानदार वापसी करते हुए क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत 13 मिनट के भीतर तीन गोल दाग दिए और 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। VAR फैसलों पर जताई नाराजगी हार के बाद होसम हसन ने कहा कि उनकी टीम ने खेल के अधिकांश हिस्से में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ फैसलों ने मैच की दिशा बदल दी। उनके अनुसार, सबसे बड़ा विवाद 59वें मिनट में हुआ जब मोस्तफा ज़िको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद सलाह को पेनल्टी नहीं मिली और अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले फाउल होने के बावजूद VAR ने हस्तक्षेप नहीं किया। 'मेसी को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे' पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसम हसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि मैच का परिणाम केवल मैदान पर हुए प्रदर्शन से तय नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संभव है FIFA और अन्य बाहरी कारक चाहते थे कि मौजूदा विश्व चैंपियन और लियोनेल मेसी प्रतियोगिता में बने रहें। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। 'अब कभी वर्ल्ड कप नहीं देखूंगा' मैच के बाद एक टीवी इंटरव्यू में मिस्र के कोच ने अपनी नाराजगी दोहराते हुए कहा कि उन्हें यह जीत अर्जेंटीना की "अयोग्य जीत" लगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने देश लौटने के बाद वह दोबारा विश्व कप नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि उनके अनुसार प्रतियोगिता में उन्हें न्याय नहीं मिला। FIFA कर सकता है टिप्पणी की समीक्षा होसम हसन के बयानों के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FIFA उनके पोस्ट-मैच बयानों की समीक्षा कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना ने मिस्र के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब कप्तान लियोनेल मेसी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अंतिम सीटी बजते ही साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और बाद में कंधों पर उठाकर उनकी शानदार कप्तानी और प्रदर्शन का सम्मान किया। 2-0 से पिछड़ने के बाद बदली मैच की तस्वीर करीब 80 मिनट तक ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। टीम 2-0 से पीछे थी और मेसी पहले हाफ में पेनल्टी भी चूक चुके थे। लेकिन अंतिम 13 मिनट में अर्जेंटीना ने शानदार खेल दिखाया। क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत टीम ने 3-2 से यादगार जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पेनल्टी मिस करने के बाद भी नहीं हारी उम्मीद पहले हाफ में मेसी की पेनल्टी मिस होने के बाद टीम मुश्किल में आ गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार गेंद मांगते रहे। उन्होंने पहले अर्जेंटीना के लिए वापसी की शुरुआत कराई, फिर बराबरी का गोल दागा। आखिरकार एंजो फर्नांडीज ने स्टॉपेज टाइम में विजयी गोल कर टीम को अगले दौर में पहुंचा दिया। कोच स्कालोनी भी हुए भावुक मैच के बाद अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि यह टीम कभी हार नहीं मानती और खिलाड़ियों का जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। स्कालोनी ने मेसी की तारीफ करते हुए कहा कि पेनल्टी चूकने के बाद भी उन्होंने गेंद मांगना नहीं छोड़ा और वही उनकी महानता की पहचान है। मेसी ने टीम को दिया जीत का श्रेय मैच के बाद मेसी ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे समूह की मेहनत का परिणाम है और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि वह आखिरी मिनट तक लड़ना जानती है। उन्होंने प्रशंसकों का भी धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि टीम आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेगी। साथियों ने कंधों पर उठाकर किया सम्मान जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एकजुट होकर जश्न मनाया। सभी खिलाड़ियों ने मेसी को घेर लिया और फिर उन्हें कंधों पर उठाकर सम्मान दिया। यह दृश्य टीम के भीतर मजबूत एकता, विश्वास और अपने कप्तान के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। अर्जेंटीना अब इस शानदार जीत के साथ विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने की उसकी उम्मीदें बरकरार हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 मुकाबले में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने शानदार जुझारूपन का प्रदर्शन करते हुए मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश कर लिया। एक समय अर्जेंटीना 0-2 से पिछड़ रहा था, लेकिन आखिरी 10 मिनट में तीन गोल दागकर टीम ने टूर्नामेंट की सबसे रोमांचक जीत में से एक दर्ज की। मिस्र ने बनाई बढ़त, फिर मेसी ने पलटा मुकाबला मैच की शुरुआत से ही मिस्र ने आक्रामक खेल दिखाया। यासर इब्राहिम ने 15वें मिनट में पहला गोल किया, जबकि 62वें मिनट में मुस्तफा जिको ने दूसरा गोल दागकर अर्जेंटीना को मुश्किल में डाल दिया। 0-2 से पीछे होने के बाद अर्जेंटीना पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा था। इसके बाद कप्तान लियोनेल मेसी ने टीम की वापसी की पटकथा लिखी। 79वें मिनट में उनके शानदार पास पर क्रिस्टियन रोमेरो ने गोल कर स्कोर 2-1 किया। इसके चार मिनट बाद मेसी ने खुद गोल दागकर मुकाबला 2-2 से बराबर कर दिया। स्टॉपेज टाइम के तीसरे मिनट में एंजो फर्नांडीज ने विजयी गोल कर अर्जेंटीना को 3-2 की रोमांचक जीत दिला दी। गोल्डन बूट की दौड़ में मेसी सबसे आगे इस मुकाबले में गोल करने के साथ ही लियोनेल मेसी के टूर्नामेंट में आठ गोल हो गए हैं और वह गोल्डन बूट की रेस में शीर्ष पर पहुंच गए हैं। फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे और नॉर्वे के एरलिंग हालैंड सात-सात गोल के साथ उनके पीछे हैं। मिस्र के कोच ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसाम हसन ने रेफरिंग और VAR फैसलों पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कई अहम निर्णय उनकी टीम के खिलाफ गए, जिससे मैच का परिणाम प्रभावित हुआ। हालांकि अर्जेंटीना ने शानदार वापसी के दम पर जीत दर्ज की और अब क्वार्टरफाइनल में उसका सामना स्विट्जरलैंड से होगा। वहीं अन्य क्वार्टरफाइनल मुकाबलों में फ्रांस का सामना मोरक्को, स्पेन का बेल्जियम और नॉर्वे का इंग्लैंड से होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले समाप्त होने के बाद अब 16 टीमें नॉकआउट चरण के तीसरे दौर यानी राउंड ऑफ 16 में आमने-सामने होंगी। इस चरण की शुरुआत शनिवार (4 जुलाई) को मोरक्को और कनाडा के मुकाबले से होगी। दोनों टीमें जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। राउंड ऑफ 32 में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराया, जबकि ब्राजील ने जापान को 2-1 से मात दी। फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से हराया, वहीं इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से शिकस्त दी। सबसे बड़े उलटफेर में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी दिग्गज टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पराग्वे ने जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हराया, जबकि मोरक्को ने नीदरलैंड को पेनल्टी में मात देकर सभी को चौंका दिया। भारतीय समयानुसार भारतीय समयानुसार राउंड ऑफ 16 के प्रमुख मुकाबलों में 4 जुलाई को कनाडा बनाम मोरक्को, 5 जुलाई को पराग्वे बनाम फ्रांस, 6 जुलाई को ब्राजील बनाम नॉर्वे और मेक्सिको बनाम इंग्लैंड के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद 7 जुलाई को पुर्तगाल बनाम स्पेन, अमेरिका बनाम बेल्जियम और अर्जेंटीना बनाम मिस्र की टक्कर होगी, जबकि 8 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे। इस विश्व कप में पहली बार 48 टीमों ने हिस्सा लिया है। ग्रुप चरण के बाद 32 टीमों ने नॉकआउट में प्रवेश किया और अब केवल 16 टीमें खिताब की दौड़ में बची हैं। राउंड ऑफ 16 के बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके पीछे काइलियन एम्बाप्पे 6 गोल के साथ दूसरे और अर्लिंग हालैंड तथा हैरी केन 5-5 गोल के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। ऐसे में अब हर मुकाबला न केवल टीमों के लिए बल्कि स्टार खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिहाज से भी बेहद अहम होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 के रोमांचक मुकाबले में पहली बार विश्व कप खेल रही केप वर्डे को 3-2 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में जगह बना ली। मियामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में केप वर्डे ने अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर दी और मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में जाकर हुआ। अब अर्जेंटीना का अगला मुकाबला मिस्र से होगा, जिसने राउंड ऑफ 32 में ऑस्ट्रेलिया को पेनाल्टी शूटआउट में हराया था। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार 7 जुलाई को रात 9:30 बजे खेला जाएगा। मैच की शुरुआत से ही अर्जेंटीना ने आक्रामक खेल दिखाया कप्तान लियोनेल मेसी ने 29वें मिनट में शानदार गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। हालांकि, केप वर्डे ने हार नहीं मानी और 59वें मिनट में डुआर्टे ने गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट में कोई और गोल नहीं होने के कारण मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा। एक्स्ट्रा टाइम के 92वें मिनट में लिसैंड्रो मार्टिनेज ने अर्जेंटीना को फिर बढ़त दिलाई, लेकिन कुछ ही देर बाद लोपेस कैब्राल ने शानदार गोल कर केप वर्डे की वापसी कराते हुए स्कोर 2-2 कर दिया। आखिरकार 111वें मिनट में मेसी के कॉर्नर पर केप वर्डे के खिलाड़ी से ओन गोल हो गया, जिसने अर्जेंटीना को 3-2 की जीत दिला दी। मेसी ने टूर्नामेंट का अपना सातवां गोल दागा इस मैच में मेसी ने टूर्नामेंट का अपना सातवां गोल दागा और फीफा वर्ल्ड कप में लगातार आठ मैचों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। मुकाबले के बाद मेसी ने कहा कि नॉकआउट चरण में कोई भी टीम कमजोर नहीं होती और केप वर्डे ने इसे साबित किया। उन्होंने अपनी टीम के जुझारूपन की सराहना करते हुए कहा कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करने के बावजूद अर्जेंटीना ने जीत का रास्ता तलाश लिया। अब टीम का पूरा फोकस मिस्र के खिलाफ होने वाले अगले मुकाबले पर रहेगा।
मियामी, एजेंसियां। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर Lionel Messi ने फीफा विश्व कप 2026 में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। केप वर्डे के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले में गोल दागते ही मेसी इस विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही उन्होंने विश्व कप इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। दो अलग-अलग विश्व कप में सात गोल करने वाले पहले खिलाड़ी केप वर्डे के खिलाफ मैच के 29वें मिनट में गोल करने के साथ ही मेसी विश्व कप के दो अलग-अलग संस्करणों में सात या उससे अधिक गोल करने वाले पहले फुटबॉलर बन गए। इससे पहले उन्होंने 2022 विश्व कप में भी सात गोल किए थे। यह उपलब्धि उनके शानदार और लगातार बने हुए प्रदर्शन को दर्शाती है। गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे सात गोल के साथ मेसी फिलहाल 2026 फीफा विश्व कप के गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं, इस गोल के साथ उन्होंने लगातार आठ विश्व कप मैचों में गोल करने का विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। अर्जेंटीना की टीम ने यह मुकाबला जीतकर अगले दौर में जगह बना ली है। रिकॉर्ड्स की झड़ी जारी 39 वर्षीय मेसी पहले ही पुरुष विश्व कप इतिहास के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। अब उनके खाते में 20 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मेसी इस विश्व कप में कई और रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे FIFA वर्ल्ड कप 2026 का ग्रुप चरण समाप्त हो चुका है। अब टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक दौर राउंड ऑफ 32 यानी नॉकआउट स्टेज शुरू होने जा रहा है। इस चरण में जीतने वाली टीमें प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में प्रवेश करेंगी, जबकि हारने वाली टीमों का विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो जाएगा। 16 टीमें हुईं बाहर, 32 टीमों ने बनाई जगह 48 टीमों वाले इस विश्व कप में ग्रुप स्टेज के बाद 16 टीमें बाहर हो चुकी हैं। इनमें दक्षिण कोरिया, उरुग्वे, ईरान, सऊदी अरब, कतर, स्कॉटलैंड, न्यूजीलैंड, तुर्किये, पनामा और उज्बेकिस्तान जैसी टीमें शामिल हैं। वहीं, 32 टीमों ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया है। मेसी और रोनाल्डो के मैच कब हैं? फुटबॉल प्रेमियों की नजरें एक बार फिर लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल पर टिकी हैं। पुर्तगाल बनाम क्रोएशिया – 3 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे अर्जेंटीना बनाम केप वर्डे – 4 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे दोनों मुकाबले अपने-अपने सुपरस्टार खिलाड़ियों की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित माने जा रहे हैं। इन मुकाबलों पर भी रहेंगी निगाहें राउंड ऑफ 32 में कई हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे। ब्राजील बनाम जापान का मैच तकनीक और आक्रामक फुटबॉल का दिलचस्प मुकाबला माना जा रहा है। वहीं फ्रांस बनाम स्वीडन में मौजूदा दावेदार फ्रांस के सामने स्वीडन की अनुशासित टीम बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। इसके अलावा नीदरलैंड बनाम मोरक्को, इंग्लैंड बनाम डीआर कांगो, स्पेन बनाम ऑस्ट्रिया और जर्मनी बनाम पैराग्वे जैसे मुकाबले भी रोमांच बढ़ाएंगे। अब हर मैच 'करो या मरो' का होगा, जहां एक छोटी सी गलती भी किसी टीम के विश्व कप जीतने के सपने को खत्म कर सकती है। ऐसे में नॉकआउट स्टेज में फुटबॉल प्रशंसकों को रोमांच, कड़े मुकाबले और कई यादगार पल देखने को मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अफ्रीकी देश केप वर्डे ने इतिहास रच दिया है। अपने पहले ही विश्व कप में हिस्सा ले रही इस टीम ने नॉकआउट चरण में जगह बनाकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सऊदी अरब के खिलाफ गोलरहित (0-0) ड्रॉ के बाद केप वर्डे ने ग्रुप एच में दूसरा स्थान हासिल किया और अंतिम-32 (राउंड ऑफ 32) के लिए क्वालिफाई कर लिया। लगभग पांच लाख की आबादी वाला केप वर्डे अब वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने वाला सबसे छोटा देश बन गया है। तीनों मुकाबले ड्रॉ, फिर भी हासिल किया नॉकआउट टिकट केप वर्डे ने ग्रुप चरण के अपने तीनों मुकाबले ड्रॉ खेले। टीम ने पहले 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन को 0-0 से रोका, फिर उरुग्वे के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 2-2 से बराबर किया। तीसरे मैच में सऊदी अरब के खिलाफ भी टीम ने 0-0 का परिणाम हासिल किया। तीन अंकों के साथ टीम ने ग्रुप में दूसरा स्थान सुरक्षित कर लिया। पहले ही विश्व कप में रचा नया रिकॉर्ड केप वर्डे अपने पहले विश्व कप में बिना कोई मैच गंवाए नॉकआउट चरण में पहुंचने वाला तीसरा अफ्रीकी देश भी बन गया है। टीम के इस प्रदर्शन ने फुटबॉल जगत में नई मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों और छोटी आबादी के बावजूद खिलाड़ियों ने बड़े देशों के खिलाफ शानदार खेल दिखाकर साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने चुनौतियां छोटी पड़ जाती हैं। अब अर्जेंटीना से होगी कड़ी चुनौती नॉकआउट दौर में केप वर्डे का सामना मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना से होगा। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार 4 जुलाई को मियामी में सुबह 3:30 बजे खेला जाएगा। कप्तान लियोनेल मेसी की टीम के खिलाफ यह मैच केप वर्डे के लिए अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। मैच से पहले टीम के मुख्य कोच बुबिस्टा ने कहा था, "हर किसी को सपने देखने का अधिकार है और कुछ भी असंभव नहीं है।" केप वर्डे ने अपने प्रदर्शन से इस विश्वास को सच साबित कर दिया और विश्व फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बना ली।
अर्लिंगटन: फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेसी आज 24 जून को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मेसी का प्रदर्शन दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को हैरान कर रहा है। फीफा विश्व कप 2026 में उनका शानदार फॉर्म जारी है और शुरुआती दो मुकाबलों में ही वह पांच गोल दाग चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने दो गोल करके एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वह फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके नाम अब कुल 18 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। 39 की उम्र में भी कायम है मेसी का जादू ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके खेल पर कोई असर नहीं डाल पाई है। टूर्नामेंट के शुरुआती दो मैचों में ही पांच गोल कर चुके मेसी की तारीफ करते हुए ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा कि 39 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन असाधारण है और यही उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जन्मदिन पर भावुक भी हैं मेसी इस खास दिन पर मेसी भावनात्मक दौर से भी गुजर रहे हैं। उनके पिता अर्जेंटीना में अस्वस्थ हैं और वह अपने परिवार से लगभग 10 हजार किलोमीटर दूर विश्व कप में टीम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने निजी चिंताओं को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया और अर्जेंटीना के अब तक हुए सभी पांच गोल खुद किए हैं। मेसी ने कहा, "विश्व कप का हर मैच कठिन है। कोई टीम आसानी से मौके नहीं देती, लेकिन मैं हर पल का आनंद ले रहा हूं।" पेनल्टी मिस करने के बाद शानदार वापसी ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच के शुरुआती मिनटों में मेसी पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए थे। उनके शॉट के पोस्ट के बाहर जाने से स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था। हालांकि, आठ बार के बैलन डी'ओर विजेता मेसी ने बाद में शानदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और अपनी गलती की भरपाई कर दी। मेसी ने मैच के बाद कहा, "पेनल्टी मिस करने से मैं काफी नाराज था, लेकिन बाद में इसकी भरपाई करने में सफल रहा।" यही मेसी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वह हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती के साथ वापसी करते हैं। स्टॉपेज टाइम में भी दिखी वही पुरानी फुर्ती मैच के स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना 18वां विश्व कप गोल दागा। पहले प्रयास को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन मेसी ने शानदार नियंत्रण और ड्रिब्लिंग का प्रदर्शन करते हुए कई डिफेंडरों को छकाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद अधिकांश अर्जेंटीनी समर्थकों ने इस पल का जोरदार जश्न मनाया। लियोनेल मेसी के बड़े रिकॉर्ड 6 विश्व कप (2006-2026) खेलने वाले पहले खिलाड़ी। लगातार 6 विश्व कप मैचों में गोल करने वाले इकलौते फुटबॉलर। 18 विश्व कप गोल के साथ ऑलटाइम टॉप स्कोरर। 26 गोल योगदान (18 गोल + 8 असिस्ट), जिससे उन्होंने पेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 28 विश्व कप मैच खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने। विश्व कप में कुल 2489 मिनट मैदान पर बिताने का रिकॉर्ड। 12 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी। दो बार गोल्डन बॉल (2014 और 2022) जीतने वाले दुनिया के अकेले फुटबॉलर। 128 सफल ड्रिब्लिंग के साथ डिएगो माराडोना के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 39 साल की उम्र में भी लियोनेल मेसी जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उन्हें सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि फुटबॉल इतिहास का 'अल्टीमेट किंग' साबित करता है।
Lionel Messi World Cup Record: फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अर्जेंटीना के कप्तान ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इसी के साथ विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के नाम था, जिन्होंने अपने करियर में वर्ल्ड कप में 16 गोल किए थे। अब मेसी 18 गोल के साथ उनसे आगे निकल चुके हैं। रिकॉर्ड टूटने पर मिरोस्लाव क्लोज ने दी बधाई अपना रिकॉर्ड टूटने के बाद मिरोस्लाव क्लोज ने मेसी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेसी का कोई मुकाबला नहीं है। वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। मुझे उनका मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और हर चुनौती से ऊपर उठने का तरीका बेहद पसंद है।" क्लोज ने यह भी कहा था कि अगर कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है, तो वह लियोनेल मेसी ही हैं। छठा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं मेसी लियोनेल मेसी साल 2006 से लगातार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं और 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का छठा विश्व कप है। वर्ल्ड कप में मेसी का सफर 2006 – 1 गोल 2014 – 4 गोल 2022 – 7 गोल और अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया 2026 – अब तक 5 गोल (अल्जीरिया के खिलाफ 3 और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2) मेसी का मौजूदा फॉर्म शानदार है और वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने के मिशन पर नजर आ रहे हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐसा रहा मुकाबला मैच के शुरुआती दौर में ऑस्ट्रिया के मजबूत डिफेंस ने अर्जेंटीना को काफी परेशान किया। हालांकि, 38वें मिनट में मेसी ने अपनी शानदार ड्रिब्लिंग और फिनिशिंग का नमूना पेश करते हुए पहला गोल दागा और टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया ने बराबरी की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंजरी टाइम के 95वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल करके मुकाबले पर अर्जेंटीना की पकड़ मजबूत कर दी और टीम को जीत दिलाई। मेसी के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी बड़े मंच पर इतिहास रचने का हुनर रखते हैं।
अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2-0 से हराया, नॉकआउट में पहुंचा अर्जेंटीना, एजेंसियां। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी फुटबॉल वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी ने पहले अपना 17वां गोल दागकर जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजा (16 गोल) का रिकॉर्ड तोड़ा और फिर मैच के आखिरी में एक और गोल कर इसे 18 तक पहुंचा दिया। 39वें मिनट में फील्ड गोल लगाकर इतिहास रचा मेसी ने डलास स्टेडियम में 39वें मिनट में फील्ड गोल लगाकर इतिहास रचा। इसके बाद इंजरी टाइम (95वें मिनट) में उन्होंने दूसरा गोल दागकर अर्जेंटीना की 2-0 की जीत पक्की कर दी। इस जीत के साथ मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना ने राउंड ऑफ-32 में भी जगह बना ली। पिछले मैच में हैट्रिक लगाई थी 38 साल के मेसी ने पिछले मैच में अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाई थी। मौजूदा टूर्नामेंट में उनके सबसे ज्यादा 5 गोल हो गए हैं। मेसी के बाद 3 गोल के साथ जर्मनी के डेनिज उंडाव हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें फुटबॉल का महानतम खिलाड़ियों में क्यों गिना जाता है। 2026 FIFA World Cup के अपने पहले मुकाबले में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराया, जिसमें मेसी ने शानदार हैट्रिक लगाकर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। 20 साल पहले 2006 में जिस टूर्नामेंट में उन्होंने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत की थी, उसी मंच पर उन्होंने एक और यादगार उपलब्धि हासिल की। वर्ल्ड कप में गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी यह मुकाबला मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मैच भी था। हैट्रिक की बदौलत उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने कुल गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर Miroslav Klose के सर्वाधिक 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इसके साथ ही उन्होंने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी Kylian Mbappé के 14 गोलों के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया। एम्बाप्पे ने इससे पहले सेनेगल के खिलाफ दो गोल दागे थे, लेकिन मेसी की हैट्रिक ने उन्हें फिर शीर्ष पर पहुंचा दिया। सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप मैच खेलने वाले खिलाड़ी मेसी ने इस मैच के साथ वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने का अपना रिकॉर्ड भी मजबूत किया। अब उनके नाम 27 विश्व कप मैच हो गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर जर्मनी के Lothar Matthäus हैं, जिन्होंने 25 मैच खेले थे। वहीं अर्जेंटीना के लिए मेसी के अंतरराष्ट्रीय गोलों की संख्या 120 तक पहुंच गई है। खास बात यह रही कि लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में यह उनकी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक है। अब ऑस्ट्रिया से होगी टक्कर ग्रुप चरण में शानदार जीत के बाद अर्जेंटीना का अगला मुकाबला 22 जून को ऑस्ट्रिया से खेला जाएगा। इसके बाद 27 जून को टीम ग्रुप चरण के अपने अंतिम मैच में जॉर्डन का सामना करेगी। मेसी की शानदार फॉर्म को देखते हुए अर्जेंटीना की टीम खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल मानी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।