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FIFA World Cup 2026: मेसी का मैजिक बरकरार, हैट्रिक के साथ वर्ल्ड कप में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

abhishek singh जून 19, 2026 0
Lionel Messi
Lionel Messi

नई दिल्ली, एजेंसियां। लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें फुटबॉल का महानतम खिलाड़ियों में क्यों गिना जाता है। 2026 FIFA World Cup के अपने पहले मुकाबले में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराया, जिसमें मेसी ने शानदार हैट्रिक लगाकर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। 20 साल पहले 2006 में जिस टूर्नामेंट में उन्होंने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत की थी, उसी मंच पर उन्होंने एक और यादगार उपलब्धि हासिल की।

 

वर्ल्ड कप में गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी


यह मुकाबला मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मैच भी था। हैट्रिक की बदौलत उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने कुल गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर Miroslav Klose के सर्वाधिक 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इसके साथ ही उन्होंने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी Kylian Mbappé के 14 गोलों के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया। एम्बाप्पे ने इससे पहले सेनेगल के खिलाफ दो गोल दागे थे, लेकिन मेसी की हैट्रिक ने उन्हें फिर शीर्ष पर पहुंचा दिया।

 

सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप मैच खेलने वाले खिलाड़ी

 

मेसी ने इस मैच के साथ वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने का अपना रिकॉर्ड भी मजबूत किया। अब उनके नाम 27 विश्व कप मैच हो गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर जर्मनी के Lothar Matthäus हैं, जिन्होंने 25 मैच खेले थे। वहीं अर्जेंटीना के लिए मेसी के अंतरराष्ट्रीय गोलों की संख्या 120 तक पहुंच गई है। खास बात यह रही कि लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में यह उनकी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक है।

 

अब ऑस्ट्रिया से होगी टक्कर


ग्रुप चरण में शानदार जीत के बाद अर्जेंटीना का अगला मुकाबला 22 जून को ऑस्ट्रिया से खेला जाएगा। इसके बाद 27 जून को टीम ग्रुप चरण के अपने अंतिम मैच में जॉर्डन का सामना करेगी। मेसी की शानदार फॉर्म को देखते हुए अर्जेंटीना की टीम खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल मानी जा रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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FIFA World Cup 2026: मेक्सिको ने सबसे पहले कटाया नॉकआउट का टिकट, कनाडा की ऐतिहासिक जीत, जानिए 19 जून के सभी मैचों के नतीजे

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज मुकाबले अब और रोमांचक होते जा रहे हैं। टूर्नामेंट के आठवें दिन कई शानदार मुकाबले देखने को मिले, जहां मेक्सिको ने दक्षिण कोरिया को हराकर नॉकआउट राउंड में पहुंचने वाली पहली टीम बनने का गौरव हासिल किया। वहीं सह-मेजबान कनाडा ने वर्ल्ड कप इतिहास की अपनी पहली जीत दर्ज करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी। मेक्सिको ने बनाई नॉकआउट में जगह घरेलू मैदान पर खेल रही मेक्सिको की टीम ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। मैच का एकमात्र गोल 50वें मिनट में लुइस रोमो ने किया। मैच के अंतिम क्षणों में गोलकीपर राउल रंगेल ने शानदार डबल सेव कर दक्षिण कोरिया की बराबरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस जीत के साथ मेक्सिको ग्रुप-ए में 6 अंकों के साथ शीर्ष पर पहुंच गया और राउंड ऑफ 32 में प्रवेश करने वाली पहली टीम बन गया। कनाडा ने कतर को 6-0 से रौंदा सह-मेजबान कनाडा ने अपने घरेलू दर्शकों के सामने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। वैंकूवर में खेले गए मुकाबले में कनाडा ने कतर को 6-0 से हराया। इस मैच के स्टार रहे जोनाथन डेविड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। इसके अलावा साइल लारिन और नाथन सलीबा ने भी गोल दागे, जबकि एक गोल कतर के खिलाड़ी के आत्मघाती गोल की वजह से मिला। यह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में कनाडा की पहली जीत रही। स्विट्जरलैंड की शानदार जीत ग्रुप-बी के मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराया। जोहान मंजाम्बी ने दो गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान ग्रेनिट झाका ने भी एक गोल किया। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने अगले दौर में पहुंचने की अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक का मुकाबला ड्रॉ ग्रुप-ए के एक अन्य मुकाबले में साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक के बीच मैच 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुआ। चेक रिपब्लिक के लिए मिखाल कैडिलैक ने छठे मिनट में गोल किया। साउथ अफ्रीका की ओर से टेबोहो मोकोएना ने 83वें मिनट में पेनल्टी के जरिए बराबरी दिलाई। दोनों टीमों के अब दो मैचों में एक-एक अंक हो गए हैं। 19 जून 2026 के मैच परिणाम मुकाबला परिणाम मेक्सिको vs दक्षिण कोरिया मेक्सिको 1-0 से विजयी कनाडा vs कतर कनाडा 6-0 से विजयी स्विट्जरलैंड vs बोस्निया-हर्जेगोविना स्विट्जरलैंड 4-1 से विजयी साउथ अफ्रीका vs चेक रिपब्लिक मैच 1-1 से ड्रॉ ग्रुप-ए की स्थिति मेक्सिको – 6 अंक दक्षिण कोरिया – 3 अंक चेक रिपब्लिक – 1 अंक साउथ अफ्रीका – 1 अंक मेक्सिको अब आधिकारिक रूप से राउंड ऑफ 32 में पहुंच चुका है।  

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21 जून से शुरू होगा तेलंगाना का टी20 टूर्नामेंट, अंबाती रायडू की मौजूदगी में TG20 लीग ट्रॉफी का अनावरण

हैदराबाद, एजेंसियां।  तेलंगाना की बहुप्रतीक्षित TG20 लीग के आगाज से पहले बुधवार को हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) ने भव्य समारोह में टूर्नामेंट की ट्रॉफी का अनावरण किया। इस मौके पर भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर अंबाती रायडू, HCA सचिव जीवन रेड्डी, TG20 गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन अगम राव, श्रीनिधि यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि और सभी आठ टीमों के कप्तान मौजूद रहे।   21 जून से शुरू होगी लीग TG20 लीग का आयोजन 21 जून से 12 जुलाई तक किया जाएगा। टूर्नामेंट के सभी मुकाबले हैदराबाद के उप्पल स्टेडियम में खेले जाएंगे। हर दिन दो मैच होंगे, जिनमें पहला मुकाबला दोपहर 2:15 बजे और दूसरा शाम 7:15 बजे शुरू होगा। लीग का उद्घाटन मैच 21 जून को पालमुरु स्ट्राइकर्स और खम्मम एसेस के बीच खेला जाएगा, जबकि फाइनल 12 जुलाई को होगा।   विजेता को मिलेगा 1 करोड़ रुपये टूर्नामेंट के पुरस्कारों की भी घोषणा की गई है। चैंपियन बनने वाली टीम को 1 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। उपविजेता टीम को 50 लाख रुपये, जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को 25-25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी।   आठ टीमें लेंगी हिस्सा TG20 लीग में कुल आठ टीमें भाग लेंगी। सभी मुकाबले राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेले जाएंगे, जिसमें हर टीम अन्य सात टीमों से एक-एक मैच खेलेगी। लीग चरण के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में पहुंचेंगी। 9 जुलाई को एलिमिनेटर और क्वालीफायर-1, 10 जुलाई को क्वालीफायर-2 खेला जाएगा, जबकि 12 जुलाई को खिताबी मुकाबला होगा।   विजय देवरकोंडा बने ब्रांड एंबेसडर टूर्नामेंट के लिए तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है, जबकि श्रीनिधि यूनिवर्सिटी टाइटल स्पॉन्सर है। आयोजकों का मानना है कि यह लीग तेलंगाना के युवा क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच प्रदान करेगी और राज्य में क्रिकेट को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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Vaibhav Suryavanshi during India A vs Sri Lanka A match amid post-match controversy in Dambulla.
वैभव सूर्यवंशी का गुस्सा पड़ा भारी! श्रीलंकाई खिलाड़ियों से विवाद के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई

डंबुला: भारत ए के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ट्राई-नेशन सीरीज के दौरान हुई एक विवादित घटना के कारण मुश्किलों में घिर गए हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ रोमांचक मुकाबले के बाद मैदान पर हुई तीखी बहस अब उनके लिए महंगी साबित हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है। मैच रेफरी ने की कार्रवाई की सिफारिश 'स्पोर्टस्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबले के बाद मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने भारत ए के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंका ए के खिलाड़ी विशन हलंबागे पर 50-50 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाने की सिफारिश की है। इसके अलावा भारत ए के कप्तान तिलक वर्मा पर 30 प्रतिशत और श्रीलंका ए के अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला पर 20 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। मैच खत्म होने के बाद बढ़ा विवाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि मुकाबला समाप्त होने के बाद वैभव सूर्यवंशी और विशन हलंबागे के बीच तीखी बहस हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, बहस इतनी बढ़ गई कि वैभव ने हलंबागे को धक्का भी दिया। मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच पूरे मैच के दौरान तनाव का माहौल बना हुआ था, जो मुकाबला खत्म होने के बाद खुलकर सामने आया। आईपीएल प्रदर्शन को लेकर हुई कथित स्लेजिंग रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टूर्नामेंट की शुरुआत से ही श्रीलंका ए के कुछ खिलाड़ी भारतीय खिलाड़ियों को लगातार स्लेज कर रहे थे। वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल प्रदर्शन को लेकर भी कथित तौर पर टिप्पणियां की गईं, जिससे दोनों टीमों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। अब BCCI और श्रीलंका क्रिकेट के फैसले का इंतजार ए-टीम स्तर के मुकाबलों में अनुशासनात्मक मामलों में ICC सीधे हस्तक्षेप नहीं करता। मैच रेफरी अपनी रिपोर्ट संबंधित क्रिकेट बोर्डों को भेजते हैं। इस मामले में भी सिफारिशें BCCI और श्रीलंका क्रिकेट को भेज दी गई हैं। अब अंतिम फैसला दोनों बोर्डों को लेना है कि प्रस्तावित जुर्माने को मंजूरी दी जाए या नहीं। सुपर ओवर में भारत ए को मिली हार भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेला गया मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और इसका फैसला सुपर ओवर में हुआ। भारत को जीत के लिए 17 रन की जरूरत थी, लेकिन टीम केवल 9 रन ही बना सकी और मुकाबला हार गई। सुपर ओवर में वैभव सूर्यवंशी आखिरी तीन गेंदों पर केवल छह रन ही बना पाए। मैच के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ी जीत का जश्न मना रहे थे, जबकि भारतीय खिलाड़ी पवेलियन लौट रहे थे। इसी दौरान विवाद ने तूल पकड़ लिया। अब सभी की निगाहें BCCI और श्रीलंका क्रिकेट के फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि सिफारिशों को मंजूरी मिलती है तो युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अपने करियर की शुरुआत में ही अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।  

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