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Who is Auqib Nabi? India Test Team’s New Pacer

Who is Auqib Nabi: दोस्तों से उधार लेकर खरीदे जूते, पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर; अब बुमराह की जगह टेस्ट टीम में मिला मौका

surbhi अगस्त 3, 2026 0
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Auqib Nabi India Test Team Call-Up

Who is Auqib Nabi: जम्मू-कश्मीर के बारामूला की वादियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचने की आकिब नबी की कहानी संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। कभी क्रिकेट खेलने के लिए दोस्तों से जूते उधार लेने वाले आकिब नबी अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने की दहलीज पर हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम में शामिल किए जाने की खबर है, जहां वह जसप्रीत बुमराह की जगह ले सकते हैं।

पिता चाहते थे बेटा बने डॉक्टर

आकिब नबी का जन्म जम्मू-कश्मीर के बारामूला में हुआ। उनके पिता गुलाम नबी डार पेशे से शिक्षक हैं। पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे और आगे चलकर डॉक्टर बने, लेकिन आकिब का दिल क्रिकेट में था।

क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही इतना गहरा था कि पढ़ाई के लिए कमरे में बंद किए जाने के बावजूद वह खिड़की से बाहर निकलकर खेलने चले जाते थे।

हालांकि क्रिकेट का सपना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उनके परिवार के पास महंगे क्रिकेट उपकरण और स्पाइक्स खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। कई बार उन्हें दोस्तों से जूते उधार लेकर मैदान पर उतरना पड़ा।

समय के साथ उनके पिता ने भी बेटे के जुनून को समझा और उनका साथ देना शुरू किया। इसके बाद आकिब ने मेहनत जारी रखी और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाते चले गए।

2020 में शुरू हुआ फर्स्ट क्लास करियर

आकिब नबी ने 2020 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का ऐसा प्रभाव छोड़ा कि चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया।

पिछले रणजी सीजन में जम्मू-कश्मीर को पहली बार चैंपियन बनाने में आकिब की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने सात बार पांच विकेट लेने का कारनामा भी किया।

इससे पिछले रणजी सीजन में भी आकिब का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था। उन्होंने 8 मैचों में 44 विकेट चटकाए थे।

लगातार दो सीजन के इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के राष्ट्रीय स्तर के दरवाजे तक पहुंचा दिया।

फर्स्ट क्लास में 162 विकेट

आकिब नबी के घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उनकी गेंदबाजी की निरंतरता साफ दिखाई देती है।

अब तक 43 फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 162 विकेट हैं। वहीं लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 36 पारियों में 56 विकेट हासिल किए हैं।

टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है। टी20 की 24 पारियों में उनके नाम 43 विकेट दर्ज हैं।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि आकिब सिर्फ लंबे फॉर्मेट के गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग फॉर्मेट में भी प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

आईपीएल में भी मिला बड़ा मौका

आकिब नबी के करियर में इंडियन प्रीमियर लीग का अनुभव भी जुड़ चुका है। पिछले साल हुए आईपीएल ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये की बड़ी कीमत पर अपने साथ जोड़ा था।

हालांकि आईपीएल के अपने पहले सीजन में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्हें पूरे सीजन में सिर्फ 5 मुकाबले खेलने का मौका मिला और उन्होंने कुल 13 ओवर गेंदबाजी की।

इस दौरान वह एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। हालांकि आईपीएल का अनुभव उनके लिए बड़े स्तर पर खेलने और दबाव से निपटने की सीख साबित हो सकता है।

अब टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती

घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने के बाद आकिब नबी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की होगी।

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अगर उन्हें जसप्रीत बुमराह की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है, तो यह जम्मू-कश्मीर के इस तेज गेंदबाज के लिए करियर का सबसे बड़ा पड़ाव होगा।

जिस खिलाड़ी ने कभी क्रिकेट के जूते खरीदने के लिए दोस्तों से मदद ली थी, उसके लिए भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

आकिब नबी की कहानी यह भी बताती है कि प्रतिभा को सही मौके तक पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन लगातार मेहनत और प्रदर्शन रास्ते खोल सकते हैं। अब क्रिकेट फैंस की नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकिब अपने घरेलू क्रिकेट के शानदार रिकॉर्ड को कितना दोहरा पाते हैं।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IND vs SL: बुमराह की जगह टीम इंडिया में शामिल हुए आकिब नबी, रणजी में 10 मैचों में 60 विकेट लेकर मचाया था धमाल

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। 28 वर्षीय आकिब के लिए यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव है। बुमराह की अनुपस्थिति भारतीय टीम के लिए निश्चित तौर पर चुनौती है, लेकिन आकिब नबी का चयन घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले एक तेज गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि भी है। रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में जगह आकिब नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सीजन में अपनी गेंदबाजी से खास पहचान बनाई है। उन्होंने इन दो सीजन में कुल 104 विकेट हासिल किए। 2025-26 रणजी सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट झटके। आकिब के इस शानदार प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया ए टीम में भी आकिब को मौका मिला था। वहां उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मुकाबलों में छह विकेट हासिल किए। अब उन्हें सीनियर टीम की टेस्ट जर्सी पहनने का मौका मिला है। बुमराह की चोट से भारत को बड़ा झटका जसप्रीत बुमराह का बाहर होना भारतीय टीम के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। बाएं घुटने की चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण वह श्रीलंका के खिलाफ पूरी टेस्ट सीरीज नहीं खेल पाएंगे। बुमराह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं। ऐसे में उनकी जगह आकिब नबी को शामिल करना युवा और घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। भारत के लिए श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज इसलिए भी अहम है क्योंकि टीम की नजर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के महत्वपूर्ण अंकों पर होगी। ऐसे में बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पर अतिरिक्त दबाव रह सकता है। आकिब नबी के लिए संघर्ष से टीम इंडिया तक का सफर आकिब नबी का टीम इंडिया तक पहुंचना सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला से आने वाले आकिब ने सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट के अपने जुनून को जिंदा रखा। उनके पिता गुलाम नबी डार शिक्षक हैं और चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। लेकिन आकिब का सपना क्रिकेटर बनने का था। शुरुआती दौर में क्रिकेट का सामान और स्पाइक्स खरीदना भी आसान नहीं था। उन्हें दोस्तों से जूते तक उधार लेने पड़े। हालांकि, समय के साथ परिवार का समर्थन मिला और आकिब ने घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत की। अब वही खिलाड़ी भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बन चुका है। अपडेटेड भारतीय टेस्ट स्क्वाड श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शुभमन गिल कप्तान और केएल राहुल उप-कप्तान हैं। टीम में यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर ब्रार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन और आकिब नबी शामिल हैं। अब आकिब के सामने बड़ी चुनौती आकिब नबी ने घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित कर दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट का स्तर अलग होता है। अब उनके सामने दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों के खिलाफ खुद को साबित करने की चुनौती होगी। बुमराह की जगह टीम में शामिल होना आकिब के लिए दबाव भी है और सुनहरा अवसर भी। अगर वह श्रीलंका के खिलाफ अपने प्रदर्शन से प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं, तो यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत शुरुआत हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के घरेलू क्रिकेट से भारतीय टेस्ट टीम तक आकिब नबी का सफर उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मंच का सपना देखते हैं।  

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बेंगलुरु, एजेंसियां। आगामी दलीप ट्रॉफी 2026-27 के लिए सेंट्रल जोन की टीम का ऐलान कर दिया गया है। रजत पाटीदार को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह को उपकप्तान बनाया गया है। सेंट्रल जोन पिछले सत्र का चैंपियन है और इस बार खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा।   23 अगस्त से शुरू होगी दलीप ट्रॉफी   दलीप ट्रॉफी 2026-27 का आयोजन 23 अगस्त से 10 सितंबर तक बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में किया जाएगा। मौजूदा चैंपियन होने के कारण सेंट्रल जोन को सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश मिला है। टीम अपना पहला मुकाबला 30 अगस्त से खेलेगी।   रजत पाटीदार को फिर मिली कप्तानी   रजत पाटीदार ने पिछले सत्र में भी सेंट्रल जोन की कप्तानी की थी और टीम को दलीप ट्रॉफी का खिताब दिलाया था। पिछले संस्करण में वह 382 रन बनाकर टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे। अब टीम को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।   रिंकू सिंह को मिली अहम जिम्मेदारी   भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह को टीम का उपकप्तान बनाया गया है। वह पिछले सत्र में सेंट्रल जोन की टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन इस बार उन्हें नेतृत्व समूह में शामिल किया गया है। टीम में रिंकू के अलावा हर्ष दुबे और यश ठाकुर जैसे भारतीय खिलाड़ी भी शामिल हैं।   सेंट्रल जोन की नजर खिताब बचाने पर   सेंट्रल जोन ने पिछले सत्र के फाइनल में साउथ जोन को हराकर दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता था। इस बार भी टीम मजबूत खिलाड़ियों के साथ उतरेगी। पाटीदार की कप्तानी और रिंकू सिंह की मौजूदगी से टीम की बल्लेबाजी और नेतृत्व दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
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भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास मैच तीन दिन का हुआ, 7 अगस्त से कोलंबो में मुकाबला

CWG 2026 Medal Tally

भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा, कुल 39 पदक हुए

Preeti Pawar Gold Medal

प्रीति पवार ने बॉक्सिंग में स्वर्ण जीतकर भारत के गोल्ड अभियान को दी शानदार शुरुआत

Commonwealth Games 2026 Medals
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का धमाका, एक दिन में जीते 16 पदक; पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा भारत

ग्लासगो, एजेंसियां। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शनिवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक अपने नाम किए। इनमें 7 स्वर्ण, 4 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल रहे। इस शानदार प्रदर्शन के बाद भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।    बॉक्सिंग में भारत का सबसे शानदार प्रदर्शन   शनिवार भारत के लिए खास तौर पर बॉक्सिंग में ऐतिहासिक रहा। भारतीय मुक्केबाजों ने अलग-अलग भार वर्गों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्वर्ण पदक जीते। इस प्रदर्शन ने भारत की कुल पदक संख्या को तेजी से बढ़ाया और टीम को पदक तालिका में ऊपर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन से देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का अभियान बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।    गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में रचा इतिहास   एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। इसके अलावा भारतीय एथलीटों ने ट्रिपल जंप और डेकाथलॉन में भी शानदार प्रदर्शन किया। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक हासिल किया, जबकि प्रवीण चित्रवेल और सेल्वा प्रभु ने ट्रिपल जंप में भारत की पदक संख्या बढ़ाई।    भारत की पदक संख्या 39 पहुंची   शनिवार के 16 पदकों के साथ भारत की कुल पदक संख्या 39 हो गई। इसमें 11 स्वर्ण, 14 रजत और 14 कांस्य पदक शामिल हैं। भारत पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बाद चौथे स्थान पर रहा। भारतीय दल के लिए बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और जूडो में प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में स्थिति और मजबूत हुई है।   आज अंतिम दिन, और पदकों की उम्मीद   कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आज अंतिम दिन है। भारत की नजर जूडो और साइकिलिंग समेत कुछ अन्य स्पर्धाओं में पदक जीतने पर रहेगी। भारतीय दल की कोशिश होगी कि प्रतियोगिता के आखिरी दिन भी पदक जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया जाए।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
Khelo India

केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला, खेलों को बढ़ावा देने के लिए ₹36,441 करोड़ की विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना को मंजूरी

Commonwealth Games 2026

अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में जीता गोल्ड, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने रचा ऐतिहासिक दोहरा स्वर्ण

Commonwealth Games 2026

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