कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका क्रिकेट XI के बीच तीन दिवसीय अभ्यास मैच के दूसरे दिन श्रीलंका XI ने 90 ओवर में 8 विकेट पर 363 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी शुरू कर दी है। ताजा स्कोर के अनुसार भारत 2.4 ओवर में 8 रन पर एक विकेट गंवा चुका है। जायसवाल जल्दी आउट, पडिक्कल ने संभाली पारी भारत की पारी की शुरुआत यशस्वी जायसवाल और के एल राहुल ने की। हालांकि जायसवाल पारी की शुरुआत में ही बिना खाता खोले आउट हो गए। उन्हें लाहिरू कुमारा ने 0.2 ओवर में आउट किया। इसके बाद बल्लेबाजी करने देवदत्त पडिक्कल आयें और 8 रन बनाकर नाबाद हैं। उनके साथ केएल राहुल बल्लेबाजी कर रहे हैं। श्रीलंका XI ने 363 रन पर घोषित की पारी इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट XI ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 ओवर में 363/8 का स्कोर बनाया और पारी घोषित कर दी। टीम की ओर से कई बल्लेबाजों ने उपयोगी पारियां खेलीं और भारतीय गेंदबाजों को काफी मेहनत करनी पड़ी। भारत की ओर से रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार ने दो-दो विकेट लिए। इन स्पिनरों ने अंतिम सत्र में भारत को वापसी दिलाई। शुभमन गिल की फिटनेस पर भी नजर भारतीय कप्तान शुभमन गिल उंगली में चोट के कारण अभ्यास मैच में नहीं खेल रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल टीम की कप्तानी कर रहे हैं। गिल की चोट पर भारतीय टीम की मेडिकल टीम नजर रख रही है।
कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच तीन दिवसीय अभ्यास मैच का दूसरा दिन शनिवार को खेला जा रहा है। कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मुकाबले में भारतीय टीम की नजर अभ्यास के साथ-साथ कप्तान शुभमन गिल की फिटनेस पर भी है। गिल दाहिनी हाथ की अनामिका में चोट के कारण पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे थे। उनकी स्थिति पर BCCI की मेडिकल टीम नजर रख रही है। पहले दिन श्रीलंका XI ने बनाए 363 रन श्रीलंका क्रिकेट XI ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और पहले दिन 90 ओवर में 363/8 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। श्रीलंकाई टीम की ओर से निशान फर्नांडो और रविंदु रसनथा ने अर्धशतक लगाए, जबकि सोनल दिनूषा ने भी पचासा जड़ा। भारत की ओर से स्पिनरों ने आखिरी सत्र में वापसी कराई। रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार ने दो-दो विकेट लिए, जबकि गुरनूर बराड़ को एक सफलता मिली। शुभमन गिल की चोट पर बनी नजर भारतीय टेस्ट टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल को गुरुवार के अभ्यास सत्र के दौरान दाहिनी अनामिका में चोट लगी थी। इसी वजह से वह अभ्यास मैच के पहले दिन नहीं खेले। गिल की गैरमौजूदगी में केएल राहुल ने टॉस के समय भारतीय टीम की कप्तानी संभाली। फिलहाल गिल की दूसरे दिन वापसी को लेकर आधिकारिक रूप से कोई अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में उनकी फिटनेस पर भारतीय टीम प्रबंधन और प्रशंसकों की नजर बनी हुई है। टेस्ट सीरीज से पहले अहम अभ्यास यह अभ्यास मैच भारत की आगामी दो टेस्ट मैचों की श्रीलंका सीरीज की तैयारी का अहम हिस्सा है। भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होना है। अभ्यास मैच में भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों को श्रीलंकाई परिस्थितियों में खुद को ढालने का मौका मिल रहा है। खास तौर पर स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजी और श्रीलंका की पिचों पर गेंदबाजी भारतीय टीम की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल दाईं हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगने के कारण श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच के पहले दिन नहीं खेल पाए। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आधिकारिक मेडिकल अपडेट जारी कर इसकी पुष्टि की है। अभ्यास सत्र में लगी चोट बीसीसीआई के अनुसार, गुरुवार को कोलंबो में आयोजित अभ्यास सत्र के दौरान शुभमन गिल की दाईं रिंग फिंगर में चोट लगी। इसके बाद मेडिकल टीम ने उनका परीक्षण किया और एहतियात के तौर पर उन्हें वॉर्म-अप मैच के पहले दिन आराम देने का फैसला लिया गया। बोर्ड ने बताया कि मेडिकल स्टाफ लगातार उनकी फिटनेस और रिकवरी पर नजर बनाए हुए है। वॉर्म-अप मैच में KL राहुल बने कप्तान शुभमन गिल की अनुपस्थिति में अनुभवी बल्लेबाज केएल राहुल को अभ्यास मैच के लिए भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई है। राहुल इस मुकाबले में टीम की रणनीति और मैदान पर नेतृत्व की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह वॉर्म-अप मैच खिलाड़ियों को श्रीलंका की स्पिन-अनुकूल परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से खेला जा रहा है। टेस्ट सीरीज से पहले बढ़ी चिंता हालांकि बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि गिल को आराम देना केवल एहतियाती कदम है, लेकिन टेस्ट सीरीज से ठीक पहले कप्तान का चोटिल होना टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारतीय टीम मैनेजमेंट उम्मीद कर रहा है कि गिल जल्द पूरी तरह फिट होकर 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में उपलब्ध रहेंगे। शानदार फॉर्म में चल रहे हैं शुभमन गिल शुभमन गिल इस समय अपने करियर की बेहतरीन टेस्ट फॉर्म में हैं। पिछले 10 टेस्ट मैचों में उन्होंने 1109 रन बनाए हैं, जिसमें 6 शानदार शतक शामिल हैं। ऐसे में उनका फिट रहना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गॉल में खेला जाने वाला पहला मुकाबला श्रीलंका के टेस्ट इतिहास का 600वां टेस्ट मैच भी होगा, जिससे इस सीरीज का महत्व और बढ़ गया है। अब सभी की नजर बीसीसीआई की अगली मेडिकल अपडेट पर रहेगी। यदि गिल समय पर फिट हो जाते हैं तो टीम इंडिया को बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन अगर चोट गंभीर साबित होती है तो सीरीज से पहले चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
कोलंबो, एजेंसियां। श्रीलंका के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच शुरू होने से ठीक पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। कप्तान शुभमन गिल की दाहिनी हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी है, जिसके कारण वह 7 अगस्त को टॉस के दौरान मैदान पर नहीं उतरे। उनकी जगह केएल राहुल भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं। अभ्यास के दौरान लगी चोट शुभमन गिल को गुरुवार के अभ्यास सत्र के दौरान दाहिनी रिंग फिंगर में चोट लगी। रिपोर्टों के अनुसार, अभ्यास के दौरान उंगली पर गेंद लगने से उन्हें चोट आई। इसके बाद टीम प्रबंधन ने उन्हें एहतियात के तौर पर वॉर्म-अप मैच के पहले दिन आराम देने का फैसला किया। फिलहाल चोट की गंभीरता को लेकर किसी बड़ी आशंका की पुष्टि नहीं हुई है। गिल की स्थिति पर टीम प्रबंधन की नजर बनी हुई है। केएल राहुल ने संभाली टीम की कमान गिल के मैदान से बाहर रहने के कारण विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। श्रीलंका XI के खिलाफ यह मुकाबला कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में खेला जा रहा है। यह मैच भारतीय टीम के लिए 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को मैच अभ्यास देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। टेस्ट सीरीज से पहले बढ़ी चिंता भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से शुरू होनी है। ऐसे में गिल की उंगली की चोट पर टीम प्रबंधन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। कप्तान के रूप में गिल की भूमिका टेस्ट सीरीज में महत्वपूर्ण रहने वाली है। भारतीय टीम फिलहाल उनकी चोट की स्थिति पर नजर रख रही है। वॉर्म-अप मैच के पहले दिन उनका बाहर रहना एहतियाती कदम माना जा रहा है, लेकिन टेस्ट सीरीज से पहले उनकी फिटनेस पर आगे के अपडेट का इंतजार रहेगा।
कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच आगामी टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया आज, 7 अगस्त से श्रीलंका XI के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मैच में उतरेगी। मुकाबला कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड में खेला जाएगा। यह अभ्यास मैच भारतीय खिलाड़ियों के लिए श्रीलंकाई परिस्थितियों में ढलने और टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को परखने का अहम मौका है। टेस्ट सीरीज से पहले अहम तैयारी भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से शुरू होगी। ऐसे में अभ्यास मैच में भारतीय टीम के बल्लेबाजों और गेंदबाजों को श्रीलंका की परिस्थितियों में मैच अभ्यास हासिल करने का मौका मिलेगा। खासकर स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ बल्लेबाजों की तैयारी पर टीम प्रबंधन की नजर रहेगी। टीम के मेंटर गौतम गंभीर ने खिलाड़ियों से आगामी सीरीज के लिए पूरी तरह तैयार रहने और उपलब्ध अभ्यास समय का अधिकतम इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। बारिश डाल सकती है खलल अभ्यास मैच शुरू होने से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। कोलंबो में बारिश का पूर्वानुमान है और तीनों दिनों में बारिश के कारण मुकाबला प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। अगर खेल का समय कम होता है तो भारतीय टीम की तैयारी प्रभावित हो सकती है। गेंदबाजों के लिए परिस्थितियों को समझने का मौका श्रीलंका की परिस्थितियों में गेंदबाजों के लिए स्थानीय पिच और मौसम को समझना महत्वपूर्ण होगा। अभ्यास मैच भारतीय गेंदबाजों को यहां की परिस्थितियों के अनुसार अपनी लाइन-लेंथ और रणनीति को परखने का अवसर देगा। वहीं बल्लेबाजों के लिए श्रीलंकाई स्पिनरों का सामना करना टेस्ट सीरीज से पहले बड़ी परीक्षा होगी। टीम प्रबंधन इस मुकाबले में खिलाड़ियों के प्रदर्शन और परिस्थितियों के अनुकूलन पर विशेष नजर रख सकता है। 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अभ्यास मैच के बाद भारतीय टीम का मुख्य लक्ष्य टेस्ट सीरीज होगा। पहला टेस्ट 15 अगस्त से शुरू होना है। दोनों मुकाबले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में भारत के लिए यह अभ्यास मैच केवल औपचारिक मुकाबला नहीं, बल्कि टेस्ट सीरीज की रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोलंबो, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका XI के बीच तीन दिवसीय वॉर्म-अप मुकाबले का टॉस हो गया है। श्रीलंका XI ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। वहीं भारतीय टीम की कमान नियमित कप्तान शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में उपकप्तान केएल राहुल संभाल रहे हैं। चोट के कारण पहले दिन नहीं खेलेंगे गिल भारतीय कप्तान शुभमन गिल को अभ्यास के दौरान दाहिनी हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी थी। BCCI के मुताबिक एहतियात के तौर पर उन्हें वॉर्म-अप मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतारा गया है। मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर नजर रख रही है। टेस्ट सीरीज से पहले अहम मुकाबला यह तीन दिवसीय अभ्यास मैच 7 से 9 अगस्त तक कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर खेला जा रहा है। भारत के लिए यह मुकाबला 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले श्रीलंकाई परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है।
नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा को लेकर पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने बड़ा बयान दिया है। पुजारा का मानना है कि जडेजा की गेंदबाजी में सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं आया है, बल्कि उनकी सोच भी पहले से ज्यादा आक्रामक हो गई है। पुजारा के मुताबिक, जडेजा अब टेस्ट क्रिकेट में केवल रन रोकने या पिच से मदद मिलने का इंतजार करने वाले गेंदबाज नहीं रहे। उनकी कोशिश अब हर गेंद पर बल्लेबाज को आउट करने की होती है। यही बदलाव उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में पहले से ज्यादा खतरनाक बनाता है। जडेजा के टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो उन्होंने 89 टेस्ट मैचों में 25.12 की औसत से 348 विकेट अपने नाम किए हैं। गेंद के साथ उनकी उपयोगिता के अलावा बल्लेबाजी और फील्डिंग में योगदान भी उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में शामिल करता है। डिफेंसिव से अटैकिंग माइंडसेट तक पहुंची सोच चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, जडेजा के करियर के शुरुआती दौर में उनकी गेंदबाजी का मुख्य उद्देश्य रन रोकना हुआ करता था। खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में वह परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी करते थे और पिच से मदद मिलने पर विकेट लेने की कोशिश करते थे। लेकिन अब उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया है। पुजारा के मुताबिक जडेजा हर गेंद को विकेट लेने के अवसर के रूप में देखते हैं और बल्लेबाज को स्टंप्स की लाइन में फंसाने की कोशिश करते हैं। यह मानसिक बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में लगातार आक्रमण बनाए रखना गेंदबाज के लिए आसान नहीं होता। जडेजा अब सिर्फ दबाव बनाने के बजाय उस दबाव को विकेट में बदलने की कोशिश करते नजर आते हैं। क्रीज और लेंथ का बेहतर इस्तेमाल बना हथियार पुजारा ने जडेजा की बदली गेंदबाजी के तकनीकी पहलू पर भी बात की। उनके अनुसार, आक्रामक सोच का असर गेंदबाजी की पूरी प्रक्रिया पर दिखाई देता है। जब गेंदबाज का उद्देश्य विकेट लेना होता है, तो वह बल्लेबाज की कमजोरियों के हिसाब से अपनी गेंदबाजी में बदलाव करने की कोशिश करता है। जडेजा भी अब क्रीज का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। वह अलग-अलग कोणों से गेंद डालने और बल्लेबाज के अनुसार लेंथ में बदलाव करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यही विविधता टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। एक ही तरह की गेंदबाजी करने के बजाय कोण, लेंथ और गेंद की दिशा में बदलाव से जडेजा लगातार बल्लेबाज पर दबाव बना सकते हैं। लंबे समय बाद श्रीलंका के खिलाफ एक्शन में जडेजा अब जडेजा की इस बदली हुई गेंदबाजी सोच की परीक्षा श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में होगी। लंबे समय के बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी करने जा रहे जडेजा से भारतीय टीम को गेंद और बल्ले दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहेगी। श्रीलंकाई परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। ऐसे में जडेजा की सटीक लाइन-लेंथ, क्रीज के इस्तेमाल की क्षमता और आक्रामक मानसिकता भारतीय टीम के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है। पुजारा की बात से बढ़ी जडेजा से उम्मीदें चेतेश्वर पुजारा का आकलन इस बात की ओर इशारा करता है कि जडेजा के खेल में अनुभव के साथ उनकी रणनीति भी विकसित हुई है। अब वह केवल बल्लेबाज को रोकने के बजाय उसे गलती करने के लिए मजबूर करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाज के लिए यही मानसिकता निर्णायक साबित हो सकती है। अगर जडेजा श्रीलंका के खिलाफ इसी आक्रामक दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो भारतीय टीम को बीच के ओवरों में विकेट हासिल करने का मजबूत विकल्प मिल सकता है। अब देखना होगा कि श्रीलंका के खिलाफ मैदान पर जडेजा की यह बदली हुई गेंदबाजी सोच कितनी प्रभावी साबित होती है।
नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। 28 वर्षीय आकिब के लिए यह उनके करियर का बड़ा पड़ाव है। बुमराह की अनुपस्थिति भारतीय टीम के लिए निश्चित तौर पर चुनौती है, लेकिन आकिब नबी का चयन घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करने वाले एक तेज गेंदबाज के लिए बड़ी उपलब्धि भी है। रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में जगह आकिब नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सीजन में अपनी गेंदबाजी से खास पहचान बनाई है। उन्होंने इन दो सीजन में कुल 104 विकेट हासिल किए। 2025-26 रणजी सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट झटके। आकिब के इस शानदार प्रदर्शन ने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया ए टीम में भी आकिब को मौका मिला था। वहां उन्होंने दो फर्स्ट क्लास मुकाबलों में छह विकेट हासिल किए। अब उन्हें सीनियर टीम की टेस्ट जर्सी पहनने का मौका मिला है। बुमराह की चोट से भारत को बड़ा झटका जसप्रीत बुमराह का बाहर होना भारतीय टीम के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। बाएं घुटने की चोट से पूरी तरह नहीं उबर पाने के कारण वह श्रीलंका के खिलाफ पूरी टेस्ट सीरीज नहीं खेल पाएंगे। बुमराह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं। ऐसे में उनकी जगह आकिब नबी को शामिल करना युवा और घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। भारत के लिए श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज इसलिए भी अहम है क्योंकि टीम की नजर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के महत्वपूर्ण अंकों पर होगी। ऐसे में बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पर अतिरिक्त दबाव रह सकता है। आकिब नबी के लिए संघर्ष से टीम इंडिया तक का सफर आकिब नबी का टीम इंडिया तक पहुंचना सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला से आने वाले आकिब ने सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट के अपने जुनून को जिंदा रखा। उनके पिता गुलाम नबी डार शिक्षक हैं और चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। लेकिन आकिब का सपना क्रिकेटर बनने का था। शुरुआती दौर में क्रिकेट का सामान और स्पाइक्स खरीदना भी आसान नहीं था। उन्हें दोस्तों से जूते तक उधार लेने पड़े। हालांकि, समय के साथ परिवार का समर्थन मिला और आकिब ने घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत की। अब वही खिलाड़ी भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बन चुका है। अपडेटेड भारतीय टेस्ट स्क्वाड श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में शुभमन गिल कप्तान और केएल राहुल उप-कप्तान हैं। टीम में यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर ब्रार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन और आकिब नबी शामिल हैं। अब आकिब के सामने बड़ी चुनौती आकिब नबी ने घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित कर दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट का स्तर अलग होता है। अब उनके सामने दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों के खिलाफ खुद को साबित करने की चुनौती होगी। बुमराह की जगह टीम में शामिल होना आकिब के लिए दबाव भी है और सुनहरा अवसर भी। अगर वह श्रीलंका के खिलाफ अपने प्रदर्शन से प्रभाव छोड़ने में सफल रहते हैं, तो यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत शुरुआत हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के घरेलू क्रिकेट से भारतीय टेस्ट टीम तक आकिब नबी का सफर उन खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मंच का सपना देखते हैं।
Who is Auqib Nabi: जम्मू-कश्मीर के बारामूला की वादियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचने की आकिब नबी की कहानी संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। कभी क्रिकेट खेलने के लिए दोस्तों से जूते उधार लेने वाले आकिब नबी अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने की दहलीज पर हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम में शामिल किए जाने की खबर है, जहां वह जसप्रीत बुमराह की जगह ले सकते हैं। पिता चाहते थे बेटा बने डॉक्टर आकिब नबी का जन्म जम्मू-कश्मीर के बारामूला में हुआ। उनके पिता गुलाम नबी डार पेशे से शिक्षक हैं। पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे और आगे चलकर डॉक्टर बने, लेकिन आकिब का दिल क्रिकेट में था। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही इतना गहरा था कि पढ़ाई के लिए कमरे में बंद किए जाने के बावजूद वह खिड़की से बाहर निकलकर खेलने चले जाते थे। हालांकि क्रिकेट का सपना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उनके परिवार के पास महंगे क्रिकेट उपकरण और स्पाइक्स खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। कई बार उन्हें दोस्तों से जूते उधार लेकर मैदान पर उतरना पड़ा। समय के साथ उनके पिता ने भी बेटे के जुनून को समझा और उनका साथ देना शुरू किया। इसके बाद आकिब ने मेहनत जारी रखी और घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाते चले गए। 2020 में शुरू हुआ फर्स्ट क्लास करियर आकिब नबी ने 2020 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का ऐसा प्रभाव छोड़ा कि चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया। पिछले रणजी सीजन में जम्मू-कश्मीर को पहली बार चैंपियन बनाने में आकिब की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने सिर्फ 10 मैचों में 60 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने सात बार पांच विकेट लेने का कारनामा भी किया। इससे पिछले रणजी सीजन में भी आकिब का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा था। उन्होंने 8 मैचों में 44 विकेट चटकाए थे। लगातार दो सीजन के इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के राष्ट्रीय स्तर के दरवाजे तक पहुंचा दिया। फर्स्ट क्लास में 162 विकेट आकिब नबी के घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उनकी गेंदबाजी की निरंतरता साफ दिखाई देती है। अब तक 43 फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 162 विकेट हैं। वहीं लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 36 पारियों में 56 विकेट हासिल किए हैं। टी20 क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है। टी20 की 24 पारियों में उनके नाम 43 विकेट दर्ज हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आकिब सिर्फ लंबे फॉर्मेट के गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग फॉर्मेट में भी प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। आईपीएल में भी मिला बड़ा मौका आकिब नबी के करियर में इंडियन प्रीमियर लीग का अनुभव भी जुड़ चुका है। पिछले साल हुए आईपीएल ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये की बड़ी कीमत पर अपने साथ जोड़ा था। हालांकि आईपीएल के अपने पहले सीजन में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्हें पूरे सीजन में सिर्फ 5 मुकाबले खेलने का मौका मिला और उन्होंने कुल 13 ओवर गेंदबाजी की। इस दौरान वह एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। हालांकि आईपीएल का अनुभव उनके लिए बड़े स्तर पर खेलने और दबाव से निपटने की सीख साबित हो सकता है। अब टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेने के बाद आकिब नबी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की होगी। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अगर उन्हें जसप्रीत बुमराह की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिलता है, तो यह जम्मू-कश्मीर के इस तेज गेंदबाज के लिए करियर का सबसे बड़ा पड़ाव होगा। जिस खिलाड़ी ने कभी क्रिकेट के जूते खरीदने के लिए दोस्तों से मदद ली थी, उसके लिए भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। आकिब नबी की कहानी यह भी बताती है कि प्रतिभा को सही मौके तक पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन लगातार मेहनत और प्रदर्शन रास्ते खोल सकते हैं। अब क्रिकेट फैंस की नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकिब अपने घरेलू क्रिकेट के शानदार रिकॉर्ड को कितना दोहरा पाते हैं।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है। टीम की कमान शुभमन गिल को सौंपी गई है, जबकि केएल राहुल को उपकप्तान बनाया गया है। इस टीम की सबसे बड़ी खबर रविंद्र जडेजा की 262 दिनों बाद टेस्ट टीम में वापसी है। वहीं, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और बल्लेबाज साई सुदर्शन का खेलना उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। 262 दिन बाद टेस्ट टीम में लौटे रविंद्र जडेजा रविंद्र जडेजा ने अपना पिछला टेस्ट मैच 26 नवंबर 2025 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम से बाहर रहे। अब श्रीलंका दौरे के लिए उनकी वापसी हुई है। यदि वह 15 अगस्त को गाले में होने वाले पहले टेस्ट में उतरते हैं, तो यह उनकी 262 दिनों बाद टेस्ट क्रिकेट में वापसी होगी। बुमराह की फिटनेस पर रहेगा अंतिम फैसला बीसीसीआई ने टीम में जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन को शामिल किया है, लेकिन दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धता फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर करेगी। इंग्लैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के दौरान बुमराह के घुटने में चोट लगी थी, जिसके कारण वह निर्णायक मुकाबले से बाहर हो गए थे। अब दोनों खिलाड़ियों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से फिटनेस प्रमाण मिलने के बाद ही अंतिम एकादश में शामिल किया जाएगा। वहीं, बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑलराउंडर वॉशिंग्टन सुंदर चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन को पहली बार मिला मौका इस टीम में युवा स्पिनर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। उनके चयन को भविष्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया शुभमन गिल (कप्तान) केएल राहुल (उपकप्तान) यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत (विकेटकीपर) साई सुदर्शन* ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर) रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार जसप्रीत बुमराह* मोहम्मद सिराज प्रसिद्ध कृष्णा गुरनूर बराड़ देवदत्त पडिक्कल सारांश जैन * चयन फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर। IND vs SL टेस्ट सीरीज का शेड्यूल पहला टेस्ट: 15–19 अगस्त 2026, गाले दूसरा टेस्ट: 23–27 अगस्त 2026, कोलंबो दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे शुरू होंगे। सीरीज पर रहेंगी सभी की नजरें शुभमन गिल की कप्तानी में यह सीरीज टीम इंडिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी, नए चेहरों को मौका और बुमराह की फिटनेस जैसे कई पहलू इस दौरे को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं।
नई दिल्ली: ट्राई नेशन सीरीज के फाइनल में 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली। महज 29 गेंदों में 94 रन की तूफानी पारी खेलकर उन्होंने भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पारी का असर सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। वायरल हुआ श्रीलंकाई फैन का मजेदार वीडियो मैच के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक श्रीलंकाई प्रशंसक कैमरे के सामने मजाकिया अंदाज में अपनी निराशा जाहिर करता दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह हिंदी में कहता है, "आ गया, झगड़ा किया, मार दिया, जला दिया।" उसके चेहरे के हाव-भाव देखकर साफ समझा जा सकता है कि वह वैभव की बल्लेबाजी से कितना प्रभावित और निराश है। दिलचस्प बात यह रही कि उस समय वैभव सूर्यवंशी डगआउट में अपने साथियों के साथ बातचीत में व्यस्त थे और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर भारतीय क्रिकेट फैंस इस वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं। वैभव की पारी ने भारत को बनाया चैंपियन फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी की 94 रन की तूफानी पारी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। उनके अलावा तिलक वर्मा ने 67 रन, रुतुराज गायकवाड़ ने 40 रन और अनुकूल रॉय ने 39 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत भारतीय टीम ने 377 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में श्रीलंका की टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी और 311 रन पर सिमट गई। भारत ने यह मुकाबला 66 रन से जीतकर ट्राई नेशन सीरीज अपने नाम कर ली। अब आयरलैंड सीरीज पर नजर वैभव सूर्यवंशी अब आगामी भारत-आयरलैंड टी20 सीरीज में नजर आ सकते हैं। 26 जून से शुरू होने वाली दो मैचों की इस सीरीज में यदि उन्हें डेब्यू का मौका मिलता है, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।