कोलंबो, एजेंसियां। श्रीलंका के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच शुरू होने से ठीक पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। कप्तान शुभमन गिल की दाहिनी हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी है, जिसके कारण वह 7 अगस्त को टॉस के दौरान मैदान पर नहीं उतरे। उनकी जगह केएल राहुल भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं।
शुभमन गिल को गुरुवार के अभ्यास सत्र के दौरान दाहिनी रिंग फिंगर में चोट लगी। रिपोर्टों के अनुसार, अभ्यास के दौरान उंगली पर गेंद लगने से उन्हें चोट आई। इसके बाद टीम प्रबंधन ने उन्हें एहतियात के तौर पर वॉर्म-अप मैच के पहले दिन आराम देने का फैसला किया। फिलहाल चोट की गंभीरता को लेकर किसी बड़ी आशंका की पुष्टि नहीं हुई है। गिल की स्थिति पर टीम प्रबंधन की नजर बनी हुई है।
गिल के मैदान से बाहर रहने के कारण विकेटकीपर-बल्लेबाज केएल राहुल को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। श्रीलंका XI के खिलाफ यह मुकाबला कोलंबो के नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब में खेला जा रहा है।
यह मैच भारतीय टीम के लिए 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को मैच अभ्यास देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से शुरू होनी है। ऐसे में गिल की उंगली की चोट पर टीम प्रबंधन किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। कप्तान के रूप में गिल की भूमिका टेस्ट सीरीज में महत्वपूर्ण रहने वाली है।
भारतीय टीम फिलहाल उनकी चोट की स्थिति पर नजर रख रही है। वॉर्म-अप मैच के पहले दिन उनका बाहर रहना एहतियाती कदम माना जा रहा है, लेकिन टेस्ट सीरीज से पहले उनकी फिटनेस पर आगे के अपडेट का इंतजार रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लंदन, एजेंसियां। पाकिस्तान के खिलाफ आगामी तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के पहले दो मुकाबलों के लिए इंग्लैंड ने अपनी 16 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। जो रूट को दोबारा टेस्ट कप्तान बनाया गया है, जबकि डैन लॉरेंस, ओली पोप, ब्रायडन कार्स और सैम कुक की टीम में वापसी हुई है। पहला टेस्ट 19 अगस्त से हेडिंग्ले में खेला जाएगा। जो रूट की फिर कप्तानी में वापसी बेन स्टोक्स के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद इंग्लैंड ने एक बार फिर अनुभवी बल्लेबाज जो रूट पर भरोसा जताया है। रूट ने इससे पहले 2017 से 2022 तक इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी की थी। अब पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज उनकी दूसरी पारी की पहली बड़ी चुनौती होगी। इंग्लैंड की टीम हाल में टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष करती रही है। ऐसे में रूट के सामने टीम को संभालने और नए दौर में बेहतर शुरुआत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। चार खिलाड़ियों की टीम में वापसी इंग्लैंड की टीम में डैन लॉरेंस, ओली पोप, ब्रायडन कार्स और सैम कुक को शामिल किया गया है। लॉरेंस करीब दो साल बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं और उन्हें मध्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका मिल सकती है। वहीं पोप और कार्स भी टीम के अनुभव को मजबूत करेंगे। जैकब बेथेल घुटने की चोट के कारण पाकिस्तान सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह जॉर्डन कॉक्स को टीम में शामिल किया गया है और उन्हें नंबर-3 पर बल्लेबाजी का मौका मिलने की संभावना है। 19 अगस्त से शुरू होगी सीरीज इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैच खेले जाएंगे। पहला टेस्ट 19 अगस्त से हेडिंग्ले, दूसरा 27 अगस्त से लॉर्ड्स और तीसरा टेस्ट भी सीरीज कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा। यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र का हिस्सा है। रूट की कप्तानी में इंग्लैंड के सामने पाकिस्तान की मजबूत टीम को घरेलू परिस्थितियों में रोकने की चुनौती होगी। स्टोक्स के बाद टीम में नेतृत्व और संयोजन में आए बदलाव के बीच यह सीरीज इंग्लैंड के नए टेस्ट दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
कोलंबो, एजेंसियां। श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टीम की तैयारियों को लेकर आत्मविश्वास जताया है। सीरीज से पहले उठ रहे सवालों और टीम संयोजन को लेकर गंभीर ने साफ संकेत दिया कि मैदान पर भारतीय टीम अपने प्रदर्शन से जवाब देने के लिए तैयार है। 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से शुरू होना है। इससे पहले भारतीय टीम श्रीलंका XI के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच खेल रही है। अभ्यास मुकाबले का उद्देश्य खिलाड़ियों को श्रीलंकाई परिस्थितियों में ढालना और टेस्ट सीरीज के लिए टीम संयोजन को अंतिम रूप देना है। गंभीर ने टीम की तैयारी पर जताया भरोसा टेस्ट सीरीज से पहले टीम के सामने बल्लेबाजी क्रम, गेंदबाजी संयोजन और परिस्थितियों के मुताबिक रणनीति जैसे कई सवाल हैं। गंभीर ने इन सवालों पर ज्यादा अटकलों के बजाय सीरीज शुरू होने का इंतजार करने का संकेत दिया। उनके बयान का संदेश साफ है कि भारतीय टीम मैदान पर अपने प्रदर्शन के जरिए सभी सवालों का जवाब देना चाहती है। शुभमन गिल की चोट पर भी नजर वॉर्म-अप मैच से पहले भारतीय कप्तान शुभमन गिल की उंगली में चोट की खबर ने टीम की चिंता बढ़ाई है। गिल अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे और उनकी जगह केएल राहुल ने कप्तानी संभाली। अब टीम प्रबंधन की नजर गिल की फिटनेस पर रहेगी, क्योंकि 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। श्रीलंका के खिलाफ होगी बड़ी परीक्षा श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। वहीं भारतीय गेंदबाजों को भी पिच और मौसम के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे में 15 अगस्त से शुरू होने वाली सीरीज गंभीर और भारतीय टीम के लिए अहम परीक्षा होगी। टीम प्रबंधन को उम्मीद होगी कि वॉर्म-अप मैच से मिली जानकारी का फायदा टेस्ट मुकाबलों में मिलेगा।
पोर्ट ऑफ स्पेन, एजेंसियां। पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को दूसरे टेस्ट मैच में 8 विकेट से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल में मिली इस जीत के साथ पाकिस्तान को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका में भी फायदा हुआ है। टीम एक पायदान ऊपर चढ़कर 8वें स्थान पर पहुंच गई है। तीन साल बाद विदेशी जमीन पर मिली टेस्ट जीत पाकिस्तान की यह जीत खास इसलिए भी है क्योंकि टीम ने करीब तीन साल बाद विदेशी धरती पर टेस्ट मैच जीता। इससे पहले पाकिस्तान को लगातार आठ विदेशी टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए सिर्फ 75 रन का लक्ष्य पाया था, जिसे उसने दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। कप्तान बाबर आजम ने लगातार दो छक्के लगाकर टीम को जीत दिलाई। अब WTC अंक तालिका में 8वें स्थान पर पाकिस्तान वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के बाद पाकिस्तान का WTC अंक प्रतिशत करीब 6.67 फीसदी हो गया है। इसके साथ टीम अंक तालिका में 8वें स्थान पर पहुंच गई, जबकि वेस्टइंडीज उससे नीचे 9वें स्थान पर आ गया है। हालांकि पाकिस्तान के लिए WTC अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण है। टीम को आने वाले मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी, तभी वह तालिका में ऊपरी स्थानों की ओर बढ़ सकेगी। अब इंग्लैंड से होगी अगली बड़ी परीक्षा वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद पाकिस्तान की अगली चुनौती इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज है। पहला टेस्ट 19 अगस्त से लीड्स में खेला जाएगा। विदेशी जमीन पर मिली इस जीत से पाकिस्तान का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा होगा, लेकिन इंग्लैंड की परिस्थितियों में टीम के सामने एक और कठिन परीक्षा होगी।