नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स के कप्तान यश धुल ने बल्ले से जमकर धमाका किया। पुरानी दिल्ली 6 के खिलाफ बारिश से प्रभावित मुकाबले में धुल ने महज 47 गेंदों पर नाबाद 100 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी में 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे।
बारिश के कारण मुकाबला घटकर सिर्फ 15 ओवर का रह गया था। ऐसे में यश धुल ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और 212.77 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। धुल ने अपनी पारी में 9 छक्के और 6 चौके लगाए। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने सेंट्रल दिल्ली किंग्स को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
यह यश धुल का दिल्ली प्रीमियर लीग में तीसरा शतक रहा। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। धुल की इस पारी ने एक बार फिर साबित किया कि वह दिल्ली के घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभाव छोड़ने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं।
यश धुल के शतक की बदौलत सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने पुरानी दिल्ली 6 के खिलाफ मुकाबले में दमदार प्रदर्शन किया। धुल की पारी ने टीम के रनरेट को तेजी से बढ़ाया और लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को आसान जीत की ओर पहुंचाया।
DPL 2026 में धुल इससे पहले भी टीम की कप्तानी करते हुए अहम योगदान दे चुके हैं। अब उनके इस तूफानी शतक ने टूर्नामेंट में उनकी बल्लेबाजी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
यश धुल ने DPL में मचाया तूफान, 47 गेंदों पर ठोका नाबाद शतक नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स के कप्तान यश धुल ने बल्ले से जमकर धमाका किया। पुरानी दिल्ली 6 के खिलाफ बारिश से प्रभावित मुकाबले में धुल ने महज 47 गेंदों पर नाबाद 100 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी में 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे। 212 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बरसे रन बारिश के कारण मुकाबला घटकर सिर्फ 15 ओवर का रह गया था। ऐसे में यश धुल ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और 212.77 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। धुल ने अपनी पारी में 9 छक्के और 6 चौके लगाए। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने सेंट्रल दिल्ली किंग्स को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। DPL में तीसरा शतक यह यश धुल का दिल्ली प्रीमियर लीग में तीसरा शतक रहा। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। धुल की इस पारी ने एक बार फिर साबित किया कि वह दिल्ली के घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभाव छोड़ने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। टीम को दिलाई शानदार जीत यश धुल के शतक की बदौलत सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने पुरानी दिल्ली 6 के खिलाफ मुकाबले में दमदार प्रदर्शन किया। धुल की पारी ने टीम के रनरेट को तेजी से बढ़ाया और लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को आसान जीत की ओर पहुंचाया। DPL 2026 में धुल इससे पहले भी टीम की कप्तानी करते हुए अहम योगदान दे चुके हैं। अब उनके इस तूफानी शतक ने टूर्नामेंट में उनकी बल्लेबाजी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
बारिश ने तोड़ा आयरलैंड का सपना, 2027 वनडे विश्व कप में सीधे क्वालीफाई करने से चूकी टीम ब्रेड़ी, एजेंसियां। आयरलैंड क्रिकेट टीम को 2027 वनडे विश्व कप में सीधे जगह बनाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला बारिश के कारण बिना गेंद फेंके रद्द होने के बाद आयरलैंड सीधे क्वालीफाई करने की दौड़ से बाहर हो गया है। अब टीम को विश्व कप में पहुंचने के लिए क्वालीफायर मुकाबलों का रास्ता अपनाना होगा। बारिश ने बिगाड़ा आयरलैंड का समीकरण अफगानिस्तान और आयरलैंड के बीच पहला वनडे बारिश के कारण शुरू ही नहीं हो सका। यह मुकाबला आयरलैंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि सीधे क्वालीफाई करने की उसकी उम्मीदें इसी सीरीज के नतीजों पर टिकी थीं। मुकाबला रद्द होने के साथ आयरलैंड के पास सीधे क्वालीफिकेशन के लिए जरूरी समीकरण हासिल करने का मौका भी खत्म हो गया। अब क्वालीफायर से विश्व कप में पहुंचने की कोशिश सीधे क्वालीफाई करने का मौका गंवाने के बाद आयरलैंड अब 10 टीमों वाले विश्व कप क्वालीफायर में खेलेगा। इस प्रतियोगिता की विजेता टीम को 2027 वनडे विश्व कप के मुख्य चरण में सीधे जगह मिलेगी। क्वालीफायर में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और वे विश्व कप के शुरुआती चरण में प्रतिस्पर्धा करेंगी। आयरलैंड के सामने अब बड़ी चुनौती आयरलैंड के लिए सीधे क्वालीफिकेशन का रास्ता बंद होना बड़ा झटका है, लेकिन विश्व कप में पहुंचने का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। टीम के पास क्वालीफायर के जरिए टूर्नामेंट में जगह बनाने का अवसर मौजूद है। आयरलैंड के नए मुख्य कोच गैरी विल्सन के लिए अब विश्व कप क्वालीफिकेशन सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगी। उन्होंने पद संभालने के बाद भी 2027 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने को टीम का प्रमुख लक्ष्य बताया था। 2027 विश्व कप में पहुंचने के लिए क्वालीफायर अहम 2027 का वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में आयोजित होना है। आयरलैंड अब क्वालीफायर के जरिए टूर्नामेंट में जगह बनाने की कोशिश करेगा। इस लिहाज से अफगानिस्तान के खिलाफ बारिश से रद्द हुआ मुकाबला आयरलैंड के लिए बेहद महंगा साबित हुआ है। अब टीम को विश्व कप में पहुंचने के लिए क्वालीफायर में दमदार प्रदर्शन करना होगा।
मैनचेस्टर, एजेंसियां। इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया है। बटलर पुरुषों के T20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने द हंड्रेड में वेल्श फायर के खिलाफ मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की ओर से खेलते हुए 20 गेंदों पर नाबाद 51 रन की तूफानी पारी खेली और वेस्टइंडीज के दिग्गज कीरोन पोलार्ड का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पोलार्ड को पीछे छोड़कर बने नंबर-1 बटलर ने इस मुकाबले से पहले टी20 क्रिकेट में 14,803 रन बनाने वाले कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ा। 51 रन की पारी के बाद बटलर के कुल टी20 रन 14,833 हो गए हैं। पोलार्ड ने 746 टी20 मैचों में 14,803 रन बनाए थे, जबकि बटलर ने यह आंकड़ा 522 मैचों में हासिल किया है। बटलर के नाम टी20 क्रिकेट में 9 शतक और 105 अर्धशतक भी दर्ज हैं। 20 गेंदों पर 51 रन की विस्फोटक पारी वेल्श फायर के खिलाफ मुकाबले में बटलर ने सिर्फ 20 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। उनकी पारी में 2 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 250 का रहा। बटलर की इस तेजतर्रार पारी की बदौलत मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने मुकाबले में 9 विकेट से जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन के साथ ही बटलर ने टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े रन रिकॉर्ड पर अपना नाम दर्ज करा लिया। क्रिस गेल भी पीछे छूटे टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में क्रिस गेल लंबे समय तक शीर्ष पर रहे थे। गेल ने 463 मैचों में 14,562 रन बनाए हैं। पोलार्ड 14,803 रन के साथ उनसे आगे निकले थे, लेकिन अब बटलर ने दोनों दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। बटलर की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पोलार्ड और गेल की तुलना में काफी कम मैचों में यह आंकड़ा हासिल किया है। बटलर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जोस बटलर आधुनिक टी20 क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल हैं। इंग्लैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा उन्होंने दुनिया भर की फ्रेंचाइजी लीग में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। अब 14,833 रन के साथ बटलर पुरुषों के टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें टी20 इतिहास के सबसे सफल बल्लेबाजों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया है।