झारखंड

रांची में निकलेगा भव्य आदिवासी जतरा

विश्व आदिवासी दिवस: रांची में 9 अगस्त को निकलेगा भव्य जतरा, 5,000 कलाकार करेंगे संस्कृति का प्रदर्शन

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
विश्व आदिवासी दिवस पर रांची में भव्य जतरा
रांची में आदिवासी महोत्सव 2026

रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 और 10 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाले झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। दो दिवसीय इस महोत्सव का शुभारंभ 9 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे होगा। आयोजन में देशभर से आए 5,000 से अधिक आदिवासी कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे।

 

जेल चौक से निकलेगा भव्य जतरा

 

 

महोत्सव के पहले दिन पारंपरिक जतरा का आयोजन किया जाएगा। यह जतरा जेल म्यूजियम से शुरू होकर जेल चौक, करमटोली चौक, प्रेस क्लब और गेरिसन चौक होते हुए मोरहाबादी मैदान पहुंचेगा। पूरे मार्ग पर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और दर्शकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। गेरिसन चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जतरा में शामिल कलाकारों का स्वागत करेंगे।

 

 

मांदर की थाप और ट्राइबल संस्कृति का संगम

 

 

महोत्सव में पारंपरिक जनजातीय नृत्य, मांदर की थाप, लोकगीत, ट्राइबल फैशन शो, पारंपरिक खान-पान, कला एवं शिल्प प्रदर्शनी, आदिवासी पुस्तक मेला और फिल्म महोत्सव का आयोजन होगा। इसके अलावा 5डी इमर्सिव जोन में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन और झारखंड आंदोलन से जुड़े इतिहास को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।

 

 

ड्रोन और लेजर शो होंगे आकर्षण

 

 

कार्यक्रम में शिबू सोरेन और झारखंड आंदोलन के शहीदों को समर्पित विशेष ड्रोन एवं लेजर शो भी आयोजित किया जाएगा। साथ ही वृत्तचित्रों का प्रदर्शन, जनजातीय चित्रकला की प्रदर्शनी और आदिवासी जनजीवन पर विभिन्न गोष्ठियों का आयोजन भी होगा।

 

 

10 अगस्त को होगा समापन

 

 

दो दिवसीय महोत्सव का समापन 10 अगस्त को होगा। आयोजन का जिम्मा आदिवासी कल्याण विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने संभाला है। प्रशासन को बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर आयोजन स्थल पर पांच प्रवेश द्वार और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

झारखंड

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Jharkhand Assembly session where the state government will present a ₹6,500 crore supplementary budget for development schemes.
झारखंड विधानसभा में आज पेश होगा 6,500 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट, नई ग्रामीण रोजगार योजना समेत कई विकास योजनाओं को मिलेगा फंड

रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। राज्य सरकार करीब 6,500 करोड़ रुपये का यह अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखेगी। इस बजट में नई ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका योजना, विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों, अधूरी विकास परियोजनाओं और नई योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किए जाने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इस बजट से कई महत्वपूर्ण योजनाओं को गति मिलेगी और विकास कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर करेंगे बजट पेश वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर विधानसभा में अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश होने के बाद इस पर सदन में चर्चा होगी और फिर इसे पारित कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मानसून सत्र के दौरान यह सरकार का महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए कई विभागों को अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। क्या होता है अनुपूरक बजट? अनुपूरक बजट तब लाया जाता है, जब वित्तीय वर्ष के दौरान किसी विभाग या योजना के लिए मूल बजट में स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं रह जाती या सरकार को नई योजनाओं और अतिरिक्त परियोजनाओं के लिए धन की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में सरकार विधानसभा से अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति लेकर संबंधित योजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराती है। नई ग्रामीण रोजगार योजना पर रहेगा खास फोकस इस बार के अनुपूरक बजट में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-GRAMJI योजना के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाने की संभावना है। केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार और आजीविका व्यवस्था के अनुरूप इस योजना को राज्य में लागू करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। इसी को देखते हुए सरकार ने अनुपूरक बजट में इसके लिए अलग से राशि का प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बढ़ाना, आजीविका को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना है। माना जा रहा है कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलेगा। विकास परियोजनाओं को भी मिलेगा अतिरिक्त फंड अनुपूरक बजट में केवल ग्रामीण रोजगार योजना ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों की लंबित परियोजनाओं, आधारभूत संरचना, सामाजिक कल्याण योजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए भी अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा। जिन विभागों में मौजूदा बजट अपर्याप्त साबित हुआ है, उन्हें भी इस बजट के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलेगी। सरकार की प्राथमिकताओं को मिलेगी रफ्तार सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार का प्रयास है कि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो और जिन योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, उन्हें समय पर धन उपलब्ध कराया जाए। यही वजह है कि वित्तीय वर्ष के शुरुआती चरण में ही पहला अनुपूरक बजट लाया जा रहा है। विधानसभा में बजट पेश होने के बाद विपक्ष भी विभिन्न योजनाओं के लिए किए गए वित्तीय प्रावधानों और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठा सकता है। वहीं सरकार इसे राज्य के विकास, रोजगार सृजन और अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।  

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विश्व आदिवासी दिवस पर रांची में भव्य जतरा

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Jharkhand Weather

झारखंड में सक्रिय हुआ मॉनसून, कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

Jharkhand government approves new JSLPS HR policy with 1300 new posts, increased insurance cover and employee benefits.

JSLPS में 1300 नए पदों पर होगी भर्ती, 30 लाख का एक्सीडेंटल कवर और बढ़े भत्ते; हेमंत सरकार का बड़ा फैसला

Security personnel deployed in Ranchi ahead of the Assembly March over JPSC-JSSC paper leak protests.
विधानसभा मार्च को लेकर रांची में हाई अलर्ट, 6 IPS समेत 1000 जवान तैनात; तीन-स्तरीय सुरक्षा घेरा, हर गतिविधि पर रहेगी नजर

रांची: कथित पेपर लीक मामले को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच झारखंड की राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है। विधानसभा के मानसून सत्र और आगामी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। शुक्रवार (8 अगस्त) को आइसा (AISA) की ओर से प्रस्तावित विधानसभा मार्च और 10 अगस्त को आंदोलनरत छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राजधानी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रांची पुलिस ने विधानसभा परिसर और उससे जुड़े सभी संवेदनशील इलाकों में तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सुरक्षा की कमान सीनियर एसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में संभाली जा रही है। पूरे रूट और विधानसभा परिसर की निगरानी के लिए जिले के चार आईपीएस अधिकारियों के साथ दो अतिरिक्त आईपीएस अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में 15 डीएसपी, 30 इंस्पेक्टर, 100 दारोगा और करीब 1000 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। पुलिस बल की तैनाती बिरसा चौक, जगन्नाथपुर मंदिर, विधानसभा परिसर और मार्च के पूरे रूट पर रहेगी, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। आज निकलेगा आइसा का विधानसभा मार्च आइसा की ओर से शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे बिरसा चौक से विधानसभा मार्च निकाला जाएगा। वहीं, आंदोलनरत छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। सीसीटीवी और ड्रोन से होगी निगरानी विधानसभा परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। पुलिस कंट्रोल रूम से पूरे इलाके की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक संसाधनों को भी अलर्ट पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तुरंत मौके पर भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था पर भी रहेगा विशेष ध्यान विधानसभा मार्च के दौरान राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रूट की भी तैयारी की है। आम लोगों से अपील की गई है कि वे पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें और आवश्यक होने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें। पुलिस बोली- कानून व्यवस्था से समझौता नहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने या हिंसा फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार नजर रहेगी और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि विधानसभा सत्र और प्रस्तावित आंदोलनों को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और आम नागरिकों की सुरक्षा व यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। झारखंड सरकार ने JSLPS की नई HR पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 1300 नए पदों का सृजन होगा। कर्मचारियों को 30 लाख का दुर्घटना बीमा, 20 लाख का मेडिक्लेम, शिक्षा भत्ता और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।  

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Students protesting against JPSC-JSSC exam irregularities in Jharkhand as government forms a ministerial committee for talks.
JPSC-JSSC आंदोलन: सरकार बोली- बातचीत से निकलेगा हल, छात्रों की चार प्रमुख मांगों पर बनी सहमति का इंतजार

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार ने चार मंत्रियों की समिति बनाकर बातचीत के जरिए समाधान निकालने का भरोसा दिया है, वहीं आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। गुरुवार को कई मंत्रियों ने इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनका पक्ष जाना। 'पेपर लीक पूरे देश की चुनौती' : चमरा लिंडा झारखंड के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। उनके मुताबिक, संगठित परीक्षा माफिया का नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। सरकार गंभीर, चार मंत्रियों की समिति गठित : इरफान अंसारी स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई जा चुकी है, जो प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता कर समाधान तलाशेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित चेयरमैन से इस्तीफा लिया और अब तक 12 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे : दीपिका पांडेय सिंह ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अभ्यर्थियों ने पूरी ईमानदारी और योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। छात्रों की चार प्रमुख मांगें आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं— टीडीपीएल द्वारा आयोजित JPSC की सभी विवादित परीक्षाएं तत्काल रद्द की जाएं, जिनमें 14वीं JPSC, JPSC बैकलॉग-2023 और FRO परीक्षा शामिल हैं। जिन परीक्षाओं में अभय तिवारी की भूमिका या संलिप्तता रही है, उन्हें भी रद्द किया जाए। इनमें JSSC CGL और झारखंड PGT भर्ती-2025 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कड़ा कानून बनाया जाए। वार्ता पर अभी भी संशय गुरुवार देर शाम रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। प्रशासन का कहना है कि वार्ता को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है क्योंकि प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची नहीं मिली है। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि उन्होंने अपनी डेलिगेशन लिस्ट पहले ही प्रशासन को भेज दी है। ऐसे में वार्ता की तारीख को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। राहुल गांधी ने छात्रों से की बातचीत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने छात्र पीयूष और रविंद्र से कांग्रेस नेता कुमार राजा के फोन के माध्यम से बात कर उनकी मांगों और आंदोलन की स्थिति की जानकारी ली। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो, राज्य सरकार हो या कांग्रेस, सभी को युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन की पूरी जानकारी ली है। क्या आगे होगा? अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर है। यदि बातचीत सफल होती है तो आंदोलन को नया मोड़ मिल सकता है, लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो छात्रों के आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

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