झारखंड में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 10 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी है।
गुरुवार को हुई बारिश के दौरान हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के कंचनपुर गांव में वज्रपात की चपेट में आने से खेत में काम कर रहे बासुदेव महतो (51) और उनकी पत्नी दुलिया देवी (48) की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर मॉनसून के दौरान वज्रपात के बढ़ते खतरे को दर्शाती है।
वहीं, राजधानी रांची में करीब 7 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहर का अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग ने 7 अगस्त के लिए राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें—
शामिल हैं।
इन जिलों में तेज बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं रांची सहित अन्य जिलों में दिनभर बादल छाए रहने और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार 8 अगस्त को भी दक्षिणी झारखंड के साथ गुमला और खूंटी जिलों में भारी बारिश हो सकती है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन की संभावना बनी रहेगी।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार—
इन तीनों दिनों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में शरण न लें। खेतों में काम कर रहे किसान और खुले क्षेत्रों में मौजूद लोग वज्रपात की चेतावनी मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। साथ ही स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट का पालन करने की सलाह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: झारखंड सरकार ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के कर्मचारियों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने JSLPS की नई मानव संसाधन (HR) पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत करीब 1300 नए पदों का सृजन किया जाएगा, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही मौजूदा कर्मचारियों को वेतन-भत्तों, बीमा और अन्य सुविधाओं में भी बड़ा लाभ मिलेगा। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर तैयार की गई इस नई नीति का उद्देश्य JSLPS को अधिक मजबूत बनाना, कार्यक्षमता बढ़ाना और ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त मानव संसाधन मिलने से स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े कार्यक्रमों को और गति मिलेगी। 1300 नए पदों से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर नई HR पॉलिसी के तहत JSLPS में लगभग 1300 अतिरिक्त पदों का सृजन किया जाएगा। इन पदों पर भर्ती होने से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। साथ ही विभिन्न प्रखंडों और जिलों में चल रहे आजीविका कार्यक्रमों के संचालन के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। कर्मचारियों को मिलेंगे कई नए लाभ नई व्यवस्था लागू होने के बाद JSLPS के कर्मचारियों को कई नई सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने लैपटॉप भत्ता और संचार भत्ता बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को तकनीकी और संचार संबंधी दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा पहली बार कर्मचारियों को शिक्षा भत्ता और व्यावसायिक विकास भत्ता भी दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों और उनके परिवार के शैक्षणिक एवं पेशेवर विकास को बढ़ावा मिलेगा। स्वास्थ्य और बीमा सुविधाओं में बड़ा इजाफा नई HR पॉलिसी में कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए कर्मचारी अब हर महीने 1000 रुपये तक का हेल्थ क्लेम कर सकेंगे। पात्र कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ भी मिलेगा। प्रखंड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के फील्ड विजिट (क्षेत्र भ्रमण) भत्ते में बढ़ोतरी की गई है। पहली बार जिला स्तर के कर्मचारियों को भी क्षेत्र भ्रमण भत्ते का लाभ मिलेगा। 30 लाख का दुर्घटना बीमा, 20 लाख का मेडिक्लेम नई नीति के तहत कर्मचारियों के बीमा कवर में भी बड़ा इजाफा किया गया है। समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की राशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है। समूह मेडिक्लेम बीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और आपात परिस्थितियों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। क्या बोलीं ग्रामीण विकास मंत्री? ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह JSLPS कर्मचारियों के सुरक्षित, समृद्ध और बेहतर भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से नई HR पॉलिसी लागू करने की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि 1300 नए पदों के सृजन से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और JSLPS की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार सरकार का मानना है कि नई HR पॉलिसी लागू होने के बाद JSLPS की प्रशासनिक क्षमता मजबूत होगी। इससे स्वयं सहायता समूहों, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी आएगी। साथ ही नई भर्तियों और बेहतर कर्मचारी सुविधाओं से संस्था की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनने की उम्मीद है।
झारखंड में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 10 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी है। वज्रपात से दंपती की मौत गुरुवार को हुई बारिश के दौरान हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के कंचनपुर गांव में वज्रपात की चपेट में आने से खेत में काम कर रहे बासुदेव महतो (51) और उनकी पत्नी दुलिया देवी (48) की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर मॉनसून के दौरान वज्रपात के बढ़ते खतरे को दर्शाती है। वहीं, राजधानी रांची में करीब 7 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहर का अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आज इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने 7 अगस्त के लिए राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें— गुमला खूंटी सिमडेगा पश्चिमी सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां शामिल हैं। इन जिलों में तेज बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं रांची सहित अन्य जिलों में दिनभर बादल छाए रहने और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। 8 अगस्त को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 8 अगस्त को भी दक्षिणी झारखंड के साथ गुमला और खूंटी जिलों में भारी बारिश हो सकती है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन की संभावना बनी रहेगी। 8 से 10 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार— 8 अगस्त: राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन। 9 अगस्त: कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक। 10 अगस्त: कई इलाकों में फिर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना। इन तीनों दिनों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में शरण न लें। खेतों में काम कर रहे किसान और खुले क्षेत्रों में मौजूद लोग वज्रपात की चेतावनी मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। साथ ही स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट का पालन करने की सलाह दी गई है।
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले चल रहे आंदोलन के 13वें दिन कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई तथा कांग्रेस की ओर से उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। छात्रों ने राहुल गांधी के सामने रखीं अपनी मांगें फोन पर हुई बातचीत में आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने अपनी प्रमुख मांगों और चिंताओं से राहुल गांधी को अवगत कराया। छात्रों ने कहा कि कांग्रेस झारखंड सरकार का हिस्सा है, इसलिए उनसे अधिक उम्मीदें हैं। प्रतिनिधियों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती है तो क्या कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार करेगी। राहुल गांधी बोले- संवाद के जरिए निकलेगा समाधान छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल बातचीत का रास्ता खुला हुआ है और वह भी अपने स्तर पर संवाद की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंदोलनकारियों की मांगों को लिखित रूप में पार्टी के प्रतिनिधियों के माध्यम से लिया जाएगा और उन्हें उचित स्तर पर रखा जाएगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस विद्यार्थियों के हित में शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में सुधार की पक्षधर है। कांग्रेस ने छात्रों को दिया पूरा समर्थन झारखंड कांग्रेस महानगर अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा कि राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों को भरोसा दिलाया है कि पूरी कांग्रेस पार्टी उनकी जायज मांगों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए पार्टी हरसंभव प्रयास करेगी और सरकार के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा। सरकार से वार्ता का इंतजार, 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी बातचीत के बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के प्रतिनिधि रविंद्र पासवान और पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि सरकार को वार्ता के लिए डेलीगेट्स की सूची पहले ही सौंप दी गई है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि जल्द वार्ता शुरू नहीं हुई तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम तय समय पर आयोजित किया जाएगा। देर रात तक नहीं मिला सरकार की ओर से कोई जवाब आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि एसडीओ के माध्यम से प्रशासन को प्रतिनिधिमंडल की सूची सौंप दी गई है और अब सरकार की ओर से वार्ता की तिथि और समय तय किया जाना बाकी है। हालांकि देर रात तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया या वार्ता का निमंत्रण नहीं मिला। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी धरना स्थल पर डटे रहे और आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया।