उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताते हुए कहा कि किसी भी नए समझौते से पहले बिहार के हितों की पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
राज्यसभा में बोलते हुए संजय झा ने कहा कि 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का जल संधि की अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू करने से पहले गंगा नदी के किनारे बसे राज्यों, विशेषकर बिहार, की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लंबे समय से इस समझौते के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते रहे हैं। स्वयं जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने भी कई मंचों से इस संधि पर पुनर्विचार की मांग उठाई थी।
संजय झा ने स्पष्ट कहा कि जब तक बिहार के दीर्घकालिक हितों और जल आवश्यकताओं को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक फरक्का जल संधि का नवीनीकरण राज्य के हित में नहीं होगा।
उनका कहना है कि गंगा के जल वितरण से जुड़े किसी भी फैसले में बिहार की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
JDU सांसद ने कहा कि फरक्का बैराज का निर्माण मुख्य रूप से हुगली नदी में जल प्रवाह बनाए रखने और कोलकाता बंदरगाह की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था, लेकिन इसका असर बिहार पर भी पड़ा है।
उन्होंने दावा किया कि दक्षिण बिहार के कई जिलों में लगातार भूजल स्तर नीचे जा रहा है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
संजय झा के अनुसार वर्ष 2050 तक बिहार को अतिरिक्त 2,000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी। इसलिए नई जल व्यवस्था तैयार करने से पहले सभी संबंधित राज्यों की जरूरतों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर हुई एक द्विपक्षीय संधि है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित फरक्का बैराज के आधार पर इस समझौते का नाम रखा गया।
संधि के तहत गंगा नदी के जल प्रवाह के आधार पर दोनों देशों के बीच पानी का बंटवारा तय किया गया है।
फरक्का जल संधि का उद्देश्य दोनों देशों के बीच गंगा नदी के जल का संतुलित और सहमति आधारित वितरण सुनिश्चित करना है। हालांकि, बिहार में समय-समय पर इस समझौते के प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना। बिहार में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के 19 जिलों के लिए बारिश, तेज हवा और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों में जारी हुआ येलो और ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, पटना, बेगूसराय, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, नवादा और गया के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं बक्सर, भोजपुर, अरवल, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवा की संभावना पूर्वानुमान के अनुसार, प्रभावित जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने के साथ दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। पिछले 24 घंटे में कई जिलों में हुई बारिश बीते 24 घंटों के दौरान पटना के कुछ हिस्सों के अलावा जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। हालांकि उमस भरी गर्मी से लोगों को पूरी तरह राहत नहीं मिली। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। अगले कुछ दिनों में बढ़ेगा बारिश का दायरा मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों में बारिश का दायरा उत्तर और पूर्वी बिहार की ओर बढ़ने की संभावना है। उत्तर, मध्य और दक्षिण बिहार के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। राजधानी पटना में भी रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से बरतने को कहा एहतियात मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बिहार में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने संगठन में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। पार्टी ने राज्यभर में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की सभी संगठनात्मक कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव से चर्चा के बाद लिया गया। राजद के इस कदम को आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जिला से पंचायत स्तर तक सभी कमेटियां समाप्त राजद बिहार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि संगठन से जुड़े पहले जारी सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाते हैं। अब पार्टी का काम पुराने संगठनात्मक ढांचे के आधार पर नहीं चलेगा। इस फैसले के तहत राज्यभर की सभी जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की इकाइयों को भंग कर दिया गया है। नए सिरे से होगा संगठन का गठन राजद अब पूरे बिहार में संगठन का पुनर्गठन करेगा। पार्टी जल्द ही सभी स्तरों पर नई कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करेगी। सूत्रों के अनुसार, नए संगठन में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इसका उद्देश्य संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना है। चुनावी हार के बाद बड़ा कदम राजद का यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और बांकीपुर उपचुनाव 2026 में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद सामने आया है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी लगातार समीक्षा बैठकें कर रही थी और संगठन की कार्यप्रणाली पर मंथन चल रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को दोबारा खड़ा कर आगामी चुनावों की तैयारी मजबूत करना चाहती है। संगठन में बड़े बदलाव के संकेत तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय राजद के अंदर व्यापक संगठनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। नई कमेटियों के गठन के बाद कई पुराने पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, जबकि नए चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। हालांकि, पार्टी ने अभी नई कमेटियों के गठन की समय-सीमा या संभावित पदाधिकारियों के नामों की घोषणा नहीं की है। आने वाले दिनों में संगठन के नए स्वरूप को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आ सकती है।
सुपौल, एजेंसियां। बिहार के कोसी क्षेत्र के यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी सुविधा दी है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुपौल और नई दिल्ली के बीच स्पेशल ट्रेन का रोजाना परिचालन 6 अगस्त 2026 से शुरू किया गया है। इस ट्रेन के चलने से सुपौल, सहरसा और आसपास के इलाकों से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त रेल सेवा मिलेगी। सहरसा, बरौनी और हाजीपुर होकर जाएगी ट्रेन नई दिल्ली-सुपौल स्पेशल ट्रेन बिहार के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहरेगी। इसके मार्ग में सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, मानसी, खगड़िया, बेगूसराय, बरौनी, शाहपुर पटोरी, हाजीपुर और सोनपुर जैसे स्टेशन शामिल हैं। इसके बाद ट्रेन उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्टेशनों से होते हुए नई दिल्ली पहुंचेगी। इससे कोसी और उत्तर बिहार के यात्रियों को दिल्ली की सीधी रेल कनेक्टिविटी का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सुपौल से सुबह रवाना होगी ट्रेन सुपौल से नई दिल्ली जाने वाली स्पेशल ट्रेन सुबह 7:45 बजे सुपौल से रवाना होगी। रास्ते में विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के बाद यह अगले दिन दोपहर करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। उपलब्ध समय-सारिणी के अनुसार ट्रेन का परिचालन लंबी दूरी की यात्रा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए फैसला रेलवे ने यह अतिरिक्त सेवा यात्रियों की बढ़ती मांग और भीड़ को देखते हुए शुरू की है। खासकर बिहार से दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन महत्वपूर्ण होगी। स्पेशल ट्रेन के संचालन से नियमित ट्रेनों में दबाव कम करने और यात्रियों को अतिरिक्त सीट उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रेन का ताजा समय और उपलब्धता रेलवे के आधिकारिक आरक्षण माध्यम से जांचने की सलाह दी गई है।