बिहार

Bihar Tightens Crackdown on Illegal Mining

बिहार में अवैध खनन पर सरकार का बड़ा एक्शन, 1000 खनन सिपाहियों की होगी भर्ती, खनिज वाहनों पर GPS अनिवार्य

surbhi अगस्त 7, 2026 0
Bihar government announces anti-illegal mining measures, including recruitment of 1,000 mining constables and mandatory GPS tracking for mineral transport vehicles.
Bihar Anti-Illegal Mining Action Plan

पटना: बिहार सरकार ने राज्य में अवैध खनन और खनिजों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। खान एवं भूतत्व विभाग अब अपनी अलग सुरक्षा व्यवस्था विकसित करेगा। इसके तहत 1000 खनन सिपाहियों की भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले खनिजों से लदे सभी वाहनों पर GPS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, ताकि उनके आवागमन की रियल टाइम निगरानी की जा सके। यह जानकारी खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने प्रेस वार्ता में दी।

अवैध खनन रोकने के लिए बनेगी विशेष खनन सुरक्षा टीम

मंत्री ने बताया कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की तर्ज पर खनन सिपाहियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए जल्द ही भर्ती एजेंसी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अवैध खनन, खनिजों की तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकें।

इनकी तैनाती के बाद विभाग को छापेमारी और निगरानी के दौरान स्थानीय पुलिस पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस पर भी अतिरिक्त दबाव कम होगा।

दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज वाहनों पर GPS होगा अनिवार्य

सरकार ने झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों पर GPS लगाने का निर्णय लिया है। वाहन मालिकों को इसके लिए एक से डेढ़ महीने का समय दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के बाद बिना GPS वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध बालू, गिट्टी और अन्य खनिजों के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

इंटर स्टेट ट्रांजिट पास पोर्टल से बढ़ा राजस्व

10 जून से शुरू किए गए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास पोर्टल का असर अब राजस्व संग्रह में भी दिखाई देने लगा है। विभाग के अनुसार अब तक 22,203 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है।

  • हर सप्ताह लगभग 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
  • दो महीने में करीब 45 करोड़ रुपये की आय हुई है।
  • प्रतिदिन लगभग 4,000 खनिज वाहन बिहार में प्रवेश कर रहे हैं।

नवादा समेत कई जिलों में खनन पट्टों के लिए टेंडर

विभाग ने नवादा जिले की 8 पत्थर खदानों के लिए टेंडर जारी कर दिया है। वहीं औरंगाबाद, गया, शेखपुरा और बांका में पत्थर खनन पट्टों की निविदा 15 अगस्त तक जारी की जाएगी। सभी खनन पट्टे 5 वर्ष की अवधि के लिए दिए जाएंगे।

17 अगस्त को होगा निवेशकों के लिए रोड शो

राज्य सरकार गया और रोहतास में मौजूद मैग्नेटाइट, वैनेडियम और ग्लॉकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी भी कर रही है। इसे लेकर 17 अगस्त को पटना में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त रोड शो आयोजित किया जाएगा, ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।

नदियों की गाद से भी होगी कमाई

सरकार अब नदियों में जमा गाद का व्यावसायिक उपयोग भी करेगी। इसके लिए सभी जिलों को जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (DSR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से गाद की नीलामी होगी। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध होगी।

चार महीनों में करीब 39% बढ़ा विभाग का राजस्व

खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में विभाग ने 790.23 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 590.12 करोड़ रुपये था। इस तरह विभाग के राजस्व में करीब 38.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे सरकार अपनी नई निगरानी व्यवस्था और नीतिगत सुधारों का सकारात्मक परिणाम मान रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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फरक्का जल संधि पर JDU का विरोध, संजय झा बोले- बिहार के हित सुरक्षित किए बिना नहीं हो समझौते का नवीनीकरण

नई दिल्ली/पटना: भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई फरक्का जल संधि इस वर्ष 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रही है। इसके नवीनीकरण को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने केंद्र सरकार से बड़ा आग्रह किया है। राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि बिहार की जल सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन किए बिना संधि का वर्तमान स्वरूप में नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जुड़ा बताते हुए कहा कि किसी भी नए समझौते से पहले बिहार के हितों की पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। राज्यसभा में उठाया फरक्का जल संधि का मुद्दा राज्यसभा में बोलते हुए संजय झा ने कहा कि 1996 में हस्ताक्षरित फरक्का जल संधि की अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू करने से पहले गंगा नदी के किनारे बसे राज्यों, विशेषकर बिहार, की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी लंबे समय से इस समझौते के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते रहे हैं। स्वयं जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने भी कई मंचों से इस संधि पर पुनर्विचार की मांग उठाई थी। "बिहार के हित सुरक्षित किए बिना न हो नवीनीकरण" संजय झा ने स्पष्ट कहा कि जब तक बिहार के दीर्घकालिक हितों और जल आवश्यकताओं को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक फरक्का जल संधि का नवीनीकरण राज्य के हित में नहीं होगा। उनका कहना है कि गंगा के जल वितरण से जुड़े किसी भी फैसले में बिहार की जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दक्षिण बिहार में लगातार गिर रहा भूजल स्तर JDU सांसद ने कहा कि फरक्का बैराज का निर्माण मुख्य रूप से हुगली नदी में जल प्रवाह बनाए रखने और कोलकाता बंदरगाह की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था, लेकिन इसका असर बिहार पर भी पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण बिहार के कई जिलों में लगातार भूजल स्तर नीचे जा रहा है, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं। संजय झा के अनुसार वर्ष 2050 तक बिहार को अतिरिक्त 2,000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी। इसलिए नई जल व्यवस्था तैयार करने से पहले सभी संबंधित राज्यों की जरूरतों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। क्या है फरक्का जल संधि? फरक्का जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर हुई एक द्विपक्षीय संधि है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित फरक्का बैराज के आधार पर इस समझौते का नाम रखा गया। संधि के तहत गंगा नदी के जल प्रवाह के आधार पर दोनों देशों के बीच पानी का बंटवारा तय किया गया है। संधि के प्रमुख प्रावधान यदि जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक या उससे कम हो, तो उपलब्ध पानी भारत और बांग्लादेश के बीच 50-50 प्रतिशत बांटा जाएगा। यदि जल प्रवाह 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच हो, तो बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी मिलेगा और शेष भारत के हिस्से में रहेगा। यदि जल प्रवाह 75,000 क्यूसेक से अधिक हो, तो भारत 40,000 क्यूसेक पानी अपने उपयोग के लिए रखेगा और बचा हुआ पानी बांग्लादेश को दिया जाएगा। फरक्का जल संधि का उद्देश्य दोनों देशों के बीच गंगा नदी के जल का संतुलित और सहमति आधारित वितरण सुनिश्चित करना है। हालांकि, बिहार में समय-समय पर इस समझौते के प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।  

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बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला, 19 विशेष अदालतों के गठन को मंजूरी; 171 नए पद भी सृजित होंगे पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 19 न्याय मंडलों में विशेष न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई। इन अदालतों में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई की जाएगी।   19 न्याय मंडलों में बनेंगी विशेष अदालतें     कैबिनेट के फैसले के अनुसार, राज्य के 19 न्याय मंडलों में विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी। इसका उद्देश्य एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई को तेज करना और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना है।   सरकार का मानना है कि अलग विशेष अदालतें होने से ऐसे मामलों की सुनवाई अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से संभव होगा।   171 नए पदों को मिली मंजूरी     विशेष अदालतों के गठन के साथ ही सरकार ने 171 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इन पदों के जरिए नई अदालतों के संचालन के लिए आवश्यक न्यायिक एवं अन्य मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे अदालतों में मामलों की सुनवाई के लिए जरूरी प्रशासनिक ढांचा मजबूत होने की उम्मीद है।     लंबित मामलों के निपटारे पर जोर     बिहार में अदालतों में बड़ी संख्या में आपराधिक मामले लंबित हैं। ऐसे में विशेष अदालतों के गठन का उद्देश्य संबंधित कानून के तहत दर्ज मामलों को प्राथमिकता के साथ निपटाना है। सरकार के इस फैसले से एससी-एसटी समुदाय से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद है।     कैबिनेट ने 17 प्रस्तावों को दी मंजूरी     बिहार कैबिनेट की बैठक में केवल विशेष अदालतों से संबंधित फैसला ही नहीं हुआ। सरकार ने कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP मॉडल और अन्य प्रशासनिक एवं विकास संबंधी फैसले भी शामिल हैं।   विशेष अदालतों का गठन इन फैसलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध गंभीर सामाजिक अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित न्याय से है।

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Rajgir Ropeway
नालंदा में राजगीर रोपवे ठप, हवा में अटके पर्यटक; आकाशीय बिजली से आई तकनीकी खराबी

राजगीर, एजेंसियां। नालंदा के प्रसिद्ध राजगीर रोपवे में मौसम खराब होने और आकाशीय बिजली गिरने के बाद तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते रोपवे के कई केबिन बीच हवा में रुक गए और उनमें सवार पर्यटक व श्रद्धालु काफी देर तक फंसे रहे। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। हालांकि, राहत की बात रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।   आकाशीय बिजली से रोपवे का संचालन रुका   जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम अचानक मौसम बिगड़ने के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से रोपवे के इंजन या इलेक्ट्रॉनिक हिस्से में तकनीकी खराबी आ गई। सुरक्षा के लिहाज से रोपवे का संचालन रोक दिया गया। उस समय विश्व शांति स्तूप से लौट रहे यात्रियों को लेकर जा रहे कई केबिन रास्ते में ही रुक गए। अलग-अलग रिपोर्टों में फंसे यात्रियों की संख्या लगभग 16 से 25 बताई गई है।   करीब एक घंटे तक हवा में फंसे रहे यात्री   रोपवे के अचानक रुकने से केबिन में मौजूद पर्यटक और श्रद्धालु घबरा गए। उमस और गर्मी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशन के नजदीक मौजूद कुछ यात्रियों को सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि दूर फंसे यात्रियों को तकनीकी खराबी दूर होने तक केबिन में इंतजार करना पड़ा।   वैकल्पिक इंजन से सभी को सुरक्षित उतारा   रोपवे प्रबंधन की तकनीकी टीम ने तत्काल काम शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तकनीकी खराबी को दूर किया गया और वैकल्पिक इंजन की मदद से रोपवे का संचालन बहाल किया गया। इसके बाद हवा में फंसे यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।   जांच के बाद दोबारा शुरू हुआ रोपवे   यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद पूरे रोपवे सिस्टम की तकनीकी जांच और परीक्षण किया गया। व्यवस्था सामान्य पाए जाने के बाद परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया। घटना में किसी पर्यटक के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।   प्रबंधन ने बताया कि खराब मौसम और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रोपवे का संचालन रोकना जरूरी था। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही सेवा बहाल की गई।

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