पटना: बिहार सरकार ने राज्य में अवैध खनन और खनिजों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। खान एवं भूतत्व विभाग अब अपनी अलग सुरक्षा व्यवस्था विकसित करेगा। इसके तहत 1000 खनन सिपाहियों की भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही दूसरे राज्यों से बिहार आने वाले खनिजों से लदे सभी वाहनों पर GPS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, ताकि उनके आवागमन की रियल टाइम निगरानी की जा सके। यह जानकारी खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने प्रेस वार्ता में दी। अवैध खनन रोकने के लिए बनेगी विशेष खनन सुरक्षा टीम मंत्री ने बताया कि उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की तर्ज पर खनन सिपाहियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए जल्द ही भर्ती एजेंसी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे अवैध खनन, खनिजों की तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकें। इनकी तैनाती के बाद विभाग को छापेमारी और निगरानी के दौरान स्थानीय पुलिस पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस पर भी अतिरिक्त दबाव कम होगा। दूसरे राज्यों से आने वाले खनिज वाहनों पर GPS होगा अनिवार्य सरकार ने झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों पर GPS लगाने का निर्णय लिया है। वाहन मालिकों को इसके लिए एक से डेढ़ महीने का समय दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के बाद बिना GPS वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध बालू, गिट्टी और अन्य खनिजों के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इंटर स्टेट ट्रांजिट पास पोर्टल से बढ़ा राजस्व 10 जून से शुरू किए गए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास पोर्टल का असर अब राजस्व संग्रह में भी दिखाई देने लगा है। विभाग के अनुसार अब तक 22,203 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। हर सप्ताह लगभग 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। दो महीने में करीब 45 करोड़ रुपये की आय हुई है। प्रतिदिन लगभग 4,000 खनिज वाहन बिहार में प्रवेश कर रहे हैं। नवादा समेत कई जिलों में खनन पट्टों के लिए टेंडर विभाग ने नवादा जिले की 8 पत्थर खदानों के लिए टेंडर जारी कर दिया है। वहीं औरंगाबाद, गया, शेखपुरा और बांका में पत्थर खनन पट्टों की निविदा 15 अगस्त तक जारी की जाएगी। सभी खनन पट्टे 5 वर्ष की अवधि के लिए दिए जाएंगे। 17 अगस्त को होगा निवेशकों के लिए रोड शो राज्य सरकार गया और रोहतास में मौजूद मैग्नेटाइट, वैनेडियम और ग्लॉकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी भी कर रही है। इसे लेकर 17 अगस्त को पटना में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की मौजूदगी में संयुक्त रोड शो आयोजित किया जाएगा, ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। नदियों की गाद से भी होगी कमाई सरकार अब नदियों में जमा गाद का व्यावसायिक उपयोग भी करेगी। इसके लिए सभी जिलों को जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (DSR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से गाद की नीलामी होगी। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध होगी। चार महीनों में करीब 39% बढ़ा विभाग का राजस्व खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में विभाग ने 790.23 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 590.12 करोड़ रुपये था। इस तरह विभाग के राजस्व में करीब 38.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे सरकार अपनी नई निगरानी व्यवस्था और नीतिगत सुधारों का सकारात्मक परिणाम मान रही है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में अवैध खनन पर कड़ी सख्ती बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि इसे हर हाल में रोका जाये। साथ ही, उन्होंने अवैध बालू खनन को भी रोकने का सख्त आदेश दिया। सीएम ने ये निर्देश खान व भूतत्व विभाग की समीक्षा करते हुए दिये। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से राज्य को राजस्व की हानि होती है, साथ ही यह पर्यावरणीय संतुलन और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती उत्पन्न करता है। इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय समन्वय, नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। निष्क्रिय खदानों को चालू करने का निर्देश समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में संचालित बीसीसीएल, सीसीएल एवं इसीएल की बंद पड़ी खदानों को निरस्त करने हेतु उपाय तलाशने का निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जिन खदानों में उत्पादन बंद है, वहां उत्पादन पुनः प्रारंभ कराया जाये। जिन खनिज ब्लॉकों का ऑक्शन हो चुका है, लेकिन वे लंबे समय से क्रियाशील नहीं हैं, उन्हें निरस्त कर पुनः राजस्व का आकलन करते हुए दोबारा ऑक्शन किया जाए। खनन लीज क्षेत्र तथा कार्यरत एवं गैर-कार्यरत क्षेत्रों की मैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वर्ण उत्पादन बढ़ाने पर जोर मुख्यमंत्री सोरेन ने राज्य में संचालित कुल सात गोल्ड माइंस की समीक्षा करते हुए इनके उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दिए। वर्तमान में इन खदानों से लगभग 20 किलोग्राम वार्षिक स्वर्ण उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता पर उन्होंने विशेष बल दिया। अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोल्ड माइंस के संचालन में आ रही बाधाओं की पहचान कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने राज्य के अन्य संभावित गोल्ड खदानों के शीघ्र ऑक्शन की प्रक्रिया को गति देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वर्ण भंडार की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं और इस क्षेत्र में योजनाबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से कार्य करने की आवश्यकता है। इसके तकनीकी उन्नयन, निवेश आकर्षण तथा प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से इस क्षेत्र को और सशक्त बनाने का निर्देश दिया। अनुषंगी इकाइयों को अधिक खान आरक्षित करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड एवं झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड के लिए अधिकाधिक खनिज क्षेत्र आरक्षित करने का निर्देश दिया। उन्होंने जेएमइसीएल में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा दोनों संस्थाओं के लिए एसओपी तैयार करने का भी निर्देश दिया। अवैध खनन एवं बालू उठाव रोकने का निर्देश मुख्यमंत्री ने अवैध खनन, विशेषकर बालू उठाव की रोकथाम हेतु आधुनिक एवं तकनीक आधारित उपाय अपनाने के निर्देश दिए। राज्य में कुल 820 बालू घाटों में से 376 (कैटेगरी-1) घाटों पर पंचायतों के माध्यम से उठाव जारी है, जबकि 444 (कैटेगरी-2) घाटों में से 300 का ऑक्शन किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने ऑक्शन किए गए घाटों से शीघ्र बालू उठाव प्रारंभ कराने तथा शेष घाटों का शीघ्र ऑक्शन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मशीन से बालू उठाव पर रोक संबंधी आदेश की समीक्षा कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अवैध खनन, अवैध परिवहन एवं ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग, नियमित निरीक्षण, सघन निगरानी तथा विभाग, पुलिस एवं जिला प्रशासन के समन्वित अभियान चलाने पर विशेष बल दिया। कोयला आपूर्ति में वृद्धि लाने का निर्देश मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से कोल ट्रेडिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए योग्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को पंजीकृत कर कोयला आपूर्ति में वृद्धि सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि आपूर्ति प्रणाली को सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आवश्यक क्षेत्रों तक समय पर कोयला उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी छात्रावासों, विशेषकर आवासीय विद्यालयों के छात्रावासों का समुचित मैपिंग कर वहां कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एलपीजी की उपलब्धता में आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में कोयले के उपयोग की संभावनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए।
जामताड़ा: जिले में अवैध कोयला उत्खनन पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता के निर्देश पर नाला थाना क्षेत्र के कास्ता और पलास्थली इलाके में बंद पड़ी अवैध कोयला खदानों को जेसीबी और बुलडोजर की मदद से मिट्टी भरकर बंद करने का अभियान चलाया गया। हादसों के बाद प्रशासन हुआ सख्त बताया जाता है कि इसी वर्ष फरवरी महीने में कास्ता और पलास्थली क्षेत्र की अवैध खदानों में कोयला निकालने के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ था। उस दुर्घटना में तीन से चार मजदूरों के मलबे में दबने की सूचना सामने आई थी। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग तेज हो गई थी। ECL और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई घटना को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को पुलिस और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू की। बंद पड़ी खदानों को जेसीबी और बुलडोजर से मिट्टी भरकर डोजिंग की गई, ताकि वहां दोबारा अवैध उत्खनन न हो सके। वर्षों से चल रहा था अवैध खनन जानकारी के अनुसार, ये खदानें मूल रूप से ECL के पांडेश्वर जोनल ऑफिस के अधीन थीं और कई साल पहले इन्हें बंद कर दिया गया था। लेकिन बीते करीब तीन दशकों में यहां अवैध कोयला उत्खनन का जाल फैल गया था। इसके कारण कई जगहों पर गहरी और बेहद असुरक्षित खदानें बन गई थीं। भारी पुलिस बल की तैनाती इस अभियान का नेतृत्व नाला थाना प्रभारी राजीव रंजन कुमार और ECL अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। कार्रवाई के दौरान CISF और नाला थाना की पुलिस भी मौके पर तैनात रही। इस दौरान सहायक अवर निरीक्षक संजय गहलौत समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे। अवैध खनन पर सख्त चेतावनी प्रशासन ने इलाके के लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि इन क्षेत्रों में किसी भी कीमत पर अवैध कोयला उत्खनन को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस और ECL की टीम लगातार निगरानी करेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति अवैध खनन में संलिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय अवैध कोयला कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।