झारखंड में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 10 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर नहीं जाने की सलाह दी है। वज्रपात से दंपती की मौत गुरुवार को हुई बारिश के दौरान हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के कंचनपुर गांव में वज्रपात की चपेट में आने से खेत में काम कर रहे बासुदेव महतो (51) और उनकी पत्नी दुलिया देवी (48) की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर मॉनसून के दौरान वज्रपात के बढ़ते खतरे को दर्शाती है। वहीं, राजधानी रांची में करीब 7 मिमी बारिश दर्ज की गई। शहर का अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। आज इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने 7 अगस्त के लिए राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें— गुमला खूंटी सिमडेगा पश्चिमी सिंहभूम पूर्वी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां शामिल हैं। इन जिलों में तेज बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। वहीं रांची सहित अन्य जिलों में दिनभर बादल छाए रहने और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। 8 अगस्त को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 8 अगस्त को भी दक्षिणी झारखंड के साथ गुमला और खूंटी जिलों में भारी बारिश हो सकती है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन की संभावना बनी रहेगी। 8 से 10 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार— 8 अगस्त: राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और मेघगर्जन। 9 अगस्त: कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक। 10 अगस्त: कई इलाकों में फिर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना। इन तीनों दिनों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में गर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में शरण न लें। खेतों में काम कर रहे किसान और खुले क्षेत्रों में मौजूद लोग वज्रपात की चेतावनी मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। साथ ही स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट का पालन करने की सलाह दी गई है।
पटना: बिहार में मॉनसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग (IMD) ने 34 जिलों के लिए आंधी, तेज बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने किशनगंज, बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया और नवादा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों में येलो अलर्ट पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, अररिया, खगड़िया, भागलपुर, कटिहार, मुंगेर, बांका और जमुई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में भारी बारिश का खतरा मौसम विभाग के अनुसार अररिया, किशनगंज, कटिहार और बक्सर में भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और वज्रपात का भी खतरा बना हुआ है। 10 अगस्त तक ऐसा ही रहेगा मौसम IMD के पूर्वानुमान के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक पूरे बिहार में मौसम का यही रुख बना रहेगा। 7 अगस्त: उत्तर बिहार, कोसी-सीमांचल और दक्षिण बिहार के कई जिलों में तेज बारिश की संभावना। 8 अगस्त: खगड़िया, भागलपुर और मुंगेर को छोड़कर लगभग पूरे बिहार में बारिश का अनुमान। 9 अगस्त: उत्तर और मध्य बिहार के जिलों में खराब मौसम बना रहेगा। 10 अगस्त: उत्तर-पश्चिम और दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना बनी रहेगी। क्यों सक्रिय हुआ मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार के आसपास मॉनसूनी ट्रफ सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली पूर्वी हवाएं राज्य में पहुंच रही हैं। इसी कारण बादल तेजी से बन रहे हैं और कई जिलों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। आने वाले दिनों में भी मॉनसून की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।
देश के दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। केरल और असम में भारी बारिश तथा बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) के अनुसार, बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग लापता हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। दूसरी ओर, असम में भी कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। केरल में बाढ़ की भयावह तस्वीर केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। राज्यभर में 418 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 18,434 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। बाढ़ की वजह से 52 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 565 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा प्रभावित पथनमथिट्टा जिला है, जहां अकेले 133 राहत शिविरों में 6,400 से अधिक लोग रह रहे हैं। कई इलाकों में अब भी पानी नहीं उतरा है, जिससे लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पथनमथिट्टा जिले का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर निर्देश दिए कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को सभी आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं, ताकि प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। उन्होंने घोषणा की कि हर प्रभावित परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 6 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों, किसानों और व्यापारियों को हुए नुकसान के मुआवजे पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया जाएगा। बार-बार बाढ़ आने की वजह भी बताई मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि 2018 और 2019 की विनाशकारी बाढ़ के बाद दीर्घकालिक समाधान पूरी तरह लागू नहीं हो पाए। लगातार बाढ़ आने से नदियों में गाद जमा होती गई, जिससे उनकी जलधारण क्षमता कम हो गई। उन्होंने नदियों की ड्रेजिंग (गाद हटाने) और बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मौसम अचानक बिगड़ जाता है और आधिकारिक चेतावनी जारी होने से पहले ही तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। राज्य सरकार अब देश की सबसे बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर पथनमथिट्टा जिले में पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मूझियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जलस्तर बढ़ने पर बांध के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आठ जिलों में रेड अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पथनमथिट्टा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। कोट्टायम में घरों और दुकानों में घुसा पानी कोट्टायम जिले में लगातार बारिश के कारण कोडिमथा, थाझाथंगडी और इल्लीकल समेत कई इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया है। पानी घरों और दुकानों में घुस गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए कई शिक्षण संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। असम में भी बाढ़ से हालात गंभीर असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पांच दिवसीय दौरे पर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने शिवसागर में राहत शिविरों का निरीक्षण कर अधिकारियों को भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिवसागर स्थित राहत शिविर में 162 परिवारों के 563 लोग रह रहे हैं। इनमें 35 बच्चे, 267 पुरुष और 261 महिलाएं शामिल हैं। मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की सहायता मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वाले 10 लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये के चेक सौंपे। इससे पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 4-4 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी थी। इस तरह प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। 9 अगस्त से शुरू होगा नुकसान का सर्वे असम सरकार ने घोषणा की है कि 9 अगस्त से बाढ़ प्रभावित चार जिलों में नुकसान का विस्तृत सर्वे शुरू किया जाएगा। सर्वे के आधार पर घरों, फसलों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर और रबर की नाव से कई जलमग्न गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रभावित लोगों तक हर जरूरी सुविधा समय पर पहुंचे। स्कूल-कॉलेज भी हुए प्रभावित बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री ने शिवसागर गर्ल्स कॉलेज और फुलेश्वरी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बाढ़ प्रभावित परिसरों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द शिक्षण संस्थानों में सामान्य स्थिति बहाल करने और भविष्य में जलभराव की समस्या रोकने के लिए स्थायी उपाय करने के निर्देश दिए। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए मौसम विभाग ने दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आधिकारिक मौसम संबंधी चेतावनियों पर भरोसा करने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में मानसून का असर लगातार तेज बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। जम्मू-कश्मीर के शोपियां और बांदीपोरा जिलों में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने घरों, खेतों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया। वहीं, झारखंड के गिरिडीह, दुमका और लातेहार जिलों में मंगलवार को वज्रपात की अलग-अलग घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है। केरल में बाढ़ जैसे हालात केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से आठ जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई नदियां और बांध उफान पर हैं, जबकि निचले इलाकों में जलभराव से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बीच बाढ़ में फंसे एक बुजुर्ग की जान बचाने के दौरान तैराकी प्रशिक्षक आर. राजेश की बहाव में बहने से मौत हो गई। उधर, भारतीय मौसम विभाग ने उत्तराखंड के देहरादून और बागेश्वर समेत कई जिलों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश की संभावना जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
रांची: झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच भारी बारिश और वज्रपात ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित किया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली गिरने की घटनाओं में अब तक 18 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या में हादसे खेतों में काम करने के दौरान हुए। मौसम विज्ञान केंद्र ने भी राज्य के कई हिस्सों में 8 अगस्त तक बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। ऐसे में खासकर खेतों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को मौसम साफ होने तक अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। दो से तीन घंटे की मूसलाधार बारिश मंगलवार दोपहर के बाद झारखंड के कई जिलों में अचानक तेज बारिश हुई। कई इलाकों में दो से तीन घंटे तक झमाझम बारिश दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांके में करीब 76 मिमी, लोहरदगा में 46 मिमी और रांची में 35 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा सिमडेगा में 23 मिमी, बोकारो में 12 मिमी, मेदिनीनगर में 10 मिमी और खूंटी में करीब 5 मिमी बारिश हुई। भारी बारिश के साथ कई इलाकों में गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं भी हुईं। खेतों में काम कर रहे लोगों पर टूटा कहर राज्य में हुई मौतों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बारिश के दौरान खेतों में काम कर रहे थे। ग्रामीण इलाकों में धान रोपाई और खेती से जुड़े काम के दौरान अचानक बिजली गिरने से कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया। पलामू के मोहम्मदगंज में 38 वर्षीय पुष्पा देवी की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं गढ़वा के रंका थाना क्षेत्र के सोनपुरवा गांव में 45 वर्षीय कदरून खातून की जान चली गई। लातेहार में भी वज्रपात से दो लोगों की मौत हुई है। सदर थाना क्षेत्र के जालिम निवासी शिवनाथ उरांव की मौत हो गई, जबकि होटवाग गांव में निर्मला देवी गंभीर रूप से घायल हुई हैं। चंदवा प्रखंड के सुरली गांव में 18 वर्षीय उपेंद्र उरांव भी वज्रपात की चपेट में आ गए। दुमका और चतरा में भी हादसे दुमका के रामगढ़ क्षेत्र में धान रोपाई के दौरान गिदबन्ना गांव की 20 वर्षीय आलतामुनी मरांडी की मौत हो गई। इसके अलावा बाबूलाल हेंब्रम और रोहित कुंअर की भी खेत में काम करने के दौरान बिजली गिरने से मौत की जानकारी सामने आई है। इस घटना में कई अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है। चतरा के लावालौंग क्षेत्र के चानी गांव में 30 वर्षीय संजय भुईयां की भी वज्रपात से मौत हो गई। वहीं गिरिडीह में स्थिति और गंभीर रही। यहां ठनका गिरने की घटनाओं में चार किशोरों समेत 10 लोगों की मौत की खबर है, जबकि नौ लोग घायल हुए हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर मानसून के दौरान खुले खेतों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 8 अगस्त तक कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र ने 8 अगस्त तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और वज्रपात की संभावना जताई है। 5 अगस्त: गढ़वा, पलामू, लातेहार, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश की चेतावनी है। रांची में भी एक-दो बार हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 6 अगस्त: रांची, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और चतरा में भारी बारिश के साथ वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। 7 अगस्त: रांची, खूंटी, सिमडेगा, लातेहार, लोहरदगा, चतरा, पलामू, गढ़वा, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम में भारी बारिश और वज्रपात का खतरा बताया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए 8 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। वज्रपात के दौरान क्या सावधानी बरतें? बारिश के दौरान बिजली चमकने या गरज सुनाई देने पर खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे और ऊंचे स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए। खेतों में काम कर रहे लोगों को मौसम बिगड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचना चाहिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को मौसम की चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए और बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। 18 मौतों ने बढ़ाई चिंता झारखंड में वज्रपात से हुई 18 मौतें मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा की गंभीर चुनौती को सामने लाती हैं। आने वाले दिनों में भी कई जिलों में बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी है। ऐसे में प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना और मौसम खराब होने पर खुले स्थानों से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
बिहार मौसम अपडेट 4 अगस्त 2026: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मंगलवार, 4 अगस्त को मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। राज्य के ज्यादातर जिलों में येलो अलर्ट, जबकि कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर वज्रपात की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सीवान, सारण, भोजपुर और बक्सर में भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। मौसम में बदलाव से पिछले दिनों महसूस हो रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आंधी, बिजली और तेज बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बिहार में अगले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ होने के आसार कम हैं। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश जारी रह सकती है। कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। 5 और 6 अगस्त को भी उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में दिनभर मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी बनी बारिश की वजह मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं बिहार की ओर बढ़ रही हैं। वायुमंडल में नमी की मात्रा अधिक होने और स्थानीय स्तर पर तेजी से बादल बनने के कारण राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखी जा रही हैं। इसी वजह से कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ वज्रपात की स्थिति भी बन रही है। सामान्य से अब भी कम हुई है बारिश बारिश की गतिविधियां बढ़ने के बावजूद बिहार में अब तक कुल बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि तक राज्य में करीब 422 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक लगभग 299 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यानी राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम बताया गया है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज होने पर बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। हाल के दिनों में वज्रपात की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। कई जिलों में ठनका गिरने से करीब 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेना और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है। लोगों के लिए जरूरी सावधानी बारिश और गरज-चमक के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज आंधी या वज्रपात की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा टालना बेहतर रहेगा। बिहार में फिलहाल मानसून की गतिविधियां बनी हुई हैं और अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
Kerala Rain Alert: केरल में मानसून एक बार फिर जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड), बाढ़ और मलबा खिसकने की घटनाओं में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में लोगों के लापता होने की आशंका है, जबकि राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाके जलमग्न, राहत अभियान जारी भारी बारिश के कारण कन्नूर जिले के चेंगलाई समेत कई निचले इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ, फायर एंड रेस्क्यू और स्थानीय एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन जिलों में IMD का रेड अलर्ट भारतीय मौसम विभाग ने इडुक्की, कोट्टायम, पथानमथिट्टा, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले कुछ घंटों में बेहद भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। आखिर हर मानसून में क्यों बढ़ जाता है लैंडस्लाइड का खतरा? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार केवल एक दिन की तेज बारिश नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों तक हुई वर्षा ने मिट्टी को पूरी तरह पानी से संतृप्त कर दिया था। इसके बाद अचानक हुई भारी बारिश ने पहाड़ियों की ढलानों को कमजोर कर दिया, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन हो गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब मिट्टी अपनी पानी सोखने की क्षमता से अधिक पानी जमा कर लेती है, तो उसका भार बढ़ जाता है और वह ढलानों पर टिक नहीं पाती। ऐसे में पूरी पहाड़ी का हिस्सा अचानक नीचे खिसक जाता है। पश्चिमी घाट की भौगोलिक बनावट भी बड़ी वजह केरल का अधिकांश पहाड़ी इलाका पश्चिमी घाट में स्थित है, जिसे भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहां कठोर चट्टानों के ऊपर ढीली मिट्टी की परत होती है। लगातार बारिश का पानी मिट्टी के भीतर जाकर चट्टानों तक पहुंचता है, जिससे दोनों परतों के बीच पकड़ कमजोर पड़ जाती है और पूरी ढलान खिसक जाती है। इसके अलावा अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई, सड़क परियोजनाएं, खनन गतिविधियां और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ता शहरीकरण भी लैंडस्लाइड के खतरे को बढ़ा रहे हैं। वायनाड त्रासदी के बाद भी बरकरार खतरा साल 2024 में वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद संवेदनशील इलाकों की पहचान और सुरक्षा उपायों को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी जोखिम वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक योजना, निर्माण पर सख्त नियंत्रण, वनों का संरक्षण और आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों की चेतावनी भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान पर रोक नहीं लगाई गई, तो हर मानसून के दौरान केरल में इस तरह की त्रासदियां दोहराने का खतरा बना रहेगा। इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन, समय पर निकासी और आपदा प्रबंधन की बेहतर तैयारी ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है।
Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार (1 अगस्त) को गुजरात और केरल के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी करते हुए भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। केरल के इन जिलों में रेड अलर्ट आईएमडी के अनुसार अलाप्पुझा, एर्नाकुलम, इडुक्की, कोट्टायम और पथानामथिट्टा जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में तेज हवाएं, आकाशीय बिजली और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। केरल के इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट कन्नूर, कासरगोड, कोल्लम, कोझीकोड, लक्षद्वीप, मलप्पुरम, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर और वायनाड जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां भी भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है। गुजरात के 15 जिलों में रेड अलर्ट गुजरात में अहमदाबाद, आनंद, अरावली, भरूच, भावनगर, बोटाद, गांधीनगर, कच्छ, खेड़ा, महेसाणा, मोरबी, पाटन, साबरकांठा, सुरेंद्रनगर और वडोदरा जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका है। गुजरात के इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट अमरेली, बनासकांठा, छोटा उदेपुर, दादरा एवं नगर हवेली, दाहोद, दमन, डांग, देवभूमि द्वारका, दीव, गिर सोमनाथ, जामनगर, जूनागढ़, महिसागर, नर्मदा, नवसारी, पंचमहल, पोरबंदर, राजकोट, सूरत, तापी और वलसाड में भी मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र और असम में भी तेज बारिश की चेतावनी आईएमडी ने महाराष्ट्र, असम, गुजरात और केरल के कई हिस्सों में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में एक घंटे के दौरान 5 से 15 मिमी तक बारिश दर्ज हो सकती है। नवसारी में सात इंच बारिश, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर गुजरात के नवसारी जिले में शुक्रवार सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक करीब 7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि वंसदा तालुका में करीब 13 इंच वर्षा हुई। लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। पूर्णा नदी 23 फीट के खतरे के निशान के मुकाबले 25.5 फीट पर बह रही है। कावेरी नदी 19 फीट के खतरे के निशान के मुकाबले 24 फीट तक पहुंच गई है। अंबिका नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन इसकी निगरानी कर रहा है। 9 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए प्रशासन ने अब तक 9,236 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। जिले में 188 सड़कें बंद कर दी गई हैं, जिनमें 9 राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग और 179 पंचायत सड़कें शामिल हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए तीन SDRF टीमों, एक NDRF टीम और सेना की एक टुकड़ी को अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। IMD की लोगों से अपील मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा है कि— तेज बारिश और आंधी के दौरान पेड़ों या कमजोर ढांचों के नीचे खड़े न हों। यात्रा पर निकलने से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी जरूर लें। नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आईएमडी का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे तक कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
चंबा, एजेंसियां। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। तेज बारिश के चलते कई इलाकों में भूस्खलन हुआ और उफनते नालों से भारी मात्रा में मलबा रिहायशी क्षेत्रों में घुस गया। राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई घरों, दुकानों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है। उदयपुर, घोलटी और भरियाड में सबसे ज्यादा नुकसान उदयपुर, घोलटी, नवोदय मार्ग और भरियाड क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे। भूस्खलन के कारण 12 से अधिक वाहन मलबे में दब गए, जिनमें कारें, ट्रक, बाइक और स्कूटी शामिल हैं। वहीं भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तडोली नाला उफान पर आ गया, जिससे बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आसपास के इलाकों में पहुंच गया। नालों के उफान से घरों और दुकानों में घुसा मलबा तडोली नाले के तेज बहाव से एक स्टोर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कई घरों में मलबा घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुल्तानपुर नाले के उफान में कई दोपहिया वाहन बह गए। भरियाड गांव में पानी का रुख बदलने से कई मकानों तक मलबा पहुंच गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सुरक्षा के लिए लोगों ने खाली किए घर हालात बिगड़ते देख कई परिवारों ने एहतियातन अपने घर खाली कर दिए और पड़ोसियों के घरों में शरण ली। अचानक आई इस आपदा के कारण लोगों को रातभर सुरक्षित स्थानों पर रहना पड़ा। प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन लगातार बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य के साथ नुकसान का आकलन कर रहा है, जबकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में सक्रिय मानसून ने कई राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण जम्मू-कश्मीर, असम, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में हालात गंभीर बने हुए हैं। कई जगह सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी हैं। जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन से सड़कें बंद जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में भूस्खलन और पहाड़ों से बोल्डर गिरने की घटनाओं के चलते कई मार्ग बंद हो गए हैं। एक वाहन पर चट्टान गिरने से दंपति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है, जिससे वैष्णो देवी और केदारनाथ यात्रा पर भी असर पड़ा है। असम में बाढ़ से हालात गंभीर असम में लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। राज्य के 16 जिलों में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई है। राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और सेना की टीमें तैनात की गई हैं। हिमाचल में भी बारिश बनी आफत हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण एक ट्रक नाले में गिर गया, जिसमें पिता-पुत्र की मौत हो गई। कई क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। IMD ने जारी किया अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। असम में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन पूरे राज्य में बारिश का वितरण समान नहीं है। जहां सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना है। लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना वाले जिले: कटिहार किशनगंज अररिया मधेपुरा ऑरेंज अलर्ट जारी: पूर्णिया सहरसा सुपौल मधेपुरा मौसम विभाग का कहना है कि 16 और 17 जुलाई को भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। पटना का मौसम राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से पटना के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह धूप निकलने के बाद दोपहर तक बादल छाने की संभावना बनी हुई है। आसपास के जिलों में भी मौसम का यही रुख देखने को मिल सकता है। मानसून सक्रिय, लेकिन बारिश असमान मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है। उत्तर बिहार और सीमांचल में लगातार वर्षा से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। कई नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, दक्षिण बिहार में कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती प्रभावित हो रही है। पिछले 24 घंटे का मौसम बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। प्रमुख जिले: बेगूसराय बगहा समस्तीपुर पूर्वी चंपारण पटना के कुछ हिस्से वहीं, बुधवार को राज्य का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। कैमूर सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोगों के लिए सलाह भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।
रांची। देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो से तीन दिनों तक पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश की संभावना है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी भारी वर्षा को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में ज्यादा खतरा आईएमडी के अनुसार बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में गरज-चमक के साथ भारी बारिश हो सकती है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 18 जुलाई तक लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। असम और मेघालय में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी जताया गया है। उत्तर और मध्य भारत में भी असर उत्तराखंड में 18 जुलाई तक तथा हिमाचल प्रदेश में 16 जुलाई तक कई स्थानों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मध्य भारत के छत्तीसगढ़, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा विदर्भ में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में 14 और 15 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण और पश्चिम भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। हालांकि तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हीटवेव जैसी स्थिति भी बनी रह सकती है। पश्चिमी भारत में कोंकण, गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी अच्छी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। गुरुवार सुबह से कई इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग (IMD) ने हालात को देखते हुए दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और अगले 24 घंटों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक पर असर लगातार बारिश के कारण दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और कई स्थानों पर यातायात धीमी गति से चलता रहा। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सावधानी बरतने की अपील की है। IMD ने ऑरेंज अलर्ट के साथ दी चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश, गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने की आशंका जताते हुए लोगों को मौसम संबंधी सलाह का पालन करने को कहा है। उड़ानों और दैनिक सेवाओं पर भी पड़ा असर खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी देखने को मिला। कुछ उड़ानों के संचालन में देरी की आशंका को देखते हुए एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है और उन्हें एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जांचने की सलाह दी है। प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले इलाकों में जाने से बचने, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने तथा केवल आवश्यक होने पर ही घर से निकलने की अपील की है। राहत एवं बचाव दलों को भी संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 24 घंटे रहेंगे महत्वपूर्ण मौसम विभाग के अनुसार, मानसून फिलहाल सक्रिय बना हुआ है और दिल्ली-एनसीआर में बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
रांची: झारखंड में भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 11 जून से प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने की संभावना है। कई जिलों में आंधी, वज्रपात और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, झारखंड में मानसून के अगले चार दिनों में संताल परगना के रास्ते प्रवेश करने की उम्मीद जताई गई है। बुधवार शाम राजधानी रांची समेत कई इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। खूंटी में 11 मिमी और रांची व आसपास के क्षेत्रों में करीब 3 मिमी बारिश दर्ज की गई। 11 जून को इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में आंधी, वज्रपात और बारिश की संभावना है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रांची में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 12 जून को भारी बारिश के आसार 12 जून को बोकारो, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और दुमका में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा रांची, खूंटी, हजारीबाग, कोडरमा, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में आंधी, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इन जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 13 जून को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 13 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। दुमका, जामताड़ा, देवघर, धनबाद, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को वज्रपात और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
Jharkhand में इस बार मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। मई के महीने में जहां आमतौर पर भीषण गर्मी पड़ती है, वहीं इस साल राज्य के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश और ठंडी हवाओं ने तापमान को सामान्य से नीचे बनाए रखा है। मौसम विभाग के मुताबिक 1 मार्च से अब तक राज्य के 19 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञ इसे क्लाइमेट चेंज का संकेत मान रहे हैं। आने वाले दिनों में भी राहत मिलने के आसार नहीं हैं, क्योंकि 23 मई तक तेज हवा, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। अप्रैल में गर्मी, मई में बदला मौसम मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल की शुरुआत में झारखंड में भीषण गर्मी पड़ी थी और कई जिलों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। मई में ज्यादातर जिलों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री से नीचे रहा और पूरे राज्य का औसत तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। इसी वजह से लोगों को इस बार सामान्य मई जैसी तेज गर्मी महसूस नहीं हो रही है। किन जिलों में हुई सबसे ज्यादा बारिश? राज्य के छह जिलों में सामान्य से 100 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है: बोकारो हजारीबाग लातेहार रामगढ़ रांची सिमडेगा वहीं चतरा, गढ़वा, लोहरदगा और साहिबगंज में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। 23 मई तक खराब रहेगा मौसम India Meteorological Department के मौसम केंद्र ने अनुमान जताया है कि मई के अंतिम सप्ताह तक मौसम इसी तरह बदला रहेगा। 19 और 20 मई को संताल परगना, मध्य झारखंड, Ranchi और आसपास के इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ बारिश, गर्जन और वज्रपात की भी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी रांची मौसम केंद्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के मुताबिक झारखंड में मौसम का यह बदलता पैटर्न क्लाइमेट चेंज का असर हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले बारिश सामान्य होती थी, लेकिन अब तेज हवा, भारी बारिश और वज्रपात जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सतर्क रहें और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। वज्रपात के समय मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करने और सेल्फी लेने जैसी गतिविधियों से बचने की सलाह भी दी गई है।
मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट, कई जिलों में खतरे की आशंका झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार अस्थिर बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों के लिए 17 और 18 मई को तेज आंधी, गरज-चमक और भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बदलते मौसम पैटर्न और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के कारण राज्य में आंधी-पानी की स्थिति बनी हुई है। 17 मई का मौसम: किन जिलों में ज्यादा असर 17 मई को झारखंड के उत्तर-पूर्वी और मध्य हिस्सों में मौसम सबसे ज्यादा खराब रहने की संभावना है। इसमें शामिल जिले हैं: धनबाद कोडरमा हजारीबाग बोकारो रामगढ़ रांची इन क्षेत्रों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज-चमक के साथ आंधी-बारिश की संभावना है। वहीं गुमला और खूंटी जैसे दक्षिणी जिलों में भी 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। 18 मई का मौसम: कई जिलों में फिर बिगड़ेगा हाल 18 मई को भी मौसम में खास सुधार की उम्मीद नहीं है। इस दिन: कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, रांची और धनबाद चतरा सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र इन सभी इलाकों में आंधी-तूफान और तेज बारिश की संभावना बनी रहेगी। कई स्थानों पर हवाओं की रफ्तार 50-60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। 15 और 16 मई का हाल: पहले से जारी है येलो अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मई को भी झारखंड के अधिकांश हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन दिनों हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। तापमान में उतार-चढ़ाव जारी लगातार बदलते मौसम का असर तापमान पर भी साफ दिख रहा है। मेदिनीनगर: 44°C रांची: 34.5°C (न्यूनतम 19.2°C) जमशेदपुर: 36°C बोकारो: 36.5°C चाईबासा: 36.5°C दिन में तेज गर्मी और शाम को आंधी-बारिश के कारण तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। तेज हवाओं और वज्रपात की संभावना को देखते हुए खुले स्थानों, पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूर रहने की सलाह दी गई है। किसानों और बाहरी काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
Jharkhand में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। मई की तपती गर्मी के बीच राज्य के कई इलाकों में बारिश और तेज हवाओं ने लोगों को राहत दी है, लेकिन साथ ही मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए सतर्क रहने की चेतावनी भी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 19 मई तक राज्यभर में गरज-चमक, तेज हवा और बारिश का दौर जारी रह सकता है। राजधानी Ranchi में बुधवार दोपहर और रात को हुई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया। शहर में करीब 20 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि कई इलाकों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। तेज हवा की वजह से कुछ क्षेत्रों में लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना भी करना पड़ा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को राज्य में सबसे ज्यादा बारिश Chaibasa में दर्ज की गई। वहीं तापमान में भी गिरावट देखने को मिली। रांची का अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा Jamshedpur में 36 डिग्री, Bokaro में 34.1 डिग्री और चाईबासा में 36.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। 14 मई को कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक 14 मई को राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान आने की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। 15 और 16 मई के लिए ऑरेंज अलर्ट 15 मई को Godda, Sahibganj, Pakur, Dumka, Deoghar, Jamtara और Giridih जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी, बारिश और वज्रपात को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 16 मई को रांची समेत पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में भी खराब मौसम की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने इन इलाकों में तेज हवा, गर्जन और बिजली गिरने की आशंका जताई है। लोगों से सतर्क रहने की अपील मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि आंधी और बिजली गिरने के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर नजर बनाए रखें। 19 मई तक जारी रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के अनुसार 19 मई तक राज्य के अधिकांश जिलों में मौसम का असर बना रहेगा। इस दौरान तेज हवा, वज्रपात और बारिश की संभावना को देखते हुए कई जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। 17 मई को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार और लोहरदगा को छोड़कर ज्यादातर जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट Jharkhand में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं मौसम विभाग ने 9 और 10 मई को तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से 13 मई तक राज्यभर में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। आज कैसा रहेगा मौसम? 8 मई को झारखंड के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों को छोड़कर बाकी इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। 9 और 10 मई को इन जिलों में ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 9 और 10 मई को Ranchi, Dhanbad, Bokaro, Ramgarh, Khunti, Lohardaga और Gumla समेत उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी जिलों में तेज मौसम का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। साथ ही वज्रपात और बारिश की भी संभावना जताई गई है। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में भी तेज हवा और बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। 13 मई तक जारी रह सकता है मौसम का असर मौसम विभाग का कहना है कि 13 मई तक राज्य में बादल छाए रह सकते हैं। दिन में उमस और गर्मी बनी रहेगी, जबकि दोपहर बाद कई इलाकों में गरज के साथ बारिश हो सकती है। पूर्वी सिंहभूम में हुई सबसे ज्यादा बारिश गुरुवार को कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। Ranchi में दिनभर तेज धूप के बाद शाम में बारिश हुई। वहीं East Singhbhum के दारीसाई इलाके में सबसे ज्यादा 14 मिमी बारिश दर्ज की गई। तापमान की बात करें तो रांची का अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि Medininagar सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।