झारखंड

Jharkhand Braces for Storms and Heavy Rain

Jharkhand Weather: झारखंड में तेज आंधी-बारिश का अलर्ट, कई जिलों में 60 KMPH तक चलेगी हवा

surbhi मई 8, 2026 0
Dark clouds and strong winds over Jharkhand as IMD issues storm and rain alert
Jharkhand Storm And Rain Alert

मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

Jharkhand में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं मौसम विभाग ने 9 और 10 मई को तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से 13 मई तक राज्यभर में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है।

आज कैसा रहेगा मौसम?

8 मई को झारखंड के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों को छोड़कर बाकी इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।

9 और 10 मई को इन जिलों में ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार 9 और 10 मई को Ranchi, Dhanbad, Bokaro, Ramgarh, Khunti, Lohardaga और Gumla समेत उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी जिलों में तेज मौसम का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। साथ ही वज्रपात और बारिश की भी संभावना जताई गई है। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं राज्य के बाकी हिस्सों में भी तेज हवा और बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

13 मई तक जारी रह सकता है मौसम का असर

मौसम विभाग का कहना है कि 13 मई तक राज्य में बादल छाए रह सकते हैं। दिन में उमस और गर्मी बनी रहेगी, जबकि दोपहर बाद कई इलाकों में गरज के साथ बारिश हो सकती है।

पूर्वी सिंहभूम में हुई सबसे ज्यादा बारिश

गुरुवार को कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। Ranchi में दिनभर तेज धूप के बाद शाम में बारिश हुई। वहीं East Singhbhum के दारीसाई इलाके में सबसे ज्यादा 14 मिमी बारिश दर्ज की गई।

तापमान की बात करें तो रांची का अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि Medininagar सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jharkhand students protesting over JPSC-JSSC exam issues and demanding Rahul Gandhi’s intervention
Jharkhand Student Protest: छात्रों का ऐलान- राहुल गांधी के झारखंड आने तक जारी रहेगा आंदोलन

रांची: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन विधानसभा घेराव के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. सोमवार देर शाम विद्यार्थी जयपाल सिंह स्टेडियम स्थित अनशन स्थल पर वापस पहुंचे और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान छात्राओं पर लाठीचार्ज किए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया. आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है. राहुल गांधी के झारखंड आने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान आंदोलनरत छात्रों ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जब तक राहुल गांधी झारखंड नहीं आते, उनका आंदोलन जारी रहेगा. छात्रों ने कहा कि राहुल गांधी को झारखंड बुलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभियान चलाया जाएगा. छात्रों का कहना है कि वे अपने मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना चाहते हैं और राहुल गांधी से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे. छात्राओं पर लाठीचार्ज का लगाया आरोप जयपाल सिंह स्टेडियम स्थित अनशन स्थल पर पहुंचने के बाद छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जतायी. छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं पर भी लाठीचार्ज किया गया. आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं को घसीटकर पीटा. छात्रों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि सरकार को बल प्रयोग के बजाय उनकी मांगों पर बातचीत करनी चाहिए. हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई को लेकर अलग पक्ष सामने आया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही गयी है. भूखे-प्यासे पहुंचे छात्रों को मिली खिचड़ी विधानसभा घेराव के बाद बड़ी संख्या में छात्र वापस अनशन स्थल पर पहुंचे. कई विद्यार्थी लंबे समय तक प्रदर्शन में शामिल रहे. इसके बाद जयपाल सिंह स्टेडियम में विद्यार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गयी. चैती दुर्गापूजा मंदिर के पदाधिकारियों ने आंदोलनरत छात्रों के बीच खिचड़ी का वितरण किया. इससे लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों को राहत मिली. जयराम महतो को भाषण देने से छात्रों ने रोका सोमवार सुबह आंदोलनकारी विद्यार्थी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से तिरंगा लेकर पुराने विधानसभा भवन की ओर मार्च के लिए निकले थे. बड़ी संख्या में छात्र पैदल विधानसभा की ओर बढ़े, जबकि कुछ विद्यार्थी ऑटो और ई-रिक्शा से भी वहां पहुंचे. इसी दौरान जेएलकेएम विधायक जयराम महतो भी छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए. हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें मंच से भाषण देने से रोक दिया. छात्रों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन का नेतृत्व विद्यार्थी खुद कर रहे हैं और उनकी मांगों को राजनीतिक मंच देने के बजाय सीधे सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं. आंदोलन आगे भी जारी रहने के संकेत विधानसभा घेराव के बाद छात्रों के तेवर से साफ है कि JPSC-JSSC विवाद को लेकर आंदोलन अभी खत्म होने वाला नहीं है. छात्र परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया समेत अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं. अब राहुल गांधी को झारखंड बुलाने के ऐलान के बाद आंदोलन का राजनीतिक असर भी बढ़ने की संभावना है.  

kalpana अगस्त 11, 2026 0
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झारखंड के छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएगी भाजपा, देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस

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रांची में छात्र आंदोलन में बाहरी तत्वों की दखल पर प्रशासन सख्त, डीसी बोले- चिन्हित कर होगी कानूनी कार्रवाई

रांची: JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच जिला प्रशासन ने बाहरी और असामाजिक तत्वों की कथित भूमिका को लेकर सख्त रुख अपनाया है. सोमवार देर रात डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसएसपी राकेश रंजन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधानसभा घेराव के दौरान हुई घटनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी दी. डीसी ने कहा कि पिछले 14 दिनों से छात्र शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सोमवार को प्रदर्शन के दौरान कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों के शामिल होने से स्थिति बिगड़ी. प्रशासन ने ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के संकेत दिये हैं. ड्रोन और वीडियोग्राफी से रखी जा रही नजर डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर लगातार वीडियोग्राफी करायी जा रही है. इसके अलावा ड्रोन कैमरे से भी पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग की गयी है. उन्होंने कहा कि बाहरी तत्व यह न समझें कि प्रशासन की नजर उन पर नहीं है. प्रशासन अब प्रदर्शन के दौरान बनाये गये वीडियो और ड्रोन फुटेज की जांच करेगा. इसमें जिन लोगों की पहचान होगी, उनकी पृष्ठभूमि और पुरानी गतिविधियों की भी जांच की जायेगी. इसके बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. छात्रों की भूमिका की भी होगी जांच प्रदर्शन के दौरान हिंसा या उपद्रव में छात्रों के शामिल होने के सवाल पर डीसी ने कहा कि फुटेज के आधार पर पुलिस जांच करेगी. जिस व्यक्ति की पहचान होगी, उसकी पुरानी हिस्ट्री भी देखी जायेगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले छात्रों और उपद्रव करने वालों के बीच अंतर किया जाएगा. एसएसपी बोले- सोशल मीडिया वीडियो से भड़काने की कोशिश एसएसपी राकेश रंजन ने आरोप लगाया कि आंदोलन के बीच एक ऐसी ‘मशीनरी’ सक्रिय है, जो छोटे-छोटे वीडियो और रील सोशल मीडिया पर वायरल कर रही है. उनका दावा है कि इन वीडियो का उद्देश्य छात्रों को भड़काना और माहौल को तनावपूर्ण बनाना है. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट पर तुरंत भरोसा न करें और शांति बनाये रखें. एसएसपी ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन छात्रों की मांगों को सुन रहे हैं. पुलिस को करना पड़ा हल्का बल प्रयोग सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर एसएसपी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है. झारखंड बंद को लेकर प्रशासन अलर्ट मंगलवार को प्रस्तावित झारखंड बंद को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने पर रोक नहीं है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. स्कूलों को लेकर भी प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा है. बंद के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ायी गयी है.  

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Tribal communities participating in livelihood and forest conservation initiatives at Palamu Tiger Reserve
पीटीआर की नई पहल से वन्यजीव संरक्षण के साथ बदल रही आदिवासियों की जिंदगी, हुनर से रोजगार तक का खुल रहा रास्ता

पलामू/बेतला: झारखंड का एकमात्र पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इन दिनों वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आदिवासी और आदिम जनजाति समुदायों के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में भी काम कर रहा है. पीटीआर प्रबंधन का मानना है कि जंगल और वन्यजीवों का स्थायी संरक्षण तभी संभव है, जब स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण की प्रक्रिया से जोड़ा जाए और उनके लिए रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किये जाएं. इसी उद्देश्य से पीटीआर में ‘जनभागीदारी से वन संरक्षण’ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत ग्रामीणों के पारंपरिक हुनर, आजीविका और स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इससे एक ओर जंगलों पर दबाव कम करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. आदिवासियों के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की तैयारी पीटीआर प्रबंधन जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों की जीवनशैली और आजीविका को लेकर विस्तृत सर्वे कर रहा है. इसमें उनके पारंपरिक हुनर, आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल की जानकारी जुटायी जा रही है. बांस शिल्प, औषधीय ज्ञान और अन्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक बाजार से जोड़कर ग्रामीणों को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है. प्रबंधन का मानना है कि स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़ने से ग्रामीणों की आय बढ़ेगी और जंगल पर उनकी निर्भरता भी धीरे-धीरे कम होगी. जाली मॉडल से महुआ संग्रह में आया बदलाव पीटीआर क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन महुआ संग्रह भी है. पहले महुआ चुनने के लिए कई जगहों पर पेड़ों के नीचे आग लगा दी जाती थी. इससे जंगल और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता था. पीटीआर प्रबंधन ने इसके विकल्प के तौर पर जाली मॉडल को बढ़ावा दिया है. इसमें महुआ के पेड़ों के नीचे जाल बिछाया जाता है, जिससे महुआ जमीन पर गिरने के बाद आसानी से और साफ तरीके से एकत्र किया जा सके. इससे आग लगाने की जरूरत कम हुई है और ग्रामीणों को बेहतर गुणवत्ता का महुआ मिलने से अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ी है. ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ से महिलाओं को रोजगार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पीटीआर में ‘बाघ दीदी’ और ‘वनजीवी दीदी’ जैसी पहल शुरू की गयी है. इसके तहत गांवों की शिक्षित महिलाओं को कम्युनिटी एंबेसडर के रूप में जोड़ा गया है. ये महिलाएं ग्रामीणों को वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण पर्यटन से भी जुड़ रही हैं. इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और गांवों में संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है. ‘बाघ देवता’ के जरिए आस्था और संरक्षण को जोड़ा पीटीआर ने आदिवासी समाज की पारंपरिक मान्यताओं को भी वन संरक्षण से जोड़ने की पहल की है. आदिवासी समुदायों की लोककथाओं और धार्मिक आस्था में बाघ को रक्षक के रूप में देखा जाता है. इसी भावनात्मक जुड़ाव को संरक्षण का माध्यम बनाया जा रहा है. गांवों के सरना स्थलों और पवित्र उपवनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है. इससे वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिल रही है. जंगल कैंप से स्थानीय युवाओं को रोजगार पीटीआर की ओर से आयोजित ‘जंगल कैंप’ भी स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम बन रहा है. इन कैंपों में पर्यटकों को आदिवासी जीवनशैली, संस्कृति और पारंपरिक खान-पान से परिचित कराया जाता है. इससे स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड, ट्रैकिंग एक्सपर्ट और होम-स्टे संचालन जैसे कामों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है. पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. कोर एरिया से स्वैच्छिक विस्थापन में पुनर्वास पर जोर पीटीआर के कोर एरिया में रहने वाले ग्रामीण परिवारों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया भी चल रही है. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस के तहत हाल ही में कोर जोन स्थित जैगीर गांव का विस्थापन पूरा किया गया. विस्थापित परिवारों को पोलपोल के पास करीब 75 एकड़ जमीन पर सड़क, बिजली और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ बसाने की प्रक्रिया की गयी है. प्रति परिवार 15 लाख रुपये तक के मुआवजे या भूमि विकल्प का प्रावधान बताया गया है. इससे एक तरफ कोर एरिया में मानवीय दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ विस्थापित परिवारों को बेहतर सुविधाओं के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा. ‘आदिवासियों का जीवन स्तर सुधरेगा, तभी जंगल बचेगा’ पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने कहा कि बाघ और जंगल का संरक्षण केवल वन विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है. इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जंगल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के साथ ही उन्हें रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है. पीटीआर की योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है.  

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