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देशभर में मानसून का कहर: जम्मू में भूस्खलन से रास्ते बंद, असम में बाढ़ से बढ़ा मौतों का आंकड़ा

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
Heavy Rainfall
Heavy Rainfall

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में सक्रिय मानसून ने कई राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण जम्मू-कश्मीर, असम, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में हालात गंभीर बने हुए हैं। कई जगह सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि राहत और बचाव कार्य तेज़ी से जारी हैं।

 

जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन से सड़कें बंद

 

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में भूस्खलन और पहाड़ों से बोल्डर गिरने की घटनाओं के चलते कई मार्ग बंद हो गए हैं। एक वाहन पर चट्टान गिरने से दंपति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित है, जिससे वैष्णो देवी और केदारनाथ यात्रा पर भी असर पड़ा है।

 

असम में बाढ़ से हालात गंभीर

 

असम में लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। राज्य के 16 जिलों में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई है। राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और सेना की टीमें तैनात की गई हैं।

 

हिमाचल में भी बारिश बनी आफत

 

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण एक ट्रक नाले में गिर गया, जिसमें पिता-पुत्र की मौत हो गई। कई क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने से लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

 

IMD ने जारी किया अलर्ट

 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। असम में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक और तेज बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी मानसून के सक्रिय रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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AAI Recruitment 2026
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में 389 पदों पर भर्ती, मैनेजर और जूनियर एग्जीक्यूटिव के लिए मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने विभिन्न पदों पर भर्ती का ऐलान किया है। इस भर्ती के तहत मैनेजर और जूनियर एग्जीक्यूटिव के कुल 389 पदोंको भरा जाएगा। इंजीनियरिंग और अन्य योग्यताओं वाले उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।   किन पदों पर होगी भर्ती   AAI की इस भर्ती में मुख्य रूप से मैनेजर और जूनियर एग्जीक्यूटिव पद शामिल हैं। अलग-अलग विभागों के अनुसार पदों का बंटवारा किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में योग्यता और पदों की पूरी जानकारी जरूर जांच लें।   योग्यता और चयन प्रक्रिया   इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया में आमतौर पर ऑनलाइन परीक्षा, इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन जैसे चरण शामिल हो सकते हैं।   एयरपोर्ट सेक्टर में नौकरी का मौका   एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया देश के विमानन क्षेत्र की प्रमुख सरकारी संस्थाओं में शामिल है। AAI में नौकरी को युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है क्योंकि इसमें सरकारी सुविधाओं के साथ विमानन क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलता है।   आवेदन और जरूरी सावधानी   इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले AAI की आधिकारिक भर्ती वेबसाइट पर जाकर नोटिफिकेशन पढ़ना चाहिए। आवेदन की तारीख, फीस, उम्र सीमा और परीक्षा पैटर्न की जानकारी आधिकारिक विज्ञापन में दी जाएगी। AAI अपनी वेबसाइट पर भर्ती से जुड़ी सूचनाएं जारी करता है।

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
अमरनाथ यात्रा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बाबा बर्फानी के दर्शन

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा सुचारु रूप से जारी, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किए गए अतिरिक्त इंतजाम

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में शहीद पुलिस हेड कांस्टेबल

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राष्ट्रीय प्रसारण दिवस पर आकाशवाणी और रेडियो प्रसारण का इतिहास
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस आज, आकाशवाणी की ऐतिहासिक विरासत और सार्वजनिक प्रसारण की भूमिका को किया गया याद

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज देशभर में राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत की याद में हर वर्ष 23 जुलाई को मनाया जाता है। वर्ष 1927 में इसी दिन मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) से इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) ने पहली बार रेडियो प्रसारण शुरू किया था। बाद में यही व्यवस्था विकसित होकर ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) के रूप में देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रसारण नेटवर्क बनी। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती ने आकाशवाणी की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया।   देश को जोड़ने में आकाशवाणी की अहम भूमिका   आकाशवाणी ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज के डिजिटल युग तक देश को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध, चुनाव और राष्ट्रीय आपातकाल जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर आकाशवाणी लोगों तक विश्वसनीय और त्वरित जानकारी पहुंचाने का प्रमुख माध्यम रही है। आज भी देश के दूरदराज़ इलाकों में रेडियो सूचना का एक भरोसेमंद स्रोत बना हुआ है।   डिजिटल दौर में भी कायम है प्रसारण की अहमियत   विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद सार्वजनिक प्रसारण की विश्वसनीयता आज भी बनी हुई है। आकाशवाणी और दूरदर्शन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिए अपनी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे युवा वर्ग भी इनसे तेजी से जुड़ रहा है।   भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण में बड़ा योगदान   आकाशवाणी ने देश की विभिन्न भाषाओं, लोक संगीत, साहित्य, संस्कृति और क्षेत्रीय परंपराओं को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके कार्यक्रमों ने दशकों तक ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने का काम किया है।   सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दी शुभकामनाएं   राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा प्रसार भारती ने रेडियो प्रसारण से जुड़े वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। मंत्रालय ने कहा कि बदलती तकनीक के साथ सार्वजनिक प्रसारण सेवाएं भी लगातार आधुनिक हो रही हैं और भविष्य में विश्वसनीय सूचना के सबसे मजबूत माध्यमों में अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में खुदरा (रिटेल) कारोबार तेजी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती उपभोक्ता मांग, शहरीकरण और छोटे शहरों में बढ़ते बाजार को देखते हुए टाटा समूह, डीमार्ट (Avenue Supermarts), रिलायंस रिटेल, शॉपर्स स्टॉप और अन्य प्रमुख रिटेल कंपनियां नए स्टोर खोलने और अपने नेटवर्क का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में रिटेल सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिल सकता है।   छोटे शहरों पर कंपनियों का बढ़ा फोकस   रिटेल कंपनियां अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती आय, बेहतर बुनियादी ढांचे और उपभोक्ताओं की बदलती खरीदारी की आदतों को देखते हुए कंपनियां नए स्टोर खोलने की योजना बना रही हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।   सुपरमार्केट और फैशन स्टोर के विस्तार पर जोर   डीमार्ट, रिलायंस रिटेल और टाटा समूह अपने सुपरमार्केट, हाइपरमार्केट और फैशन स्टोर के नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कंपनियां ग्राहकों को एक ही स्थान पर किराना, फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और दैनिक उपयोग का सामान उपलब्ध कराने के लिए बड़े प्रारूप पर भी निवेश बढ़ा रही हैं।   ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार का होगा बेहतर तालमेल   विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब ओम्नी-चैनल रणनीति पर जोर दे रही हैं, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर देकर नजदीकी स्टोर से सामान प्राप्त कर सकेंगे, जिससे डिलीवरी समय कम होगा और खरीदारी का अनुभव बेहतर बनेगा।   रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा   रिटेल सेक्टर के विस्तार से हजारों नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। नए स्टोर खुलने से बिक्री, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, सप्लाई चेन और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।   खपत बढ़ने से रिटेल सेक्टर को मिल रहा सहारा   विश्लेषकों के अनुसार, भारत में बढ़ती उपभोक्ता मांग, संगठित रिटेल की हिस्सेदारी में वृद्धि और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग से रिटेल उद्योग को लगातार मजबूती मिल रही है। इसी कारण बड़ी कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए अपने स्टोर नेटवर्क और निवेश योजनाओं का विस्तार कर रही हैं।  

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