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इन्फोसिस आज जारी करेगी जून तिमाही के नतीजे, आय, मार्जिन और FY27 आउटलुक पर बाजार की नजर

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Infosys
Infosys to release Quarter Results Today

बेंगलुरु, एजेंसियां। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस आज वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी करेगी। कंपनी का बोर्ड आज परिणामों को मंजूरी देगा, जिसके बाद शाम को प्रबंधन निवेशकों और विश्लेषकों के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल भी करेगा। बाजार की सबसे अधिक नजर कंपनी के राजस्व, शुद्ध लाभ, ऑपरेटिंग मार्जिन और पूरे वित्त वर्ष (FY27) के ग्रोथ आउटलुक पर रहेगी।

 

राजस्व और मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद

 

ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि जून तिमाही में इन्फोसिस के राजस्व में सालाना आधार पर अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। हालांकि शुद्ध लाभ और मार्जिन पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ग्राहकों द्वारा आईटी खर्च में सतर्कता और एआई से जुड़ी निवेश रणनीतियों का असर देखने को मिल सकता है।

 

FY27 की गाइडेंस होगी सबसे अहम

 

विश्लेषकों के अनुसार, इस बार केवल तिमाही नतीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण कंपनी की FY27 रेवेन्यू गाइडेंस होगी। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि इन्फोसिस पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान में कोई बदलाव करती है या नहीं। अमेरिका और यूरोप में आईटी खर्च की स्थिति तथा नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी बाजार की धारणा तय करेगी।

 

डील पाइपलाइन और AI रणनीति पर रहेगा फोकस

 

कंपनी की बड़ी डील, ऑर्डर बुक, जनरेटिव एआई सेवाओं की मांग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर प्रबंधन की टिप्पणी को निवेशक ध्यान से सुनेंगे। हाल के महीनों में आईटी कंपनियां एआई आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं और इन्फोसिस की रणनीति को लेकर भी बाजार में काफी उत्सुकता है।

 

शेयर में उतार-चढ़ाव की संभावना

 

नतीजों से पहले इन्फोसिस के शेयर दबाव में रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी के नतीजे या आउटलुक बाजार की उम्मीदों से बेहतर या कमजोर रहते हैं, तो अगले कारोबारी सत्र में शेयर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर और सेंसेक्स-निफ्टी की चाल पर भी पड़ सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Reserve Bank of India
RBI का बयान— बेहतर लिक्विडिटी से बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ को मिल रहा मजबूत समर्थन

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि बैंकिंग प्रणाली में बेहतर होती लिक्विडिटी (नकदी उपलब्धता) के कारण ऋण वितरण (क्रेडिट ग्रोथ) को मजबूत समर्थन मिल रहा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, पर्याप्त नकदी, मजबूत जमा आधार और बेहतर वित्तीय परिस्थितियों की वजह से बैंक उद्योग, कृषि, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध करा पा रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।   बैंकों की ऋण देने की क्षमता में हुआ सुधार   आरबीआई के अनुसार, हाल के महीनों में बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इससे बैंकों के पास कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है और वे विभिन्न क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रहे हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत लिक्विडिटी आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।   उद्योग और खुदरा ऋण में बनी हुई है तेजी   आरबीआई ने कहा कि उद्योग, आवास, वाहन, व्यक्तिगत ऋण और एमएसएमई सेक्टर में ऋण की मांग बनी हुई है। बेहतर वित्तीय माहौल के कारण बैंक इन क्षेत्रों में लगातार कर्ज उपलब्ध करा रहे हैं। इससे निवेश, उपभोग और उत्पादन गतिविधियों को भी समर्थन मिल रहा है।   जमा में वृद्धि से मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक के मुताबिक, बैंकों में जमा (डिपॉजिट) बढ़ने से भी लिक्विडिटी की स्थिति मजबूत हुई है। पर्याप्त जमा होने से बैंकों को कम लागत पर संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे वे प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण देने में सक्षम हैं।   महंगाई और वित्तीय स्थिरता पर भी रहेगी नजर   आरबीआई ने स्पष्ट किया कि वह लिक्विडिटी बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय स्थिरता पर लगातार नजर रखे हुए है। आवश्यकता पड़ने पर नकदी प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि बैंकिंग प्रणाली संतुलित बनी रहे।   अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहती है और ऋण वितरण की रफ्तार मजबूत रहती है, तो इसका सकारात्मक असर निवेश, रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और देश की आर्थिक वृद्धि पर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि आरबीआई बैंकिंग क्षेत्र में नकदी की स्थिति और क्रेडिट ग्रोथ पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

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Stock Market: शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे फिसला

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कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारत के आयात बिल और महंगाई पर बढ़ी चिंता

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अमेरिका के नए फार्मा टैरिफ से दवा कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिकी प्रशासन द्वारा फार्मास्युटिकल उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने की संभावना जताए जाने के बाद भारतीय शेयर बाजार में दवा कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया है। बुधवार के कारोबार में कई प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरे फार्मा सेक्टर में बिकवाली का माहौल देखने को मिला।   निर्यात पर असर की आशंका से निवेशक सतर्क   विश्लेषकों का कहना है कि भारत की कई बड़ी दवा कंपनियों का कारोबार अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में यदि अमेरिका नए आयात शुल्क लागू करता है, तो भारतीय कंपनियों की निर्यात लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते निवेशकों ने फार्मा शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।   प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में गिरावट   कारोबार के दौरान सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, सिप्ला, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो फार्मा जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। हालांकि कुछ कंपनियों में गिरावट सीमित रही, लेकिन पूरे सेक्टर में नकारात्मक रुख साफ दिखाई दिया।   विशेषज्ञों की नजर अमेरिकी फैसले पर   बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है। यदि टैरिफ से जुड़े प्रस्ताव को लागू किया जाता है, तो भारतीय दवा उद्योग की निर्यात रणनीति और आय पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम नीति स्पष्ट होने तक बाजार में इस सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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NSE launches the Nifty 500 Ahimsa Index to promote ethical investing based on non-violence and responsible business practices.
NSE ने लॉन्च किया Nifty 500 Ahimsa Index, रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग शेयरों की नो एंट्री, जानें क्या है नया इंडेक्स

Share Market News: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने निवेशकों के लिए एक नया और अनोखा इंडेक्स Nifty 500 Ahimsa Index लॉन्च किया है। यह भारत का पहला ऐसा इंडेक्स है, जिसका उद्देश्य एथिकल (नैतिक) और जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देना है। इस इंडेक्स में केवल उन कंपनियों को शामिल किया गया है, जो अपने कारोबार के दौरान जानबूझकर जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचातीं और जिनकी कार्यप्रणाली अहिंसा के सिद्धांतों के अनुरूप मानी जाती है। क्या है Nifty 500 Ahimsa Index? NSE ने इस इंडेक्स को Ahimsagain Foundation के सहयोग से उसके Ahimsa Investment Movement (AIM) फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया है। यह फ्रेमवर्क कंपनियों का मूल्यांकन इन आधारों पर करता है: कंपनी के प्रोडक्ट्स दी जाने वाली सर्विस बिजनेस मॉडल संचालन की प्रक्रिया इन सभी पहलुओं को देखकर तय किया जाता है कि कंपनी अहिंसा और नैतिक कारोबारी सिद्धांतों के कितनी करीब है। निवेशकों को क्या होगा फायदा? Nifty 500 Ahimsa Index भविष्य में कई नए निवेश उत्पादों का आधार बनेगा। इसके आधार पर तैयार किए जा सकेंगे: Exchange Traded Funds (ETF) Index Funds अन्य थीम आधारित निवेश उत्पाद इससे उन निवेशकों को विकल्प मिलेगा जो ESG (Environmental, Social and Governance) और Ethical Investing में रुचि रखते हैं। किन कंपनियों को मिली जगह? NSE के अनुसार, इस इंडेक्स में कई प्रमुख सेक्टरों की कंपनियों को शामिल किया गया है, जैसे: आईटी और सॉफ्टवेयर ऑटोमोबाइल रियल एस्टेट अन्य गैर-विवादित सेक्टर इन कंपनियों का चयन AIM फ्रेमवर्क के तहत किया गया है। रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग सेक्टर क्यों बाहर? NSE Indices की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार: रिलायंस ग्रुप की कोई भी कंपनी इस इंडेक्स में शामिल नहीं है। किसी भी बैंकिंग शेयर को भी इसमें जगह नहीं मिली है। हालांकि, एक्सचेंज ने इनके बाहर रहने का अलग से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। चयन AIM फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है। कैसे होता है कंपनियों का चयन? Ahimsagain Framework कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटता है: Green Band – अहिंसा के मानकों पर बेहतर प्रदर्शन Orange Band – मध्यम स्तर Red Band – निर्धारित मानकों पर कमजोर केवल Green Band में आने वाली कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया जाता है, जबकि Orange और Red श्रेणी की कंपनियां बाहर रहती हैं। क्या है Ahimsagain Foundation का उद्देश्य? Ahimsagain Foundation का कहना है कि इस पहल का मकसद निवेशकों की पूंजी को ऐसी कंपनियों की ओर आकर्षित करना है जो करुणा, दया और नैतिक कारोबारी मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं। संस्था का मानना है कि नैतिक निवेश करना चाहने वाले निवेशकों के पास अब तक स्पष्ट विकल्पों की कमी थी और यह इंडेक्स उस कमी को पूरा करेगा।  

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