Share Market Opening, 29 July 2026: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कारोबार की शुरुआत मजबूत तेजी के साथ की। पिछले सत्र की मामूली कमजोरी के बाद आज शुरुआती कारोबार में खरीदारी का जोर दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 800 अंक उछल गया, जबकि निफ्टी 24,200 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा मजबूती IT शेयरों में देखने को मिली। सुबह करीब 9:40 बजे BSE Sensex 777.71 अंक यानी 1.01% की बढ़त के साथ 77,543.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 218.85 अंक यानी 0.91% चढ़कर 24,204.20 पर पहुंच गया। घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों के साथ-साथ सेक्टरल खरीदारी से भी सपोर्ट मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए एक अहम जोखिम बनी हुई है। IT शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरुआती कारोबार में IT सेक्टर निवेशकों के पसंदीदा क्षेत्रों में रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। Infosys सबसे मजबूत शेयरों में रहा और शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 3.5% की तेजी दिखी। इसके अलावा L&T, HUL, TCS, Tech Mahindra, Bharti Airtel और Bajaj Finance जैसे शेयरों में भी खरीदारी रही। करीब 9:30 बजे प्रमुख शेयरों की स्थिति: Infosys: +3.23% L&T: +2.90% HUL: +2.58% Bharti Airtel: +1.61% TCS: +1.54% HDFC Bank: +1.50% HCL Tech: +1.34% Tech Mahindra: +1.21% ITC: +1.12% M&M: +1.06% Bajaj Finance: +0.95% वहीं BEL, Indigo, Asian Paints, Power Grid, Trent और Titan जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे। Nifty में भी खरीदारी का जोर Nifty 50 में Infosys, L&T और Eternal शुरुआती कारोबार में प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक माहौल दिखा। Nifty Midcap करीब 0.54% और Nifty Smallcap करीब 0.66% ऊपर कारोबार कर रहे थे। सेक्टर की बात करें तो Nifty IT और Nifty Chemical ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि Nifty Realty और Nifty Oil & Gas कमजोर नजर आए। रुपये में भी शुरुआती मजबूती शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 95.70 के स्तर पर खुला। हालांकि, मुद्रा बाजार और शेयर बाजार दोनों पर वैश्विक घटनाक्रमों का असर बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बाजार की तेजी के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच Brent crude की कीमत में करीब 5% की तेजी आई और यह लगभग $88 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। इसलिए बाजार की आगे की दिशा में तेल की कीमतें भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर बुधवार की शुरुआती तेजी से बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बना है, लेकिन वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। IT शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। अब देखना होगा कि शुरुआती तेजी कारोबार के दौरान कायम रहती है या बाजार ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का सामना करता है।
Exam Reform Task Force: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस समिति की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक और देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है। NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई 2026) को सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि सरकार भारतीय परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई गई है, जो परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीक आधारित समाधान सुझाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं का विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। कौन हैं नंदन नीलेकणी? नंदन मोहनराव नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1978 में उन्होंने पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से अपने करियर की शुरुआत की। साल 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। कंपनी के शुरुआती विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और वर्ष 2002 में वह इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बने। उनके नेतृत्व में इंफोसिस ने वैश्विक आईटी उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बनाई। आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणी का सबसे बड़ा योगदान भारत की आधार (Aadhaar) परियोजना को माना जाता है। वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके नेतृत्व में आधार दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम बना, जिसने सरकारी सेवाओं, सब्सिडी वितरण, बैंकिंग और डिजिटल गवर्नेंस को नई दिशा दी। आज आधार भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। UPI और डिजिटल इंडिया में भी अहम भूमिका नंदन नीलेकणी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के विकास और डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज UPI दुनिया की सबसे सफल डिजिटल पेमेंट प्रणालियों में गिना जाता है और भारत की तकनीकी उपलब्धियों का प्रमुख उदाहरण है। परीक्षा सुधार में क्या होगी भूमिका? सरकार की ओर से गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक और तकनीकी सुधार करना है। समिति निम्नलिखित विषयों पर सुझाव देगी— प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को मजबूत बनाना। पेपर लीक रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल। उम्मीदवारों की पहचान और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना। परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना। क्यों अहम है यह टास्क फोर्स? पिछले कुछ वर्षों में NEET-UG, UGC-NET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि नंदन नीलेकणी के तकनीकी अनुभव और डिजिटल गवर्नेंस की समझ से ऐसी प्रणाली विकसित की जा सकेगी, जिससे भविष्य में परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकें।
बेंगलुरु, एजेंसियां। इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति ने भारत में अनुसंधान (Research) और नवाचार (Innovation) पर अधिक निवेश की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनना है, तो सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। 'केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ना होगा' नारायण मूर्ति ने कहा कि भारत ने आईटी सेवाओं और डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश नई तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और उत्पाद आधारित नवाचार पर अधिक ध्यान दे। उनके अनुसार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने के लिए केवल तकनीक का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई तकनीकों का विकास भी भारत में ही होना चाहिए। उन्होंने युवाओं, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताते हुए कहा कि अनुसंधान की मजबूत संस्कृति विकसित किए बिना विश्वस्तरीय नवाचार संभव नहीं है। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और उद्योगों को मिलकर ऐसे समाधान विकसित करने होंगे जो वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ सकें। निजी क्षेत्र की भूमिका पर दिया जोर नारायण मूर्ति ने कहा कि रिसर्च केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने निजी कंपनियों से भी अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करने और लंबी अवधि की सोच के साथ काम करने की अपील की। उनका कहना है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में निवेश से ही भारत आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
बेंगलुरु, एजेंसियां। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस ने कर्मचारियों के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि (Salary Hike) की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू करने का ऐलान किया है। कंपनी के सीईओ सलील पारेख ने कहा कि वेतन वृद्धि को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अधिकांश कर्मचारियों को अक्टूबर में बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा, जबकि वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन जनवरी 2027 तक पूरा किया जाएगा। हालांकि कंपनी ने वेतन वृद्धि की प्रतिशत दर का खुलासा नहीं किया है। 20 हजार फ्रेशर्स की भर्ती पर कायम कंपनी का फोकस इन्फोसिस ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 20,000 फ्रेशर्स की भर्ती का लक्ष्य बरकरार रहेगा। कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में ही 4,000 से अधिक नए ग्रेजुएट्स को नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए नई प्रतिभाओं में निवेश जारी रखा जाएगा। मिश्रित कारोबारी माहौल के बीच कर्मचारियों को राहत वैश्विक आईटी उद्योग में मांग की सुस्ती और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद इन्फोसिस ने वेतन वृद्धि और कैंपस हायरिंग जारी रखने का फैसला लिया है। कंपनी का मानना है कि कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना और नई प्रतिभाओं को जोड़ना उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। तिमाही नतीजों के साथ इस घोषणा को कर्मचारियों और आईटी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बेंगलुरु, एजेंसियां। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इन्फोसिस आज वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी करेगी। कंपनी का बोर्ड आज परिणामों को मंजूरी देगा, जिसके बाद शाम को प्रबंधन निवेशकों और विश्लेषकों के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल भी करेगा। बाजार की सबसे अधिक नजर कंपनी के राजस्व, शुद्ध लाभ, ऑपरेटिंग मार्जिन और पूरे वित्त वर्ष (FY27) के ग्रोथ आउटलुक पर रहेगी। राजस्व और मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि जून तिमाही में इन्फोसिस के राजस्व में सालाना आधार पर अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। हालांकि शुद्ध लाभ और मार्जिन पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ग्राहकों द्वारा आईटी खर्च में सतर्कता और एआई से जुड़ी निवेश रणनीतियों का असर देखने को मिल सकता है। FY27 की गाइडेंस होगी सबसे अहम विश्लेषकों के अनुसार, इस बार केवल तिमाही नतीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण कंपनी की FY27 रेवेन्यू गाइडेंस होगी। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि इन्फोसिस पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान में कोई बदलाव करती है या नहीं। अमेरिका और यूरोप में आईटी खर्च की स्थिति तथा नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी बाजार की धारणा तय करेगी। डील पाइपलाइन और AI रणनीति पर रहेगा फोकस कंपनी की बड़ी डील, ऑर्डर बुक, जनरेटिव एआई सेवाओं की मांग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर प्रबंधन की टिप्पणी को निवेशक ध्यान से सुनेंगे। हाल के महीनों में आईटी कंपनियां एआई आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं और इन्फोसिस की रणनीति को लेकर भी बाजार में काफी उत्सुकता है। शेयर में उतार-चढ़ाव की संभावना नतीजों से पहले इन्फोसिस के शेयर दबाव में रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी के नतीजे या आउटलुक बाजार की उम्मीदों से बेहतर या कमजोर रहते हैं, तो अगले कारोबारी सत्र में शेयर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर और सेंसेक्स-निफ्टी की चाल पर भी पड़ सकता है।
पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों से पहले आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। मंगलवार को कारोबार की शुरुआत में Nifty IT Index करीब 2% की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। इस तेजी की अगुवाई TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra जैसे दिग्गज आईटी शेयरों ने की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को कंपनियों के तिमाही नतीजों और प्रबंधन की भविष्य की रणनीति से सकारात्मक संकेत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते आईटी सेक्टर में खरीदारी बढ़ी है। इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी शुरुआती कारोबार में प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में 2% से 4% तक की बढ़त दर्ज की गई। तेजी वाले प्रमुख शेयर: TCS Infosys HCLTech Tech Mahindra Wipro Coforge LTIMindtree Newgen Software हालांकि, Fractal Analytics और Zensar Technologies के शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली। Q1 रिजल्ट से पहले क्यों बढ़ा उत्साह? विश्लेषकों के अनुसार, जून तिमाही के नतीजों से पहले बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। निवेशकों की नजर खास तौर पर इन बिंदुओं पर रहेगी: वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए कंपनियों का आउटलुक ग्राहकों की आईटी खर्च (Client Spending) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रणनीति मार्जिन और नए ऑर्डर यही संकेत आगे आईटी शेयरों की दिशा तय कर सकते हैं। कमजोर रह सकती है जून तिमाही की कमाई हालांकि, कई ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि आईटी कंपनियों के लिए जून तिमाही बहुत मजबूत नहीं रहने वाली है। विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे प्रमुख कारण हैं: वैश्विक स्तर पर कमजोर आईटी खर्च ग्राहकों द्वारा निवेश संबंधी फैसलों में देरी आर्थिक अनिश्चितता वेतन वृद्धि और पुनर्गठन (Restructuring) की लागत AI में बढ़ता निवेश इन कारणों से कंपनियों की आय और मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। किन कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद? ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी आईटी कंपनियों में Infosys और Tech Mahindra के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं मिड-कैप आईटी कंपनियों में Hexaware से अच्छे नतीजों की संभावना बताई गई है। शेयर बाजार में भी लगातार पांचवें दिन तेजी आईटी शेयरों में खरीदारी के साथ घरेलू शेयर बाजार में भी लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 और Sensex दोनों ही हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। स्थिर कच्चे तेल की कीमतों और बेहतर बाजार धारणा ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,300 अंक के ऊपर कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:22 बजे सेंसेक्स 487.81 अंक (0.63%) की बढ़त के साथ 77,989.93 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 156.80 अंक (0.65%) मजबूत होकर 24,332.50 के स्तर पर पहुंच गया। IT सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। सबसे ज्यादा तेजी HCL Technologies के शेयर में दर्ज की गई, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक उछाल आया। इसके अलावा Tech Mahindra, Infosys, TCS, Tata Steel, Sun Pharma, Bajaj Finserv और UltraTech Cement जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार की तेजी को और मजबूती दी। इन शेयरों में दिखी गिरावट बाजार की तेजी के बावजूद कुछ शेयर दबाव में रहे। Mahindra & Mahindra के शेयर में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा SBI, Kotak Mahindra Bank, IndiGo, Titan, Adani Ports और Asian Paints जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10 बजे तक प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— HCL Technologies: +4.31% Tech Mahindra: +2.81% Tata Steel: +2.78% Sun Pharma: +2.07% BEL: +1.88% Eternal: +1.75% Trent: +1.56% Bajaj Finserv: +1.55% TCS: +1.33% UltraTech Cement: +1.23% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयर— Mahindra & Mahindra: -0.95% SBI: -0.67% Kotak Mahindra Bank: -0.38% IndiGo: -0.34% Titan: -0.33% Adani Ports: -0.28% ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। Nifty Midcap Index करीब 0.21% चढ़ा। Nifty Smallcap Index में लगभग 0.47% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Metal और Nifty IT सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। दूसरी ओर Nifty Bank और Nifty PSU Bank अपेक्षाकृत कमजोर रहे। निवेशकों का बढ़ा भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद, विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को लगातार तीसरे दिन बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार का सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत की। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,150 अंक के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी शेयरों में देखने को मिली, जबकि व्यापक बाजार (Broader Market) में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत सुबह करीब 9:40 बजे तक— बीएसई सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% की बढ़त के साथ 77,416.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 143.85 अंक यानी 0.60% चढ़कर 24,149.70 अंक पर पहुंच गया। वहीं, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। Infosys के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेंसेक्स के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा— HCL Technologies TCS Tech Mahindra के शेयरों में भी लगभग 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। आईटी शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार की धारणा को मजबूत किया। Adani Enterprises सहित कई दिग्गज शेयरों में बढ़त आईटी कंपनियों के अलावा Adani Enterprises सहित कई अन्य प्रमुख शेयरों में भी निवेशकों की अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Bajaj Finance के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह सेंसेक्स में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.3% मजबूत रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी लगभग 0.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो— निफ्टी आईटी लगभग 3% चढ़ा। निफ्टी रियल्टी में करीब 1% की तेजी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स भी लगभग 1% मजबूत हुआ। एनएसई पर कारोबार के दौरान लगभग— 1,818 शेयरों में तेजी, 586 शेयरों में गिरावट, जबकि 99 शेयर बिना किसी बदलाव के कारोबार करते नजर आए। यह आंकड़े बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत देते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.06 प्रतिशत गिरकर 70.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में जारी वार्ता से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य रूप से संचालित करने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही कारक आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुंबई: बुधवार, 24 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच सकारात्मक शुरुआत की। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह करीब 9:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 194 अंकों की बढ़त के साथ 76,395 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 करीब 41 अंकों की मजबूती के साथ 23,867 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल इंडेक्स स्तर (सुबह 9:30 बजे) BSE Sensex 76,395 NSE Nifty 50 23,867 बाजार में तेजी का मुख्य कारण आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी रही। एनएसई के 15 सेक्टोरल इंडेक्स में से 11 बढ़त के साथ खुले। प्राइवेट बैंक, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वैश्विक संकेतों से क्यों बना दबाव? हालांकि घरेलू बाजार में मजबूती दिखी, लेकिन वैश्विक स्तर पर कुछ ऐसे कारक हैं जो निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में बिकवाली देखने को मिली। खासकर टेक शेयरों में कमजोरी के कारण Nasdaq और S&P 500 दबाव में रहे। एशियाई बाजारों का मिश्रित रुख जापान और चीन के बाजारों में सुस्ती रही, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। ब्याज दरों को लेकर चिंता बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। आगे क्या रहेगा निफ्टी और सेंसेक्स का रुख? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिलहाल बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है। निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण स्तर 23,900 के ऊपर टिकने पर निफ्टी 24,000 से 24,050 तक पहुंच सकता है। यदि दबाव बढ़ता है तो 23,640 तक गिरावट संभव है। सेंसेक्स के लिए अहम स्तर 76,500 का स्तर बाजार की अगली दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। किन सेक्टरों में दिखा दबाव? आज के कारोबार में ऑटो, मेटल और मीडिया सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। वहीं बैंकिंग, आईटी और हेल्थकेयर शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में संतुलित स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही निवेश करना चाहिए। कच्चे तेल और सोने की कीमतों में आ रहे बदलाव भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Infosys Chairman on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। इसी बीच इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने AI से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट और मजबूत राय रखी है। उनका कहना है कि AI पारंपरिक आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। AI से नहीं खत्म होंगी आईटी कंपनियां इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में बोलते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि जेनरेटिव AI के आने से पारंपरिक आईटी सर्विसेज मॉडल खत्म होने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि: "AI हमारी जैसी कंपनियों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन संगठनों की ताकत बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव के साथ खुद को ढालते हैं और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।" नीलेकणि के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है। इसमें डोमेन नॉलेज, सुरक्षा, टेस्टिंग, सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसी कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं, जिन्हें केवल AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ऑटोमेशन के बीच क्यों बढ़ा है डर? दुनियाभर में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि AI और ऑटोमेशन के कारण कोडिंग, आउटसोर्सिंग और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है। खासकर भारत के 300 अरब डॉलर से अधिक के तकनीकी उद्योग के लिए यह चिंता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, नंदन नीलेकणि का मानना है कि AI खतरा नहीं बल्कि अवसर है। पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर रहा AI इंफोसिस चेयरमैन ने बताया कि AI की मदद से कंपनियां अपने दशकों पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में सबसे बड़ा अवसर AI मॉडल और एजेंट्स को कंपनियों के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने में होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंफोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। 2030 तक 400 बिलियन डॉलर का हो सकता है बाजार इंफोसिस ने हाल ही में अपना AI-First Value Framework लॉन्च किया है। कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI-फर्स्ट सर्विसेज का वैश्विक बाजार 300 से 400 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच सकता है। नंदन नीलेकणि के बयान से यह संकेत मिलता है कि इंफोसिस AI को चुनौती नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का सबसे बड़ा अवसर मान रही है।
वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमत घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 306.22 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,570.55 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 72.95 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 23,926.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ईरान-अमेरिका समझौते से कच्चे तेल में गिरावट बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबर रही। इससे लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंकाएं कम हुईं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर 82.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 80.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती बाजार को समर्थन दे रही है। हाल के दिनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से सुधरकर 94.71 तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI आधारित निवेश थीम की मजबूती के कारण विदेशी निवेश का कुछ हिस्सा भारत से बाहर जा सकता है। आईटी सेक्टर बना बाजार का स्टार सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी आईटी : +1.43% निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +0.91% निफ्टी मीडिया : +0.64% निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज : +0.42% वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर: HCLTech (+3.11%) Bajaj Finserv (+1.61%) Bajaj Finance (+1.60%) Hindustan Unilever (+1.55%) Tech Mahindra (+1.46%) Tata Consultancy Services (+1.44%) इसके अलावा Infosys, Bharti Airtel, HDFC Bank और Larsen & Toubro में भी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank (-1.10%) UltraTech Cement (-0.56%) Tata Steel (-0.48%) Power Grid Corporation of India (-0.42%) Bharat Electronics Limited (-0.40%) मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बनी रही तेजी बाजार की मजबूती केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों की खरीदारी जारी रही। निफ्टी मिडकैप 50 : +0.35% निफ्टी मिडकैप 100 : +0.31% निफ्टी स्मॉलकैप 100 : +0.42% इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बना हुआ है। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी को समर्थन जरूर मिला है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक AI रैली, घरेलू वैल्यूएशन, मानसून की प्रगति और महंगाई के आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
घरेलू शेयर बाजार ने जून महीने की शुरुआत मजबूती के साथ की है। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि Nifty 50 23,600 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार में इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी, बेहतर तिमाही नतीजे और निवेशकों की वापसी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,775.74 पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को यह 75,203 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा उछलकर 75,000 के ऊपर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 23,650 के स्तर तक चढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद बाजार में वैल्यू बाइंग देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा है। इंडिगो के शेयरों में सबसे बड़ी तेजी सोमवार के कारोबार में सबसे ज्यादा चर्चा InterGlobe Aviation के शेयरों की रही। इंडिगो के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि कंपनी ने तिमाही नतीजों में घाटा दर्ज किया है, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों ने भविष्य की आय संभावनाओं और मजबूत यात्री मांग को देखते हुए सकारात्मक रुख बनाए रखा है। इसी वजह से निवेशकों ने इंडिगो के शेयरों में जोरदार खरीदारी की। इन शेयरों में भी दिखी मजबूती बाजार में तेजी के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। प्रमुख बढ़त वाले शेयर: Asian Paints Infosys Tata Consultancy Services Tech Mahindra HCL Technologies Bajaj Finserv आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मजबूती देखने को मिली और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत तक चढ़ा। बैंकिंग और कुछ ऊर्जा शेयर दबाव में जहां अधिकांश शेयर हरे निशान में रहे, वहीं कुछ बैंकिंग और ऊर्जा कंपनियों में कमजोरी देखने को मिली। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: Kotak Mahindra Bank Axis Bank NTPC Limited Trent Limited मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी बाजार की तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में बढ़त निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी मजबूती इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी व्यापक बाजार में भी बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता शेयर बाजार में तेजी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में भारतीय बाजार पर दबाव बना सकती हैं। अमेरिका-ईरान तनाव पर टिकी नजर वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर भी बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि उनका प्रशासन ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे परमाणु हथियारों की संभावना खत्म हो सके। हालांकि फिलहाल निवेशक भू-राजनीतिक हालात को लेकर सतर्क बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे।
वैश्विक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में सीजफायर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे गुरुवार को बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 500 अंक तक गिर गया, जबकि Nifty 50 भी दबाव में नजर आया। यह गिरावट उस तेजी के ठीक एक दिन बाद आई है, जब सीजफायर की खबरों से बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। पश्चिम एशिया तनाव और बाजार पर असर ईरान द्वारा अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जहां ब्रेंट क्रूड करीब 2.9% उछलकर 97.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ऊर्जा कीमतों में यह तेजी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनती है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। शुरुआती कारोबार का हाल सुबह करीब 9:38 बजे: BSE Sensex: 407.54 अंक (0.53%) गिरकर 77,155.36 पर Nifty 50: 91.35 अंक (0.38%) गिरकर 23,906 पर सेंसेक्स के 19 शेयर गिरावट के साथ खुले, जो बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाता है। किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव? आज के कारोबार में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई: Adani Ports and Special Economic Zone Infosys Bajaj Finance ICICI Bank Kotak Mahindra Bank InterGlobe Aviation इन शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली: NTPC Hindustan Unilever Bharti Airtel TCS ITC Limited State Bank of India ब्रॉडर मार्केट का रुख मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में हल्की मजबूती रही: निफ्टी मिडकैप: 0.28% की बढ़त निफ्टी स्मॉलकैप: 0.57% की बढ़त सेक्टर के स्तर पर: मेटल और मीडिया सेक्टर में तेजी आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।