मुंबई, एजेंसियां। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने बताया है कि फिल्म को भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक ही दिन रिलीज नहीं किया जाएगा। ‘रामायण’ 6 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रिलीज होगी, जबकि भारत में इसे 8 नवंबर यानी दिवाली के दिन रिलीज करने की योजना है।
नमित मल्होत्रा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय रिलीज के लिए शुक्रवार की तारीख को ध्यान में रखा गया है। वहीं भारत में फिल्म को दिवाली के खास मौके पर रिलीज करने की योजना बनाई गई है। इस तरह विदेशों में दर्शक भारतीय दर्शकों से दो दिन पहले फिल्म देख सकेंगे।
निर्माताओं का लक्ष्य फिल्म को केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रखने के बजाय इसे वैश्विक स्तर पर बड़े सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करना है। इसी रणनीति के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार को ध्यान में रखते हुए अलग रिलीज तारीख रखी गई है।
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। वहीं सनी देओल भगवान हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं।
फिल्म को दो भागों में तैयार किया जा रहा है। पहले भाग में राम के जीवन, सीता स्वयंवर और वनवास सहित रामायण की शुरुआती महत्वपूर्ण घटनाओं को बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा।
भारत में 8 नवंबर 2026 को दिवाली के दिन फिल्म की रिलीज प्रस्तावित है। वहीं अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए इसका प्रदर्शन 6 नवंबर से शुरू होगा। रिलीज तारीखों में यह अंतर फिल्म को वैश्विक स्तर पर ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने की निर्माताओं की रणनीति का हिस्सा है।
‘रामायण’ को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्सुकता है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश की स्टारकास्ट के साथ फिल्म के बड़े स्तर के दृश्य प्रभाव भी इसे साल की सबसे चर्चित भारतीय फिल्मों में शामिल कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात मुंबई पुलिस के एक कॉन्स्टेबल की शनिवार को मौत हो गई। मृतक पुलिसकर्मी की पहचान गणेश रायते (41) के रूप में हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे मौके पर गिर पड़े। सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत गणेश रायते सलमान खान के घर के बाहर राज्य सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हुई और वह गिर पड़े। घटना के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता देने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती जानकारी में हृदयाघात को मौत की वजह बताया जा रहा है। हालांकि, मौत की आधिकारिक चिकित्सकीय पुष्टि और विस्तृत जानकारी संबंधित अधिकारियों की ओर से सामने आना बाकी है। मुंबई पुलिस की LA-4 इकाई में थे तैनात गणेश रायते मुंबई पुलिस की LA-4 इकाई में कार्यरत थे। उनकी ड्यूटी सलमान खान की सुरक्षा व्यवस्था के तहत गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर लगाई गई थी। सलमान खान के घर की सुरक्षा पहले से ही कड़ी रहती है। ऐसे में वहां तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। घटना से सुरक्षा व्यवस्था में शोक ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी की मौत की खबर सामने आने के बाद पुलिस विभाग में शोक का माहौल है। घटना को लेकर आगे की औपचारिक कार्रवाई और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जा रही है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर गणेश रायते की उम्र 41 वर्ष थी और उनकी ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हुई। मौत की अंतिम वजह की पुष्टि आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट से होगी।
मुंबई, एजेंसियां। टीवी अभिनेत्री शिवांगी जोशी और अभिनेता हर्षद चोपड़ा की जोड़ी लंबे समय से दर्शकों के बीच चर्चा में रही है। दोनों ने साथ काम किया और बाद में रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में भी उनकी नजदीकियों ने रिश्ते को लेकर अटकलों को हवा दी। हालांकि, अब हर्षद चोपड़ा ने इन चर्चाओं पर खुलकर बात करते हुए दोनों के बीच किसी रोमांटिक रिश्ते की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने साफ किया कि शिवांगी के साथ उनका रिश्ता दोस्ती का है। ‘लॉक अप 2’ में बढ़ी दोनों की नजदीकियां शिवांगी जोशी और हर्षद चोपड़ा की दोस्ती ‘लॉक अप 2’ के दौरान लगातार सुर्खियों में रही। शो में दोनों की बॉन्डिंग और एक-दूसरे का समर्थन करने के कारण दर्शकों के बीच उनके अफेयर को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। मामला उस समय और चर्चा में आया जब हर्षद ने शो में शिवांगी के लिए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने फिनाले की दौड़ में अपनी जगह छोड़कर शिवांगी को आगे बढ़ाने का फैसला किया था। इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हर्षद ने रोमांटिक रिश्ते से किया इनकार अफेयर की चर्चाओं के बीच हर्षद चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि शिवांगी के साथ उनका रिश्ता रोमांटिक नहीं है। उन्होंने दोनों के बीच बने रिश्ते को दोस्ती के तौर पर बताया। हर्षद का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शो के दौरान उनकी शिवांगी के प्रति करीबी और समर्थन को दर्शकों के एक वर्ग ने प्रेम संबंध से जोड़कर देखना शुरू कर दिया था। अभिनेता ने इन अटकलों को हवा देने के बजाय रिश्ते की वास्तविक स्थिति साफ करने की कोशिश की। बहन भी अफेयर की खबरों से थी नाराज हर्षद ने यह भी बताया कि शिवांगी के साथ उनके रोमांस की खबरों से उनकी बहन नाराज थी। दरअसल, शो में हर्षद के शिवांगी के लिए किए गए फैसलों और दोनों की करीबी के बाद बाहर भी उनके रिश्ते को लेकर चर्चा बढ़ गई थी। हर्षद के मुताबिक, उनकी बहन को भी इस तरह की खबरों और चर्चाओं पर आपत्ति थी। हालांकि, अभिनेता ने अपने और शिवांगी के रिश्ते को लेकर किसी तरह की रोमांटिक पुष्टि नहीं की। दोस्ती और शो के फैसलों ने बढ़ाई चर्चा ‘लॉक अप 2’ में हर्षद ने शिवांगी का लगातार समर्थन किया। एक मौके पर उन्होंने फिनाले में पहुंचने का अपना मौका छोड़ दिया, जिसके बाद दर्शकों के बीच उनकी दोस्ती को लेकर काफी चर्चा हुई। कुछ दर्शकों ने इसे भावनात्मक जुड़ाव माना, जबकि कुछ ने इसे शो की रणनीति के नजरिए से देखा। शो से बाहर आने के बाद भी हर्षद ने शिवांगी के प्रति अपना समर्थन बनाए रखा। ऐसे में दोनों के रिश्ते को लेकर अटकलें जारी रहीं, लेकिन हर्षद के ताजा स्पष्टीकरण से कम से कम उनकी तरफ से स्थिति स्पष्ट हो गई है।
मुंबई, एजेंसियां। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फिल्म की भव्यता और तकनीकी स्तर की तारीफ करते हुए कहा कि अगर इसे ऑस्कर नहीं मिलता है तो उन्हें अकादमी अवॉर्ड्स की जूरी से निराशा होगी। फडणवीस ने फिल्म को केवल दशक की नहीं, बल्कि “सहस्राब्दी की फिल्म” बताया। Prime Focus Studio के उद्घाटन में की तारीफ फडणवीस ने यह टिप्पणी 6 अगस्त 2026 को मुंबई में Prime Focus Studio के उद्घाटन के दौरान की। यह स्टूडियो फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा से जुड़ा है। कार्यक्रम में फडणवीस ने भारतीय पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक और बड़े स्तर के फिल्म निर्माण के साथ पेश करने के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने ‘रामायण’ को भारतीय सिनेमा के लिए बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के तौर पर पेश किया। ‘ऑस्कर नहीं मिला तो जूरी से निराश होऊंगा’ फडणवीस ने फिल्म को लेकर काफी ऊंची उम्मीद जताते हुए कहा कि यदि ‘रामायण’ को ऑस्कर नहीं मिलता है तो वह अकादमी की जूरी से निराश होंगे। उन्होंने फिल्म को “फिल्म ऑफ द मिलेनियम” यानी “सहस्राब्दी की फिल्म” बताया। हालांकि, यह फडणवीस की व्यक्तिगत प्रशंसा और उम्मीद है—इसे ऑस्कर के लिए आधिकारिक नामांकन या पुरस्कार की घोषणा नहीं समझना चाहिए। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म को बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है और इसके दृश्य प्रभाव तथा तकनीकी प्रस्तुति को लेकर काफी चर्चा है। फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा हैं और इसे भारतीय पौराणिक कथा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने वाली बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। 6 नवंबर 2026 को रिलीज होगी पहली फिल्म ‘रामायण’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना है। इसका पहला भाग 6 नवंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाला है। दूसरा भाग 2027 में रिलीज किए जाने की योजना है। फडणवीस के बयान ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। अब फिल्म की वास्तविक परीक्षा रिलीज के बाद दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी स्वीकार्यता से होगी।