रांची: राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश के बीच शहर के प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. कांके डैम का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जबकि शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले रूक्का डैम में भी पानी की आवक लगातार बढ़ रही है. जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है. अधिकारियों की नजर लगातार दोनों जलाशयों के जलस्तर पर बनी हुई है.
मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया गया है. ऐसे में जलाशयों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है. इसी को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. खासकर रूक्का डैम का रेडियल गेट कभी भी खोला जा सकता है, जिससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में अचानक पानी का बहाव बढ़ने की आशंका है.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, कांके डैम का जलस्तर बढ़कर 25.6 फीट तक पहुंच गया है. डैम की अधिकतम जलधारण क्षमता 28 फीट है. यानी अब डैम में करीब ढाई फीट ही पानी की गुंजाइश बची है.
लगातार बारिश को देखते हुए विभाग के अधिकारी कांके डैम के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं. यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है. यही वजह है कि संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
रांची के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत माने जाने वाले रूक्का डैम में भी पानी की आवक बढ़ रही है. फिलहाल डैम का जलस्तर 28.03 फीट तक पहुंच चुका है. हालांकि इसकी कुल क्षमता 36 फीट है और अभी करीब आठ फीट पानी की गुंजाइश है.
इसके बावजूद लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्र से पानी आने के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है. विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर रूक्का डैम के रेडियल गेट कभी भी खोले जा सकते हैं.
रूक्का डैम का रेडियल गेट खोले जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम यानी निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है. इसे देखते हुए डूब क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और किसी भी तरह की गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया गया है.
प्रशासन ने स्वर्णरेखा नदी के जलग्रहण क्षेत्र और रेडियल गेट से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को नदी या जलधारा के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है. लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में नदी की धारा में उतरने या उसके करीब जाने का प्रयास न करें.
जल संसाधन विभाग ने तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. यदि जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनती है, तो लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं.
विभाग ने यह भी कहा है कि जलाशय के डूब क्षेत्र में यदि कोई अनधिकृत निर्माण किया गया है, तो उसे तत्काल हटा लिया जाए. प्रशासन की ओर से लोगों को किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गयी है.
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 7 अगस्त तक रांची में कुल 537 मिमी बारिश दर्ज की गयी है. हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 591 मिमी से करीब 9 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार बारिश के कारण शहर के जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ी है.
आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन जलाशयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कांके डैम के बढ़ते जलस्तर और रूक्का डैम के संभावित रेडियल गेट खोलने को लेकर है.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी, डैम, जलाशय और निचले इलाकों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें. विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी गयी है.
रूक्का डैम का गेट खोले जाने की स्थिति में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है, इसलिए निचले इलाकों के लोगों को पहले से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
धनबाद: कुपोषण उपचार केंद्रों (MTC) के संचालन में लापरवाही को लेकर धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने सख्त कार्रवाई की है. शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर गोविंदपुर, झरिया, निरसा और बाघमारा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों (MOIC) का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया गया. CHO के प्रदर्शन पर भी जतायी नाराजगी बैठक के दौरान इन चारों प्रखंडों के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के कामकाज की भी समीक्षा की गयी. खराब प्रदर्शन और कुपोषण से जुड़े कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उपायुक्त ने संबंधित CHO का वेतन भी अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया. कुपोषित बच्चों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि कुपोषित बच्चों के उपचार और उन्हें बेहतर पोषण उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जायेगी. उन्होंने अधिकारियों को MTC की नियमित मॉनिटरिंग करने और निर्धारित मानकों के अनुसार सेवाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. नियमित निगरानी के दिए निर्देश बैठक में MTC के संचालन में सुधार, कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार और पोषण सेवाओं की नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया. उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने का निर्देश दिया.
जमशेदपुर। शहर में साइबर अपराधियों ने तीन अलग-अलग घटनाओं में लोगों को निशाना बनाकर कुल 9.34 लाख रुपये की ठगी कर ली। कहीं क्रेडिट कार्ड से रकम उड़ाई गई तो कहीं चोरी किए गए कार्ड से लाखों रुपये के गहने खरीद लिए गए। वहीं, एक मामले में यूपीआई के जरिए खाते से पैसे निकाल लिए गए। तीनों मामलों में पीड़ितों ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। क्रेडिट कार्ड से 4.57 लाख रुपये निकाले पहला मामला कदमा के उलियान स्थित सिंडिकेट कॉलोनी का है। यहां रहने वाली पूनम सिंह के क्रेडिट कार्ड से साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर 4.57 लाख रुपये निकाल लिए। खाते से रकम कटने का मैसेज मिलने के बाद उन्हें ठगी का पता चला। बैग चोरी कर क्रेडिट कार्ड से खरीदे 4.10 लाख के गहने दूसरी घटना जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुई। नरवापहाड़ निवासी और यूसील कर्मी दीपांकर चक्रवर्ती वहां पहुंचे थे। इसी दौरान अज्ञात बदमाश उनका बैग लेकर फरार हो गए। बैग में दो मोबाइल फोन और क्रेडिट कार्ड थे। आरोप है कि बदमाशों ने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर 4.10 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने खरीद लिए। पुलिस अब उस दुकान और संबंधित लोकेशन की जांच कर रही है, जहां से कार्ड के जरिए खरीदारी की गई। यूपीआई के जरिए 67 हजार रुपये की ठगी तीसरी घटना परसुडीह स्थित मां दुर्गा अपार्टमेंट की है। यहां रहने वाली रीना मोहन पिल्लई यूपीआई फ्रॉड का शिकार हुईं। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर उनके खाते से 67 हजार रुपये निकाल लिए। लेनदेन और कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस तीनों मामलों की जांच में साइबर थाना पुलिस जुट गई है। पुलिस क्रेडिट कार्ड से हुई खरीदारी, बैंक ट्रांजेक्शन, संबंधित लोकेशन और कॉल डिटेल की जांच कर रही है। खास तौर पर 4.10 लाख रुपये के गहनों की खरीदारी वाले मामले में पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए दुकान और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जानकारी खंगाल रही है। साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क पुलिस ने लोगों से अपील की है कि क्रेडिट कार्ड का सीवीवी, ओटीपी, पिन या यूपीआई से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें। मोबाइल या कार्ड चोरी होने पर तुरंत बैंक को सूचना देकर सेवाएं ब्लॉक कराएं। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।
जमशेदपुर: साइबर अपराधियों ने जमशेदपुर में तीन अलग-अलग लोगों को निशाना बनाकर कुल 9.34 लाख रुपये की ठगी कर ली. कहीं क्रेडिट कार्ड के नाम पर धोखाधड़ी की गयी, तो कहीं चोरी हुए मोबाइल और कार्ड का इस्तेमाल कर लाखों रुपये के गहने खरीद लिये गये. वहीं एक अन्य मामले में यूपीआइ के जरिये खाते से पैसे उड़ा लिये गये. तीनों मामलों में पीड़ितों ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामलों की जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि ठगी और चोरी की ये घटनाएं 25 जुलाई से 3 अगस्त के बीच हुईं. अलग-अलग तरीके से की गयी इन वारदातों के बाद साइबर थाना पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. मामला 1: क्रेडिट कार्ड के नाम पर 4.57 लाख रुपये की ठगी पहला मामला कदमा के उलियान स्थित सिंडिकेट कॉलोनी का है. यहां रहने वाली पूनम सिंह के क्रेडिट कार्ड से साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर 4.57 लाख रुपये निकाल लिये. पीड़िता को जब क्रेडिट कार्ड से रकम कटने का मैसेज मिला, तब उन्हें ठगी का पता चला. इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्रेडिट कार्ड की जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंची और रकम किस माध्यम से निकाली गयी. मामला 2: मोबाइल और क्रेडिट कार्ड चोरी, 4.10 लाख के गहने खरीदे दूसरी घटना जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से जुड़ी है. नरवापहाड़ निवासी और यूसिलकर्मी दीपांकर चक्रवर्ती किसी काम से जेआरडी कॉम्प्लेक्स गये थे. इसी दौरान अज्ञात बदमाशों ने उनका बैग चोरी कर लिया. बैग में दो मोबाइल फोन और क्रेडिट कार्ड रखे हुए थे. चोरी के बाद अपराधियों ने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर करीब 4.10 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने खरीद लिये. जब पीड़ित को क्रेडिट कार्ड से बड़ी रकम खर्च होने की जानकारी मिली, तो उन्होंने मामले की शिकायत साइबर थाने में की. पुलिस अब उस दुकान और संबंधित लोकेशन की जांच कर रही है, जहां से क्रेडिट कार्ड के जरिये गहनों की खरीदारी की गयी. सीसीटीवी फुटेज और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है. मामला 3: UPI के जरिये खाते से उड़ाये 67 हजार तीसरा मामला परसुडीह स्थित मां दुर्गा अपार्टमेंट का है. यहां रहने वाली रीना मोहन पिल्लई साइबर ठगी का शिकार हो गयीं. अपराधियों ने कथित तौर पर यूपीआइ के माध्यम से उनके बैंक खाते से 67 हजार रुपये निकाल लिये. पीड़िता को जब खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली, तब उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी. पुलिस ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटाकर यह पता लगाने में लगी है कि रकम किस खाते या यूपीआइ आईडी में ट्रांसफर हुई. तीनों मामलों की जांच में जुटी साइबर पुलिस तीनों शिकायतों के बाद साइबर थाना पुलिस ने जांच तेज कर दी है. पुलिस बैंक खातों से हुए ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल और डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है. खास तौर पर 4.10 लाख रुपये के गहनों की खरीदारी वाले मामले में दुकान और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है. पुलिस का प्रयास है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके. साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सतर्क साइबर अपराधियों से बचने के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, OTP, PIN या UPI PIN साझा नहीं करना चाहिए. मोबाइल या क्रेडिट कार्ड चोरी होने पर तुरंत बैंक से संपर्क कर कार्ड और संबंधित डिजिटल भुगतान सेवाओं को ब्लॉक कराना जरूरी है. अगर आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो बिना देर किये 1930 पर शिकायत दर्ज करें और संबंधित बैंक को भी तुरंत इसकी जानकारी दें. शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है.