झारखंड

RIMS: 60 Doctors Oppose Ban on HOD Rotation

RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक से 60 डॉक्टर नाराज, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र

kalpana अगस्त 8, 2026 0
RIMS doctors protest against the suspension of department head rotation system in Ranchi
RIMS HOD Rotation Row: 60 Doctors Seek Restoration of Rotation System

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में विभागाध्यक्षों के रोटेशन की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। संस्थान के करीब 60 डॉक्टरों ने इस फैसले का विरोध करते हुए स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है। डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लागू करने की मांग करते हुए एनएमसी की गाइडलाइन, रिम्स शासी परिषद के पुराने फैसले और हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया है।

रिम्स शासी परिषद की 52वीं बैठक में वर्ष 2021 में विभागाध्यक्षों के रोटेशन का फैसला लिया गया था। इसके तहत प्रत्येक तीन वर्ष में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी बदलने की व्यवस्था लागू की गयी थी। इसी आधार पर वर्ष 2021 से अलग-अलग विभागों में रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही थी।

प्रोफेसरों की बारी आते ही प्रक्रिया पर लगी रोक

डॉक्टरों का आरोप है कि अब जब रोटेशन के तहत अन्य प्रोफेसरों को विभागाध्यक्ष बनने का अवसर मिलना था, तभी इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी। इससे कई डॉक्टरों में नाराजगी है। करीब 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

डॉक्टरों ने अपने पत्र में कहा है कि एनएमसी की गाइडलाइन में विभागाध्यक्ष के पद पर रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है। साथ ही रिम्स की शासी परिषद भी पहले इस संबंध में निर्णय ले चुकी है। ऐसे में अचानक रोटेशन रोकने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाया है।

65वीं जीबी बैठक के बाद लिया गया फैसला

सूत्रों के अनुसार, हाल में हुई रिम्स शासी परिषद की 65वीं बैठक में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। इसके बाद रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नयी अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया गया है।

बताया जा रहा है कि कुछ सीनियर डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लेकर आपत्ति जतायी थी। उनका कहना था कि वे अपने से जूनियर डॉक्टर के अधीन काम करने में असहज महसूस करेंगे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और रोटेशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी।

हाईकोर्ट के निर्देश का भी दिया हवाला

डॉक्टरों ने अपने पत्र में वर्ष 2022 में हाईकोर्ट की ओर से रोटेशन प्रक्रिया को लेकर दिये गये निर्देश का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि जब एनएमसी की गाइडलाइन और रिम्स जीबी का फैसला पहले से मौजूद है, तो रोटेशन व्यवस्था को बीच में रोकना उचित नहीं है।

अब 60 डॉक्टरों के पत्र के बाद रिम्स में विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर फैसला अहम हो गया है। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द प्रक्रिया बहाल करने और पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार विभागाध्यक्षों की नियुक्ति करने की मांग की है।


 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड में JPSC-JSSC विवाद पर निशिकांत दुबे का बड़ा ऐलान, 13 अगस्त तक फैसला नहीं तो करेंगे भूख हड़ताल

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि यदि 13 अगस्त 2026 तक राज्य सरकार छात्रों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती है, तो वह खुद भूख हड़ताल पर बैठेंगे।   छात्रों के समर्थन में आंदोलन में उतरने का ऐलान   निशिकांत दुबे ने रांची में आंदोलन कर रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के समर्थन में यह घोषणा की। उन्होंने राज्य सरकार को 13 अगस्त तक का समय देते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दों का समाधान नहीं होने पर वह आंदोलन में सीधे शामिल होंगे। इसके लिए उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से अनुमति भी मांगी है।   संसद में उठाएंगे JPSC-JSSC का मुद्दा   भाजपा सांसद ने कहा कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले को संसद में भी उठाया जाएगा। उन्होंने कथित अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए CBI जांच की मांग करने की बात कही है।   अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और भर्ती से जुड़े विवादों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। रांची में छात्रों का प्रदर्शन और सत्याग्रह लगातार जारी है।   सरकार के फैसले पर टिकी नजर   अब सभी की नजर 13 अगस्त पर है। यदि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच इस समयसीमा के भीतर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो निशिकांत दुबे के भूख हड़ताल पर बैठने की घोषणा से झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।

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जमशेदपुर में जमीन और कारोबार के नाम पर ठगी के आरोपी की गिरफ्तारी
जमशेदपुर में एक करोड़ से अधिक की ठगी का आरोप, जमीन-कारोबार के नाम पर कई लोगों से ऐंठे लाखों

जमशेदपुर। जमशेदपुर में जमीन और कारोबार में निवेश के नाम पर एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने के आरोप में सिदगोड़ा पुलिस ने गोविंदपुर निवासी मनीष सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद कई पीड़ित सिदगोड़ा थाना पहुंचे और पुलिस को अपने साथ हुई कथित ठगी की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कारोबार और जमीन का झांसा देकर कई लोगों से पैसे लिए। इनमें कारोबारी, पुलिस पदाधिकारी और घरेलू कामगार भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने 30 से अधिक लोगों को लाखों रुपये का चूना लगाया है।   कारोबारी से 49 लाख रुपये ठगने का आरोप   पुलिस के मुताबिक, मनीष सिंह ने भुइयांडीह निवासी कारोबारी अर्जुन यादव से करीब 49 लाख रुपये की ठगी की थी। इस मामले में 3 अप्रैल 2025 को सिदगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। केस दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। बाद में गुप्त सूचना के आधार पर उसे सीतारामडेरा क्षेत्र में पीपुल्स अकादमी स्कूल के पास स्थित किराये के मकान से गिरफ्तार किया गया।   बैंक लोन दिलाने के नाम पर महिला से भी ठगी   आरोपी पर घर में काम करने वाली एक महिला से भी ठगी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, गोविंदपुर में रहने के दौरान मनीष ने महिला को बैंक से लोन दिलाने का झांसा दिया और उससे करीब 1.50 लाख रुपये की ठगी की। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी गोविंदपुर से फरार हो गया और बाद में बर्मामाइंस तथा सीतारामडेरा में ठिकाना बदलकर रहने लगा।   पीड़ित महिला ने एसएसपी से लगाई गुहार   ठगी की शिकायत लेकर रिंकी देवी शुक्रवार को एसएसपी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने आरोपी से अपने रुपये वापस दिलाने की मांग की। रिंकी देवी के अनुसार, वर्ष 2024 में मनीष ने उन्हें बैंक से लोन दिलाने का भरोसा दिया था। इसके लिए उसने उनसे जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। बाद में उनके नाम पर फर्नीचर समेत अन्य सामान खरीदे गए। जब बैंक की ओर से लोन की किस्त चुकाने की मांग की गई, तब उन्हें कथित धोखाधड़ी की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने गोविंदपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद आरोपी फरार हो गया था।   गिरफ्तारी के बाद सामने आ सकते हैं और मामले   मनीष सिंह की गिरफ्तारी के बाद कई अन्य लोग भी सिदगोड़ा थाना पहुंचे हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर ठगी से जुड़े अन्य मामलों और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ के दौरान ठगी के और मामलों का खुलासा हो सकता है।

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JCB machines repair the damaged Dhanbad-Bokaro road in Kendua after land subsidence
केंदुआ भू-धंसान: साढ़े तीन महीने से बंद धनबाद-बोकारो सड़क की मरम्मत शुरू, जल्द आवागमन बहाल होने की उम्मीद

धनबाद: केंदुआ क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव के बाद करीब साढ़े तीन महीने से बंद धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग को फिर से खोलने की कवायद शुरू हो गयी है. जिला प्रशासन के निर्देश पर बीसीसीएल प्रबंधन की देखरेख में शुक्रवार, 7 अगस्त से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया. सड़क की खुदाई और मरम्मत का काम सीआइएसएफ जवानों की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से कराया जा रहा है. मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद लंबे समय से सड़क बंद रहने से परेशान स्थानीय लोगों और दुकानदारों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन बहाल हो सकेगा. छह फीट हिस्से की करायी गयी खुदाई शुक्रवार को जेसीबी मशीन की मदद से भू-धंसान प्रभावित हिस्से की जांच और मरम्मत के लिए सड़क की ऊपरी सतह की खुदाई शुरू की गयी. प्रबंधन की ओर से करीब छह फीट लंबाई वाले हिस्से में दो से तीन फीट तक खुदाई करायी गयी है. इसके बाद सड़क की स्थिति का आकलन करते हुए आगे की मरम्मत की प्रक्रिया पूरी की जायेगी. काम के दौरान पीबी एरिया के जीएम जयंतो दास, पीओ एन राय, एरिया सेफ्टी अधिकारी जीके सिंह, मैनेजर अजीत कुमार समेत सीआइएसएफ के जवान मौजूद रहे. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे कार्य की निगरानी की जा रही है. 15 अप्रैल से बंद है मुख्य मार्ग गौरतलब है कि 15 अप्रैल को केंदुआ क्षेत्र में भू-धंसान और गैस रिसाव की घटना के बाद सुरक्षा कारणों से धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गयी थी. यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से पिछले कई महीनों से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. मुख्य सड़क बंद होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा था. इससे आवागमन का समय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा. दुकानदारों को भी सड़क खुलने का इंतजार सड़क बंद रहने का असर केंदुआ और आसपास के बाजारों पर भी पड़ा है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि मुख्य मार्ग पर आवाजाही बंद होने से ग्राहकों की संख्या कम हुई और व्यापार प्रभावित हुआ. अब मरम्मत का काम शुरू होने से लोगों को उम्मीद है कि सड़क खुलने के बाद क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी सामान्य हो जायेंगी. सुरक्षा जांच के बाद बहाल होगा आवागमन प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की कोशिश है कि प्रभावित हिस्से की स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत जल्द पूरी की जाये. हालांकि, सड़क पर आवागमन तभी बहाल किया जायेगा जब प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया जायेगा. सड़क की मजबूती और भू-धंसान के संभावित खतरे का आकलन करने के बाद ही वाहनों की आवाजाही शुरू करने का निर्णय लिया जायेगा. सड़क की मरम्मत शुरू होने से स्थानीय लोगों में राहत है, लेकिन सभी की नजर अब इस बात पर है कि धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह कब बहाल होता है.  

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