Kanke Dam

कांके डैम और रूक्का डैम में बढ़ते जलस्तर के बीच अलर्ट
कांके डैम में बढ़ा जलस्तर, रूक्का का रेडियल गेट कभी भी खुलेगा; निचले इलाकों में अलर्ट

रांची। राजधानी में लगातार हो रही बारिश के कारण प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कांके डैम खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, वहीं रूक्का डैम में भी पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।   25.6 फीट पहुंचा कांके डैम का जलस्तर     पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, कांके डैम का जलस्तर बढ़कर 25.6 फीट हो गया है। डैम की कुल क्षमता 28 फीट है। यानी जलस्तर अधिकतम क्षमता से करीब 2.4 फीट नीचे है। लगातार बारिश को देखते हुए विभाग के अधिकारी जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।     रूक्का डैम में 28.03 फीट पानी     रांची को पेयजल उपलब्ध कराने वाले रूक्का डैम का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। फिलहाल यहां पानी का स्तर 28.03 फीट दर्ज किया गया है। हालांकि डैम की कुल क्षमता 36 फीट है, लेकिन लगातार बारिश के कारण जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है।   विभाग के अनुसार जरूरत पड़ने पर रूक्का डैम का रेडियल गेट कभी भी खोला जा सकता है। गेट खुलने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है।   डूब क्षेत्र में आवाजाही पर रोक     रेडियल गेट खोले जाने की संभावना को देखते हुए डूब क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और किसी भी तरह की गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन ने स्वर्णरेखा नदी के जलग्रहण क्षेत्र और गेट से प्रभावित गांवों के लोगों को नदी में नहीं उतरने की चेतावनी दी है।   निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि स्थिति गंभीर होने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। जलाशय के डूब क्षेत्र में किए गए अनधिकृत निर्माण को भी तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है।   रांची में अब तक 537 मिमी बारिश     मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 7 अगस्त तक रांची में 537 मिमी बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य 591 मिमी बारिश से करीब 9 फीसदी कम है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में लगातार हुई बारिश के कारण शहर के जलाशयों में तेजी से पानी भर रहा है।   प्रशासन और संबंधित विभाग जलाशयों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करें और जलाशयों, नदियों तथा निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचें।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Rising water levels at Kanke and Rukka dams in Ranchi after continuous rainfall
कांके डैम खतरे के निशान के करीब, कभी भी खुल सकता है रूक्का का रेडियल गेट; निचले इलाकों में अलर्ट

रांची: राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश के बीच शहर के प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. कांके डैम का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जबकि शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले रूक्का डैम में भी पानी की आवक लगातार बढ़ रही है. जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है. अधिकारियों की नजर लगातार दोनों जलाशयों के जलस्तर पर बनी हुई है. मौसम विभाग की ओर से आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया गया है. ऐसे में जलाशयों में पानी का स्तर और बढ़ सकता है. इसी को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. खासकर रूक्का डैम का रेडियल गेट कभी भी खोला जा सकता है, जिससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में अचानक पानी का बहाव बढ़ने की आशंका है. 25.6 फीट तक पहुंचा कांके डैम का जलस्तर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, कांके डैम का जलस्तर बढ़कर 25.6 फीट तक पहुंच गया है. डैम की अधिकतम जलधारण क्षमता 28 फीट है. यानी अब डैम में करीब ढाई फीट ही पानी की गुंजाइश बची है. लगातार बारिश को देखते हुए विभाग के अधिकारी कांके डैम के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं. यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है. यही वजह है कि संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. रूक्का डैम में भी लगातार बढ़ रहा पानी रांची के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत माने जाने वाले रूक्का डैम में भी पानी की आवक बढ़ रही है. फिलहाल डैम का जलस्तर 28.03 फीट तक पहुंच चुका है. हालांकि इसकी कुल क्षमता 36 फीट है और अभी करीब आठ फीट पानी की गुंजाइश है. इसके बावजूद लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्र से पानी आने के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है. विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर रूक्का डैम के रेडियल गेट कभी भी खोले जा सकते हैं. गेट खुलते ही बढ़ सकता है निचले इलाकों में पानी का बहाव रूक्का डैम का रेडियल गेट खोले जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम यानी निचले प्रवाह वाले क्षेत्रों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है. इसे देखते हुए डूब क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और किसी भी तरह की गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया गया है. प्रशासन ने स्वर्णरेखा नदी के जलग्रहण क्षेत्र और रेडियल गेट से प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को नदी या जलधारा के आसपास नहीं जाने की सलाह दी है. लोगों से कहा गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में नदी की धारा में उतरने या उसके करीब जाने का प्रयास न करें. निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह जल संसाधन विभाग ने तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. यदि जलस्तर बढ़ने की स्थिति बनती है, तो लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं. विभाग ने यह भी कहा है कि जलाशय के डूब क्षेत्र में यदि कोई अनधिकृत निर्माण किया गया है, तो उसे तत्काल हटा लिया जाए. प्रशासन की ओर से लोगों को किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गयी है. 1 जून से 7 अगस्त तक 537 मिमी बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 7 अगस्त तक रांची में कुल 537 मिमी बारिश दर्ज की गयी है. हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 591 मिमी से करीब 9 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार बारिश के कारण शहर के जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ी है. आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन जलाशयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कांके डैम के बढ़ते जलस्तर और रूक्का डैम के संभावित रेडियल गेट खोलने को लेकर है. लोगों से सावधानी बरतने की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी, डैम, जलाशय और निचले इलाकों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें. विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की सलाह दी गयी है. रूक्का डैम का गेट खोले जाने की स्थिति में पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है, इसलिए निचले इलाकों के लोगों को पहले से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0