जमशेदपुर। जमशेदपुर में ऑटो का सफर महंगा हो सकता है। शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक-संचालक संघ ने विभिन्न रूटों पर ऑटो किराए में 5 रुपए तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। हालांकि, इस बढ़ी हुई दर पर अंतिम निर्णय प्रशासन की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा। डीसी को सौंपा पत्र संघ ने इस संबंध में उपायुक्त को पत्र सौंपकर संशोधित किराया लागू करने की जानकारी दी है। संघ के अध्यक्ष श्याम किनकर झा ने बताया कि डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि, वाहन रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्च बढ़ने के कारण किराया बढ़ाना आवश्यक हो गया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद यह पहली बार है जब किराए में संशोधन किया गया है। महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा किराए में वृद्धि से शहर के हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों और कर्मचारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। नई दरें लागू होने पर यदि कोई यात्री रोजाना आने-जाने के लिए दो बार ऑटो का उपयोग करता है, तो उसे प्रतिदिन लगभग 10 रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इस हिसाब से महीने में करीब 300 रुपए तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के एक तालाब में हथियारों का जखीरा मिला है। राज्य में अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली-बसीरहाट क्षेत्र में एक तालाब से 16 लंबी बंदूकें और 2,345 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई। सर्च ऑपरेशन चला रही एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, 6 जून को बसीरहाट और बरूईपुर में हुई हथियार बरामदगी के बाद जांच चल रही थी। उसी जांच के दौरान मिले नए इनपुट और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर एसटीएफ ने यह सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके दौरान तालाब से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद हुए। संगठित नेटवर्क की आशंका इस ताजा कार्रवाई के बाद मामले में 51 हथियार और 2,705 राउंड गोला-बारूद बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे एक संगठित अवैध हथियार नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पहले भी मिल चुके हथियार कुछ दिन पहले संदेशखाली क्षेत्र में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर तालाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में अवैध हथियार बरामद किए थे। कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार तलाशी अभियान जारी है। बरामद हथियारों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से लाए गए। किसके लिए जमा किए गए थे। इनके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन और जांच जारी है।
रांची। कुख्यात गैंगस्टर राहुल सिंह ने आदिवासी नेत्री ज्योत्सना केरकेट्टा को धमकी दी है। साथ ही, सोशल मीडिया पर सीएनटी और एसपीटी एक्ट जैसे मुद्दों पर जवाब भी मांगा है। इतना ही नहीं, इस गैंगस्टर ने सोशल मीडिया पर ज्योत्सना केरकेट्टा की एक इमेज भी शेयर की है, जिस पर क्रॉस लगा हुआ है। इसका मतलब साफ है कि उसने आदिवासी नेत्री को किस तरह की धमकी दी है। राहुल सिंह द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता ज्योत्सना केरकेट्टा को सोशल मीडिया के माध्यम से कथित रूप से खुलेआम धमकी देने का मामला सामने आने के बाद से हड़कंप मचा है। जानकारी के अनुसार, राहुल सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर ज्योत्सना केरकेट्टा का एक इंटरव्यू साझा किया है। इसके साथ ही उसने ज्योत्सना की एक तस्वीर भी पोस्ट की, जिस पर लाल रंग से क्रॉस का निशान बनाया गया है। पोस्ट में धमकी भरे अंदाज में लिखा गया है कि “ज्योत्सना केरकेट्टा समय रहते सुधर जाओ। आदिवासियों की हितैषी बनती हो और जमीन बेचने की बात करती हो। तुम्हें समझ में आ रहा है कि तुम क्या बोल रही हो? क्या तुम्हारा पूरा झारखंड को बेचने का प्लान है?” कई संगठन उठा रहे आवाज सोशल मीडिया पर की गई इस पोस्ट को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता को डराने-धमकाने की कोशिश बताया है। वहीं, कुछ संगठनों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में अब तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि ज्योत्सना केरकेट्टा की ओर से इस मामले में कोई शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। आदिवासी नेतृत्व का दावा तो फिर ऐसा बयान क्यों... राहुल सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे ज्योत्सना केरकेट्टा को संबोधित करते हुए कई तीखे सवाल दागे हैं। ज्योत्सना केरकेट्टा से सीधा सवाल पूछा है कि आप आदिवासी समाज की बेटी होने का दावा करती हैं, आदिवासी नेतृत्व की बात करती हैं और झारखंड की पहचान की बात करती हैं, तो फिर ऐसा शब्द या बयान क्यों, जिससे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हों? राहुल सिंह का कहना है कि झारखंड की असली पहचान सिर्फ राजनीति की बिसात बिछाना नहीं है, बल्कि यहां के जल, जंगल, जमीन और ऐतिहासिक कानूनों सीएनटी, एसपीटी की सुरक्षा करना है। उसने ज्योत्सना को सलाह देते हुए कहा कि अगर उनके बयान से लोगों को ठेस पहुंची है, तो उन्हें सामने आकर सफाई देनी चाहिए और यदि गलती हुई है तो माफी मांग लेनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से समाज में उनका सम्मान बढ़ेगा, कम नहीं होगा। सीएनटी और एसपीटी एक्ट झारखंड का सुरक्षा कवच पोस्ट में राहुल सिंह ने सीएनटी, एसपीटी के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे झारखंड की आत्मा बताया है। राहुल सिंह ने लिखा कि सीएनटी, एसपीटी केवल कोई मामूली कानून नहीं है, बल्कि यह झारखंड के आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और उनके अधिकारों की सुरक्षा का एक मजबूत कवच है। यह कानून आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखता है। इस गैंगस्टर ने राजनीतिक दलों और नेताओं को चेतावनी दी कि राजनीति करनी है तो जनता के मुद्दों पर करो, लेकिन सीएनटी, एसपीटी और आदिवासी अधिकारों का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रांची। राजधानी रांची के लालपुर थाना क्षेत्र स्थित लोहराकोचा के एक गर्ल्स हॉस्टल में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में 19 वर्षीय छात्रा की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही लालपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस फिलहाल हादसा, आत्महत्या और हत्या तीनों संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। छात्रा पश्चिम बंगाल की थी मृतक छात्रा की पहचान गायत्री के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के कुल्टी की रहने वाली थी। वह रांची के लालपुर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। हॉस्टल संचालक ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी, जिसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है। थाना प्रभारी रुपेश कुमार सिंह ने बताया लालपुर थाना प्रभारी रुपेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि छात्रा को मिर्गी के दौरे आते थे। हॉस्टल में प्रवेश के समय परिजनों द्वारा जमा किए गए आवेदन पत्र में भी इस बीमारी का उल्लेख किया गया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं घटना के समय छात्रा को दौरा तो नहीं पड़ा था, जिसके कारण वह संतुलन खोकर नीचे गिर गई हो। पुलिस ने छात्रा के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और उनके रांची पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
पाकुड़। पाकुड़ जिले के महेशपुर में पुलिस ने एक गैंगरेप मामले का खुलासा किया है। इस मामले में दो नाबालिगों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एसपी अनुदीप सिंह ने दी। एसपी ने बताया कि महेशपुर थाना क्षेत्र में 16 मई की रात एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। अनुसंधान के बाद गिरफ्तारी महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने वैज्ञानिक, मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया। छापेमारी के दौरान अविनाश सोरेन, बबूटा सोरेन, अंसार टुडू, बबनु हेंब्रम और कार्तिक मुर्मू को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित नाबालिग से आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला था और टीम को इसके त्वरित उद्भेदन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। फिलहाल, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
रामगढ़। रामगढ़ शहर के गढ़बांध में बड़ा हादसा हो गया। यहां दामोदर नदी में नहाने के दौरान तीन किशोर गहरे पानी में डूब गए। जानकारी के मुताबिक, तीनों किशोर 14 से 15 वर्ष की उम्र के थे और घर से फुटबॉल खेलने की बात कहकर निकले थे। खेल के बजाय वे गढ़बांध पहुंच गए और नदी में नहाने उतर गए, जहां अचानक वे गहरे पानी की चपेट में आ गए। नदी में डूबने के दौरान बंगाली टोला निवासी आयुष कुमार तिवारी स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा। गंभीर हालत में उसे रांची रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घर पहुंचकर आयुष ने अपने दोस्तों के डूबने की सूचना परिजनों को दी, जिसके बाद परिवार के लोग और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे। 1 की मौत, दूसरे की तलाश जारी इस दर्दनाक हादसे में नए बस स्टैंड के पास रहने वाले वैभव कुमार की मौत हो गई है। वहीं किसान नगर निवासी प्रिंस सोनकर अब भी लापता बताया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पतरातू से गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और दामोदर नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़बांध से शहर में जलापूर्ति की जाती है, जिसके कारण यहां बांध का निर्माण किया गया है। बांध बनने के बाद नदी का यह हिस्सा काफी गहरा हो गया है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है। घटनास्थल से किशोरों के कपड़े भी बरामद किए गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
रांची। राजधानी रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर परिसर में सोमवार को उस समय तनाव का माहौल बन गया, जब दो पक्ष आपस में भिड़ गए। घटना के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई और माहौल काफी देर तक गरम रहा। बताया जा रहा है कि विवाद झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा गठित नई प्रबंध समिति को लेकर शुरू हुआ। इस दौरान जमकर बहस हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। सीएम के खिलाफ नारेबाजी का आरोप नई प्रबंध समिति के सचिव राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि मंदिर आस्था का केंद्र है और यहां इस तरह के नारे लगाना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि मंदिर की गरिमा के भी खिलाफ है। राकेश सिन्हा ने कहा कि “यह बाबा का दरबार है, यहां राजनीति या इस तरह के नारे लगाने की कोई जगह नहीं है। जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें इसका जवाब देना होगा।” दस्तावेज और रजिस्टर ले जाने का आरोप सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मंदिर परिसर के कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज, रजिस्टर और चेकबुक जबरन उठा लिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के खाते का पूरा हिसाब-किताब मौजूद है और एक-एक पैसे का रिकॉर्ड रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और संबंधित वीडियो भी पुलिस को सौंपा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। कोर्ट के आदेश का हवाला राकेश सिन्हा ने कहा कि मंदिर प्रबंधन समिति का गठन न्यायालय के निर्देश के तहत हुआ है। उन्होंने कहा कि झारखंड धार्मिक न्यास बोर्ड को मंदिर समिति बनाने का अधिकार कोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से दिया गया है।
रांची से एक बड़ी चोरी की घटना सामने आई है, जिसने बिजली व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिठोरिया थाना क्षेत्र के सत कनादू गांव स्थित बिजली ग्रिड से करीब 1000 किलोग्राम तांबा चोरी कर लिया गया। इस चोरी की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है। ट्रांसफार्मर को बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, अपराधियों ने एसएसटी 33/4 KV ट्रांसफार्मर को निशाना बनाया और उसमें लगे तांबे को निकालकर फरार हो गए। इतनी बड़ी मात्रा में तांबे की चोरी यह संकेत देती है कि वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी योजना बनाई गई थी। डीएसपी के नेतृत्व में जांच शुरू घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी Amar Kumar Pandey के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। उनके साथ इंस्पेक्टर असित मोदी, थाना प्रभारी सतीश पांडे और एसआई संतोष यादव भी मौजूद थे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। तकनीकी टीम और डॉग स्क्वायड की मदद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता ली है। साथ ही डॉग स्क्वायड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की टीम को भी बुलाया गया है, ताकि अपराधियों के बारे में ठोस सुराग मिल सके। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस चोरी के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। बिजली आपूर्ति पर असर की आशंका इस बड़ी चोरी के बाद इलाके में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए तेजी से काम कर रहा है, ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। जल्द गिरफ्तारी का दावा पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
देवघर: झारखंड के जंगलों में इन दिनों महुआ चुनने की परंपरा पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। देवघर जिले के डिगरिया पहाड़ की चोटी पर स्थित जंगलों में लगी भीषण आग ने एक बार फिर वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महुआ इकट्ठा करने के लिए लगाई गई छोटी सी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। डिगरिया पहाड़ पर दो दिनों से सुलग रही आग देवघर के बाबूडीह गांव की ओर स्थित डिगरिया पहाड़ी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सोमवार को दिन में वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया था, लेकिन शाम होते-होते आग ने फिर से तेजी पकड़ ली और पूरे इलाके में फैल गई। शाम होते ही तेज हुई आग की रफ्तार स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन में आग पर नियंत्रण पा लिया गया था, लेकिन शाम के समय तेज हवा और सूखी झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलने लगी। कुछ ही देर में जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। स्थिति गंभीर होते ही वन विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। महुआ चुनने के लिए लगाई जाती है आग ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बार-बार आग लगने की सबसे बड़ी वजह महुआ चुनने का तरीका है। कई लोग पेड़ों के नीचे गिरी सूखी पत्तियों को साफ करने के लिए आग लगा देते हैं, ताकि महुआ आसानी से दिख सके। लेकिन यही तरीका जंगल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है और छोटी चिंगारी बड़े हादसे में बदल जा रही है। चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू वन विभाग की टीम और पशु रक्षकों ने मिलकर करीब चार घंटे तक लगातार प्रयास किया। कठिन पहाड़ी इलाका और ऊंचाई के कारण आग बुझाने में काफी परेशानी आई, लेकिन स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक तरीकों की मदद से देर रात तक आग पर नियंत्रण पा लिया गया। पर्यावरण और वन्यजीवों पर गहरा असर इस आग से जंगल की वनस्पतियों, औषधीय जड़ी-बूटियों और दुर्लभ पौधों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही कई छोटे वन्यजीव और पक्षी भी इसकी चपेट में आकर मारे गए। इस तरह की घटनाएं पर्यावरण संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। जागरूकता अभियान चला रहा वन विभाग वन विभाग ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। नुक्कड़ नाटक, ग्राम सभाएं और हाट-बाजारों में प्रचार के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि जंगल में आग न लगाएं। विभाग का कहना है कि स्थानीय सहयोग के बिना इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल है। अधिकारियों की अपील वन विभाग के सब बीट ऑफिसर राजीव रंजन ने बताया कि टीम ने कड़ी मेहनत से आग पर नियंत्रण पाया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि महुआ चुनने के लिए आग का इस्तेमाल न करें। इसके बजाय महुआ इकट्ठा करने के लिए जाल, पुरानी साड़ी या धोती का उपयोग करें। सतर्कता ही है समाधान डिगरिया पहाड़ की यह घटना साफ संकेत देती है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी आपदा बन सकती है। जरूरत है कि लोग जागरूक हों और जंगलों की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सुरक्षित रखा जा सके।
झारखंड के Chatra शहर में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई घरों में खाना बनाने के लिए लोग फिर से लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। चार दिन बाद पहुंचा गैस सिलेंडर का ट्रक स्थानीय लोगों के अनुसार शहर में चार दिनों के बाद Banshidhar Indane Gas Agency का एक ट्रक गैस सिलेंडर लेकर पहुंचा। गैस की बिक्री पुलिस लाइन के आगे स्थित मैदान में की गई। ट्रक आने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता वहां पहुंच गए। लोग सुबह करीब 6:30 बजे से ही खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े हो गए थे। करीब 9 बजे गैस से लदा ट्रक पहुंचा, जिसके बाद सिलेंडर वितरण शुरू हुआ। घंटों धूप में खड़े रहे लोग गैस लेने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और पुरुषों को कई घंटों तक धूप में इंतजार करना पड़ा। मांग ज्यादा होने के कारण कई लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया और उन्हें खाली सिलेंडर लेकर ही वापस लौटना पड़ा। लकड़ी-कोयले के चूल्हों का सहारा गैस की कमी के कारण कई घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कुछ परिवारों ने इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जबकि कई लोग फिर से लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि नियमित गैस आपूर्ति नहीं होने से रोजमर्रा का काम काफी प्रभावित हो रहा है। प्रशासन से समाधान की मांग गैस संकट से परेशान उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन से नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सिलेंडर उपलब्ध हों, तो उन्हें इस तरह घंटों लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा, ताकि शहर में रसोई गैस की सप्लाई सामान्य हो सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।