जुलाई महीने की शुरुआत सर्राफा बाजार के लिए गिरावट के साथ हुई है। 1 जुलाई 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सोने की कीमत में ₹1,600 से अधिक की गिरावट देखने को मिली, जबकि चांदी करीब ₹5,700 तक सस्ती हो गई। हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में दोनों कीमती धातुओं में लगभग 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। सोने का ताजा भाव एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,42,531 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। बुधवार को बाजार खुलने पर सोना ₹1,41,634 प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत गिरकर ₹1,40,810 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, यानी इसमें ₹1,608 की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 10:30 बजे तक सोना ₹1,41,196 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले ₹1,335 (0.94%) कम था। चांदी भी हुई सस्ती एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,28,563 प्रति किलोग्राम था। आज इसकी शुरुआत ₹2,25,000 प्रति किलोग्राम से हुई। शुरुआती कारोबार में चांदी की कीमत गिरकर ₹2,22,901 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, यानी इसमें ₹5,662 की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 10:30 बजे तक चांदी ₹2,24,325 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी, जो पिछले बंद भाव से ₹4,238 (1.85%) कम थी। निवेशकों की नजर बाजार पर सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर इंडेक्स, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित करते हैं। यदि गिरावट का यह रुख जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बेहतर अवसर बन सकते हैं।
मुंबई: टीवी अभिनेत्री जैस्मिन भसीन का जन्मदिन इस बार अस्पताल में बीता। अपने बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए दुबई पहुंचीं जैस्मिन अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके बॉयफ्रेंड और अभिनेता अली गोनी ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फैंस से उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ करने की अपील की। "जिंदगी की मर्जी कुछ और थी" अली गोनी ने इंस्टाग्राम पर अस्पताल से एक भावुक तस्वीर साझा की, जिसमें जैस्मिन अस्पताल के बेड पर लेटी हुई हैं और अली का हाथ थामे नजर आ रही हैं। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, "हैप्पी बर्थडे जैस्मिन। हम यहां तुम्हारा जन्मदिन मनाने आए थे, लेकिन जिंदगी की मर्जी कुछ और ही थी। जन्मदिन की यादें बनाने के बजाय हम अस्पताल के कमरे में हैं। तुम्हें दर्द में देखना इस ट्रिप का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है। तुम्हें फिर से स्वस्थ और मुस्कुराते हुए देखने के लिए मैं किसी भी जश्न को छोड़ने को तैयार हूं।" उन्होंने आगे लिखा कि उनकी सबसे बड़ी दुआ यही है कि जैस्मिन जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से मुस्कुराने लगें। गंभीर इन्फेक्शन के कारण हुईं अस्पताल में भर्ती अली गोनी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बताया कि जैस्मिन को अचानक गंभीर इन्फेक्शन हो गया, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने लिखा, "हम जैस्मिन का जन्मदिन मनाने दुबई आए थे, लेकिन जिंदगी की मर्जी कुछ और थी। वह अचानक बहुत बीमार पड़ गईं और गंभीर इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती करनी पड़ी। पिछले कुछ दिन हमारे लिए बेहद मुश्किल और भावुक रहे।" धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं जैस्मिन अली ने फैंस को राहत देते हुए बताया कि जैस्मिन की तबीयत में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा, "उन्हें सबसे अच्छी मेडिकल देखभाल मिल रही है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं। अगर मैं किसी के मैसेज या कॉल का जवाब नहीं दे पाया तो उसके लिए माफ़ी चाहता हूं। फिलहाल मेरा पूरा ध्यान जैस्मिन के साथ रहने पर है। कृपया उन्हें अपनी दुआओं में याद रखें।" कैसे शुरू हुई थी अली और जैस्मिन की लव स्टोरी? अली गोनी और जैस्मिन भसीन की पहली मुलाकात साल 2018 में खतरों के खिलाड़ी 9 के दौरान हुई थी। अर्जेंटीना में शूटिंग के दौरान दोनों अच्छे दोस्त बने। बाद में बिग बॉस 14 में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया। तब से दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं और अक्सर अपनी तस्वीरें और वेकेशन की झलकियां सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। फिलहाल फैंस जैस्मिन के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर सोमवार को भारतीय सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिला। बिकवाली के दबाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त वायदा सोना शुरुआती कारोबार में 1,44,180 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, लेकिन जल्द ही गिरकर करीब 1,43,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,43,454 रुपये का निचला स्तर भी छुआ। वहीं सितंबर वायदा चांदी भी गिरावट के साथ 2,23,174 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी और इंट्राडे में 2,22,641 रुपये तक फिसल गई। इस गिरावट से आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को कुछ राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी दिखा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स (COMEX) पर सोना करीब 0.41 प्रतिशत गिरकर 4,078 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1 प्रतिशत से अधिक टूटकर 58.52 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंकाओं, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड ने सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग सीमित रही। बाजार की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की घटनाओं से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती के साथ खुला, जबकि ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी उपभोक्ता विश्वास और रोजगार संबंधी आंकड़ों पर है। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों की दिशा तय होने की संभावना है। वहीं, विभिन्न शहरों में जीएसटी और मेकिंग चार्ज के कारण आभूषणों के खुदरा दामों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।
Petrol Diesel Price Today 23 June 2026: देशभर में आज के लिए पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 23 जून 2026 को ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, कुछ शहरों में कुछ पैसों की बढ़ोतरी और गिरावट जरूर दर्ज की गई है। पिछले कुछ समय से अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही थी, लेकिन हालिया कूटनीतिक प्रगति के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी आई है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियों ने फिलहाल घरेलू कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। पेट्रोल के ताजा रेट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। पेट्रोल का ताजा भाव (₹ प्रति लीटर) शहर आज का रेट बदलाव लखनऊ ₹101.92 +₹0.03 पटना ₹113.37 -₹0.17 भागलपुर ₹114.78 +₹0.64 दरभंगा ₹113.90 -₹0.17 गया ₹114.40 -₹0.32 मुजफ्फरपुर ₹114.16 +₹0.06 देवघर ₹105.05 +₹0.10 धनबाद ₹105.27 -₹0.21 जमशेदपुर ₹105.22 -₹0.25 रांची ₹105.26 स्थिर दिल्ली ₹102.12 स्थिर कोलकाता ₹113.47 -₹0.04 मुंबई ₹111.21 +₹0.03 चेन्नई ₹107.76 -₹0.11 गुरुग्राम ₹102.97 +₹0.17 नोएडा ₹102.08 -₹0.01 बेंगलुरु ₹111.68 +₹1.07 भोपाल ₹114.65 +₹0.20 डीजल के ताजा रेट दिल्ली में डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। डीजल का ताजा भाव (₹ प्रति लीटर) शहर आज का रेट बदलाव लखनऊ ₹95.41 +₹0.05 पटना ₹99.36 -₹0.18 भागलपुर ₹100.68 +₹0.60 गया ₹100.35 -₹0.30 दरभंगा ₹99.86 -₹0.16 मुजफ्फरपुर ₹100.11 +₹0.06 देवघर ₹100.25 +₹0.10 धनबाद ₹100.49 -₹0.17 जमशेदपुर ₹100.42 -₹0.23 रांची ₹100.49 स्थिर दिल्ली ₹95.20 स्थिर कोलकाता ₹99.82 स्थिर मुंबई ₹97.83 स्थिर चेन्नई ₹99.55 -₹0.10 गुरुग्राम ₹95.64 +₹0.17 नोएडा ₹95.56 +₹0.02 बेंगलुरु ₹99.56 +₹1.02 भोपाल ₹99.74 +₹0.18 क्यों स्थिर हैं ईंधन के दाम? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर अस्थायी छूट दिए जाने और स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के सकारात्मक संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इसके बावजूद तेल कंपनियां फिलहाल घरेलू बाजार में कीमतों में बदलाव करने से बच रही हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं? ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें शामिल हैं: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT)
Gold-Silver Rate Today: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो ताजा कीमतों की जानकारी लेना आपके लिए जरूरी है। 23 जून 2026 को सोने की कीमत में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी के दाम में मामूली गिरावट देखने को मिली है। बाजार के शुरुआती रुझानों के अनुसार, 24 कैरेट सोना 10 रुपये महंगा होकर ₹1,46,520 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 100 रुपये सस्ती होकर ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। सोने की कीमत में मामूली बढ़त आज 24 कैरेट सोने का भाव 10 रुपये बढ़कर ₹1,46,520 प्रति 10 ग्राम हो गया है। वहीं, 22 कैरेट सोना भी 10 रुपये की तेजी के साथ ₹1,34,310 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। हालांकि, जून महीने की शुरुआत की तुलना में सोने की कीमत अभी भी लगभग 6 प्रतिशत नीचे बनी हुई है। 24 कैरेट सोने का ताजा भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹1,46,570 ₹1,46,560 ▲ ₹10 लखनऊ ₹1,46,670 ₹1,46,660 ▲ ₹10 रांची ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 दिल्ली ₹1,46,670 ₹1,46,660 ▲ ₹10 मुंबई ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 कोलकाता ₹1,46,520 ₹1,46,510 ▲ ₹10 चेन्नई ₹1,48,360 ₹1,48,350 ▲ ₹10 चांदी के दाम में आई नरमी सोने के मुकाबले चांदी की कीमत में आज गिरावट दर्ज की गई है। एक किलोग्राम चांदी का भाव 100 रुपये घटकर ₹2,49,900 पर आ गया है। जून महीने में अब तक चांदी की कीमत में करीब 10.75 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। चांदी का ताजा भाव (प्रति किलो) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 लखनऊ ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 रांची ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 दिल्ली ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 मुंबई ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 कोलकाता ₹2,49,900 ₹2,50,000 ▼ ₹100 चेन्नई ₹2,54,900 ₹2,55,000 ▼ ₹100 बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग के आधार पर आने वाले दिनों में सोना और चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले ताजा रेट जरूर जांच लें।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहे और इसका सबसे बड़ा असर आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि देश की दिग्गज आईटी कंपनियां टीसीएस और इन्फोसिस अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। इस तेज गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹1.35 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। टीसीएस और इन्फोसिस को सबसे बड़ा झटका देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर करीब 7 प्रतिशत टूटकर ₹2,060.50 तक पहुंच गया, जो इसका 52 सप्ताह का निचला स्तर है। वहीं इन्फोसिस का शेयर लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,030.35 पर पहुंच गया। इस गिरावट से कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब ₹40,000 करोड़ की कमी आई और उसका कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹3.63 लाख करोड़ रह गया। अन्य आईटी कंपनियों में भी बिकवाली केवल टीसीएस और इन्फोसिस ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। विप्रो के शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक गिरावट एचसीएल टेक में 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोरी टेक महिंद्रा में भी 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? इस बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल आईटी दिग्गज Accenture का कमजोर आउटलुक माना जा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान की ऊपरी सीमा को 5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा चौथी तिमाही के लिए कंपनी का राजस्व अनुमान भी बाजार की अपेक्षाओं से कम रहा। इससे निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ गई कि वैश्विक कंपनियां आईटी कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम कर सकती हैं। भारतीय आईटी कंपनियों पर क्यों पड़ा असर? भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार उत्तरी अमेरिका से आता है। ऐसे में यदि अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां तकनीकी सेवाओं पर खर्च घटाती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6% की गिरावट शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर सेक्टर इंडेक्स रहा। निवेशकों की चिंता और वैश्विक संकेतों के दबाव में पूरे आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार और वैश्विक आईटी खर्च से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। अमेरिका द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बाजार दबाव में आ गया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,100 के स्तर के नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 73,983.18 अंक पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 73,615.99 अंक पर खुला। सुबह करीब 9:21 बजे सेंसेक्स 289.38 अंक यानी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 73,693.80 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 भी 75.30 अंक यानी 0.32 फीसदी टूटकर 23,139.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान रुपया भी दबाव में दिखा और डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर होकर 95.60 पर खुला। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: एचसीएल टेक इन्फोसिस टेक महिंद्रा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) महिंद्रा एंड महिंद्रा टाइटन टाटा स्टील एशियन पेंट्स ट्रेंट एचसीएल टेक का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 2.96 फीसदी तक टूट गया। इन शेयरों में रही तेजी बाजार की कमजोरी के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। तेजी वाले प्रमुख शेयर: पावरग्रिड आईसीआईसीआई बैंक सन फार्मा भारती एयरटेल ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.62 फीसदी फिसला। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की कमजोरी रही। ऑटो, केमिकल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टरों में भी गिरावट देखी गई। हालांकि, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मजबूती बनी रही। क्यों टूटा शेयर बाजार? अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.72 फीसदी बढ़कर 94.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ 91.82 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
नई दिल्ली: 10 जून 2026 को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के दाम में करीब ₹4,500 की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना लगभग ₹2,900 तक सस्ता हो गया। कीमती धातुओं में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। क्यों गिरे सोना और चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है। उच्च ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बनाता है। इसी वजह से निवेशकों की बिकवाली बढ़ी और दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई। MCX पर शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट चांदी: करीब ₹4,500 की गिरावट सोना: लगभग ₹2,900 सस्ता हालांकि, दिनभर के कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और अंतिम बंद भाव शुरुआती स्तर से अलग हो सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, और डॉलर की चाल सोना और चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं में फिर से तेजी भी लौट सकती है।
कीमती धातुओं की कीमतों में गुरुवार, 4 जून 2026 को मामूली नरमी देखने को मिली है। सोने और चांदी दोनों के दामों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कीमतों में बदलाव बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन निवेशकों और आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए ताजा रेट जानना जरूरी है। सोने की कीमत में कितनी आई गिरावट? आज 24 कैरेट सोने की कीमत 10 रुपये घटकर 1,56,210 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। वहीं 22 कैरेट सोना भी 10 रुपये सस्ता होकर 1,43,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी सोने को सहारा दे रही है, जबकि घरेलू बाजार में फिलहाल सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का भाव पटना ₹1,56,260 लखनऊ ₹1,56,360 कोलकाता ₹1,56,210 मुंबई ₹1,56,210 दिल्ली ₹1,56,360 चेन्नई ₹1,58,170 चांदी की कीमत में भी नरमी चांदी के दाम में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। आज एक किलोग्राम चांदी 100 रुपये सस्ती होकर 2,79,900 रुपये पर पहुंच गई है। हालांकि वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है, लेकिन घरेलू बाजार में फिलहाल दबाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख शहरों में चांदी का भाव (प्रति किलोग्राम) शहर आज का भाव पटना ₹2,79,900 लखनऊ ₹2,79,900 कोलकाता ₹2,79,900 मुंबई ₹2,79,900 दिल्ली ₹2,79,900 चेन्नई ₹2,89,900 आगे क्या रह सकता है रुख? अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,450 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी भी मजबूत स्थिति में बनी हुई है। आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और निवेशकों की मांग प्रमुख हैं। फिलहाल घरेलू बाजार में दोनों कीमती धातुओं में केवल मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है।
राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी की बड़ी कार्रवाई, रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप के बाद शेयर में लगा लोअर सर्किट सोने की रिफाइनिंग और आभूषण निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Rajesh Exports को बड़ा झटका लगा है। बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (सेबी) ने कंपनी और इसके प्रमोटर Rajesh Mehta के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत किया है। सेबी की कार्रवाई के बाद गुरुवार को कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली और बाजार खुलते ही शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गया। शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट बीएसई पर राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 110.15 रुपये पर बंद हुआ था। सेबी के आदेश के बाद शेयर करीब 5 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपये पर खुला और लोअर सर्किट में फंस गया। कंपनी के शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 239 रुपये और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपये रहा है। सेबी की जांच में क्या सामने आया? सेबी द्वारा 3 जून को जारी अंतरिम आदेश के अनुसार, जांच और फोरेंसिक ऑडिट के दौरान कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। नियामक का आरोप है कि कंपनी ने अपने राजस्व (रेवेन्यू) को लगभग 97 से 99 प्रतिशत तक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया। सेबी ने इस मामले को अत्यंत गंभीर और असाधारण प्रकृति का बताया है। जांच एजेंसी का कहना है कि कंपनी ने जांच के दौरान अपेक्षित सहयोग भी नहीं किया और कई महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर उपलब्ध नहीं कराईं। शिकायत के बाद शुरू हुई जांच मार्च 2024 में सेबी को कंपनी के खातों में दिखाए गए बड़े पैमाने के ट्रेड रिसीवेबल्स को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद नियामक ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की विस्तृत जांच शुरू की। मामले की गहराई से जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट भी कराया गया, जिसमें वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन की समीक्षा की गई। प्रमोटर पर लगा बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में किसी भी प्रकार का लेन-देन करने से रोक दिया है। इसका मतलब है कि वे फिलहाल कंपनी के शेयर खरीद, बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा कंपनी को 30 दिनों के भीतर जांच से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। विदेशी सहायक कंपनियों की भी हुई जांच सेबी ने केवल भारत में कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच नहीं की, बल्कि सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स की सहायक कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टिंग की भी समीक्षा की है। कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के उत्पादों की बिक्री करती है और "शुभ जूलर्स" ब्रांड के तहत आभूषण स्टोर भी संचालित करती है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि नियामकीय जांच और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप किसी भी सूचीबद्ध कंपनी के लिए गंभीर मामला होते हैं। ऐसे मामलों में निवेशकों को आधिकारिक सूचनाओं और नियामक संस्थाओं के अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
भारत समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। एक दिन की राहत भरी तेजी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों की चिंता बढ़ने से शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 803.13 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,846.71 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 209.35 अंक यानी 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,274.20 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी, लेकिन वैश्विक तनाव ने फिर से निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। आईटी शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। आईटी दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। सबसे अधिक गिरावट टीसीएस के शेयर में दर्ज की गई, जो 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, बजाज फाइनेंस और अन्य बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। भारती एयरटेल, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स में मजबूती देखने को मिली, लेकिन यह बढ़त समग्र बाजार की कमजोरी को संतुलित नहीं कर सकी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी सबसे कमजोर रहा, जहां 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी दबाव बना रहा। दूसरी ओर मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रुपया भी कमजोर, डॉलर के मुकाबले फिसला शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखाई दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला और 95.45 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.36 पर बंद हुआ था। आखिर बाजार में गिरावट की वजह क्या है? बाजार की इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। उनके अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बड़े हिस्से में माइन बिछा दी है और कुछ वाणिज्यिक जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आगे निवेशकों की नजर किस पर रहेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करेंगे। यदि तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं किसी सकारात्मक कूटनीतिक समाधान की खबर बाजार को राहत दे सकती है।
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। सोमवार को शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार ने जिस तरह वापसी की थी, उसी तेजी को आज भी जारी रखा गया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 400 अंकों की मजबूती के साथ 75,700 के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जबकि NIFTY 50 100 अंकों की तेजी के साथ 23,750 के पार पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखा। आईटी शेयरों में लगातार खरीदारी आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स के शेयरों में जोरदार खरीदारी जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशक आईटी कंपनियों के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इसी वजह से इस सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि दूसरी तरफ Nifty Private Bank इंडेक्स पर दबाव बना रहा। प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों से मिले संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। Hang Seng Index में 0.24% की बढ़त दर्ज की गई। Nikkei 225 में 0.64% की गिरावट रही। KOSPI में 3% से ज्यादा की बड़ी कमजोरी देखने को मिली। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती बनाए रखी। अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार बीती रात अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average 160 अंक चढ़कर बंद हुआ। Nasdaq Composite में गिरावट रही। S&P 500 लगभग सपाट बंद हुआ। टेक शेयरों में दबाव और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अमेरिकी बाजारों पर असर डालती दिखी। विदेशी निवेशकों की वापसी बनी बड़ा सहारा भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों की वापसी मानी जा रही है। काफी समय से लगातार बिकवाली कर रहे Foreign Institutional Investors (FII/FPI) सोमवार को खरीदारी करते नजर आए। निवेशकों की स्थिति कैटेगरी सोमवार की स्थिति FII/FPI ₹1,329 करोड़ की खरीदारी DII ₹1,959 करोड़ की बिकवाली हालांकि पिछले 30 दिनों में विदेशी निवेशक अब भी बिकवाल बने हुए हैं, लेकिन हालिया खरीदारी ने बाजार को बड़ा समर्थन दिया है। निवेशकों की नजर अब किस पर? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: वैश्विक बाजारों का रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत विदेशी निवेशकों का फ्लो आईटी और बैंकिंग सेक्टर की चाल भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार में लौटती मजबूती ने निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ाया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने चांदी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियों और अर्ध-निर्मित चांदी उत्पादों को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है। इस फैसले के बाद बाजार में चांदी की सप्लाई प्रभावित होने और कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चांदी और महंगी हो सकती है। क्या है सरकार का नया फैसला? सरकार ने 16 मई 2026 से चांदी की सिल्लियों और अन्य सेमी-फिनिश्ड सिल्वर उत्पादों के आयात पर सख्ती लागू कर दी है। पहले इनका आयात आसानी से हो जाता था, लेकिन अब केवल चुनिंदा एजेंसियों को ही आयात की अनुमति होगी। इनमें RBI से जुड़े बैंक, DGFT-अनुमोदित संस्थाएं और बुलियन एक्सचेंज से संबद्ध एजेंसियां शामिल हैं। क्यों उठाया गया यह कदम? सरकार का उद्देश्य बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव को कम करना है। मिडिल ईस्ट तनाव, डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी के कारण भारत का आयात खर्च तेजी से बढ़ा है। व्यापार मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने चांदी आयात पर करीब 12 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था। अप्रैल में आयात में भारी उछाल अप्रैल 2026 में चांदी आयात में 157 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। भारत मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और चीन से चांदी आयात करता है। क्या महंगी होगी चांदी? कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई सीमित होने से घरेलू बाजार में प्रीमियम बढ़ सकता है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल भारत में 1 किलो चांदी की कीमत लगभग ₹2.80 लाख तक पहुंच चुकी है। मई 2026 में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार द्वारा सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगाने के फैसले के बाद गुरुवार को शुगर सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही कई प्रमुख चीनी कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका कारोबार निर्यात पर काफी हद तक निर्भर माना जाता है। शुरुआती कारोबार में Balrampur Chini के शेयर में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Dalmia Bharat Sugar and Industries, EID Parry India और अन्य शुगर कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सितंबर 2026 तक निर्यात पर लगी रोक केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह रोक 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि सरकार ने यूरोपीय यूनियन (EU) और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाले निर्यात को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है। यानी इन विशेष समझौतों के तहत सीमित मात्रा में चीनी का निर्यात जारी रहेगा। पहले से भेजे जा रहे माल को मिली राहत सरकार ने उन निर्यात खेपों को राहत दी है जो पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल हैं। यानी जिन शिपमेंट्स की प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है। इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों ने इसे शुगर कंपनियों के मुनाफे पर असर डालने वाला कदम माना। शुगर शेयरों में कैसा रहा हाल? सरकारी फैसले के बाद कई प्रमुख शुगर कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई— Balrampur Chini के शेयर में करीब 4% तक की कमजोरी EID Parry India करीब 1.40% फिसलकर 794 रुपये के आसपास पहुंचा Dalmia Bharat Sugar and Industries भी दबाव में दिखा अन्य चीनी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा क्यों अहम है सरकार का यह फैसला? विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती मांग और संभावित उत्पादन दबाव को देखते हुए सरकार घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखना चाहती है। चीनी निर्यात पर रोक से घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि दूसरी तरफ इस फैसले से चीनी कंपनियों की एक्सपोर्ट कमाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उनके शेयरों पर दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर सरकार की आगे की नीति और घरेलू चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर बनी रहेगी।
ब्रोकरेज फर्म Emkay Global Financial Services ने Bajaj Finance के शेयर पर ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखते हुए ₹950 का टारगेट प्राइस तय किया है। 30 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कंपनी ने तिमाही नतीजों को मजबूत बताया, लेकिन वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर बजाज फाइनेंस ने इस तिमाही में ग्रोथ, प्रॉफिटेबिलिटी और क्रेडिट कॉस्ट तीनों मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स): ₹54.6 अरब यह आंकड़ा ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर और बाजार के अनुमान के करीब रहा क्रेडिट कॉस्ट घटकर 1.6% पर आ गई, जो मुख्य वजह रही कंपनी प्रबंधन का मानना है कि 3MOB, 6MOB और 9MOB कोहोर्ट्स में सुधार के चलते क्रेडिट क्वालिटी आगे भी बेहतर हो सकती है। FY27 के लिए क्या है कंपनी का आउटलुक? कंपनी ने अगले वित्त वर्ष के लिए सकारात्मक गाइडेंस दी है: AUM (Assets Under Management) ग्रोथ: 22–24% PAT ग्रोथ: AUM से थोड़ा ज्यादा मार्जिन स्थिर रहने की उम्मीद ऑपरेटिंग खर्च (Opex/NTI) में 25–40 बेसिस पॉइंट सुधार क्रेडिट कॉस्ट गाइडेंस: 1.45–1.60% (पहले 1.65–1.75%) यह संकेत देता है कि कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और क्रेडिट क्वालिटी में सुधार के रास्ते पर है। EPS अनुमान में बढ़ोतरी Q4 प्रदर्शन और मैनेजमेंट के सकारात्मक संकेतों को ध्यान में रखते हुए, ब्रोकरेज ने FY27–FY28 के EPS (Earnings Per Share) अनुमान में 4–8% तक की बढ़ोतरी की है। फिर भी ‘Reduce’ रेटिंग क्यों? हालांकि कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं, लेकिन Emkay का मानना है कि: मौजूदा वैल्यूएशन पहले से ही काफी ऊंचा है भविष्य की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा शेयर प्राइस में शामिल हो चुका है ऐसे में निवेशकों को मुनाफावसूली (profit booking) पर विचार करना चाहिए
ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने आईटी सेक्टर की कंपनी Mastek पर सकारात्मक रुख बनाए रखते हुए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। अपनी 20 अप्रैल 2026 की रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने स्टॉक के लिए 2240 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 28% की संभावित तेजी दर्शाता है। Q4FY26 प्रदर्शन: स्थिर ग्रोथ, लेकिन मार्जिन पर दबाव कंपनी ने चौथी तिमाही में मिश्रित प्रदर्शन दिया। कॉन्स्टेंट करंसी (CC) आधार पर राजस्व में 0.3% की तिमाही दर से बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 103.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचा। वहीं, 12 महीने का ऑर्डर बैकलॉग सालाना आधार पर 13.6% की मजबूत वृद्धि के साथ सकारात्मक संकेत दे रहा है। हालांकि, वेतन वृद्धि के पूरे तिमाही प्रभाव के कारण मार्जिन में लगभग 70 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई। इसके बावजूद, विदेशी मुद्रा से लाभ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया। भौगोलिक प्रदर्शन: UK मजबूत, अमेरिका में सुधार के संकेत यूनाइटेड किंगडम कंपनी के लिए स्थिरता का मुख्य आधार बना रहा, जहां हेल्थ, लाइफ साइंसेज (HLS) और BFSI सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तरी अमेरिका अभी भी रिकवरी मोड में है, लेकिन ऑर्डर बुक और डील पाइपलाइन में सुधार से आने वाले समय में धीरे-धीरे मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार FY27 से ज्यादा स्थिर टर्नअराउंड देखने को मिल सकता है। मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (MEA) क्षेत्र में लंबित प्रोजेक्ट्स के राजस्व से सपोर्ट मिला, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण क्लाइंट्स के फैसलों में देरी से निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है। रणनीतिक बदलाव: AI आधारित सेवाओं पर फोकस कंपनी अब AI-ड्रिवन और आउटकम-बेस्ड एंगेजमेंट मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही है। यह रणनीति अल्पकालिक उतार-चढ़ाव ला सकती है, लेकिन लंबे समय में ग्रोथ और क्लाइंट वॉलेट शेयर बढ़ाने में मददगार मानी जा रही है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत ऑर्डर बुक, UK बाजार में स्थिरता और AI आधारित रणनीति के चलते कंपनी का लॉन्ग-टर्म आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। इसी आधार पर ब्रोकरेज ने ‘बाय’ की सलाह बरकरार रखी है।
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर LKP Research ने सकारात्मक रुख अपनाया है। 21 अप्रैल 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ब्रोकरेज हाउस ने बैंक की रेटिंग को अपग्रेड करते हुए ‘BUY’ कर दिया है और ₹1002 का टारगेट प्राइस तय किया है। मजबूत तिमाही प्रदर्शन ने बढ़ाया भरोसा रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC Bank ने हालिया तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। बैंक की ग्रोथ रिटेल, SME और कॉरपोरेट सेगमेंट में मजबूत एडवांस (loans) बढ़ने के कारण हुई। मार्जिन स्थिर रहे, लेकिन मुनाफे (bottom line) में सुधार मुख्य रूप से प्राविजन खर्च में 18.3% की सालाना गिरावट के चलते देखने को मिला। इसके साथ ही ऑपरेटिंग एफिशिएंसी भी स्थिर बनी रही। एसेट क्वालिटी में मल्टी-ईयर बेस्ट वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद बैंक ने अपनी एसेट क्वालिटी को कई वर्षों के सर्वोत्तम स्तर पर बनाए रखा है। LKP Research का मानना है कि बैंक विभिन्न सेक्टर्स पर लगातार निगरानी रख रहा है ताकि ग्रोथ लाभदायक और टिकाऊ बनी रहे। डिपॉजिट ग्रोथ से घट रही चिंता बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ 14.4% YoY रही, जो क्रेडिट ग्रोथ से तेज है। इससे लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) को लेकर चिंताएं कम होती दिख रही हैं, जो पहले निवेशकों के लिए एक अहम मुद्दा था। आगे की ग्रोथ को लेकर उम्मीद ब्रोकरेज के अनुसार, HDFC Bank FY28 तक: RoA (Return on Assets): 2.1% RoE (Return on Equity): 15.6% हासिल कर सकता है। यह बैंक की मजबूत फ्रेंचाइजी, स्थिर ग्रोथ और सामान्य होते क्रेडिट कॉस्ट के कारण संभव माना जा रहा है। वैल्यूएशन और टारगेट LKP Research ने Sum-of-the-Parts (SOTP) वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर ₹1002 का टारगेट दिया है और मौजूदा स्तरों पर स्टॉक को आकर्षक बताया है।
अक्षय तृतीया के दौरान जबरदस्त खरीदारी के बाद सर्राफा बाजार में अब सुस्ती के संकेत दिखाई देने लगे हैं। 20 अप्रैल 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार के बाद मांग में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों का असर घरेलू कीमतों पर साफ नजर आ रहा है। सोने की कीमतों में आज मामूली गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोना, जो पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,55,780 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, आज ₹10 घटकर ₹1,55,770 पर आ गया है। इसी तरह 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के दाम में भी ₹10 की हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन संकेत देती है कि फिलहाल बाजार स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो निवेशक लंबे समय के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अनुकूल हो सकता है। कीमतों में स्थिरता अक्सर निवेश के लिए अच्छा अवसर मानी जाती है, खासकर तब जब बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो। आज के सोने के दाम (प्रति 10 ग्राम): 24 कैरेट: ₹1,55,770 (₹10 की गिरावट) 22 कैरेट: ₹1,42,790 (₹10 की गिरावट) 18 कैरेट: ₹1,16,830 (₹10 की गिरावट) शहरों की बात करें तो पटना और रांची में 24 कैरेट सोना ₹15,741 प्रति ग्राम पर बिक रहा है, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹15,577 प्रति ग्राम है। दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹15,592 प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी हल्की नरमी देखने को मिली है। आज चांदी ₹100 प्रति किलो सस्ती होकर ₹2,74,900 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। आज के चांदी के दाम: 1 ग्राम: ₹274.90 100 ग्राम: ₹27,490 1 किलोग्राम: ₹2,74,900 (₹100 की गिरावट) शहरों के हिसाब से पटना और रांची में चांदी ₹2,80,000 प्रति किलो के स्तर पर है, जबकि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹2,74,900 प्रति किलो पर बनी हुई है। कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया के बाद बाजार में आई यह हल्की गिरावट खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। आने वाले दिनों में कीमतें वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर तय होंगी।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कारोबार के अंत में बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। BSE Sensex 1,263.67 अंकों की बड़ी बढ़त के साथ 78,111.24 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 388.65 अंक चढ़कर 24,231.30 के स्तर को पार कर गया। बाजार की इस तेजी से निवेशकों में उत्साह का माहौल बना रहा। बाजार में आई मजबूत रिकवरी पूरा कारोबारी सत्र सकारात्मक रहा और लगभग सभी सेक्टरों में खरीदारी देखी गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई। इस उछाल के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़कर करीब 458 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। किन शेयरों ने किया कमाल बाजार की तेजी में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों का अहम योगदान रहा। Tata Consultancy Services, Tech Mahindra, Larsen & Toubro, Asian Paints और Adani Ports जैसे शेयरों में 3-4% तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा इंडिगो और जोमैटो की मूल कंपनी एटर्नल के शेयर भी टॉप गेनर्स में शामिल रहे। कुछ शेयरों में गिरावट भी जहां अधिकांश शेयरों में तेजी रही, वहीं Bharti Airtel, Axis Bank और ICICI Bank के शेयरों में हल्की गिरावट देखने को मिली। अस्थिरता में कमी, निवेशकों को राहत बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स भी 8% से ज्यादा गिरकर 18.76 पर आ गया, जो निवेशकों के लिए राहत का संकेत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू बाजार की मजबूती आगे भी निवेशकों का भरोसा बनाए रख सकती है।
देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह Tata Group के लिए नए कारोबार अब चिंता का कारण बनते दिख रहे हैं। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ग्रुप को अपने नए वेंचर्स से करीब ₹29,000 करोड़ तक का भारी नुकसान हो सकता है, जो शुरुआती अनुमान से लगभग पांच गुना ज्यादा है। शुरुआती अनुमान से कई गुना बढ़ा घाटा रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में इस नुकसान का अनुमान केवल ₹5,700 करोड़ लगाया गया था, लेकिन अब यह बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही इन कंपनियों का कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे FY25 में यह ₹16,550 करोड़ था। इस बढ़ते नुकसान को देखते हुए Natarajan Chandrasekaran के तीसरे कार्यकाल पर फैसला भी हालिया बोर्ड बैठक में टाल दिया गया था। किन कारोबारों से हो रहा है सबसे ज्यादा नुकसान? टाटा ग्रुप के जिन नए वेंचर्स से यह घाटा हो रहा है, उनमें प्रमुख हैं: Air India Tata Digital Tata Electronics Tejas Networks इन सभी सेक्टर्स में भारी निवेश के बावजूद अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल पाया है। एयर इंडिया बना सबसे बड़ा घाटे का कारण ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया सबसे ज्यादा नुकसान में है। FY26 में इसका घाटा ₹20,000 करोड़ के पार जाने का अनुमान पहले 9 महीनों में ही ₹15,000 करोड़ से ज्यादा नुकसान FY25 में कुल घाटा ₹11,000 करोड़ था एयर इंडिया के पुनर्गठन और विस्तार में भारी निवेश के चलते फिलहाल मुनाफा दूर की बात लग रहा है। टाटा डिजिटल: बड़े निवेश के बावजूद मुनाफा नहीं Tata Digital की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 2019 में शुरू किए गए इस वेंचर में अब तक ₹24,000 करोड़ से ज्यादा निवेश किया जा चुका है, लेकिन यह अब तक लाभ में नहीं आ पाया है। इसके प्रमुख प्लेटफॉर्म्स: BigBasket Tata 1mg Croma Tata Cliq Tata Neu FY26 में टाटा डिजिटल का घाटा ₹5,000 करोड़ तक रहने का अनुमान है, जबकि पहले 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ का नुकसान हो चुका है। अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी कमजोर Tata Electronics का घाटा ₹3,000 करोड़ तक पहुंच सकता है Tejas Networks को ₹1,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है, जबकि पिछले साल यह मुनाफे में थी आगे क्या रणनीति होगी? Noel Tata ने भी नए कारोबार से हो रहे नुकसान पर चिंता जताई है। माना जा रहा है कि जून में होने वाली बोर्ड बैठक में चेयरमैन चंद्रशेखरन इस नुकसान को कम करने के लिए नई रणनीति पेश कर सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार छठे सप्ताह भी जारी रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार दबाव में रहा। हालांकि, हफ्ते के अंत में रुपये की मजबूती और कुछ सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन ने नुकसान को सीमित करने में मदद की। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट इस सप्ताह BSE Sensex 263.67 अंक यानी 0.35% गिरकर 73,319.55 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 106.5 अंक यानी 0.46% की कमजोरी के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा और निवेशकों में सतर्कता बनी रही। किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी? सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे: Nifty Healthcare और Nifty Pharma में 3% से ज्यादा की गिरावट Nifty Auto, PSU Bank, Private Bank और Consumer Durables में करीब 1% की कमजोरी वहीं, कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा दिया: Nifty IT, Metal और Defence इंडेक्स में 2–3% की बढ़त किन कंपनियों को हुआ फायदा-नुकसान? इस सप्ताह Bharti Airtel में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट Sun Pharmaceutical Industries, NTPC Limited और ICICI Bank में भी गिरावट वहीं दूसरी ओर: Tata Consultancy Services Infosys Limited Bharat Electronics Limited इन कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल BSE Smallcap इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त कुछ शेयरों में 10–20% तक की तेजी देखी गई BSE Midcap इंडेक्स 0.5% गिरा, जिसमें कई फाइनेंशियल और ऑटो स्टॉक्स दबाव में रहे रुपये की ऐतिहासिक वापसी इस हफ्ते भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की। सोमवार को यह पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था लेकिन हफ्ते के अंत तक 171 पैसे मजबूत होकर 93.10 पर बंद हुआ यह पिछले 12 वर्षों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली Foreign Institutional Investors ने सातवें हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी इस दौरान ₹29,425 करोड़ के शेयर बेचे वहीं Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹29,274 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।