मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता का असर बुधवार, 13 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में तेजी के बावजूद बाजार जल्द ही दबाव में आ गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण इक्विटी बाजारों में चौथे दिन भी कमजोरी बनी रही। BSE Sensex शुरुआती बढ़त के बाद फिसलकर 70.46 अंक (0.09%) की गिरावट के साथ 74,488.78 पर बंद हुआ। वहीं NIFTY 50 में 18.11 अंक (0.08%) की मामूली बढ़त दर्ज हुई और यह 23,397.65 पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बाजार में लगातार बिकवाली का मुख्य कारण ग्लोबल अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk aversion) रही। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ा। बैंकिंग और कुछ बड़े सेक्टर्स में भी हल्की कमजोरी देखी गई। कमोडिटी बाजार में तेज उछाल शेयर बाजार के विपरीत कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले ने कीमतों में भारी उछाल ला दिया। Multi Commodity Exchange of India पर जून 2026 डिलीवरी वाला सोना 9,206 रुपये (6%) बढ़कर 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। वहीं चांदी 16,743 रुपये (6%) की तेजी के साथ 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। आगे का रुख विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाओं, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार भारी दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटकर 76,400 के नीचे पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 हजार के अहम स्तर से फिसलकर 23,950 के नीचे कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए लोगों से किफायत बरतने की अपील, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 845 अंकों से अधिक गिरकर 76,482 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 238 अंक टूटकर 23,936 पर कारोबार करता दिखा। ज्वैलरी सेक्टर में भारी बिकवाली प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की सलाह के बाद ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। Senco Gold का शेयर करीब 9 प्रतिशत तक टूट गया। वहीं Kalyan Jewellers, Titan Company और PC Jeweller के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। रुपये में कमजोरी और महंगाई की चिंता डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और शुरुआती कारोबार में 94.90 के स्तर तक पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस्राइल-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन बढ़ती तेल कीमतें और विदेशी मुद्रा पर दबाव आने वाले समय में बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली, जिसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर की मियाद खत्म होने और नई बातचीत की संभावनाएं कमजोर पड़ने से निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा, जहां शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 750 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी50 भी करीब 175 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स लगभग 0.79% गिरकर 77,898 के आसपास पहुंच गया, वहीं निफ्टी भी 0.75% की कमजोरी के साथ 24,200 के करीब आ गया। सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में खुले, जो बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत देता है। किन शेयरों पर पड़ा असर एविएशन और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इंडिगो के शेयर में 2% से अधिक गिरावट आई। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और मारुति जैसे दिग्गज शेयरों में भी 1% से ज्यादा की कमजोरी रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी लगभग 1% गिरकर 1346 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, कुछ आईटी और फार्मा शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा दिया। एचसीएल टेक, टीसीएस, पावरग्रिड, बीईएल और सन फार्मा में हल्की बढ़त दर्ज की गई। ब्रॉडर मार्केट और सेक्टर ट्रेंड मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। सेक्टर के लिहाज से कंस्ट्रक्शन, ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा दबाव दिखा, जबकि फार्मा सेक्टर में मजबूती देखने को मिली। गिरावट की बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई और सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका है, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। Iran और United States के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को बाजार की शुरुआत सुस्त रही। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश जरूर की। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली। सुबह 9:23 बजे तक सेंसेक्स करीब 124 अंकों की बढ़त के साथ 78,618 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 अंकों की तेजी के साथ 24,377 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में अनिश्चितता का माहौल विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत हैं। जहां पहले निवेशकों को समझौते की उम्मीद थी, वहीं अब आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर ‘India VIX’ इंडेक्स में 5.82% की तेजी के रूप में देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। किन सेक्टर्स ने दिया सहारा बाजार की सुस्ती के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। PSU बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखी गई। इंडिविजुअल शेयरों में Trent, State Bank of India और ICICI Bank ने बाजार को सहारा दिया। वहीं Jio Financial Services, Hindalco Industries और Tata Motors जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक सीजफायर डेडलाइन पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,700 के स्तर को पार करना बाजार के लिए जरूरी होगा। फिलहाल विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी है, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर, बाजार में भारी बिकवाली पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने बाजार के माहौल को और नकारात्मक बना दिया। नतीजतन, घरेलू शेयर बाजार ने लगभग चार वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट सप्ताह के दौरान BSE सेंसेक्स में 5.51 प्रतिशत यानी 4,354.98 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 भी 1,299.35 अंक यानी 5.31 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। पूरे सप्ताह में केवल मंगलवार को बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी सभी कारोबारी सत्रों में सूचकांक दबाव में रहे। स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव स्मॉलकैप कंपनियों के शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में इस सप्ताह करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इस दौरान Aqylon Nexus, Silver Touch Technologies, SEPC, InfoBeans Technologies, Amber Enterprises India, PG Electroplast, Yasho Industries, Sapphire Foods India, Capacite Infraprojects, Sunteck Realty, Rain Industries, Dynamatic Technologies और Precision Wires India जैसे कई शेयरों में 22 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में तेजी भी रही। Confidence Petroleum, Chemplast Sanmar, Jindal Poly Films, Happiest Minds Technologies, Apollo Pipes, Liberty Shoes और TTK Prestige जैसे शेयरों में 15 से 22 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया। लार्जकैप और मिडकैप कंपनियों पर भी असर BSE लार्जकैप इंडेक्स में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट रही। इस दौरान Polycab India, IDBI Bank, Larsen & Toubro, TVS Motor Company, UltraTech Cement, Mahindra & Mahindra, Eicher Motors, IndusInd Bank, Maruti Suzuki India, Varun Beverages और Tata Motors के शेयरों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आई। वहीं BSE मिडकैप इंडेक्स भी 4.5 प्रतिशत कमजोर रहा। इस दौरान KEI Industries, Bharat Forge, Ashok Leyland, Schaeffler India, Colgate Palmolive India, Ramco Cements, IDFC First Bank, Godrej Industries और APL Apollo Tubes के शेयरों में 10–15 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई। दूसरी ओर Premier Energies, LT Technology Services, Aurobindo Pharma, Ipca Laboratories, Suzlon Energy और Dixon Technologies जैसे कुछ शेयरों में तेजी भी दर्ज की गई। सेक्टरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स इस सप्ताह लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। निफ्टी ऑटो: 10.6% गिरावट निफ्टी PSU बैंक: 7.2% गिरावट निफ्टी डिफेंस: 7% गिरावट निफ्टी प्राइवेट बैंक: 7% गिरावट निफ्टी मेटल: 6% गिरावट विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार चौथे सप्ताह भी बिकवाली करते रहे। इस दौरान उन्होंने करीब 35,052 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और उन्होंने लगभग 37,739 करोड़ रुपये की खरीदारी की। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। रुपया लगातार दूसरे सप्ताह कमजोर हुआ और शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। सप्ताह के अंत में रुपया 92.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो एक सप्ताह पहले 91.74 के स्तर पर था। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहना जरूरी माना जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (11 मार्च) को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 1,000 अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। करीब 11:38 बजे Sensex 878.12 अंक यानी 1.12% गिरकर 77,327.86 पर था, जबकि Nifty 242.40 अंक यानी लगभग 1% गिरकर 24,019.20 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान 2,149 शेयरों में तेजी, 1,469 में गिरावट और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। बाजार गिरने के प्रमुख कारण 1️. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। 10 मार्च को FIIs ने करीब ₹4,673 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹6,333 करोड़ की खरीदारी की। VK Vijayakumar के अनुसार, पिछले एक साल का पैटर्न फिर दिखाई दे रहा है-FIIs की बिक्री को DIIs की खरीद संतुलित कर रही है। 2️. मुनाफावसूली (Profit Booking) पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में अच्छी तेजी आई थी। Nifty करीब 24,261 पर बंद हुआ था Sensex करीब 78,206 पर इस तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार दबाव में आ गया। 3️. मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्य-पूर्व में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक United States और Israel ने Iran पर बड़े हमले किए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। साथ ही Donald Trump ने कहा कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं। 4️. बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट बाजार की गिरावट में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का बड़ा योगदान रहा। सबसे ज्यादा दबाव इन शेयरों पर रहा: Kotak Mahindra Bank Bajaj Finserv Bajaj Finance SBI Life Insurance Bharti Airtel Tata Consumer Products इसके अलावा HDFC Bank और ICICI Bank भी करीब 1.4% तक गिर गए। 5️. सेक्टोरल दबाव ऑटो, आईटी, एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में 0.6% से 1.3% तक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि: स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा मिडकैप इंडेक्स लगभग सपाट रहा टेक्निकल संकेत Aakash Shah के अनुसार: निफ्टी के लिए 24,100 और 24,000 अहम सपोर्ट लेवल हैं ऊपर की ओर 24,400–24,500 बड़ा रेजिस्टेंस है अगर निफ्टी 24,500 के ऊपर निकलता है तो 24,600–24,700 तक तेजी आ सकती है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ी, जिसका असर बाजार पर साफ दिखाई दिया। इसी दौरान भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही और रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट सप्ताह के अंत तक BSE Sensex में 2,368.29 अंकों यानी करीब 2.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 78,918.90 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 728.2 अंक यानी लगभग 2.89 प्रतिशत फिसलकर 24,450.45 पर आ गया। यह गिरावट पिछले एक साल से अधिक समय में बाजार की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया इस सप्ताह Indian Rupee भी दबाव में रहा। रुपया गिरकर 92.30 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। बाजार पर इन कारणों का पड़ा असर बाजार में कमजोरी की मुख्य वजहों में United States और Iran के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव शामिल है। इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी गिरावट इस सप्ताह BSE Smallcap Index करीब 3.3 प्रतिशत गिरा। इस दौरान InfoBeans Technologies, Orchid Pharma, Rajesh Exports और Netweb Technologies India जैसे शेयरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। Jindal Poly Films, Paras Defence and Space Technologies, Sterlite Technologies और Jupiter Wagons जैसे शेयरों में 12 से 25 प्रतिशत तक की बढ़त रही। सेक्टोरल इंडेक्स भी लाल निशान में अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स इस सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। Nifty PSU Bank Index – 6.5% गिरावट Nifty Realty Index – 5% गिरावट Nifty Bank Index – 4.5% गिरावट Nifty Media Index – 4.3% गिरावट Nifty Private Bank Index – 4% गिरावट हालांकि Nifty Defence Index ने इस रुझान के उलट करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली इस सप्ताह Foreign Institutional Investors (FII) ने लगभग 21,831 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी लगातार तीसरे सप्ताह बिकवाली जारी रही। वहीं Domestic Institutional Investors (DII) ने 32,786 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा दिया। इन कंपनियों के मार्केट कैप में बड़ा बदलाव सप्ताह के दौरान State Bank of India, ICICI Bank, Larsen & Toubro और HDFC Bank के मार्केट कैपिटलाइजेशन में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। वहीं Bharat Electronics, Reliance Industries और Sun Pharmaceutical Industries के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।