Medical Advice

Person experiencing lower back pain radiating to the legs, illustrating symptoms of a pinched nerve and sciatica.
पीठ से पैरों तक झनझनाहट और तेज दर्द को न करें नजरअंदाज, नस दबने का हो सकता है संकेत; जानिए डॉक्टर कैसे करते हैं पहचान

कमर दर्द आज के समय में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। हालांकि हर कमर दर्द गंभीर नहीं होता, लेकिन यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों, जांघों और पैरों तक फैलने लगे, साथ ही झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य मांसपेशियों का खिंचाव समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण नस दबने (Nerve Compression) या साइटिका (Sciatica) जैसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसका समय रहते इलाज न होने पर नस को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। नस दबने पर कैसा महसूस होता है दर्द? कई लोगों को चलते, खड़े होने या लंबे समय तक बैठने के दौरान कमर से शुरू होकर पैरों तक जाने वाला तेज दर्द महसूस होता है। यह दर्द अक्सर बिजली के झटके जैसा, चुभने वाला या जलन पैदा करने वाला होता है। इसके साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी भी महसूस हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ ऐसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं। रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद डिस्क, हड्डी, लिगामेंट या अन्य ऊतक जब किसी नस पर दबाव डालने लगते हैं, तब नस सामान्य रूप से मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेश नहीं पहुंचा पाती। इसी कारण दर्द और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने लगते हैं। नस दबना क्या होता है? नस दबना एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की किसी नस पर आसपास के ऊतकों का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह समस्या सबसे अधिक रीढ़ की हड्डी में देखने को मिलती है। लगातार दबाव बने रहने से नस की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी क्षति का खतरा भी बढ़ जाता है। नस के दर्द और मांसपेशियों के दर्द में अंतर दोनों तरह के दर्द के लक्षण अलग-अलग होते हैं। इन्हें पहचानना जरूरी है। नस दबने का दर्द मांसपेशियों का दर्द दर्द कमर से पैर तक फैलता है दर्द एक ही हिस्से तक सीमित रहता है बिजली के झटके या झनझनाहट जैसा महसूस होता है दबाने पर दर्द बढ़ता है सुन्नपन और जलन हो सकती है सुन्नपन या झनझनाहट नहीं होती पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है कमजोरी कम देखने को मिलती है आराम करने पर भी दर्द बना रह सकता है आराम करने से धीरे-धीरे राहत मिलती है नस दबने के प्रमुख कारण 1. स्लिप डिस्क रीढ़ की डिस्क अपनी जगह से खिसककर नस पर दबाव डाल सकती है। यह नस दबने के सबसे आम कारणों में से एक है। 2. साइटिका साइटिक नर्व शरीर की सबसे लंबी नस होती है। इसके दबने पर दर्द कमर से शुरू होकर पूरे पैर तक फैल सकता है। 3. स्पाइनल स्टेनोसिस उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की नलिका संकरी होने लगती है, जिससे नसों पर दबाव बढ़ जाता है। इससे चलने में दर्द, पैरों में भारीपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। 4. बोन स्पर हड्डियों के अतिरिक्त उभार (Bone Spurs) आसपास की नसों पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे दर्द और नस संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। 5. चोट या दुर्घटना गिरने, दुर्घटना या किसी गंभीर चोट के कारण नस खिंच सकती है, दब सकती है या उसके आसपास सूजन आ सकती है, जिससे नस पर दबाव बढ़ जाता है। डॉक्टर कैसे करते हैं नस दबने की जांच? यदि मरीज में नस दबने के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल परीक्षण किया जाता है। जरूरत पड़ने पर निम्न जांच कराई जा सकती हैं: एमआरआई (MRI) सीटी स्कैन (CT Scan) एक्स-रे इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) इन जांचों के जरिए यह पता लगाया जाता है कि नस पर दबाव किस कारण से पड़ रहा है और उसकी गंभीरता कितनी है। किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें? यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिस्ट या स्पाइन विशेषज्ञ से सलाह लें। कमर से पैर तक फैलने वाला तेज दर्द पैरों में लगातार झनझनाहट सुन्नपन या संवेदना कम होना पैर में कमजोरी चलने या संतुलन बनाने में कठिनाई आराम करने के बाद भी दर्द कम न होना समय पर इलाज है सबसे जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि कमर से पैरों तक फैलने वाला तेज या बिजली जैसा दर्द हमेशा सामान्य कमर दर्द नहीं होता। यदि इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण भी मौजूद हैं, तो यह नस दबने का संकेत हो सकता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते सही जांच और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अधिकांश मरीज बिना किसी स्थायी नुकसान के पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
Close-up of a spider bite on skin with redness, swelling, and first aid treatment guidance.
मकड़ी काट ले तो घबराएं नहीं! WHO के Technical Advisor ने बताए सही फर्स्ट एड टिप्स और खतरे के संकेत

Spider Bite First Aid: बरसात के मौसम में मकड़ी के काटने पर दर्द, खुजली और सूजन होना आम बात है। WHO के Technical Advisor के अनुसार सही फर्स्ट एड अपनाने और गंभीर लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। मानसून के दौरान घरों और आसपास मकड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि मकड़ी काट ले, तो अधिकांश मामलों में हल्का दर्द, खुजली, लालपन या सूजन हो सकती है। हालांकि घबराने या बिना सलाह के घरेलू इलाज करने की बजाय सही फर्स्ट एड अपनाना जरूरी है। WHO के Technical Advisor और हेल्थ एजुकेटर डॉ. जेम्स ओ'डोनोवन के अनुसार, मकड़ी के काटने के बाद सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ पानी और हल्के साबुन से धोएं ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। यदि दर्द या सूजन हो, तो साफ कपड़े में बर्फ लपेटकर 10–15 मिनट तक सिकाई करें। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं और खुजली होने पर उस जगह को बार-बार न खुजलाएं, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है। मकड़ी के काटने के सामान्य लक्षण दर्द या जलन खुजली हल्की सूजन लालपन छोटे धब्बे या फफोले इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं सांस लेने में परेशानी चेहरे, होंठ या गले में सूजन तेज बुखार या ठंड लगना पूरे शरीर में एलर्जी या चकत्ते काटी गई जगह पर तेज दर्द या पस चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी महसूस होना ध्यान रखें ज्यादातर मकड़ी के काटने के मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन यदि लक्षण तेजी से बढ़ें या एलर्जिक रिएक्शन दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। समय पर सही इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है।  

anmol जुलाई 21, 2026 0
difference between kidney stones and gallbladder stones
Kidney Stone या Gallbladder Stone? पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, ऐसे पहचानें पथरी कहां है

आजकल बदलती जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण पथरी (स्टोन) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार लोगों को पेट या कमर में तेज दर्द होता है, लेकिन वे इसे गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यह किडनी स्टोन या गॉलब्लैडर स्टोन का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों तरह की पथरी में क्या अंतर होता है और इनके लक्षण कैसे अलग-अलग होते हैं। किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन में क्या अंतर है? किडनी स्टोन मूत्र तंत्र (यूरिनरी सिस्टम) से जुड़ी समस्या है। यह तब बनती है जब पेशाब में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड या अन्य खनिज मिलकर कठोर कण बना लेते हैं। वहीं गॉलब्लैडर स्टोन पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है और आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन जैसे तत्वों के जमने से विकसित होती है। कई मामलों में दोनों प्रकार की पथरी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है। परेशानी तब शुरू होती है जब पथरी रास्ता रोकने लगती है। दर्द से कैसे करें पहचान? किडनी स्टोन के लक्षण कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द होना। दर्द का पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैलना। दर्द का रुक-रुक कर तेज होना। पेशाब के दौरान दर्द या जलन महसूस होना। मतली या उल्टी की शिकायत होना। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी आ सकता है। गॉलब्लैडर स्टोन के लक्षण दाईं ओर ऊपरी पेट या पसलियों के नीचे तेज दर्द। तला-भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद दर्द बढ़ना। दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है। मतली और उल्टी की समस्या। यदि पथरी पित्त नली में फंस जाए तो बुखार और पीलिया जैसी स्थिति भी हो सकती है। किन लोगों में अधिक होता है पथरी का खतरा? कुछ आदतें और स्वास्थ्य स्थितियां स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे- दिनभर पर्याप्त पानी न पीना। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन। मोटापा या बढ़ता वजन। नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी। परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होने का इतिहास। असंतुलित खानपान और खराब जीवनशैली। कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें? यदि पेट, कमर या पसलियों के नीचे लगातार तेज दर्द हो, पेशाब में खून आए, तेज बुखार, पीलिया या बार-बार उल्टी जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड, यूरिन टेस्ट और अन्य जांचों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि पथरी किडनी में है या गॉलब्लैडर में। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मरीज बिना किसी गंभीर जटिलता के स्वस्थ हो सकते हैं। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Pahari Mandir
सावन में रांची के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों में करें दर्शन, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

रांची। भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में सावन को शिव भक्ति का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। राजधानी रांची के प्रमुख शिव मंदिरों में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।   पहाड़ी मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ रातू रोड स्थित पहाड़ी मंदिर रांची के सबसे प्रसिद्ध शिवालयों में से एक है। लगभग 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावन की प्रत्येक सोमवारी को यहां विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से रांची शहर का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है।   सुरेश्वर धाम और शिव शक्ति धाम में भी विशेष आयोजन चुटिया स्थित सुरेश्वर धाम मंदिर अपने 108 फीट ऊंचे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। वहीं, चिरौंदी स्थित शिव शक्ति धाम प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। यहां सावन के दौरान भगवान शिव और मां शक्ति की विशेष पूजा-अर्चना होती है।   आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेंगे शिवालय सावन महीने में रांची के ये शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का भी प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पवित्र माह में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने और इन शिवालयों के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण हर वर्ष सावन में इन मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Swollen feet and ankles highlighting edema, a possible warning sign of heart, kidney, liver, or circulation-related health conditions.
पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज! किडनी, हार्ट और लिवर की गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

नई दिल्ली: लंबे समय तक खड़े रहने, अधिक चलने या हल्की चोट लगने के बाद पैरों में सूजन आना आम बात है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों या तलवों में लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी, लिवर संबंधी समस्याओं या रक्त संचार में गड़बड़ी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। सीनियर इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एलेक्स मैथ्यू के अनुसार, जब शरीर के टिश्यू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तो पैरों में सूजन यानी एडिमा (Edema) की समस्या होती है। यदि सूजन वाली जगह पर उंगली दबाने के बाद कुछ समय तक गड्ढा बना रहे, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर का शुरुआती संकेत हो सकती है सूजन जब हृदय शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता, तो अतिरिक्त तरल पदार्थ पैरों और टखनों में जमा होने लगता है। इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहा जाता है। इस स्थिति में आमतौर पर दोनों पैरों में सूजन के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं: सांस फूलना जल्दी थक जाना सीने में भारीपन रात में सांस लेने में परेशानी किडनी ठीक से काम न करे तो भी फूल सकते हैं पैर किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले तत्व बाहर निकालने का काम करती है। जब इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। ऐसे मामलों में मरीज को दिखाई दे सकते हैं: पैरों और टखनों में सूजन चेहरे पर सूजन पेशाब में बदलाव लगातार थकान क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों में यह लक्षण काफी आम माना जाता है। लिवर की बीमारी भी बन सकती है वजह लिवर एल्ब्यूमिन नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यदि लिवर सिरोसिस या अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित हो जाए, तो एल्ब्यूमिन कम बनने लगता है, जिससे: पैरों में सूजन पेट में पानी भरना शरीर में भारीपन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नसों में खून का थक्का भी हो सकता है कारण यदि किसी एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नस में रक्त का थक्का बनने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति गंभीर होती है और तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए क्योंकि थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा भी बन सकता है। शरीर में प्रोटीन की कमी से भी आती है सूजन कुपोषण, किडनी रोग या लिवर की बीमारी के कारण शरीर में एल्ब्यूमिन का स्तर कम हो सकता है। ऐसे में रक्त से तरल पदार्थ बाहर निकलकर टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन दिखाई देती है। कुछ दवाएं भी बढ़ा सकती हैं परेशानी विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के सेवन से भी पैरों में सूजन हो सकती है: हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं स्टेरॉयड हार्मोनल दवाएं कुछ दर्द निवारक दवाएं डायबिटीज की कुछ दवाएं यदि नई दवा शुरू करने के बाद सूजन आने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पैरों की सूजन से बचने के आसान उपाय लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे न रहें। नमक का सेवन सीमित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित व्यायाम करें। वजन नियंत्रित रखें। बैठते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं में बदलाव न करें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि पैरों की सूजन के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: अचानक दोनों या एक पैर में तेज सूजन सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज दर्द या लालिमा पेशाब कम होना कई दिनों तक सूजन का बने रहना  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Doctor explaining hernia care tips to a patient during hot summer weather.
गर्मियों में हर्निया के मरीज रहें सतर्क, बढ़ सकती है सूजन और दर्द की समस्या; जानिए बचाव के आसान उपाय

गर्मी का मौसम सिर्फ थकान और डिहाइड्रेशन ही नहीं लाता, बल्कि पहले से हर्निया से जूझ रहे लोगों के लिए अतिरिक्त परेशानी भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम सीधे तौर पर हर्निया का कारण नहीं बनता, लेकिन शरीर में होने वाले कुछ बदलाव दर्द, सूजन और असहजता को बढ़ा सकते हैं। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट (जनरल एंड लैपरोस्कोपिक सर्जरी) डॉ. रत्नेश जेनवा के मुताबिक, गर्मियों में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान ज्यादा पसीना, पानी की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी और पेट पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं हर्निया के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं। क्यों बढ़ सकता है हर्निया का दर्द? 1. डिहाइड्रेशन से कमजोर होती हैं मांसपेशियां अत्यधिक पसीने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। इससे पेट की दीवार की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं और हर्निया वाली जगह पर दर्द और बेचैनी बढ़ सकती है। 2. कब्ज और पेट फूलने से बढ़ता है दबाव गर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज आम हैं। शौच के दौरान जोर लगाने से पेट के अंदर दबाव बढ़ता है, जिससे हर्निया की समस्या और गंभीर हो सकती है। 3. पसीने से त्वचा में जलन हर्निया वाले हिस्से के आसपास लगातार पसीना आने से खुजली, जलन और सूजन हो सकती है। खासतौर पर इंग्वाइनल हर्निया के मरीजों को यह समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है। 4. थकान से कम होता है मांसपेशियों का सहारा अधिक गर्मी के कारण शरीर जल्दी थक जाता है। इससे प्रभावित हिस्से के आसपास की मांसपेशियों का सपोर्ट कम हो सकता है और सामान्य गतिविधियों में भी दर्द महसूस हो सकता है। 5. ज्यादा शारीरिक गतिविधियां भी बढ़ा सकती हैं परेशानी गर्मियों में यात्रा, एक्सरसाइज या भारी सामान उठाने से पेट की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हर्निया के लक्षण बढ़ सकते हैं। हर्निया के मरीज गर्मियों में इन बातों का रखें खास ध्यान दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त भोजन लें। भारी सामान उठाने से बचें। ढीले और सूती कपड़े पहनें। लंबे समय तक खड़े रहने से बचें। शरीर का वजन नियंत्रित रखें। अत्यधिक गर्मी के समय ठंडी जगह पर रहने की कोशिश करें। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय हल्का और कम मात्रा में भोजन करें। दर्द, सूजन या बेचैनी अचानक बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हर्निया की जगह पर अचानक तेज दर्द, अत्यधिक सूजन, उल्टी या गंभीर असहजता महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जन या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।  

surbhi जून 15, 2026 0
Doctor explaining MRI scan results to a patient suffering from persistent lower back pain.
लगातार कमर दर्द में कब जरूरी होता है MRI टेस्ट? डॉक्टर से जानिए क्यों नहीं करना चाहिए नजरअंदाज

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर और जोड़ों का दर्द आम समस्या बन गया है। अक्सर लोग दर्द निवारक दवाओं के सहारे अस्थायी राहत तो पा लेते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाले दर्द को नजरअंदाज करना कई बार गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) कराने की सलाह दे सकते हैं, जिससे दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके। MRI क्या है और यह कैसे काम करता है? MRI एक नॉन-इनवेसिव स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदर की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स का उपयोग किया जाता है। यह रीढ़ की हड्डी, नसों, मांसपेशियों, लिगामेंट्स और अन्य सॉफ्ट टिश्यू की स्थिति को विस्तार से दिखाने में मदद करता है। किन स्थितियों में कमर दर्द के लिए MRI की जरूरत पड़ती है? 1. इलाज के बाद भी दर्द बना रहे अगर आराम, दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर डिस्क की समस्या, नसों पर दबाव या सॉफ्ट टिश्यू की बीमारी का पता लगाने के लिए MRI कराने की सलाह दे सकते हैं। 2. दर्द के साथ नसों से जुड़े लक्षण दिखाई दें यदि कमर दर्द के साथ निम्न समस्याएं भी हों, तो MRI जरूरी हो सकता है— दर्द का हाथों या पैरों तक फैलना सुन्नपन या झनझनाहट कमजोरी महसूस होना चलने-फिरने में परेशानी हाथों की पकड़ कमजोर होना ये लक्षण स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस या नसों पर दबाव जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं। 3. चोट या अंदरूनी नुकसान की आशंका हो यदि किसी दुर्घटना, खेल या अन्य कारणों से लिगामेंट, कार्टिलेज, मेनिस्कस या रोटेटर कफ को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो MRI सबसे प्रभावी जांच मानी जाती है। X-ray केवल हड्डियों की स्थिति दिखाता है, जबकि MRI सॉफ्ट टिश्यू की विस्तृत जानकारी देता है। 4. गंभीर बीमारी के संकेत दिखाई दें यदि कमर दर्द के साथ— बुखार अचानक वजन कम होना कैंसर का पुराना इतिहास संक्रमण की आशंका ऑस्टियोपोरोसिस लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग जैसी स्थितियां मौजूद हों, तो MRI तुरंत करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है। MRI किन समस्याओं की पहचान में मदद करता है? स्लिप्ड डिस्क और नसों पर दबाव लिगामेंट और कार्टिलेज की चोट घुटने और कंधे की स्पोर्ट्स इंजरी स्पाइनल इंफेक्शन ट्यूमर इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस अस्पष्ट और गंभीर दर्द के कारण क्या हर कमर दर्द में MRI जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार, नहीं। शुरुआती चरण में हर मरीज को MRI कराने की आवश्यकता नहीं होती। कई बार MRI में दिखाई देने वाले बदलाव वास्तविक दर्द का कारण नहीं होते, जिससे अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीज के लक्षण, शारीरिक जांच, उपचार के परिणाम और दर्द की गंभीरता को ध्यान में रखकर ही MRI की सलाह देते हैं। कब नहीं करनी चाहिए लापरवाही? यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, लंबे समय तक बना रहे, चोट के बाद शुरू हुआ हो या अन्य गंभीर लक्षणों के साथ दिखाई दे रहा हो, तो डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।  

surbhi जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0