चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में इलाज के दौरान कथित तौर पर मरीज को गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए एक जांच कमेटी गठित कर दी है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान हुई गड़बड़ी जानकारी के अनुसार, मरीज का उपचार चल रहा था और इसी दौरान उसे रक्त चढ़ाया जा रहा था। आरोप है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय गलत ब्लड ग्रुप चढ़ा दिया गया। जैसे ही इस चूक की जानकारी अस्पताल कर्मियों को मिली, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर तत्काल निगरानी बढ़ा दी गई। घटना की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए और मरीज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताने लगे। परिजनों में नाराजगी, अस्पताल में तनाव घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। परिजनों ने सवाल उठाया कि ब्लड ग्रुप की जांच और मिलान जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है। उनका कहना है कि ऐसी गलती मरीज की जान के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती थी। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। जांच कमेटी करेगी पूरे मामले की पड़ताल अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी का गठन किया है। समिति यह पता लगाएगी कि गलती ब्लड ग्रुप की जांच, ब्लड मैचिंग या ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया के किस चरण में हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी। दोषियों पर होगी कार्रवाई अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी। यदि किसी कर्मचारी या प्रक्रिया में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
रांची। रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के ट्रॉमा सेंटर में एक युवक की मौत के बाद सोमवार को काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अस्पताल प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, अरगोड़ा थाना क्षेत्र निवासी 26 वर्षीय युवक पंकज गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। हादसे के बाद उसे देर रात रिम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज को समय पर और उचित इलाज नहीं मिला, जिसके कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की तथा इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। विरोध के दौरान कुछ लोगों ने डॉक्टरों के साथ धक्का-मुक्की भी की। हालांकि बाद में अस्पताल कर्मियों और अन्य लोगों के समझाने पर स्थिति सामान्य हुई। डॉक्टरों ने दी सफाई ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सक डॉ. साकेत ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज की स्थिति अस्पताल पहुंचने के समय ही बेहद गंभीर थी। सड़क दुर्घटना में उसके शरीर की कई हड्डियां टूट चुकी थीं और अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था। डॉक्टरों की टीम ने पूरी तत्परता के साथ इलाज किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। पोस्टमार्टम से स्पष्ट होगी स्थिति रिम्स प्रबंधन ने भी स्पष्ट किया कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार चिकित्सकों ने मरीज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।
हजारीबाग। हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SBMCH) में इन दिनों मरीज और उनके परिजन बिजली संकट से भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल के कई वार्डों में घंटों बिजली गायब रहने से मरीजों की हालत खराब हो रही है। हालात इतने खराब हैं कि मरीजों को राहत देने के लिए उनके परिजन घर से टेबल फैन और हाथ वाले पंखे लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था सुधारने को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि एक वार्ड में 14 से 15 बेड होने के बावजूद केवल 2 या 3 सीलिंग फैन लगे हैं, जिनमें से कई खराब पड़े हैं। बिजली कटते ही पूरा वार्ड उमस और गर्मी से भर जाता है, जिससे मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। करोड़ों की व्यवस्था के बावजूद मरीज बेहाल अस्पताल परिसर में 263 KVA, 163 KVA और 63 KVA क्षमता के तीन बड़े जेनरेटर मौजूद हैं। इसके अलावा सोलर सिस्टम भी लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली संकट बना हुआ है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि इतनी सुविधाएं होने के बाद भी अस्पताल में बुनियादी व्यवस्था नहीं मिल पा रही है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है। अस्पताल प्रबंधन ने मानी समस्या इस मामले पर अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. राजकिशोर ने माना कि अस्पताल में बिजली कटौती और डीजल की कमी की समस्या है। उन्होंने बताया कि कई वार्डों के पंखे खराब हैं और उनकी मरम्मत की प्रक्रिया जारी है। साथ ही अस्पताल में लगे सोलर सिस्टम के खराब होने की बात भी स्वीकार की गई है। गर्मी में मरीजों की बदहाल स्थिति ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों को उम्मीद है कि सरकार और जिला प्रशासन जल्द इस समस्या का समाधान करेगा।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ताउंसा शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 331 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इस घटना ने पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में लापरवाही बनी संक्रमण की वजह? बीबीसी की जांच में सामने आया कि THQ ताउंसा अस्पताल में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी। मरीजों को लगाने वाली सिरिंज दोबारा इस्तेमाल की जा रही थीं एक ही दवा की शीशी (मल्टी-डोज वायल) से कई बच्चों को इंजेक्शन दिए गए 32 घंटे की अंडरकवर रिकॉर्डिंग में: 10 बार सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल देखा गया 4 मामलों में वही दवा दूसरे बच्चों को दी गई विशेषज्ञों ने बताया बेहद खतरनाक संक्रामक रोग विशेषज्ञ Dr Altaf Ahmed के मुताबिक: सिरिंज का पिछला हिस्सा भी वायरस फैला सकता है सिर्फ नई सुई लगाने से खतरा खत्म नहीं होता यह तरीका HIV संक्रमण फैलाने के लिए बेहद खतरनाक है अन्य गंभीर खामियां भी उजागर जांच में अस्पताल की कार्यप्रणाली पर और भी सवाल उठे: 66 बार बिना स्टरलाइज्ड ग्लव्स के इंजेक्शन लगाए गए मेडिकल वेस्ट को बिना सुरक्षा के संभाला गया इस्तेमाल की गई सुइयां और दवाइयां खुले में पाई गईं कैसे सामने आया मामला? इस पूरे मामले का खुलासा 8 साल के बच्चे मोहम्मद अमीन की मौत के बाद हुआ। उसकी बहन असमा भी HIV पॉजिटिव पाई गई परिवार का आरोप है कि अस्पताल में संक्रमित सुई के कारण बच्चों को यह संक्रमण हुआ सबसे पहले निजी डॉक्टर Gul Qaiserani ने इस पैटर्न को पहचाना। उन्होंने बताया कि संक्रमित बच्चों में से अधिकांश का इलाज उसी अस्पताल में हुआ था। आंकड़े क्या बताते हैं? 97 संक्रमित बच्चों में से सिर्फ 4 की माताएं HIV पॉजिटिव थीं इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण मां से नहीं, बल्कि अन्य कारणों से फैला आधे से ज्यादा मामलों में कारण: दूषित सुई (Contaminated Needle) प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। नए सुपरिटेंडेंट Dr Qasim Buzdar ने कहा कि: वीडियो पुराना या स्टेज्ड हो सकता है वहीं, स्थानीय सरकार का कहना है कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि संक्रमण का स्रोत वही अस्पताल है। हालांकि, एक लीक रिपोर्ट में अस्पताल में: दवाओं की कमी IV फ्लूइड का दोबारा इस्तेमाल खराब साफ-सफाई जैसी गंभीर कमियां सामने आईं। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले Pakistan में इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं: 2019: सिंध के रतोदेरो में सैकड़ों बच्चे HIV पॉजिटिव 2021 तक संख्या 1500 पहुंची कराची में भी 84 बच्चों के संक्रमित होने का मामला विशेषज्ञ Dr Fatima Mir के अनुसार: यह पूरे सिस्टम में संक्रमण नियंत्रण की कमजोरी को दिखाता है जरूरत से ज्यादा इंजेक्शन देने की प्रवृत्ति भी एक बड़ा कारण है कितना खतरनाक है सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल? संक्रमित खून सीधे दूसरे मरीज में पहुंच सकता है HIV जैसे वायरस तेजी से फैल सकते हैं नई सुई लगाने के बावजूद जोखिम बना रहता है ताउंसा का यह मामला केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। सैकड़ों बच्चों का संक्रमित होना एक गंभीर चेतावनी है कि इन्फेक्शन कंट्रोल, मेडिकल सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को तुरंत मजबूत करना बेहद जरूरी है।
दांत के इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, क्लिनिक सील कर जांच में जुटा प्रशासन झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। हरिहरगंज में दांत के इलाज के लिए पहुंची एक महिला की इंजेक्शन लगने के बाद मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी दंत चिकित्सक क्लिनिक छोड़कर फरार हो गया है। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्लिनिक को सील कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। दांत निकालने के दौरान हुआ हादसा यह घटना हरिहरगंज के मेन रोड स्थित निजी बस स्टैंड के पास संचालित जनता दंत क्लिनिक में हुई। जानकारी के अनुसार, 36 वर्षीय बिजानी देवी दांत के इलाज के लिए क्लिनिक पहुंची थीं। इलाज के दौरान दंत चिकित्सक डॉ. मोहम्मद अशरफ अली ने पहले इंजेक्शन देकर दांत निकाला। इसके बाद दर्द अधिक होने पर उन्हें दूसरा इंजेक्शन दिया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उल्टी के बाद बिगड़ी स्थिति, अस्पताल में मौत परिजनों के मुताबिक, इंजेक्शन लगने के कुछ ही समय बाद महिला को लगातार उल्टी होने लगी और हालत तेजी से खराब हो गई। आनन-फानन में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। भीड़ का आक्रोश, डॉक्टर फरार घटना की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ क्लिनिक और अस्पताल परिसर में जुट गई। लोगों में आक्रोश का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख आरोपी चिकित्सक मौके से फरार हो गया। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। प्रशासन की कार्रवाई, क्लिनिक सील घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। बीडीओ पारितोष प्रियदर्शी, सीओ मनीष कुमार सिन्हा और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गोपाल प्रसाद ने जांच के बाद क्लिनिक को सील कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। बिहार की रहने वाली थी मृतक महिला मृतक बिजानी देवी बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा थाना क्षेत्र के कासिमपुर गांव की निवासी थीं। वे मुकेश चंद्र भारती की पत्नी थीं। इस घटना के बाद उनके परिवार में शोक का माहौल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी चिकित्सक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। शुरुआती जांच में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर निजी क्लिनिकों में इलाज की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक न्याय के कटघरे में लाया जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।