Military News

Dassault Mirage 2000 fighter jet showcasing strike and combat capabilities during military operations.
परमाणु हमले से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक, क्यों दुनिया का भरोसेमंद फाइटर जेट बना मिराज-2000

फ्रांसीसी लड़ाकू विमान Dassault Mirage 2000 एक बार फिर वैश्विक सैन्य चर्चाओं के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर मिराज-2000-9 फाइटर जेट से हमला किया। हालांकि इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000 की सटीक हमला क्षमता और गहरी घुसपैठ की ताकत ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल कर दिया है। ईरान हमले की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हुए संघर्ष के दौरान UAE के मिराज-2000-9 विमानों ने ईरान के लावन द्वीप पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ घंटों बाद ईरान समर्थित जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000-9, मूल मिराज-2000 का सबसे उन्नत एक्सपोर्ट संस्करण है, जिसे खास तौर पर United Arab Emirates के लिए विकसित किया गया था। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक टारगेटिंग सिस्टम, लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं। क्यों इतना खतरनाक माना जाता है मिराज-2000 Dassault Aviation द्वारा विकसित यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान कई भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हवाई वर्चस्व, गहरे हमले, टोही मिशन और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। मिराज-2000 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीकता और विश्वसनीयता मानी जाती है। यही वजह है कि कई देशों की वायुसेनाओं ने दशकों तक इस पर भरोसा बनाए रखा है। भारत की परमाणु रणनीति में अहम भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए Indian Air Force का मिराज-2000 बेड़ा लंबे समय तक रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु ट्रायड के वायु-आधारित हिस्से में मिराज-2000 विमानों को विशेष भूमिका दी थी। ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज-2000 विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और जवाबी हमले की क्षमता से लैस किया गया था। भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति के तहत यदि देश पर परमाणु हमला होता है, तो यह विमान जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम माने जाते हैं। कारगिल युद्ध में साबित की ताकत 1999 के Kargil War के दौरान मिराज-2000 ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई थी। पहाड़ी इलाकों में सटीक बमबारी और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में इसकी भूमिका बेहद अहम रही थी। उसी दौर में भारत ने इन विमानों को परमाणु हमले की क्षमता से लैस करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया था। अब राफेल संभाल रहा बड़ी जिम्मेदारी हालांकि समय के साथ मिराज-2000 बेड़ा पुराना हो रहा है। अब Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की नई रणनीतिक ताकत बन रहे हैं। माना जाता है कि भविष्य में वायु-आधारित परमाणु हमले की प्राथमिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे राफेल बेड़े को सौंपी जा रही है। यूक्रेन भी हुआ मिराज का फैन रूस-यूक्रेन युद्ध में भी मिराज-2000 की क्षमताओं की खूब चर्चा हो रही है। Ukraine को फ्रांस से मिले मिराज-2000-5 विमानों ने रूसी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक इन विमानों ने Kh-101 क्रूज मिसाइलों और शाहेद ड्रोन जैसे खतरनाक लक्ष्यों को रोकने में बेहद प्रभावी प्रदर्शन किया है। आधुनिक पश्चिमी हथियारों के साथ इसकी अनुकूलता और तेज इंटरसेप्शन क्षमता इसे आज भी बेहद खतरनाक लड़ाकू विमान बनाती है।  

surbhi मई 12, 2026 0
US KC-135 Stratotanker aircraft disappears over Strait of Hormuz after sending 7700 emergency signal
होर्मुज़ के ऊपर ‘फ्लाइंग गैस स्टेशन’ गायब! US KC-135 ने भेजा 7700 इमरजेंसी सिग्नल, बढ़ी हलचल

मिडिल ईस्ट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद अचानक रडार से गायब हो गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 7700 कोड भेजते ही गायब हुआ विमान फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर विमान ने कतर के पास उड़ान के दौरान “7700” स्क्वॉक कोड ट्रांसमिट किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी सिग्नल होता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब विमान किसी गंभीर संकट का सामना कर रहा हो। इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया। आखिरी लोकेशन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर सिग्नल खो दिया। माना जा रहा है कि यह उस समय एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था और किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था। एक घंटे बाद पूरी तरह बंद हुआ सिग्नल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी कोड भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि केवल सिग्नल खोना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ा रहा है। क्या हो सकती हैं वजहें? विशेषज्ञों के अनुसार 7700 कोड कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे: तकनीकी खराबी इंजन या सिस्टम फेल होना आग लगना मेडिकल इमरजेंसी बाहरी खतरा या हमले की आशंका फिलहाल किसी भी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नहीं मिला कोई मलबा या SOS संकेत अब तक न तो किसी मलबे का पता चला है, न ही कोई डिस्टेस कॉल (SOS) या रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि हुई है। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स की संख्या भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि KC-135 आमतौर पर सीमित क्रू के साथ उड़ान भरता है। क्यों अहम है यह घटना? होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में इस अमेरिकी टैंकर विमान का अचानक गायब होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तनाव के बीच बढ़ी चिंता ईरान-अमेरिका तनाव के बीच इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं–क्या यह तकनीकी खराबी थी या किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत? फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर टिकी हैं।  

surbhi मई 6, 2026 0
Israeli Air Force fighter jets F-35 and F-15 flying amid rising Middle East tensions
Israel US Fighter Jet Deal: ईरान तनाव के बीच इजराइल ने बढ़ाई ताकत, F-35 और F-15IA फाइटर जेट की बड़ी डील को मंजूरी

तेल अवीव/वॉशिंगटन, 4 मई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Israel ने अपनी सैन्य क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। United States से अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी देते हुए इजराइल ने दो स्क्वाड्रन फाइटर जेट लेने का फैसला किया है, जिसमें F-35 Lightning II और F-15EX Eagle II शामिल हैं। अरबों डॉलर की डील, एयरफोर्स होगी और मजबूत इजराइल के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस सौदे के तहत एक स्क्वाड्रन स्टील्थ मल्टी-रोल F-35 Lightning II और एक स्क्वाड्रन एडवांस्ड F-15EX Eagle II खरीदे जाएंगे। इस डील में विमानों के साथ-साथ उनका रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इन विमानों का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनियां Lockheed Martin और Boeing करेंगी। नेतन्याहू का बड़ा बयान प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस फैसले को इजराइल की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि देश अपनी “हवाई श्रेष्ठता” को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहा है। नेतन्याहू ने जोर देते हुए कहा कि इजराइली वायुसेना पहले ही कई अभियानों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है और नए विमान उसे किसी भी समय, किसी भी स्थान पर कार्रवाई करने में और सक्षम बनाएंगे। 350 अरब शेकेल का रक्षा निवेश सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में लगभग 350 अरब शेकेल (करीब 118 अरब डॉलर) निवेश करने की योजना भी बनाई है। इस निवेश का मकसद घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि भविष्य में इजराइल अपने स्वदेशी अत्याधुनिक फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी काम करेगा। ड्रोन खतरे से निपटने की तैयारी इजराइल ने बढ़ते ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए एक नई रक्षा परियोजना भी शुरू की है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के जरिए ड्रोन हमलों को रोकना और हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। ईरान से तनाव बना बड़ी वजह हाल के महीनों में Iran के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और टकराव ने इजराइल को अपनी रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा कि हालिया घटनाओं से मिले अनुभवों ने यह साफ कर दिया है कि देश को अपनी सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत करनी होगी। कितनी बढ़ेगी ताकत? इस डील के बाद इजराइल की वायुसेना में: F-35 Lightning II की संख्या करीब 100 तक पहुंच सकती है F-15EX Eagle II की संख्या लगभग 50 हो सकती है रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए F-35 विमानों की डिलीवरी 2028 तक और F-15IA की डिलीवरी 2031 से शुरू होने की संभावना है। दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा इजराइल का कहना है कि यह खरीद केवल मौजूदा हालात के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक क्षेत्रीय सैन्य बढ़त बनाए रखने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Satellite imagery showing damage at US military bases in the Middle East after reported Iranian strikes
Middle East War: ईरानी हमलों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान! 8 देशों में 16 बेस क्षतिग्रस्त होने का दावा

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों में 8 देशों में फैले अमेरिका के कम से कम 16 सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य रणनीति और सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। CNN रिपोर्ट में बड़ा दावा CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जांच और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने हालिया हमलों में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में खासतौर पर: एडवांस्ड रडार सिस्टम कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर एयरक्राफ्ट और सपोर्ट सिस्टम को टारगेट किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ठिकाने इतने ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए हैं कि वे फिलहाल आंशिक इस्तेमाल के लायक भी नहीं बचे। 8 देशों में फैले ठिकाने बने निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के जिन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र के 8 अलग-अलग देशों में स्थित हैं। हालांकि सभी देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह अमेरिकी क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इन ठिकानों का इस्तेमाल आमतौर पर: निगरानी अभियानों एयर ऑपरेशंस लॉजिस्टिक सपोर्ट क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय के लिए किया जाता है। मरम्मत या बंद? अमेरिका के सामने चुनौती रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और खाड़ी देशों के अधिकारियों के बीच इस बात पर मतभेद है कि इन ठिकानों की मरम्मत की जाए या कुछ को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाए। कुछ अधिकारी मानते हैं कि इन ठिकानों को दोबारा तैयार करना बेहद महंगा और समय लेने वाला होगा। वहीं, रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन बेस को छोड़ना अमेरिका के लिए क्षेत्रीय प्रभाव कम कर सकता है। महंगे सिस्टम को हुआ नुकसान ईरानी हमलों में जिन सिस्टम्स को नुकसान पहुंचा है, उनमें हाई-टेक रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिस्टम सीमित संख्या में उपलब्ध होते हैं और इन्हें बदलना काफी महंगा साबित हो सकता है। यही वजह है कि इन हमलों को सिर्फ सामरिक नहीं, बल्कि आर्थिक झटका भी माना जा रहा है। युद्ध में अमेरिका का भारी खर्च पेंटागन के कंट्रोलर जूल्स जे हर्स्ट III ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान के साथ संघर्ष में अब तक अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। हालांकि कुछ आकलनों के मुताबिक, वास्तविक खर्च 40 से 50 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। अमेरिकी मौजूदगी पर उठे सवाल मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से उसकी रणनीतिक नीति का हिस्सा रही है। लेकिन लगातार हमलों और बढ़ते खर्च ने इस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे, तो अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। बढ़ता क्षेत्रीय तनाव ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। परमाणु विवाद, समुद्री मार्गों पर नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों में टकराव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आगे क्या? फिलहाल अमेरिका की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन रिपोर्ट्स के बाद यह साफ है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि अब सैन्य ढांचे को भी सीधे प्रभावित कर रहा है।

surbhi मई 2, 2026 0
US military personnel and armored vehicles at an American base in Germany amid troop withdrawal plans
US Troops Germany: जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाएगा अमेरिका, ईरान युद्ध पर ट्रंप-यूरोप में बढ़ी खाई

अमेरिका ने यूरोप में अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला किया है। पेंटागन ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। 6-12 महीनों में पूरी होगी वापसी पेंटागन के अनुसार, सैनिकों की वापसी चरणबद्ध तरीके से अगले 6 से 12 महीनों में पूरी की जाएगी। इस फैसले के बाद यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकर 2022 से पहले के स्तर के करीब आ जाएगी। जर्मनी में अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी जर्मनी में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति यूरोप में सबसे बड़ी मानी जाती है। फिलहाल वहां करीब 35,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जबकि पूरे यूरोप में यह संख्या 80,000 से 1,00,000 के बीच रहती है। जर्मनी में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जिनमें: रामस्टीन एयर बेस – यूरोप में अमेरिकी वायुसेना का सबसे बड़ा केंद्र पैच बैरक्स – यूएस यूरोपियन और अफ्रीका कमांड का मुख्यालय विस्बाडेन – यूरोप-अफ्रीका कमान का संचालन केंद्र लैंडस्टुहल रीजनल मेडिकल सेंटर – अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा सैन्य अस्पताल इसके अलावा ग्राफेनवोहर, होहेनफेल्स और स्पैंगडाहलेम जैसे कई बड़े ट्रेनिंग और एयर बेस भी यहीं स्थित हैं। क्यों बढ़ी अमेरिका-यूरोप में तकरार? यह फैसला ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के उस बयान के बाद विवाद गहरा गया, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका के “अपमानित” होने की बात कही थी। इस पर जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जर्मनी को ईरान पर टिप्पणी करने के बजाय यूक्रेन युद्ध खत्म करने और अपने आंतरिक हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। यूरोप के समर्थन की कमी पर नाराजगी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस बात से भी नाराज है कि कई यूरोपीय देशों ने ईरान के खिलाफ उसके सैन्य अभियानों में अपेक्षित समर्थन नहीं दिया। विशेष रूप से: स्पेन ने सहयोग से इनकार किया इटली ने भी सीमित समर्थन दिया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अन्य नेताओं के साथ भी ट्रंप के मतभेद सामने आए हैं। नाटो सहयोगियों पर ट्रंप का आरोप डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाटो सहयोगियों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे अमेरिकी सुरक्षा ढांचे का फायदा उठाते हैं, लेकिन पर्याप्त योगदान नहीं करते। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में यूरोपीय देशों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी से सैनिकों की वापसी का यह फैसला ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों पर दबाव बढ़ा सकता है। अमेरिका चाहता है कि यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाए और नाटो में ज्यादा खर्च करे।

surbhi मई 2, 2026 0
USS George H. W. Bush aircraft carrier sailing at sea rerouting via Cape of Good Hope amid Red Sea tensions
हूती अटैक से डर गई ट्रंप की सेना? 60 हजार करोड़ का युद्धपोत लंबा रास्ता लेकर मिडिल ईस्ट रवाना

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और लाल सागर में हमलों के बीच अमेरिका ने अपनी नौसैनिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। दुनिया के सबसे ताकतवर युद्धपोतों में शामिल USS George H. W. Bush (CVN-77) अब सीधा रास्ता छोड़कर अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। क्यों बदला गया रास्ता? माना जा रहा है कि यह फैसला लाल सागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है। Houthi movement द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यह इलाका बेहद संवेदनशील हो गया है। 2024–25 में कई जहाजों पर हमले बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा अमेरिकी और व्यापारिक जहाज निशाने पर इसी वजह से अमेरिकी नौसेना ने जोखिम भरे रेड सी रूट से बचने का विकल्प चुना। कौन सा रास्ता अपना रहा है युद्धपोत? यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर: अफ्रीका के दक्षिणी छोर से होकर Cape of Good Hope के रास्ते अटलांटिक से हिंद महासागर में प्रवेश करेगा हाल ही में इसे Namibia के तट के पास देखा गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ेगी अमेरिकी ताकत माना जा रहा है कि यह जहाज मिडिल ईस्ट में पहले से तैनात USS Abraham Lincoln (CVN-72) के साथ मिलकर ऑपरेशन को और मजबूत करेगा। यह तैनाती ऐसे समय हो रही है जब Iran के साथ तनाव चरम पर है Strait of Hormuz के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं कितना लंबा हो गया सफर? सामान्य रूट (रेड सी): ~8,000–9,000 नॉटिकल माइल नया रूट (अफ्रीका के जरिए): ~13,000–15,000 नॉटिकल माइल यानी करीब डेढ़ गुना लंबा सफर, जो खतरे की गंभीरता को दिखाता है। क्या यह ‘डर’ है या रणनीति? पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे “रणनीतिक एहतियात” मानते हैं, न कि सीधे तौर पर डर। लाल सागर अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुका है अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि हूती हमलों और क्षेत्रीय तनाव ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। सुपरपावर भी अब जोखिम से बचने के लिए अपने रास्ते बदलने को मजबूर है–जो मिडिल ईस्ट संकट की गंभीरता को दर्शाता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
US Navy MQ-4C Triton surveillance drone flying over the Strait of Hormuz before crash incident
अमेरिका को बड़ा झटका: फारस की खाड़ी में गिरा 240 मिलियन डॉलर का सुपर ड्रोन, ईरान पर शक

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का एक बेहद महंगा और एडवांस जासूसी ड्रोन हादसे का शिकार हो गया है। अमेरिकी नेवी ने पुष्टि की है कि MQ-4C Triton ड्रोन फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया। इसकी कीमत करीब 200–240 मिलियन डॉलर (करीब 1600–2000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है। होर्मुज स्ट्रेट के पास हुआ हादसा ड्रोन 9 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ऑपरेशन के दौरान अचानक गायब हो गया। ड्रोन ने “कोड 7700” इमरजेंसी सिग्नल भेजा इसके बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया बाद में पुष्टि हुई कि यह समुद्र में क्रैश हो गया अमेरिकी नेवल कमांड ने 14 अप्रैल को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। F-35 से भी महंगा ड्रोन यह MQ-4C Triton ड्रोन अमेरिका के सबसे एडवांस निगरानी सिस्टम में शामिल है। लंबी दूरी तक समुद्री निगरानी में सक्षम घंटों तक ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है हाई-टेक सेंसर और सर्विलांस सिस्टम से लैस इसकी कीमत दो F-35 Lightning II लड़ाकू विमानों से भी ज्यादा बताई जा रही है। ईरान पर शक, लेकिन पुष्टि नहीं ड्रोन के क्रैश होने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या तकनीकी खराबी थी? या किसी हमले में गिराया गया? कुछ रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि इसे ईरान ने निशाना बनाया हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘क्लास A मिशैप’ माना गया हादसा अमेरिकी नियमों के अनुसार, 2.5 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान होने पर उसे “Class A Mishap” कहा जाता है। इस मामले में: नुकसान 240 मिलियन डॉलर से ज्यादा इसे बेहद गंभीर सैन्य हादसा माना जा रहा है बढ़ सकता है तनाव यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है। अगर यह साबित होता है कि ड्रोन को गिराया गया, तो क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल, अमेरिका इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Iran claims downing two US fighter jets, rescue helicopters targeted amid escalating US-Iran conflict
अमेरिका को बड़ा झटका? ईरान ने दो फाइटर जेट गिराने का किया दावा, रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी निशाने पर

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे में दो अमेरिकी फाइटर जेट मार गिराए हैं और बचाव अभियान में लगे हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया। दो अमेरिकी विमानों को मार गिराने का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान ने F-15E स्ट्राइक ईगल को निशाना बनाया इसके अलावा A-10 वारथॉग पर भी हमला किया गया हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र/आधिकारिक पुष्टि सीमित है। एक पायलट सुरक्षित, दूसरा लापता F-15E में दो क्रू मेंबर सवार थे इनमें से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है दूसरा अब भी लापता बताया जा रहा है अमेरिकी विशेष बल उसकी तलाश में जुटे हैं। रेस्क्यू मिशन पर भी हमला लापता पायलट की तलाश में गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला हुआ हालांकि, दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहे पायलट पर इनाम ईरान ने अमेरिकी पायलट को पकड़ने पर इनाम का ऐलान किया है स्थानीय मीडिया के जरिए लोगों से जिंदा पकड़ने या सूचना देने की अपील की गई ट्रंप का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा: “यह युद्ध है… इससे बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” यानी सैन्य टकराव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत जारी रह सकती है बढ़ता तनाव लगातार एयर स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाई पायलट की तलाश और इनाम रेस्क्यू ऑपरेशन पर हमला ये सभी घटनाएं संकेत देती हैं कि संघर्ष अब और गंभीर और अनिश्चित होता जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
USS Gerald R Ford aircraft carrier fire aftermath with crew managing damage after 30 hour firefighting effort
समंदर में जला अमेरिका का ‘समुद्री दैत्य’: 30 घंटे बाद बुझी आग, 11 महीने की तैनाती में थका एयरक्राफ्ट कैरियर

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के सबसे महंगे और अत्याधुनिक युद्धपोतों में शामिल इस ‘समुद्री दैत्य’ पर लगी आग ने इसकी संचालन व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।   30 घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज के मुख्य लॉन्ड्री सेक्शन में आग लगी, जिसे बुझाने में चालक दल को करीब 30 घंटे का समय लगा। आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन धुएं के कारण कई सैनिकों को सांस लेने में परेशानी हुई   कुछ को मामूली चोटों के चलते इलाज देना पड़ा   जहाज की रोजमर्रा की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं   600 से ज्यादा सैनिकों की दिनचर्या प्रभावित इस हादसे के बाद: 600 से अधिक नौसैनिकों के सोने की व्यवस्था प्रभावित   कई सैनिकों को फर्श और टेबल पर सोने को मजबूर होना पड़ा   लॉन्ड्री सेक्शन जलने से कपड़े धोने की सुविधा ठप   करीब 4,500 सैनिक और पायलट इस पोत पर तैनात हैं, जो पहले ही लंबे समय से लगातार मिशन पर हैं।   11 महीने की लंबी तैनाती से बढ़ा दबाव यह एयरक्राफ्ट कैरियर पिछले साल जून से लगातार समुद्र में तैनात है और इसकी तैनाती अब 11वें महीने में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी लंबी तैनाती: तकनीकी समस्याओं को बढ़ाती है   चालक दल की कार्यक्षमता पर असर डालती है   मानसिक और शारीरिक थकान पैदा करती है   अगर यह मिशन और लंबा चला, तो यह वियतनाम युद्ध के बाद की सबसे लंबी तैनाती का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।   टॉयलेट से लेकर बेसिक सुविधाओं तक संकट The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार: सैनिकों को टॉयलेट के लिए 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है   साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हैं   कई तकनीकी खामियां पहले से ही सामने आ रही थीं   क्या अब भी यह ऑपरेशनल ‘महाबली’ है? US Central Command का कहना है कि: आग से जहाज की मुख्य युद्ध प्रणाली को नुकसान नहीं हुआ   पोत अभी भी पूरी तरह ऑपरेशनल है   हालांकि जमीनी स्थिति यह संकेत देती है कि लगातार दबाव और आंतरिक समस्याएं इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।   दुनिया का सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford की प्रमुख खासियत: इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS)   रोजाना 160–220 उड़ानों का संचालन   75 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात   दो परमाणु रिएक्टर, 25 साल तक बिना ईंधन ऑपरेशन   लगभग 13.3 बिलियन डॉलर की लागत   यह युद्धपोत अमेरिका की नौसैनिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात इसकी तैयारियों और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Iran US conflict escalation with drone strikes radar damage and rising military tension in Gulf region
ईरान-अमेरिका टकराव तेज: ड्रोन हमले, रडार तबाही और खाड़ी में बढ़ता सैन्य दबाव

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष और तीखा हो गया है। जंग के 18वें दिन दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं, जबकि हालात यह संकेत दे रहे हैं कि टकराव जल्द थमता नजर नहीं आ रहा। अमेरिकी दावों के उलट, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है और खाड़ी क्षेत्र में उसकी आक्रामक रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है।   ईरान का सख्त संदेश: ‘शुरू आपने किया, खत्म हम करेंगे’ ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फागरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे संदेश देते हुए कहा कि युद्ध का फैसला सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में होगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि: ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा   क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रह सकते हैं   युद्ध के अंत का फैसला ईरान करेगा, न कि अमेरिका   रणनीतिक झटका: AN/FPS-117 रडार सिस्टम तबाह ईरान ने ड्रोन हमले में अमेरिकी एयर डिफेंस नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब के अल-क़ैसुमाह एयरपोर्ट पर तैनात लंबी दूरी के 3D रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। AN/FPS-117 रडार: यह रडार 400 किमी तक हवाई खतरों का पता लगाने में सक्षम   फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल ट्रैक करने में अहम   अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित   इस सिस्टम को निष्क्रिय करना अमेरिका की निगरानी क्षमता पर सीधा असर डाल सकता है।   MQ-9 Reaper ड्रोन को भारी नुकसान युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक ड्रोन MQ-9 Reaper को भी भारी नुकसान हुआ है। अब तक 10–11 ड्रोन गिराए जाने की खबर   ईरान और यमन दोनों मोर्चों पर नुकसान   यह ड्रोन निगरानी और सटीक हमले के लिए जाना जाता है   50,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान और हेलफायर मिसाइल से लैस   विशेषज्ञों के अनुसार, यह नुकसान अमेरिकी ड्रोन फ्लीट का लगभग 10% तक हो सकता है, जो रणनीतिक दृष्टि से बड़ा झटका है।   जमीनी हकीकत बनाम राजनीतिक दावे जहां डोनाल्ड ट्रंप युद्ध में बढ़त का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी हालात इससे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले   स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव चरम पर   बातचीत की संभावना फिलहाल कमजोर   क्षेत्रीय असर और बढ़ता खतरा इस संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सुरक्षा चिंताएं भी गहरा सकती हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0