फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने इस मुकाबले में गोल कर विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे अब तक कोई भी खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराकर लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत में एम्बाप्पे ने गोल करने के साथ-साथ एक असिस्ट भी दर्ज किया। 30 साल की उम्र से पहले 20 वर्ल्ड कप गोल का रिकॉर्ड मोरक्को के खिलाफ किया गया गोल एम्बाप्पे का विश्व कप करियर का 20वां गोल था। इसके साथ ही वह 30 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले विश्व कप में 20 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उन्हें विश्व फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में और मजबूत स्थान दिलाती है। गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी की बराबरी एम्बाप्पे का यह गोल मौजूदा विश्व कप का उनका आठवां गोल भी था। इसके साथ उन्होंने लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली और दोनों खिलाड़ी अब गोल्डन बूट की दौड़ में संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं। पेनाल्टी चूकी, लेकिन बाद में किया शानदार गोल मैच के पहले हाफ में एम्बाप्पे के पास पेनाल्टी के जरिए गोल करने का मौका था, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बोनू ने उनका शॉट रोक दिया। हालांकि दूसरे हाफ में एम्बाप्पे ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई और बाद में उस्मान डेम्बेले के गोल में भी अहम असिस्ट किया। चोट की आशंका के बीच बदले गए बाहर मैच के 76वें मिनट में एम्बाप्पे को मैदान से बाहर बुला लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कुछ शारीरिक असहजता महसूस हुई थी, जिसके बाद कोच दिदिएर डेशां ने उन्हें आराम देने का फैसला किया। हालांकि उनकी चोट को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक गंभीर अपडेट सामने नहीं आया है। फ्रांस की नजर लगातार तीसरे फाइनल पर फ्रांस ने इस जीत के साथ लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। अब टीम का अगला मुकाबला स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा। फ्रांस 2018 में विश्व चैंपियन बना था, जबकि 2022 में उपविजेता रहा था। अब टीम लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचने की कोशिश करेगी। लगातार दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं एम्बाप्पे किलियन एम्बाप्पे पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में गिने जाते हैं। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है और वह हर टूर्नामेंट में नए रिकॉर्ड अपने नाम कर रहे हैं। मोरक्को के खिलाफ उनका प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि बड़े मुकाबलों में एम्बाप्पे फ्रांस के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं।
फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के हाथों 2-0 की हार के बाद मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआहबी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह हार उनकी टीम के लिए सीख साबित होगी और अगली बार जब विश्व कप में फ्रांस का सामना होगा तो मोरक्को उसे बाहर करने की पूरी कोशिश करेगा। फ्रांस ने बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दूसरे हाफ में किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल की बदौलत जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 के अंतर से टूर्नामेंट से बाहर किया। 2030 विश्व कप पर टिकी हैं नजरें हार के बावजूद ओआहबी ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि टीम अब अगले विश्व कप की तैयारी करेगी, जिसकी मेजबानी मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल संयुक्त रूप से करेंगे। उन्होंने कहा, "फ्रांस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है। वे पिछले दो विश्व कप के फाइनल तक पहुंचे हैं और उनके पास शानदार खिलाड़ी हैं। आज वे हमसे बेहतर थे, लेकिन हमें यकीन है कि अगले चार वर्षों में हम और मजबूत होकर लौटेंगे और उन्हें हराने की कोशिश करेंगे।" हार से निराश, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भरोसा कोच ने स्वीकार किया कि टीम इस हार से निराश है, क्योंकि उनका लक्ष्य सिर्फ क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना नहीं बल्कि विश्व कप जीतना था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया और पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुकाबला खेला। हालांकि, फ्रांस की गुणवत्ता ने आखिरकार अंतर पैदा कर दिया। अब अफ्रीका कप ऑफ नेशंस पर रहेगा फोकस मोहम्मद ओआहबी ने बताया कि फिलहाल टीम का अगला बड़ा लक्ष्य अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) होगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष केन्या, युगांडा और तंजानिया में होना है। उनका कहना है कि टीम पहले इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने और खिताब जीतने पर ध्यान देगी, जिसके बाद 2030 विश्व कप की तैयारियां तेज की जाएंगी। युवा खिलाड़ियों से भविष्य की उम्मीद कोच ने कहा कि मोरक्को के पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की मजबूत फौज है और फुटबॉल संघ भी लगातार टीम के विकास पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व कप का यह अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा और इससे भविष्य में टीम और मजबूत बनकर उभरेगी। फ्रांस की ताकत को भी सराहा ओआहबी ने फ्रांस के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी टीम शुरुआत से ही दबाव बना रही थी और वह पहले भी गोल कर सकती थी। उन्होंने माना कि फ्रांस ने बेहतर फुटबॉल खेली, लेकिन मोरक्को के खिलाड़ी पूरे मैच में संघर्ष करते रहे और अंत तक मुकाबले में बने रहने की कोशिश की। कोच ने भरोसा जताया कि टीम सितंबर में फिर से एकजुट होकर नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू करेगी और आने वाले वर्षों में बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले समाप्त होने के बाद अब 16 टीमें नॉकआउट चरण के तीसरे दौर यानी राउंड ऑफ 16 में आमने-सामने होंगी। इस चरण की शुरुआत शनिवार (4 जुलाई) को मोरक्को और कनाडा के मुकाबले से होगी। दोनों टीमें जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। राउंड ऑफ 32 में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराया, जबकि ब्राजील ने जापान को 2-1 से मात दी। फ्रांस ने स्वीडन को 3-0 से हराया, वहीं इंग्लैंड ने डीआर कांगो को 2-1 से शिकस्त दी। सबसे बड़े उलटफेर में जर्मनी और नीदरलैंड जैसी दिग्गज टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। पराग्वे ने जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हराया, जबकि मोरक्को ने नीदरलैंड को पेनल्टी में मात देकर सभी को चौंका दिया। भारतीय समयानुसार भारतीय समयानुसार राउंड ऑफ 16 के प्रमुख मुकाबलों में 4 जुलाई को कनाडा बनाम मोरक्को, 5 जुलाई को पराग्वे बनाम फ्रांस, 6 जुलाई को ब्राजील बनाम नॉर्वे और मेक्सिको बनाम इंग्लैंड के मैच खेले जाएंगे। इसके बाद 7 जुलाई को पुर्तगाल बनाम स्पेन, अमेरिका बनाम बेल्जियम और अर्जेंटीना बनाम मिस्र की टक्कर होगी, जबकि 8 जुलाई को स्विट्जरलैंड और कोलंबिया आमने-सामने होंगे। इस विश्व कप में पहली बार 48 टीमों ने हिस्सा लिया है। ग्रुप चरण के बाद 32 टीमों ने नॉकआउट में प्रवेश किया और अब केवल 16 टीमें खिताब की दौड़ में बची हैं। राउंड ऑफ 16 के बाद क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो लियोनेल मेसी 7 गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके पीछे काइलियन एम्बाप्पे 6 गोल के साथ दूसरे और अर्लिंग हालैंड तथा हैरी केन 5-5 गोल के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। ऐसे में अब हर मुकाबला न केवल टीमों के लिए बल्कि स्टार खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिहाज से भी बेहद अहम होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में नीदरलैंड्स के अभियान का अंत टीम के लिए दोहरी निराशा लेकर आया। राउंड ऑफ 32 में मोरक्को से मिली हार के बाद जहां टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई, वहीं मुख्य कोच Ronald Koeman ने भी अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया। इस फैसले के साथ डच राष्ट्रीय टीम के साथ उनका दूसरा कार्यकाल भी समाप्त हो गया। हार के बाद लिया बड़ा फैसला मोरक्को के खिलाफ मिली हार के बाद कोमैन ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि उन्होंने डच राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पूरी टीम का सपना विश्व कप में इतिहास रचने का था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने हार की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय टीम का कोच होने के नाते यह जिम्मेदारी उनकी भी थी। दो कार्यकाल में कई उपलब्धियां कोमैन ने पहली बार 2018 में नीदरलैंड्स की कमान संभाली थी और 2020 तक टीम का नेतृत्व किया। इसके बाद 2023 में उन्होंने दोबारा राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच का पद संभाला। उनकी कोचिंग में नीदरलैंड्स ने UEFA Euro 2024 के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम ने यूरो 2021, यूरो 2024 और फीफा विश्व कप 2026 के लिए भी क्वालीफाई किया। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने टीम को 2019 में UEFA Nations League Final तक पहुंचाया था। परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा कोमैन ने अपने बयान में कहा कि विश्व कप अभियान का इतनी जल्दी समाप्त होना बेहद निराशाजनक है। हालांकि, जब वह पीछे मुड़कर देखेंगे तो उन्हें टीम के साथ बिताए गए शानदार पल और सहयोग हमेशा याद रहेंगे। उन्होंने सभी खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और प्रशंसकों का आभार जताते हुए कहा कि अब वह अपनी पत्नी, बच्चों और पोते-पोतियों के साथ अधिक समय बिताना चाहते हैं। वहीं Royal Dutch Football Association ने भी पुष्टि की कि कोमैन अपना मौजूदा अनुबंध समाप्त होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।