नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का खड़गपुर से रिश्ता सिर्फ नौकरी या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्ता इंसानियत, अपनापन और वफादारी की मिसाल भी बन गया। ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी ने अपने प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में की थी। इसी दौरान स्टेशन के पास मौजूद थॉमस टी स्टॉल उनकी पसंदीदा जगह बन गई थी। घंटों चाय की दुकान पर बैठते थे धोनी थॉमस के परिवार के मुताबिक, नौकरी और रेलवे क्रिकेट के बीच धोनी अक्सर अपने दोस्तों के साथ इस दुकान पर घंटों बैठते, चाय पीते और बातचीत करते थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही शांत और साधारण युवक आगे चलकर विश्व क्रिकेट का सबसे सफल कप्तान बनेगा। कामयाबी के बाद भी नहीं भूले पुराने रिश्ते समय बीतने के साथ धोनी ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारतीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया। 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी खड़गपुर से उनका जुड़ाव कायम रहा। थॉमस की मुश्किल घड़ी में बने सहारा जब थॉमस को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक आया और वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे, तब धोनी ने अपने करीबी दोस्त रॉबिन के जरिए लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। परिवार का दावा है कि इलाज में भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई। इतना ही नहीं, जब थॉमस की चाय दुकान पर तोड़फोड़ का खतरा मंडराया, तब भी धोनी ने रेलवे अधिकारियों से बात कर दुकान को बचाने में मदद की।
चेन्नई, एजेंसियां। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के फैंस के लिए बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। टीम के दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज MS Dhoni ने अभ्यास शुरू कर दिया है, जिससे उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में CSK द्वारा शेयर किए गए वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल नेट्स सेशन ने यह संकेत दिया है कि धोनी अब रिकवरी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। धोनी आईपीएल 2026 के शुरुआती मुकाबले में नहीं खेल सके थे। चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले आधिकारिक तौर पर बताया था कि वह काफ स्ट्रेन (पिंडली की चोट) के कारण टूर्नामेंट के शुरुआती दो हफ्तों तक टीम से बाहर रह सकते हैं। इसी वजह से वह राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 30 मार्च को खेले गए पहले मैच में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। वीडियो से मिला पॉजिटिव संकेत, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं अब जो वीडियो सामने आया है, उसमें धोनी किट बैग के साथ मैदान में जाते और हल्का अभ्यास करते नजर आ रहे हैं। इससे यह तो साफ है कि उनकी रिकवरी अच्छी दिशा में है, लेकिन 3 अप्रैल को पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच में उनके खेलने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में फैंस को अंतिम फैसला मैच डे या टीम अपडेट तक इंतजार करना पड़ सकता है। चेन्नई के अगले दो मैच बेहद अहम चेन्नई सुपर किंग्स का अगला मुकाबला 3 अप्रैल को पंजाब किंग्स के खिलाफ घरेलू मैदान पर होगा। इसके बाद टीम 5 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से भिड़ेगी। ऐसे में अगर धोनी फिट घोषित होते हैं, तो उनकी वापसी CSK के लिए बड़ा मनोबल साबित हो सकती है। फिलहाल फैंस की नजर सिर्फ एक सवाल पर टिकी है क्या ‘थाला’ अगला मैच खेलेंगे?
IPL 2026 की शुरुआत Chennai Super Kings के लिए बेहद निराशाजनक रही है। गुवाहाटी में खेले गए मुकाबले में Rajasthan Royals के खिलाफ टीम ने पावरप्ले में ही 41 रन पर 4 विकेट गंवा दिए, जिससे मैच की दिशा शुरुआत में ही तय हो गई। यह प्रदर्शन केवल एक खराब दिन की कहानी नहीं, बल्कि पिछले सीजन से चली आ रही समस्या की निरंतरता को दर्शाता है। पावरप्ले में लगातार फ्लॉप CSK T-20 क्रिकेट में पावरप्ले को सबसे अहम और स्कोरिंग के लिए अनुकूल फेज माना जाता है, लेकिन CSK के लिए यही फेज सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है। IPL 2026 के पहले मैच में 41/4 का स्कोर इस बात का संकेत है कि टीम की टॉप ऑर्डर बल्लेबाजी अभी भी दबाव में टूट रही है। यह शुरुआत उन्हें मुकाबले से बाहर करने के लिए काफी थी। धोनी की गैरमौजूदगी से आगे की समस्या हालांकि टीम इस मैच में MS Dhoni के बिना उतरी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि समस्या सिर्फ एक खिलाड़ी की गैरमौजूदगी तक सीमित नहीं है। दरअसल, IPL 2025 में भी CSK की पावरप्ले बल्लेबाजी सबसे कमजोर टीमों में रही थी। 14 पारियों में कुल 731 रन औसत रन रेट: 8.70 औसत स्कोर: 52.21 कुल 29 विकेट (प्रति पारी औसतन 2.07 विकेट) डॉट बॉल प्रतिशत: 42.66% पहले 3 ओवर में ही बिगड़ जाता है खेल CSK की सबसे बड़ी समस्या पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में सामने आती है। ओवर 1 से 3 के बीच टीम का रन रेट केवल 7.76 रहा और लगभग आधी गेंदें (49.60%) डॉट खेली गईं। हालांकि ओवर 4 से 6 में रन रेट 9.64 तक पहुंचती है, लेकिन तब तक टीम शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में ही रहती है। 2025 का पैटर्न 2026 में भी जारी राजस्थान के खिलाफ 41/4 का स्कोर CSK के 2025 के औसत से भी काफी खराब है। यह केवल एक मैच नहीं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा है-धीमी शुरुआत, जल्दी विकेट गिरना और टॉप ऑर्डर का पूरी तरह ढह जाना। आगे की राह मुश्किल अगर CSK को टूर्नामेंट में वापसी करनी है, तो उन्हें पावरप्ले की रणनीति पर तुरंत काम करना होगा। अन्य टीमों के मुकाबले तेज शुरुआत करना अब जरूरत बन चुकी है, वरना हर मैच में शुरुआती झटका भारी पड़ सकता है।
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 से पहले चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम में जो नज़ारा देखने को मिला, उसने क्रिकेट फैंस को भावुक कर दिया। चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जब स्टेडियम में पहुंचे, तो “थाला-थाला” के नारों से पूरा चेपॉक गूंज उठा। कई फैंस की आंखें नम हो गईं, मानो वे किसी युग के अंत का संकेत महसूस कर रहे हों। यह खास मौका CSK के ‘Roar26’ इवेंट का था, जहां टीम के मौजूदा खिलाड़ियों के साथ-साथ पूर्व स्टार्स जैसे सुरेश रैना और डीजे ब्रावो भी नजर आए। खिलाड़ियों ने ट्रेनिंग सेशन और फन एक्टिविटी में हिस्सा लिया, जिससे माहौल और भी जोशीला बन गया। 44 साल के धोनी IPL में अपना 19वां सीजन खेलने जा रहे हैं। हालांकि उनकी फिटनेस और बल्लेबाजी क्षमता पहले जैसी नहीं रही, लेकिन टीम में उनकी मौजूदगी आज भी बेहद अहम मानी जाती है। हर साल की तरह इस बार भी उनके रिटायरमेंट को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पूर्व क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि IPL 2026 धोनी का आखिरी सीजन हो सकता है। उनके मुताबिक, इस बार धोनी “मेंटोर-कम-प्लेयर” की भूमिका में दिख सकते हैं और बल्लेबाजी क्रम में नीचे (नंबर 7 या 8) उतर सकते हैं। यह बदलाव टीम के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है, जिससे कप्तान रुतुराज गायकवाड़ को अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करने का पूरा मौका मिले। साथ ही, टीम में संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी भी मौजूद हैं, जिन्हें भविष्य के कप्तान के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, धोनी ने खुद अभी तक रिटायरमेंट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन उनकी एंट्री पर फैंस की भावनाएं साफ इशारा कर रही हैं कि यह सीजन खास और शायद आखिरी भी हो सकता है।
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Sanju Samson एक बार फिर सुर्खियों में हैं। टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद अब उनकी नजर IPL 2026 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि पर टिकी है। अगर सैमसन इस सीजन में 5000 रन पूरे कर लेते हैं, तो वह MS Dhoni के खास क्लब में शामिल हो जाएंगे। टी20 वर्ल्ड कप में मैच विनर बने सैमसन टी20 विश्व कप 2026 में सैमसन ने भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। वेस्टइंडीज के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 97 रन इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 रन न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में 89 रन इन पारियों ने उन्हें टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज साबित कर दिया। IPL में इतिहास रचने के करीब अब IPL 2026 में सैमसन एक खास रिकॉर्ड के बेहद करीब हैं। अब तक उन्होंने 2013 से 2025 के बीच 177 मैचों में 4,704 रन बनाए हैं, जिसमें 3 शतक 26 अर्धशतक शामिल हैं उन्हें 5000 रन के आंकड़े तक पहुंचने के लिए सिर्फ 296 रन की जरूरत है। धोनी के क्लब में एंट्री का मौका IPL इतिहास में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में 5000 रन का आंकड़ा अभी तक केवल MS Dhoni ही छू पाए हैं, जिन्होंने 2008 से 2025 के बीच 278 मैचों में 5,439 रन बनाए हैं। हालांकि KL Rahul के नाम भी 5000+ रन हैं, लेकिन उन्होंने हर मैच में विकेटकीपिंग नहीं की, इसलिए यह उपलब्धि अलग मानी जाती है। CSK की जर्सी में दिखेंगे सैमसन इस बार सैमसन के लिए यह उपलब्धि और भी खास हो सकती है, क्योंकि IPL 2026 में वह Chennai Super Kings की ओर से खेलते नजर आएंगे। दिलचस्प बात यह है कि यही वह टीम है, जहां MS Dhoni ने अपने करियर के सबसे यादगार पल दिए। ऐसे में सैमसन अगर इस टीम के लिए खेलते हुए 5000 रन पूरे करते हैं, तो यह उनके करियर का एक ऐतिहासिक मोमेंट होगा। राजस्थान से चेन्नई तक का सफर सैमसन लंबे समय तक Rajasthan Royals का हिस्सा रहे और 2021 में टीम की कप्तानी भी संभाली। उनकी अगुवाई में टीम 2022 में फाइनल तक पहुंची थी। 2025 सीजन के बाद उन्होंने टीम से अलग होने का फैसला किया, जिसके बाद चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें ट्रेड के जरिए अपने साथ जोड़ लिया। क्या टूटेगा रिकॉर्ड? अब सबकी नजर IPL 2026 पर है-क्या सैमसन इस सीजन में 5000 रन का आंकड़ा छूकर धोनी के खास क्लब में शामिल हो पाएंगे? अगर उनका फॉर्म जारी रहा, तो यह सिर्फ समय की बात लगती है।
चेन्नई, एजेंसियां। कैप्टन कूल और रांची के लाल महेंद्र सिंह धोनी IPL 2026 में धूम मचायेंगे। CSK के CEO ने सारी अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि धोनी पूरा सीजन खेलेंगे। दरअसल, इसके पहले चर्चा थी कि धोनी इस सीजन कुछ मुकाबले ही खेलेंगे। पर अब तस्वीर साफ हो गई है। आईपीएल 2026 से पहले महेंद्र सिंह धोनी को लेकर चल रही अटकलों के बीच चेन्नई सुपर किंग्स के सीईओ कासी विश्वनाथन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि धोनी इस बार भी आईपीएल का पूरा सीजन खेलेंगे। हालांकि टीम में उनकी भूमिका क्या होगी, इसका फैसला कोचिंग स्टाफ करेगा। टीम के साथ अभ्यास कर रहे धोनीः सीईओ के अनुसार यह पूरी तरह क्रिकेट से जुड़ा निर्णय है, इसलिए इसमें प्रशासनिक टीम दखल नहीं देगी। टीम का कोचिंग स्टाफ ही तय करेगा कि धोनी को बल्लेबाज, विकेटकीपर-बल्लेबाज या इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान में उतारा जाएगा। फिलहाल धोनी चेन्नई में टीम के साथ अभ्यास कर रहे हैं और नए सीजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। धोनी कि फिटनेस और अनुभव टीम की ताकतः 44 साल की उम्र में भी धोनी की फिटनेस और अनुभव को टीम के लिए बड़ी ताकत माना जा रहा है। उन्होंने पहले रांची में हल्की नेट प्रैक्टिस शुरू की और अब चेन्नई में चल रहे ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले दो सीजन में भी उन्होंने टीम के लिए अहम योगदान दिया था, जबकि उस समय वे घुटने की चोट से भी जूझ रहे थे। पिछले सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था और टीम अंक तालिका में सबसे नीचे रही थी। ऐसे में इस बार टीम दमदार वापसी की उम्मीद कर रही है। कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ की अगुवाई में चेन्नई सुपर किंग्स नई ऊर्जा और रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने करीब दो साल बाद सोशल मीडिया पर चुप्पी तोड़ी है। ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद धोनी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर टीम और कोच गौतम गंभीर को बधाई दी। उनकी यह पोस्ट कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। दरअसल, जुलाई 2024 के बाद धोनी ने पहली बार सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट किया है। अहमदाबाद में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार T20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता और लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम करने वाली पहली टीम बन गई। फाइनल मैच के दौरान धोनी को नरेंद्र मोदी स्टेडियम के वीवीआईपी बॉक्स में रोहित शर्मा और BCCI सचिव जय शाह के साथ मैच देखते हुए भी देखा गया था। मैच खत्म होने के कुछ ही देर बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर टीम की जीत पर खुशी जताई। गौतम गंभीर के लिए क्या लिखा धोनी ने अपनी पोस्ट में भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की खास तौर पर तारीफ की। उन्होंने लिखा, “कोच साहब, आपकी मुस्कान बहुत शानदार लग रही है। मुस्कान के साथ आपकी जीत कमाल की है। बहुत अच्छा किया।” इसके साथ ही उन्होंने टीम, सपोर्ट स्टाफ और फैंस को भी बधाई दी। धोनी ने लिखा, “अहमदाबाद में इतिहास बन गया। टीम, सपोर्ट स्टाफ और भारतीय क्रिकेट टीम के सभी फैंस को बहुत-बहुत बधाई। आप सभी को खेलते देखना बहुत खुशी की बात है।” गंभीर को लेकर धोनी की यह टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि गंभीर की छवि अक्सर गंभीर और सख्त स्वभाव वाले कोच की मानी जाती है। ऐसे में धोनी का यह हल्का-फुल्का अंदाज सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया गया। बुमराह पर मजेदार कमेंट धोनी की पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को लेकर था। फाइनल मैच में बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड के टॉप ऑर्डर को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने 4 विकेट लेकर मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में कर दिया। बुमराह की तारीफ करते हुए धोनी ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “बुमराह के बारे में कुछ ना लिखूं तो ही अच्छा है… चैंपियन गेंदबाज।” उनकी इस लाइन का मतलब था कि बुमराह का प्रदर्शन इतना शानदार था कि शब्दों में उसकी तारीफ करना मुश्किल है। फाइनल मैच में भारत का दबदबा अहमदाबाद में खेले गए इस फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो T20 वर्ल्ड कप फाइनल के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर भी बन गया। भारत की ओर से संजू सैमसन ने 89 रन और अभिषेक शर्मा ने 52 रन की तूफानी पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर शुरू से ही दबाव बनाए रखा। 255 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम शुरुआत से ही संघर्ष करती नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेते हुए न्यूजीलैंड की टीम को कभी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया। आखिरकार न्यूजीलैंड की पूरी टीम 19 ओवर में 159 रन पर सिमट गई। जसप्रीत बुमराह के अलावा अक्षर पटेल ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट झटके। सोशल मीडिया पर छाई धोनी की पोस्ट धोनी की यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। क्रिकेट फैंस ने इसे भारतीय क्रिकेट के दो युगों-2007 के T20 वर्ल्ड कप विजेता कप्तान धोनी और 2026 की विजेता टीम-के बीच एक खास भावनात्मक कड़ी के रूप में देखा। अक्सर सोशल मीडिया पर धोनी और गौतम गंभीर के रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन इस पोस्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया कि दोनों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती कायम है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।