NDA

Prashant Kishor and Chirag Paswan amid speculation over changing political equations in Bihar
बिहार की सियासत में नई हलचल! प्रशांत किशोर और चिराग पासवान की नजदीकी के मायने क्या?

पटना: बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान को लेकर एक नया सियासी समीकरण चर्चा में है। बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ओर से बीजेपी को चुनौती मिलने के बाद चिराग पासवान ने उनकी तारीफ की। खास बात यह है कि प्रशांत किशोर भी NDA के दूसरे नेताओं की तुलना में चिराग पासवान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखते हैं। इस वजह से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक नजदीकी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, चिराग की पार्टी ने साफ किया है कि वह फिलहाल NDA की मजबूत सहयोगी है और गठबंधन से अलग होने जैसी कोई बात नहीं है। क्या भविष्य के विकल्प खुले रख रहे हैं चिराग? चिराग पासवान की ओर से प्रशांत किशोर की तारीफ के बाद LJP (रामविलास) के प्रवक्ता प्रोफेसर विनीत कुमार सिंह ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन पार्टी NDA के साथ मजबूती से खड़ी है। पार्टी के मुताबिक उसका मौजूदा राजनीतिक लक्ष्य विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाना है। साथ ही, भविष्य में समान विचार और विजन वाली राजनीतिक ताकतों के साथ काम करने के विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। यही बात बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है कि क्या चिराग अभी से 2030 की राजनीति को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकल्पों को खुला रखना चाहते हैं। पिता रामविलास पासवान की रणनीति की झलक? राजनीतिक जानकार चिराग पासवान की मौजूदा रणनीति की तुलना उनके पिता रामविलास पासवान की राजनीति से करते हैं। रामविलास पासवान को लंबे समय तक बदलते राजनीतिक समीकरणों को पहचानने वाले नेता के तौर पर देखा जाता था। बांकीपुर के चुनावी नतीजे और बिहार की बदलती राजनीति को देखते हुए चिराग भी भविष्य की संभावनाओं पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, फिलहाल उनके NDA से अलग होने का कोई संकेत नहीं है। प्रशांत किशोर और चिराग में क्या समानता? दोनों नेताओं की राजनीति में कुछ समानताएं भी दिखाई देती हैं। युवा नेतृत्व: दोनों बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के नेताओं के तौर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। बिहार केंद्रित राजनीति: चिराग पासवान का ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का एजेंडा और प्रशांत किशोर का बिहार के विकास पर जोर दोनों को एक समान राजनीतिक स्पेस में खड़ा करता है। एक-दूसरे के प्रति नरम रुख: प्रशांत किशोर ने NDA के कई नेताओं पर तीखे हमले किए हैं, लेकिन चिराग पासवान को लेकर उनका रुख अपेक्षाकृत सकारात्मक रहा है। दूसरी तरफ चिराग भी प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता की तारीफ करते नजर आए हैं। क्या 2030 में साथ आ सकते हैं दोनों? फिलहाल प्रशांत किशोर और चिराग पासवान के साथ आने की कोई तत्काल घोषणा या औपचारिक संकेत नहीं है। चिराग की पार्टी NDA में बनी हुई है, जबकि प्रशांत किशोर अपनी अलग राजनीतिक पहचान और संगठन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन बिहार की राजनीति में 2030 को एक महत्वपूर्ण भविष्य के पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच मौजूदा संवाद और एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक रुख को भविष्य के संभावित राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इसे किसी संभावित गठबंधन की पुष्टि मानना जल्दबाजी होगी। बिहार की राजनीति में समीकरण तेजी से बदलते हैं और आने वाले वर्षों में ही स्पष्ट होगा कि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं या अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ते हैं।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Jitan Ram Manjhi responds to Tejashwi Yadav during a political exchange in Bihar
जीतन राम मांझी का तेजस्वी यादव पर पलटवार, बोले- ‘इतना जल्दी नहीं मरूंगा’, ‘कुछ न कुछ पदार्थ लिए हुए हैं’

बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई। गया में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद मांझी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह अभी इतनी जल्दी मरने वाले नहीं हैं और बिहार की जनता के लिए उन्हें अभी कई काम करने हैं। मांझी ने तेजस्वी यादव के बयान पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसी बातें करने से लगता है कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” उनके इस बयान के बाद बिहार में सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं। ‘इतना जल्दी हम मरने वाले नहीं हैं’ जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें अभी बिहार और यहां की जनता के लिए बहुत काम करना है। उन्होंने कहा कि जनता की दुआएं उनके साथ हैं और वह सक्रिय राजनीति में बने रहकर जनहित के मुद्दों पर काम करते रहेंगे। मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने को लेकर कहा कि उन्हें अभी श्रद्धांजलि देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि वह पूरी तरह सक्रिय हैं और आने वाले समय में भी जनता के बीच रहकर काम करेंगे। तेजस्वी के बयान पर तीखा तंज मांझी ने तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर व्यक्तिगत तंज भी किया। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति इस तरह की बातें नहीं करता और तेजस्वी के बयान से उन्हें लगा कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” मांझी की यह टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का नया मुद्दा बन सकती है। बिहार में पहले से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है और इस नए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है। तेजस्वी के पुराने कार्यकाल पर भी निशाना केंद्रीय मंत्री ने तेजस्वी यादव के साथ काम करने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उनके पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। मांझी ने शिक्षा और विकास के मुद्दे पर पुराने दौर की तुलना मौजूदा सरकार से की। उन्होंने कहा कि पहले “चरवाहा विद्यालय” की चर्चा होती थी, जबकि अब राज्य में डिग्री कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर काम हो रहा है। मांझी ने बिहार में विकास योजनाओं और नए शैक्षणिक संस्थानों को सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश किया। गया की विकास परियोजनाओं का किया जिक्र मांझी ने गया और बोधगया से जुड़ी प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर से जुड़े काम का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर 20 अगस्त को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होनी है। उनके मुताबिक, इन योजनाओं से गया और बोधगया में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सकती है। ‘डबल इंजन सरकार’ को बताया विकास की वजह जीतन राम मांझी ने केंद्र और बिहार में एनडीए सरकार को विकास की रफ्तार बढ़ाने वाला बताया। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य में समान गठबंधन होने से बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है। इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि तेजस्वी यादव की श्रद्धांजलि वाली टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत बयानबाजी से आगे बढ़कर बिहार के विकास मॉडल और पिछली सरकारों के कामकाज की तुलना तक पहुंच गया है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Prashant Kishor's Jan Suraaj eyes eight Bihar MLC seats after Bankipur victory, increasing political competition among major alliances.
प्रशांत किशोर का अगला सियासी टारगेट क्या? बांकीपुर के बाद 8 MLC सीटों पर जन सुराज की नजर, NDA-महागठबंधन में बढ़ी बेचैनी

Bihar Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज की राजनीतिक सक्रियता और बढ़ती दिखाई दे रही है। अब पार्टी की नजर बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की खाली हुई आठ सीटों पर बताई जा रही है। खास तौर पर तीन ऐसी सीटें जन सुराज के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं, जहां पिछले चुनाव में दलीय उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशियों से हार का सामना करना पड़ा था। बांकीपुर की जीत ने जन सुराज और प्रशांत किशोर के राजनीतिक प्रभाव को लेकर बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। इसी बीच आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर संभावित रणनीति ने NDA, RJD, कांग्रेस और अन्य दलों के भीतर भी राजनीतिक मंथन तेज कर दिया है। आठ शिक्षक-स्नातक सीटों पर जन सुराज की नजर बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल आठ सीटों पर चुनाव होना है। जन सुराज इन सभी सीटों पर अपनी राजनीतिक संभावनाओं का आकलन कर रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के भीतर होने वाली बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जन सुराज सभी सीटों पर सीधे चुनाव लड़ेगा या कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर विशेष फोकस करेगा। लेकिन पिछले चुनाव के नतीजों को देखते हुए तीन सीटें जन सुराज के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं—सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र। सारण शिक्षक सीट पर सबसे ज्यादा फोकस सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र जन सुराज की संभावित रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार अफाक अहमद ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों को चौंका दिया था। अफाक अहमद को 3,055 वोट मिले थे, जबकि महागठबंधन के आनंद पुष्कर को 2,381 वोट मिले। जयराम यादव को 2,080 वोट मिले थे। इसके अलावा चंद्रमा सिंह, रंजीत कुमार, नवल किशोर सिंह और धर्मेंद्र कुमार भी मैदान में थे। अफाक अहमद को जन सुराज का समर्थन प्राप्त था। उनकी जीत को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा गया था। अब आगामी चुनाव में उस प्रदर्शन को दोहराना जन सुराज के लिए बड़ी चुनौती होगी। तिरहुत स्नातक सीट भी अहम तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी पिछले चुनाव का परिणाम काफी चर्चित रहा था। यहां निर्दलीय शिक्षक नेता वंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज कर राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया था। जन सुराज के उम्मीदवार विनायक विजेता दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों के बीच 10,915 मतों का अंतर रहा। RJD के गोपी किशन तीसरे स्थान पर रहे, जबकि JDU के अभिषेक झा चौथे स्थान पर चले गए। इस चुनाव में पहली वरीयता के मतों से परिणाम तय नहीं हुआ था और दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद विजेता का फैसला हुआ था। इस बार जन सुराज इस सीट पर पहले के अनुभव और संगठनात्मक तैयारी के आधार पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। दरभंगा स्नातक सीट पर भी नजर दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भी उन सीटों में शामिल है जहां पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने दलीय प्रत्याशियों को मात दी थी। निर्दलीय सर्वेश कुमार ने 15,595 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। JDU के प्रत्याशी डॉ. दिलीप कुमार 11,676 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि RJD के अनिल कुमार झा तीसरे स्थान पर रहे। जन सुराज से जुड़े सूत्रों के अनुसार पार्टी इस बार रणनीतिक तैयारी के साथ मैदान में उतरने की योजना बना रही है। बांकीपुर की जीत के बाद पार्टी अपने संगठन और राजनीतिक पहुंच को विधान परिषद चुनाव में भी आजमाना चाहती है। NDA और महागठबंधन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव? शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र परंपरागत रूप से राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षित मतदाता, शिक्षक और पेशेवर वर्ग चुनावी परिणाम को प्रभावित करते हैं। पिछले चुनावों में कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि मजबूत स्थानीय पकड़ और व्यक्तिगत लोकप्रियता के आधार पर दलीय उम्मीदवारों को चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में यदि जन सुराज इन सीटों पर प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ता है तो NDA और महागठबंधन दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। बांकीपुर की जीत के बाद बढ़ी उम्मीदें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जन सुराज के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह बढ़ा है। पार्टी अब विधानसभा चुनावी राजनीति के साथ-साथ विधान परिषद के चुनावी क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करती नजर आ रही है। हालांकि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी गणित विधानसभा चुनाव से अलग होती है। यहां मतदाता समूह सीमित और विशिष्ट होता है तथा स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और संगठन की सक्रियता का विशेष महत्व रहता है। इसलिए बांकीपुर की जीत का सीधा असर MLC चुनाव में कितना दिखाई देगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। अब उम्मीदवारों और रणनीति पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जन सुराज इन आठ सीटों में से कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा और किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा। सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों के पिछले नतीजे पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाले जरूर हैं, लेकिन इस बार NDA, RJD, कांग्रेस और अन्य दल भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेंगे। ऐसे में आगामी विधान परिषद चुनाव बिहार की बदलती राजनीतिक तस्वीर में एक और महत्वपूर्ण मुकाबला साबित हो सकता है।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी से जुड़ा झारखंड छात्र आंदोलन
प्रियंका गांधी बोलीं- राहुल गांधी ने झारखंड के छात्रों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी, संसद में BJP से तीखी बहस

नई दिल्ली, एजेंसियां। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का मुद्दा मंगलवार को संसद में भी गरमा गया। NDA सांसदों के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों से मिल चुके हैं और उनकी समस्याएं सुनी हैं। प्रियंका गांधी का यह बयान उस समय आया जब BJP सांसदों ने राहुल गांधी से झारखंड जाकर छात्रों से मिलने को लेकर सवाल उठाया।   BJP सांसदों ने राहुल गांधी से मांगा जवाब     संसद परिसर में NDA सांसद झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान सांसदों की ओर से ‘राहुल गांधी जवाब दो’ जैसे नारे लगाए गए।   BJP सांसदों ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन वे खुद झारखंड जाकर आंदोलनकारी छात्रों से क्यों नहीं मिले। इसी दौरान प्रियंका गांधी वहां पहुंचीं और उन्होंने BJP सांसदों के सवालों का जवाब दिया।   प्रियंका गांधी ने कहा- राहुल छात्रों से मिल चुके हैं     प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने झारखंड के छात्रों से मुलाकात की है और उनकी समस्याओं को सुना है। उन्होंने BJP सांसदों से कहा कि छात्रों की बात सुनना और उनके मुद्दे को संसद में उठाना जरूरी है।   कांग्रेस की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की शिकायतों और पुलिस कार्रवाई पर सरकार को जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने भी झारखंड में छात्रों पर बल प्रयोग को गलत बताते हुए सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी।   झारखंड छात्र आंदोलन बना संसद में राजनीतिक टकराव का मुद्दा     रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति से निकलकर संसद तक पहुंच गया है।   एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर इस मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। मंगलवार को NDA सांसदों ने संसद परिसर में मार्च कर राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ गया।   प्रियंका ने छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा     प्रियंका गांधी के बयान से साफ है कि कांग्रेस झारखंड के छात्र आंदोलन को संसद में प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, छात्रों की शिकायतों और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।   वहीं, NDA का कहना है कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच झारखंड के छात्रों का आंदोलन अब संसद में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बड़े विवाद का विषय बन गया है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA सांसदों का संसद की ओर मार्च और छात्र आंदोलन पर विरोध
NDA सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ संसद की ओर किया मार्च, छात्र आंदोलन पर बहस को लेकर टकराव बढ़ा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध मंगलवार को और बढ़ गया। NDA सांसदों ने संसद के मकर द्वार की ओर मार्च कर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है, जबकि सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के चर्चा में जवाब देने की तैयारी जताई गई है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद निकला मार्च     NDA सांसदों का यह मार्च गठबंधन की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक के बाद हुआ। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।   बैठक के बाद NDA सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर संसद की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष पर छात्र आंदोलन के मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया गया।   विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप     NDA नेताओं का कहना है कि सरकार संसद में छात्रों के प्रदर्शन और उस दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत जवाब देने के लिए तैयार हैं।   NDA सांसदों ने इसी आधार पर विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की मांग की। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार हंगामा करके चर्चा और संसदीय कामकाज को बाधित कर रहा है।   विपक्ष की मांग अलग, संसद में जारी गतिरोध     दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। विपक्षी सांसदों की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान दें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें।   लोकसभा में विपक्षी सांसदों के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी विपक्षी दलों से प्रदर्शन समाप्त कर सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। इसके बावजूद गतिरोध जारी रहा।   संसद के बाहर भी आमने-सामने सत्ता पक्ष और विपक्ष     छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के अंदर की राजनीति से निकलकर संसद परिसर के विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक ओर NDA सांसद विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विपक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है।   ऐसे में मानसून सत्र के दौरान आने वाले दिनों में भी छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
NDA की मंगल मिलन बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA सांसद
NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM मोदी समेत NDA सांसद जुटे, तिरंगा लहराकर लगाए ‘वंदे मातरम्’ के नारे

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और NDA के कई सांसद शामिल हुए। बैठक के दौरान सांसदों ने तिरंगा लहराया और ‘वंदे मातरम्’ के नारे लगाए।   संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई बैठक     NDA की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में कई मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। ऐसे में ‘मंगल मिलन’ बैठक को NDA सांसदों के बीच समन्वय और आगामी संसदीय रणनीति पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   बैठक में सांसदों के बीच संसद की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने और सरकार के विधायी एजेंडे को लेकर चर्चा होने की संभावना रही।   PM मोदी और वरिष्ठ नेता हुए शामिल     बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के वरिष्ठ नेता और विभिन्न सहयोगी दलों के सांसद मौजूद रहे। NDA संसदीय दल की ऐसी बैठकें गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं।     तिरंगा लहराकर ‘वंदे मातरम्’ के नारे     ‘मंगल मिलन’ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और NDA सांसदों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर उसे लहराया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ के नारे भी लगाए गए। बैठक की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह कार्यक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।     मानसून सत्र के लिए रणनीति पर नजर     NDA की बैठक ऐसे वक्त हुई है जब संसद में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है और विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में गठबंधन की एकजुटता और सदन में रणनीति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है।   ‘मंगल मिलन’ बैठक के जरिए NDA नेतृत्व ने अपने सांसदों के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ-साथ संसद के बाकी सत्र के लिए राजनीतिक और संसदीय रणनीति पर भी फोकस किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर संसद में जवाब मांग रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर सदन में चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा सुननी चाहिए। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार की है। मंगलवार को होने वाली गठबंधन की 'मंगल मिलन' बैठक के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है। NDA की बैठक में बनेगी विपक्ष को घेरने की रणनीति मॉनसून सत्र के दौरान NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत गठबंधन के सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद NDA सांसद ऐसे पोस्टर लेकर सामने आ सकते हैं, जिनमें सरकार का संदेश होगा कि गृह मंत्री चर्चा और जवाब के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा है। यह रणनीति सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के उस रुख का जवाब है, जिसमें वे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब की मांग कर रहे हैं। सरकार का दावा- गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से कहा है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों और उनसे जुड़ी घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का जवाब देने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि सरकार की शर्त है कि गृह मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष सदन में व्यवधान पैदा न करे। सरकार का कहना है कि चर्चा के बाद जवाब देने के दौरान विपक्षी सांसदों का सदन से बाहर चले जाना उचित नहीं होगा। सरकार चाहती है कि गृह मंत्री को बिना व्यवधान अपनी बात रखने का अवसर मिले। राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना दूसरी ओर, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि पिछले कई दिनों से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। राहुल गांधी की मुख्य मांग क्या है? राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष की मांग किसी सामान्य संसदीय भाषण की नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि गृह मंत्री छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब दें। उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और गृह मंत्रालय को इस कार्रवाई की जानकारी थी या नहीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि उन्हें जानकारी नहीं थी तो भी यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। छात्रों के प्रदर्शन को लेकर क्यों है विवाद? दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और संसद में सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। सरकार दूसरी तरफ चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है। यही अंतर अब संसद में राजनीतिक गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है। दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने पूरे विवाद में सरकार और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि छात्र आंदोलनों और संबंधित घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा की जा सकती है और गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार विपक्ष से जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहने की अपील कर रही है। विपक्ष का पक्ष: राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे पर गृह मंत्री से सीधे जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के आदेश को लेकर है। 'मंगल मिलन' के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी NDA की 'मंगल मिलन' बैठक को केवल संसदीय समन्वय तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक के जरिए गठबंधन विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी आगे बढ़ा सकता है। यदि NDA सांसद 'गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष भाग रहा' जैसे संदेश वाले पोस्टर लेकर सामने आते हैं, तो यह सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद को संसद से बाहर भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश होगी। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को छात्रों के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। संसद में गतिरोध कब खत्म होगा? फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार चर्चा और जवाब के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री से छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बना रह सकता है। गतिरोध तभी खत्म होने की संभावना है जब दोनों पक्ष चर्चा के तरीके और गृह मंत्री के जवाब को लेकर किसी साझा रास्ते पर पहुंचें।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Bihar Chief Minister Samrat Choudhary leads Tiranga Yatra in Patna as JDU deputy CMs remain absent from the government event.
तिरंगा यात्रा पर सियासी सवाल: सरकारी कार्यक्रम में JDU के दोनों डिप्टी सीएम क्यों नहीं पहुंचे? सम्राट चौधरी के साथ मंच पर दिखी दूरी

पटना: बिहार में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत निकाली गई तिरंगा यात्रा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। कार्यक्रम राज्य सरकार की ओर से आयोजित किया गया था और इसके लिए बिहार कैबिनेट ने 6 करोड़ 12 लाख रुपये के खर्च को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य तिरंगा यात्रा में जेडीयू कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव नजर नहीं आए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने एनडीए गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के अलग-अलग कारण बताए गए हैं और इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक असहमति की वजह से थी। सरकारी कार्यक्रम था, फिर भी JDU के दोनों डिप्टी CM अनुपस्थित यह तिरंगा यात्रा बीजेपी के संगठनात्मक कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य सरकार के 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत आयोजित की गई थी। बिहार कैबिनेट ने अभियान के लिए 6 करोड़ 12 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी दी थी। कार्यक्रम के तहत पटना समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्रा और रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। राजधानी पटना में 10 अगस्त को आयोजित मुख्य यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग और सरकारी तंत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया। नेम प्लेट लगी, फिर हटानी पड़ी कार्यक्रम स्थल पर विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम की नेम प्लेट लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे संकेत मिला कि दोनों नेताओं की कार्यक्रम में मौजूदगी की उम्मीद थी। लेकिन दोनों के नहीं पहुंचने के बाद उनकी नेम प्लेट हटा दी गई। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने एनडीए सरकार पर सवाल उठाए और इसे गठबंधन के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा। हालांकि, केवल किसी कार्यक्रम में नेताओं की अनुपस्थिति को राजनीतिक मतभेद का निश्चित प्रमाण नहीं माना जा सकता। दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी के पीछे बताए गए व्यक्तिगत कारणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव की गैरमौजूदगी की क्या वजह बताई गई? उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बारे में बताया गया कि वह उस समय पटना से बाहर थे। वहीं, दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताया गया। यही वजह है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों नेताओं ने जानबूझकर कार्यक्रम से दूरी बनाई। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं कि अगर यह पूरी तरह सरकारी कार्यक्रम था, तो गठबंधन के दोनों प्रमुख सहयोगी नेताओं की मौजूदगी क्यों नहीं हुई। कला एवं संस्कृति विभाग ने संभाली थी जिम्मेदारी तिरंगा यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी कला एवं संस्कृति विभाग को दी गई थी। विभाग की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन की तैयारियां की गई थीं। 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू हुई और कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यात्रा का नेतृत्व किया। यानी आयोजन का स्वरूप सरकारी था, जबकि पिछले वर्ष आयोजित तिरंगा यात्रा का स्वरूप अलग था। 2025 में बीजेपी ने अपने स्तर पर निकाली थी तिरंगा यात्रा साल 2025 में भी बिहार में तिरंगा यात्रा निकाली गई थी, लेकिन उस समय इसका आयोजन बीजेपी की ओर से पार्टी स्तर पर किया गया था। उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे और सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री थे। बीजेपी से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उस समय पार्टी की ओर से यात्रा के लिए सरकारी फंड की मांग की गई थी, लेकिन सरकारी खर्च से आयोजन की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद बीजेपी ने अपने संगठनात्मक स्तर पर यात्रा आयोजित की। 2026 में स्थिति अलग है। इस बार 'हर घर तिरंगा अभियान' को राज्य सरकार के कार्यक्रम के तौर पर आयोजित किया गया और इसके लिए कैबिनेट से बजट को मंजूरी मिली। क्या JDU की दूरी के पीछे राजनीतिक संदेश है? यही वह सवाल है जिसने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क के मुताबिक, जेडीयू लंबे समय से बीजेपी के साथ सत्ता में है, लेकिन पार्टी अपनी सेक्युलर छवि को लेकर सतर्क रहती है और ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखती है, जहां उसे अपनी राजनीतिक पहचान प्रभावित होने की आशंका हो। हालांकि, यह एक राजनीतिक विश्लेषण है, आधिकारिक तौर पर जेडीयू ने यह नहीं कहा है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति का कारण वैचारिक या राजनीतिक असहमति थी। गठबंधन के लिए क्या मायने रखता है यह घटनाक्रम? एनडीए सरकार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सत्ता साझेदारी के लिहाज से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बनी है। लेकिन इसके आधार पर गठबंधन में दरार की कोई ठोस पुष्टि नहीं होती। एक तरफ कार्यक्रम का सरकारी स्वरूप और दूसरी तरफ जेडीयू के दोनों प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी राजनीतिक सवाल जरूर खड़े करती है। दूसरी ओर, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के लिए व्यक्तिगत कारण भी बताए गए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में बीजेपी और जेडीयू के प्रमुख नेताओं की भागीदारी किस तरह रहती है। यही घटनाक्रम बताएगा कि 10 अगस्त की तिरंगा यात्रा महज संयोग थी या इसके पीछे वास्तव में कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा था।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी NDA सांसदों के साथ बैठक में सलाह देते हुए
सांसदों को PM मोदी की सलाह, बोले- ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें; NDA को बताया एक परिवार

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को NDA के 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर हुई बैठक में उन्हें संसद के बाहर भी संयम और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें और अपनी राजनीतिक पहचान को जनता तथा अपने क्षेत्र से जुड़े कामों के साथ मजबूत करें।   NDA सांसदों को एकजुट रहने की सलाह     बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने NDA को केवल राजनीतिक गठबंधन नहीं, बल्कि एक साझा परिवार के रूप में पेश किया। उन्होंने सहयोगी दलों के सांसदों के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता पर जोर दिया।   यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण कई मौकों पर कार्यवाही प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद के भीतर अनुशासन और प्रभावी तरीके से अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया।   ‘लुटियंस दिल्ली’ से दूर रहने का संदेश     PM मोदी ने सांसदों को सलाह दी कि वे दिल्ली के राजनीतिक और नौकरशाही हलकों के प्रभाव में आने के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्रों और जनता से जुड़े रहें। उन्होंने सांसदों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों और व्यवहार में सावधानी बरतने का संदेश दिया।     संसद में व्यवधान पर भी जताई चिंता     प्रधानमंत्री ने संसद में लगातार हो रहे व्यवधान के बीच राजनीतिक स्थिरता और प्रभावी शासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि NDA के विस्तार और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति से अलग-अलग राज्यों की आकांक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने में मदद मिली है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
Sayeoni Ghosh meets Prime Minister Narendra Modi for the first time and calls the meeting a memorable moment
पीएम मोदी से पहली मुलाकात पर सायोनी घोष का पोस्ट, बोलीं- ‘याद रखने वाला पल’; बदले सियासी समीकरणों के बीच बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सांसद सायोनी घोष की पहली मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने इस मुलाकात को ‘याद रखने वाला पल’ बताया। सायोनी घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मेरी पहली मुलाकात। एक यादगार पल!” इसके साथ साझा किए गए वीडियो में वह प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करती हुई नजर आ रही हैं। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सायोनी घोष का राजनीतिक रुख हाल के दिनों में बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 20 सांसदों वाले एक नए राजनीतिक गुट का हिस्सा बनी हैं, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का ऐलान किया है। पहली मुलाकात, लेकिन राजनीतिक मायने बड़े प्रधानमंत्री मोदी और सायोनी घोष की यह पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। सायोनी घोष पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ सक्रिय राजनीति में रही हैं। अब उनके नए राजनीतिक गुट के NDA के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, सिर्फ मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी नए राजनीतिक फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सायोनी ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से मुलाकात को यादगार बताया है। 20 सांसदों वाले बागी गुट की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, सायोनी घोष उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ जाने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी थी। इस समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी और जून मालिया जैसे नामों की भी चर्चा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। NDA के साथ काम करने की बात इस नए गुट की ओर से NDA के साथ काम करने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुट के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग की बात कही है। NCPI के सांसदों के NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने की खबरों ने भी इस राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में सायोनी घोष की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति से अलग होकर नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सायोनी घोष क्यों हैं अहम चेहरा? सायोनी घोष को पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक सफर के बाद अब नए गुट में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है। जून में सामने आई रिपोर्टों में उन्हें इस बागी गुट के प्रमुख चेहरों में गिना गया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली मुलाकात और उसके बाद सार्वजनिक की गई तस्वीरें राजनीतिक तौर पर स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गई हैं। सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई हलचल मुलाकात के बाद सायोनी घोष का छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के रूप में पेश करने के बजाय ‘यादगार पल’ बताया। अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट थी या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसके आगे भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस गुट की भूमिका और सायोनी घोष की राजनीतिक दिशा पर नजर रहेगी।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
NDA बैठक से दूर रहे तीन पूर्व TMC सांसद
NDA से दूरी बना रहे तीन पूर्व TMC सांसद, बोले- मतदाताओं को देना है जवाब

NDA से दूरी बना रहे तीन पूर्व TMC सांसद, बोले- मतदाताओं को देना है जवाब नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर NCPI समूह में शामिल हुए तीन सांसदों ने BJP के नेतृत्व वाले NDA से दूरी बनाए रखी है। खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान ने NDA संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। तीनों सांसदों का कहना है कि वे अपने मतदाताओं को जवाब देने के लिए बाध्य हैं और फिलहाल NDA का हिस्सा बनने को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।   तीनों सांसदों ने NDA बैठक से बनाई दूरी   खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान ने NDA की बैठक से दूरी बनाने का फैसला लगातार दूसरी बार लिया है। इससे NCPI के भीतर मौजूद मतभेद और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों सांसदों ने अपने क्षेत्रों में मतदाताओं की प्रतिक्रिया को देखते हुए NDA की बैठकों में शामिल नहीं होने का फैसला किया। खास तौर पर BJP के साथ उनकी नजदीकी को लेकर मतदाताओं के एक वर्ग में सवाल उठाए गए हैं।   BJP के साथ जाने पर मतदाताओं की नाराजगी का डर   तीनों सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके NDA के साथ संभावित राजनीतिक जुड़ाव को लेकर कुछ मतदाताओं ने सवाल उठाए हैं। ऐसे में सांसद खुलकर BJP-led NDA के साथ खड़े होने से फिलहाल बच रहे हैं। अबू ताहेर खान ने साफ संकेत दिया है कि तीनों सांसद NDA का हिस्सा नहीं हैं। इससे NCPI और NDA के बीच संबंधों को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट होने के बजाय राजनीतिक रूप से उलझी हुई नजर आ रही है।   TMC से अलगाव के बाद भी राजनीतिक स्थिति असमंजस में   TMC के कई सांसदों के अलग होकर NCPI समूह बनाने के बाद इस समूह के NDA के साथ तालमेल को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ NCPI सांसद NDA की बैठकों में शामिल हुए हैं, लेकिन तीनों सांसदों की लगातार अनुपस्थिति ने समूह के भीतर एकराय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा NCPI समूह को अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता दिए जाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल तीनों सांसदों का रुख बताता है कि वे TMC से अलग होने के बावजूद BJP और NDA के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर बेहद सतर्क हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
Bihar Panchayati Raj Minister Deepak Prakash reacts after being nominated as MLC, thanking NDA leadership and pledging public service.
MLC बनने के बाद दीपक प्रकाश की पहली प्रतिक्रिया, बोले- 'SC वाली बात अब इतिहास हो चुकी'

पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल द्वारा बिहार विधान परिषद (MLC) के लिए मनोनीत किए जाने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया और कहा कि वह पहले से अधिक समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे। कई वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार दीपक प्रकाश ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा नेतृत्व, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और एनडीए के सभी सहयोगी दलों के नेताओं का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मिली नई जिम्मेदारी उनके लिए प्रेरणा है और वह अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। 'अब सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं' विपक्ष द्वारा पहले उठाए गए सवालों और मंत्री पद से इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि अब सभी संवैधानिक और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इसलिए पहले उठाए गए सवाल अब अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका पूरा ध्यान केवल जनता की सेवा और विभागीय कार्यों पर रहेगा। 'सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी' जब उनसे उस मामले पर सवाल पूछा गया, जिसमें उनके मंत्री पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, तो उन्होंने कहा कि वह अब बीती बात है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी है। अब उन मुद्दों का कोई औचित्य नहीं है। मेरी प्राथमिकता अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करना है।" मंत्री पद पर बने रहेंगे दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि वह मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता के प्रति उनकी जवाबदेही पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है और वह विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।    

surbhi अगस्त 6, 2026 0
तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी सरकार पर साधा निशाना
तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है

तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल को लेकर NDA सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA राज्य में दो चुनाव हार चुकी है।   सम्राट चौधरी सरकार पर तेजस्वी का निशाना     तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद NDA को चुनावी मोर्चे पर झटके लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और उसके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में राजनीतिक दल आगामी चुनावी गतिविधियों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।     ‘150 दिनों में दो चुनाव हारे’ का दावा     तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि सम्राट चौधरी के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA दो चुनाव हार चुकी है। हालांकि, यह बयान तेजस्वी यादव का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।   विपक्ष लगातार NDA सरकार को उसके कामकाज और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब भी दिए जा रहे हैं।   बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज     सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। तेजस्वी यादव लगातार सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं।   दूसरी ओर, NDA नेता सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
Lok Sabha set to debate the Anti-Paper Leak Bill 2026 during the Monsoon Session as NDA leaders attend the Mangal Milan meeting
Parliament Session: लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा, सरकार-विपक्ष आमने-सामने; संसद में NDA की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू

Parliament Session: संसद के मानसून सत्र में कई दिनों के गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू होने की संभावना है। पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान करने वाले इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। विपक्ष जहां छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और NEET विवाद जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी में है, वहीं सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता के लिए उठाए गए कदमों का बचाव करेगी। लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा लोकसभा में प्रस्तावित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर करीब छह घंटे चर्चा होने की संभावना है। संसद के पहले सप्ताह में लगातार हंगामे के कारण विधायी कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति के बाद इस महत्वपूर्ण बिल पर बहस का रास्ता साफ हुआ है। प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और संगठित परीक्षा घोटालों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। बिल के अनुसार, सामान्य मामलों में दोषियों को 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। वहीं, संगठित पेपर लीक गिरोहों के मामलों में 7 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार और विपक्ष के बीच होगी जोरदार बहस विपक्ष इस दौरान NEET विवाद, छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। संसद में शुरू हुई NDA की 'मंगल मिलन' बैठक इधर, संसद परिसर में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक में संसद के मौजूदा सत्र की रणनीति, प्रमुख विधेयकों और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पहली बार NCPI को मिला न्योता इस बार की 'मंगल मिलन' बैठक की खास बात यह है कि पहली बार NCPI को भी एनडीए की संसदीय बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। संसद पुस्तकालय भवन में आयोजित इस बैठक को आगामी विधायी एजेंडे और गठबंधन की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के दोनों सदनों में आज की कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि एंटी पेपर लीक बिल पर होने वाली चर्चा आने वाले समय में देश की परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
NDA Meeting
मानसून सत्र से पहले आज NDA की अहम बैठक, संसद की रणनीति और प्रमुख विधेयकों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र से पहले आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसमें केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति तय करना और विभिन्न राजनीतिक व विधायी मुद्दों पर सहयोगी दलों के साथ समन्वय बनाना है।   इन मुद्दों पर होगा मंथन   बैठक में संसद के आगामी एजेंडे, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों, विपक्ष की संभावित रणनीति और सदन के सुचारु संचालन को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।   सहयोगी दलों से लिया जाएगा फीडबैक   एनडीए नेतृत्व सहयोगी दलों के सुझाव और चिंताओं को भी सुनेगा, ताकि संसद में गठबंधन एकजुट होकर सरकार का पक्ष रख सके। माना जा रहा है कि आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत फैसले पेश किए जा सकते हैं, इसलिए यह बैठक रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।   मानसून सत्र पर टिकी राजनीतिक नजरें   मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में एनडीए की यह बैठक संसद के आगामी सत्र की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में से एक मानी जा रही है।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
NCP leaders meet Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis in Mumbai, triggering speculation over Sharad Pawar's next political move amid separate meetings with both NCP factions.
शरद पवार के अगले कदम पर सस्पेंस, फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों ने बढ़ाईं राजनीतिक अटकलें

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों के बाद शरद पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि बैठकों में क्या चर्चा हुई, इस पर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। देर रात हुई अलग-अलग बैठकें मंगलवार देर रात एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की। वहीं, सत्तारूढ़ एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से अलग से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद राज्य की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक के एजेंडे पर बनी हुई है चुप्पी बैठकों के बाद न तो किसी नेता ने बातचीत का एजेंडा बताया और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। दोनों गुटों के सूत्रों का भी कहना है कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या एनडीए में जाने के पक्ष में हैं शरद गुट के विधायक? सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार गुट) के 10 विधायकों में से करीब आधे विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए आवश्यक मंजूरी और फंड हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। हाल ही में जयंत पाटिल ने भी पार्टी विधायकों के साथ बैठक में संकेत दिया था कि कई विधायक एनडीए में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। शरद पवार ने नहीं खोले पत्ते इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद शरद पवार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर भी कोई संकेत नहीं दिया है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है। विधानसभा और लोकसभा में कितनी है ताकत? महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार गुट) के पास फिलहाल 10 विधायक हैं, जबकि लोकसभा में पार्टी के 8 सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन (डिलिमिटेशन) जैसे मुद्दों पर संख्या मजबूत करने के लिए एनडीए छोटी पार्टियों के समर्थन को अहम मान सकता है। ऐसे में एनसीपी (एसपी) की राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल बढ़ी हैं अटकलें, आधिकारिक पुष्टि नहीं मुख्यमंत्री फडणवीस और एनसीपी नेताओं की बैठकों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी गठबंधन, विलय या राजनीतिक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शरद पवार का अगला कदम आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
RLD president Jayant Chaudhary and senior leader KC Tyagi during a party meeting after the announcement of the new parliamentary board.
RLD ने किया संसदीय दल का गठन, केसी त्यागी बने संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष; यूपी चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने संसदीय दल का गठन कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संसदीय दल के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर मंगलवार को 15 सदस्यीय संसदीय दल की घोषणा की गई। 15 सदस्यीय संसदीय दल का गठन आरएलडी के संसदीय दल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें मेजर जनरल बिशंभर दयाल, पूर्व सांसद तारीफ सिंह, मुंशी राम, पूर्व मंत्री अशोक यादव, पूर्व सांसद मलूक नागर, सांसद राजकुमार सांगवान, विधायक राजपाल बालियान, राजस्थान के पूर्व विधायक अब्दुर सगीर खान, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, राजस्थान विधायक सुभाष गर्ग, यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर शामिल हैं। इसके अलावा किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पूनिया, सुखबीर गठीना और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। यूपी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति आरएलडी का पारंपरिक जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माना जाता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले संसदीय दल का गठन संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन और चुनावी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कौन हैं केसी त्यागी? केसी त्यागी का जन्म वर्ष 1950 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने मुरादनगर से स्कूली शिक्षा और मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव समाजवादी आंदोलन की ओर हुआ और वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 1984 में लोकदल के टिकट पर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। इसके बाद 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने। समाजवादी राजनीति से जेडीयू तक का सफर जनता दल के विभाजन के बाद केसी त्यागी कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी से जुड़े। बाद में नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा गठित समता पार्टी में शामिल हुए। समता पार्टी के जनता दल (यूनाइटेड) में विलय के बाद वे लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रहे। वर्ष 2013 से 2016 तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्होंने जेडीयू छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया। गठबंधन राजनीति का लंबा अनुभव केसी त्यागी को गठबंधन राजनीति और संगठन संचालन का लंबा अनुभव है। विभिन्न समाजवादी दलों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने के कारण उन्हें मीसा (MISA) के तहत जेल भी जाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी ने उन्हें संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर पार्टी के संगठनात्मक अनुभव और चुनावी रणनीति को मजबूत करने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह नियुक्ति आरएलडी की चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Vodafone Idea (Vi) prepaid SIM card promoting ₹4,600 annual recharge plan with 365-day validity and data benefits.
5G विस्तार अभी अधूरा, फिर भी Vi ने लॉन्च किया Jio-Airtel से महंगा ₹4,600 का रिचार्ज प्लान, जानिए क्या मिलेंगे फायदे

भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (Vi) ने बिना किसी बड़े ऐलान के अपना नया सालभर वाला प्रीपेड प्लान लॉन्च कर दिया है। इस प्लान की कीमत ₹4,600 रखी गई है, जो मौजूदा समय में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्रीपेड प्लानों से महंगा माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इस प्लान में अनलिमिटेड डेटा मिलता है, लेकिन इसकी शर्तें जानना भी जरूरी है। यह प्लान फिलहाल Vi की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है। ₹4,600 वाले प्लान में क्या मिलेगा? Vi के इस नए एनुअल प्रीपेड प्लान की वैधता 365 दिन है। इसमें ग्राहकों को पूरे साल के लिए कई बेसिक सुविधाएं मिलती हैं। प्लान के प्रमुख फायदे: 365 दिनों की वैधता अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्रतिदिन 100 मुफ्त SMS अनलिमिटेड डेटा (शर्तों के साथ) हालांकि, इस प्लान में किसी भी OTT प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar या अन्य स्ट्रीमिंग सर्विस का मुफ्त सब्सक्रिप्शन शामिल नहीं किया गया है। क्या सच में मिलेगा अनलिमिटेड डेटा? Vi इस प्लान को अनलिमिटेड डेटा प्लान के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन वास्तव में इसमें फेयर यूसेज पॉलिसी (FUP) लागू होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राहकों को हर 28 दिनों के लिए 300GB डेटा मिलेगा। यानी डेटा पूरी तरह बिना सीमा वाला नहीं है। 4G और 5G दोनों नेटवर्क पर यही डेटा सीमा लागू होगी। इसका मतलब है कि 5G इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी अलग से अनलिमिटेड हाई-स्पीड डेटा नहीं मिलेगा। एक दिन का खर्च कितना पड़ेगा? अगर पूरे साल की कीमत को 365 दिनों में बांटा जाए, तो इस प्लान की लागत करीब ₹12.60 प्रतिदिन बैठती है। जो ग्राहक लंबे समय तक बार-बार रिचार्ज नहीं कराना चाहते, उनके लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसकी कीमत प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले अधिक है। 5G अभी भी सीमित शहरों तक Vi ने भले ही यह प्रीमियम प्लान लॉन्च कर दिया हो, लेकिन कंपनी की 5G सेवा अभी पूरे देश में उपलब्ध नहीं है। फिलहाल Vi की 5G सर्विस चुनिंदा शहरों और क्षेत्रों में ही उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं— दिल्ली मुंबई कोलकाता गुजरात के कुछ हिस्से कर्नाटक के कुछ इलाके कंपनी धीरे-धीरे अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रही है। 5G सेवा का लाभ लेने के लिए ग्राहकों के पास 5G स्मार्टफोन होना चाहिए और वे 5G कवरेज वाले क्षेत्र में होने चाहिए। अच्छी बात यह है कि इसके लिए नया SIM कार्ड लेने की जरूरत नहीं पड़ती। Jio और Airtel से कितना अलग है यह प्लान? Vi का यह प्लान कीमत के मामले में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्लानों से महंगा है। हालांकि, इसमें OTT सब्सक्रिप्शन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं शामिल नहीं हैं। ऐसे में यह प्लान उन ग्राहकों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है जो पूरे साल की वैधता और अधिक डेटा चाहते हैं, लेकिन जिन यूजर्स के लिए OTT बेनिफिट और व्यापक 5G कवरेज महत्वपूर्ण है, वे अन्य टेलीकॉम कंपनियों के विकल्पों की भी तुलना कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
RLD president Jayant Chaudhary and senior leader KC Tyagi during a party meeting after the announcement of the new parliamentary board.
RLD ने किया संसदीय दल का गठन, केसी त्यागी बने संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष; यूपी चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने संसदीय दल का गठन कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संसदीय दल के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर मंगलवार को 15 सदस्यीय संसदीय दल की घोषणा की गई। 15 सदस्यीय संसदीय दल का गठन आरएलडी के संसदीय दल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें मेजर जनरल बिशंभर दयाल, पूर्व सांसद तारीफ सिंह, मुंशी राम, पूर्व मंत्री अशोक यादव, पूर्व सांसद मलूक नागर, सांसद राजकुमार सांगवान, विधायक राजपाल बालियान, राजस्थान के पूर्व विधायक अब्दुर सगीर खान, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, राजस्थान विधायक सुभाष गर्ग, यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर शामिल हैं। इसके अलावा किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पूनिया, सुखबीर गठीना और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। यूपी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति आरएलडी का पारंपरिक जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माना जाता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले संसदीय दल का गठन संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन और चुनावी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कौन हैं केसी त्यागी? केसी त्यागी का जन्म वर्ष 1950 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने मुरादनगर से स्कूली शिक्षा और मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव समाजवादी आंदोलन की ओर हुआ और वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 1984 में लोकदल के टिकट पर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। इसके बाद 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने। समाजवादी राजनीति से जेडीयू तक का सफर जनता दल के विभाजन के बाद केसी त्यागी कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी से जुड़े। बाद में नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा गठित समता पार्टी में शामिल हुए। समता पार्टी के जनता दल (यूनाइटेड) में विलय के बाद वे लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रहे। वर्ष 2013 से 2016 तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्होंने जेडीयू छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया। गठबंधन राजनीति का लंबा अनुभव केसी त्यागी को गठबंधन राजनीति और संगठन संचालन का लंबा अनुभव है। विभिन्न समाजवादी दलों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने के कारण उन्हें मीसा (MISA) के तहत जेल भी जाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी ने उन्हें संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर पार्टी के संगठनात्मक अनुभव और चुनावी रणनीति को मजबूत करने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह नियुक्ति आरएलडी की चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Maharashtra Deputy Chief Minister Eknath Shinde welcomes six Shiv Sena UBT MPs joining his faction in Mumbai.
Maharashtra Politics: 'ऑपरेशन टाइगर' सफल! शिवसेना (UBT) के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल, NDA और हुआ मजबूत

  मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Yogi Adityanath Lucknow Coaching Fire
लखनऊ अग्निकांड की जांच तेज, एसआईटी और फोरेंसिक टीम ने संभाला मोर्चा

लखनऊ, एजेंसियां। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया। हादसे में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन हर पहलू की गहन जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में एसी के कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।   सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अलग से पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है।   चार अधिकारी निलंबित, चार आरोपी गिरफ्तार   प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इमारत मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।   वेयरहाउस से शुरू हुई थी आग सोमवार दोपहर अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत के प्रथम तल पर बने वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित थे, जहां कई छात्र फंस गए।   15 छात्रों की मौत, कई घायल दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने घंटों तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तब तक 15 छात्रों की जान जा चुकी थी। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए इमारत से कूदने वाले नौ छात्रों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।

abhishek singh जून 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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शेयर बाजार में गिरावट, Sensex 71 अंक टूटा; Nifty 24,400 के नीचे बंद

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0