NDA

Bihar cabinet expansion buzz as new ministers may take oath soon
बिहार में कैबिनेट विस्तार की उलटी गिनती, 3 या 6 मई को शपथ ले सकते हैं नए मंत्री

बिहार : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक 3 मई या 6 मई को नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शपथ की तारीख पर मंथन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार की तारीख भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगी। पश्चिम बंगाल से मिलने वाले राजनीतिक फीडबैक के आधार पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अगर स्थिति अनुकूल रही तो 6 मई को विस्तार संभव है, जबकि किसी भी अनिश्चितता की स्थिति में यह प्रक्रिया 3 मई को पहले ही पूरी की जा सकती है। कितने मंत्री बन सकते हैं? बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि, सभी पद एक साथ भरे जाने की संभावना कम है। पहले की तरह कुछ सीटें खाली रखी जा सकती हैं, ताकि भविष्य में राजनीतिक संतुलन साधा जा सके। क्या होगा सीट बंटवारे का फॉर्मूला? नई सरकार में भले ही मुख्यमंत्री भाजपा से हों, लेकिन जनता दल यूनाइटेड को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुराने फॉर्मूले के तहत जदयू को संख्या और अहम मंत्रालयों में प्राथमिकता मिल सकती है। चर्चा है कि भाजपा के करीब 14 और जदयू के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। किन नेताओं की हो सकती है वापसी? पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा, इसे लेकर अभी अटकलें जारी हैं। राजस्व, भूमि सुधार और पथ निर्माण जैसे बड़े मंत्रालयों पर उनकी दावेदारी मानी जा रही है। सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका एनडीए के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पहले की तरह जगह मिल सकती है। इन दलों से जुड़े प्रमुख नेता जैसे जीतन राम मांझी, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के करीबी चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। नजरें पहली कैबिनेट पर अब बिहार की राजनीति में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी अपनी पहली कैबिनेट में किन चेहरों को शामिल करते हैं और कौन से अहम विभाग किस दल के हिस्से में जाते हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
Tejashwi Yadav and Samrat Choudhary ahead of crucial Bihar Assembly floor test
बिहार फ्लोर टेस्ट: सम्राट से ज्यादा तेजस्वी की अग्निपरीक्षा, क्या RJD विधायक रहेंगे एकजुट?

बिहार विधानसभा में आज होने वाला फ्लोर टेस्ट मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के लिए औपचारिकता हो सकता है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के लिए यह किसी बड़ी राजनीतिक परीक्षा से कम नहीं है। असली सवाल सरकार के बहुमत का नहीं, बल्कि RJD और महागठबंधन की एकजुटता का है। पिछले झटकों ने बढ़ाई चिंता तेजस्वी यादव के लिए चिंता की वजह भी साफ है। पिछले फ्लोर टेस्ट और राज्यसभा चुनाव में RJD के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग या पाला बदलकर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया था। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठे थे। 35 विधायकों को साथ रखना चुनौती इस समय महागठबंधन के पास सिर्फ 35 विधायक हैं। ऐसे में एक भी विधायक का टूटना विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है। तेजस्वी के सामने सरकार गिराने से ज्यादा अपनी टीम को एकजुट रखने की चुनौती है। सम्राट की जीत तय, तेजस्वी की साख दांव पर Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली NDA सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट का नतीजा लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन अगर महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं, तो यह तेजस्वी के लिए बड़ी राजनीतिक जीत होगी। बिहार की राजनीति को मिलेगा बड़ा संदेश अगर इस बार भी कोई विधायक पाला बदलता है, तो इसका असर सिर्फ आज के फ्लोर टेस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। यह 2026 और आगे की बिहार राजनीति में तेजस्वी की रणनीति और पकड़ पर भी सवाल खड़े करेगा। इसलिए कहा जा रहा है कि यह सरकार का नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की साख का फ्लोर टेस्ट है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
cabinet expansion discussions after Bengal elections
बंगाल चुनाव के बाद बिहार कैबिनेट विस्तार, बदल सकते हैं सत्ता समीकरण

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मुख्यमंत्री Samrat Choudhary अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं। इससे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार, अभी भाजपा के कई बड़े नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पूरी होगी, बिहार में कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिया जा सकता है। फिलहाल सरकार का कामकाज मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav संभाल रहे हैं। 36 मंत्रियों की सीमा संवैधानिक नियमों के तहत बिहार में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं। ऐसे में: जातीय संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व राजनीतिक समीकरण इन सभी को साधना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। कुछ मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है नए चेहरों को मौका देकर सरकार संदेश देना चाहती है जवाबदेही और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा का बढ़ सकता है दबदबा इस बार कैबिनेट में एक बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि भाजपा की हिस्सेदारी बढ़े। कई अहम विभाग अभी मुख्यमंत्री के पास हैं विस्तार के बाद इनका बंटवारा सहयोगी दलों में होगा इससे सत्ता संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। सहयोगी दलों की भी अहम भूमिका मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले कुछ नाम सहयोगी दलों पर निर्भर करेंगे: Upendra Kushwaha अपने खेमे से नाम तय करेंगे Chirag Paswan के पास LJP (रामविलास) कोटे का फैसला रहेगा बिहार कैबिनेट विस्तार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश भी होगा। इससे यह तय होगा कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति किस दिशा में जाएगी और किन चेहरों पर सरकार भरोसा जताती है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
polling booths for Bihar MLC by-election in Bhojpur and Buxar districts.
बिहार MLC उपचुनाव का ऐलान, 12 मई को वोटिंग, 14 को नतीजे

Bihar Politics: बिहार विधान परिषद की भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार इस सीट पर 12 मई को मतदान और 14 मई को मतगणना होगी। क्यों खाली हुई सीट? यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है। पहले इस पर जदयू नेता राधा चरण साह का कब्जा था विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक था चुनाव का पूरा शेड्यूल 16 अप्रैल: अधिसूचना जारी 23 अप्रैल: नामांकन की अंतिम तिथि 24 अप्रैल: नामांकन पत्रों की जांच 27 अप्रैल: नाम वापसी की आखिरी तारीख 12 मई: मतदान 14 मई: मतगणना आचार संहिता लागू, बढ़ी सियासी हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो गई है। इसके बाद राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। NDA बनाम विपक्ष, मुकाबला रोचक यह सीट पहले जदयू (NDA) के पास थी NDA फिर से जीत का दावा कर रहा है वहीं विपक्ष इस मौके को भुनाने की तैयारी में है 27 वोट से जीते थे राधा चरण साह 2025 के विधानसभा चुनाव में राधा चरण साह ने: संदेश सीट से जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की राजद के दीपू सिंह को सिर्फ 27 वोटों से हराया उन्हें कुल 80,598 वोट मिले यह मुकाबला काफी चर्चित रहा था।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths during assembly elections in Assam, Kerala, and Puducherry.
असम-केरल-पुडुचेरी में जबरदस्त वोटिंग, कई रिकॉर्ड टूटे

असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार (9 अप्रैल) को हुए मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 6 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तीनों जगहों पर अच्छी वोटिंग दर्ज की गई। कहां कितना हुआ मतदान? पुडुचेरी: 89.08% (सबसे ज्यादा) असम: 85.04% केरल: 77.38% असम में टूटा पिछला रिकॉर्ड असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर करीब 85.04% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के 82.04% से ज्यादा है। इस बार राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है: बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में कांग्रेस करीब 10 साल बाद वापसी की उम्मीद में सीटों के हिसाब से अलग-अलग ट्रेंड असम में अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला: सबसे ज्यादा: दलगांव – 94.57% सबसे कम: अमरी – 70.40% इस चरण में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। केरल और पुडुचेरी में भी लंबी कतारें केरल: सभी 140 सीटों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग खत्म हुई, लेकिन कई जगहों पर लोग लाइन में लगे रहे। समय से पहले पहुंचे मतदाताओं को टोकन देकर बाद में भी वोट डालने दिया गया। पुडुचेरी: 30 सीटों पर वोटिंग शाम 6 बजे खत्म हुई, लेकिन यहां भी देर तक लोग लाइन में खड़े रहे और उन्हें मतदान का मौका दिया गया।

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Amit Shah addressing rally in Kerala, appealing Christian community for NDA support on Easter
ईस्टर पर अमित शाह की अपील, केरल के ईसाई समुदाय से मांगा समर्थन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईस्टर के मौके पर केरल के ईसाई समुदाय से भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि केरल में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार बने, जो राज्य के भविष्य को नई दिशा दे सके। “यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, भविष्य सुधारने का है” कुन्नाथुनाडु में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि केरल के विकास और बेहतर भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे राजग के साथ खड़े होकर एक “समृद्ध केरल” के निर्माण में योगदान दें। ईसाई समुदाय को दी ईस्टर की शुभकामनाएं अमित शाह ने ईस्टर के अवसर पर ईसाई समुदाय को बधाई देते हुए कहा, “मैं अपने ईसाई भाइयों और बहनों से अपील करता हूं कि वे राजग का समर्थन करें और केरल में विकास की नई शुरुआत करें।” वोट शेयर बढ़ने का किया दावा शाह ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से केरल में भाजपा-राजग का वोट शेयर लगातार बढ़ा है, जो इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है। विजयन सरकार पर साधा निशाना केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र की योजनाओं के नाम बदलकर उनका श्रेय लेने की कोशिश करती है। उन्होंने इसे “नाम बदलने का नया स्टार्टअप” करार दिया। कोझिकोड में भव्य रोड शो अमित शाह ने कोझिकोड में रोड शो भी किया, जहां बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक मौजूद रहे। फूलों से सजे वाहन पर सवार शाह का लोगों ने जोरदार स्वागत किया और उन्होंने भी जनता का अभिवादन स्वीकार किया। पुडुचेरी में भी NDA के समर्थन का दावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पुडुचेरी में रोड शो के दौरान कहा कि आगामी चुनावों में राजग के पक्ष में जबरदस्त समर्थन देखने को मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि जनता विकास के रास्ते को चुन रही है। निमोम सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला केरल की निमोम विधानसभा सीट पर इस बार दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। यहां एलडीएफ, यूडीएफ और भाजपा-नीत एनडीए के बीच कड़ी टक्कर है। माकपा नेता और शिक्षा मंत्री वी. शिवांकुट्टी इस सीट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से राजीव चंद्रशेखर उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं। यह सीट भाजपा के लिए खास मानी जाती है क्योंकि 2016 में यहीं से पार्टी ने केरल विधानसभा में पहली बार जीत दर्ज की थी। चुनावी माहौल गरम 9 अप्रैल को होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऐसे में अमित शाह की यह अपील चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकती है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
RJD leader Tejashwi Yadav during political meeting amid Rajya Sabha election controversy in Bihar
राज्यसभा चुनाव में RJD को झटका: फैसल रहमान बने तेजस्वी के लिए ‘मुश्किल की वजह’, कार्रवाई करने में क्यों बंधे हाथ?

बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पांच सीटों के लिए हुए इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया। जहां चार सीटों पर NDA की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, वहीं पांचवीं सीट का विपक्ष के हाथ से निकलना कई सवाल खड़े कर गया। इस हार के पीछे कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कुछ विधायकों की गैरमौजूदगी अहम कारण बनी। खासकर RJD विधायक फैसल रहमान का वोटिंग से दूर रहना पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। RJD विधायक की ‘चुप्पी वाली बगावत’ ने बढ़ाई परेशानी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान नहीं किया, जिसकी आशंका पहले से जताई जा रही थी। लेकिन RJD के 25 में से एक विधायक फैसल रहमान का वोट न देना अप्रत्याशित रहा। पूर्वी चंपारण के ढाका सीट से विधायक रहमान मतदान के दिन अचानक गायब रहे। देर शाम तक उनका इंतजार होता रहा, लेकिन वे वोट देने नहीं पहुंचे। इस घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। बीमारी का बहाना या सियासी रणनीति? फैसल रहमान ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनकी मां दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थीं, जिस कारण उन्हें अचानक जाना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे पटना आए थे, लेकिन हालात बिगड़ने पर वापस लौट गए। हालांकि, उनकी इस सफाई पर विपक्षी दलों और खुद पार्टी के भीतर भी संदेह जताया जा रहा है। रहमान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें खरीदने की किसी की हैसियत नहीं है। तेजस्वी यादव की बढ़ी मुश्किलें इस पूरे घटनाक्रम ने RJD नेता Tejashwi Yadav की स्थिति को असहज बना दिया है। पार्टी उम्मीदवार को वोट न मिलने से उनकी राजनीतिक साख पर असर पड़ा है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मामले में पार्टी विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन इस बार मामला इतना आसान नहीं है। क्यों नहीं कर सकते कोई सख्त कार्रवाई? दरअसल, बिहार विधानसभा में RJD की संख्या बेहद सीमित है। कुल 243 सदस्यीय सदन में पार्टी के पास ठीक 25 विधायक हैं, जो विपक्ष के नेता का पद बनाए रखने के लिए न्यूनतम जरूरी संख्या (10%) है। यदि पार्टी का एक भी विधायक कम होता है, तो Tejashwi Yadav विपक्ष के नेता का दर्जा खो सकते हैं। ऐसे में फैसल रहमान के खिलाफ कार्रवाई करना खुद पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। राजनीतिक मजबूरी में फंसे तेजस्वी फैसल रहमान की गैरमौजूदगी ने RJD को नुकसान तो पहुंचाया, लेकिन अब वे पार्टी के लिए ऐसी ‘गले की हड्डी’ बन गए हैं, जिसे न हटाया जा सकता है और न नजरअंदाज किया जा सकता है। अगर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर पार्टी की विधानसभा में स्थिति पर पड़ेगा। यही वजह है कि तमाम नाराजगी के बावजूद नेतृत्व फिलहाल चुप्पी साधे हुए है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Nitish Kumar at JDU meeting amid discussion on party president election and leadership future
जदयू अध्यक्ष चुनाव का ऐलान: क्या फिर नीतीश कुमार के हाथ में होगी कमान या आएगा नया चेहरा?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा।   चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा।   नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है।   दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं।   क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति? यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Rajya Sabha Election 2026 results show Bihar clean sweep and Odisha gains
राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में NDA का क्लीन स्वीप, ओडिशा में मिला बढ़त; हरियाणा में मतगणना पर विवाद

राज्यसभा चुनाव 2026 में भारतीय राजनीति का समीकरण साफ तौर पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में झुकता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने बिहार में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि ओडिशा में भी पार्टी ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं हरियाणा में वोटों को लेकर विवाद के कारण परिणाम अब तक अधर में लटका हुआ है।   बिहार: NDA का दबदबा कायम बिहार की पांचों सीटों पर NDA उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इनमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं। इस जीत ने राज्य में NDA की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर दिया है।   ओडिशा: BJP आगे, BJD और निर्दलीय को भी सफलता ओडिशा की चार सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सांसद सुजीत कुमार ने 35-35 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं बीजू जनता दल के संतृप्त मिश्रा ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने दूसरे वरीयता मतों के जरिए जीत दर्ज की।   हरियाणा: मतगणना पर बवाल, नतीजे लंबित हरियाणा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान वोटों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मतगणना के बीच हंगामे के कारण काउंटिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फिलहाल यहां के नतीजों का इंतजार जारी है।   देशभर का परिदृश्य देश में कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। शेष 11 सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। अब तक के रुझानों से साफ है कि भाजपा और NDA का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Bihar Rajya Sabha elections see NDA advantage as four Mahagathbandhan MLAs absent during voting.
राज्यसभा चुनाव: चार विधायकों की गैरहाजिरी से महागठबंधन को झटका, NDA की जीत लगभग तय

  बिहार में पांच सीटों पर हो रहे Rajya Sabha Elections in Bihar में सियासी समीकरण अचानक बदलते नजर आए हैं। मतदान के दौरान महागठबंधन के चार विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे, जिससे विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लगा है। अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सभी सीटों पर National Democratic Alliance (NDA) की जीत लगभग तय हो गई है। बताया जा रहा है कि All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) और Bahujan Samaj Party (BSP) के समर्थन के बावजूद महागठबंधन 41 विधायकों का आंकड़ा नहीं जुटा पाया। कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक विधायक की अनुपस्थिति ने विपक्ष की रणनीति को बड़ा झटका दिया।   सुरेंद्र कुशवाहा वाल्मीकिनगर से विधायक Surendra Kushwaha पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। इससे पहले वे Rashtriya Lok Samata Party (RLSP) से भी चुनाव लड़ चुके हैं। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जदयू उम्मीदवार को करीब 1,675 वोटों से हराया था। हालांकि लंबे समय से उनके एनडीए खेमे के नेताओं से संपर्क की चर्चाएं भी होती रही हैं।   मनोज विश्वास फारबिसगंज से विधायक Manoj Vishwas पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। वे मात्र 221 वोटों के अंतर से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। राजनीति में आने से पहले वे जदयू और राजद से भी जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।   मनोहर प्रसाद सिंह अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाले Manohar Prasad Singh चौथी बार विधायक बने हैं। वे पहले Janata Dal (United) से विधायक चुने गए थे। वर्ष 2015 में जब महागठबंधन बना और मनिहारी सीट कांग्रेस के हिस्से में आई, तब वे कांग्रेस में शामिल हो गए और उसी पार्टी से चुनाव जीतते रहे। राजनीतिक हलकों में उनकी जदयू नेताओं से करीबी की चर्चा भी होती रही है।   फैसल रहमान ढाका विधानसभा क्षेत्र से विधायक Faisal Rahman पहली बार सदन पहुंचे हैं। वे पूर्व सांसद Motiur Rahman के बेटे हैं, जो कभी राजद से राज्यसभा सांसद और कांग्रेस से विधायक भी रह चुके हैं। फैसल रहमान ने भाजपा के पवन जायसवाल को 178 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी।   विपक्षी एकजुटता को झटका चार विधायकों की अनुपस्थिति ने महागठबंधन की रणनीति को कमजोर कर दिया है। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम से बिहार की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को बड़ा झटका लगा है, जबकि NDA की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो गई है। अब राज्यसभा चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हैं।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Bihar Assembly Secretary Khyati Singh transferred to Patna High Court as OSD during Rajya Sabha voting.
राज्यसभा चुनाव के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: विधानसभा सचिव Khyati Singh का तबादला

  बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चल रही वोटिंग के बीच एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। बिहार विधानसभा की सचिव और चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर Khyati Singh का अचानक तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब Patna High Court में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर नियुक्त किया गया है।   वोटिंग से पहले जारी हुआ ट्रांसफर आदेश ख्याति सिंह न केवल बिहार विधानसभा की सचिव थीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव के लिए मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं। मतदान से ठीक पहले उनका ट्रांसफर आदेश जारी होने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हो चुका है और ऐसे समय में यह बदलाव असामान्य माना जा रहा है।   चुनाव प्रक्रिया में अहम भूमिका रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में ख्याति सिंह की जिम्मेदारी नामांकन से लेकर मतगणना तक चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की होती है। ऐसे में मतदान के दौरान उनका पद से हटाया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है, खासकर तब जब National Democratic Alliance (NDA) और महागठबंधन के बीच एक-एक वोट को लेकर कड़ी टक्कर चल रही है।   पटना हाई कोर्ट में मिली नई जिम्मेदारी सरकारी आदेश के अनुसार अब ख्याति सिंह पटना हाई कोर्ट में OSD के रूप में कार्य करेंगी। हालांकि उनके स्थान पर बिहार विधानसभा सचिव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा और चुनाव की आगे की प्रक्रिया कौन पूरी कराएगा, इसे लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।   ट्रांसफर की टाइमिंग पर उठे सवाल प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान इस तरह का तबादला होने से इसकी टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल मतदान प्रक्रिया तय समय के अनुसार जारी है और सभी की नजरें इस बात पर हैं कि आगे की चुनावी प्रक्रिया किस तरह पूरी कराई जाती है।   कौन हैं ख्याति सिंह? जन्म: 10 जुलाई 1974 शिक्षा: BA, LLB और PGDLPM चयन: Bihar Public Service Commission (BPSC) के 26वें बैच से उन्होंने 2007 में न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में अपना करियर शुरू किया। अपने कार्यकाल के दौरान वे पटना, समस्तीपुर, मोतिहारी, नवादा और शेखपुरा जैसे जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सब जज और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैसे पदों पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में वे बिहार विधानसभा में प्रभारी सचिव के पद पर कार्यरत थीं, जहां से उनका तबादला पटना हाई कोर्ट में OSD के रूप में किया गया है।

surbhi मार्च 16, 2026 0
Anant Singh leaving custody to cast his vote in Bihar Rajya Sabha elections under police escort.
Anant Singh को कोर्ट से राहत, कस्टडी में आकर राज्यसभा चुनाव में डालेंगे वोट

  बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। इसी बीच मोकामा से जदयू विधायक Anant Singh को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के आदेश के बाद वे जेल से पुलिस कस्टडी में बाहर आकर राज्यसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकेंगे।   सुबह 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए सुबह 9 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। इसके बाद शाम में ही नतीजों की घोषणा भी की जाएगी।   कस्टडी में लाकर डलवाया जाएगा वोट मोकामा विधायक अनंत सिंह इस समय दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में जेल में बंद हैं। हालांकि MP-MLA कोर्ट ने उन्हें राज्यसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें पुलिस कस्टडी में बिहार विधानसभा लाया जाएगा, जहां वे मतदान करेंगे और उसके बाद फिर से उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।   एक सीट जीतने के लिए 41 वोट जरूरी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कुल 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार National Democratic Alliance (NDA) के पास लगभग 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे चार सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।   पांचवीं सीट पर दिलचस्प मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प हो गए हैं। ऐसे में अनंत सिंह का वोट NDA के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट से मिली अनुमति के बाद उनके वोट डालने से NDA खेमे को राहत मिली है और राज्यसभा चुनाव की यह लड़ाई और भी रोचक हो गई है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0