रांची: झारखंड में NEET UG 2026 के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) ने राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसलिंग का संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। अभ्यर्थी अब 13 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसी दिन आवेदन में सुधार का मौका भी मिलेगा। NEET UG 2026 के स्कोर के आधार पर तैयार स्टेट मेरिट लिस्ट 14 अगस्त को जारी की जाएगी। 14 अगस्त से शुरू होगी पहले राउंड की काउंसलिंग मेरिट लिस्ट जारी होने के साथ ही 14 अगस्त से पहले राउंड की ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होगी। अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग करनी होगी। काउंसलिंग का प्रमुख शेड्यूल इस प्रकार है: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और च्वाइस फिलिंग: 14 से 19 अगस्त च्वाइस फिलिंग में संशोधन: 20 अगस्त सीट आवंटन और प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लेटर: 22 से 28 अगस्त डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 23 से 28 अगस्त अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित तारीखों के भीतर सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि सीट आवंटन में किसी तरह की परेशानी न हो। MBBS, BDS और BHMS में मिलेगा दाखिला राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से NEET UG 2026 में सफल अभ्यर्थियों को झारखंड के मेडिकल संस्थानों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर मिलेगा। सीट आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, च्वाइस और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा। जियोलॉजी छात्रों के लिए भी बड़ी राहत इधर, झारखंड के जियोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण सूचना है। खान एवं भूतत्व विभाग के भूतत्व निदेशालय ने भूवैज्ञानिक जांच से संबंधित शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई थी, जिसे बढ़ाकर 14 अगस्त 2026 कर दिया गया है। इच्छुक और योग्य छात्र अब तय समयसीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। इन संस्थानों के छात्र कर सकेंगे आवेदन ट्रेनिंग कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में जियोलॉजी की पढ़ाई कर रहे योग्य छात्रों को शामिल किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से रांची विश्वविद्यालय, संत जेवियर कॉलेज, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, IIT-ISM धनबाद, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय शामिल हैं। आवेदन करने वाले छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित श्रेणी का प्रमाणपत्र भी देना होगा। 24 अगस्त तक जमा करने होंगे दस्तावेज भूतत्व निदेशालय के निर्देश के अनुसार, ट्रेनिंग के लिए चयनित छात्रों से संबंधित जरूरी दस्तावेज 24 अगस्त 2026 तक निदेशालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद चयन और अन्य प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएंगी।
NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर लीक को बेहद गंभीरता से ले रही है और 24 जुलाई को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर और कड़े कानूनी प्रावधानों वाले मसौदे पर चर्चा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। पेपर लीक पर बनेगा और सख्त कानून प्रधानमंत्री ने बताया कि संबंधित विभागों ने प्रस्तावित विधेयक का मसौदा तैयार कर लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश करने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि नए कानून में— पेपर लीक के आरोपियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान होगा। मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। "22 लाख छात्रों का साल बचाना हमारी प्राथमिकता थी" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। इसी वजह से कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई, जिसमें करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि पुनर्परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका है। "दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया" प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। पेपर लीक मामलों में शामिल कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और जांच लगातार जारी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगी। CJP ने उठाए सवाल प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। संगठन का कहना है कि असली सवाल यह है कि बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कब तय होगी। CJP ने दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा। आशुतोष रांका बोले- समस्या की जड़ पर कार्रवाई हो CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया स्वागतयोग्य है, लेकिन इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिससे भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उनके अनुसार, लगातार हो रहे पेपर लीक परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों की ओर संकेत करते हैं। बातचीत पर भी CJP की शर्त CJP ने बताया कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला है, लेकिन संगठन चाहता है कि बैठक जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर हो। संगठन का आरोप है कि सरकार केवल अपने कार्यालय में बैठक चाहती है, जिसे CJP ने स्वीकार नहीं किया। संगठन का कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी, जब मांगों पर स्पष्ट निर्णय और उन्हें लागू करने की समयसीमा तय की जाए। 20 जून से जारी है आंदोलन CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। इस आंदोलन में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी भागीदारी रही है।
संसद के मानसून सत्र का मंगलवार (21 जुलाई) को दूसरा दिन है। पहले दिन विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद आज भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी बहस और टकराव के आसार हैं। विपक्ष NEET 2026 पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। अब तक के बड़े अपडेट NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक शुरू संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले एनडीए संसदीय दल की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत एनडीए के वरिष्ठ मंत्री और सांसद शामिल हैं। माना जा रहा है कि बैठक में संसद की रणनीति, विपक्ष के हमलों का जवाब और आगामी विधायी एजेंडे पर चर्चा हो रही है। आज राज्यसभा में पेश हो सकता है वंदे मातरम बिल सरकार आज राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर सकती है। प्रस्तावित विधेयक में 'वंदे मातरम' का अपमान करने या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है। यह बिल सोमवार को पेश होना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इसे सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने NEET पेपर लीक समेत देश की परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। आज इन मुद्दों पर घमासान संभव NEET 2026 पेपर लीक राम मंदिर चंदा विवाद छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में सुधार सरकार के विधायी एजेंडे पर विपक्ष का विरोध सरकार की क्या है तैयारी? सरकार आज संसद में अपने लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का जवाब देने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा। सरकार की कोशिश रहेगी कि हंगामे के बीच भी महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जा सकें। पहले दिन जमकर हुआ था हंगामा मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा था, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। ऐसे में दूसरे दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों की नजर आज खासतौर पर वंदे मातरम बिल, NEET विवाद और विपक्ष की रणनीति पर रहेगी।
CJP Parliament March: दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च के बाद राजधानी में पूरे दिन हाईवोल्टेज राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल खाली करा दिया। हालांकि देर शाम प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर लौट आए और सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। इस दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के लिए बनाया गया मंच भी हटा दिया और धरना स्थल से ट्रैम्पोलिन, गद्दे, कालीन समेत अन्य सामान जब्त कर लिया। संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव सोमवार सुबह हजारों प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक मामलों में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर से संसद की ओर निकले। संसद मार्ग के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। जंतर-मंतर से हटाया गया धरना संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल को खाली कराया। पुलिस ने सोनम वांगचुक के अनशन के लिए बनाया गया मंच हटाने के साथ-साथ वहां रखा अन्य सामान भी जब्त कर लिया। हालांकि शाम होते-होते प्रदर्शनकारी फिर से जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की पहल भी की। CJP के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, सोनम वांगचुक पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग रखी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार कर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। क्या हैं CJP की प्रमुख मांगें? प्रदर्शनकारी संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी प्रतिबंध के रिहा किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। कथित NEET 2026 पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। कई छात्र संगठनों का मिला समर्थन इस आंदोलन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, शिक्षक और कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद भड़की झड़प सुबह करीब 11 बजे संसद मार्ग पुलिस थाने के पास प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए प्रमुख बैरिकेड को हटाने की कोशिश की। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। पुलिस के अनुसार, कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी, जिससे कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग किया। हिरासत, इंटरनेट बंद और धारा 163 लागू अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान 20 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एहतियात के तौर पर नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। दोपहर बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर सार्वजनिक सभा और प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई। राजधानी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, केंद्रीय सचिवालय सहित पूरे लुटियंस दिल्ली इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए। दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियां भी तैनात रहीं। दंगा-रोधी उपकरणों से लैस जवानों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। विपक्षी नेताओं ने भी जताया समर्थन प्रदर्शन के दौरान नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी जंतर-मंतर पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की। पांच मेट्रो स्टेशन रहे बंद सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा। स्थिति सामान्य होने के बाद चरणबद्ध तरीके से मेट्रो सेवाएं बहाल कर दी गईं।
रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार झारखंड के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया है। सुहर्ष कुमार गुप्ता ने 99.9771 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 455 हासिल कर झारखंड के स्टेट टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं रांची के ज्ञानेंद्र गर्व ने 99.96 पर्सेंटाइल और 655 अंक हासिल करते हुए AIR 676 प्राप्त की। ज्ञानेंद्र गर्व की इस उपलब्धि से उनके परिवार और शिक्षकों में खुशी की लहर है। उनके पिता मयंक भूषण गढ़वा में एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां कुमारी अंजली सरकारी शिक्षिका हैं। ज्ञानेंद्र ने अपनी दसवीं की पढ़ाई डीएवी कपिलदेव स्कूल, रांची से और बारहवीं की पढ़ाई जेवीएम श्यामली से पूरी की है। रांची के अन्य विद्यार्थियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया रांची के अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अक्षत प्रेम ने 642 अंक के साथ AIR 2034, साकिब अहमद ने 640 अंक के साथ AIR 2282, मयंक कुमार ने AIR 3211 और सर्वजीत ने AIR 4271 हासिल की। इस वर्ष रांची से लगभग 10 हजार अभ्यर्थी NEET UG परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें कई छात्रों ने शानदार सफलता दर्ज की। इस बार NEET UG 2026 का परिणाम ऐसे समय आया है, जब पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी। इसके बावजूद देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। NTA के अनुसार, 11.21 लाख उम्मीदवार मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई हुए हैं। अब सफल अभ्यर्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड के छात्रों का यह प्रदर्शन राज्य में चिकित्सा शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर शैक्षणिक माहौल और लगातार मेहनत का सकारात्मक संकेत है।
रांची। NEET UG Re-Exam 2026 को लेकर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पिछले पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित हो रही दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्न पत्रों की ढुलाई वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए की जा रही है। रांची, पटना और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर समेत कई शहरों में प्रश्न पत्र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाए गए। रांची एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट वायुसेना का विशेष विमान रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरा। विमान से नीट यूजी के प्रश्न पत्र उतारने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। एयरपोर्ट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया। विमान से करीब दर्जनभर ट्रॉलियों के माध्यम से प्रश्न पत्रों को कार्गो क्षेत्र तक पहुंचाया गया। इसके बाद डाक विभाग के विशेष वाहनों से इन्हें विभिन्न परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना किया गया। प्रत्येक वाहन के साथ पुलिस की तीन-तीन एस्कॉर्ट गाड़ियां सुरक्षा में तैनात थीं। 21 जून को होगी परीक्षा, रांची में 21 परीक्षा केंद्र 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG Re-Exam के लिए रांची जिले में कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने परीक्षा के दिन सभी केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर एयरपोर्ट से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम तक सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगरानी रही। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई गई और प्रश्न पत्रों को सीधे सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंचाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता और सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया गया। पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा पिछले पेपर लीक विवाद के बाद इस बार NEET UG Re-Exam की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व बनाया गया है। प्रश्न पत्रों की ढुलाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है। सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया। लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है। टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है। 21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।
नई दिल्ली: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में दूसरों के लिए मिसाल बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है ताकि जल्द फैसला हो सके। 21 जून को होने वाले NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। मंगलवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NTA मुख्यालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रक्रिया का जायजा लिया। दोषियों पर होगी सबसे कड़ी कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेपर तैयार करने और अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े जिन लोगों ने देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा तोड़ा है, उनके खिलाफ न केवल आपराधिक कार्रवाई होगी बल्कि नागरिक दायित्व (Civil Liability) के तहत भी कार्रवाई की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई सुनिश्चित की जाए ताकि जल्द फैसला सामने आ सके। शिक्षा मंत्री ने कहा, "दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो आने वाले समय में किसी के लिए भी चेतावनी और मिसाल बने।" PM मोदी भी कर रहे हैं निगरानी धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि NTA कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। री-एग्जाम की तैयारियां अंतिम चरण में NTA पहले ही NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर चुका है। अब जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। कुछ छात्रों द्वारा परीक्षा केंद्र बदलने की मांग की गई है, जिस पर एजेंसी विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी फैसले छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। संसदीय समिति ने अधिकारियों को तलब किया बुधवार को संसद की स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, NTA और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुधार योजनाओं पर सवाल-जवाब करेगी। CUET-UG रिजल्ट भी जल्द NTA CUET-UG 2026 का रिजल्ट भी जल्द जारी करने की तैयारी में है। 7 जून को परीक्षा समाप्त होने के बाद 9 जून को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई थी। छात्र 11 जून तक प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इस वर्ष 243 विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET स्कोर के आधार पर होगा। साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस सरकार ने NTA के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसके अलावा IB, CBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना से फिर एक बड़ी घटना सामने आई है। NEET की तैयारी कर रही 17 वर्ष की छात्रा का शव पत्रकार नगर थाना क्षेत्र स्थित एक हॉस्टल के कमरे में मिला है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि बीते जनवरी में जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामले का अभी खुलासा भी नहीं हुआ है कि एक और घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है। घटना पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के सचिवालय कॉलोनी रोड नंबर 2 स्थित ‘राधे कृष्ण हॉस्टल’ की है, जहां छात्रा का शव कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई और हॉस्टल प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। समस्तीपुर की रहने वाली थी छात्रा मृतक छात्रा मूल रूप से समस्तीपुर की रहने वाली थी। वह वर्ष 2024 से पटना में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिवार ने बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उसे पटना भेजा था। पुलिस ने परिजनों को मामले की जानकारी दे दी है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने के बाद पत्रकार नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही कमरे और आसपास के इलाके की जांच की जा रही है। पुलिस हॉस्टल प्रबंधन, अन्य छात्राओं और संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके।
NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जांच में सामने आया सीकर कोचिंग नेटवर्क NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में अब राजस्थान का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि सीकर जिले में कुछ लोगों और कोचिंग संस्थानों के जरिए कथित तौर पर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, यश यादव नाम के युवक को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। उसका संबंध विकास बिवाल नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है, जिसका नाम भी जांच में सामने आया है। हार्ड कॉपी को PDF बनाकर फैलाने का आरोप जांच में यह भी पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी स्कैन कर उसे PDF फाइल में बदला। इसके बाद यह डिजिटल कॉपी सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाई गई। छात्रों ने 3 से 10 लाख रुपये देने की बात कबूली पूछताछ के दौरान कई छात्रों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर पाने के लिए 3 लाख से 10 लाख रुपये तक का भुगतान किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किस चैन के जरिए छात्रों तक पहुंचा। एक आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह मामले में सामने आए शुभम नामक व्यक्ति ने आरोपों से इनकार किया है। उसने कहा कि वह इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड नहीं है। हालांकि जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। सीबीआई की पूछताछ तेज Central Bureau of Investigation ने इस मामले में कई कोचिंग संस्थानों के मालिकों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। गिरफ्तार आरोपियों और छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मनी ट्रेल पर एजेंसियों की नजर अब जांच का फोकस आर्थिक लेन-देन पर भी पहुंच गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पैसे किन खातों में जमा हुए और किसने ट्रांजैक्शन को संभाला। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक हो सकता है, इसलिए हर डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
रांची। अमूल दूध गुरुवार 14 मई से झारखंड समेत पूरे देश में महंगा हो गया है। इसकी कीमत में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) ने बढ़ती इनपुट लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 14 मई से बढ़े हुए दामों में अमूल के दूध मिल रहे हैं। दूध की कीमतों में वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना है और इससे मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव पड़ेगा। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी 1 मई, 2025 को की गई थी। जीसीएमएमएफ ने एक बयान में कहा कि उसने भारत भर में प्रमुख दूध विक्रय प्रकारों/पैकेटों में ताजे पाउच दूध की कीमतों में 14 मई से 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। कंपनी का तर्क कंपनी की ओर से कहा गया है कि यह बढ़ोतरी प्रति लीटर लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत के बराबर है, जो औसत खाद्य मुद्रास्फीति से कम है। कहा गया कि दूध के संचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है। इस दौरान पशुओं के चारे, दूध की पैकेजिंग फिल्म और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। सहकारी समिति ने कहा कि उसके सदस्य संघों ने किसानों के खरीद मूल्य में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा की वृद्धि की है, जो मई 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है। भैंस के दूध की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के लिए 500 मिलीलीटर पैक की संशोधित दरों के अनुसार, स्लिम एन वेरिएंट की कीमत 27 रुपये, ताजा की कीमत 30 रुपये, गाय के दूध की कीमत 31 रुपये और गोल्ड की कीमत 36 रुपये होगी। भैंस के दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और अब यह 80 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 20 प्रतिशत दुग्ध उत्पादकों को देती है कंपनी जीसीएमएमएफ ने कहा कि अमूल की नीति के तहत, दूध और दूध उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक रुपये में से लगभग 80 पैसे दूध उत्पादकों को दिए जाते हैं। जीसीएमएमएफ ने आगे कहा कि मूल्य संशोधन से दूध उत्पादकों को लाभकारी दूध मूल्य बनाए रखने में मदद मिलेगी और उन्हें अधिक दूध उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते, वित्त वर्ष 2025-26 में अमूल ब्रांड का कुल कारोबार 11 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। पिछले वित्त वर्ष में जीसीएमएमएफ का कारोबार 11.4 प्रतिशत बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह 65,911 करोड़ रुपये था। जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी किसान-स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी संस्था है, जिसमें 36 लाख किसान शामिल हैं। यह प्रतिदिन 31 मिलियन लीटर दूध एकत्र करता है और सालाना 24 बिलियन से अधिक अमूल उत्पादों के पैकेट वितरित करता है, जिनमें दूध, मक्खन, पनीर, घी और आइसक्रीम आदि शामिल हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET UG 2026) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। परीक्षा के आयोजन के बाद अब इसके पेपर लीक होने की आशंका प्रबल हो गई है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जो परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जांच में सामने आया है कि इस संदिग्ध पेपर का केंद्र केरल और राजस्थान का सीकर जिला है। बताया जा रहा है कि केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने, जो मूलत राजस्थान के चूरू का रहने वाला है, 1 मई को एक ‘क्वेश्चन बैंक’ अपने सीकर स्थित दोस्त को व्हाट्सएप पर भेजा था। यह दोस्त सीकर में एक पीजी (PG) संचालित करता है। वहीं इस मामले में एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होने बताया की परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर 150 पन्नों की एक पीडीएफ फाइल वायरल हुई थी, जिसमें कुल 400 सवाल शामिल थे। एसओजी की शुरुआती पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में उस वायरल गेस पेपर से करीब 120 सवाल मिले हैं। वर्तमान में एसओजी इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह गेस पेपर किसने और किस आधार पर तैयार किया था। इस सिलसिले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले के ‘देहरादून लिंक’ को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि, एसओजी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फिलहाल इसे आधिकारिक तौर पर ‘पेपर लीक’ नहीं कहा जा सकता। एसओजी का मुख्य कार्य साक्ष्य जुटाना और जांच करना है, जबकि परीक्षा के भविष्य पर अंतिम निर्णय संबंधित परीक्षा एजेंसी ही लेगी। पुलिस फिलहाल कड़ियां जोड़कर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। क्वेश्चन बैंक और परीक्षा के बीच चौंकाने वाला मिलान SOG के सूत्रों के अनुसार, छात्र द्वारा भेजे गए इस क्वेश्चन बैंक में करीब 300 सवाल शामिल थे। जब इन सवालों का मिलान मूल नीट पेपर से किया गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। 300 में से लगभग 150 सवाल हूबहू वही थे जो परीक्षा में पूछे गए थे। नीट परीक्षा में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं, जहां प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का होता है। इस हिसाब से 720 में से 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले ही लीक होने की आशंका बढ़ गई है। किसी भी ‘गेस पेपर’ में इतनी सटीकता होना लगभग असंभव माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ डेटा सीकर के पीजी संचालक को पेपर मिलने के बाद यह व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फॉरवर्ड हुआ. पीजी संचालक ने अपने यहां रह रहे छात्रों को यह सामग्री उपलब्ध कराई, जिसके बाद कैरियर काउंसलर्स और अन्य छात्रों के माध्यम से यह जाल फैलता चला गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि परीक्षा संपन्न होने के बाद इसी पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाना और एनटीए (NTA) को शिकायत दी थी। SOG अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि कहीं पकड़े जाने के डर से तो संचालक ने खुद शिकायतकर्ता बनने का नाटक नहीं किया। SOG की मास्टरमाइंड की तलाश फिलहाल SOG मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कड़ियां जोड़ रही है। सभी संदिग्धों के कॉल लॉग्स और सोशल मीडिया चैट की फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी अभी अंतिम रूप से यह तय नहीं कर पाई है कि इसे तकनीकी रूप से ‘पेपर लीक’ की श्रेणी में रखा जाए या कुछ और, लेकिन सबूत किसी बड़े गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं।
NEET परीक्षा पास करना मेडिकल करियर की दिशा में एक बड़ा कदम जरूर है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है–काउंसलिंग प्रक्रिया। हर साल हजारों छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद सिर्फ गलत निर्णय या अधूरी जानकारी के कारण अपनी पसंदीदा MBBS या BDS सीट से चूक जाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि काउंसलिंग का हर चरण कितना महत्वपूर्ण है और इसे रणनीतिक तरीके से कैसे पूरा किया जाए। काउंसलिंग क्या है और क्यों है इतनी अहम? NEET काउंसलिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उम्मीदवारों को उनकी रैंक, कैटेगरी, सीट उपलब्धता और भरी गई पसंद (choice filling) के आधार पर मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया दो स्तरों पर आयोजित होती है– All India Quota (AIQ): कुल सीटों का 15 प्रतिशत State Quota: कुल सीटों का 85 प्रतिशत दोनों ही स्तरों पर भाग लेना छात्रों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे विकल्प बढ़ते हैं। रजिस्ट्रेशन से लेकर चॉइस फिलिंग तक–हर स्टेप मायने रखता है काउंसलिंग की शुरुआत रजिस्ट्रेशन से होती है, जहां उम्मीदवार को अपनी बेसिक जानकारी भरनी होती है। इसके बाद आता है सबसे महत्वपूर्ण चरण–चॉइस फिलिंग। यहीं पर सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए: अधिक से अधिक कॉलेज विकल्प भरें केवल टॉप कॉलेज पर निर्भर न रहें, बैकअप जरूर रखें अपनी रैंक के अनुसार यथार्थवादी विकल्प चुनें एक छोटी सी गलती यहां आपकी सीट छीन सकती है। सीट अलॉटमेंट: कैसे होता है फैसला? सीट आवंटन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होता है, जो आपकी रैंक, कैटेगरी और चॉइस के आधार पर तय होता है। सीट मिलने के बाद आपके पास तीन विकल्प होते हैं: Accept and Freeze: सीट को फाइनल करना Float: बेहतर कॉलेज के लिए अगले राउंड का इंतजार Slide: उसी कॉलेज में बेहतर कोर्स के लिए इंतजार सही विकल्प चुनना आपकी आगे की दिशा तय करता है। इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी कई छात्र कुछ आम गलतियां करते हैं, जिनसे उनका नुकसान हो सकता है: सिर्फ एक काउंसलिंग में भाग लेना कम चॉइस भरना डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में देरी समयसीमा (deadline) को नजरअंदाज करना इनसे बचना ही सफलता की कुंजी है। डॉक्यूमेंट्स पहले से रखें तैयार काउंसलिंग के दौरान किसी भी देरी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें: NEET स्कोरकार्ड एडमिट कार्ड 10वीं और 12वीं की मार्कशीट कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) पासपोर्ट साइज फोटो
दिनांक - 04 मई 2026 दिन - सोमवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - ज्येष्ठ पक्ष - कृष्ण तिथि - तृतीया 05 मई प्रातः 05:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी नक्षत्र - अनुराधा सुबह 09:58 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा योग परिघ रात्रि 11:20 तक तत्पश्चात शिव राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:21 तक सूर्योदय - 05:30 सूर्यास्त - 06:23 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण- विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।