CJP Meeting: NEET-UG आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपने अगले राजनीतिक और संगठनात्मक कदमों की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने 5 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शीर्ष नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में जंतर-मंतर पर चले लंबे आंदोलन के बाद संगठन की आगे की रणनीति, विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अभिजीत दीपके के आवास पर होगी बैठक पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास पर आयोजित होगी। इसमें पार्टी के शीर्ष नेता, प्रमुख पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य आंदोलन के अनुभवों की समीक्षा करना और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना है। जंतर-मंतर आंदोलन के बाद लिया जाएगा फीडबैक दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने तक चले आंदोलन के बाद पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को कुछ समय परिवार के साथ बिताने की सलाह दी थी। इसी दौरान वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छात्रों, युवाओं और स्वयंसेवकों से संवाद कर उनकी राय और सुझाव जुटाएं। बताया जा रहा है कि बैठक में इन्हीं सुझावों के आधार पर संगठन की आगे की दिशा और अभियान तय किए जाएंगे। बैठक के बाद होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस 5 अगस्त को बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद CJP प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। इसमें पार्टी नेतृत्व आंदोलन के बाद की रणनीति, आगामी कार्यक्रमों और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की आधिकारिक घोषणा करेगा। माना जा रहा है कि प्रेस वार्ता में पार्टी के विस्तार और भविष्य के अभियानों को लेकर भी जानकारी दी जा सकती है। फ्रेंडशिप डे पर छात्रों से मिले अभिजीत दीपके बैठक से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आवास पर छात्रों, स्थानीय नागरिकों और आसपास के जिलों से आए समर्थकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बच्चों और युवाओं के साथ 'फ्रेंडशिप डे' भी मनाया और उनसे बातचीत कर आंदोलन से जुड़े अनुभव साझा किए। आंदोलन के बाद संगठनात्मक तैयारी तेज राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET आंदोलन के बाद यह बैठक CJP के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी अब आंदोलन के अनुभवों को संगठनात्मक विस्तार और भविष्य की रणनीति में बदलने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 5 अगस्त की बैठक और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर निशाना साधा, जबकि सरकार की ओर से आंदोलन और उससे जुड़े आरोपों पर जवाब दिया गया। छात्रों के समर्थन में विपक्ष ने सरकार को घेरा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता छात्रों के समर्थन में सामने आए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल समेत नेताओं ने परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। राहुल गांधी ने सरकार से कार्रवाई की मांग की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई करने की मांग की और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को दोहराया। पीएम मोदी की अपील के बाद सियासत और तेज प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि युवाओं को सजा देने के बजाय उन्हें समझाने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपशब्द किसी समस्या का समाधान नहीं करते। प्रदर्शन ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा जंतर-मंतर का आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा। पेपर लीक, छात्रों की सुरक्षा, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
Goa Protest News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के समर्थन में गोवा के मापुसा में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं से 240 सवालों वाली विस्तृत प्रश्नावली भरवाई गई। इसमें 'Free Umar Khalid' पोस्टर का अर्थ, सरकार की आलोचना, प्रदर्शन के वित्तपोषण और आंदोलन से जुड़े संगठनों को लेकर सवाल पूछे गए। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रदर्शन 24 जुलाई को आयोजित किया गया था। अगले दिन 25 जुलाई की शाम गोवा पुलिस ने पणजी के आजाद मैदान में 'Free Umar Khalid' लिखा पोस्टर लेकर पहुंचे एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल कम से कम दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को पूछताछ के लिए तलब किया गया। यह कार्रवाई 'Citizens of Mapusa' नामक स्थानीय संगठन की शिकायत के आधार पर की गई। प्रदर्शनकारियों से क्या-क्या पूछे गए सवाल? रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों से 240 से अधिक सवाल पूछे। उनसे यह जानकारी मांगी गई कि प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया, वे किस उद्देश्य से शामिल हुए, कार्यक्रम के लिए आर्थिक मदद किसने दी और क्या वे किसी व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल ग्रुप का हिस्सा हैं। इसके अलावा पुलिस ने यह भी पूछा कि क्या वे किसी राजनीतिक दल, छात्र संगठन, सामाजिक संस्था, एनजीओ या एक्टिविस्ट समूह से जुड़े हैं और प्रदर्शन स्थल तक कैसे पहुंचे। 'Free Umar Khalid' पोस्टर पर आपत्ति गोवा पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह मापुसा और पणजी में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इन कार्यक्रमों का आयोजन 'उजवाद' नामक एनजीओ ने किया था। वहीं, 'Citizens of Mapusa' संगठन ने प्रदर्शन के दौरान 'Free Umar Khalid' लिखी तख्तियों और नारों पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। दो युवकों को हिरासत में लिया गया पीटीआई के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाने के दौरान जेल में बंद छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाने के आरोप में दो युवकों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के उद्देश्य, फंडिंग और आयोजन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। वहीं, प्रदर्शन में शामिल लोगों से पूछताछ का सिलसिला अभी जारी है।
बिहार सरकार ने NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनता और विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया। 'सरकार को अल्टीमेटम दिया था' तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष ने सरकार को सोमवार तक का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आखिरकार जनता के दबाव के आगे झुक गई और अपना फैसला बदलना पड़ा। सीवान फायरिंग मामले में न्यायिक जांच की मांग तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित AK-47 से फायरिंग के मामले में न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल एक कांस्टेबल का निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिले के एसपी और अन्य जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली हवा में नहीं चलाई गई, बल्कि छात्रों को निशाना बनाया गया। साथ ही सवाल किया कि फायरिंग का आदेश किसने दिया और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप आरजेडी नेता ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा शासन बिहार को "पुलिसिया गुंडाराज" की ओर ले जा रहा है। उन्होंने सरकार के 100 दिन पूरे होने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस अवधि में राज्य को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली, जबकि अपराध और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहे हैं। सीएम की पत्नी के निरीक्षण पर उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा स्कूल और कॉलेजों के निरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि किस प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सरकारी निरीक्षण करने की अनुमति दी गई और उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी क्यों तैनात किए गए। 'जनता नाराज हुई तो सरकार जाएगी' प्रेस वार्ता के दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि जनता का असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केंद्र और बिहार, दोनों की सरकारों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
Gen-Z Protest: 36 दिनों तक चले जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समापन के साथ सिर्फ एक धरना खत्म नहीं हुआ, बल्कि भारतीय छात्र राजनीति में विरोध की एक नई शैली सामने आई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन इस दौरान देश की Gen-Z पीढ़ी ने जिस अनुशासन, अहिंसा और रचनात्मकता का परिचय दिया, उसने भारतीय लोकतंत्र में विरोध की राजनीति को एक नई पहचान दी। जिस पीढ़ी को अक्सर सोशल मीडिया, रील्स और डिजिटल दुनिया तक सीमित मान लिया जाता है, उसी पीढ़ी ने यह साबित किया कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी उतनी ही गंभीरता से समझती है। जंतर-मंतर पर बीते 36 दिनों में जो तस्वीरें सामने आईं, वे दुनिया के कई बड़े छात्र आंदोलनों से अलग नजर आईं। विरोध भी, जिम्मेदारी भी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने न तो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और न ही हिंसा का रास्ता अपनाया। पुलिस की कार्रवाई, वॉटर कैनन, हिरासत और सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद आंदोलन का स्वरूप व्यापक रूप से शांतिपूर्ण बना रहा। प्रदर्शन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा। कहीं छात्र वॉटर कैनन के बीच नाचते दिखाई दिए, तो कहीं पुलिसकर्मियों से मजाकिया अंदाज में हेलमेट मांगते नजर आए। भीषण गर्मी में कुछ छात्र राहगीरों को हाथ से पंखा झलते दिखे, जबकि स्वयंसेवकों ने प्रदर्शन स्थल की सफाई की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ली। दस्ताने पहनकर कचरा उठाना, झाड़ू लगाना और सफाई अभियान चलाना इस आंदोलन की अलग पहचान बन गया। रचनात्मक विरोध की नई मिसाल यह आंदोलन केवल नारों तक सीमित नहीं रहा। कविता, संगीत, पोस्टर, व्यंग्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्रों ने अपनी बात रखी। सोशल मीडिया का उपयोग केवल प्रचार के लिए नहीं, बल्कि संवाद और जनजागरूकता के माध्यम के रूप में किया गया। इसने यह संदेश दिया कि विरोध केवल आक्रोश नहीं, बल्कि विचार और जिम्मेदारी के साथ भी किया जा सकता है। मास्क के पीछे छिपी सामाजिक हकीकत आंदोलन के दौरान कई छात्र मास्क या हेलमेट पहनकर प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके पीछे सुरक्षा से अधिक पारिवारिक और सामाजिक दबाव की वजह बताई गई। कुछ छात्रों का कहना था कि उनके परिवारों की राजनीतिक सोच अलग है और वे घर में अनावश्यक विवाद नहीं चाहते थे। यह पहलू भारतीय समाज में राजनीतिक मतभेदों के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है। देश के शीर्ष संस्थानों के छात्र रहे शामिल जंतर-मंतर आंदोलन में देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के छात्र शामिल हुए। इनमें IIT, AIIMS, IIM, NIT, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मिरांडा हाउस और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की थी जिन्होंने JEE Advanced, NEET, CAT, CLAT और CUET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। यही कारण रहा कि आंदोलन की रणनीति, पोस्टर, नारे और सोशल मीडिया अभियान में भी वैचारिक परिपक्वता और व्यवस्थित योजना दिखाई दी। दुनिया के आंदोलनों से कैसे अलग रहा जंतर-मंतर? पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस, चिली, हांगकांग, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई देशों में छात्र आंदोलनों के दौरान हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिस के साथ गंभीर झड़पें देखने को मिलीं। इसके विपरीत जंतर-मंतर आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने पर जोर दिया। आंदोलन के दौरान स्वयं सफाई करना, लोगों की मदद करना और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी बात रखना इसकी सबसे बड़ी विशेषता बनकर उभरा। भारतीय छात्र आंदोलनों की नई दिशा जेपी आंदोलन, मंडल आंदोलन और नागरिकता कानून विरोध जैसे आंदोलनों के बाद जंतर-मंतर का यह आंदोलन एक अलग पहचान छोड़ता दिखाई देता है। यहां विरोध था, लेकिन हिंसा नहीं। नारों में आक्रोश था, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति के प्रति सम्मान भी था। सोशल मीडिया की ताकत थी, लेकिन जमीनी संगठन और अनुशासन भी उतना ही मजबूत दिखाई दिया। इस आंदोलन ने यह संकेत दिया कि भारत की नई पीढ़ी केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है। वह लोकतंत्र में अपनी भागीदारी को समझती है, सवाल भी पूछती है और जिम्मेदारी भी निभाती है। यही वजह है कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन भारतीय छात्र राजनीति के इतिहास में विरोध की एक नई और अलग शैली के रूप में याद किया जा सकता है।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की। चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भी जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन समाप्त नहीं होगा। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं और जब तक उन पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। हालांकि, CJP नेतृत्व ने इसे आंदोलन की अंतिम जीत मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह केवल उनकी मांगों की दिशा में पहला कदम है। अभिजीत दीपके ने रखीं दो प्रमुख मांगें अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बावजूद संगठन अपनी दो महत्वपूर्ण मांगों पर अडिग है। पहली मांग उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद के दौरान आत्महत्या की। दीपके ने मांग की कि ऐसे प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर है। उन्होंने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों ने बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। "आंदोलन तब तक जारी रहेगा" दीपके ने कहा कि उनकी मांगें केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं थीं। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी सभी मांगों पर निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई दिनों से लोग यह मान रहे थे कि इस्तीफा संभव नहीं है, लेकिन छात्रों के लगातार आंदोलन और दबाव के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की सफलता बताया और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से बदलाव संभव है। छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग CJP ने यह भी मांग उठाई कि 20 जुलाई के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों पर यदि कोई कानूनी मामले दर्ज किए गए हैं तो उन्हें वापस लिया जाए। संगठन का कहना है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज कार्रवाई उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सरकार को इस दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इसके अलावा, दीपके ने रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। आंदोलन पर आगे क्या? संगठन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में सरकार के साथ बातचीत के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल प्रदर्शन जारी रहेगा और CJP का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उधर, NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग स्तर पर आवाज उठाई जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है.
NEET Protest: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई करेगा। अदालत ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती की न्यायिक जांच और कार्रवाई की मांग की है। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को दी चुनौती यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और गोपाल शंकरनारायणन ने याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। याचिकाओं में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। उस दिन CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और युवा कथित NEET पेपर लीक के विरोध में तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। परीक्षा सुधारों पर केंद्र और NTA से रिपोर्ट तलब इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से इन प्रमुख बिंदुओं पर प्रगति रिपोर्ट मांगी है: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था प्रशासनिक सुधार मानव संसाधन प्रबंधन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रणाली यह निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। स्थायी सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट का जोर केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठा रही है तथा जल्द ही विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी। इस पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि सुधार केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। NTA से 10 क्षेत्रों में मांगी जानकारी सुप्रीम कोर्ट ने NEET सुधारों के लिए गठित उच्चाधिकार समिति (HPC) की सिफारिशों को लागू करने की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। अदालत ने परीक्षा के तीनों चरणों से जुड़े सुधारों पर जानकारी देने को कहा है— परीक्षा से पहले की व्यवस्था परीक्षा के दौरान सुरक्षा और निगरानी परीक्षा के बाद की प्रक्रिया इसके अलावा प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तथा राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। डिजिटल सुरक्षा और पहचान सत्यापन पर भी सवाल सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्रों और परीक्षा डेटा की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक पूरी परीक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने डेटा ट्रांसफर, स्टोरेज, साइबर सुरक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही, उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन के लिए डिजियात्रा जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है। सुधार प्रक्रिया पर रहेगी सुप्रीम कोर्ट की नजर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार की पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी करेगा। अदालत का कहना है कि उद्देश्य केवल वर्तमान विवाद का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक युवक को मीडिया के सामने पेश कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी का दावा है कि युवक शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था, तभी उस पर पैलेट गन चलाई गई, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। राहुल गांधी का सरकार पर हमला एएनआई के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर रही है, जबकि घायल युवक की एक आंख की रोशनी जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ इस तरह की कार्रवाई बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस भर्ती परीक्षा और पेपर लीक का उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने बताया कि घायल युवक ने पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पैलेट गन को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल भारत में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद होता रहा है। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामलों में कई लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटनाएं सामने आई थीं। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने समय-समय पर इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। अब जंतर-मंतर में छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष आमने-सामने राहुल गांधी के आरोपों के बाद छात्र आंदोलन का मुद्दा फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार पहले ही प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार कर चुकी है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और तथ्यों का इंतजार है। जांच के नतीजों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।
John Cusack on CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है। हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक (John Cusack) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उनके इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन बताया, वहीं कई यूजर्स ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में दखल करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। जॉन कुसैक ने शेयर की छात्र आंदोलन से जुड़ी पोस्ट 'सेरेंडिपिटी', 'हाई फिडेलिटी', 'कॉन एयर' और '2012' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर हॉलीवुड अभिनेता जॉन कुसैक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय का एक लेख साझा किया। इस लेख में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की आलोचना की गई थी। पोस्ट साझा करते हुए कुसैक ने लिखा कि उन्हें अपने "पसंदीदा साथी कॉकरोच" की ओर से अच्छी खबर मिली है और उन्होंने आंदोलन से जुड़ी रिपोर्ट को साझा किया। इसके बाद उनका पोस्ट तेजी से वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया जॉन कुसैक की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। कुछ यूजर्स ने उनके समर्थन का स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की। कई यूजर्स ने लिखा कि किसी विदेशी अभिनेता को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में लिखा गया कि भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों पर बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है। पहले भी भारत के मुद्दों पर रख चुके हैं राय यह पहली बार नहीं है जब जॉन कुसैक ने भारत से जुड़े किसी मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उन्होंने सोशल मीडिया पर छात्रों का समर्थन किया था और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। क्या है CJP का आंदोलन? दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की है। हाल के दिनों में 'चलो संसद' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने भी कार्रवाई की। प्रधानमंत्री मोदी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और विद्यार्थियों का एक वर्ष खराब न हो, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर 22 लाख छात्रों की परीक्षाएं कराई गईं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। डिंपल यादव ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। वह हाल ही में CJP के 'संसद चलो' मार्च में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। संसद से जंतर-मंतर तक मार्च में हुईं शामिल डिंपल यादव ने समाजवादी पार्टी के अन्य सांसदों के साथ संसद परिसर से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई। डिंपल यादव ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने और सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की। सोनम वांगचुक मामले पर भी उठाए सवाल इससे पहले डिंपल यादव ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा था कि लोकतंत्र में लोगों की आवाज सुनना जरूरी है। सपा में बढ़ रही है डिंपल यादव की सक्रिय भूमिका राजनीतिक रूप से डिंपल यादव की सक्रियता पिछले कुछ समय में बढ़ी है। वह समाजवादी पार्टी की प्रमुख महिला चेहरों में शामिल हैं और वर्तमान में मैनपुरी लोकसभा सीट से सांसद हैं। संसद में भी वह शिक्षा, महिला मुद्दों और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने नीट पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को सुनने के बजाय उनके विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है। सोनिया गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती समस्याएं और जवाबदेही की कमी युवाओं में निराशा पैदा कर रही है। 'सरकार का रवैया अहंकार भरा', छात्रों के समर्थन में उतरीं सोनिया गांधी सोनिया गांधी ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ संवाद होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें विरोधी नजरिए से देखा जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और भविष्य को लेकर चिंता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, संस्थागत जवाबदेही और युवाओं की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करने की मांग की। पेपर लीक मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने सोनिया गांधी के बयान के बाद पेपर लीक मामले पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। जहां विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार तथा CJP (Cockroach Janta Party) के प्रतिनिधियों के बीच आज दोपहर 12:30 बजे नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया में अहम बैठक प्रस्तावित है। दोनों पक्षों के बीच यह पहली औपचारिक वार्ता होगी, जिसमें छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांग पर तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमति दी है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगों पर होगी चर्चा CJP ने स्पष्ट किया है कि बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह वार्ता में शामिल हो सकते हैं, जबकि CJP की ओर से मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। बातचीत के नतीजों पर टिकी देशभर की नजर बैठक ऐसे समय हो रही है जब देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था, जिससे संवाद का रास्ता खुला। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संविधान क्लब में होने वाली यह वार्ता आंदोलन के समाधान की दिशा में कोई ठोस परिणाम निकाल पाती है या नहीं।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता राजकुमार राव अपने एक पुराने राजनीतिक गाने 'मोदी है तो मुमकिन है' को लेकर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, NEET और छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उन्हें पुराने गाने में शामिल होने को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में राजकुमार राव ने कहा कि लोग किसी व्यक्ति की परिस्थितियों और उस पर पड़ने वाले दबाव को पूरी तरह नहीं जानते। NEET प्रदर्शन पर पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद राजकुमार राव ने हाल ही में छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि छात्रों की आवाज को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए और उनकी परेशानियों को गंभीरता से समझना जरूरी है। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने राजनीतिक गाने को लेकर उन्हें निशाने पर लिया। यूजर के सवाल पर दिया जवाब एक यूजर ने राजकुमार राव से सवाल किया कि उन्होंने उस गाने में काम करके अपना सम्मान खो दिया है। इस पर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा कि लोग यह नहीं समझ सकते कि किसी व्यक्ति पर किस तरह का दबाव हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन लोग उनके नजरिए को समझेंगे और उनका सम्मान वापस करेंगे। दबाव किस तरह का था, यह साफ नहीं किया राजकुमार राव ने अपने जवाब में "दबाव" का जिक्र जरूर किया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह दबाव किसकी ओर से था या किस परिस्थिति में था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गाने को लेकर पहले भी हुई थी चर्चा 'मोदी है तो मुमकिन है' गाने में राजकुमार राव के साथ कुछ अन्य कलाकारों के शामिल होने को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। गाना रिलीज होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज राजकुमार राव के ताजा बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनसे पुराने गाने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। फिलहाल अभिनेता का बयान मनोरंजन जगत के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी विषय बन गया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अग्निवीर की वर्दी पहने कुछ लोग छात्रों के समर्थन में बयान देते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्निवीर आंदोलन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। क्या है वायरल दावा? इंस्टाग्राम पर 'Breakingsatya' नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग अग्निवीर जैसी वर्दी पहने दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। वहीं दूसरा व्यक्ति कहता है कि अग्निवीरों की नई बैच आने के बाद स्थिति बदल जाएगी और दिल्ली पुलिस को जवाब मिलेगा। वीडियो में मौजूद लोगों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए हैं, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? वायरल वीडियो की जांच में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली। भारतीय सेना की ओर से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। किसी प्रमुख समाचार एजेंसी या विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा अप्रमाणित है और वीडियो भ्रामक या फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ वीडियो यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। हाल के दिनों में संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
Naseeruddin Shah on NEET Protest: बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार की कार्यशैली की तीखी आलोचना की है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिक्षा व्यवस्था, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कई विवादित बयान दिए। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों का खुलकर समर्थन भी किया। छात्रों के आंदोलन पर क्या बोले नसीरुद्दीन शाह? नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि NEET-UG 2026 पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं और उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं। उनके अनुसार यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय की मांग को लेकर है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का गुस्सा वास्तविक है और सरकार को उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी पर साधा निशाना इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री के बयानों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि उनके मुताबिक शिक्षा और छात्रों की समस्याओं को लेकर सरकार का रवैया संवेदनशील नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से बचती है और छात्रों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता अभिनेता ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। उनका दावा है कि छात्रों को बेहतर और वैज्ञानिक सोच पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार देश के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए और उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर क्या कहा? शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि छात्र जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनके अनुसार सरकार को आंदोलन को नजरअंदाज करने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। विवाद बढ़ने की संभावना नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे राजनीतिक टिप्पणी मानकर आलोचना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।
Danish Kaneria on NEET Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया की टिप्पणी विवादों में आ गई है। कनेरिया ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर अपनी राय व्यक्त की, जिसके बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। क्या कहा दानिश कनेरिया ने? पूर्व पाकिस्तानी स्पिनर दानिश कनेरिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें भारत में होने वाले कई विरोध प्रदर्शन एक जैसे लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शनों में नारेबाजी और अपशब्द अधिक होते हैं, जबकि समाधान और सार्थक चर्चा कम दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मुद्दे पर तथ्य सामने आने से पहले विरोध शुरू हो जाता है और इस तरह का माहौल देश की प्रगति के लिए उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया कनेरिया के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर किसी विदेशी नागरिक को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, जबकि कुछ ने उनके क्रिकेट करियर और विवादों का भी जिक्र किया। कौन हैं दानिश कनेरिया? दानिश कनेरिया पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर हैं। उन्होंने वर्ष 2000 से 2010 के बीच पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। करियर की प्रमुख बातें: 61 टेस्ट मैच 261 टेस्ट विकेट पाकिस्तान के सबसे सफल टेस्ट स्पिनरों में शामिल हालांकि, वर्ष 2012 में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में उन्हें आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। बाद में उन्होंने फिक्सिंग में शामिल होने की बात स्वीकार भी की थी। शाहिद अफरीदी पर लगाए थे गंभीर आरोप दानिश कनेरिया पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान टीम के दौरान उनके साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव किया गया। कनेरिया ने पूर्व कप्तान Shahid Afridi पर यह आरोप भी लगाया था कि वे उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालते थे और उनके साथ भोजन नहीं करते थे। NEET प्रदर्शन क्यों हो रहा है? दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों और सरकार के बीच भी बयानबाजी जारी है।
रांची। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं के बीच राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (RJDA) ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग का समर्थन किया है। एसोसिएशन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग RJDA ने कहा कि मेडिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह मेरिट आधारित, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना चाहिए। संगठन के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न केवल लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकती है। बल प्रयोग की निंदा, निष्पक्ष जांच की मांग एसोसिएशन ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और डॉक्टरों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग की निंदा की। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों और चिकित्सा समुदाय के सदस्यों के साथ हिंसा स्वीकार्य नहीं है। साथ ही घायल लोगों के समुचित इलाज और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई। सरकार से संवाद और कार्रवाई की अपील RJDA ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से प्रदर्शनकारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने तथा NEET से जुड़े आरोपों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। न्याय और शैक्षणिक ईमानदारी के प्रति प्रतिबद्धता अपने बयान में एसोसिएशन ने न्याय, शैक्षणिक ईमानदारी और मेडिकल समुदाय की गरिमा व सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।
दिल्ली में छात्रों के मुद्दे और कथित नीट धांधली को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शन स्थल पर धक्का-मुक्की और नारेबाजी का माहौल बन गया। PM आवास के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के 30 से अधिक सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर सड़क पर बैठ गए। उनके साथ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और कई अन्य नेता भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस से धक्का-मुक्की, राहुल के चेहरे पर चोट प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेताओं को हटाने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया। इस दौरान राहुल गांधी और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। घटनास्थल की तस्वीरों में राहुल गांधी के चेहरे पर चोट के निशान भी दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बस के जरिए वहां से हटाया। प्रियंका गांधी को अलग ले गई पुलिस महिला पुलिसकर्मियों ने प्रियंका गांधी वाड्रा को भी हिरासत में लिया। उन्हें राहुल गांधी से अलग मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। प्रियंका गांधी ने हिरासत के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। विपक्ष की क्या थी मांग? विपक्षी दलों की मांग थी कि: संसद में नीट परीक्षा में कथित धांधली पर चर्चा कराई जाए। 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की जांच हो। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं। हिरासत के बाद क्या है नियम? संसदीय परंपराओं के अनुसार, यदि किसी सांसद को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तो संबंधित एजेंसी को इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देना आवश्यक होता है। प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ किया गया व्यवहार पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य है। देर रात हुई रिहाई राहुल गांधी को हिरासत में लेने के बाद उत्तर दिल्ली स्थित छत्रसाल स्टेडियम, जिसे अस्थायी हिरासत केंद्र बनाया गया था, ले जाया गया। करीब तीन घंटे बाद रात लगभग 10 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया। वहीं, प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने में रखा गया, जहां उनसे मिलने सोनिया गांधी भी पहुंचीं। इसके बाद रात करीब 9:45 बजे प्रियंका गांधी को भी रिहा कर दिया गया। क्या सांसदों को गिरफ्तारी से छूट मिलती है? सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक हो, तो पुलिस किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है। सांसद होने के कारण किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी या हिरासत से स्वतः छूट नहीं मिलती। छात्रों के मुद्दे पर हुए इस प्रदर्शन के बाद राजधानी दिल्ली का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
Naseeruddin Shah on Jantar Mantar Protest: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट और लाठीचार्ज को लेकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताया और हिंसा की आलोचना की। वीडियो में वे भावुक भी नजर आए और कहा कि छात्रों के साथ हो रहे व्यवहार से उन्हें गहरा दुख और गुस्सा है। इंस्टाग्राम वीडियो में क्या बोले नसीरुद्दीन शाह? 76 वर्षीय अभिनेता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पूरी सहानुभूति छात्रों के साथ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय जीवन में विद्यार्थियों से बहुत कुछ सीखा है और वे हर शिक्षक दिवस पर उन्हें सम्मानपूर्वक याद करते हैं। उन्होंने छात्रों से हिम्मत न हारने की अपील करते हुए कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा है। हिंसा की आलोचना अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और किसी भी लोकतांत्रिक समाज में असहमति की आवाज को हिंसा से दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसे लोगों को अपने कर्मों के परिणामों के बारे में भी सोचना चाहिए। वायरल वीडियो पर भी हुई चर्चा सोशल मीडिया पर इससे पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद थे। हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो मुंबई में आयोजित एक स्क्रीनिंग कार्यक्रम का था और उसका जंतर-मंतर के प्रदर्शन से संबंध नहीं था। विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ा NEET पेपर लीक मामले से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब कई शहरों तक फैल चुका है। दिल्ली के बाद मुंबई में भी प्रदर्शन हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने कुछ दिनों के लिए पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है। कई फिल्मी हस्तियों ने भी जताया समर्थन छात्रों के समर्थन में कई फिल्मी हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है। इनमें प्रकाश राज, अनुराग कश्यप, शबाना आजमी, विशाल ददलानी, अतुल कुलकर्णी, रितेश देशमुख, सोनाक्षी सिन्हा, दिलजीत दोसांझ, वीर दास, भूमि पेडनेकर, सोनू सूद, पूजा भट्ट, सोहा अली खान, हुमा कुरैशी और अन्य कलाकारों के नाम शामिल हैं।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। जंतर-मंतर पहुंचे केजरीवाल ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई गलत है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। केजरीवाल ने कहा, "मोदी जी के अपने बच्चे नहीं हैं, इसलिए वह बच्चों का दर्द नहीं समझते। ये सभी हमारे बच्चे हैं। बच्चों को पीटना सही नहीं है।" छात्रों से बोले- डटे रहो, जीत आपकी होगी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि वे डटे रहें। दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह को भी जनता के सामने झुकना पड़ता है।" शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की तीन प्रमुख मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। देश में पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली लागू हो। पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। हिरासत में लिए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद की मांग केजरीवाल ने मंदिर मार्ग और संसद मार्ग थाने का दौरा करने के बाद कहा कि हिरासत में लिए गए छात्रों को लंबे समय से बैठाकर रखा गया है। उन्होंने नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को पत्र लिखकर मांग की कि प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर की प्रतियां और हिरासत में लिए गए लोगों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए, ताकि छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके। AAP ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों को लेकर चिंता जताते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश के भविष्य के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बीच आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिए लापता छात्रों का पता लगाने और घायलों तक चिकित्सीय सहायता पहुंचाने में मदद की जाएगी। छात्रों के मुद्दे पर तेज हुई सियासत छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।