पटना। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला पत्रकार ने उनसे शादी को लेकर सवाल पूछा। सवाल सुनते ही निशांत कुमार मुस्कुरा दिए, लेकिन बिना कोई जवाब दिए आगे बढ़ गए। उनका यही रिएक्शन अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम के दौरान पूछा गया निजी सवाल गुरुवार को निशांत कुमार आईजीआईएमएस में कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक महिला पत्रकार ने कहा कि वह ऐसा सवाल पूछना चाहती हैं जो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करेगा। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या मार्च महीने में उनकी शादी होने वाली है। मुस्कुराए, लेकिन नहीं दिया कोई जवाब शादी से जुड़ा सवाल सुनते ही स्वास्थ्य मंत्री मुस्कुराए और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से आगे बढ़ गए। उनके इस अंदाज पर मौके पर मौजूद अधिकारी और पत्रकार भी मुस्कुरा उठे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। मार्च 2026 में रखी थी सक्रिय राजनीति में कदम निशांत कुमार, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश Kumar के बेटे हैं। लंबे समय तक राजनीति से दूर रहने के बाद उन्होंने मार्च 2026 में जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया। मई 2026 में बने स्वास्थ्य मंत्री 7 मई 2026 को बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। उस समय उनके उपमुख्यमंत्री बनने की भी चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में उन्होंने यह पद नहीं लिया। वर्तमान में वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। शादी को लेकर लगती रही हैं अटकलें 45 वर्षीय निशांत कुमार अब तक अविवाहित हैं। इसी वजह से समय-समय पर उनकी शादी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि आईजीआईएमएस में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। केवल उनकी मुस्कान ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
पटना, एजेंसियां। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अपने जन्मदिन के अवसर पर सोमवार को पिता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पटना स्थित महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद वह पहली बार बिहार विधान परिषद पहुंचे, जहां मानसून सत्र के पहले दिन उन्होंने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। मंत्री बनने के बाद यह उनका पहला विधानसभा/विधान परिषद सत्र है, इसलिए उनके राजनीतिक सफर की यह महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। निशांत कुमार ने कहा सदन पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा कि वह जनता के हित से जुड़े हर मुद्दे को पूरी गंभीरता के साथ सदन में उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, "आज मेरा सदन में पहला दिन है। जो बात जनता के हित में होगी, उसे सदन में रखने की कोशिश करूंगा। पिछले 20 वर्षों में मेरे पिताजी ने बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा।" उन्होंने बताया कि विपक्ष के कई नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, जिसके लिए उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया। स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि विभाग लगातार जनता के लिए बेहतर सेवाएं देने की दिशा में काम कर रहा है और आगे भी स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार विकास की गति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। बिहार विधान परिषद वहीं, बिहार विधान परिषद में माले की सदस्य शशि यादव ने निशांत कुमार की सादगी और व्यवहार की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके भीतर जो विनम्रता और अच्छे संस्कार दिखाई देते हैं, वह उनकी मां से मिले हैं। शशि यादव ने उम्मीद जताई कि निशांत कुमार आगे भी इसी सरलता और सकारात्मक सोच के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे तथा अपने माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों को अपने सार्वजनिक जीवन में कायम रखेंगे।
पटना, एजेंसियां। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल बुधवार शाम समाप्त हो गई। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के बाद डॉक्टरों ने काम पर लौटने का फैसला किया। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही अस्पताल की ओपीडी, वार्ड और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य होने लगी हैं। स्वास्थ्य सचिव के हस्तक्षेप से बनी सहमति हड़ताल खत्म कराने में बिहार के स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि की अहम भूमिका रही। उन्होंने जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर चर्चा की। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को उचित कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी। नर्सों के आरोपों के बाद बढ़ा था विवाद विवाद की शुरुआत एक वरिष्ठ स्टाफ नर्स के पति की मौत के बाद हुई थी। नर्सों ने इलाज में लापरवाही और जूनियर डॉक्टरों पर दुर्व्यवहार व मारपीट के आरोप लगाए थे। इसके बाद नर्सों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि जूनियर डॉक्टरों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर हड़ताल शुरू कर दी थी। जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित बिहार स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर PMCH प्रशासन ने नर्सों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को पूरे मामले की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर नर्सों की शिकायतों की जांच का फैसला लिया गया था, जिसके बाद नर्सों का विरोध भी समाप्त हो गया। ओपीडी और मरीज सेवाएं फिर हुईं सामान्य हड़ताल समाप्त होने के बाद PMCH में मरीजों का इलाज फिर से सामान्य रूप से शुरू हो गया है। ओपीडी, सामान्य वार्ड और अन्य सेवाएं बहाल होने से मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। अस्पताल प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे विवाद का समाधान हो जाएगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार मंगलवार को अचानक राजधानी स्थित एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल पहुंचे और अस्पताल की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना पहुंचे मंत्री ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों का दौरा किया, मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर इलाज एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कई व्यवस्थाओं में खामियां मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मरीजों से बातचीत कर जानी समस्याएं निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे संवाद किया। उन्होंने पूछा कि इलाज, दवाइयों और अन्य सुविधाओं को लेकर उन्हें किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं हो रही है। साथ ही मरीजों के परिजनों से भी अस्पताल की व्यवस्था और स्टाफ के व्यवहार के बारे में जानकारी ली। मंत्री ने अस्पताल के वार्ड, ओपीडी, प्रतीक्षालय और अन्य विभागों का भी निरीक्षण किया। सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर जताई नाराजगी निरीक्षण के दौरान अस्पताल में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियों की कमी और शौचालयों की खराब सफाई देखकर स्वास्थ्य मंत्री नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि मरीजों की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी क्यों की जा रही है। इसके अलावा उन्होंने अस्पताल में एमआरआई मशीन की कार्यशीलता, उसे संचालित करने के लिए तकनीशियन की उपलब्धता और आवश्यक दवाइयों के स्टॉक की भी जानकारी ली। सभी कमियों को जल्द दूर करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। लगातार कर रहे हैं अस्पतालों का निरीक्षण स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार हाल के दिनों में राज्य के सरकारी अस्पतालों का लगातार औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने पीएमसीएच का भी दौरा किया था, जहां अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई थी। उस दौरान प्राचार्य की अनुपस्थिति पर कार्रवाई भी की गई थी। मंत्री ने दोहराया कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज, स्वच्छ वातावरण और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पतालों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नियमित निगरानी जारी रहेगी।
पूर्व सांसद का बड़ा बयान-‘जनता खुश नहीं’, तेजस्वी पर भी साधा निशाना, युवा नेतृत्व की वकालत पटना: पटना समेत पूरे बिहार की राजनीति इन दिनों गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस फैसले पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे जनता की भावना के खिलाफ बताया है। ‘जनता खुश नहीं’, फैसले पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने साफ कहा कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाना जनता को स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, जिस चेहरे पर चुनाव लड़ा गया, अचानक उसका बदल जाना लोगों को निराश कर सकता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में बड़ा असर डालेगा और आने वाले समय में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बढ़ी चर्चा आनंद मोहन ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे भी उसी आधार पर निर्णय होना चाहिए था। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती नजर आ रही है। तेजस्वी यादव पर तंज राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले बयान पर भी आनंद मोहन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद तेजस्वी के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए, क्योंकि जनता ने उन्हें यही जिम्मेदारी दी है। निशांत कुमार की एंट्री पर जताया भरोसा राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत देते हुए आनंद मोहन ने निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार को अब युवा नेतृत्व की जरूरत है और निशांत के आने से राजनीति को नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है। बदलाव के दौर में बिहार की सियासत आनंद मोहन के इस बयान को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो राज्य की सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और उस पर उठ रहे सवालों के बीच बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा। नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है। दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति? यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।
जन सुराज अभियान के सूत्रधार Prashant Kishor ने बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए कहा कि अब तक बिहार से केवल युवाओं का पलायन होता था, लेकिन अब तो मुख्यमंत्री का भी पलायन होने लगा है। मंगलवार को सासाराम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा स्थिति और सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए। ‘सरकार के वादे पूरे नहीं हुए’ प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने अपराध पर नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर लगाम और पलायन रोकने जैसे कई बड़े वादे किए थे। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है कि ये समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाना पड़ रहा है। ‘अन्य राज्यों में 50 से ज्यादा बिहारियों की मौत’ पलायन के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष नवंबर के बाद से 50 से अधिक बिहारियों की मौत अन्य राज्यों में हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर लोग धर्म, जाति और पैसे के लालच में वोट देते रहेंगे, तो बिहार की स्थिति में सुधार मुश्किल है। चुनावी हार पर भी बोले प्रशांत किशोर प्रेस वार्ता में उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जाति, धर्म या पैसों के आधार पर राजनीति नहीं की और ईमानदारी से लोगों से बिहार के बच्चों के भविष्य के नाम पर वोट देने की अपील की थी, लेकिन जनता उनकी बात समझ नहीं पाई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बिहार में वास्तविक बदलाव नहीं होगा, तब तक जन सुराज आंदोलन अपनी कोशिश जारी रखेगा। ‘नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री नहीं रहने की बात सच हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह पाएंगे। उस समय लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन अब उनकी बात सही साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह लगातार यह कह रहे थे कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकें। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर क्या बोले मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar के राजनीति में आने की संभावना पर प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति में आने का अधिकार है और उनका स्वागत है। हालांकि उन्होंने परिवारवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई नेताओं ने अपने बच्चों के लिए सत्ता का रास्ता तैयार कर दिया है, जबकि आम जनता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतनी गंभीर नहीं दिखती। संगठन को मजबूत करने पर जोर प्रशांत किशोर ने बताया कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और नवनिर्माण के लक्ष्य के साथ जन सुराज अभियान आने वाले छह महीनों में अपनी गतिविधियों को फिर तेज करेगा। इसके लिए पहले संगठन को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के हर जिले में तीन दिनों का प्रवास करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव लेंगे।
बिहार की राजनीति में उस समय भावुक माहौल बन गया जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले पर पार्टी के भीतर चर्चा हुई। शुक्रवार शाम Janata Dal (United) की अहम बैठक के दौरान कई नेता और कार्यकर्ता भावुक हो गए। कुछ नेताओं की आंखों में आंसू भी आ गए, क्योंकि वे चाहते थे कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में पहले की तरह सक्रिय बने रहें। हालांकि मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राज्यसभा जाने से न तो पार्टी कमजोर होगी और न ही बिहार के विकास कार्यों पर कोई असर पड़ेगा। “मैं हूं न”, कहकर नेताओं को दिलाया भरोसा बैठक में जब कई नेताओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं तो नीतीश कुमार ने खुद स्थिति संभाली। उन्होंने सभी को आश्वस्त करते हुए कहा कि भले ही वे राज्यसभा जाएं, लेकिन बिहार और पार्टी के कामकाज पर उनकी नजर पहले की तरह बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दिल्ली और बिहार दोनों जगह सक्रिय रहेंगे और राज्य के विकास से जुड़े फैसलों पर लगातार निगरानी रखेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि बिहार के विकास की जो दिशा तय की गई है, उसे किसी भी हाल में रुकने नहीं दिया जाएगा। किसी दबाव में नहीं लिया फैसला बैठक के दौरान कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील भी की। लेकिन नीतीश कुमार ने साफ कहा कि राज्यसभा जाने का निर्णय उन्होंने पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है और इस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को मजबूत बनाए रखना और राज्य के विकास को आगे बढ़ाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जल्द राजनीति में आ सकते हैं निशांत कुमार बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया। कई विधायकों ने मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar को पार्टी में शामिल करने की मांग रखी। इसके बाद JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh (Lalan Singh) ने घोषणा की कि निशांत कुमार ने राजनीति में आने के लिए सहमति दे दी है और वे जल्द ही औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होंगे। पार्टी में अंतिम फैसला अब भी नीतीश का इस दौरान केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी में अंतिम फैसला आज भी नीतीश कुमार का ही होता है। उनके मुताबिक बिहार सरकार और JDU के भीतर कोई भी बड़ा निर्णय मुख्यमंत्री की सहमति के बिना नहीं लिया जाता। वहीं JDU नेता Neeraj Kumar ने बताया कि मंत्री Shravan Kumar ने बैठक में कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसके बाद नीतीश कुमार ने सभी को शांत करते हुए कहा – “मैं हूं न।” इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि JDU के भीतर नीतीश कुमार का प्रभाव और नेतृत्व अब भी उतना ही मजबूत है, और उनके फैसले पार्टी की दिशा तय करते हैं।
बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की अटकलें सामने आईं। इन खबरों के बाद उनकी पार्टी Janata Dal (United) के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी है। गुरुवार सुबह पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि नेतृत्व में बदलाव करना है तो जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव कराया जाए। उनका दावा है कि जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था, इसलिए वे अपना कार्यकाल पूरा करें। मंत्री पर हमला, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री आवास के पास माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच राज्य के मंत्री Surendra Mehta जब आवास परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उन पर कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई। मौके पर आईजी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि राज्य के डीजीपी भी मुख्यमंत्री आवास में मौजूद बताए गए। कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी जेडीयू नेता Rajiv Ranjan Patel के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन भरने जाते हैं तो वे उन्हें ऐसा करने से रोकने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है और वे चाहते हैं कि वे ही राज्य की कमान संभाले रखें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राजनीतिक फैसला लिया जाता है तो उसमें कार्यकर्ताओं की राय भी ली जानी चाहिए। उनका सुझाव था कि नीतीश कुमार की जगह किसी और को भेजना हो तो उनके बेटे Nishant Kumar को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर बदलाव नहीं होना चाहिए। पार्टी नेतृत्व का अलग रुख वहीं जेडीयू के एक अन्य नेता Sanjay Singh ने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार हैं और यदि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है तो कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राज्य की बड़ी आबादी चाहती है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें। बेटे की राजनीति में एंट्री की चर्चा इसी बीच यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं और पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। इस संभावना ने भी जेडीयू के अंदर राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से वे राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।