लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब फिर से भारतीय बाजार की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने न केवल इक्विटी बाजार में शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की, बल्कि डेट मार्केट में भी मजबूत निवेश जारी रखा। इसका नतीजा यह रहा कि जुलाई में सभी एसेट क्लास में कुल FPI निवेश बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ (लगभग 4.4 बिलियन डॉलर) पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे SBI Funds के IPO को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने एंकर और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) दोनों श्रेणियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चार महीने की बिकवाली के बाद बदला विदेशी निवेशकों का रुख मार्च से जून 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार भारी बिकवाली की थी। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम से बचने की रणनीति के चलते विदेशी फंड्स ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाली थी। हालांकि, जुलाई में तस्वीर बदलती दिखाई दी। 24 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹14,946 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार चार महीनों की बिकवाली के बाद निवेशकों के विश्वास में लौटती मजबूती का संकेत माना जा रहा है। जुलाई बना 2026 का सबसे मजबूत महीना डेट मार्केट में लगातार निवेश और इक्विटी में खरीदारी के चलते जुलाई विदेशी निवेश के लिहाज से इस वर्ष का सबसे बेहतर महीना बन गया। इससे पहले फरवरी 2026 में कुल FPI निवेश लगभग ₹37,804 करोड़ रहा था, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे फरवरी का रिकॉर्ड भी टूट गया। विश्लेषकों का मानना है कि SBI Funds IPO में विदेशी संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने इस बढ़त को और गति दी। शुरुआती महीनों में हुई थी भारी बिकवाली 2026 की शुरुआत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में चुनौतीपूर्ण रही। मार्च से जून तक लगातार चार महीनों में बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली गई। मासिक शुद्ध FPI इक्विटी निवेश इस प्रकार रहा: जनवरी: -₹35,962 करोड़ फरवरी: ₹22,615 करोड़ (शुद्ध निवेश) मार्च: -₹1,17,775 करोड़ अप्रैल: -₹60,847 करोड़ मई: -₹32,963 करोड़ जून: -₹49,340 करोड़ जुलाई (24 जुलाई तक): ₹14,946 करोड़ (शुद्ध निवेश) इन आंकड़ों से साफ है कि जुलाई में खरीदारी लौटने के बावजूद सालभर की भारी बिकवाली की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है। सालभर का घाटा अब भी बरकरार जुलाई में सुधार के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल वार्षिक निवेश अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। अब तक 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से लगभग ₹2.59 लाख करोड़ का शुद्ध विदेशी निवेश बाहर जा चुका है। वहीं सभी एसेट क्लास को मिलाकर भी कुल FPI निवेश लगभग ₹1.7 लाख करोड़ के नेट आउटफ्लो में है। हालांकि, डेट मार्केट अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जहां वर्ष 2026 में अब तक करीब 9.5 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। आगे क्या रहेगा निवेशकों का फोकस? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन जारी रखती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सकता है।
लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। सोमवार सुबह कारोबार की शुरुआत जोरदार तेजी के साथ हुई, जहां बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 23,900 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने पकड़ी रफ्तार सुबह लगभग 9:23 बजे बीएसई सेंसेक्स 565.08 अंक यानी 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,624.85 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 163.75 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,931.20 अंक पर पहुंच गया। यह तेजी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह शेयर बाजार लगातार पांचों कारोबारी दिनों में गिरावट दर्ज कर चुका था। ऐसे में सप्ताह की शुरुआत निवेशकों के लिए राहत भरी रही। सेंसेक्स के लगभग सभी शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के लगभग सभी प्रमुख शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा तेजी एविएशन कंपनी इंडिगो के शेयर में देखने को मिली, जिसमें 3 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इंफोसिस, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, इटरनल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, शुरुआती कारोबार में आईसीआईसीआई बैंक का शेयर हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। निफ्टी के सेक्टरों में भी रही हरियाली एनएसई पर निफ्टी 50 इंडेक्स में इंटरग्लोबल एविएशन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और इटरनल सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में सबसे मजबूत तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 1 प्रतिशत तक की मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, ऑयल एंड गैस सेक्टर में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त दर्ज की गई। रुपये में भी आई मजबूती शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 0.4 प्रतिशत मजबूत होकर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में जहां रुपया 96.5625 के स्तर पर बंद हुआ था, वहीं सोमवार सुबह यह 96.1475 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बढ़ा बाजार का भरोसा बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दो सप्ताह तक चली सैन्य कार्रवाई के बाद हमले रुकने से पश्चिम एशिया में तनाव कम हुआ है। इससे कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद बढ़ी और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.5 प्रतिशत गिरकर लगभग 92.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि पिछले सप्ताह यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है। निवेशकों के लिए राहत भरी शुरुआत लगातार पांच दिनों की गिरावट के बाद सोमवार की तेजी ने निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बहाल किया है। हालांकि, आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कॉरपोरेट नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
Share Market Opening: घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार चौथे कारोबारी दिन भी जारी रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई दिया। गुरुवार सुबह कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 350 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,900 के नीचे पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल सुबह 9:28 बजे तक: बीएसई सेंसेक्स 296.65 अंक (0.39%) गिरकर 76,458.40 पर कारोबार कर रहा था। एनएसई निफ्टी 50 69.15 अंक (0.29%) टूटकर 23,927.10 पर पहुंच गया। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.1% मजबूत होकर 96.49 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.5650 पर बंद हुआ था। सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: इंडिगो अल्ट्राटेक सीमेंट सन फार्मा एशियन पेंट्स भारती एयरटेल बजाज फिनसर्व पावरग्रिड इंफोसिस रिलायंस इंडस्ट्रीज महिंद्रा एंड महिंद्रा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: इटरनल टाटा स्टील अडानी पोर्ट्स बजाज फाइनेंस मारुति सुजुकी सेक्टोरल इंडेक्स का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप लगभग 0.54% फिसला। निफ्टी स्मॉलकैप करीब 0.75% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। सबसे कमजोर सेक्टर: निफ्टी फार्मा निफ्टी रियल्टी निफ्टी हेल्थकेयर बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर: निफ्टी एफएमसीजी निफ्टी ऑटो बाजार पर दबाव की वजह विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं।
Share Market News: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने निवेशकों के लिए एक नया और अनोखा इंडेक्स Nifty 500 Ahimsa Index लॉन्च किया है। यह भारत का पहला ऐसा इंडेक्स है, जिसका उद्देश्य एथिकल (नैतिक) और जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देना है। इस इंडेक्स में केवल उन कंपनियों को शामिल किया गया है, जो अपने कारोबार के दौरान जानबूझकर जानवरों को नुकसान नहीं पहुंचातीं और जिनकी कार्यप्रणाली अहिंसा के सिद्धांतों के अनुरूप मानी जाती है। क्या है Nifty 500 Ahimsa Index? NSE ने इस इंडेक्स को Ahimsagain Foundation के सहयोग से उसके Ahimsa Investment Movement (AIM) फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया है। यह फ्रेमवर्क कंपनियों का मूल्यांकन इन आधारों पर करता है: कंपनी के प्रोडक्ट्स दी जाने वाली सर्विस बिजनेस मॉडल संचालन की प्रक्रिया इन सभी पहलुओं को देखकर तय किया जाता है कि कंपनी अहिंसा और नैतिक कारोबारी सिद्धांतों के कितनी करीब है। निवेशकों को क्या होगा फायदा? Nifty 500 Ahimsa Index भविष्य में कई नए निवेश उत्पादों का आधार बनेगा। इसके आधार पर तैयार किए जा सकेंगे: Exchange Traded Funds (ETF) Index Funds अन्य थीम आधारित निवेश उत्पाद इससे उन निवेशकों को विकल्प मिलेगा जो ESG (Environmental, Social and Governance) और Ethical Investing में रुचि रखते हैं। किन कंपनियों को मिली जगह? NSE के अनुसार, इस इंडेक्स में कई प्रमुख सेक्टरों की कंपनियों को शामिल किया गया है, जैसे: आईटी और सॉफ्टवेयर ऑटोमोबाइल रियल एस्टेट अन्य गैर-विवादित सेक्टर इन कंपनियों का चयन AIM फ्रेमवर्क के तहत किया गया है। रिलायंस ग्रुप और बैंकिंग सेक्टर क्यों बाहर? NSE Indices की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार: रिलायंस ग्रुप की कोई भी कंपनी इस इंडेक्स में शामिल नहीं है। किसी भी बैंकिंग शेयर को भी इसमें जगह नहीं मिली है। हालांकि, एक्सचेंज ने इनके बाहर रहने का अलग से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। चयन AIM फ्रेमवर्क के निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया है। कैसे होता है कंपनियों का चयन? Ahimsagain Framework कंपनियों को तीन श्रेणियों में बांटता है: Green Band – अहिंसा के मानकों पर बेहतर प्रदर्शन Orange Band – मध्यम स्तर Red Band – निर्धारित मानकों पर कमजोर केवल Green Band में आने वाली कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया जाता है, जबकि Orange और Red श्रेणी की कंपनियां बाहर रहती हैं। क्या है Ahimsagain Foundation का उद्देश्य? Ahimsagain Foundation का कहना है कि इस पहल का मकसद निवेशकों की पूंजी को ऐसी कंपनियों की ओर आकर्षित करना है जो करुणा, दया और नैतिक कारोबारी मूल्यों को प्राथमिकता देती हैं। संस्था का मानना है कि नैतिक निवेश करना चाहने वाले निवेशकों के पास अब तक स्पष्ट विकल्पों की कमी थी और यह इंडेक्स उस कमी को पूरा करेगा।
मुंबई: शेयर बाजार में हाल ही में सूचीबद्ध हुई टेक्सटाइल कंपनी आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर और प्रति शेयर ₹10 के अंतिम लाभांश (डिविडेंड) पर विचार करने की घोषणा की है। इस खबर के बाद बाजार खुलते ही कंपनी का शेयर 20 प्रतिशत की तेजी के साथ अपर सर्किट पर पहुंच गया। कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 23 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है, जिसमें बोनस शेयर और डिविडेंड को मंजूरी देने पर विचार किया जाएगा। क्या है कंपनी की योजना? आस्था स्पिनटेक्स ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि बोर्ड की बैठक में दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा होगी। 1:1 बोनस शेयर जारी करने का प्रस्ताव प्रति इक्विटी शेयर ₹10 के अंतिम डिविडेंड पर विचार यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो निवेशकों को उनके पास मौजूद हर एक शेयर पर एक अतिरिक्त बोनस शेयर मिलेगा। बोनस शेयर का क्या होता है मतलब? बोनस शेयर में कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के मुफ्त शेयर देती है। यदि किसी निवेशक के पास 100 शेयर हैं और कंपनी 1:1 बोनस जारी करती है, तो उसे 100 अतिरिक्त शेयर मिलेंगे। यानी कुल शेयरों की संख्या 200 हो जाएगी। हालांकि बोनस शेयर जारी होने से कंपनी का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) नहीं बदलता, लेकिन शेयर की तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ती है और छोटे निवेशकों के लिए शेयर अधिक सुलभ हो जाते हैं। शेयर में आई जोरदार तेजी बोनस और डिविडेंड की खबर सामने आने के बाद निवेशकों ने इस शेयर में जोरदार खरीदारी की। सोमवार का बंद भाव: ₹108.20 मंगलवार का शुरुआती भाव: ₹116.00 अपर सर्किट: ₹129.80 एक दिन की तेजी: 20 प्रतिशत खुलते ही शेयर अपने ऊपरी सर्किट पर पहुंच गया और वहीं लॉक हो गया। आईपीओ के बाद कैसा रहा प्रदर्शन? आस्था स्पिनटेक्स का आईपीओ ₹136 प्रति शेयर के भाव पर आया था। आईपीओ मूल्य: ₹136 लिस्टिंग मूल्य: ₹130 लिस्टिंग: लगभग 4 प्रतिशत डिस्काउंट पर हालांकि शुरुआती प्रदर्शन कमजोर रहा, लेकिन बोनस और डिविडेंड की घोषणा की संभावना ने शेयर में नई जान फूंक दी। कंपनी ने हाल ही में किया बड़ा अधिग्रहण शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी ने फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण भी पूरा किया है। इस अधिग्रहण के बाद— वार्षिक स्पिनिंग क्षमता 7,700 मीट्रिक टन से बढ़कर 17,457 मीट्रिक टन हो गई। स्पिंडल क्षमता 25,920 से बढ़कर 61,824 हो गई। कंपनी का कहना है कि इससे टेक्सटाइल वैल्यू चेन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। प्रबंधन ने क्या कहा? कंपनी के प्रबंध निदेशक दिव्यांग जसवंत पटेल के अनुसार, आस्था स्पिनटेक्स लंबे समय से एक मजबूत और एकीकृत टेक्सटाइल कारोबार बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बोनस शेयर और डिविडेंड का प्रस्ताव शेयरधारकों के साथ कंपनी की सफलता साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नई दिल्ली: इस साल के सबसे बड़े आईपीओ एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की शेयर बाजार में बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग आखिरकार हो गई, लेकिन यह निवेशकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकी। ग्रे मार्केट में जहां शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं वास्तविक लिस्टिंग केवल 6 प्रतिशत से थोड़ा अधिक प्रीमियम पर हुई। इश्यू प्राइस ₹574 प्रति शेयर रखने वाली कंपनी के शेयर ने लिस्टिंग पर निवेशकों को प्रति शेयर केवल करीब ₹39 का लाभ दिया। एनएसई और बीएसई पर कैसी रही लिस्टिंग? बाजार में कमजोरी के बीच कंपनी के शेयर की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ हुई। एनएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹613.30 बीएसई पर लिस्टिंग मूल्य: ₹610.00 इश्यू प्राइस: ₹574 प्रति शेयर इस तरह एनएसई पर शेयर करीब 6.85 प्रतिशत और बीएसई पर 6.27 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुआ। ग्रे मार्केट की उम्मीदें टूटीं लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का प्रीमियम लगभग ₹97 प्रति शेयर चल रहा था। इसके आधार पर शेयर के करीब ₹671 पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग अनुमान से काफी कम रही और निवेशकों को अपेक्षा से कम मुनाफा मिला। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स कंपनी का ₹9,795.31 करोड़ का आईपीओ 14 जुलाई 2026 को खुला था और 16 जुलाई 2026 को बंद हुआ था। इस सार्वजनिक निर्गम को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला और यह कुल 41.66 गुना सब्सक्राइब हुआ। निवेशकों की श्रेणीवार मांग क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): 140.11 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 22.51 गुना रिटेल निवेशक: 3.60 गुना संस्थागत निवेशकों की ओर से सबसे अधिक रुचि देखने को मिली। कंपनी को नहीं मिला कोई नया पैसा यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) था। इसमें कंपनी के मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों— भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) अमुंडी ने कुल 17.10 करोड़ शेयर बेचे। चूंकि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल था, इसलिए इस आईपीओ से एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट को कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं हुई। भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल वर्ष 1992 में स्थापित एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, एसबीआई म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करती है। कंपनी के पास लगभग ₹16.32 लाख करोड़ की परिसंपत्तियां (Assets Under Management - AUM) हैं, जो भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एयूएम का लगभग 15.5 प्रतिशत है। यही वजह है कि इसे देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में गिना जाता है।
लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है और अब इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ पूरी कर ली है। उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की घटनाओं में प्रशासनिक लापरवाही या अन्य स्तर पर किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं। सूत्रों के अनुसार, विवेचना पूरी होने के बाद डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच के दौरान जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. अनिल मिश्रा के पास मंदिर के गणना कक्ष की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे चोरी की घटनाओं को रोकने में विफलता रही। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई। इस मामले में पहले ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का एक पत्र भी चर्चा में आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि चढ़ावे की गणना के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में बिना अनुमति बदलाव किया गया और आवश्यक हस्ताक्षर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस पूछताछ में क्या निकला ? पुलिस पूछताछ में छह आरोपियों ने कथित तौर पर चढ़ावा चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है, जबकि दो आरोपी स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। जांच के दौरान कुछ सोना-चांदी और नकदी भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही, मुख्य आरोपी बताए जा रहे राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू की संपत्तियों और उसके प्रभाव क्षेत्र की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली अधिक प्रभावी होती, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में एसआईटी अपनी रिपोर्ट संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत कर चुकी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 443 अंक फिसलकर 77,709 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंक टूटकर 24,239 पर आ गया। पूरे दिन के कारोबार में निवेशकों ने खासकर प्राइवेट बैंक, ऑटोमोबाइल और आईटी शेयरों में बिकवाली की, जबकि सरकारी बैंक और फार्मा सेक्टर के शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली। बाजार पर सबसे अधिक दबाव निजी बैंकिंग शेयरों से आया। पहली तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही। इसके साथ ही ऑटो और आईटी सेक्टर में भी मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेतों का भी घरेलू बाजार पर असर पड़ा। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी दर्ज की गई। वहीं, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचना, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इन परिस्थितियों में निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 964 अंक चढ़कर 78,151 पर और निफ्टी 261 अंक की बढ़त के साथ 24,334 पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को वैश्विक और घरेलू कारकों के दबाव ने बाजार की दिशा बदल दी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 606.04 अंक टूटकर 76,963.35 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 167 अंक लुढ़ककर 24,039 पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता ने बाजार पर दबाव बनाया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव रिटेल सेक्टर के शेयरों पर दिखा। Trent Ltd के शेयर पहली तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद 12 प्रतिशत से अधिक टूट गए। इसके अलावा कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा। एशियाई बाजारों और वॉल स्ट्रीट पर भी दबाव वैश्विक बाजारों में भी तनाव का असर देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 0.70 प्रतिशत गिर गया, जबकि अमेरिकी शेयर वायदा बाजार भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। डाऊ जोन्स फ्यूचर्स 135 अंक, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और नैस्डैक-100 फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत तक नीचे रहे। निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। क्रूड ऑयल और डॉलर में तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 74.57 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। घरेलू वायदा बाजार में भी कच्चे तेल की कीमत करीब 177 रुपये बढ़कर 6,991 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.18 प्रतिशत बढ़कर 101.13 पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर और महंगे तेल से रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में वैश्विक और भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। बुधवार की भारी गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी के दम पर बाजार में आंशिक रौनक लौटी। कारोबार के अंत में बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,741.82 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 80.75 अंक यानी 0.34 प्रतिशत चढ़कर 23,962.80 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद हरे निशान में बंद हुआ बाजार कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने शानदार तेजी दिखाई और एक समय 823 अंक तक उछलकर 77,326.65 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दिन के अंतिम चरण में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी बाजार बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। इससे एक दिन पहले अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सेंसेक्स 1,677 अंक और निफ्टी 516 अंक लुढ़क गया था, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, एटरनल और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त वाले रहे। दूसरी ओर, इंफोसिस, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक के शेयर दबाव में रहे और गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी लौटी, खासकर रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। एफआईआई खरीदारी और वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक दिन पहले 1,962.80 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली। वहीं, जापान के निक्केई, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और चीन के शंघाई कंपोजिट जैसे एशियाई बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने ब्रेंट क्रूड के दाम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों पर सतर्क नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की प्रक्रिया तेज हो गई है। बाजार नियामक SEBI के साथ आवश्यक मंजूरियों का अंतिम चरण चल रहा है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कंपनी जल्द ही अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर सकती है। निवेशकों को लंबे समय से IPO का इंतजार NSE का IPO भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। बड़ी संख्या में मौजूदा शेयरधारक और निवेशक लंबे समय से इसके बाजार में आने का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि IPO को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिल सकता है। SEBI की मंजूरी के बाद होगा अगला कदम सूत्रों के अनुसार, SEBI से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद NSE अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। कंपनी सभी नियामकीय शर्तों का पालन करते हुए जल्द IPO लॉन्च करने की दिशा में काम कर रही है। भारतीय शेयर बाजार के लिए होगा बड़ा इवेंट विशेषज्ञों का कहना है कि NSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग में से एक हो सकता है। इससे पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने और बाजार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत की। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,150 अंक के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी शेयरों में देखने को मिली, जबकि व्यापक बाजार (Broader Market) में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत सुबह करीब 9:40 बजे तक— बीएसई सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% की बढ़त के साथ 77,416.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 143.85 अंक यानी 0.60% चढ़कर 24,149.70 अंक पर पहुंच गया। वहीं, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। Infosys के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेंसेक्स के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा— HCL Technologies TCS Tech Mahindra के शेयरों में भी लगभग 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। आईटी शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार की धारणा को मजबूत किया। Adani Enterprises सहित कई दिग्गज शेयरों में बढ़त आईटी कंपनियों के अलावा Adani Enterprises सहित कई अन्य प्रमुख शेयरों में भी निवेशकों की अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Bajaj Finance के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह सेंसेक्स में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.3% मजबूत रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी लगभग 0.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो— निफ्टी आईटी लगभग 3% चढ़ा। निफ्टी रियल्टी में करीब 1% की तेजी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स भी लगभग 1% मजबूत हुआ। एनएसई पर कारोबार के दौरान लगभग— 1,818 शेयरों में तेजी, 586 शेयरों में गिरावट, जबकि 99 शेयर बिना किसी बदलाव के कारोबार करते नजर आए। यह आंकड़े बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत देते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.06 प्रतिशत गिरकर 70.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में जारी वार्ता से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य रूप से संचालित करने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही कारक आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आईपीओ बाजार में एक बार फिर निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिला है। राजस्थान के जयपुर स्थित हैंडक्राफ्टेड ज्वैलरी निर्माता Advit Jewels के शेयरों ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत करते हुए पहले ही दिन निवेशकों को करीब 36 फीसदी का मुनाफा दे दिया। कंपनी के शेयर बुधवार को BSE और NSE पर अपने इश्यू प्राइस से काफी ऊपर सूचीबद्ध हुए, जिससे आईपीओ में निवेश करने वाले शेयरधारकों की अच्छी कमाई हुई। किस भाव पर हुई लिस्टिंग? NSE पर Advit Jewels का शेयर ₹188.90 प्रति शेयर पर सूचीबद्ध हुआ। कंपनी का इश्यू प्राइस ₹138 था, यानी शेयर ने लगभग 36.8% प्रीमियम के साथ बाजार में एंट्री की। वहीं BSE पर शेयर ₹187 प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 35.5% की बढ़त दर्शाता है। ग्रे मार्केट के अनुमान पर खरी उतरी लिस्टिंग शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट की उम्मीदों के अनुरूप रही। लिस्टिंग से पहले कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब ₹50 चल रहा था, जिससे संकेत मिल रहे थे कि शेयर लगभग 36% प्रीमियम पर सूचीबद्ध हो सकता है। वास्तविक लिस्टिंग भी लगभग इसी स्तर पर रही। आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स Advit Jewels के आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। आंकड़ों के अनुसार, यह इश्यू कुल मिलाकर 212.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। रिटेल निवेशक श्रेणी: 95.30 गुना गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 536.38 गुना इतनी मजबूत सब्सक्रिप्शन ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि शेयर की लिस्टिंग दमदार हो सकती है। कंपनी जुटाई गई राशि का क्या करेगी? यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसमें 1.20 करोड़ इक्विटी शेयर जारी किए गए। इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का कोई हिस्सा शामिल नहीं था। कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से जुटाई गई पूंजी का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाएगा— वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने के लिए मौजूदा कर्ज का भुगतान सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए निवेशकों के लिए क्या संकेत? Advit Jewels की मजबूत लिस्टिंग एक बार फिर यह दिखाती है कि जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल और आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिलता है, वे लिस्टिंग के दिन बेहतर रिटर्न दे सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि केवल लिस्टिंग गेन के आधार पर निवेश का निर्णय लेने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करें।
Turtlemint Fintech IPO: इंश्योरटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 19 जून 2026 से आम निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने इस सार्वजनिक निर्गम का आकार 883 करोड़ रुपये रखा है और इसके लिए प्रति शेयर 144 रुपये से 152 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया 18 जून को शुरू हो चुकी है। ₹883 करोड़ का है आईपीओ टर्टलमिंट फिनटेक इस आईपीओ के जरिए कुल 883 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें: 660.72 करोड़ रुपये के नए शेयर (Fresh Issue) जारी किए जाएंगे। 221.95 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड 152 रुपये के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन करीब 4,500 करोड़ रुपये आंका गया है। कब तक लगा सकेंगे बोली? रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू: ओपनिंग डेट: 19 जून 2026 क्लोजिंग डेट: 23 जून 2026 तक खुला रहेगा। वहीं एंकर निवेशकों ने 18 जून को ही इसमें निवेश के लिए बोली लगाई। न्यूनतम कितना निवेश करना होगा? कंपनी ने आईपीओ का लॉट साइज 98 शेयर तय किया है। एक शेयर का अधिकतम मूल्य: ₹152 एक लॉट का निवेश: ₹14,896 निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा, जबकि इसके बाद उसी के गुणक में अतिरिक्त बोली लगाई जा सकेगी। किस वर्ग के लिए कितना आरक्षण? इश्यू में विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए आरक्षण इस प्रकार है: 75% – क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) 15% – नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) 10% – रिटेल निवेशक ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल? ग्रे मार्केट में फिलहाल टर्टलमिंट आईपीओ का प्रीमियम लगभग 1.32% बताया जा रहा है। मौजूदा संकेतों के अनुसार, ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर शेयर में लगभग ₹2 प्रति शेयर की संभावित लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, जीएमपी समय के साथ बदल सकता है और इसे निवेश का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। महत्वपूर्ण तारीखें इवेंट तारीख एंकर बुक ओपन 18 जून 2026 आईपीओ ओपन 19 जून 2026 आईपीओ क्लोज 23 जून 2026 अलॉटमेंट 24 जून 2026 रिफंड प्रक्रिया 25 जून 2026 डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट 25 जून 2026 लिस्टिंग 29 जून 2026 क्या काम करती है Turtlemint? टर्टलमिंट एक टेक्नोलॉजी-आधारित इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो ग्राहकों, इंश्योरेंस कंपनियों और डिजिटल पार्टनर्स को एक मंच पर जोड़ता है। 30 सितंबर 2025 तक: कंपनी के पास 6 लाख से अधिक डिजिटल पार्टनर्स थे। इनमें करीब 4.85 लाख PoSPs (Point of Sales Persons) शामिल थे। अप्रैल 2022 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने 1.97 करोड़ इंश्योरेंस पॉलिसियों के वितरण में मदद की।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 784.77 अंक यानी 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,458.57 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 234.80 अंक यानी 1 प्रतिशत गिरकर 23,131.90 अंक पर पहुंच गया। निवेशकों को ₹5 लाख करोड़ का झटका बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में सेंसेक्स के अधिकांश शेयर दबाव में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट एयरलाइन कंपनी इंडिगो के शेयर में दर्ज की गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टीसीएस, बीईएल और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी भारी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.51 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 1.52 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी हड़कंप देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का बाजार 9 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिसके बाद कुछ समय के लिए कारोबार रोकना पड़ा। जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत लुढ़क गया। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए। क्यों टूटा शेयर बाजार? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है। ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति प्रयासों को भी झटका लगा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 3.37 प्रतिशत बढ़कर 96.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म Emkay Global Financial Services ने Bajaj Finance के शेयर पर ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखते हुए ₹950 का टारगेट प्राइस तय किया है। 30 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कंपनी ने तिमाही नतीजों को मजबूत बताया, लेकिन वैल्यूएशन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर बजाज फाइनेंस ने इस तिमाही में ग्रोथ, प्रॉफिटेबिलिटी और क्रेडिट कॉस्ट तीनों मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स): ₹54.6 अरब यह आंकड़ा ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर और बाजार के अनुमान के करीब रहा क्रेडिट कॉस्ट घटकर 1.6% पर आ गई, जो मुख्य वजह रही कंपनी प्रबंधन का मानना है कि 3MOB, 6MOB और 9MOB कोहोर्ट्स में सुधार के चलते क्रेडिट क्वालिटी आगे भी बेहतर हो सकती है। FY27 के लिए क्या है कंपनी का आउटलुक? कंपनी ने अगले वित्त वर्ष के लिए सकारात्मक गाइडेंस दी है: AUM (Assets Under Management) ग्रोथ: 22–24% PAT ग्रोथ: AUM से थोड़ा ज्यादा मार्जिन स्थिर रहने की उम्मीद ऑपरेटिंग खर्च (Opex/NTI) में 25–40 बेसिस पॉइंट सुधार क्रेडिट कॉस्ट गाइडेंस: 1.45–1.60% (पहले 1.65–1.75%) यह संकेत देता है कि कंपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और क्रेडिट क्वालिटी में सुधार के रास्ते पर है। EPS अनुमान में बढ़ोतरी Q4 प्रदर्शन और मैनेजमेंट के सकारात्मक संकेतों को ध्यान में रखते हुए, ब्रोकरेज ने FY27–FY28 के EPS (Earnings Per Share) अनुमान में 4–8% तक की बढ़ोतरी की है। फिर भी ‘Reduce’ रेटिंग क्यों? हालांकि कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं, लेकिन Emkay का मानना है कि: मौजूदा वैल्यूएशन पहले से ही काफी ऊंचा है भविष्य की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा शेयर प्राइस में शामिल हो चुका है ऐसे में निवेशकों को मुनाफावसूली (profit booking) पर विचार करना चाहिए
मुंबई: ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) के शेयर पर अपनी सकारात्मक राय दोहराते हुए ‘BUY’ रेटिंग बनाए रखी है। 16 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में फर्म ने इस स्टॉक के लिए ₹3000 का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। तिमाही प्रदर्शन रहा थोड़ा कमजोर रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC AMC की Q4FY26 तिमाही अपेक्षा से थोड़ी नरम रही। कंपनी की कोर इनकम ₹8.4 बिलियन रही, जो अनुमान से 2.3% कम है। इसका मुख्य कारण राजस्व में कमी बताया गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, चौथी तिमाही में कम दिनों (90 दिन) की वजह से आय पर असर पड़ा, जबकि पिछली तिमाही Q3FY26 में 92 दिन थे। GST और नए TER नियमों का असर कंपनी ने संकेत दिया है कि नए TER (Total Expense Ratio) दिशानिर्देशों के तहत GST का असर लगभग 3-4 बेसिस पॉइंट (bps) तक हो सकता है। हालांकि, इस अतिरिक्त लागत को डिस्ट्रीब्यूटर्स तक पास किया जा सकता है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। मजबूत इक्विटी प्रदर्शन से बढ़त HDFC AMC का इक्विटी सेगमेंट में प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। FY26 में नेट फ्लो में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी 15% रही, जो उद्योग में दूसरी सबसे बड़ी है। Q4FY26 में इक्विटी मार्केट शेयर 6 bps बढ़कर 13% हो गया। आगे की रणनीति और अनुमान ब्रोकरेज का मानना है कि HDFC AMC अपने मजबूत ब्रांड और ट्रैक रिकॉर्ड के चलते नए नियमों के प्रभाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है। रिपोर्ट में FY26 से FY28 के बीच इक्विटी यील्ड में हर साल 1 bps की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इसके बावजूद, कंपनी के मजबूत फंडामेंटल को देखते हुए वैल्यूएशन मल्टीपल को 36x (मार्च 2028 के अनुमानित EPS पर) रखा गया है और ₹3000 का टारगेट कायम रखा गया है।
वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों के बीच बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ। शुरुआती कारोबार में जोरदार उछाल बुधवार सुबह बाजार खुलते ही BSE Sensex 1,300 अंक से अधिक उछलकर 78,166.50 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 400 अंकों की तेजी के साथ 24,224.35 पर कारोबार करता दिखा। पिछले सत्र में आई गिरावट के बाद यह उछाल बाजार में मजबूत रिकवरी का संकेत देता है। निवेशकों को ₹9.25 लाख करोड़ का फायदा इस तेजी का सीधा असर बाजार पूंजीकरण पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹9.25 लाख करोड़ बढ़कर ₹457.73 लाख करोड़ हो गया। यह निवेशकों के लिए एक दिन में बड़ी ‘कमाई’ जैसा साबित हुआ। किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी? आज सेंसेक्स के सभी 30 शेयर हरे निशान में खुले। खासतौर पर: IndiGo में 4% की तेजी UltraTech Cement Asian Paints Larsen & Toubro Infosys State Bank of India इन सभी शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। रुपये में भी मजबूती भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 0.2% मजबूत होकर 93.17 पर खुला। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी कुछ हद तक लौट रहा है। तेजी की मुख्य वजह क्या? अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान ने बाजार को बड़ा ट्रिगर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के करीब है और समझौते की संभावना बढ़ रही है। इस बयान से निवेशकों में सकारात्मक भावना बनी और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी। सेक्टर और ब्रॉडर मार्केट का हाल निफ्टी मिडकैप: +2.09% निफ्टी स्मॉलकैप: +2.10% निफ्टी PSU बैंक और IT सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी फार्मा सेक्टर में कमजोरी ग्लोबल मार्केट का असर एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। S&P 500 और Nasdaq 100 दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
Ambedkar Jayanti के मौके पर आज भारतीय शेयर बाजार में कारोबार पूरी तरह बंद है। देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज Bombay Stock Exchange (BSE) और National Stock Exchange (NSE) में 14 अप्रैल को किसी भी सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं हो रही है। एक्सचेंज के अनुसार, इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स–सभी सेगमेंट आज बंद रहेंगे। हालांकि, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में आंशिक राहत है, जहां सुबह का सत्र (9:00 बजे से 5:00 बजे तक) बंद रहेगा, जबकि शाम का सत्र (5:00 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) खुला रहेगा। अब बाजार में सामान्य ट्रेडिंग 15 अप्रैल (बुधवार) से फिर शुरू होगी। वैश्विक संकेतों से बाजार पर दबाव छुट्टी से पहले 13 अप्रैल को भारतीय बाजार दबाव में रहा। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रहने से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। सेंसेक्स 702.68 अंक गिरकर 76,847.57 पर बंद हुआ निफ्टी 207.95 अंक गिरकर 23,842.65 पर बंद हुआ सेक्टरवार प्रदर्शन में पावर, डिफेंस और टेलीकॉम को छोड़कर अधिकांश सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। FMCG, ऑटो, IT, एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में रही हलचल निफ्टी में HDFC Life, Adani Enterprises, ICICI Bank और NTPC जैसे शेयरों में बढ़त देखने को मिली। वहीं Maruti Suzuki, Reliance Industries, Bajaj Finance और InterGlobe Aviation में गिरावट रही। ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेंचमार्क की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और करीब 0.5% की गिरावट के साथ बंद हुए। तकनीकी नजरिया: सपोर्ट-रेजिस्टेंस पर बाजार मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, हालिया गिरावट के बावजूद बाजार का शॉर्ट टर्म ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। निफ्टी का अहम सपोर्ट: 23,500 तत्काल रेजिस्टेंस: 24,100 विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी इस सपोर्ट स्तर को बनाए रखता है, तो निकट भविष्य में बाजार में फिर तेजी देखी जा सकती है। रुपये पर भी दबाव जारी इस बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ है और डॉलर के मुकाबले 65 पैसे गिरकर 93.38 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, USD/INR फिलहाल 92.70 के सपोर्ट और 93.65 के रेजिस्टेंस के बीच कारोबार कर रहा है। निवेशक अब महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।