पटना, एजेंसियां। बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने और लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए बिहार पुलिस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मिलकर एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत आम लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फर्जी कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग ठगी और साइबर अपराध से बचने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। लोगों को साइबर ठगी के तरीकों से किया जाएगा जागरूक अभियान के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि साइबर अपराधी किस तरह फर्जी लिंक, OTP, बैंक अधिकारी बनकर कॉल और सोशल मीडिया के जरिए ठगी करते हैं। पुलिस और बैंक की टीमें लोगों को सावधानी बरतने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत शिकायत करने के लिए प्रेरित करेंगी। बैंकिंग फ्रॉड रोकने पर विशेष ध्यान बिहार में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। SBI के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य बैंक ग्राहकों को सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए प्रशिक्षित करना है। लोगों को सलाह दी जाएगी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक डिटेल, ATM पिन, OTP या पासवर्ड साझा न करें। पुलिस और बैंक मिलकर करेंगे काम इस अभियान में बिहार पुलिस की साइबर सेल और SBI के अधिकारी मिलकर काम करेंगे। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूल, कॉलेज, ग्रामीण क्षेत्रों और आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। साइबर अपराध की शिकायत के लिए अपील बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर वे किसी ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में यह अभियान लोगों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने और साइबर अपराधों से बचने में मदद करेगा।
रांची। झारखंड के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने पशुपालन विभाग के खाते से करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले में मुख्य आरोपी और प्रधान लिपिक मुनिंद्र कुमार के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुनिंद्र ने सरकारी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। फर्जी आईडी और बिल बनाकर किया करोड़ों का गबन CID की जांच में सामने आया है कि मुनिंद्र कुमार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कांके स्थित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान में लेखापाल रहते हुए मूल वेतन संबंधी आंकड़ों में हेरफेर की। उसने पूर्व कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और यहां तक कि मृत कर्मचारियों के नाम पर भी फर्जी आईडी तैयार कीं। इन फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर नकली वेतन बिल बनाए गए और उन्हें कोषागार से स्वीकृत कराकर करोड़ों रुपये अपने तथा अपने करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा दिए। कई थानों के मामलों की जांच CID के जिम्मे यह मामला सबसे पहले रांची के कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था, जहां से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में रामगढ़ और खेलगांव थानों में दर्ज संबंधित मामलों को भी CID ने अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले का दायरा बड़ा है और इसकी तह तक पहुंचने के लिए अनुसंधान अभी जारी है। तकनीकी खामियों का उठाया फायदा चार्जशीट में CID ने अदालत को बताया है कि आरोपी ने 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी भुगतान प्रणाली से छेड़छाड़ की। बताया गया कि फ्रोजन सीमेन बैंक, होटवार में पदस्थापना के दौरान भी उसने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा 'यूजरनेम फीचर' को लेकर सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp को नोटिस जारी करने के बाद अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी नोटिस भेजकर उनके यूजरनेम सिस्टम और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों पर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर अपराधों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। Telegram और Signal से मांगा जवाब सरकार ने नोटिस में पूछा है कि दोनों प्लेटफॉर्म अपने यूजरनेम फीचर को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं और यह फीचर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Telegram को भेजे गए नोटिस में सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि Telegram और Signal पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है, जिससे बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी यूजर्स एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp को भी भेजा गया था नोटिस इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाए। सरकार की चिंता है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम आधारित पहचान से ऑनलाइन ठगी, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। आईटी नियमों के तहत मांगा जवाब सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि प्रस्तावित फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इससे साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। WhatsApp ने किया फीचर का बचाव WhatsApp ने सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूजरनेम फीचर में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी का दावा है कि इसमें फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं। भारत है सबसे बड़ा बाजार भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। देश में WhatsApp के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं, Telegram और Signal के भी लाखों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जामताड़ा, एजेंसियां। साइबर अपराध के लिए बदनाम जामताड़ा से ठगी का एक और नया तरीका सामने आया है। पुलिस ने तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कैशबैक ऑफर और फर्जी बैंक कॉल के जरिए लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे थे। आरोपियों के खुलासों ने साइबर ठगी के नए और खतरनाक तरीकों की जानकारी दी है। गिरिडीह के साइबर डीएसपी अमित रविदास ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर करमाटाड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी कर समीम अंसारी (24), कैफ अंसारी (19) और मुस्तकीम अंसारी (38) को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान उनके पास से छह मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। कैशबैक ऑफर के नाम पर ठगी पुलिस पूछताछ में सामने आया कि समीम और कैफ अंसारी ‘Ease My Deal’ नामक ऐप का इस्तेमाल कर लोगों के PhonePe खातों पर ₹1999 कैशबैक का आकर्षक संदेश भेजते थे। संदेश देखकर कई लोग इसे असली ऑफर समझकर लिंक पर क्लिक कर देते थे। जैसे ही पीड़ित लिंक पर क्लिक करता, उसके खाते से रकम ट्रांसफर हो जाती। ठग इस पैसे से ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड खरीदते और बाद में उन्हें कमीशन पर बेचकर नकदी हासिल करते थे। पुलिस का कहना है कि यह तरीका तेजी से लोगों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। फर्जी SBI अधिकारी बनकर करता था कॉल गिरफ्तार तीसरा आरोपी मुस्तकीम अंसारी खुद को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था। वह पीड़ितों को डराता था कि उनका क्रेडिट कार्ड जल्द बंद होने वाला है और उसे चालू रखने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद वह मोबाइल में एक APK फाइल डाउनलोड करवाता था। यह फाइल जासूसी सॉफ्टवेयर की तरह काम करती थी और इंस्टॉल होते ही कार्ड नंबर, ओटीपी तथा अन्य गोपनीय जानकारियां अपराधियों तक पहुंच जाती थीं। इसके बाद खाते से रकम निकाल ली जाती थी। पुराने नेटवर्क की तलाश में पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मुस्तकीम अंसारी पहले भी साइबर ठगी के मामलों में शामिल रह चुका है। पुलिस अब उसके पुराने नेटवर्क, सहयोगियों और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कैशबैक लिंक, अज्ञात ऐप या APK फाइल पर भरोसा न करें और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
डिजिटल दुनिया में साइबर हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं और अब एक नया खतरा सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बन गया है। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने “Kali365” नाम के एक खतरनाक फिशिंग प्लेटफॉर्म को लेकर चेतावनी जारी की है। यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से Microsoft 365 यूजर्स को निशाना बना रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह पारंपरिक मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) सुरक्षा को भी बायपास करने में सक्षम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने के लिए किसी व्यक्ति का साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ होना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह तैयार फिशिंग टूल्स के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। क्या है Kali365? Kali365 एक “फिशिंग-एज-ए-सर्विस” (PhaaS) प्लेटफॉर्म है, जिसे साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। यह सब्सक्रिप्शन आधारित मॉडल पर काम करता है और हमलावरों को फिशिंग अभियान चलाने के लिए तैयार टूल्स उपलब्ध कराता है। इस प्लेटफॉर्म में कई उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जैसे: एआई आधारित ईमेल टेम्पलेट्स ऑटोमेटेड फिशिंग कैंपेन रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम संभावित शिकारों की निगरानी इन सुविधाओं की मदद से साइबर हमले पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी और आसान हो गए हैं। कैसे काम करता है यह हमला? Kali365 पारंपरिक फिशिंग तकनीकों से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है। यूजर्स को ऐसा ईमेल भेजा जाता है जो किसी भरोसेमंद क्लाउड सर्विस या डॉक्यूमेंट शेयरिंग प्लेटफॉर्म जैसा दिखाई देता है। ईमेल में एक डिवाइस कोड दिया जाता है और यूजर को Microsoft लॉगिन पेज पर जाकर उसे दर्ज करने के लिए कहा जाता है। जब यूजर ऐसा करता है, तो वह अनजाने में हमलावर के डिवाइस को अपने अकाउंट तक पहुंच की अनुमति दे देता है। इसके बाद हमलावर OAuth टोकन हासिल कर लेते हैं और Outlook, Teams, OneDrive जैसी सेवाओं तक पहुंच बना सकते हैं, वह भी बिना दोबारा पासवर्ड या MFA की आवश्यकता के। MFA होने के बावजूद क्यों खतरनाक है यह हमला? आमतौर पर लोग मानते हैं कि मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन उनके अकाउंट को पूरी तरह सुरक्षित बना देता है, लेकिन Kali365 सीधे पासवर्ड चुराने की बजाय OAuth टोकन को निशाना बनाता है। इसी कारण कई मामलों में पासवर्ड बदलने के बाद भी हमलावर अकाउंट तक पहुंच बनाए रख सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे हमलों की पहचान करना पारंपरिक फिशिंग की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है। FBI ने यूजर्स को क्या सलाह दी? FBI ने Microsoft 365 उपयोगकर्ताओं और संगठनों को अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की समीक्षा करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सिफारिश की है: डिवाइस कोड आधारित ऑथेंटिकेशन को सीमित करें। Conditional Access Policy लागू करें। लॉगिन गतिविधियों की नियमित निगरानी करें। संदिग्ध ईमेल और अनजान डिवाइस लॉगिन पर नजर रखें। असामान्य अकाउंट गतिविधियों को तुरंत जांचें। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और नियमित सुरक्षा ऑडिट ही ऐसे हमलों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। साइबर अपराध का नया बिजनेस मॉडल बन रहा है PhaaS Kali365 का मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि साइबर अपराध अब एक संगठित उद्योग का रूप ले रहा है। “Phishing-as-a-Service” मॉडल के तहत जटिल हैकिंग टूल्स को आसान सब्सक्रिप्शन सेवाओं में बदला जा रहा है। इससे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी बड़े स्तर पर साइबर हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पहचान आधारित साइबर हमलों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे App को regularly update करें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।